Income Tax Return: अगर ITR फाइल करने में की ये गलती तो 200% तक पेनाल्टी के साथ जेल भी हो सकती है!

ITR Update: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही कई टैक्स पेयर्स अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के जुगाड़ में लग जाते हैं। कई बार लोग बिना उचित डॉक्युमेंट्स के या फिर फर्जी बिल और रसीदें लगाकर टैक्स छूट का दावा कर देते हैं। शॉर्ट टर्म में यह तरीका भले ही टैक्स बचाने का आसान रास्ता लगे लेकिन इनकम टैक्स एक्ट के तहत इसके बेहद गंभीर और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

मनी कंट्रोल पर्सनल फाइनेंस सेगमेंट में आषुष मिश्रा की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि टैक्स चोरी या गलत वेरिफिकेशन के मामलों में करदाताओं पर भारी-भरकम जुर्माने से लेकर आपराधिक मुकदमा और जेल की सजा तक हो सकती है। आइए जानते हैं कि आईटीआर दाखिल करते समय की गई कौन सी गलतियां आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती हैं।

क्या है धारा 270A और कब लगती है भारी पेनाल्टी?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A असेसिंग ऑफिसर (AO), कमिश्नर (अपील), प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर को यह अधिकार देती है कि अगर कोई टैक्स पेयर अपनी इनकम को कम दिखाता है या गलत जानकारी देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। डिफॉल्ट की गंभीरता के आधार पर यह पेनाल्टी कम दिखाई गई आय पर देय टैक्स के 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक हो सकती है।

इनकम को कम दिखाना क्या है?

1- धारा 270A के तहत नीचे दी गई परिस्थितियों में यह माना जाता है कि टैक्स पेयर ने अपनी इनकम कम दिखाई है:

  • जब आय का कोई हिस्सा बही-खातों या इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित न किया गया हो।
  • आयकर विभाग द्वारा आकलित की गई आय फाइल किए गए ITR में दिखाई गई आय से अधिक हो।
  • कोई टैक्स रिटर्न दाखिल ही न किया गया हो, विभाग द्वारा निर्धारित की गई आय मूल छूट सीमा से अधिक हो।
  • सामान्य प्रावधानों के तहत आकलित की गई आय, धारा 115JB या 115JC के विशेष प्रावधानों के तहत गणना की गई आय से अधिक हो।

2- इनकम को गलत तरीके से पेश करना क्या है?

यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है। धारा 270A के तहत इसे मिसरिपोर्टिंग माना जाता है:

  • तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना या उन्हें छिपाना।
  • बही-खातों में निवेश को दर्ज न करना।
  • बिना किसी पुख्ता सबूत या सहायक दस्तावेजों के खर्चों का दावा करना।
  • बही-खातों में झूठी या फर्जी एंट्रियां दर्ज करना।
  • खातों में प्राप्तियों को दर्ज करने में विफल रहना।
  • किसी अंतरराष्ट्रीय लेनदेन या ऐसे ही किसी माने गए लेनदेन को रिपोर्ट न करना।

फर्जी दस्तावेज दिखाए तो हो सकती है जेल

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक अगर टैक्स बचाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जाता है तो यह सिर्फ टैक्स विवाद नहीं रह जाता बल्कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत एक आपराधिक अपराध बन जाता है। इसके लिए नीचे दी गई धाराएं लगाई जाती हैं-

धारा 276C (जानबूझकर टैक्स चोरी का प्रयास): अगर टैक्स चोरी की रकम 25 लाख रुपये से अधिक है तो दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सश्रम जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर यह राशि 25 लाख रुपये से कम है तो जेल की अवधि 3 महीने से 2 साल तक और साथ में जुर्माना हो सकता है।

धारा 277 (सत्यापन में झूठे बयान): यह धारा तब लागू होती है जब कोई करदाता जानबूझकर झूठे दस्तावेजों को सत्यापित करता है या जमा करता है। टैक्स चोरी के प्रयास की राशि के आधार पर इसमें 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

धारा 278 (उकसाना या बढ़ावा देना): इसके तहत केवल टैक्स भरने वाला ही नहीं बल्कि अपराध को बढ़ावा देने या सुविधाजनक बनाने वाला कोई भी व्यक्ति (जैसे कन्सल्टेंट, एजेंट, या फर्जी डोनेशन/किराया रसीद जारी करने वाली संस्था) भी कानूनी कार्रवाई और सजा का भागीदार बनेगा।

