Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 28 वर्षीय भतीजी बृष्टि मुखर्जी (Bristy Mukherjee) की मंगलवार को बीरभूम जिले के रामपुरहाट में मौत हो गई।   बृष्टि का शव उनके गांव स्थित आवास में फंदे से लटका मिला। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बृष्टि मुखर्जी का शव रामपुरहाट इलाके के कुसुम्बा स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल के एक कमरे से बरामद किया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।

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शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी

 

रिपोर्टों के मुताबिक, बृष्टि मुखर्जी उन करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में शामिल थीं, जिनकी नियुक्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले में जांच हुई थी। बृष्टि बोलपुर के एक अपर प्राइमरी स्कूल में गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थीं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वाले उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम कथित तौर पर 608वें स्थान पर था। हाईकोर्ट के फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

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कोर्ट के फैसले के बाद तनाव में होने की बात

 

रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षक भर्ती मामले में अदालत के फैसले के बाद बृष्टि मानसिक तनाव में थीं। परिवार की ओर से बताया गया कि उनका इलाज भी चल रहा था। हालांकि, उनकी मौत के वास्तविक कारण और परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

क्या है West Bengal SSC भर्ती मामला?

यह मामला 2016 West Bengal State Level Selection Test (SLST) के जरिए स्कूलों में हुई शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ा है। आरोप था कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को कथित तौर पर अनियमित तरीके से नौकरी दी गई। मामले की जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन के आरोप सामने आए थे।

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इसी मामले के चलते करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने का मामला अदालत तक पहुंचा। यह प्रकरण पश्चिम बंगाल में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए प्रमुख भर्ती विवादों में शामिल रहा है। पुलिस फिलहाल बृष्टि मुखर्जी की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

poisonous liquor

गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 61 लोग प्रभावित हैं। पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है। इस पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित लोगों के इलाज और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल की वर्ल्ड बैंक संग बड़ी बैठक, GIFT City से AI तक पर चर्चा; वॉलमार्ट के साथ MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

 

अस्पताल से अब तक 16 डिस्चार्ज 

अस्पताल में भर्ती मरीजों में से अब तक 16 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि वर्तमान में 19 मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इलाज करा रहे मरीजों में से 5 मरीजों को आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जिनमें से एक मरीज की हालत बेहद गंभीर बताई गई है। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 मरीजों की मौत संदिग्ध मानी जा रही है। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों में कोई नया मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। 

 

पुलिस रिमांड पर आरोपी

नकली शराबकांड को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कुल 14 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। शुरुआत में पकड़े गए 13 आरोपियों को कोर्ट ने 10 दिन के रिमांड पर भेजा था। इस मामले के मुख्य आरोपी रईस के 9 दिन की पुलिस रिमांड पर है। पुलिस द्वारा मामले में आरोपियों की भूमिका, नकली शराब की सप्लाई और पूरे नेटवर्क को लेकर गहन जांच की जा रही है। 

 

इस मामले में पकड़े गए सभी आरोपियों की रिमांड अवधि 31 अगस्त को पूरी हो रही है। रिमांड खत्म होने के बाद सभी आरोपियों को दोबारा अदालत के सामने पेश किया जाएगा। पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस नकली शराबकांड से जुड़े अन्य लोगों और उनके नेटवर्क के बारे में भी नई जानकारी सामने आने की संभावना है। ALSO READ: गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

 

मामले पर गरमाई सियासत

भावनगर की इस गंभीर घटना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल भावनगर का दौरा करेंगे। वे वहां पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेंगे और प्रभावित परिवारों तथा मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे। फिलहाल भावनगर में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी स्थिति पर सख्त निगरानी बनाए हुए हैं।

कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा साहिब परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसी नंबर से कनाडा के ही सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी मिली है। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैलगरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और समुदाय या दोनों में से किसी भी गुरुद्वारा साहिब को किसी सक्रिय खतरे की संभावना नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था? पहले पार्किंग खाली करने को कहा, फिर इमारत ढहाने की धमकी दशमेश कल्चर सेंटर के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय में लगातार दो संदिग्ध फोन कॉल्स आईं। पहली कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग खाली कराने को कहा। उसने दावा किया कि वहां कुछ तार बिछाने का काम किया जाना है। जबकि, कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का CEO बताया। उसने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार से बात की और सीधे गुरुद्वारा भवन को गिराने की धमकी दी। रणबीर ने बताया कि उसी नंबर से कनाडा के सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी भरी कॉल आई। कैलगरी पुलिस कर रही मामले की जांच कैलगरी पुलिस सर्विस ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केवल दशमेश कल्चर सेंटर ही नहीं, बल्कि एक अन्य नजदीकी गुरुद्वारे को भी इसी तरह का धमकी भरा फोन कॉल आया था। पुलिस कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने और नंबरों को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई शरारत थी या इसके पीछे कोई नफरती मानसिकता थी। समाज सेवा से जुड़ा है गुरुद्वारा स्थानीय संगत और नियमित आने वाले लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा सभी धर्मों के लिए खुला है और समाज सेवा, फूड बैंक और कपड़े बांटने जैसे काम करता है। दुनिया में पहले से तनाव है, ऐसे में देश के भीतर नफरत फैलाने के बजाय प्यार बांटना चाहिए। मेयर और नेताओं को दी गई सूचना घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी ने पुलिस के साथ-साथ अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर के कार्यालय, स्थानीय पार्षदों, सांसदों और विधायकों को सूचित किया है। कैलगरी के मेयर जेरेमी फारकस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सिख समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया है। सिख संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बयान गुरुद्वारा प्रबंधन के प्रतिनिधि अमनप्रीत सिंह परमार ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए फूड बैंक और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक कार्य चलाता है। जब दुनिया में पहले से ही इतनी जंग चल रही है, तो हमें देश के भीतर आंतरिक युद्ध शुरू नहीं करने चाहिए, बल्कि प्यार फैलाना चाहिए। वहीं, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, दशमेश कल्चर सेंटर राज सिद्धू ने बताया कि धमकी भरे फोन के समय परिसर में काफी संख्या में परिवार और बच्चे मौजूद थे। यह घटना परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि एकजुट होने और संवाद करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के दरवाजे हमेशा की तरह सभी संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के लिए खुले रहेंगे। गुरुद्वारा अध्यक्ष हरपाल सिंह और अन्य सदस्यों ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ तीखी और अनियंत्रित बयानबाजियां इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति को भी आमंत्रित किया कि वह गुरुद्वारे आए और सिख समुदाय के बारे में करीब से जाने। कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय में गुस्सा बता दें, दशमेश कल्चर सेंटर का इतिहास गौरवमयी है और 46 साल पहले इसकी नींव रखी गई थी। यह गुरुद्वारा अब 15 हजार से अधिक पंजीकृत सदस्यों और कैलगरी के करीब एक लाख से अधिक सिख प्रवासियों की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे धार्मिक स्थान को गिराने की धमकी से कैलगरी ही नहीं पूरे कनाडा में बसे पंजाबियों में गुस्सा है। यही कारण है कि इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। मेयर ने घटना की निंदी की कैलगरी के मेयर मेयर जेरोमी फारकास ने भी इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कैलगरी में नफरत, डर या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। फिलहाल, दशमेश कल्चर सेंटर और दूसरे गुरुद्वारे में अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और आने-जाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

UP News: यूपी के BJP विधायक का आरोप, समधी ने धोखाधड़ी कर 25 महिलाओं से की शादी, करोड़ों की ठगी के दावे

UP Viral News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बॉलीवुड फिल्म ‘Ladies V/S Ricky Bahl’ की कहानी की याद दिला दी है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मामला फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि एक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक के परिवार से जुड़ा गंभीर आरोप है। सीतापुर जिले की सेवता विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक ज्ञान तिवारी ने अपने समधी अनुज त्रिवेदी के खिलाफ धोखाधड़ी और तथ्य छिपाने के आरोप में रेउसा थाने में FIR दर्ज कराई है।

पुलिस के अनुसार, विधायक की बेटी प्रज्ञा तिवारी की शादी वर्ष 2024 में मिश्रिख क्षेत्र के चंद्रवाल निवासी अनुज त्रिवेदी के बेटे प्रखर त्रिवेदी से हुई थी। विधायक द्वारा दर्ज कराई गई FIR के मुताबिक, शादी के समय आरोपी पक्ष ने खुद को मुंबई में बड़ा रियल एस्टेट कारोबारी बताया था। स्थानीय स्तर पर जांच एवं प्रतिष्ठित लोगों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद यह रिश्ता तय किया गया था।

कैसे हुआ खुलासा?

