ट्विशा शर्मा की फंदे की बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू, AIIMS फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोले नए राज

एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत मामले में दिल्ली AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि कथित तौर पर फंदे के लिए इस्तेमाल की गई जिम्नास्टिक्स बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू ट्विशा की गर्दन के चोट के निशानों से मेल खाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिमनास्टिक बेल्ट पर मिले बेहद छोटे स्किन टिश्यू, ट्विशा शर्मा की गर्दन पर मिले चोट के निशानों और गला घोंटने के निशानों (लिगेचर मार्क) से मेल खाते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह से हिरासत में पूछताछ करने की मांग तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने उनकी जमानत का भी कड़ा विरोध किया है और दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए लगातार परेशान किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि उनकी मौत से करीब एक हफ्ते पहले उनका जबरन गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) कराया गया था। इसके अलावा मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और दूसरे अहम सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने और उनसे छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया गया है।

गला घोंटने में इस्तेमाल हुई चीज की पहचान कैसे होती है?

फांसी या गला घोंटकर हुई मौत के मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल बोर्ड कई वैज्ञानिक तरीकों से जांच करते हैं। सबसे पहले वे गर्दन पर बने निशानों की चौड़ाई, गहराई और आकार को ध्यान से मापते हैं। इसके बाद इन निशानों का मिलान उस संदिग्ध वस्तु से किया जाता है, जिससे गला घोंटने की आशंका होती है, जैसे बेल्ट, रस्सी या कोई दूसरी चीज। जांच के दौरान विशेषज्ञ यह भी देखते हैं कि गर्दन पर किसी धातु की रिंग, बकल या कपड़े और फाइबर की बनावट जैसे खास निशान मौजूद हैं या नहीं। इन सभी सबूतों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि गला घोंटने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया गया था।

टिश्यू की जांच से क्या पता चलता है?

फोरेंसिक जांच में विशेषज्ञ गर्दन पर बने निशान वाली जगह से त्वचा का एक छोटा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से उसकी जांच करते हैं। इस दौरान वे देखते हैं कि वहां खून जमा हुआ है या नहीं, अंदरूनी रक्तस्राव हुआ है या सूजन मौजूद है। अगर ऐसे बदलाव मिलते हैं, तो इससे पता चलता है कि चोट व्यक्ति के जीवित रहते लगी थी। इसके अलावा जिस बेल्ट, रस्सी या दूसरी वस्तु से गला घोंटने की आशंका होती है, उसकी भी लैब में जांच की जाती है। विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि उस पर इंसानी त्वचा के कण, पसीने के निशान या दूसरे जैविक सबूत मौजूद हैं या नहीं।

फांसी और गला घोंटने के निशान में क्या अंतर होता है?

फोरेंसिक विशेषज्ञ गर्दन पर बने निशानों की दिशा और आकार का भी अध्ययन करते हैं। आमतौर पर फांसी के मामले में गर्दन का निशान तिरछा होता है और गांठ की तरफ ऊपर की ओर जाता है। यह निशान अक्सर गर्दन के ऊपरी हिस्से में दिखाई देता है। वहीं, अगर किसी का गला घोंटा गया हो, तो निशान आमतौर पर सीधा और पूरी गर्दन के चारों ओर होता है। ऐसे निशान गर्दन के निचले हिस्से में पाए जाते हैं। इन सभी वैज्ञानिक जांचों की मदद से विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करते हैं कि मौत फांसी से हुई या गला घोंटने की वजह से।

गांठ और सबूतों की जांच कैसे होती है?

फोरेंसिक जांच के दौरान विशेषज्ञ जिस रस्सी, बेल्ट या दूसरी वस्तु से गला घोंटने की आशंका होती है, उसकी गांठ को बिना खोले सावधानी से जांचते हैं। वे गांठ का आकार और उसका तरीका देखते हैं ताकि यह समझा जा सके कि क्या ऐसी गांठ कोई व्यक्ति खुद बांध सकता था या फिर इसमें किसी दूसरे व्यक्ति के शामिल होने की संभावना है।

इसके बाद विशेषज्ञ यह भी जांचते हैं कि शरीर के वजन और गुरुत्वाकर्षण के कारण गर्दन पर मिले निशान वैसे बन सकते थे या नहीं। अगर गर्दन पर एक से ज्यादा या अलग-अलग तरह के निशान मिलते हैं, तो इससे हाथापाई या संघर्ष होने की आशंका मजबूत होती है। ऐसे सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि मामला आत्महत्या का है या किसी और वजह से मौत हुई है। फोरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से मिले हर सबूत की कई चरणों में वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हैं। सभी जांच पूरी होने के बाद ही वे किसी नतीजे पर पहुंचते हैं, ताकि उनकी रिपोर्ट मजबूत हो और अदालत में सबूत के तौर पर टिक सके।

नया सबूत क्यों माना जा रहा है अहम?

