लंदन के लग्जरी होटल में 29 साल के सऊदी प्रिंस की मौत के पीछे क्या घातक कॉकटेल था? जांच में सामने आई ये बात

यूनाइटेड किंगडम में हुई एक अदालती जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन फहद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत लंदन के एक लग्जरी होटल में शराब, पार्टी ड्रग और एंटी-एंजाइटी दवाइयों के एक जानलेवा और घातक कॉकटेल के सेवन से हुई थी। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस अब्दुल्लाह का शव पिछले साल 25 नवंबर को केंसिंग्टन स्थित पांच सितारा मैरियट होटल में उनके कमरे के बाथरूम के फर्श पर पड़ा मिला था। एक क्लीनर जब उनके बंद कमरे में आया तो प्रिंस की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई। पैरामेडिक्स द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

होटल में अकेले लौटे थे प्रिंस

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस 19 नवंबर को एक हफ्ते के लिए इस 5-स्टार होटल में चेक-इन हुए थे। मौत से ठीक एक रात पहले सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार देखा गया था, जब वे सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले थे और फिर अकेले ही होटल वापस लौट आए थे। जांचकर्ताओं के लिए यह सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम सबूत साबित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि घटना के वक्त उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और मामले में किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता नहीं थी।

जांच में क्या निकला? शराब, GHB और जैनैक्स का ‘जानलेवा कॉकटेल’

इनर वेस्ट लंदन कॉरोनर्स कोर्ट में हुई जांच के बाद असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रिंस की मौत मल्टी-ड्रग इंजेशन यानी एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों और दवाओं के सेवन से हुई है। उन्होंने इसे दुर्घटनाजन्य मौत का मामला करार दिया। इसका मतलब है कि यह मौत अनजाने में हुई एक दुर्घटना थी। टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में प्रिंस के खून में अल्कोहल का कंसंट्रेशन 222 mg प्रति 100 ml पाया गया, जो इंग्लैंड में ड्रिंक-एंड-ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना अधिक था। विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि सिर्फ शराब का इतना स्तर ही किसी इंसान को कोमा में भेजने के लिए काफी था।

जांचकर्ताओं को उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटाइरेट (GHB – जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है) का संभावित रूप से जानलेवा स्तर मिला। इसके अलावा गांजा, जैनैक्स और दूसरे एंटी-एंजाइटी दवाओं के अंश भी मिले। पोस्ट-मॉर्टम जांच में पाया गया कि प्रिंस को कोई पुरानी या गंभीर बीमारी नहीं थी। मेडिकल साक्ष्यों ने निष्कर्ष निकाला कि शराब और कई दवाओं के इस घातक कॉकटेल ने कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

नशे की लत से जूझ रहे थे सऊदी प्रिंस

सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से पता चला कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्लाह शराब के अत्यधिक सेवन और जैनैक्स दवा पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहे थे। द टेलीग्राफ के मुताबिक उन्हें पिछले साल अगस्त में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रेगाबालिन से डिटॉक्सिफिकेशन का इलाज कराया था। प्रायरी क्लीनिक छोड़ने के बाद, उन्होंने मर्सियासाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लीनिक में रेसेपरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराया और अक्टूबर में वहां से डिस्चार्ज हुए थे।

कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने अदालत को बताया कि प्रिंस को एंजाइटी के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। डिस्चार्ज के समय उन्हें आत्महत्या के जोखिम वाला नहीं माना गया था, हालांकि बाद में वे निर्धारित ऑनलाइन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए थे।

न आत्महत्या का सबूत, न ही किसी साजिश का अंदेशा

असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन ने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि प्रिंस अब्दुल्लाह अपनी जान खुद लेना चाहते थे। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरोनर ने नोट किया कि प्रिंस ने कभी खुदकुशी के विचार व्यक्त नहीं किए थे, होटल के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला जो यह दर्शाता हो कि उनकी मौत से पहले वहां कोई और व्यक्ति मौजूद था। अकेले होटल लौटने की सीसीटीवी फुटेज ने भी किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।

सऊदी शाही दरबार ने कुछ दिनों बाद की थी मौत की घोषणा

सऊदी रॉयल कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 2 दिसंबर को प्रिंस अब्दुल्लाह के निधन की सार्वजनिक घोषणा की थी। सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रिंस के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजकुमारों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