यूपी पुलिस के अनुसार, शादी के करीब दो साल बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अनुज त्रिवेदी के खिलाफ लगाए गए कथित धोखाधड़ी के आरोप सामने आए। पुलिस ने बताया कि जांच में उसके खिलाफ महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में महिलाओं को कथित रूप से प्रेम जाल में फंसाकर उनसे धोखाधड़ी करने के आरोप सामने आए। पुलिस के मुताबिक, अनुज त्रिवेदी पर फर्जी पहचान के आधार पर करीब 25 शादियां करने और धोखाधड़ी करने के आरोप हैं।

बाप-बेटा गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि इन आरोपों और पीड़ित महिलाओं की शिकायतों के आधार पर अनुज त्रिवेदी और उसके बेटे प्रखर त्रिवेदी को गिरफ्तार किया गया। विधायक ज्ञान तिवारी ने अनुज त्रिवेदी और उसके परिवार से सभी संबंध खत्म करने की घोषणा की है। रेउसा थाने में दी गई शिकायत में विधायक ने आरोप लगाया कि अनुज त्रिवेदी ने अपना आपराधिक इतिहास और पूर्व के मुकदमों की जानकारी छिपाकर उनके परिवार को धोखे में रखा। इसी आधार पर शादी का रिश्ता तय हुआ।

उन्होंने बताया कि इस घटना से उनके परिवार को गहरा सदमा और एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा है। रेउसा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अनुज त्रिवेदी के खिलाफ मामला दर्ज कर किया गया है।

2024 में हुई थी विधायक की बेटी की शादी

शिकायत के अनुसार, विधायक ज्ञान तिवारी की बेटी प्रज्ञा की शादी वर्ष 2024 में प्रखर त्रिवेदी के साथ हुई थी। विधायक का आरोप है कि शादी के समय प्रखर के पिता अनुज त्रिवेदी ने खुद को मुंबई का एक प्रतिष्ठित और स्थापित रियल एस्टेट कारोबारी बताया था। परिवार की ओर से स्थानीय स्तर पर जानकारी भी जुटाई गई थी। कुछ प्रभावशाली लोगों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद रिश्ता तय किया गया।

उस समय परिवार को कथित तौर पर ऐसी किसी जानकारी का पता नहीं था, जिसे अब शिकायत में गंभीर आरोपों के रूप में सामने रखा गया है। विधायक के मुताबिक, शादी के करीब ढाई साल बाद परिवार को सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से प्रखर त्रिवेदी की कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने लगी। आरोप लगाया गया कि प्रखर ने अलग-अलग राज्यों में कई महिलाओं के साथ कथित तौर पर फर्जी पहचान के आधार पर संबंध बनाए और उनसे बड़ी रकम हासिल की।

विधायक ने बेटी को वापस घर बुलाया

जब विधायक के परिवार को कथित गतिविधियों की जानकारी मिली, तो ज्ञान तिवारी ने कहा कि उन्होंने आरोपी परिवार से संबंध खत्म कर लिए और अपनी बेटी को वापस घर ले आए। विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम से परिवार को हुए मानसिक और भावनात्मक नुकसान की भी बात कही। उन्होंने दावा किया कि इस मामले का असर उनकी सार्वजनिक छवि पर भी पड़ा है।

सोशल मीडिया वीडियो में ने खोला राज

ज्ञान तिवारी ने 6 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मामले को सार्वजनिक किया। वीडियो में वह अपनी बेटी के साथ नजर आए। उन्होंने आरोपी परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि अगर उनके दामाद के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में साबित होते हैं, तो कानून के तहत उसे भी कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। विधायक ने अपने बयान में अनुज त्रिवेदी के लिए तो मौत की सजा तक की मांग की।

आगे की जांच जारी

अब जांच एजेंसियां आरोपों से जुड़े दस्तावेज, कथित पहचान, पूर्व संबंधों, आर्थिक लेन-देन और अन्य महिलाओं से जुड़े दावों की पड़ताल कर सकती हैं। बॉलीवुड फिल्म में फर्जी पहचान के जरिए महिलाओं को कथित तौर पर धोखा देने वाले किरदार की कहानी दर्शकों के सामने आई थी। उत्तर प्रदेश का यह मामला भी पहली नजर में उसी तरह की कहानी जैसा दिखाई दे रहा है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 25 शादियों और महिलाओं से ठगी के आरोप अभी आरोप ही हैं। इनकी वास्तविकता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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फिलहाल इस मामले ने इसलिए सनसनी मचा दी है क्योंकि शिकायतकर्ता कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक BJP विधायक हैं। आरोप सीधे उनके अपने परिवार में हुई शादी से जुड़े हैं। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में कई महिलाओं को फर्जी पहचान के जरिए कथित तौर पर फंसाने का मामला है, या आरोपों के पीछे कोई अलग कहानी है? पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही से ही इसका अंतिम सच सामने आएगा।

इंडियन एयरफोर्स का ऑफिसर कैसे हुआ हनीट्रैप, पाकिस्तान को भेजा सीक्रेट डेटा?

