अफ्रीका में भारत का गौरव! गुजरात के भाई-बहन ने केन्या पुलिस को कराया ऐतिहासिक योग, बना दिया नया विश्व कीर्तिमान

अफ्रीका में भारत का गौरव! गुजरात के भाई-बहन ने केन्या पुलिस को कराया ऐतिहासिक योग, बना दिया नया विश्व कीर्तिमान

जब पूरा भारत 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मना रहा था, उसी समय अफ्रीका की धरती पर भी भारतीय संस्कृति और योग की गूंज सुनाई दे रही थी। ह्रिम योगशाला, संतरामपुर की संस्थापक राजवी शैलेष मेहता (युवा योगिनी) एवं सह-संस्थापक राज शैलेष मेहता (युवा उद्यमी, संस्कृति प्रचारक एवं विश्व के सबसे युवा ऑटोमोबाइल कंपनी के संस्थापक) ने केन्या में विशाल योग सत्र आयोजित कर भारत का गौरव बढ़ाया।

 

योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में केन्या गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय डॉ. विलियम रूटो के नेतृत्व में केन्या पुलिस सेवा द्वारा प्रथम सत्र में लगभग 4000 पुलिस अधिकारियों को लगातार 72 मिनट तक योग कराया गया। इसके बाद दूसरे सत्र में 260 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (नैरोबी सिटी काउंटी अधिकारी) को 150 मिनट तक योगाभ्यास करवाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। इसके साथ ही योग के माध्यम से भारतीय परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर राज शैलेष मेहता ने भारतीय पारंपरिक परिधान धोती धारण कर भारतीय संस्कृति एवं वेशभूषा का भी प्रचार-प्रसार किया।

 

राजवी शैलेष मेहता और राज शैलेष मेहता सगे भाई-बहन हैं। दोनों मूल रूप से गुजरात के छोटे से कस्बे संतरामपुर के निवासी हैं। उच्य शिक्षा के लिए वे अहमदाबाद में बस गए, लेकिन अपनी भारतीय संस्कृति और योग की परंपरा को विश्वभर में पहुँचाने का संकल्प निरंतर निभा रहे हैं।

राज शैलेष मेहता ने बताया कि जैसा की आदरणीय मोदी जी ने लगातार 12 वर्षो से अधिक भारतवर्ष मे योगा के प्रति अलख जगाई उसी प्रकार हमने उन पुलिस अधिकारियों को योग कराया जो दिन-रात समाज की सुरक्षा के लिए अनेक मानसिक तनाव और चुनौतियों का सामना करते हैं। योग उनके मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से हमने अफ्रीका की धरती पर लगभग 3,27,000 मिनट के सामूहिक योग अभ्यास का यह ऐतिहासिक आयोजन किया, जिसमें सभी अधिकारी अपनी आधिकारिक यूनिफॉर्म में शामिल हुए। ओर इस तरीके के आयोजनो से दोनों देशो के मध्य रिश्ते ओर मजबूत होंगे ओर हमारा लक्ष्य है की वैश्विक स्तर पर रक्षा दलो को कुल 60 लाख मिनिट का योग समर्पित करना है। 

 

इस आयोजन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग की महत्ता को नई पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और “योग से विश्व कल्याण” के संदेश को भी पूरी दुनिया तक पहुँचाने का कार्य किया। भाई-बहन की इस उपलब्धि पर भारत और गुजरात के लोगों में गर्व और हर्ष का वातावरण है।

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

Drug Smuggler Virendra Singh Basoya

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने UAE से भगोड़े ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर बताया। ALSO READ: सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

 

अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और एक कठोर दृष्टिकोण के साथ उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नष्ट कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए, एनसीबी ने यूएई से भगोड़े ड्रग सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की है। 'ऊपर से नीचे' और 'नीचे से ऊपर' के दृष्टिकोण से अपराधी का पता लगाकर, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। ALSO READ: Census 2027: पहली बार जाति भी पूछेगी सरकार, बैंक अकाउंट से कोविड वैक्सीन तक होंगे ये 40 सवाल

कौन है ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया?

ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से दिल्ली लाया जा चुका है। वह दिल्ली, गुजरात और पंजाब से बरामद की गई 13 हजार करोड़ की ड्रग्स बरामदगी मामले में आरोपी है। उसे इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है। गिरफ्तारी से पहले ही बसोया दुबई भाग गया। इसके बाद, एनसीबी में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

 

वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया को भी पुलिस ने अक्टूबर 2024 में ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी कार से करीब 1.096 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी। वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी इस नेटवर्क में सामने आया है। वीरेंद्र को जून 2026 में इंटरपोल के नोटिस के आधार पर यूएई में गिरफ्तार किया गया था।

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन हुआ मजबूत, दिल्ली-NCR समेत इन 15 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, जानें अपने राज्य का हाल

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन हुआ मजबूत, दिल्ली-NCR समेत इन 15 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, जानें अपने राज्य का हाल

rain update 8 july

Weather update 14 August 2026: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह मेहरबान और आक्रामक नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (14 अगस्त 2026, शुक्रवार) उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में व्यापक से काफी व्यापक बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (Depression) के कारण मध्य और पूर्वी भारत में मानसून की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। कई इलाकों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और भीषण आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है।

दिल्ली-NCR में झमाझम, राजस्थान में आफत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में आज बादल छाए रहेंगे और कई दौर की तेज बारिश हो सकती है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 34°C और न्यूनतम 26-27°C के आसपास रहने का अनुमान है। 
 

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक और भारी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी में मानसून सक्रिय रहेगा। पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पहाड़ी राज्यों में लैंडस्लाइड का खतरा, रेड/ऑरेंज अलर्ट

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। प्रशासन ने पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslide) और नदियों में उफान की चेतावनी जारी की है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ में हो सकती है भारी बारिश

बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का सीधा असर मध्य भारत पर देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में मौसम का सबसे भीषण रूप देखने को मिल सकता है। राज्य में अति-भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया गया है। मध्य प्रदेश में भोपाल समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश जारी रहेगी, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में ओलावृष्टि 

बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल (गंगा के तटीय क्षेत्रों) और ओडिशा में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ-साथ कुछ जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना है। पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी मानसून के पूरी तरह सक्रिय रहने से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

 

कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। मुंबई में तापमान 30°C के आसपास रहेगा। तटीय कर्नाटक और केरल के कई जिलों में भारी बारिश को देखते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। तमिलनाडु में छिटपुट बारिश के आसार हैं।

हल्द्वानी में खरगे के कार्यक्रम के बाद मंच शुद्धिकरण पर बवाल, श्रीराम सेना ने दी सफाई

हल्द्वानी में खरगे के कार्यक्रम के बाद मंच शुद्धिकरण पर बवाल, श्रीराम सेना ने दी सफाई

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हल्दवानी में मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद मंच के शुद्धिकरण पर बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस की ओर से इसे वंचित विरोधी मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच इस मामले में मंच का शुद्धिकरण करने वाले श्रीराम सेना धर्मार्थ न्यास की भी सफाई सामने आई है। ALSO READ: खड़गे की रैली के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, नाराज कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

 

संगठन ने दावा किया कि मैदान में रैली के बाद गंदगी और पेशाब से भरी बोतलें भी मिली थी। मंच से हिंदू विरोधी नारे लगे थे। इसलिए कार्यक्रम के बाद शुद्धिकरण किया गया। इसमें दलित समुदाय से जुड़े लोग भी शामिल थे।

 

न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने कहा कि शुद्धिकरण का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। रामलीला मैदान में राजनीतिक कार्यक्रम के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं ने वहां सफाई की और इसके पश्चात यज्ञ का आयोजन किया।

 

शुद्धिकरण में शामिल अंकित पाल ने कहा कि वे स्वयं अनुसूचित जाति समाज से आते हैं और धार्मिक स्थल की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित यज्ञ में सहभागी बने। झूठ बोलकर कांग्रेस ने पूरे समाज का अपमान किया है।

 

राज्यसभा में क्या बोले थे खरगे?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, भाजपा के लोगों ने उस मंच को 'शुद्ध' करने के लिए वहां हवन किया। क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? ALSO READ: हल्द्वानी में मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के खरगे, राज्यसभा में बोले- Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो

 

उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष का नेता हूं। मेरी मांग है कि हल्द्वानी में जिन लोगों ने स्टेज का शुद्धिकरण किया, उन पर Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त केवल एक तिथि नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास, अमर बलिदानों और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। हर साल जब लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहराता है, तो वह केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का क्षण नहीं होता, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में आत्ममंथन करने का अवसर भी होता है। अमर शहीदों के सपनों का भारत केवल नारों से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा और आचरण से निर्मित होता है। आइए जानते हैं कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें अधिकार मांगने के साथ-साथ किन नागरिक कर्तव्यों का संकल्प लेने की आवश्यकता है।

 

1. आत्ममंथन और अतीत का स्मरण:

15 अगस्त केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और देशभक्ति के नारों का दिन नहीं है। यह वह अवसर है जब राष्ट्र को अपने अतीत के बलिदानों को स्मरण करते हुए वर्तमान का आत्ममंथन और भविष्य का संकल्प करना चाहिए। स्वतंत्रता हमें संघर्ष, त्याग और असंख्य बलिदानों के बाद मिली है। इसलिए यह सवाल आज भी प्रासंगिक है कि जिस भारत का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था, क्या हम उसके निर्माण की दिशा में उतनी ही ईमानदारी से आगे बढ़ रहे हैं?

 

2. अमर सेनानियों का आदर्श और राष्ट्रीय चरित्र

भगत सिंह का साहस, चंद्रशेखर आजाद का आत्मविश्वास, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का राष्ट्र-समर्पण, महात्मा गांधी का सत्य-अहिंसा का मार्ग और सरदार पटेल की राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता- केवल इतिहास के अध्याय नहीं हैं। वे स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय चरित्र की आधारशिलाएँ हैं। उनका सपना एक ऐसा भारत था जो:- 

  • राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो।
  • सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो।
  • आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।
  • नैतिक रूप से मजबूत और नागरिक चेतना से संपन्न हो।

 

3. अधिकार, कर्तव्य और नागरिक आचरण

आजादी का अर्थ केवल अधिकार प्राप्त करना नहीं है; लोकतंत्र अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी मांग करता है।

सरकारें नीतियाँ बना सकती हैं, योजनाएँ लागू कर सकती हैं और संस्थाएँ खड़ी कर सकती हैं, लेकिन राष्ट्र का वास्तविक चरित्र उसके नागरिकों के आचरण से तय होता है।

  • कानून का सम्मान
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा
  • करों का ईमानदार भुगतान
  • स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव
  • ये केवल मामूली बातें नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की बुनियादी शर्तें हैं।

 

4. युवा शक्ति और आधुनिक चुनौतियाँ

आज भारत परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में देश की युवा शक्ति निर्णायक भूमिका

A young person saluting the Indian flag in the picture.

निभा सकती है। तकनीक, शिक्षा, कौशल, विज्ञान, अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर हैं। हालाँकि, डिजिटल दुनिया के साथ कुछ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं:-

  • भ्रामक सूचनाएँ (Misinformation)
  • नशा और निराशा
  • सामाजिक विभाजन
  • इसलिए युवा ऊर्जा को केवल रोजगार की तलाश तक सीमित रखने के बजाय, उसे राष्ट्र-निर्माण की सकारात्मक शक्ति बनाना होगा।

5. स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और विविधता में एकता

स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को केवल सरकारी अभियानों के रूप में देखना उचित नहीं है। सड़क पर कचरा न डालना, जल-स्रोतों को प्रदूषण से बचाना, स्थानीय उत्पादों एवं उद्यमियों को प्रोत्साहित करना तथा संसाधनों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, श्रम और क्षमता पर विश्वास करना है।

 

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और एकता है। भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र की भिन्नताओं के बावजूद एक राष्ट्र के रूप में साथ खड़े रहना हमारी असाधारण उपलब्धि है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन वैमनस्य लोकतंत्र को कमजोर करता है। इसलिए संवाद, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को राष्ट्रीय जीवन का आधार बनाना होगा।

 

6. हर नागरिक की देशभक्ति

सीमा पर सैनिक देश की रक्षा करता है, लेकिन राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी सीमा के भीतर रहने वाले हर नागरिक की है। किसान, शिक्षक, वैज्ञानिक, श्रमिक, उद्यमी और कर्मचारी- हर व्यक्ति अपने कर्म से देश को मजबूत करता है। देशभक्ति केवल सीमा पर दिखाई देने वाली वीरता नहीं है, बल्कि अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाना भी देशभक्ति ही है।

 

7. निष्कर्ष और नागरिक संकल्प

इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें यह पूछने की जरूरत है कि “देश ने हमें क्या दिया?” से अधिक महत्वपूर्ण यह प्रश्न है कि “हमने देश को क्या दिया?”