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44 साल की उम्र में 6.5 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाकर मजे से नौकरी छोड़ रिटायर हो गया ये इंजीनियर, फिर बताया अपना फॉर्म्युला

Viral News: कॉर्पोरेट लाइफ की भागदौड़, काम के लंबे घंटे और ऑफिस की राजनीति से परेशान होकर क्या कोई अपनी सफल नौकरी को अलविदा कह सकता है? एक 44 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने ऐसा ही कर दिखाया है. लेकिन उन्होंने यह कदम किसी बिना तैयारी के नहीं बल्कि 6.5 करोड़ रुपये का एक मजबूत इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो बनाने के बाद उठाया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर My FIRE Journey: Walking Away at 44 टाइटल के साथ इस शख्स ने अपनी कहानी शेयर की है. अब उनकी ये स्टोरी टॉकिंग प्वाइंट बन गई है. इस इंजीनियर ने बताया कि वह इंजीनियरिंग से रिटायर नहीं हुए हैं बल्कि कॉर्पोरेट जीवन के बर्नआउट से रिटायर हुए हैं.

My FIRE Journey: Walking Away at 44

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आइए जानते हैं कि इस टेक पेशेवर ने इतनी कम उम्र में इतना बड़ा फंड कैसे खड़ा किया और उनका वह सीक्रेट फॉर्म्युला क्या है जिसने उन्हें काम के दबाव से मुक्ति और आजादी की जिंदगी दी.

14 घंटे काम और खराब होती सेहत: जीवन का वो टर्निंग पॉइंट

रेडिट पोस्ट के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शादी हो चुकी है और उनका एक 11 साल का बेटा है. उन्होंने देश के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से अपनी यूजी और पीजी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अपने करियर का लगभग पूरा हिस्सा स्टार्टअप कंपनियों में बिताया. कई बार तो उन्होंने कंपनी पर भरोसे के चलते महीनों तक बिना सैलरी के भी काम किया. उनकी पत्नी हमेशा से एक होममेकर रही हैं.

करियर के दौरान एक स्टार्टअप में रेफरल के जरिए शामिल होना उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना. वहां का माहौल बेहद टॉक्सिक था और हर तरफ बस ऑफिस पॉलिटिक्स चलती थी. उन्हें हफ्ते में 6 दिन और रोजाना 14-14 घंटे काम करना पड़ता था.

इस भयानक दबाव के कारण उनको नींद न आने की समस्या हो गई. वह बॉर्डरलाइन डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का शिकार हो गए. आखिरकार साल 2023 में उन्होंने एक ब्रेक लिया और रुककर अपनी सेहत व अपनी वित्तीय स्थिति दोनों का बारीकी से देखा.

कैसे बना 6.5 करोड़ का यह विशाल पोर्टफोलियो?

शुरुआत में वह पैसों को लेकर बहुत अधिक अनुशासित नहीं थे और न ही FIRE (Financial Independence, Retire Early) टाइप मूवमेंट उनका कोई टारगेट था. लेकिन उनके एक सही फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। एक फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेने के बाद उन्होंने साल 2018 में एसआईपी के जरिए निवेश करना शुरू किया.

ESOP से मिला बड़ा बूस्ट

साल 2019 में जिस स्टार्टअप में वह काम कर रहे थे, उसका अधिग्रहण हो गया. इससे उन्हें ईशॉप के रूप में लगभग 1.4 करोड़ रुपये का पेआउट मिला. उन्होंने इस बड़ी रकम को खर्च करने के बजाय पूरी तरह इन्वेस्टेड रखा. नियमित निवेश और शेयर बाजार की शानदार ग्रोथ की बदौलत आने वाले सालों में उनका पैसा तेजी से बढ़ता चला गया.

अप्रैल 2026 में एसेट एलोकेशन कैसा था?

अप्रैल 2026 तक उनका कुल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो करीब 6.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. उन्होंने अपने इस फंड को इस तरह से बांट रखा था। पोर्टफोलियो का लगभग 60% हिस्सा शेयरों में निवेशित था. शेष 40% हिस्सा डेट फंड्स, लिक्विड इन्वेस्टमेंट्स और प्रोविडेंट फंड (PF) की सेविंग्स में फैला हुआ था.

