Gold Jewellery Price: 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी खरीदने जा रहे? जानिए कितना बनेगा बिल

Gold Jewellery Price: सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में अगर आप शादी, त्योहार या निवेश के लिए ज्वेलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ गोल्ड का रेट जानना काफी नहीं है। दुकान पर जो बिल बनता है, उसमें सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और GST भी जुड़ता है। यही वजह है कि कई बार ₹1.30 लाख का सोना खरीदने पर बिल ₹1.50 लाख के करीब पहुंच जाता है।

अगर आज आप 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी बनवाने जाते हैं, तो जेब से कुल कितना पैसा निकल सकता है? आइए आसान हिसाब से समझते हैं।

पहले जानिए आज का रेट

दिल्ली में 15 जुलाई को 24 कैरेट सोने का भाव (Gold Price Today) ₹1,42,940 प्रति 10 ग्राम है। वहीं, 22 कैरेट का ₹1,31,040 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट का ₹1,07,240 प्रति 10 ग्राम है।

हालांकि, बाजार में बिकने वाले ज्यादातर नेकलेस, अंगूठियां और दूसरी ज्वेलरी 22 कैरेट या 18 कैरेट सोने से बनाई जाती हैं। इसलिए आगे का पूरा हिसाब 22 कैरेट सोने की कीमत के आधार पर समझते हैं।

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10 ग्राम का नेकलेस का खर्च?

मान लीजिए आपने 10 ग्राम का सिंपल नेकलेस पसंद किया। सिर्फ सोने की कीमत ₹1,31,040 होगी। अब इसमें मेकिंग चार्ज जुड़ता है। अगर ज्वेलर 10% मेकिंग चार्ज लेता है, तो यह करीब ₹13,100 बैठेगा। इसके बाद कुल रकम पर 3% GST लगेगा, जो करीब ₹4,300 होगा।

यानी 10 ग्राम का नेकलेस बनवाने पर आपका कुल बिल करीब ₹1.48 लाख बन सकता है। अगर आपने भारी डिजाइन वाला नेकलेस चुना और मेकिंग चार्ज 20% हुआ, तो यही बिल ₹1.60 लाख के आसपास पहुंच सकता है।

5 ग्राम की अंगूठी का बिल?

अब मान लीजिए आप 5 ग्राम की सोने की अंगूठी बनवा रहे हैं। 5 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹65,520 होगी। अगर मेकिंग चार्ज 10% है, तो इसमें करीब ₹6,550 जुड़ जाएंगे। इसके बाद GST जोड़ने पर कुल बिल करीब ₹74,200 तक पहुंच सकता है।

अगर अंगूठी का डिजाइन ज्यादा बारीक या स्टोन वाला है, तो मेकिंग चार्ज बढ़ सकता है। ऐसे में कीमत ₹78,000 से ₹80,000 तक भी जा सकती है।

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आखिर बिल इतना ज्यादा क्यों बनता है?

बहुत से लोगों को लगता है कि दुकान पर वही कीमत देनी होगी, जो अखबार या वेबसाइट पर सोने के भाव में दिखाई जा रही है। लेकिन ऐसा नहीं होता। गोल्ड रेट सिर्फ धातु की कीमत होती है।

ज्वेलरी बनाने की मजदूरी यानी मेकिंग चार्ज अलग से देना पड़ता है। इसके बाद पूरे बिल पर 3% GST भी लगता है। कुछ ज्वेलर्स वेस्टेज चार्ज भी जोड़ते हैं। इसलिए अंतिम बिल हमेशा गोल्ड रेट से ज्यादा होता है।

  • खरीदने से पहले ये सवाल जरूर पूछें
  • मेकिंग चार्ज कितने प्रतिशत है?
  • क्या वेस्टेज अलग से लगेगा?
  • GST किस रकम पर लगेगा?
  • क्या ज्वेलरी BIS हॉलमार्क है?
  • पुराना सोना एक्सचेंज करने पर क्या रेट मिलेगा?

