कनाडा के ओंटारियो प्रांत में भीषण जंगल की आग के बीच कैनेडियन नेशनल रेलवे के कर्मचारी मौत के बेहद करीब पहुंच गए। धुएं के कारण विजिबिलिटी लगभग खत्म हो गई थी। इसी दौरान एक ट्रक में आग लग गई और वह ट्रेन से टकरा गया। हालांकि, सभी कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंजन के चारों ओर धधकती आग, वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर वायरल वीडियो में ट्रेन के इंजन की खिड़कियों के बाहर चारों ओर जंगल में आग की ऊंची लपटें दिखाई देती हैं। आसमान नारंगी रंग का नजर आता है और कर्मचारी तत्काल निकासी की मांग करते सुनाई देते हैं। वीडियो ने सोशल मीडिया पर रेलवे सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। ट्रक में लगी आग, ट्रेन से टकराया CN रेलवे के अनुसार, घने धुएं के बीच एक ट्रक आग की चपेट में आ गया और ट्रेन से टकरा गया। इसके बाद सभी कर्मचारी पैदल ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। हालांकि, किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई। रेल संचालन रोका, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को निकाला घटना के बाद CN रेलवे ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाके में सभी रेल सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कंपनी ने आर्मस्ट्रॉन्ग कस्बे के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह इलाका उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में जंगल की आग से प्रभावित है। विपक्ष ने उठाए सुरक्षा पर सवाल ओंटारियो की NDP के विधायक सोल ममाक्वा ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड करने वाले कर्मचारी को कंपनी की कार्रवाई का डर है, क्योंकि ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाना कंपनी की नीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उस समय कर्मचारी की प्राथमिकता अपनी जान बचाना थी और कंपनी को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय उनका सहयोग करना चाहिए। तीन ट्रेनें जंगल की आग वाले इलाके में खड़ीं ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (OPP) ने बताया कि कॉलिन्स फर्स्ट नेशन के पास ज्वलनशील सामग्री ले जा रही तीन ट्रेनें जंगल की आग के कारण रोक दी गई हैं। फिलहाल आम लोगों के लिए तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन रेलवे और आपातकालीन एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में 150 जगहों में जंगल की आग प्रदेश में करीब 150 जगहों पर जंगल की आग जल रही हैं। कई समुदायों में अनिवार्य निकासी के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में प्रतिबंधित अग्नि क्षेत्र (Restricted Fire Zone) लागू कर दिया है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा आपातकालीन जरूरत का सामान तैयार रखने की अपील की है।
Ghaziabad: गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र की GH-7 सोसाइटी में बुधवार सुबह कथित तौर पर पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी को लेकर हुआ विवाद तब हिंसक हो गया, जब एक व्यक्ति ने सोसाइटी के पूर्व कोषाध्यक्ष के साथ लिफ्ट के अंदर मारपीट की। हालांकि, इस पूरी घटना का वीडियो लिफ्ट में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गया, जो कि अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
#WATCH | Ghaziabad, Uttar Pradesh: A heated argument between two residents inside a lift at GS-7 Society in Ghaziabad’s Crossing Republic turned violent, with the entire incident captured on CCTV.