IAF Officer Honey Trap: सोशल मीडिया पर एक महिला से हुई बातचीत धीरे-धीरे कथित तौर पर ‘हनी ट्रैप’ में बदल गई। इंडियन एयरफोर्स का एक विंग कमांडर पाकिस्‍तानी हनी ट्रैप का शिकार हुआ है। आरोप है कि इस दौरान भारतीय वायु सेना के एक विंग कमांडर ने महिला के साथ रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर दी। इंडियन एयरफोर्स की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब सवाल उठता है कि IAF का विंग कमांडर इस जाल में कैसे फंसा ?

मामले की जानकारी मिलने के बाद इंडियन एयरफोर्स की खुफिया शाखा ने दिल्ली पुलिस के साथ जरूरी जानकारी साझा की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 30 मई की रात विंग कमांडर को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 7 जुलाई को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच में एक बड़े जासूसी नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस नेटवर्क का मकसद देश की रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी हासिल करना था।

चैट और वीडियो कॉल के जरिए बढ़ी नजदीकी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विंग कमांडर एक फील्ड यूनिट में तैनात थे। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए एक महिला ने उनसे संपर्क किया। दोनों के बीच पहले चैट और फिर वीडियो कॉल के जरिए बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे महिला ने कथित तौर पर अधिकारी का भरोसा जीत लिया। आरोप है कि महिला ने विंग कमांडर से सैन्य गतिविधियों, सैनिकों की तैनाती और दूसरी अहम जानकारियों के साथ-साथ तस्वीरें और वीडियो भी साझा करने को कहा। जांचकर्ताओं के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि अधिकारी ने कथित तौर पर डिजिटल माध्यमों के जरिए महिला को महत्वपूर्ण दस्तावेज और डेटा भेजे थे।

डेटा चुराने वाला ऐप कैसे सामने आया

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महिला ने कथित तौर पर विंग कमांडर से अपने एक साथी अधिकारी के मोबाइल फोन में एक खास ऐप इंस्टॉल करने को कहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, महिला ने पहले विंग कमांडर से जरूरी जानकारी हासिल की और इसके बाद उनसे दूसरे अधिकारी के फोन में यह ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह ऐप सामान्य ऐप नहीं था, बल्कि स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस मैलवेयर की तरह काम कर सकता था। ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मोबाइल से डेटा चुराने, उसकी लोकेशन पता करने या बातचीत पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने दूसरे अधिकारी के मोबाइल फोन में यह संदिग्ध ऐप इंस्टॉल किया था। जांच में इस ऐप की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस जांच में यह भी पता चला कि जब महिला ने विंग कमांडर से संपर्क किया था, उस समय वह अपनी निजी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहे थे।

पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की भूमिका की जांच

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए विंग कमांडर से संपर्क करने वाली महिला कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे कुछ हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी ने महिला के साथ कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की थी और क्या यह पूरा मामला किसी बड़े जासूसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां विंग कमांडर और महिला के बीच हुई चैट, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दोनों के बीच कब से संपर्क था और इस दौरान किस तरह की जानकारी साझा की गई।

इंदौर में हाथी को गुड़ खिलाना पड़ा भारी, युवक को सूंड में लपेटकर कुचला, CCTV वीडियो से मचा हड़कंप

Elephant attacks young man in Indore

Indore elephant attack News : इंदौर में एक हैरान कर देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। दरअसल, चंदन नगर थाना क्षेत्र में एक ऑटो रिक्शा चालक को हाथी को गुड़ खिलाना भारी पड़ गया। खबरों के अनुसार, यह घटना राजनगर इलाके की है, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के बाद हाथी को क्षेत्र में घुमाया जा रहा था। इसी बीच ऑटो चालक हाथी के पास पहुंचा और उसे गुड़ खिलाने लगा, तभी अचानक हाथी भड़क गया और उसने हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। हादसे का CCTV वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