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Personal Loan vs Credit Card: अगर अचानक अस्पताल का बड़ा बिल आ जाए। घर में कोई इमरजेंसी आ जाए। या नौकरी छूटने की वजह से तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए। ऐसे समय में ज्यादातर लोगों के सामने दो विकल्प होते हैं- क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन-सा विकल्प कम महंगा पड़ता है? क्या हर इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना सही है? या फिर सीधे पर्सनल लोन लेना बेहतर रहेगा? जवाब आपकी जरूरत, रकम और उसे लौटाने की क्षमता पर निर्भर है।

पहले एक आसान उदाहरण समझिए

अब मान लीजिए आपको अचानक ₹2 लाख की जरूरत पड़ गई। यह पैसा आपको अस्पताल के बिल के लिए चाहिए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। बैंक से 3 साल के लिए 12% ब्याज पर पर्सनल लोन लें। या क्रेडिट कार्ड से पूरा भुगतान कर दें। यहीं से दोनों विकल्पों का फर्क शुरू हो जाता है।

अगर पर्सनल लोन लेते हैं

मान लीजिए बैंक ने आपको ₹2 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए दे दिया।

डिटेलपैसों का हिसाब
लोन अमाउंट₹2,00,000
ब्याज दर12% सालाना
अवधि3 साल
अनुमानित EMIकरीब ₹6,640
कुल भुगतानकरीब ₹2.39 लाख
कुल ब्याजकरीब ₹39,000

EMI तय रहती है। आपको पहले से पता होता है कि हर महीने कितना पैसा देना है।

अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं?

अब मान लीजिए आपने पूरे ₹2 लाख का भुगतान क्रेडिट कार्ड से कर दिया। लेकिन बिल आने पर आप सिर्फ Minimum Due भरते रहे। यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल ₹2 लाख आया है। बैंक कहता है कि फिलहाल सिर्फ ₹10,000 का मिनिमम ड्यू भर दीजिए। इससे लेट फीस तो नहीं लगेगी, लेकिन बाकी ₹1,90,000 पर हर महीने ब्याज लगता रहेगा।

ज्यादातर क्रेडिट कार्ड 30% से 48% सालाना तक ब्याज वसूलते हैं। यानी करीब 2.5% से 4% हर महीने। अगर आपने पूरा बिल नहीं चुकाया, तो ब्याज तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार उस पर GST और दूसरे चार्ज भी जुड़ जाते हैं। ऐसे में ₹2 लाख का बकाया कुछ ही महीनों में काफी महंगा साबित हो सकता है।

एक नजर में सीधी तुलना

डिटेलपर्सनल लोनक्रेडिट कार्ड
ब्याज10%-18% सालाना
30%-48% सालाना

भुगतानतय EMIMinimum Due का विकल्प
बड़ी रकम के लिएबेहतरमहंगा
छोटी अवधि के लिएठीकअगर पूरा बिल समय पर चुका दें तो बेहतर

तो क्रेडिट कार्ड कब इस्तेमाल करें?

अगर आपको भरोसा है कि 30 से 45 दिन के भीतर पूरा पैसा चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प हो सकता है।

मान लीजिए आपने ₹50,000 का अस्पताल का बिल कार्ड से भरा। सैलरी आने में सिर्फ 20 दिन बाकी हैं। अगर बिल की Due Date तक पूरा भुगतान कर दिया, तो आमतौर पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। यही क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी ताकत है।

और पर्सनल लोन कब लेना चाहिए?

अगर रकम बड़ी है और उसे लौटाने में कई महीने या साल लगेंगे, तो पर्सनल लोन बेहतर रहता है।

मान लीजिए शादी, इलाज या घर की मरम्मत के लिए ₹3 लाख चाहिए। आपको पता है कि इसे एक-दो महीने में नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में पर्सनल लोन लेना ज्यादा समझदारी होगी। इसकी EMI तय रहती है और ब्याज भी क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होता है।

₹1 लाख पर कितना पड़ेगा फर्क?