According to police, the dispute reportedly stemmed from issues related to the… pic.twitter.com/cxamiizlmW
— Moneycontrol (@moneycontrolcom) July 15, 2026
आरोपी की पहचान प्रह्लाद कुमार के तौर पर हुई है। आरोप है कि उसने लिफ्ट के अंदर दीपक चोपड़ा को घूंसे मारे और लात मारी। दीपक चोपड़ा सोसाइटी के अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के पूर्व कोषाध्यक्ष हैं। बाद में चोपड़ा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) प्रियश्री पाल ने बताया कि GH-7 सोसाइटी के टॉवर 8 में रहने वाले दीपक चोपड़ा अपने बच्चों को स्कूल बस में बिठाकर अपने फ्लैट लौट रहे थे। इसी दौरान, आरोपी प्रह्लाद कुमार, जो उसी टावर 8 में रहता है, अपने बच्चों को स्कूल बस में छोड़ने के बाद उसी लिफ्ट में आया। जिसके बाद दोनों के बीच सोसाइटी फंड को लेकर बहस हुई और उन्होंने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि आरोप है कि प्रह्लाद कुमार ने दीपक चोपड़ा को लात-घूंसे मारे और करीब तीन मिनट तक उन्हें पीटता रहा।
ACP ने आगे कहा कि चोपड़ा ने क्रॉसिंग रिपब्लिक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रह्लाद कुमार को हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज ली है।
4 मिनट का CCTV वीडियो वायरल
घटना का लगभग चार मिनट का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में चोपड़ा लिफ्ट के अंदर खड़े होकर अपना मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए दिख रहे हैं, तभी एक महिला अंदर आती है।
कुछ ही देर बाद, प्रह्लाद कुमार लिफ्ट में आते हैं। जब दोनों पुरुषों के बीच बहस होती है, तो महिला लिफ्ट से बाहर निकल जाती है।
फुटेज में कथित तौर पर प्रह्लाद कुमार को चोपड़ा पर हमला करने से पहले लिफ्ट का दरवाजा बंद करते हुए दिखाया गया है। उन्हें लगभग तीन मिनट तक चोपड़ा को बार-बार घूंसे मारते और लात मारते हुए देखा जा सकता है।
दार्जिलिंग से सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। यह सिर्फ एक रेस्क्यू की कहानी नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में दिखाई गई बहादुरी और इंसानियत की मिसाल भी है। कुछ ही पलों में हालात इतने बदल गए कि एक सामान्य सफर जानलेवा बन गया। तभी स्थानीय लोगों ने बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया और एक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना ऐसा साहस दिखाया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे मानवता, सूझबूझ और हिम्मत का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
मानसून के दौरान नदियों और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते जोखिम के बीच यह घटना एक अहम संदेश भी देती है कि मौसम की चेतावनियों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, जबकि समय पर की गई मदद कई जिंदगियां बचा सकती है।
पिकनिक का प्लान, लेकिन बीच नदी में फंस गई Thar
मंगलवार शाम दार्जिलिंग के लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट दुधिया (Dudhia) में दो युवक और दो युवतियां अपनी महिंद्रा थार से बालासन नदी पार करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पहाड़ों में हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और SUV बीच धारा में फंस गई।
बढ़ते पानी के बीच छत पर चढ़कर बचाई जान
जब वाहन आगे नहीं बढ़ सका, तो चारों युवक-युवतियां अपनी जान बचाने के लिए Thar की छत पर चढ़ गए। चारों ओर तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया।
स्थानीय युवक बना फरिश्ता
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मदद के लिए जुट गए। इसी बीच एक स्थानीय युवक बिना अपनी जान की परवाह किए उफनती नदी में कूद पड़ा। तेज बहाव से जूझते हुए वह SUV तक पहुंचा और एक-एक कर सभी को सुरक्षित किनारे तक ले आया।
रेस्क्यू के दौरान बढ़ गई थी मुश्किल
बचाव अभियान के दौरान एक युवती तेज बहाव में कुछ दूर तक बह गई, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता और युवक की बहादुरी से उसे भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ।
A Thar SUV carrying four people was swept away by the Balason River at Dudhia. Without thinking twice, a brave local youth jumped into the raging river, and rescued all four people safely. His courage and selfless act turned a possible tragedy into a story of hope. Salute pic.twitter.com/GbGB7YaIRR