 

इलाज के दौरान ऑटो रिक्शा चालक की मौत

इंदौर में एक हैरान कर देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। दरअसल, चंदन नगर थाना क्षेत्र में एक ऑटो रिक्शा चालक को हाथी को गुड़ खिलाना भारी पड़ गया। खबरों के अनुसार, यह घटना राजनगर इलाके की है, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के बाद हाथी को क्षेत्र में घुमाया जा रहा था। इसी बीच ऑटो चालक हाथी के पास पहुंचा और उसे गुड़ खिलाने लगा, तभी अचानक हाथी भड़क गया और उसने हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। ऑटो चालक का नाम विजय राव बताया जा रहा है।

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हादसे का CCTV वीडियो आया सामने 

हादसे का CCTV वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई और हर कोई स्तब्ध रह गया। CCTV वीडियो में साफ दिख रहा है कि हाथी पहले युवक को सूंड से मारता और फिर पैर से कुचलता हुआ दिखाई दे रहा है। हादसे के तुरंत बाद हाथी के महावत ने उसे काबू में करने की कोशिश भी की, लेकिन काबू में नहीं आया। 

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मामले की जांच में जुटी पुलिस 

खबरों के अनुसार, हाथी ने विजय राव को अपनी सूंड में उठाकर जोर से जमीन पर पटक दिया। इसके बाद हाथी ने उसे पैरों से कुचल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल विजय राव को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सीसीटीवी वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

 

महावत को लिया हिरासत में 

पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है। पुलिस जांच कर रही है कि हाथी को सार्वजनिक क्षेत्र में लाने के दौरान सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक नियमों का पालन किया गया था या नहीं? पुलिस ने मामले में हाथी के महावत को भी हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

मेरठ में ‘सांप से मौत’ का सनसनीखेज खुलासा! पत्नी ने प्रेमी संग रची खौफनाक साजिश, नींद की गोलियां देकर चादर में छोड़ा जहरीला सांप

Meerut Snake Murder Case

हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में सांप के डसने से हुई एक युवक की मौत का मामला सामने आया था, पुलिस जांच में सर्पदंश से हुई मौत 24 घंटे के अंदर चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई। जिस घटना को पहले सामान्य दुर्घटना माना जा रहा था, पुलिस जांच में वह कथित तौर पर एक सुनियोजित हत्या निकली। यह हत्या किसी और ने नही बल्कि मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी ने की है। पुलिस ने इस हत्याकांड से जुड़े आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया है कि पत्नी ने पति को पहले नींद की गोलियों का ओवरडोज दी और फिर जहरीला सांप उसकी चादर में छोड़कर उसे डसवाया गया। ALSO READ: एक और खौफनाक कांड! पत्नी ने लाइव लोकेशन शेयर कर प्रेमी से करवाया पति का कत्ल

 

सर्पदंश की कहानी में झोल

मृतक 35 वर्षीय अतुल पंवार अपनी पत्नी दामिनी के साथ हस्तिनापुर के रामलीला मैदान के पास कृष्णा किड्स पब्लिक स्कूल संचालित करते थे। दोनों ने वर्ष 2019 में प्रेम विवाह किया था और हंसी-खुशी के साथ स्कूल परिसर में ही रह रहें थे। शुक्रवार सुबह दामिनी ने पति को सांप काटने की सूचना परिवार को दी। आनन-फानन में अतुल को सीएचसी हस्तिनापुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिस्तर में सांप मिलने से इसे हादसा माना जा रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया तो सर्पदंश की कहानी में झोल नजर आया।

 

पूछताछ में हत्या की साजिश का खुलासा

जब परिजनों ने मौत पर संदेह जताया तो पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि सांप का व्यवहार शर्मीला होता है, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्वाट टीम देहात और थाना हस्तिनापुर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की। एस एस पी अविनाश पांडे के मुताबिक अतुल की पत्नी दामिनी के मोबाइल की जांच- पड़ताल की तो उनके स्कूल के ड्राइवर तुषार उर्फ निक्की से लगातार संपर्क होने की जानकारी मिली। पूछताछ में दोनों के बीच प्रेम संबंध होने और अतुल की हत्या की साजिश रचने का खुलासा हुआ। ALSO READ: UP Bahraich Crocodile Attack : बहराइच में दर्दनाक हादसा, घाघरा नदी किनारे गए 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ खींच ले गया, घंटों बाद मिला शव