खर्च का गणित

इंजीनियर ने बताया कि उनके परिवार का सालाना खर्च लगभग 14 लाख रुपये है और टियर 1 शहर में उनका अपना खुद का घर भी है. जब उन्होंने देखा कि उनके पास जरूरत से ज्यादा पैसा है और काम करना अब मजबूरी नहीं बल्कि एक चॉइस बन चुका है तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी.

नौकरी छोड़ने के बाद जिंदगी में आए ये बड़े बदलाव

नौकरी छोड़ने के तीन महीने बाद ही उनके जीवन में बैंक बैलेंस से परे कई चमत्कारी बदलाव देखने को मिले हैं. उनका वजन काफी कम हो गया है. उनकी नींद की समस्या दूर हो गई है और अब उनका ब्लड प्रेशर पूरी तरह से नियंत्रण में है. अब उनका रोज का रूटीन पूरी तरह बदल चुका है. वह अपना समय ध्यान करने, एक्सरसाइज करने, अपने परिवार के साथ रहने, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स पर रिसर्च करने और ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में योगदान देने में बिताते हैं.

इंजीनियर ने बताए जल्दी रिटायर होने के 5 बड़े फॉर्म्युले

अपनी इस यात्रा से सीख लेते हुए उन्होंने उन लोगों के लिए कुछ जरूरी टिप्स और सबक साझा किए हैं जो जल्दी रिटायर होना चाहते हैं.

1- अपने फाइनेंशियल टारगेट तय करें: उन्होंने कहा कि काश उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही अपना FIRE टारगेट तय कर लिया होता. हर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि उसे कितनी रकम के बाद काम छोड़ना है.

2- सैलरी के लिए नेगोशिएट करें: उन्होंने अपने पूरे 20 साल के करियर में एक बार भी अपनी सैलरी के लिए नेगोशिएट नहीं किया था जिससे उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ होगा. इसलिए अपनी सैलरी को लेकर हमेशा नेगोशिएट करें.

3- लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से बचें: वह कभी भी बहुत बड़े खर्च करने वाले इंसान नहीं रहे. फिजूलखर्ची से दूर रहने के कारण उनके लिए नियमित निवेश करना बहुत आसान हो गया.

4- खुद का घर होना फायदेमंद: उन्होंने बताया कि खुद का घर होने की वजह से उन्हें किराए का भुगतान नहीं करना पड़ता था. इससे उनके मासिक खर्चे बेहद कम हो गए और रिटायरमेंट के लिए आवश्यक कुल फंड का आकार भी छोटा हो गया.

5- पारिवारिक सहयोग: वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उनके माता-पिता और उनकी पत्नी के माता-पिता उनके बेटे की उच्च शिक्षा का खर्च उठाने वाले हैं, जिससे उनका भविष्य का एक बहुत बड़ा खर्च पहले ही हट गया.

क्या वह दोबारा नौकरी करेंगे?

इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी तरह से काम करना बंद नहीं किया है. यदि भविष्य में उन्हें कोई सार्थक और अच्छा अवसर मिलता है तो वह दोबारा काम करने पर विचार कर सकते हैं. लेकिन फिलहाल वह अपने समय को अपनी शर्तों पर, अपने परिवार के साथ और कुछ नया सीखने में बिता रहे हैं.

अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर किसी यूजर द्वारा शेयर की गई सामग्री पर आधारित है. मनीकंट्रोल (Moneycontrol) ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करती है.

Video: 10 फीट लंबे कोबरा को आराम से गले में डाल बिहार में घूम रही इस महिला ने सबको हैरत में डाला! कौन है ये?

बिहार के पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर इलाके में एक खौफनाक नजारा देखने को मिला, जब एक घर में अचानक विशालकाय किंग कोबरा पहुंच गया। करीब 10 फीट लंबे इस जहरीले सांप को देखते ही परिवार में दहशत फैल गई। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और लोग मौके पर जुटने लगे। मुन्नी लाल के घर में घुसे इस खतरनाक मेहमान ने कुछ देर के लिए पूरे इलाके में सनसनी पैदा कर दी।

हालांकि, समय रहते रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई और स्थिति को संभाल लिया गया। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को वन्यजीवों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।

स्नेक लेडी’ ने खतरनाक सांप का किया रेस्क्यू

किंग कोबरा की सूचना मिलते ही वाल्मीकिनगर की मशहूर स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं। इलाके में ‘स्नेक लेडी’ के नाम से पहचानी जाने वाली जानकी देवी ने बिना घबराए पूरी सावधानी और अनुभव के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने करीब 10 फीट लंबे किंग कोबरा को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद सांप को उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया। समय रहते हुए किए गए इस रेस्क्यू से परिवार और गांव के लोगों की जान बच गई।

बरसात में क्यों गांवों की ओर आते हैं जहरीले सांप?

वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव और बारिश के दिनों में सांप अक्सर अपने पुराने ठिकानों से निकलकर सुरक्षित जगह की तलाश करते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बसे गांवों में ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अगर घर या आसपास कोई जहरीला सांप नजर आए तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग या किसी प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को इसकी जानकारी दें।

दुनिया के सबसे खतरनाक सांप

किंग कोबरा दुनिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में शामिल है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर डाल सकता है। इसके काटने की स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना बेहद जरूरी होता है।

12 साल की उम्र से शुरू किया था सांपों को बचाने का मिशन

जानकी देवी की पहचान सिर्फ एक रेस्क्यूअर के तौर पर नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए समर्पित योद्धा के रूप में भी है। उन्होंने महज 12 साल की उम्र से सांपों को बचाने का काम शुरू किया था। अब तक वह हजारों जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुकी हैं।

रेस्क्यू के दौरान कई बार खुद सांप के काटने का सामना करने के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ। आज वह इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित संतुलन बनाने की मुहिम में लगातार जुटी हुई हैं।

सांप दुश्मन नहीं, प्रकृति का हिस्सा हैं

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि सही जानकारी और प्रशिक्षित लोगों की मदद से इंसान और खतरनाक वन्यजीवों के बीच टकराव को टाला जा सकता है। डर के बजाय सतर्कता और समझदारी ही ऐसे हालात में सबसे बड़ा हथियार है।

ओवरटाइम से दूरी, HR तक सीधी शिकायत… Gen Z की नई वर्किंग स्टाइल पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर entrepreneur और content creator Sheetal Rijhwani की एक पोस्ट ने अचानक ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में Gen Z कर्मचारियों के काम करने के तरीके को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने इंटरनेट पर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं  एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि Gen Z वाकई में पुराने टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मामला मान रहे हैं।

इस चर्चा ने काम के घंटों, ऑफिस अनुशासन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह बहस सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को भी सामने लेकर आई है।

Gen Z का नया स्टाइल?

पोस्ट के अनुसार, कुछ Gen Z कर्मचारी ऑफिस में एक अलग ग्रुप बनाकर काम करते हैं। ये लोग तय समय पर ऑफिस छोड़ देते हैं, बिना जरूरत देर तक रुककर मैनेजर को खुश करने की कोशिश नहीं करते और वीकेंड पर वर्क कॉल्स भी अवॉइड करते हैं।

ऑफिस की गलत चीजों पर सीधा सवाल

दावा यह भी है कि अगर कोई मैनेजर गलत व्यवहार करता है, तो ये कर्मचारी सीधे HR तक शिकायत पहुंचाते हैं। बताया गया कि HR भी कई मामलों में कर्मचारियों का साथ देता है और मुद्दों को गंभीरता से लेता है।

AC बंद हुआ तो लिया बड़ा फैसला

पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें कहा गया कि ऑफिस की AC खराब होने पर Gen Z ग्रुप ने काम रोक दिया और पास के कैफे से काम करने का फैसला किया, जब तक समस्या ठीक नहीं हुई।

मिलेनियल्स झेल लेते हैं, हम नहीं

एक मजेदार मोड़ तब आया जब कहा गया कि मिलेनियल्स अक्सर ऐसी परिस्थितियों को सह लेते हैं, जबकि Gen Z इसे चैलेंज करते हैं। इसी बात पर पोस्ट में “Emotional damage” जैसा कैजुअल कमेंट भी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने अपनी राय दी। कुछ ने कहा कि Gen Z सच में टॉक्सिक वर्क कल्चर को तोड़ रहा है, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्त रिएक्शन बताया।