— I Love Siliguri (@ILoveSiliguri) July 14, 2026
वीडियो हुआ वायरल, लोगों ने बहादुर युवक को किया सलाम
पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग स्थानीय युवक की बहादुरी और निस्वार्थ मदद की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि उसकी सूझबूझ और साहस ने चार परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचा लिया।
मौसम विभाग ने पहले ही जारी की थी चेतावनी
इस घटना के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल के कई इलाकों, खासकर दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग ने नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने और भूस्खलन की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
पहले भी खतरनाक साबित हो चुकी है बालासन नदी
यह पहली बार नहीं है जब मानसून में बालासन नदी ने खतरा पैदा किया हो। पिछले महीने भी नदी का जलस्तर बढ़ने से दुधिया का अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे सिलिगुड़ी और मिरिक के बीच संपर्क प्रभावित हुआ था। यह पुल भी पुराने लोहे के पुल के बह जाने के बाद बनाया गया था।
हरिद्वार में युवती से छेड़छाड़ में भीड़ ने हरियाणा के पर्यटकों की जमकर धुनाई कर दी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में खालिस्तान समर्थक और भाजपा समर्थक सिख भिड़ गए। खालिस्तानी पीएम को अपशब्द बोलते सुनाई दिए। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो को भाजपा समर्थक सिख जगविंदर विर्क ने 15 जुलाई की सुबह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया। वायरल वीडियो में कुछ खालिस्तान समर्थक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां के साथ “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। बहस ‘सतलुज’ फिल्म पर लगे बैन को लेकर शुरू हुई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराया। अब 4 प्वाइंट्स में पढ़ें पूरा मामला:- 3 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे PM मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहे। इस दौरान 9 जुलाई को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर अहम समझौते पर सहमति बनी। मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े समझौतों की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया की नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत बच्चों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण तैयार करने के ऑस्ट्रेलिया के प्रयासों से सीख रहा है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में करीब 30 हजार भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया। —————— ‘सतलुज’ के मेकर्स को मंत्री बिट्टू की चुनौती:बोले- 25 हजार शवों के रिकॉर्ड दिखाओ, वर्ना एक्शन लेंगे; दिलजीत दोसांझ की फिल्म पूरी तरह बैन केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज के मेकर्स को खुली चुनौती दी है। बिट्टू ने मेकर्स को कहा कि उन 25,000 लापता या अवैध रूप से दाह संस्कार किए गए शवों के पुख्ता दस्तावेजी सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करें, जो फिल्म में दिखाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Viral News: पूर्वी चीन (Eastern China) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत के पड़ोसी देश में एक महिला ने अपनी बुजुर्ग सास पर इसलिए हमला कर दिया क्योंकि सास ने पोते-पोतियों की देखभाल करने के बजाय अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाहर घूमने चली गई। इस हिंसक हमले में बुजुर्ग महिला की चार पसलियां टूट गईं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। इस मामले ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना झेजियांग प्रांत के जियाक्सिंग शहर की है। इसे हाल ही में झेजियांग टेलीविजन द्वारा रिपोर्ट किया गया है। मामला तब और विवादित हो गया जब बेटे ने भी अपनी मां का साथ देने के बजाय पत्नी का समर्थन कर दिया। उसने कहा कि उसकी मां इसकी हकदार थी। इस घटना ने चीन में दादा-दादी की जिम्मेदारियों और बुजुर्गों के निजी जीवन को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
अलग शहरों में रहते थे पति-पत्नी: पीड़ित बुजुर्ग महिला का उपनाम ‘शेन’ है। वह अपने बेटे ‘जियाओ’ के दो बच्चों की देखभाल करती थीं। जबकि बेटा और बहू दोनों अलग-अलग शहरों में काम करते थे।