स्वतंत्रता की सबसे बड़ी सार्थकता यही है कि हम अपने अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें। शहीदों के बलिदान का सच्चा सम्मान केवल स्मारकों पर पुष्प अर्पित करने से आगे बढ़कर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने में है।

 

आइए, इस 15 अगस्त को केवल उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक नागरिक संकल्प लें:

  • ईमानदार बनें और जिम्मेदार बनें।
  • स्वच्छ और संवेदनशील समाज बनाएँ।
  • भारत की एकता और गरिमा को सर्वोपरि रखें।

 

क्योंकि शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा। यही स्वतंत्रता का सम्मान है, यही सच्ची देशभक्ति है और यही नए भारत की ओर हमारा वास्तविक कदम है।

जय हिंद!

अहमदाबाद में जलभराव से परेशान नागरिकों के लिए राहत: अमित शाह के पत्र के बाद AMC एक्शन में, मास्टर प्लान तैयार

अहमदाबाद में जलभराव से परेशान नागरिकों के लिए राहत: अमित शाह के पत्र के बाद AMC एक्शन में, मास्टर प्लान तैयार

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अहमदाबाद शहर के कुछ क्षेत्रों में हर मानसून में पैदा होने वाली जलभराव की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा इसके स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। आंबली, बोपल, घुमा और शेला जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में बारिश के पानी के भराव से होने वाली परेशानियों का केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गंभीर संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर गुजरात के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नागरिकों को राहत दिलाने और स्थायी समाधान के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

 

 AMC द्वारा हाइड्रोलॉजिकल सर्वे और मास्टर प्लान की तैयारी

केंद्रीय गृहमंत्री के निर्देश मिलते ही अहमदाबाद नगर निगम (AMC) तुरंत एक्शन मोड में आ गया है। निगम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया गया है। इस सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर बारिश के पानी की त्वरित और उचित निकासी के लिए एक विशेष 'स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान' तैयार किया गया है, जिसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

 

ड्रेनेज नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

इस मास्टर प्लान के तहत वर्तमान ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता और कनेक्टिविटी का मूल्यांकन किया गया है। इसके अनुसार नया ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करने के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों की लाइनों को आपस में जोड़ने (इंटर-कनेक्शन) की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, बार-बार पानी भरने वाले 'वाटर-लॉगिंग स्पॉट्स' की पहचान कर उन्हें दूर करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। निचले इलाकों में लंबे समय तक पानी जमा न रहे और पानी का बहाव सुचारू रूप से बना रहे, इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित किया जाएगा।
 

गोता-गोधावी नहर, साबरमती नदी और स्थायी समाधान की उम्मीद

योजना के मुख्य भाग के रूप में बारिश के पानी को गोता-गोधावी नहर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, जबकि अन्य आवश्यक स्थानों से पानी के बहाव को साबरमती नदी तक पहुंचाने की योजना है। इन कदमों के लागू होने के बाद आंबली, बोपल, घुमा और शेला के निवासियों को मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब मास्टर प्लान के चरणबद्ध कार्यान्वयन पर नजर रखी जाएगी ताकि हर साल आने वाली इस मुसीबत का स्थायी समाधान हो सके।

रंग दे बसंती: युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से दिखाया नया उत्तर प्रदेश

रंग दे बसंती: युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से दिखाया नया उत्तर प्रदेश

कला एवं संस्कृति के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने वाले युवाओं का प्रदेशव्यापी अभियान ‘रंग दे बसंती’ दिन-प्रतिदिन नई ऊंचाइयां तय कर रहा है। अभियान के तहत गुरुवार को मुजफ्फरनगर में युवाओं ने समूह ने ‘बदलते उत्तर प्रदेश’ विषय को केंद्र में रखते हुए कॉमिक्स वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इन कॉमिक्स में युवाओं ने अराजकता के स्याह अंधेरे से निकल कर भयमुक्त और विकास उन्मुख उत्तर प्रदेश बनने की यात्रा उकेरने का प्रयास किया है।

