वाराणसी और नागपुर में भाजपा की हार! क्या 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए खतरे की घंटी हैं MLC नतीजे?

वाराणसी और नागपुर में भाजपा की हार! क्या 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए खतरे की घंटी हैं MLC नतीजे?

MLC Election Result 2029

BJP MLC Election Defeat: हाल ही में संपन्न हुए चार राज्यों की विधान परिषद (MLC) की सीटों के परिणामों ने भले ही भाजपा को कुल संख्याबल में बढ़त दिलाई हो, लेकिन दो सबसे महत्वपूर्ण सीटों पर मिली हार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और संघ (RSS) के मुख्यालय व शीर्ष नेताओं के प्रभाव वाले नागपुर में भाजपा को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। यद्यपि यह चुनाव सीमित मतदाता वर्ग (शिक्षक और स्नातक) का था, लेकिन इसके सियासी संदेश काफी गहरे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा ने इन नतीजों से समय रहते सबक नहीं लिया, तो 2029 के आम चुनावों की राह उसके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

वैचारिक और राजनीतिक गढ़ों में सेंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 से लगातार प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी (SP) और अन्य प्रत्याशियों का मजबूत प्रदर्शन यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर असंतोष और उम्मीदवारों का चयन एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत यह स्पष्ट करती है कि आरएसएस और भाजपा के पारंपरिक काडर और मध्यम वर्गीय मतदाताओं के बीच तालमेल में कहीं न कहीं कमी आई है।   ALSO READ: MLC Election Results 2026: यूपी, बिहार में MLC चुनाव परिणामों ने चौंकाया, जानिए कहां किसका पलड़ा भारी?

शिक्षित और युवा वर्ग में बढ़ता असंतोष 

शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों के मतदाता आमतौर पर प्रबुद्ध, मध्यम वर्गीय, सरकारी व निजी क्षेत्र के कर्मचारी और युवा होते हैं। इस वर्ग में भाजपा की हार दर्शाती है कि शिक्षित युवाओं के बीच रोजगार के अवसरों की कमी और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी को लेकर नाराजगी है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना (OPS) और शिक्षकों की सेवा शर्तों व मानदेय से जुड़े लंबित मामले भी इस हार का कारण हो सकते हैं। राज्य सरकार और स्थानीय स्तर के प्रशासन के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी का सीधा प्रभाव भी इन परिणामों पर साफ नजर आ रहा है। 

क्या जेन-जी आंदोलन का भी रहा असर?

हाल ही हुए जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन को भी हलके में नहीं देखना चाहिए। दरअसल, जेन-जी पीढ़ी का बहुत बड़ा वर्ग इस समय ग्रेजुएट है, जो कि इन चुनावों में वोट का अधिकार रखता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इन चुनावों में ‘जेन-जी’ और युवा आंदोलन का स्पष्ट और रणनीतिक असर देखा गया है। हालांकि MLC स्नातक (Graduate) और शिक्षक (Teacher) सीटों के लिए मतदाता पात्रता के कुछ तकनीकी नियम (जैसे डिग्री पूरी करने का समय) आदि होते हैं, फिर भी युवाओं और शिक्षित वर्ग के मुद्दों ने इन नतीजों को कुछ तो प्रभावित किया ही है। दरअसल, जेन-जी और शिक्षित युवा मतदाता पारंपरिक जातिगत और धार्मिक समीकरणों के बजाय ठोस मुद्दों पर मतदान कर रहे हैं।

2029 के लिए भाजपा को क्यों चौकन्ना होना चाहिए?

यह परिणाम दर्शा रहे हैं कि भाजपा को 2029 के चुनाव के लिए अभी से चौकन्ना हो जाना चाहिए। दरअसल, भाजपा की चुनावी सफलताओं का मुख्य आधार शहरी, शिक्षित और मध्यम वर्ग रहा है। यदि यह वर्ग असंतुष्ट होता है, तो इसका असर आम चुनावों में हवा के रुख पर पड़ सकता है। वाराणसी में सपा और नागपुर में कांग्रेस की जीत यह साबित करती है कि यदि विपक्ष सही प्रत्याशी और सटीक स्थानीय रणनीति के साथ उतरे, तो भाजपा के मजबूत से मजबूत किले को भी भेदा जा सकता है। 

 

एमएलसी चुनाव परिणाम 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का समय है। यदि पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को सुलझाने, शिक्षित और मध्यम वर्ग के असंतोष को दूर करने तथा अपने काडर में नई ऊर्जा फूंकने की दिशा में काम नहीं किया, तो 2029 की राह में उसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