मान लीजिए आपको ₹1 लाख की जरूरत है। आप यह रकम क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं और सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहते हैं। ऐसे में एक साल में ब्याज और दूसरे चार्ज मिलाकर आपको ₹30,000-₹40,000 या उससे भी ज्यादा अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

वहीं, अगर आप यही ₹1 लाख 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, तो आपकी EMI करीब ₹3,320 महीने बनेगी। तीन साल में कुल भुगतान करीब ₹1.20 लाख होगा। यानी कुल ब्याज करीब ₹19,500-₹20,000 पड़ेगा।

सबसे अच्छा विकल्प क्या है?

इमरजेंसी में सबसे बड़ा फैसला पैसा जुटाना नहीं, सही तरीके से पैसा जुटाना होता है। अगर कुछ हफ्तों में पैसा लौटा सकते हैं, तो क्रेडिट कार्ड ठीक है। लेकिन अगर कर्ज लंबे समय तक चलेगा, तो पर्सनल लोन आपकी जेब पर कम बोझ डालेगा।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प इमरजेंसी फंड है। अगर आपके पास 6 महीने के खर्च जितनी बचत अलग रखी है, तो ऐसी स्थिति में आपको न महंगा ब्याज देना पड़ेगा और न ही कर्ज लेना पड़ेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan: पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं? अप्लाई करने से पहले इन 6 बातों को नहीं जाना, तो भुगतना पड़ेगा भारी नुकसान

Personal Loan Checklist Before Applying: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो पर्सनल लोन सबसे आसान और तुरंत मिलने वाला जरिया नजर आता है। आजकल बैंक और डिजिटल लेंडर्स मिनटों में इंस्टेंट अप्रूवल और बिना किसी खास कागजी कार्रवाई के लोन ऑफर कर देते हैं। इस चक्कर में कई बार लोग बिना सोचे-समझे पहला ही ऑफर स्वीकार कर लेते हैं।

लेकिन पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, जिसकी ब्याज दरें काफी ऊंची होती हैं। इसलिए लोन के लिए हां कहने से पहले आपको इसकी कुल लागत, रीपेमेंट की शर्तों और अपनी मंथली ईएमआई (EMI) के गणित को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। आइए जानते हैं वो 6 जरूरी बातें, जिन्हें लोन लेने से पहले चेक करना बेहद जरूरी है।

1. लोन लेने का असली मकसद क्या है?

लोन अप्लाई करने से पहले खुद से यह सवाल जरूर पूछें कि आपको इन पैसों की जरूरत क्यों है? अगर आप किसी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या बहुत जरूरी काम के लिए लोन ले रहे हैं, तो यह समझ आता है। लेकिन अगर आप सिर्फ अपनी लग्जरी, महंगे गैजेट्स खरीदने या घूमने-फिरने के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं, तो यह आगे चलकर आपकी जेब पर भारी वित्तीय तनाव पैदा कर सकता है।

2. सिर्फ ब्याज दर न देखें, कुल लागत समझें

ज्यादातर लोग पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर की तुलना करते हैं। हालांकि कम ब्याज दर जरूरी है, लेकिन यह लोन की कुल लागत का सिर्फ एक हिस्सा है। आपको लोन लेते समय इन छिपे हुए खर्चों को भी देखना चाहिए:

  1. प्रोसेसिंग फीस: यह लोन अमाउंट का 1% से 3% तक हो सकती है।
  2. फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट चार्ज: समय से पहले लोन बंद करने पर लगने वाली पेनल्टी।
  3. लेट पेमेंट फीस: ईएमआई बाउंस होने पर लगने वाला भारी जुर्माना।