 

पलायन से घर वापसी तक

इस कार्यक्रम में सम्मिलित युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से एक ऐसे काल्पनिक युवक की कहानी को प्रदर्शित किया, जो वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगों के चलते पलायन कर चुका था। लेकिन, प्रदेश में शासन व्यवस्था में परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था का राज और सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित होने पर वह युवक बदलाव का अहसास करता है और फिर घर वापसी भी करता है।

 

कागज पर उकेरी यूपी की स्याह यादें

कई युवाओं ने इस अवसर पर अपनी कल्पनाओं को कागज पर उकेरा। युवा कलाकारों ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले की भयाक्रांत व्यवस्था एवं युवाओं के भविष्य से होते खिलवाड़ को रेखांकित करने के साथ ही इसके बाद की बदली ठोस कानून व्यवस्था, भयमुक्त वातावरण, विकास उन्मुख कार्यक्रमों और युवाओं के लिए बनाई गई रोजगारपरक व्यवस्था को प्रदर्शित किया।

 

कैसे लौट रहे हैं प्रदेश में युवा

रंग दे बसंती के मंच पर युवाओं के इस समूह में शामिल रजत त्यागी ने अपनी कला का परिचय देते हुए प्रदेश में हुए सकारात्मक बदलाव का कॉमिक्स के माध्यम से संदेश दिया। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों के साथ ही उस समय अन्य स्थानों पर बिगड़ी कानून व्यवस्था को कॉमिक्स में रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताने का प्रयास किया कि पूर्व में पलायन कर चुके युवा किस तरह वर्तमान में फिर से प्रदेश का रुख कर रहे हैं।

 

लोकतांत्रिक तरीके से खोजें भविष्य का मार्ग

युवा नमन त्यागी ने प्रदेश की वर्तमान व्यवस्था को केंद्रित करते हुए युवाओं से अपील की कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने उज्जवल भविष्य के लिए सही मार्ग की तलाश करें तथा अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए उचित मंच पर ही अपनी अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग करें। रचनात्मक माध्यम से अपने विचारों अथवा समस्याओं को रखने से समाधान होता है, साथ ही इससे शांति व्यवस्था और आमजन के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल भी स्थापित होता है।

 

विरोध के लिए भी रचनात्मक माध्यम

निकुंज ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए संदेश दिया कि दंगा, हिंसा या उपद्रव किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने रंग दे बसंती मंच के माध्यम से देश-प्रदेश में यह संदेश देने का प्रयास किया कि विरोध व अभिव्यक्ति के लिए हम रचनात्मक माध्यमों का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की उत्तर प्रदेश की स्थिति को भी प्रदर्शित किया और इसके बाद आए सकारात्मक परिवर्तन को भी अपने कॉमिक्स के माध्यम से पटल पर रखा।

रंग दे बसंती: युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से दिखाया नया उत्तर प्रदेश

रंग दे बसंती: युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से दिखाया नया उत्तर प्रदेश

कला एवं संस्कृति के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने वाले युवाओं का प्रदेशव्यापी अभियान ‘रंग दे बसंती’ दिन-प्रतिदिन नई ऊंचाइयां तय कर रहा है। अभियान के तहत गुरुवार को मुजफ्फरनगर में युवाओं ने समूह ने ‘बदलते उत्तर प्रदेश’ विषय को केंद्र में रखते हुए कॉमिक्स वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इन कॉमिक्स में युवाओं ने अराजकता के स्याह अंधेरे से निकल कर भयमुक्त और विकास उन्मुख उत्तर प्रदेश बनने की यात्रा उकेरने का प्रयास किया है।

 

पलायन से घर वापसी तक

इस कार्यक्रम में सम्मिलित युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से एक ऐसे काल्पनिक युवक की कहानी को प्रदर्शित किया, जो वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगों के चलते पलायन कर चुका था। लेकिन, प्रदेश में शासन व्यवस्था में परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था का राज और सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित होने पर वह युवक बदलाव का अहसास करता है और फिर घर वापसी भी करता है।

 