यूपी में अब हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी! योगी सरकार ने सख्त किए कैरेक्टर सर्टिफिकेट के नियम

New rules for protests in UP: उत्तर प्रदेश में अब सरकार बदलने के लिए अगर युवा सड़क पर उतरकर हिंसा करते हैं, तो उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की सरकारी नौकरियों में चयनित उम्मीदवारों के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन (character verification) के नियमों को कड़ा कर दिया है। इस नए फैसले के तहत “मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों” में शामिल रहने वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। यह कदम हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान “सत्ता परिवर्तन” (regime change) की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को लेकर जारी विवाद के बीच उठाया गया है।

विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना की है। नियुक्ति और कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की तरफ से जारी ये गाइडलाइंस इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद आए हैं। ये नियम यूपी सरकार के विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होंगे।

गाइडलाइंस में क्या है?

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी ऐसे संगठन की सदस्यता, जो हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था को बदलने की वकालत करता हो उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का आधार बन सकती है। कैरेक्टर सर्टिफिकेट से ठीक पहले के तीन सालों के दौरान (उम्मीदवार के 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद) ऐसी गतिविधियों में शामिल होने को व्यक्ति के लगातार ऐसे कार्यों से जुड़े होने का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, अगर इस बात के ठोस सबूत मिलते हैं कि उम्मीदवार के आचरण में बदलाव आया है, तो इस धारणा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

इन पर नहीं होगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को सरकारी नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, केवल FIR दर्ज होने या कोई जांच लंबित होने भर से ही कोई उम्मीदवार स्वतः अयोग्य नहीं हो जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कुछ अज्ञात समूहों द्वारा देश को अस्थिर करने और बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिशों के प्रति चेतावनी दी थी।

बता दें कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में आदित्यनाथ ने कहा था कि लोकतंत्र में राजनीतिक सत्ता अराजकता के जरिए नहीं, बल्कि जनता के जनादेश (people’s mandate) से हासिल की जानी चाहिए।

सिर्फ FIR दर्ज होने से आवेदक अयोग्य नहीं होंगे

संशोधित नियमों के अनुसार, किसी उम्मीदवार के खिलाफ केवल FIR दर्ज होने या जांच लंबित रहने के आधार पर उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। जिन मामलों में उम्मीदवार बरी हो गया हो, जो मामले आपसी समझौते से सुलझ गए हों, या जो मामले ‘किशोर न्याय कानून’ (Juvenile Justice Law) के दायरे में आते हों, उनके आधार पर भी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

कैरेक्टर वेरिफिकेशन रिपोर्ट (character verification report) लंबित होने की वजह से नियुक्ति पत्र (appointment letter) को रोका नहीं जाएगा। संबंधित अधिकारी उम्मीदवार से स्व-घोषणा पत्र और जरूरी दस्तावेज लेकर उसे ‘प्रोविजनल अपॉइंटमेंट’ (provisional appointment) दे सकते हैं। हालांकि, अगर वेरिफिकेशन के दौरान यह पता चलता है कि उम्मीदवार अयोग्य है या उसने गलत जानकारी दी है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मौजूदा कर्मचारियों को नए सिरे से वेरिफिकेशन से छूट

नए नियमों के तहत, जो सरकारी कर्मचारी पहले से ही नौकरी में हैं, उन्हें फिर से कैरेक्टर वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, नियुक्ति करने वाले अधिकारी उनके पिछले विभागों से जरूरी जानकारी मांग सकते हैं। इन गाइडलाइंस में जिला पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के लिए यह डेडलाइन तय की गई है कि वे अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर वेरिफिकेशन रिपोर्ट सौंप दें।

गृह विभाग (Home Department) इस प्रोसेस में होने वाली देरी की निगरानी करेगा। पुलिस और LIU के कर्मचारियों को उम्मीदवार के घर जाने की जरूरत नहीं होगी और न ही उम्मीदवार का वहां व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना अनिवार्य होगा। यदि वेरिफिकेशन रिपोर्ट उम्मीदवार के खिलाफ (प्रतिकूल) आती है, तो जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश भेजने से पहले उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी (SP) ने इस आदेश की आलोचना करते हुए इसकी तुलना ब्रिटिश शासन के दौरान लगाई गई पाबंदियों से की है। पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर ने NDTV से कहा कि विरोध करने का अधिकार संवैधानिक रूप से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि सरकार में बदलाव चुनाव जैसी स्थापित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए ही होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार पर डराने-धमकाने का तरीका अपनाने का आरोप लगाया।