पति की मौत के बाद बदली जगह: पति के निधन के बाद, शेन अपना गृहनगर छोड़कर जियाक्सिंग में अपनी एक बेटी के साथ रहने आ गई थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब एक बच्चे ने घर में लगे सर्विलांस कैमरे (CCTV) के जरिए अपनी मां को बताया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उसकी दादी उसका तापमान (फीवर) भी नहीं नाप रही हैं। यह सुनकर मां घबरा गई और तुरंत हाई-स्पीड ट्रेन पकड़कर जियाक्सिंग पहुंची और सास से भिड़ गई।
‘बच्चों को संभालने से अच्छा तो मैं मर जाऊं…’
बहू के आरोपों पर सास शेन ने बाद में सफाई देते हुए कहा, “बच्चे को संभालना बहुत मुश्किल हो रहा था। उस वक्त उनके खुद के दांत में बहुत तेज दर्द था। जब बहू ने उन्हें अस्पताल ले जाने की बात कही, तो शेन ने मना कर दिया और कहा कि वह अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाना चाहती हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि बच्चों की देखभाल करने से बेहतर है कि मैं मर जाऊं।”
इसी बात पर दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि बहू ने बुजुर्ग शेन पर हमला कर दिया। इससे उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनकी चार पसलियां फ्रैक्चर हो गईं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों की देखभाल को लेकर शेन पर बहू द्वारा हमला किए जाने की यह पहली घटना नहीं थी।
बेटे का चौंकाने वाला बयान
इस पूरे मामले ने तब और भी भयानक मोड़ ले लिया जब पीड़ित महिला के सगे बेटे (जियाओ) ने सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी का बचाव किया। बेटे ने अपनी ही मां को अनैतिक करार दिया। उसने कहा कि वह इस पिटाई के ही लायक थी, क्योंकि उसने अपने पोते-पोतियों को छोड़कर अपने अफेयर पर ध्यान देना चुना।
आर्थिक मदद की मांग: बेटे ने दलील दी है कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में उसकी मां को या तो बच्चों को पालने में मदद करनी चाहिए या फिर उसे पैसे (फाइनेंशियल सपोर्ट) देने चाहिए।
बेटियों ने किया मां का समर्थन
दूसरी तरफ, शेन की बेटियों ने अपने भाई और भाभी की इस हरकत का कड़ा विरोध किया है। बेटियों का कहना है कि उनकी मां ने सालों तक बेहद कम सैलरी पर एक सफाई कर्मचारी के रूप में काम किया है। इसलिए जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें एक साथी के साथ खुश रहने और अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
चीनी सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर काफी बहस हो रही है। लोगों का कहना है कि दादा-दादी या नाना-नानी की यह कानूनी या नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे जबरन बच्चों की देखभाल करें। यूजर्स ने बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है।
ये भी पढ़ें- ₹830 की पानी पुरी और 1,270 रुपये की पाव भाजी… लंदन में Haldiram के दाम देख चौंके भारतीय! भारत से 7 गुना मिल रहा महंगा
Haldiram’s London food prices: भारत में कई परिवारों के पसंदीदा और सबसे भरोसेमंद रेस्टोरेंट ‘हल्दीराम’ (Haldiram’s) ने अब लंदन में भी अपना नया आउटलेट खोल लिया है। सोशल मीडिया पर इस नए आउटलेट के बाहर लगी लोगों की लंबी लाइन के वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं। लेकिन जिस बात ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा है, वह है इसके खाने की कीमतें…। भारत में जहां एक प्लेट पानी पुरी करीब ₹75 में मिल जाती है। वहीं, लंदन के Haldiram’s में इसकी कीमत £6.50 (करीब ₹830) रखी गई है।
इसी तरह पाव भाजी के लिए ग्राहकों को £9.90 (करीब ₹1,270) और गार्लिक नान के लिए £5 (करीब ₹640) चुकाने पड़ रहे हैं। यानी लंदन में Haldiram’s के अधिकांश व्यंजनों की कीमतें भारत के मुकाबले लगभग सात गुना अधिक हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में रेस्तरां चलाने की भारत के मुकाबले अधिक लागत, आयात शुल्क, टैक्स और कर्मचारियों पर होने वाला खर्च भारत की तुलना में काफी अधिक है। यही वजह है कि वहां कीमतें भी ज्यादा रखी गई हैं।
इसके अलावा, Haldiram’s ने लंदन में खुद को एक प्रीमियम भारतीय कैजुअल डाइनिंग ब्रांड के रूप में पेश करने की रणनीति अपनाई है, न कि भारत की तरह किफायती फैमिली रेस्तरां के रूप में…। लंदन आउटलेट का मेन्यू भी भारत की तुलना में छोटा और चुनिंदा व्यंजनों वाला है। इसमें हर डिश का डिटेल्स दिया गया है ताकि विदेशी ग्राहकों को भारतीय व्यंजनों को बेहतर ढंग से समझने में आसानी हो।