ये सभी चार्जेस मिलकर आपके लोन को काफी महंगा बना देते हैं।

3. अपनी रीपेमेंट क्षमता का आकलन करें

कोई लोन आज आपकी सैलरी के हिसाब से भले ही किफायती लग रहा हो, लेकिन भविष्य में वित्तीय उतार-चढ़ाव के कारण उसकी ईएमआई चुकाना भारी पड़ सकता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आपकी कुल मंथली इनकम का 50% से अधिक हिस्सा सभी लोन की ईएमआई चुकाने में नहीं जाना चाहिए। अपनी क्षमता से अधिक कर्ज लेना आपको डिफॉल्टर बना सकता है और मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

4. अपना क्रेडिट स्कोर जरूर जांचें

पर्सनल लोन अप्रूवल और उसकी ब्याज दरें काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती हैं। लोन अप्लाई करने से पहले अपना सिबिल स्कोर मुफ्त में ऑनलाइन जरूर चेक करें। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो आप बैंकों से कम ब्याज दरों और बेहतर शर्तों पर लोन के लिए मोलभाव कर सकते हैं। पहले से स्कोर चेक करने पर अगर उसमें कोई गड़बड़ी दिखती है, तो आप उसे समय रहते ठीक भी करवा सकते हैं।

5. लोन की अवधि को समझदारी से चुनें

लोन चुकाने की अवधि का सीधा असर आपकी ईएमआई और कुल ब्याज पर पड़ता है:

लंबी अवधि: इसमें आपकी हर महीने की ईएमआई तो छोटी हो जाएगी, लेकिन आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे लोन की कुल लागत बहुत बढ़ जाएगी।

कम अवधि: इसमें हर महीने जाने वाली ईएमआई बड़ी होगी, लेकिन आप जल्दी कर्जमुक्त हो जाएंगे और आपकी जेब से ब्याज के रूप में बहुत कम पैसा जाएगा। अपनी मंथली इनकम के बजट के हिसाब से ही सही अवधि का चुनाव करें।

6. लोन एग्रीमेंट के ‘नियम व शर्तें’ ध्यान से पढ़ें

लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों में लिखे नियम और शर्तों को पढ़े बिना कभी भी हस्ताक्षर या डिजिटल सबमिट न करें। इसमें लोन रीपेमेंट के नियम, पेनल्टी क्लॉज और छिपे हुए नियम लिखे होते हैं। एग्रीमेंट को अच्छी तरह समझ लेने से भविष्य में किसी भी तरह के धोखे या पछतावे से बचा जा सकता है।

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Viral Post: पार्टी और स्पा की लत ने बढ़ाई मुश्किलें, 23 हजार की सैलरी में 3 लाख के कर्ज से परेशान युवक

Viral Post: सोशल मीडिया पर एक युवक का खर्चों को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। युवक ने बताया कि गलत खर्चों की वजह से उस पर 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया है। 27 वर्षीय एक युवक ने मुताबिक बार-बार पार्टी करना, स्पा पर पैसे खर्च करना और क्रेडिट कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से उस पर 3 लाख रुपये से अधिक का कर्ज हो गया। अब उसे अपने पुराने फैसलों पर पछतावा हो रहा है।

युवक ने बताया कि, उसकी कमाई घर का खर्च और कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उसने सोशल मीडिया पर लोगों से आर्थिक स्थिति सुधारने और कर्ज से बाहर निकलने की सलाह मांगी। सोशल मीडिया पर युवक की ये कहानी तेजी से वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

Reddit पर की गई पोस्ट में युवक ने अपनी फाइनेंस स्थिति का पूरा ब्यौरा शेयर किया। पोस्ट के टाइटल में उन्होंने लिखा, “अपनी बेवकूफी की वजह से कर्ज के जाल में फंस गया।” उसने अपनी पोस्ट के साथ लोन और क्रेडिट कार्ड के बकाया की तस्वीर भी लगाई। उसके अनुसार, उस पर चार पर्सनल लोन और तीन क्रेडिट कार्ड का बकाया है। उसने बताया कि, “हर महीने उसके हाथ में 23,000 रुपये की सैलरी आती है, जिससे घर का खर्च चलाने के साथ कर्ज की किस्तें चुकाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।”