नई और पुरानी सोच की टक्कर

कमेंट सेक्शन में Gen X और अन्य यूजर्स ने बताया कि नौकरी का माहौल समय के साथ बदलता रहा है जहां पहले लोग लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते थे, वहीं अब कॉन्ट्रैक्ट और फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर बढ़ रहा है। कई लोगों ने माना कि अब “ओवरवर्क = डेडिकेशन” वाली सोच पर सवाल उठना जरूरी है।

Eetha Teaser: ‘ईथा’ फिल्म में श्रद्धा कपूर का अवतार देख फैंस हुए दीवाने! बॉक्स ऑफिस पर यश की ‘टॉक्सिक’से होगी टक्कर

Eetha Teaser: बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी नई बायोपिक फिल्म ‘ईथा’ को लेकर चर्चा में है। ‘ईथा’ में एक्ट्रेस एक अलग और दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं। फिल्म का पहला टीजर जारी कर दिया गया है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। श्रद्धा इस फिल्म में मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की भूमिका निभाती हुए नजर आ रही हैं। टीजर में उनका नया अंदाज और फिल्म की भव्य झलक दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। फैंस बेसब्री से इसके ट्रेलर और फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। शानदार दृश्यों और बड़े स्तर पर बनी इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही लोगों के बीच एक्साईटमेंट बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया पर छाई श्रद्धा

फिल्म ईथा के टीजर में मशहूर लोक कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की मेहनत, संघर्ष और अपने काम के प्रति उनके जुनून को दिखाया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि वह कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहती हैं। बच्चे को जन्म देने की पीड़ा सहने के बाद भी उनका मंच पर लौटकर प्रस्तुति देना लोगों को इमोशनल कर रहा है। वहीं, श्रद्धा कपूर का पारंपरिक मराठी लुक भी दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है और सोशल मीडिया पर उनके इस नए अंदाज की खूब चर्चा हो रही है।

कब रिलीज होगी फिल्म

फिल्म ‘ईथा’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इसकी रिलीज के साथ ही अभिनेता यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोनअप्स’ भी बड़े पर्दे पर आने वाली है। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। ईथा का टीजर सामने आने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ गया है। फिल्म ईथा में श्रद्धा कपूर के साथ रणदीप हुड्डा, अनंत जोशी और कई अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्माण दिनेश विजान की प्रोडक्शन कंपनी मैडॉक फिल्म्स के सहयोग से किया जा रहा है।

फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल ने तैयार किया है। श्रद्धा कपूर की पिछली फिल्म साल 2024 में रिलीज हुई स्त्री 2 थी। अब दर्शकों को उनकी नई फिल्म ईथा का बेसब्री से इंतजार है।

फैंस ने किया कमेंट

एक फैन ने कमेंट किया, “श्रद्धा कपूर दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं और टीजर देखकर लग रहा है कि इंतजार पूरी तरह सफल रहा। विठाबाई नारायणगांवकर के किरदार में उनका पहला लुक बेहद शानदार है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “2026 में अब तक देखा गया यह सबसे बेहतरीन टीजर है।” वहीं एक और यूजर ने कहा, “टीजर काफी भव्य और प्रभावशाली नजर आ रहा है। श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस कमाल की है और उनके डांस सीक्वेंस देखने लायक हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “अब तक सामने आई झलकियों में ईथा में श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस बेहद दमदार नजर आ रही है। मुझे लगता है कि टॉक्सिक की रिलीज फिर आगे बढ़ सकती है।” एक और यूजर ने लिखा, “श्रद्धा कपूर ईथा के साथ शानदार वापसी करती दिख रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या टॉक्सिक को उसी समय रिलीज करना सही फैसला होगा?”

Upcoming Movies: अगस्त-सितंबर में सिनेमाघरों की होगी चांदी, ‘टॉक्सिक’ और ‘मिर्जापुर द मूवी’ बैक टू बैक देंगी दस्तक

Upcoming Movies: अगस्त-सितंबर में सिनेमाघरों की चांदी होने वाली है। 10 दिन के भीतर ‘टॉक्सिक’ और ‘मिर्जापुर द मूवी’ जैसी दो बड़ी फिल्में रिलीज की जाएंगी। अगस्त के आखिर और सितंबर की शुरुआत का समय सिनेमाघरों (एग्जीबिशन सेक्टर) के लिए बहुत ही एक्साइटिंग होने वाला है।