किसका था आइडिया?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘लेस्टर स्क्वायर’ (Leicester Square) स्थित इस रेस्तरां में 110 लोगों के बैठने की क्षमता है। Haldiram’s के इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार के पीछे परिवार की 24 वर्षीय रिया अग्रवाल की अहम भूमिका बताई जा रही है। रिया ने करीब 11 वर्षों तक लंदन में पढ़ाई की है। उनका मानना है कि ब्रिटेन में भारतीय भोजन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए Haldiram’s को वहां एक घरेलू नाम बनाया जा सकता है। इसी सोच के साथ कंपनी ने ब्रिटेन के मार्केट में कदम रखा है।
लंदन और भारत के दामों में जमीन-आसमान का अंतर
पानी पूरी: भारत में जहां एक प्लेट पानी पूरी के लिए आपको अमूमन ₹75 देने पड़ते हैं। वहीं लंदन में इसके लिए लोगों को 830 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
पाव भाजी: भारत में मिलने वाली बजट-फ्रेंडली ‘पाव भाजी’ के लिए लंदन में 9.90 पाउंड यानी करीब ₹1,270 ढीले करने होंगे।
गार्लिक नान: इसी तरह एक गार्लिक नान की कीमत 5 पाउंड यानी लगभग ₹640 है।
लंदन स्टोर में हल्दीराम के खाने की कीमतें देश की राजधानी दिल्ली के मुकाबले आसानी से 7 गुना ज्यादा हैं। इसके अलावा, विदेशियों को भारतीय व्यंजनों के बारे में बेहतर ढंग से समझाने के लिए वहां का मेन्यू काफी छोटा और हर डिश के डिस्क्रिप्शन (description) के साथ तैयार किया गया है।
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आखिर इतने महंगे क्यों हैं दाम?
आपको बता ही है कि लंदन जैसे शहर में रेस्टोरेंट चलाने का ऑपरेटिंग खर्च (किराया, स्टाफ की सैलरी), मसालों और सामग्रियों के इंपोर्ट का खर्च और टैक्स भारत के मुकाबले बहुत अधिक है। इसके साथ ही, हल्दीराम खुद को वहां एक रोजमर्रा के बजट रेस्टोरेंट के बजाय एक प्रीमियम इंडियन कैजुअल डाइनिंग स्पॉट के रूप में स्थापित करना चाहता है।
The opening of Haldiram’s first London outlet drew huge crowdshttps://t.co/ovbKa1De7z@HaldiramSnacks
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— Dheeraj Kumar (@DheerajKr21) July 14, 2026
Who is Siddharth Saxena: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय टेक एंटरप्रेन्योर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। इस शख्स का नाम है सिद्धार्थ सक्सेना। इन्होंने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने महज 26 साल की उम्र में एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 76.99 करोड़ रुपये) की कमाई की थी। कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ हुए एक स्ट्रीट इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने भारत के एक छोटे से शहर से अमेरिका में मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनियां खड़ी करने तक के अपने इस शानदार सफर के बारे में खुलकर बात की है। आइए जानते हैं कि कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना और उन्होंने यह मुकाम कैसे हासिल किया।
IIT कानपुर से की पढ़ाई, बोले- हार्वर्ड से 20 गुना मुश्किल है एडमिशन
विराज अला को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ सक्सेना ने अपनी पढ़ाई और करियर के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा कीं। सिद्धार्थ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की डिग्री हासिल की है। वह साल 2019 में आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट हुए थे। इंटरव्यू के दौरान सिद्धार्थ ने दावा किया कि आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला पाना अमेरिका की प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलने से 20 गुना ज्यादा कठिन है।
एक दिन में ₹76.99 करोड़ की कमाई का सच
जब इंटरव्यूअर विराज अला ने सिद्धार्थ से पूछा कि उन्होंने एक साल में अधिकतम कितनी कमाई की है, तो सिद्धार्थ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (लगभग 76.99 करोड़ रुपये) कमाए हैं। इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि वह रातों-रात करोड़पति बन गए, तो उन्होंने कहा कि हां, कुछ ऐसा ही कह सकते हैं। उन्होंने महज 26 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल कर लिया था। सिद्धार्थ ने बताया कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने अपने भविष्य में इस तरह की सफलता की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी।
कैसा रहा है सिद्धार्थ का करियर और बिजनेस?