 

दूध में नींद की गोलियों की अधिक मात्रा दी गई

पुलिस का दावा है कि घटना वाली रात अतुल को दूध में नींद की गोलियों की अधिक मात्रा दी गई। सोनू और उदय नाम के सपेरे से जहरीला सांप खरीदा गया और उसे अतुल की चादर में छोड़ दिया गया। सांप के डसने से उसकी मौत हो गई। दामिनी पटकथा के मुताबिक शुक्रवार की सुबह अतुल को जगाने का प्रयास किया और जब वह उठा नही तो चादर हटाई, जिसके बाद सांप के काटने का शोर मचा दिया।

 

20 लाख के बीमे पर थी नजर

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अतुल स्कूल खोलने से पहले एक प्रकाशन कंपनी में नौकरी करता था, उसके नाम करीब 20 लाख रुपये का बीमा था। बीमे की राशि हड़पने के लिए दामिनी ने प्रेमी तुषार के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटा दिया। पुलिस के अनुसार, बीमा राशि में से पांच लाख रुपये साजिश में शामिल दो सहयोगियों को देने की बात तय हुई थी।

20 दिन पहले भी हुई थी अतुल को मारने की कोशिश

पुलिस ने यह भी दावा किया कि करीब 20 दिन पहले अतुल को कार से टक्कर मारकर मारने की कोशिश की गई थी, लेकिन हेलमेट पहने होने के कारण वह बच गया। उस समय वह घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाना चाहता था लेकिन दामिनी ने उसे रोक दिया। पुलिस ने इस मामले में दामिनी, तुषार उर्फ निक्की, सोनू और उदय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। सभी के न्यायालय में पेश किया जायेगा।

प्रयागराज में प्यार की कसमें खाकर मरने आया था कपल, प्रेमी ने लगाई छलांग, प्रेमिका हुई फरार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गुरुवार को एक व्यक्ति को यमुना नदी से बचाया गया। वह ‘न्यू यमुना ब्रिज’ से पानी में कूद गया था, जिसके बाद तुरंत इमरजेंसी कार्रवाई की गई और पुलिस जांच शुरू हुई। इस व्यक्ति की पहचान अन्नू गुप्ता के तौर पर हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मी और स्थानीय गोताखोर पुल पर पहुंचे और उसे नदी से बाहर निकाला।

बचाव दलों ने तेजी से काम करते हुए उसे पानी में ढूंढा और सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। मौके पर ज़रूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस ने पुष्टि की है कि वह सुरक्षित है और उसे कोई तत्काल खतरा नहीं है।

उस समय पुल के पास मौजूद चश्मदीदों के अनुसार, गुप्ता एक महिला के साथ आया था, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह उसकी गर्लफ्रेंड थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हो सकता है कि वे दोनों अपनी जान देने के इरादे से वहां गए हों। चश्मदीदों ने बताया कि गुप्ता के पानी में कूदने के कुछ ही देर बाद वह महिला वहां से अकेली ही चली गई।

उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला है और पुलिस का कहना है कि उसकी पहचान और ठिकाने का पता लगाना अब उनकी जांच का एक अहम हिस्सा है। अधिकारियों ने कहा कि जांच में घटना से पहले हुई घटनाओं के क्रम पर बारीकी से ध्यान दिया जाएगा, जिसमें यह भी शामिल है कि जोड़ा पुल पर क्यों गया था और महिला ने उस समय वहां से जाने का फैसला क्यों किया। पुलिस ने अभी किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया है और कहा है कि मामला अभी खुला है।

उन्होंने आगे कहा कि आगे की कोई भी कार्रवाई, जिसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है, इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आखिर क्या पता चलता है। स्थानीय अधिकारी लगातार ऐसी जानकारी की अपील कर रहे हैं जिससे महिला का पता लगाने में मदद मिल सके।

ट्विशा शर्मा की फंदे की बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू, AIIMS फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोले नए राज

एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत मामले में दिल्ली AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि कथित तौर पर फंदे के लिए इस्तेमाल की गई जिम्नास्टिक्स बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू ट्विशा की गर्दन के चोट के निशानों से मेल खाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिमनास्टिक बेल्ट पर मिले बेहद छोटे स्किन टिश्यू, ट्विशा शर्मा की गर्दन पर मिले चोट के निशानों और गला घोंटने के निशानों (लिगेचर मार्क) से मेल खाते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह से हिरासत में पूछताछ करने की मांग तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने उनकी जमानत का भी कड़ा विरोध किया है और दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए लगातार परेशान किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि उनकी मौत से करीब एक हफ्ते पहले उनका जबरन गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) कराया गया था। इसके अलावा मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और दूसरे अहम सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने और उनसे छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया गया है।

गला घोंटने में इस्तेमाल हुई चीज की पहचान कैसे होती है?