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3 लाख का हो गया कर्ज

उन्होंने लिखा, “कृपया कोई सलाह दें। मैंने इन कर्जों को चुकाने के लिए 3 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेने की कोशिश की, लेकिन मेरी सभी लोन एप्लिकेशन खारिज हो गईं। मेरी मौजूदा सैलरी 23,000 रुपये है। किराया और घर का खर्च निकालने के बाद हर महीने मुश्किल से 4,000 रुपये ही लोन की किस्त के लिए बचते हैं।” युवक ने बताया कि ज्यादा कर्ज और क्रेडिट कार्ड की सीमा का अधिकांश हिस्सा इस्तेमाल करने की वजह से उसका क्रेडिट स्कोर भी लगातार गिर रहा है।

गिर गया क्रेडिट स्कोर

उन्होंने आगे लिखा, “ज्यादा क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करने की वजह से मेरा CIBIL स्कोर 770 से घटकर 765 हो गया है। मैं 27 साल का हूं और मुझसे बड़ी गलती हो गई।” अपडेट में उसने बताया, “मैंने क्रेडिट कार्ड के करीब 80% बकाया को EMI में बदल दिया, लेकिन अब उसकी किस्तें भरना भी मुश्किल हो रहा है। मैं परिवार के साथ रहता हूं और घर में अकेला कमाने वाला हूं। मैंने सारा पैसा पार्टियों और स्पा (बेवकूफी) पर खर्च कर दिया है।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के सामने आने के बाद कई लोगों ने अपनी राय शेयर किए। कुछ यूजर्स ने खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी, वहीं कई लोगों ने कर्ज चुकाने की बेहतर योजना बनाने और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए व्यावहारिक उपाय अपनाने की बात कही। एक यूजर ने लिखा, “अगर कोई आपको नया लोन नहीं दे रहा है, तो फिलहाल सभी EMI रोक दें। अपने बैंक खाते में पैसा न रखें, क्योंकि ऑटो-डेबिट के जरिए रकम कट सकती है। इसके बाद तीनों प्राइवेट लोन और दोनों क्रेडिट कार्ड के लिए बैंक या कंपनी से सेटलमेंट की बात करें।”

एक यूजर ने लिखा, “ऐसा बिल्कुल मत करो। तुम अभी सिर्फ 27 साल के हो, अपनी क्रेडिट हिस्ट्री खराब मत होने दो। कर्ज की रकम बहुत बड़ी नहीं है। ये करीब 10 महीने की सैलरी के बराबर है। अगर समझदारी से खर्च करो और लगातार कोशिश करो, तो 12 से 36 महीनों में इसे चुका सकते हो।” एक और यूजर ने लिखा, “अच्छी बात है कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है। अब इसे सुधारने पर ध्यान दो। जहां तक हो सके बचत करो, घर का खाना खाओ और थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान करते रहो। साथ ही, क्रेडिट कार्ड कंपनियों से बात करके बकाया रकम को EMI में बदलने की कोशिश करो।” एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि हालात और बिगड़ने से पहले परिवार या दोस्तों से मदद लेनी चाहिए।

Personal Loan EMI: कम ब्याज पर पर्सनल लोन चाहिए? अप्लाई करने से पहले जरूर करें ये 7 काम

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सबसे आसान और तेजी से मिलने वाला लोन है। शादी, इलाज, बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत या किसी दूसरी जरूरी जरूरत के लिए लोग अक्सर इसका सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार लोग बिना तैयारी के लोन के लिए आवेदन कर देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि या तो लोन महंगे ब्याज पर मिलता है या फिर आवेदन ही रिजेक्ट हो जाता है।

अगर आप चाहते हैं कि बैंक या NBFC आपको कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर करे, तो आवेदन करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे 7 काम, जो आपकी ब्याज दर कम कराने में मदद कर सकते हैं।