इस मामले में सामने आए नए फोरेंसिक सबूत को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शुरुआती पुलिस जांच पर पहले से ही कई सवाल उठ चुके थे। जांच प्रक्रिया में कुछ बड़ी कमियां होने के आरोप भी लगे थे। सबसे बड़ा सवाल यह था कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम के दौरान जिस जिमनास्टिक बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई, उसे डॉक्टरों के सामने जांच के लिए पेश ही नहीं किया गया। इसकी वजह से डॉक्टर बेल्ट और गर्दन पर मिले निशानों का मिलान नहीं कर सके।

पीड़िता के परिवार और सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया था कि घटनास्थल से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। उनका कहना था कि मामले में प्रभावशाली लोगों के कारण जांच प्रभावित हुई। अब बेल्ट पर मिले जैविक नमूनों की फोरेंसिक जांच से यह पुष्टि होने का दावा किया गया है कि उसी बेल्ट का इस्तेमाल किया गया था। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला है। वहीं सीबीआई का दावा है कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कलाई और कोहनी पर ऐसे चोट के निशान मिले थे, जो फांसी से पहले लगे थे। जांच एजेंसी का मानना है कि इन चोटों की भी विस्तार से जांच जरूरी है।

जबरन घर में घुसा, प्राइवेट पार्ट दिखाए, कौन है महिला के साथ अश्लील हरकत करने वाला डिलीवरी एजेंट?

बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट के एक डिलीवरी एजेंट को महिला के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में हुई है। महिला ने बताया कि डिलीवरी एजेंट पार्सल देने उसके घर आया था। बता दें कि, महिला ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया है कि फ्लिपकार्ट का एक डिलीवरी एजेंट जबरन उसके घर में घुस आया और उसके साथ अश्लील हरकत की। महिला का कहना है कि आरोपी ने उन्हें अपने प्राइवेट पार्ट दिखाए।

पुलिस ने लिया ये एक्शन 

महिला की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। महिला के मुताबिक, डिलीवरी एजेंट उनके घर एक पार्सल देने आया था। पार्सल देने के बाद उसने टॉयलेट इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी। महिला ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद वह जबरदस्ती घर के अंदर घुस गया। महिला का आरोप है कि वॉशरूम से बाहर निकलते समय उसने अश्लील हरकत करते हुए उन्हें अपने निजी अंग दिखाए।

महिला ने बताई हैरान कर देने वाली कहानी 

महिला ने अपनी पोस्ट में बताया, “मैंने कई बार मना किया और साफ कहा कि मैं किसी अजनबी को अपने फ्लैट के अंदर आने की अनुमति नहीं देती। मैंने उसे यह भी कहा कि अगर बहुत जरूरी है, तो वह आसपास रहने वाले किसी पुरुष पड़ोसी से मदद मांग सकता है। लेकिन बार-बार मना करने के बावजूद उसने अपनी चप्पल उतारी और मेरी इजाजत के बिना जबरन घर के अंदर घुस गया।”

महिला ने आगे आरोप लगाया, “जब वह वॉशरूम से बाहर आया, तो उसने मेरे सामने अश्लील हरकत करते हुए अपने निजी अंग दिखाए। उस समय मैं बेहद घबरा गई। मुझे अपमानित और असुरक्षित महसूस हुआ। एक महिला के ‘नहीं’ कहने के बाद वहीं बात खत्म हो जानी चाहिए थी। किसी भी व्यक्ति को किसी महिला की इच्छा के खिलाफ उसके घर में घुसने या उसकी निजी सीमा का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।”