अन्य कानूनी शिकंजे और री-असेसमेंट का खतरा

अगर जालसाजी के लिए नकली स्टांप, फर्जी सील या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं भी लागू हो सकती हैं। इसके अलावा अगर बड़े पैमाने पर संगठित रूप से धारा 80G के तहत फर्जी डोनेशन रसीदें जारी करने या बड़े कैश ट्रेल का मामला सामने आता है तो प्रवर्तन एजेंसियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भी कार्रवाई कर सकती हैं। अगर किसी एक वित्त वर्ष में आपके दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो आयकर विभाग पिछले वर्षों के मामलों को भी दोबारा खोल सकता है ताकि यह जांचा जा सके कि क्या अतीत में भी ऐसे फर्जी दावे किए गए थे।

एक्सपर्ट की राय: विभाग के पास है आपका पूरा डेटा

एचजे अग्रवाल एंड कंपनी (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स) के पार्टनर हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में आयकर विभाग के पास एक दशक पहले की तुलना में वित्तीय जानकारी के कहीं अधिक व्यापक स्रोत हैं। वह कहते हैं कि विभाग एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे सिस्टम के जरिए आपकी सैलरी, बैंकिंग, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय डेटा को आसानी से क्रॉस-वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में गलत या फर्जी डिडक्शन के दावों को पकड़ना अब बेहद आसान हो चुका है।

हर्षित अग्रवाल ने सलाह दी कि वित्तीय जुर्माने से कहीं अधिक दर्दनाक और लंबी चलने वाली आपराधिक प्रक्रियाएं होती हैं जो सालों ले सकती हैं और अत्यधिक मानसिक तनाव व कानूनी खर्च का कारण बनती हैं। ऐसे में अगक किसी करदाता को यह अहसास होता है कि उसने कोई गलत दावा कर दिया है तो विभाग द्वारा पकड़े जाने का इंतजार करने के बजाय खुद से आगे आकर रिवाइज्ड (संशोधित) या अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर उसे सुधार लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

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EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस

epfo

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो अब आपका Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) में जमा Provident Fund (PF) बैलेंस ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। EPFO के नए सदस्य पोर्टल पर कर्मचारियों को अपने पुराने नियोक्ता (Employer) के PF खाते से नए खाते में राशि ट्रांसफर करने के लिए दो आसान विकल्प दिए गए हैं।

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EPFO का कहना है कि इस नए फीचर का उद्देश्य PF ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाना, कागजी कार्रवाई कम करना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को बिना किसी अनावश्यक देरी के एक ही खाते में समेकित करना है।

 

EPFO पोर्टल में हुआ बड़ा अपग्रेड

 

हाल ही में EPFO के सदस्य पोर्टल में डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किया गया था। इस दौरान पोर्टल लगभग दो सप्ताह तक प्रभावित रहा और ऑनलाइन सेवाओं की बहाली में कई बार देरी हुई। अब पोर्टल की सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। हालांकि EPFO ने कहा है कि फिलहाल PF क्लेम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के निपटान में कुछ समय लग सकता है।

 

नौकरी बदलने पर PF बैलेंस ट्रांसफर करने के दो तरीके

 

PF ट्रांसफर शुरू करने से पहले कर्मचारियों को अपने Universal Account Number (UAN) की मदद से EPFO सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वे निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं।

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1. 'Request for Transfer of Account' विकल्प
 

2. 'Member Service History' के जरिए

 

EPFO 3.0 में कर्मचारियों को Member Service History सेक्शन में अपने पुराने और वर्तमान रोजगार की पूरी जानकारी देखने की सुविधा मिलती है।

 

  • यदि कोई PF ट्रांसफर लंबित नहीं होगा तो स्टेटस “No” दिखाई देगा।
  • इसके बाद Claim लिंक पर क्लिक करें।
  • Form 13 के जरिए Service Transfer Claim दर्ज करें।
  • इसके बाद आपकी PF ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  • UAN नहीं पता तो क्या करें?