1. CIBIL Score मजबूत रखें

पर्सनल लोन की ब्याज दर तय करने में CIBIL Score सबसे अहम भूमिका निभाता है। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ज्यादा है तो बैंक आपको कम जोखिम वाला ग्राहक मानते हैं। ऐसे ग्राहकों को अक्सर बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना रहती है।

अगर स्कोर कम है तो पहले पुराने बकाया चुकाएं, समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल भरें। कुछ महीनों में स्कोर बेहतर हो सकता है।

2. नौकरी और आमदनी स्थिर होनी चाहिए

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि आपकी नौकरी कितनी स्थिर है। अगर आप लंबे समय से एक ही कंपनी में काम कर रहे हैं और आपकी आमदनी नियमित है, तो लोन मिलने के साथ-साथ बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

अगर अपना रोजगार करते हैं, तो नियमित कमाई और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की भी भूमिका अहम हो जाती है।

3. पहले से ज्यादा कर्ज है तो सावधान रहें

अगर आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से EMI चुकाने में जा रहा है, तो बैंक को लगता है कि आपको लोन देने में जोखिम है। इसे डेट टु इनकम रेशियो कहते हैं यानी कर्ज और कमाई का अनुपात।

हमेशा कोशिश करें कि आपकी कुल EMI, मंथली इनकम के बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा न करे। इससे कम ब्याज पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

4. एक साथ कई जगह आवेदन न करें

कई लोग सोचते हैं कि जितने ज्यादा बैंकों में आवेदन करेंगे, लोन मिलने की संभावना उतनी बढ़ जाएगी। लेकिन ऐसा करना उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है।

हर आवेदन पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में हार्ड इन्क्वायरी दर्ज होती है। कम समय में कई हार्ड इन्क्वायरी होने पर CIBIL Score प्रभावित हो सकता है और बैंक इसे जोखिम का संकेत मान सकते हैं।

5. जिस बैंक से रिश्ता पुराना है, वहां पहले बात करें

अगर आपका सैलरी अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, होम लोन या दूसरी बैंकिंग सेवाएं पहले से किसी बैंक में हैं, तो उसी बैंक से पहले ऑफर जरूर चेक करें।

मौजूदा ग्राहकों को कई बैंक प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन या कम ब्याज दर की पेशकश करते हैं।

6. सिर्फ पहली पेशकश पर हामी न भरें

हर बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और दूसरी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए पहला ऑफर मिलते ही लोन लेने की बजाय अलग-अलग संस्थानों के ऑफर की तुलना करें।

अगर आपका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है, तो कई मामलों में ब्याज दर पर सौदेबाजी की भी गुंजाइश होती है।

7. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

जरूरत से ज्यादा रकम का लोन लेने पर EMI का बोझ बढ़ जाता है। वहीं बहुत लंबी अवधि चुनने पर कुल ब्याज भी ज्यादा देना पड़ सकता है।

इसलिए उतना ही लोन लें, जिसकी वास्तव में जरूरत हो। साथ ही, लोन की अवधि भी अपनी सहूलियत के हिसाब से रखें। ताकि EMI भी आराम से चुकाई जा सके और कुल ब्याज भी ज्यादा न बढ़े।

इन बातों को भी नजरअंदाज न करें

सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें। प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, प्रीपेमेंट नियम, लेट पेमेंट पेनल्टी और दूसरी शर्तों को भी ध्यान से पढ़ें। कई बार कम ब्याज वाला लोन भी छिपे हुए चार्ज की वजह से महंगा पड़ सकता है।

कम ब्याज पर पर्सनल लोन पाना सिर्फ किस्मत की बात नहीं है। ये सिबिल स्कोर, कमाई और आपकी सौदेबाजी के हुनर पर काफी निर्भर करता है। इसलिए आवेदन करने से पहले थोड़ी तैयारी कर लें। इससे आपकी जेब पर EMI का बोझ भी कम रहेगा और लोन चुकाना भी आसान होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट घटाना चाहते हैं? जानें स्मार्ट तरीके

पर्सनल लोन अपने तेज अप्रूवल प्रोसेस और बिना कोलेटरल (कोई एसेट गिरवी रखने की शर्त) की जरूरत के कारण भारत में एक लोकप्रिय फाइनेंसिंग विकल्प है. भारत में पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट आमतौर पर 10.5% से 24% सालाना तक होता है, जो अलग-अलग लेंडर पर निर्भर करता है. आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, जॉब स्टेबिलिटी और उम्र जैसे फैक्टर यह तय करते हैं कि आपको कितने इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा.