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

महिला की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और उनसे संपर्क कर पूरी जानकारी मांगी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। महिला की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 79 और 329(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में की है और उसे गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद फ्लिपकार्ट ने भी बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही आरोपी डिलीवरी एजेंट को तुरंत नौकरी से हटा दिया गया है।

फ्लिपकार्ट ने कही ये बात

फ्लिपकार्ट ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा, “इस मामले से हमें गहरा दुख हुआ है और हम पीड़ित ग्राहक को पूरा सहयोग दे रहे हैं। हमारे लिए ग्राहकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जैसे ही हमें इस घटना की जानकारी मिली, हमने संबंधित डिलीवरी एजेंट की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दीं। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और हम पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “हर डिलीवरी एजेंट को काम पर रखने से पहले उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है और जरूरी ट्रेनिंग भी दी जाती है। हालांकि इस तरह की घटनाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन ऐसी एक भी घटना स्वीकार नहीं की जा सकती। हम पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ग्राहकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।”

‘आमिर खान Love Jihad के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं’; अभिनेता की तीसरी शादी पर भड़के महाराष्ट्र के मंत्री

Nitesh Rane on Aamir Khan: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता नितेश राणे ने बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तय करना उनका काम नहीं है कि किसकी शादी में कौन जाए। लेकिन अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो आमिर खान को अपना आदर्श मानते हैं, इस पर विचार करें कि उन्हें उनसे कैसी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर खान ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बनते जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, शिरडी में आमिर खान की तीसरी शादी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री नितेश राणे ने कहा, “यह तय करना मेरा काम नहीं है कि कौन किसकी शादी में शामिल होगा। लेकिन, अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो उन्हें एक सेलिब्रिटी मानते हैं, इस पर सोचें कि उन्हें इससे किस तरह की प्रेरणा लेनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि जब सेलिब्रिटी अपनी निजी जिंदगी के बारे में ऐसे फैसले लेते हैं, तो हिंदू समाज को इस पर सोचना चाहिए। आमिर खान असल में ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं।”

राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, आमिर खान की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री का कहना है कि ‘लव जिहाद’ संबंधी आरोप उनका व्यक्तिगत राजनीतिक बयान है। आमिर खान ने इसी महीने गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी की थी। रीना दत्ता और किरण राव के बाद यह आमिर खान की तीसरी शादी है।

आमिर खान ने 1986 में रीना दत्ता से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे अभिनेता जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद आमिर ने 2005 में किरण राव से दूसरी शादी की। इस शादी से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ। हालांकि, साल 2021 में दोनों ने अलग होने का ऐलान कर दिया। अब आमिर ने तीसरी शादी की है।

मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं नितेश राणे

नितेश राणे पहले भी कई ऐसे सार्वजनिक बयान दे चुके हैं जिन्हें आलोचकों, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक बताया है। इनमें मुस्लिम समुदाय, मस्जिदों, हलाल, लव जिहाद और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर उनकी तीखी टिप्पणियां शामिल रही हैं। दूसरी ओर, राणे और उनके समर्थकों का कहना है कि वे हिंदू हितों की बात करते हैं और उनके बयान कानून या सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर आधारित हैं।

Love Jihad क्या होता है?

‘लव जिहाद’ एक बेहद संवेदनशील और विवादित शब्द है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहसों में किया जाता है। इस शब्द का उपयोग उन मामलों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जहां कथित तौर पर कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला (आमतौर पर हिंदू या ईसाई) को शादी के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित करने के इरादे से प्रेम जाल में फंसाता है।

इस विषय से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोण और मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:-

1. आरोप और चिंताएं (दावा करने वालों का पक्ष)

धर्मांतरण का आरोप: दक्षिणपंथी संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों का आरोप है कि यह एक संगठित प्रयास है, जिसके तहत पहचान छिपाकर (जैसे गलत नाम बताकर) या शादी का झांसा देकर महिलाओं का जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

पारिवारिक और सांस्कृतिक चिंताएं: इन समूहों का मानना है कि इसके पीछे जनसांख्यिकीय (demographic) बदलाव या सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने का इरादा होता है।

2. आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

आरोप निराधार: आलोचकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी दलों का कहना है कि ‘लव जिहाद’ जैसी कोई संगठित साजिश नहीं है। उनका मानना है कि इस शब्द का इस्तेमाल सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने और वयस्कों की अपनी मर्जी से की जाने वाली अंतरधार्मिक (interfaith) शादियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता: आलोचकों का तर्क है कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