फांसी या गला घोंटकर हुई मौत के मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल बोर्ड कई वैज्ञानिक तरीकों से जांच करते हैं। सबसे पहले वे गर्दन पर बने निशानों की चौड़ाई, गहराई और आकार को ध्यान से मापते हैं। इसके बाद इन निशानों का मिलान उस संदिग्ध वस्तु से किया जाता है, जिससे गला घोंटने की आशंका होती है, जैसे बेल्ट, रस्सी या कोई दूसरी चीज। जांच के दौरान विशेषज्ञ यह भी देखते हैं कि गर्दन पर किसी धातु की रिंग, बकल या कपड़े और फाइबर की बनावट जैसे खास निशान मौजूद हैं या नहीं। इन सभी सबूतों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि गला घोंटने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया गया था।

टिश्यू की जांच से क्या पता चलता है?

फोरेंसिक जांच में विशेषज्ञ गर्दन पर बने निशान वाली जगह से त्वचा का एक छोटा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से उसकी जांच करते हैं। इस दौरान वे देखते हैं कि वहां खून जमा हुआ है या नहीं, अंदरूनी रक्तस्राव हुआ है या सूजन मौजूद है। अगर ऐसे बदलाव मिलते हैं, तो इससे पता चलता है कि चोट व्यक्ति के जीवित रहते लगी थी। इसके अलावा जिस बेल्ट, रस्सी या दूसरी वस्तु से गला घोंटने की आशंका होती है, उसकी भी लैब में जांच की जाती है। विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि उस पर इंसानी त्वचा के कण, पसीने के निशान या दूसरे जैविक सबूत मौजूद हैं या नहीं।

फांसी और गला घोंटने के निशान में क्या अंतर होता है?

फोरेंसिक विशेषज्ञ गर्दन पर बने निशानों की दिशा और आकार का भी अध्ययन करते हैं। आमतौर पर फांसी के मामले में गर्दन का निशान तिरछा होता है और गांठ की तरफ ऊपर की ओर जाता है। यह निशान अक्सर गर्दन के ऊपरी हिस्से में दिखाई देता है। वहीं, अगर किसी का गला घोंटा गया हो, तो निशान आमतौर पर सीधा और पूरी गर्दन के चारों ओर होता है। ऐसे निशान गर्दन के निचले हिस्से में पाए जाते हैं। इन सभी वैज्ञानिक जांचों की मदद से विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करते हैं कि मौत फांसी से हुई या गला घोंटने की वजह से।

गांठ और सबूतों की जांच कैसे होती है?

फोरेंसिक जांच के दौरान विशेषज्ञ जिस रस्सी, बेल्ट या दूसरी वस्तु से गला घोंटने की आशंका होती है, उसकी गांठ को बिना खोले सावधानी से जांचते हैं। वे गांठ का आकार और उसका तरीका देखते हैं ताकि यह समझा जा सके कि क्या ऐसी गांठ कोई व्यक्ति खुद बांध सकता था या फिर इसमें किसी दूसरे व्यक्ति के शामिल होने की संभावना है।

इसके बाद विशेषज्ञ यह भी जांचते हैं कि शरीर के वजन और गुरुत्वाकर्षण के कारण गर्दन पर मिले निशान वैसे बन सकते थे या नहीं। अगर गर्दन पर एक से ज्यादा या अलग-अलग तरह के निशान मिलते हैं, तो इससे हाथापाई या संघर्ष होने की आशंका मजबूत होती है। ऐसे सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि मामला आत्महत्या का है या किसी और वजह से मौत हुई है। फोरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से मिले हर सबूत की कई चरणों में वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हैं। सभी जांच पूरी होने के बाद ही वे किसी नतीजे पर पहुंचते हैं, ताकि उनकी रिपोर्ट मजबूत हो और अदालत में सबूत के तौर पर टिक सके।

नया सबूत क्यों माना जा रहा है अहम?