आईआईटी कानपुर से 2019 में पास आउट होने के बाद सिद्धार्थ ने मशीन लर्निंग इंजीनियर के रूप में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम किया। उनके करियर के सफर में Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI जैसी कंपनियों और एल्टो यूनिवर्सिटी, जूमियो कॉर्पोरेशन जैसे संस्थान रहे।
Merlin और Thine के को-फाउंडर
नौकरी के बाद सिद्धार्थ ने एंटरप्रेन्योरशिप की राह चुनी। साल 2022 में सिद्धार्थ ने अपने आईआईटी कानपुर के बैचमेट्स प्रत्यूष राय और शीर्षेंदु सरकार के साथ मिलकर Merlin नाम की एक एआई-पावर्ड क्रोम एक्सटेंशन कंपनी की सह-स्थापना की। रिपोर्ट्स के मुताबिक आज इस कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 50 मिलियन डॉलर (करीब 418 करोड़ रुपये से अधिक) है। इसके अलावा सिद्धार्थ एक दूसरे स्टार्टअप Thine के भी को-फाउंडर हैं।
स्टार्टअप्स को लेकर क्या है उनकी सोच?
स्टार्टअप और बिजनेस को लेकर सिद्धार्थ का मानना है कि भारत में सीमित संसाधनों की वजह से बहुत से लोग स्कार्सिटी माइंडसेट (कमी की सोच/सुरक्षित चलने की मानसिकता) के साथ बड़े होते हैं। उनका कहना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए इस मानसिकता को बदलकर अबंडेंस माइंडसेट (प्रचुरता की सोच) अपनाना बेहद जरूरी है, जहां लोग खुलकर जोखिम लेने और नए अवसरों की तलाश करने के लिए तैयार रहें।
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सिद्धार्थ ने दोनों देशों के वर्क-कल्चर की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में लोग अक्सर काम को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे उसे पसंद करते हैं जबकि भारत में कई बार लोग मजबूरी या जरूरत की वजह से काम करते हैं।
शादी के लिए सही जीवनसाथी की तलाश में लोग अक्सर अपनी पसंद और उम्मीदों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन कई बार यही उम्मीदें रिश्ते तय करने की प्रक्रिया को मुश्किल बना देती हैं। ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है, जहां एक मैचमेकर ने अपनी एक क्लाइंट को सर्विस से हटाने की वजह बताई। मैचमेकर Oendrila Kapoor ने एक वीडियो में दावा किया कि उनकी टीम ने 28 वर्षीय महिला के लिए कई संभावित रिश्ते सुझाए, लेकिन हर प्रोफाइल किसी न किसी कारण से खारिज कर दी गई।
बाद में जब परिवार से उनकी वास्तविक पसंद और अपेक्षाओं के बारे में जानकारी ली गई, तो सामने आई बातें काफी अलग थीं। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर कमाई, सामाजिक स्थिति, पारिवारिक दखल और जीवनसाथी चुनने की सोच को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
शुरुआत में थी साधारण मांग, बाद में सामने आई बड़ी शर्त
मैचमेकर के मुताबिक, महिला ब्राह्मण समुदाय से थीं, उनकी उम्र 28 साल थी और उनकी सालाना आय करीब 11 लाख रुपये थी। शुरुआत में परिवार ने बताया था कि उन्हें एक पढ़ा-लिखा, अच्छे परिवार से आने वाला और अच्छी नौकरी करने वाला लड़का चाहिए। इसी आधार पर मैचमेकिंग टीम ने महिला की उम्र के आसपास, अच्छे करियर और स्थिर आय वाले कई युवकों के प्रोफाइल साझा किए। लेकिन परिवार ने कथित तौर पर सभी प्रस्तावों को बिना स्पष्ट कारण बताए खारिज कर दिया।
‘एक प्रयोग‘ से सामने आई परिवार की असली पसंद
जब लगातार प्रोफाइल रिजेक्ट होने लगीं, तो मैचमेकर ने कहा कि उनकी टीम ने परिवार की वास्तविक पसंद समझने के लिए एक छोटा सा प्रयोग किया। उन्होंने महिला और उनके परिवार से कहा कि वे खुद ऐसे प्रोफाइल साझा करें, जिनमें उनकी रुचि हो सकती है। इसके बाद जो जानकारी सामने आई, उसने मैचमेकर को हैरान कर दिया।
हर पसंदीदा प्रोफाइल की कमाई ₹1 करोड़ से ज्यादा!