3. अदालतों और जांच एजेंसियों का रुख

एनआईए (NIA) और पुलिस जांच: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कुछ मामलों की जांच की है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी या जबरन धर्मांतरण के मामले तो सामने आए हैं। लेकिन किसी केंद्रीयकृत या संगठित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क या साजिश के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

संसद में बयान: भारत सरकार ने भी संसद में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि मौजूदा कानूनों में ‘लव जिहाद’ जैसी कोई परिभाषा नहीं है और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ऐसा कोई संगठित मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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4. राज्यों के कानून

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने ‘गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ (Anti-Conversion Laws) पारित किए हैं। हालांकि, इन कानूनों में सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं है। लेकिन इनमें शादी के लिए धोखाधड़ी, लालच या जबरन किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने और इसके लिए सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

नौकरी के लिए मां ही नहीं आयुषी ने पिता की भी ली थी जान? मामा ने लगाए सनसनीखेज आरोप

जयपुर में नीरज शर्मा हत्याकांड ने पूरे देश को हैरान कर दिया। इस केस में उनकी बेटी आयुषी शर्मा पहले से ही अपनी मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार है। वहीं जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, हर दिन लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब पुलिस ये भी पता लगा रही है कि क्या उसके पिता विजय शर्मा की मौत से भी उसका कोई संबंध था। बता दें साल 2025 में आयुषी के पिता विजय शर्मा की मौत हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मामलों से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

3 जुलाई को हुई थी हत्या

नीरज शर्मा की 3 जुलाई को प्रताप नगर इलाके में एक स्कॉर्पियो वाहन से कुचलकर हत्या की गई थी। नीरज शर्मा सरकारी विभाग में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के पद पर कार्यरत थीं। शुरुआती तौर पर इसे सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में मामला हत्या का निकला। जयपुर में नीरज शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस ने उनकी 23 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, आयुषी पर अपनी मां की हत्या की योजना बनाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में उसके चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि की भी भूमिका सामने आई है, जो फिलहाल फरार है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस केस में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार आरोपी की तलाश जारी है।

पिता की भी की थी हत्या?

ब्रट की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के मुताबिक, नीरज शर्मा की हत्या को अंजाम देने के लिए आरोपियों को करीब 7 लाख रुपये दिए गए थे। वहीं, इस मामले में अब एक नया पहलू भी सामने आया है। आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2025 में उसके पिता विजय शर्मा की मौत नॉर्मल नहीं थी। उन्होंने पुलिस और अदालत से पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। राकेश ने कहा कि ये मामला परिवार की संपत्ति और सरकारी नौकरी से जुड़े एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है।

आयुषी पर लगाए ये आरोप

राकेश शर्मा के आरोप के मुताबिक, आयुषी ने उन्हें बताया था कि उसके पिता विजय शर्मा जयपुर के निविक हॉस्पिटल में भर्ती हैं। जब परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने बताया कि विजय शर्मा के शरीर को गंभीर चोटें आई थीं और उनकी हालत बेहद नाजुक थी। शिकायत के अनुसार, कुछ समय बाद आयुषी उन्हें अस्पताल से घर ले आई, जहां बाद में विजय शर्मा की मौत हो गई। अब इन आरोपों के आधार पर पुलिस पूरे मामले की भी जांच कर रही है।

राकेश शर्मा के मुताबिक, आयुषी ने एक बार अपनी मां को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी। परिवार ने ये भी आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में विजय शर्मा को ब्रेन हैमरेज होने के बाद आयुषी ने उनके इलाज और स्वास्थ्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां रिश्तेदारों से छिपाकर रखीं। इन सभी आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

मां से नाराज थी आयुषी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आयुषी ने बताया कि वह लंबे समय से अपनी मां से नाराज थी। उसका दावा था कि परिवार में उसे अपने दिव्यांग भाई की तुलना में कम महत्व और स्नेह मिला। जांच में यह भी सामने आया कि पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद और आपसी मनमुटाव इस मामले की संभावित वजह हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पूछताछ में साइकोलॉजिस्ट की भी मदद ली जाएगी।