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कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी इस तरह के मामलों को तय करने के सरकार के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इस तरह के मुद्दों पर फैसला अदालतों को करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ‘जेन जेड’ (Gen Z) के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सरकार की घबराहट को दर्शाता है। फिलहाल, यह विवाद आगामी यूपी चुनाव तक जा सकता है।

UP MLC Election Winner List: यूपी एमएलसी चुनाव की 11 सीटों में से 10 पर आ गया रिजल्ट, जानिए कौन-कहां से जीता, देखें- पूरी विनर लिस्ट

UP MLC Election Results Winner List: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की मतगणना के बीच अब तक 10 सीटों के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित किए गए हैं जिनमें से छह सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तीन पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत हासिल की है। वाराणसी से प्राप्त न्यूज के अनुसार, मतगणना के पांचवें दौर के अंत तक बुधवार रात करीब 11:30 बजे वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी 9,491 मतों से आगे है। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रतिष्ठित सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की।

आधिकारिक परिणामों के अनुसार, मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के दिनेश कुमार गोयल, लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के उमेश द्विवेदी, लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी कांति सिंह, वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव, आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल और आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह विजयी रहे।

इसके अलावा, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के डॉ. मान सिंह यादव, मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के श्रीचंद शर्मा और बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने जीत हासिल की। भाजपा ने गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर भी अपना कब्जा बरकरार रखा जहां पार्टी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 मतों के अंतर से हराया। त्रिपाठी को 14,887, जबकि यादव को 14,580 मत मिले।

परिणाम घोषित होने के बाद ध्रुव त्रिपाठी मतगणना केंद्र से विजय का संकेत दिखाते हुए बाहर निकले। हालांकि, राजीव यादव ने आरोप लगाया कि उनकी हार सुनिश्चित करने के लिए चुनाव में हेरफेर किया गया। उन्होंने करीब 1,000 मतों की चोरी का दावा करते हुए कहा कि वह परिणाम को चुनौती देने के लिए निर्वाचन आयोग और अदालत का रुख करेंगे।

यादव ने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चौथे दौर में गिने गए 1,612 मतों की न्यायिक जांच के बजाय फॉरेंसिक जांच कराने की मांग भी की। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच जीत हासिल की। उन्होंने परिणाम घोषित होने से पहले ही अपनी जीत का दावा किया और प्रशासन पर आधिकारिक घोषणा में देरी करने का आरोप लगाया।

चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने वाराणसी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन परिणाम घोषित नहीं कर रहा है, जिससे संदेह पैदा होता है।

झांसी से सूचना विभाग द्वारा जारी परिणाम के मुताबिक, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से पराजित किया। वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के आशुतोष सिन्हा और लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी की कांति सिंह मजबूत बढ़त बनाए हुए थे।

11 सीटों पर हुए थे मतदान

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 विधान परिषद सीट के लिए मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हुई थी। इससे पहले, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें पार्टी प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल फटा हुआ कुर्ता पहने दिखाई दे रहे थे। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया था कि अग्रवाल के साथ मारपीट की गई। उन्होंने निर्वाचन आयोग, उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रपति से मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। साथ ही, प्रशासन से अग्रवाल को जीत का प्रमाणपत्र तुरंत देने की मांग की।

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना के दौरान मतों की संख्या में अंतर और प्रक्रिया को लेकर भी विवाद हुआ। मऊ के एक मतदान केंद्र की मतपेटी में दर्ज संख्या से 52 मत अधिक मिलने पर प्रत्याशियों ने आपत्ति जताई। इसके अलावा, एक प्रत्याशी की शिकायत के बाद अयोध्या के अपर आयुक्त अजय सैनी को मतगणना ड्यूटी से हटा दिया गया। हालांकि, प्रशासन ने कहा कि मतगणना नियमानुसार कराई जा रही है।

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निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार विजेताओं की लिस्ट

1. मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: दिनेश कुमार गोयल (बीजेपी)

2. आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह (बीजेपी)

3. इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ. मान सिंह यादव (समाजवादी पार्टी)

4. लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: उमेश द्विवेदी (बीजेपी)

5. वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी)

6. आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ. आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी)

7. मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: श्रीचंद शर्मा (बीजेपी)

8. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ. हरि सिंह ढिल्लों (बीजेपी)

9. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: ध्रुव कुमार त्रिपाठी (बीजेपी)

10. लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: कांति सिंह (समाजवादी पार्टी)

11. वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: आशुतोष सिन्हा (समाजवादी पार्टी) आगे; अंतिम दौर की गिनती जारी है।