इस मामले में सामने आए नए फोरेंसिक सबूत को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शुरुआती पुलिस जांच पर पहले से ही कई सवाल उठ चुके थे। जांच प्रक्रिया में कुछ बड़ी कमियां होने के आरोप भी लगे थे। सबसे बड़ा सवाल यह था कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम के दौरान जिस जिमनास्टिक बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई, उसे डॉक्टरों के सामने जांच के लिए पेश ही नहीं किया गया। इसकी वजह से डॉक्टर बेल्ट और गर्दन पर मिले निशानों का मिलान नहीं कर सके।

पीड़िता के परिवार और सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया था कि घटनास्थल से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। उनका कहना था कि मामले में प्रभावशाली लोगों के कारण जांच प्रभावित हुई। अब बेल्ट पर मिले जैविक नमूनों की फोरेंसिक जांच से यह पुष्टि होने का दावा किया गया है कि उसी बेल्ट का इस्तेमाल किया गया था। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला है। वहीं सीबीआई का दावा है कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कलाई और कोहनी पर ऐसे चोट के निशान मिले थे, जो फांसी से पहले लगे थे। जांच एजेंसी का मानना है कि इन चोटों की भी विस्तार से जांच जरूरी है।

जबरन घर में घुसा, प्राइवेट पार्ट दिखाए, कौन है महिला के साथ अश्लील हरकत करने वाला डिलीवरी एजेंट?

बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट के एक डिलीवरी एजेंट को महिला के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में हुई है। महिला ने बताया कि डिलीवरी एजेंट पार्सल देने उसके घर आया था। बता दें कि, महिला ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया है कि फ्लिपकार्ट का एक डिलीवरी एजेंट जबरन उसके घर में घुस आया और उसके साथ अश्लील हरकत की। महिला का कहना है कि आरोपी ने उन्हें अपने प्राइवेट पार्ट दिखाए।

पुलिस ने लिया ये एक्शन 

महिला की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। महिला के मुताबिक, डिलीवरी एजेंट उनके घर एक पार्सल देने आया था। पार्सल देने के बाद उसने टॉयलेट इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी। महिला ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद वह जबरदस्ती घर के अंदर घुस गया। महिला का आरोप है कि वॉशरूम से बाहर निकलते समय उसने अश्लील हरकत करते हुए उन्हें अपने निजी अंग दिखाए।

महिला ने बताई हैरान कर देने वाली कहानी 

महिला ने अपनी पोस्ट में बताया, “मैंने कई बार मना किया और साफ कहा कि मैं किसी अजनबी को अपने फ्लैट के अंदर आने की अनुमति नहीं देती। मैंने उसे यह भी कहा कि अगर बहुत जरूरी है, तो वह आसपास रहने वाले किसी पुरुष पड़ोसी से मदद मांग सकता है। लेकिन बार-बार मना करने के बावजूद उसने अपनी चप्पल उतारी और मेरी इजाजत के बिना जबरन घर के अंदर घुस गया।”

महिला ने आगे आरोप लगाया, “जब वह वॉशरूम से बाहर आया, तो उसने मेरे सामने अश्लील हरकत करते हुए अपने निजी अंग दिखाए। उस समय मैं बेहद घबरा गई। मुझे अपमानित और असुरक्षित महसूस हुआ। एक महिला के ‘नहीं’ कहने के बाद वहीं बात खत्म हो जानी चाहिए थी। किसी भी व्यक्ति को किसी महिला की इच्छा के खिलाफ उसके घर में घुसने या उसकी निजी सीमा का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।”

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

महिला की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और उनसे संपर्क कर पूरी जानकारी मांगी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। महिला की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 79 और 329(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में की है और उसे गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद फ्लिपकार्ट ने भी बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही आरोपी डिलीवरी एजेंट को तुरंत नौकरी से हटा दिया गया है।

फ्लिपकार्ट ने कही ये बात

फ्लिपकार्ट ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा, “इस मामले से हमें गहरा दुख हुआ है और हम पीड़ित ग्राहक को पूरा सहयोग दे रहे हैं। हमारे लिए ग्राहकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जैसे ही हमें इस घटना की जानकारी मिली, हमने संबंधित डिलीवरी एजेंट की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दीं। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और हम पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “हर डिलीवरी एजेंट को काम पर रखने से पहले उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है और जरूरी ट्रेनिंग भी दी जाती है। हालांकि इस तरह की घटनाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन ऐसी एक भी घटना स्वीकार नहीं की जा सकती। हम पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ग्राहकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।”