पुलिस कर रही मामले की जांच

पुलिस उपायुक्त रंजीता शर्मा ने बताया कि मामले का मुख्य आरोपी बलराम अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश लगातार की जा रही है। उन्होंने कहा कि विजय शर्मा की मौत से जुड़े लगाए गए आरोपों की भी अलग से जांच होगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर नए आरोप जोड़े जा सकते हैं या नया मामला दर्ज किया जा सकता है।

Ketan Agarwal Murder Case: केतन की हत्या करने से पहले सिया ने चेतन से कर ली थी शादी! WhatsApp चैट से हुआ खुलासा

Ketan Agarwal Murder Case: लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहागढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर धक्का देकर नीचे गिराने और उनकी मौत के मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। अब इस केस में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि केतन की मंगेतर और इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर पहले से शादीशुदा थीं।

News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि आरोपी सिया गोयल और उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने चार महीने पहले अपने परिवारों से छिपाकर गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी।

खबरों के मुताबिक, उनके फोन से मिली WhatsApp चैट से यह बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन चैट ने इस गुपचुप शादी का राज खोल दिया है और पूरे मामले को एक नया मोड़ दिया है।

आरोप है कि 18 जून को केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से नीचे धकेलकर मार डाला गया था। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है।

WhatsApp चैट और इंटरनेट हिस्ट्री से कथित तौर पर क्या पता चला?

News18 के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों के फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की जांच की। पिछले छह-सात महीनों के डिजिटल डेटा की जांच के दौरान, जांच करने वालों को पता चला कि सिया और चेतन ने कथित तौर पर चार महीने पहले ही शादी कर ली थी, लेकिन परिवारों के डर से इसे छिपाकर रखा था।

पुलिस को शक है कि इसी गुपचुप शादी के बाद केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई थी।

‘मुझमें हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ’: सिया ने कथित तौर पर चेतन से क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश कथित तौर पर 14 जून को ही की गई थी, लेकिन सिया आखिरी पल में घबरा गई और कोशिश नाकाम रही। इसके बाद, उसने कथित तौर पर चेतन को मैसेज किया, “मुझमें यह करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ – हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से नीचे धकेल देंगे।” जांचकर्ताओं का कहना है कि दोनों ने कथित तौर पर 18 जून को मिलकर हत्या को अंजाम दिया।

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थाइलैंड में बच्चे ने 10 बौद्ध भिक्षुओं को कुचला, VIDEO:बिना इजाजत पिता का पिकअप ट्रक चला रहा था, 10 किमी चलाने के बाद कंट्रोल खोया

थाईलैंड के मुकदाहन शहर में गुरुवार को एक बच्चे ने पिकअप ट्रक से बौद्ध भिक्षुओं के जुलूस को कुचल दिया। जिसमें कम से कम 10 भिक्षुओं की मौत हो गई और 5 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस के मुताबिक, 11 साल का एक लड़का अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना इजाजत लेकर निकला था। करीब 10 किलोमीटर चलाने के बाद उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया और तीर्थयात्रा पर निकले भिक्षुओं के जुलूस में जा घुसा। यह हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे हुआ। भिक्षुओं का समूह सड़क किनारे एक लाइन में पैदल चल रहा था। स्थानीय रेस्क्यू संगठन की ओर से जारी CCTV फुटेज में पिकअप ट्रक तेज रफ्तार में जुलूस को टक्कर मारता नजर आया। 35 भिक्षु और पांच श्रद्धालु तीर्थयात्रा पर निकले थे थाईलैंड की 93% से ज्यादा आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। सार्वजनिक धार्मिक यात्राएं और जुलूस आम बात हैं। मुकदाहन के गवर्नर वोरायन बुन्नारात के मुताबिक, गुरुवार को कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच आम श्रद्धालु एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पैदल तीर्थयात्रा कर रहे थे। यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद यह हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पांच भिक्षुओं की मौत मौके पर हुई, जबकि अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायलों का इलाज चल रहा है। मुकदाहन अस्पताल ने घायलों के इलाज के लिए लोगों से तत्काल रक्तदान की अपील भी की है। बच्चे के परिजनों ने पुलिस को पिकअप ट्रक न होने की सूचना दी पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़का घर पर अकेला था। वह उस दिन अस्वस्थ होने के कारण स्कूल नहीं गया था। इसी दौरान उसने अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना अनुमति ले लिया। जब परिजनों को पिकअप घर पर नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने हादसे के बाद वाहन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया प्रांतीय पुलिस प्रमुख मेजर जनरल पैरोज थाइफुत्सा ने कहा कि लड़का नाबालिग है। फिलहाल उससे पूछताछ नहीं हो सकी है क्योंकि वह सदमे में है और बयान देने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से अभी तक कोई आरोप तय नहीं किया गया है। पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। बाद में BBC से बातचीत में पुलिस प्रमुख ने कहा कि लड़के की देखभाल उसके अभिभावकों, डॉक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह विशेष जरूरतों वाला बच्चा हो सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। थाईलैंड दुनिया के सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाले देशों में शामिल है। WHO के मुताबिक, हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 18 हजार लोगों की मौत होती है। हालांकि इस मामले में हादसे की वास्तविक वजह का पता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