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अगर आपको अपना Universal Account Number (UAN) याद नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इसे—

 

  • अपनी नवीनतम Salary Slip में देख सकते हैं।
  • या फिर अपने Employer (नियोक्ता) से प्राप्त कर सकते हैं।
  • कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
  • PF ट्रांसफर की प्रक्रिया होगी आसान।
  • कागजी कार्रवाई में होगी कमी।
  • पुराने और नए PF खाते को एक जगह समेकित करना होगा सरल।
  • रिटायरमेंट सेविंग्स का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
  • नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर में देरी की संभावना होगी कम।

8th Pay Commission के तहत सीनियर कंसल्टेंट से यंग प्रोफेशनल बनने का मौका, 1.8 लाख तक सैलरी! फुल डिटेल जानिए

8th Pay Commission Job and Salary details: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा और उसमें बदलाव की सिफारिशें करने के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ काम करने का एक शानदार मौका है। 8वें वेतन आयोग ने कंसल्टेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। इसकी लास्ट डेट नजदीक आ रही है। आपको बता दें कि इस भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य प्रोफेशनल्स के पास आवेदन करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है।

हमारे सहयोगी ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सबसे पहले 10 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर तीन अलग-अलग कैटेगिरी में कांट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे थे। आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, मुआवजा, लीगल रीसर्च, डेटा विश्लेषण और पॉलिसी से जुड़ी स्टडी जैसे काम के लिए सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स की हायरिंग कर रहा है। आइए इस भर्ती से जुड़ी वैकेंसी, योग्यता, सैलरी और काम के स्वरूप की पूरी डिटेल विस्तार से जानते हैं:-

वैकेंसी की पूरी डिटेल (उम्र सीमा और अनुभव)

रिपोर्ट के मुताबिक इन वैकेंसी के लिए एज और एक्सपीरिंस को कैलकुलेट करने के लिए कट-ऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के लिए अधिकतम 5 पद निकाले गए हैं। इसके लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष और न्यूनतम रेलेवेंट एक्सपीरियंस 10 वर्ष होना चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट पद के लिए भी अधिकतम 5 वैकेंसियां हैं। इसमें आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा 40 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 6 वर्ष निर्धारित किया गया है। यंग प्रोफेशनल के लिए सबसे ज्यादा यानी मैक्सिमम 10 पद हैं। इसके लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा 32 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 4 वर्ष होना जरूरी है।

क्या योग्यता है जरूरी?

आवेदकों के पास नीचे दी गई योग्यताओं में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:-

फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्सेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस या इससे जुड़े विषयों में मास्टर्स डिग्री या MBA, या

LL।B डिग्री के साथ बार काउंसिल/बार एसोसिएशन में क्रेडेंशियल होना चाहिए और ट्रिब्यूनल या अदालतों के समक्ष लीगल रीसर्च या सर्विस मैटर में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।

अनिवार्य योग्यता: सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन टूल्स का ज्ञान होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों के पास वेतन, मुआवजा या स्टैबिलिशमेंट से जुड़े मामलों का अनुभव है उन्हें चयन में वरीयता दी जाएगी।

सैलरी और कार्यकाल

ये नियुक्तियां पूरी तरह से कांट्रैक्ट बेसिस पर होंगी। ये शुरुआत में एक साल या वेतन आयोग के कार्यकाल तक (जो भी पहले हो) के लिए की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

पदों के हिसाब से तय मासिक मानदेय इस प्रकार है:-

सीनियर कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.8 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹90000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000

कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.2 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹60000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹30000

यंग प्रोफेशनल: फुल-टाइम के लिए ₹90000, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹22500

इस सैलरी में से इनकम टैक्स और अन्य लागू कटौतियां (TDS) की जाएंगी।

चयनित कंसल्टेंट्स को क्या काम करना होगा?