मैचमेकर के अनुसार, परिवार ने जिन पुरुषों के प्रोफाइल भेजे, वे सभी बंगाली ब्राह्मण समुदाय से थे और उनकी सालाना आय 1 करोड़ रुपये से अधिक थी। उन्होंने दावा किया कि महिला की खुद की आय करीब 11 लाख रुपये सालाना थी, लेकिन परिवार जिन रिश्तों में रुचि दिखा रहा था, उनकी कमाई इससे कई गुना ज्यादा थी।
क्या 1 करोड़ रुपये कमाई जरूरी थी या सिर्फ आकर्षण की बात?
मैचमेकर ने परिवार से सवाल किया कि क्या 1 करोड़ रुपये सालाना आय वाला पार्टनर उनकी अनिवार्य शर्त थी। उनके अनुसार, महिला ने कहा कि यह कोई सख्त नियम नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे पुरुषों की ओर ज्यादा आकर्षण महसूस होता है। वहीं, जब जाति की पसंद को लेकर सवाल किया गया तो कथित तौर पर महिला की मां ने बातचीत में हिस्सा लिया और बताया कि महिला के पिता बंगाली ब्राह्मण दूल्हे को प्राथमिकता देते हैं।
मनपसंद प्रोफाइल मिले, लेकिन जवाब नहीं आया
मैचमेकर ने दावा किया कि उनकी टीम ने परिवार की पसंद के अनुसार कई पुरुषों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद उन्होंने महिला को अपनी सेवा से हटाने का फैसला किया।
‘उम्मीदें ज्यादा हों तो मैच मिलना मुश्किल‘
मैचमेकर ने कहा कि जीवनसाथी चुनने में हर व्यक्ति की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन कई बार अवास्तविक उम्मीदें रिश्ते तलाशने की प्रक्रिया को मुश्किल बना देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऊंची कमाई वाले लोग सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं देखते, बल्कि व्यवहार, सोच और परिवार की अपेक्षाओं को भी महत्व देते हैं।
सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ लोगों ने मैचमेकर की बात का समर्थन करते हुए कहा कि कई बार लोग अपनी आर्थिक स्थिति से काफी ऊपर की उम्मीदें रखते हैं।
वहीं, कुछ यूजर्स ने मैचमेकिंग प्रक्रिया और माता-पिता की भूमिका पर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना था कि जीवनसाथी चुनना व्यक्तिगत फैसला होना चाहिए, जबकि कुछ ने कहा कि परिवार की अपेक्षाएं भी भारतीय शादियों में अहम भूमिका निभाती हैं। इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर शादी, कमाई, सामाजिक स्थिति और जीवनसाथी की पसंद को लेकर बहस छेड़ दी है।
ट्रेन में सीट बदलने को लेकर एक पैसेंजर की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब वायरल हो रही है। पैसेंजर ने बताया कि दो युवतियों ने उनसे सीट बदलने का अनुरोध किया था और वह इसके लिए तैयार भी हो गया था। लेकिन बातचीत के दौरान उनके व्यवहार से उसे असहज महसूस हुआ, जिसके बाद उसने अपना फैसला बदल दिया। इस घटना को शेयर करते हुए पैसेंजर ने पूछा कि क्या दूसरे लोगों ने भी ट्रेनों में अक्सर होने वाले “एडजस्ट कर लीजिए” वाले दबाव का सामना किया है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
सीट बदलने को लेकर पोस्ट वायरल
Reddit पोस्ट में व्यक्ति ने बताया, “लड़की ने मुझसे सीट बदलने के लिए कहा, लेकिन उसका व्यवहार ठीक नहीं था” टाइटल से शेयर किए गए। पैसेंजर ने बताया कि, वह ट्रेन के 3E कोच में मिडिल बर्थ पर सफर कर रहा था। तभी दो महिलाएं उसके पास आईं और सीट बदलने का अनुरोध किया। उनमें से एक की उसी कंपार्टमेंट में ऊपरी बर्थ थी, जबकि दूसरी महिला की सीट उसी कोच में किसी दूसरे स्थान पर थी। पैसेंजर ने बताया, “मैंने शुरुआत में सीट बदलने के लिए हां कर दी थी।”