Ketan Agarwal Murder Case: केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल का 17 सेकंड का वीडियो वायरल, मीडिया को दिखाई मिडिल फिंगर

अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह पुलिस जांच नहीं, बल्कि उनका एक वायरल वीडियो है। 17 सेकंड की इस क्लिप में सिया पुलिस के साथ घर से बाहर निकलती दिखाई देती हैं। इसी दौरान वह बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों की ओर देखकर कथित तौर पर मिडिल फिंगर दिखाती नजर आती हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस जांच के लिए घर पहुंची थी टीम

यह घटना पुणे के मार्केट यार्ड इलाके की है। पुलिस जांच के सिलसिले में सिया गोयल को उनके घर ले जाया गया था। जांच पूरी होने के बाद जब पुलिस उन्हें वापस लेकर बाहर निकली, तभी कैमरों के सामने उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारा किया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी IANS ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 18 जून का है, जब केतन अग्रवाल की मौत पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की खाई में गिरने से हुई थी। शुरुआत में सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन का पैर फिसल गया था और यह एक हादसा था। इसी आधार पर पहले दुर्घटना का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस को कैसे हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस को सिया के व्यवहार पर शक हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, केतन की मौत के बाद सिया के चेहरे पर दुख के कोई खास भाव नहीं दिखे। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें कई नए तथ्य सामने आए और सिया गोयल व चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मंगेतर की हत्या की रची गई थी साजिश?

पुलिस का दावा है कि सिया और केतन की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। लेकिन सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी को यह रिश्ता पसंद नहीं था। जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम रही

पुलिस के अनुसार, 14 जून को भी केतन को मारने की कोशिश की गई थी। आरोप है कि सिया ने उन्हें किले के पास धक्का दिया, लेकिन वह झाड़ियों का सहारा लेकर बच गए। इसके बाद सिया ने सांप देखने का बहाना बनाकर पूरा मामला सामान्य दिखाने की कोशिश की और बाद में केतन को भरोसे में लिया।

दूसरी बार बुलाकर खाई में धक्का देने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ दिनों बाद सिया ने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले पर बुलाया, जहां चेतन चौधरी पहले से मौजूद था। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पीछे से धक्का देकर केतन को खाई में गिरा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

आज कोर्ट में होगी पेशी

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे वडगांव कोर्ट में पेश किया जाना है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

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अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।

 

Ketan Murder Update: मंगेतर सिया ने बैठकर दिया था मौत का इशारा, प्रेमी चेतन के साथ मिलकर रची थी साजिश

Ketan Murder Update: महाराष्ट्र के पुणे जिले में 25 वर्षीय प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार, केतन की मंगेतर 20 वर्षीय सिया गोयल ने अपने कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी को केतन की हत्या का संकेत देने के लिए जानबूझकर बैठने का इशारा किया था। यह केवल हमला शुरू करने का संकेत नहीं था। बल्कि खुद को सुरक्षित रखने की भी सोची-समझी रणनीति थी।

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहागढ़ किले पर पहुंचने के बाद योजना के अनुसार सिया को पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठना था। जैसे ही वह बैठती, चेतन पीछे से आकर अनजान केतन को खाई में धक्का दे देता। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों ने इस योजना को पूरी तरह उसी तरह अंजाम दिया, जैसा पहले से तय किया गया था।