26 अगस्त को ‘टॉक्सिक’ और उसके तुरंत बाद 4 सितंबर को ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की रिलीज के साथ, थिएटर्स को बैक-टू-बैक दो बड़ी बड़ी फिल्में मिलने वाली हैं। इसकी टाइमिंग वाकई काफी दिलचस्प है। आमतौर पर अगस्त और सितंबर का महीना दशहरा-दिवाली के त्योहारों से ठीक पहले का समय होने की वजह से थोड़ा ठंडा रहता है, इसलिए इतने कम समय के गैप में दो बड़े प्रोजेक्ट्स का आना काफी अनोखा है।

​एक तरफ जहां ‘टॉक्सिक’ के जरिए यश की जबरदस्त पैन-इंडिया अपील फिर से सिनेमाघरों में लौट रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘मिर्जापुर: द मूवी’ इंडिया की सबसे कामयाब और मशहूर OTT फ्रेंचाइजी की बड़े पर्दे पर शुरुआत करने जा रही है। दोनों ही फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही बहुत क्रेज और एक मजबूत फैन बेस है, जो सिनेमाघर मालिकों को लगातार कई हफ्तों तक बिजनेस को बनाए रखने का एक शानदार मौका देगा।

​ऐसे समय में जब फिल्म इंडस्ट्री लगातार ऐसी बड़ी फिल्मों की तलाश में है जो थिएटर्स में भीड़ खींच सकें, यह रिलीज टाइमिंग भारी संख्या में दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने का दम रखती है। यह इस ठंडे माने जाने वाले समय को त्योहारों के सीजन से पहले कैलेंडर के सबसे बेहतरीन और कमाई वाले दिनों में बदल सकती है।

Toxic Release Date: ‘टॉक्सिक’ की नई रिलीज़ डेट का ऐलान, यश की फिल्म अब अगस्त 2026 में देगी दस्तक

Toxic Release Date: यश की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोनअप्स’ के मेकर्स ने आखिरकार फ़िल्म की रिलीज़ डेट तय कर ली है। यह फ़िल्म अब इस साल 26 अगस्त को रिलीज़ होगी।इस की आधिकारिक घोषणा 2023 में मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और वेंकट के. नारायण के KVN प्रोडक्शन्स ने की थी। फ़िल्म की शूटिंग अक्टूबर 2024 में शुरू हुई।

शुरू में इसे 10 अप्रैल 2025 को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन शूटिंग और प्रोडक्शन में देरी के कारण इसे लगभग एक साल आगे बढ़ा दिया गया। इसके बाद फ़िल्म के लिए 19 मार्च 2026 की तारीख तय की गई, जो ईद, गुड़ी पड़वा और उगादि के समय के हिसाब से है।

हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और उसके बाद गल्फ में पैदा हुए संकट की वजह से ‘Toxic’ की रिलीज़ डेट को एक बार फिर 19 मार्च से बदलकर 4 जून कर दिया गया। बयान में कहा गया, “‘Toxic’ बनकर तैयार है और हम अभी ग्लोबल लेवल पर इसके डिस्ट्रीब्यूशन और पार्टनरशिप को व्यवस्थित कर रहे हैं। इसे देखते हुए हमने अपनी रिलीज़ की टाइमलाइन में बदलाव करने का फ़ैसला किया है।

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हालांकि हम पहले घोषित तारीख यानी 4 जून को इसे रिलीज़ नहीं करेंगे, लेकिन हम इसे बाद में किसी ऐसी तारीख पर रिलीज़ करेंगे जो ग्लोबल लेवल पर सही हो। ‘Toxic’ जल्द ही दुनिया भर के सिनेमाघरों में आएगी।” ‘वैरायटी’ को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यश ने अपनी फ़िल्म में हुई देरी के बारे में बात करते हुए कहा, “यह ऐसी बात है जो मेरे फ़ैन्स या भारत के लोगों को पसंद नहीं आएगी। वे नाराज़ होंगे क्योंकि सांस्कृतिक रूप से, जब आप फ़िल्म की शूटिंग शुरू करते हैं, तो लोगों के मन में एक टाइमलाइन बन जाती है।”

कन्नड़ और अंग्रेज़ी में लिखी और शूट की गई इस फ़िल्म के हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम डब वर्शन भी होंगे। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में नयनतारा, हुमा कुरैशी, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे शानदार कलाकार शामिल हैं।