कागज पर उकेरी यूपी की स्याह यादें

कई युवाओं ने इस अवसर पर अपनी कल्पनाओं को कागज पर उकेरा। युवा कलाकारों ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले की भयाक्रांत व्यवस्था एवं युवाओं के भविष्य से होते खिलवाड़ को रेखांकित करने के साथ ही इसके बाद की बदली ठोस कानून व्यवस्था, भयमुक्त वातावरण, विकास उन्मुख कार्यक्रमों और युवाओं के लिए बनाई गई रोजगारपरक व्यवस्था को प्रदर्शित किया।

 

कैसे लौट रहे हैं प्रदेश में युवा

रंग दे बसंती के मंच पर युवाओं के इस समूह में शामिल रजत त्यागी ने अपनी कला का परिचय देते हुए प्रदेश में हुए सकारात्मक बदलाव का कॉमिक्स के माध्यम से संदेश दिया। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों के साथ ही उस समय अन्य स्थानों पर बिगड़ी कानून व्यवस्था को कॉमिक्स में रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताने का प्रयास किया कि पूर्व में पलायन कर चुके युवा किस तरह वर्तमान में फिर से प्रदेश का रुख कर रहे हैं।

 

लोकतांत्रिक तरीके से खोजें भविष्य का मार्ग

युवा नमन त्यागी ने प्रदेश की वर्तमान व्यवस्था को केंद्रित करते हुए युवाओं से अपील की कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने उज्जवल भविष्य के लिए सही मार्ग की तलाश करें तथा अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए उचित मंच पर ही अपनी अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग करें। रचनात्मक माध्यम से अपने विचारों अथवा समस्याओं को रखने से समाधान होता है, साथ ही इससे शांति व्यवस्था और आमजन के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल भी स्थापित होता है।

 

विरोध के लिए भी रचनात्मक माध्यम

निकुंज ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए संदेश दिया कि दंगा, हिंसा या उपद्रव किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने रंग दे बसंती मंच के माध्यम से देश-प्रदेश में यह संदेश देने का प्रयास किया कि विरोध व अभिव्यक्ति के लिए हम रचनात्मक माध्यमों का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की उत्तर प्रदेश की स्थिति को भी प्रदर्शित किया और इसके बाद आए सकारात्मक परिवर्तन को भी अपने कॉमिक्स के माध्यम से पटल पर रखा।

स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

बेटियों की शिक्षा किसी जैविक प्रक्रिया के कारण बाधित न हो और विद्यालय उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं संवेदनशील वातावरण का स्थान बने—योगी सरकार इस दिशा में व्यवस्थागत पहल को जमीन तक पहुंचा रही है। इसी क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। 

 

राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण पूरा हुआ, जबकि शेष जनपदों से आए 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा। इस प्रकार दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 

यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य प्रकरण के संदर्भ में विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़कर देखा जाए। प्रशिक्षण सामग्री में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। 

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी

प्रशिक्षण में 30 जनवरी 2026 के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित बताए गए व्यापक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है तथा सुरक्षित और सम्मानजनक मासिक धर्म प्रबंधन उपलब्ध कराने में राज्य और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी पर बल दिया गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी तथा ग्रामीण एवं शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की शिक्षा प्रभावित न हो। 

 

हर जनपद से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार

राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से नामित तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बागपत, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई और हाथरस के प्रतिभागी शामिल रहे। शेष 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को निर्धारित है।

 

मास्टर ट्रेनर पहुंचाएंगे प्रशिक्षण को विद्यालयों तक 

राज्य स्तर पर प्रशिक्षित तीनों मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में जाकर सभी विद्यालयों के महिला एवं पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से राज्य स्तर पर तैयार प्रशिक्षण सामग्री और समझ को सीधे विद्यालय स्तर तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, बालिकाओं की गरिमा एवं गोपनीयता, संवेदनशील व्यवहार, आवश्यक सुविधाओं तथा विद्यालय में सहयोगी वातावरण तैयार करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इससे प्रशिक्षण का दायरा केवल चुनिंदा प्रतिभागियों तक सीमित न रहकर प्रत्येक विद्यालय और शिक्षक तक पहुंचेगा। प्रशिक्षण सामग्री में भी शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। बिना शर्म या भेदभाव के बालिकाओं का सहयोग करना, मासिक धर्म को सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में समझाना तथा जरूरत पड़ने पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। 

 

‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर जोर

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अर्थ केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं है। विद्यालयों में क्रियाशील बालिका शौचालय, पानी और साबुन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, गोपनीयता तथा आपात स्थिति में आवश्यक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण सामग्री में भी टॉयलेट, पानी, साबुन और सुरक्षित निस्तारण को मासिक धर्म स्वास्थ्य की आवश्यक आधारभूत व्यवस्था के रूप में रेखांकित किया गया है।

 

जागरूकता से बदलेगा विद्यालयी वातावरण

प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करना है। शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि संवेदनशील और वैज्ञानिक जानकारी से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है तथा मासिक धर्म के कारण होने वाली अनावश्यक अनुपस्थिति को कम करने में विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा, समानता, गोपनीयता और शिक्षा से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया है। 

 

विद्यालय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधार पर जोर

योगी सरकार की इस पहल का फोकस प्रशिक्षण के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर है। शिक्षकों के माध्यम से बालिकाओं को आवश्यक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण कड़ी होंगे, जो राज्य स्तर की पहल को जनपद और फिर विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएंगे।

 

कोट:

बालिकाओं की शिक्षा और गरिमा से जुड़ा कोई भी विषय संवेदनशीलता के साथ विद्यालय तक पहुंचना चाहिए। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि विद्यालयों में बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण तैयार हो। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रदेश के सभी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।

– संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

 

 

 

 

 

 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निर्यात क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जिसने निर्यात के लिए समर्पित त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) लागू की है। एक अप्रैल 2026 से प्रभावी इस नीति के शुरुआती दो माह में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अप्रैल-मई 2026 में प्रदेश से निर्यात 84.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि देश का समग्र निर्यात 6.3 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई और प्रदेश पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
 

 

यूपी ने 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की

 

अप्रैल-मई 2026 में देश से कुल 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 86 लाख डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में देश का निर्यात 5.78 करोड़ डॉलर और प्रदेश का योगदान 46.6 लाख डॉलर था। इस दौरान देश के निर्यात में 36.5 लाख डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने अकेले 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की। बस्ती से 25,000 कुंतल शीरे का निर्यात भी हुआ, जिससे 5,00,000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, अतः यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों में सम्मिलित नहीं है और उनसे अतिरिक्त है। महत्वपूर्ण यह है कि राज्य ने इसके लिए कोई आर्थिक सहायता या अनुदान नहीं दिया, बल्कि नियामक शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है। प्रत्येक निर्यात बोतल पर ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू है। एपीडा ने इस क्षेत्र के लिए करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य रखा है और उत्तर प्रदेश लगातार अपना योगदान बढ़ा रहा है।

 

निवेश और रोजगार के नए अवसर

 

नीति की 3 वर्ष की स्थिरता से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाई स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है। एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को पुनर्जीवित किया है। गोरखपुर में लगभग एक वर्ष पहले एथेनॉल उत्पादन के लिए स्थापित कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी, दोनों की स्थापना के लिए आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रैडिको खेतान अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रहा है। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनी का स्थल चयन अंतिम चरण में है, जबकि कई मौजूदा आसवनियां क्षमता विस्तार कर रही हैं।

 

किसानों को बढ़ी मांग का सीधा फायदा

 

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस नीति का महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जिससे गन्ना किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद भी बढ़ी है। यानी निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन, किसानों से खरीद और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। नीति में किसान हित को लेकर सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान अथवा आबकारी देयों की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की कोई छूट नहीं मिलेगी। इससे निर्यात प्रोत्साहन को सीधे किसानों के भुगतान से जोड़ा गया है।

 

कांच से लेकर परिवहन तक बढ़ा कारोबार

 

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र की पश्च संबद्धता गन्ना, शीरा और अनाज जैसी कृषि उपज से जुड़ी है, जबकि अग्र संबद्धता में कांच, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे उद्योग आते हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश की इकाइयों ने अन्य राज्यों को 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 45.7 प्रतिशत अधिक हैं। यह वृद्धि घरेलू आपूर्ति घटाकर नहीं, बल्कि कुल उत्पादन बढ़ने से हुई है।

 

देश के लिए मॉडल बनी योगी सरकार की नीति

 

केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स सभी राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया और राष्ट्रीय आदर्श नीति में प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। इस तरह योगी सरकार की नीति ने किसान हित, निवेश, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन को एक साथ जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।