बैठने का संकेत का मकसद

जांच में यह भी सामने आया है कि बैठने का संकेत इसलिए चुना गया था ताकि धक्का दिए जाने के समय सिया केतन की पहुंच से दूर रहे। पुणे पुलिस का मानना है कि दोनों को आशंका थी कि यदि धक्का लगने के बाद केतन खुद को बचाने के लिए सिया को पकड़ने की कोशिश करता, तो वह भी खाई में गिर सकती थी। इसलिए उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह संकेत तय किया गया था।

पुलिस ने बताया कि चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भी पूरी तैयारी की थी। वह पुणे से लगभग 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक कार की बजाय स्कूटर से गया, क्योंकि उसे डर था कि कार टोल प्लाजा के CCTV कैमरों में दर्ज हो सकती है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया स्कूटर जब्त कर लिया है।

जांच में यह भी सामने आया कि चेतन किले पर चढ़ते समय ‘हुडी’ पहनकर गया था। बाद में उसने हुडी उतारकर काली टी-शर्ट पहन ली। फिर वापस लौटते समय फिर से हुडी पहन ली। पुलिस का मानना है कि उसने लोगों का ध्यान भटकाने और पहचान छिपाने के लिए ऐसा किया।

क्राइम सीन रीक्रिएशन

रविवार को पुलिस सिया गोयल को घटनास्थल पर लेकर गई, जहां एक डमी की मदद से पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएशन किया गया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि 18 जून को हत्या किस तरह अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि हत्या से पहले वे लोहागढ़ किले पर उपयुक्त स्थान की तलाश करने गए थे।

इतना ही नहीं, उन्होंने वारदात को अंजाम देने से पहले वहां हत्या की प्रैक्टिस भी की थी। हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने किस स्थान पर यह प्रैक्टिस किया था। मामले में दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत सोमवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस आगे की जांच के लिए उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग करेगी।

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इस बीच पुलिस ने सिया गोयल के पिता, मां और भाई से भी लंबी पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। केतन मर्डर की साजिश से जुड़े सभी तथ्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा।

Ketan Murder Case: 640 मिनट तक इंटरनेट बंद! केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी की ‘ऑफलाइन’ चाल ने खोले कई राज

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी चेतन चौधरी का करीब 10 घंटे तक इंटरनेट बंद रखना पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस का मानना है कि 18 जून को चेतन ने जानबूझकर लगभग 640 मिनट तक अपना मोबाइल इंटरनेट बंद रखा, ताकि उसकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सामने न आए। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि इसी असामान्य हरकत से उन्हें पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में मदद मिली।

जांच के अनुसार, चेतन ने सुबह करीब 7 बजे अपना मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया था। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी लोकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, दिन में लोहगढ़ किले की ओर जाते समय उसने बातचीत करने के लिए बीच-बीच में अपने एक कर्मचारी का मोबाइल फोन भी इस्तेमाल किया।

पहचान छिपाने के लिए पहनी मोटी हुडी

पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद मोटी हुडी पहन रखी थी। पुलिस का दावा है कि उस समय तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था, फिर भी वह ट्रेकिंग रास्ते पर केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल का पीछा कर रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर करीब 2:30 बजे सिया गोयल ने पहले से तय योजना के तहत विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर बैठकर इशारा किया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद चेतन चौधरी अपनी छिपी हुई जगह से बाहर आया और उसने केतन अग्रवाल को पहाड़ी से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

चेतन की ‘ऑफलाइन’ चाल नहीं आई काम

पुलिस जांच के मुताबिक, कई घंटे तक इंटरनेट बंद रखने के बाद आरोपी चेतन चौधरी ने शाम करीब 5:40 बजे दोबारा अपना मोबाइल इंटरनेट चालू किया। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जांच के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी में आया यह अचानक बदलाव उनके लिए एक अहम सुराग बना। इससे पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा समझने में काफी मदद मिली।

मामले की जांच के तहत रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल की मौजूदगी में लोहगढ़ किले पर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया और पूरी घटना को दोहराकर देखा। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के आने-जाने का रास्ता, घटनास्थल पर उनकी स्थिति, कथित तौर पर की गई हरकतों और पूरी घटना के क्रम को फिर से तैयार कर उसकी जांच की।