ऑफिशियल गाइडलाइंस के मुताबिक चुने गए प्रोफेशनल्स को आयोग के साथ नीचे दिए गए काम करने होंगे:-

मौजूदा वेतन, भत्तों, पेंशन और उपलब्ध परिलब्धियों के ढांचे का विश्लेषण करना।

वेतन और मुआवजे के ट्रेंड्स की पहचान करने के लिए डेटा, रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन करना।

आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर लीगल रीसर्च करना।

डेटा इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय करना।

मानव संसाधन, मुआवजा, ग्रेच्युटी और बोनस तंत्र पर विशेष अध्ययनों में सहायता प्रदान करना।

आयोग को प्राप्त होने वाले ज्ञापनों और प्रतिवेदनों का विश्लेषण करना।

आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले राजकोषीय प्रभाव का अनुमान लगाना।

रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशन और अन्य विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करना।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवारों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना होगा। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार के फिजिकल या हार्ड-कॉपी आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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Video: 1 लाख रुपये कमाने वाले लोग हो जाएं अलर्ट, जानिए क्यों बताई गई यह इनकम खतरनाक

हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी पाना कई लोगों के लिए आर्थिक सफलता का संकेत माना जाता है। ये आय स्तर एक आरामदायक जीवन जीने, जरूरी खर्च पूरे करने और कुछ इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता देता है। लेकिन अब इसी कमाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। साल 2026 में एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया है कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कई लोगों के लिए एक तरह का ‘कम्फर्ट ट्रैप’ बन सकती है।

उनके अनुसार, समस्या कमाई की रकम में नहीं बल्कि उस संतुष्टि में है, जो व्यक्ति को बड़े लक्ष्य तय करने से रोक सकती है। इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इससे सहमत हैं तो कुछ इसे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से अलग मान रहे हैं।

कंटेंट क्रिएटर ने बताया ‘सबसे खतरनाक सैलरी’

इंस्टाग्राम पर पर्सनल फाइनेंस और माइंडसेट से जुड़े वीडियो बनाने वाली निधि कुशवाहा ने कहा कि 1 लाख रुपये प्रति माह की सैलरी कम होना इसकी समस्या नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका आरामदायक होना है। उनका कहना है कि इतनी आय कई लोगों को इतना संतुष्ट कर सकती है कि व बड़े सपने देखने और आगे बढ़ने की कोशिश कम कर दें।

आराम कब बन जाता है करियर की रुकावट?

निधि के मुताबिक, 1 लाख रुपये की मासिक कमाई से लोग किराया, रोजमर्रा के खर्च, वीकेंड आउटिंग और साल में एक-दो ट्रिप जैसी चीजें आसानी से मैनेज कर लेते हैं। यही सुविधा कई बार लोगों को अपनी सीमाओं से बाहर निकलने और नए जोखिम लेने से रोक सकती है। उनका मानना है कि जब इंसान को लगता है कि जिंदगी पूरी तरह सेट हो गई है, तो आगे बढ़ने की भूख धीरे-धीरे कम हो सकती है।

‘ज्यादा कमाने की चाह’ खत्म होने का खतरा

निधि ने अपने वीडियो में कहा कि असली खतरा कम आय में नहीं बल्कि उस स्थिति में है, जहां व्यक्ति आरामदायक जीवन में इतना खुश हो जाए कि नए लक्ष्य बनाना छोड़ दे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सिर्फ आरामदायक कमाई पर रुकने के बजाय लगातार सीखने, निवेश करने और नए अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग राय रखी। कुछ यूजर्स ने माना कि ज्यादा आराम इंसान को आगे बढ़ने से रोक सकता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जीवन में सफलता का पैमाना हमेशा ज्यादा पैसा कमाना ही होना चाहिए।

एक यूजर ने पूछा कि अगर 10 लाख रुपये महीने की सैलरी हो तो क्या वह भी खतरनाक होगी? वहीं कुछ लोगों ने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में 1 लाख रुपये की कमाई उतनी बड़ी नहीं रही जितनी पहले मानी जाती थी।

असली सवाल

इस बहस का कोई तय जवाब नहीं है कि कौन-सी सैलरी इंसान को रोक देती है। कुछ लोगों के लिए 1 लाख रुपये की आय आर्थिक स्थिरता हो सकती है, जबकि दूसरों के लिए ये सिर्फ एक पड़ाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि आय चाहे जितनी हो, सही बचत, निवेश और नए लक्ष्य बनाते रहना जरूरी है, ताकि आराम विकास की राह में बाधा न बने।

19 साल की उम्र में लिखवाई वसीयत, माता-पिता नहीं बल्कि बचपन के दोस्त को सौंप दी पूरी संपत्ति