सीट देने से कर दिया मना
उन्होंने कहा कि, “मैंने अपनी सीट पर पहले ही बिस्तर लगा लिया था, इसलिए उसे बस उस सीट पर बिस्तर लगाना चाहिए। ठीक है, है ना?” उनकी सिर्फ एक शर्त थी कि उन्होंने अपनी सीट पर पहले से ही बिस्तर लगा रखा है, इसलिए दूसरी सीट पर भी बिस्तर वही लगा दें। उसके मुताबिक, इस पर महिला ने जवाब दिया, “ये भी मैं ही करूं? इतना तो खुद कर लो।” पैसेंजर का कहना है कि इसी जवाब के बाद उसने अपना फैसला बदलने का मन बना लिया। पैसेंजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे नहीं पता उस समय मुझे क्या हुआ, लेकिन मैं नाराज हो गया और मैंने साफ कह दिया, ‘आप किसी और से पूछ लीजिए, मैं किसी भी हालत में सीट नहीं बदलूंगा।'”
लोगों ने कहा सीट बदलने को
उसके मुताबिक, महिला वहां से चली गई, लेकिन कुछ देर बाद लौटकर बोली, “ठीक है, मैं बिस्तर लगा दूंगी।” वहीं, तब तक पैसेंजर अपना फैसला बदल चुका था और उसने सीट बदलने से इनकार कर दिया। पैसेंजर के मुताबिक, मामला तब और बढ़ गया जब दूसरे यात्रियों ने भी उससे सीट बदलने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने कहा, “अरे, जाने दीजिए, सबको कहीं न कहीं जाना है। थोड़ा एडजस्ट करके चलना चाहिए।” इस पर उसने पास बैठे एक पैसेंजर से पूछा, “अगर ऐसा है, तो क्या आप अपनी सीट बदलने के लिए तैयार हैं?” जवाब में उस पैसेंजर ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ सफर कर रहा है, इसलिए ऐसा नहीं कर सकता।
फैसले पर कोई पछतावा नहीं
पोस्ट में आगे पैसेंजर ने लिखा कि उसने भी बाकी सभी की तरह पूरा किराया देकर टिकट लिया है और उसका मानना है कि सीट बदलने की बात विनम्रता से रखी जानी चाहिए, यह मानकर नहीं कि सामने वाला हर हाल में मान जाएगा। उसने लिखा, “मुझ पर रौब मत दिखाइए और फिर यह उम्मीद मत रखिए कि मैं आपकी हर बात मान लूंगा।” उसने यह भी कहा कि कुछ देर के लिए आसपास बैठे लोगों की नजरों से उसे अपराधबोध जरूर हुआ, लेकिन बाद में उसे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं हुआ।
यूजर ने किया कमेंट
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी। बड़ी संख्या में यूजर्स ने पैसेंजर के फैसले का समर्थन किया। वहीं, कई अन्य लोगों ने भी ट्रेन यात्रा के दौरान सीट बदलने के लिए दबाव बनाए जाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। एक यूजर ने लिखा, “ओपी, बदतमीज लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अगर उनका व्यवहार अच्छा होता, तो शायद उन्हें सीट मिल जाती। यह पूरी तरह उनकी अपनी गलती है।”
एक अन्य यूजर ने लिखा, “लोग अक्सर किसी की विनम्रता को उसकी कमजोरी समझ लेते हैं। तुमने बिल्कुल सही किया। जब सामने वाले ने देखा कि तुमने पहले से बिस्तर लगा रखा है, तब उसे सम्मान से बात करनी चाहिए थी। यह सामान्य शिष्टाचार है।” एक और यूजर ने रिएक्शन देते हुए कहा, “तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही था। ऐसे लोगों को सीधे और साफ जवाब मिलना ही चाहिए।”