अच्छा क्रेडिट स्कोर और स्टेबल इनकम होने पर सस्ते इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है, वहीं जॉब स्टेबिलिटी जैसे अन्य फैक्टर भी अहम भूमिका निभाते हैं. पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट नेगोशिएबल भी होता है, यानी आप अपनी फाइनेंशियल प्रोफाइल के आधार पर बेहतर शर्तों पर लोन ले सकते हैं.

आप मनीकंट्रोल (Moneycontrol) के डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर अपना क्रेडिट स्कोर फ्री में चेक कर सकते हैं. मनीकंट्रोल पर आप 10+ लेंडर के 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ऑफर भी एक्स्प्लोर कर सकते हैं. ये लोन ऑफर 9.99% सालाना के किफायती इंटरेस्ट रेट से शुरू होते हैं. इसका प्रोसेस 100% डिजिटल है, जिससे कुछ ही मिनटों या घंटों में पैसा आपके अकाउंट में आ सकता है.

पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट कम कैसे करें?

लेंडर किसी ग्राहक को कम इंटरेस्ट रेट ऑफर करने से पहले कई क्राइटेरिया देखते हैं. हालांकि, सभी लेंडर इंटरेस्ट रेट नेगोशिएशन के लिए तैयार नहीं होते.

  1. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें

हाई क्रेडिट स्कोर का मतलब है बेहतर क्रेडिटवर्थिनेस. जिन ग्राहकों का स्कोर अच्छा होता है, उन्हें बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन सबसे सस्ते इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन ऑफर करते हैं.

अगर आपका स्कोर 750 से कम है तो उसे सुधारने के तरीकों पर काम करें. 750 से ऊपर स्कोर होने पर आपको कम इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है.

  1. एक्सक्लूसिव ऑफर देखें

बैंक अक्सर त्योहारों या सालगिरह जैसे खास मौकों पर पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट का ऑफर देते हैं. इन ऑफर की जानकारी पाने के लिए बैंक की वेबसाइट चेक करें या कस्टमर केयर से संपर्क करें.

ऐसे प्रमोशनल पीरियड में लोन अप्लाई करने से कम इंटरेस्ट रेट मिल सकता है और रीपेमेंट आसान हो जाता है. हालांकि, हिडन चार्ज से बचने के लिए ऑफर की टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से जरूर पढ़ लें.

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  1. समय पर रीपेमेंट करना न भूलें

अगर आप समय पर EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं चुकाते, तो आपका क्रेडिट स्कोर गिरता है. बैंक इंटरेस्ट रेट तय करते समय आपकी पेमेंट हिस्ट्री पर खास ध्यान देते हैं. इसलिए EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं, बार-बार लोन के लिए अप्लाई करने से बचें और क्रेडिट कार्ड यूज लिमिट कम रखें.

  1. इंटरेस्ट रेट की तुलना करें

किसी एक बैंक से पर्सनल लोन लेने से पहले NBFCs और अन्य बैंकों के इंटरेस्ट रेट ऑफर की तुलना जरूर करें. इससे आप सबसे सस्ते रेट पर लोन पा सकते हैं.

  1. फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दिखाएं

जिन ग्राहकों की इनकम रेगुलर और स्टेबल होती है, उन्हें बैंक प्राथमिकता देते हैं. सैलरी स्लिप, ITR, जॉब लेटर और बैंक स्टेटमेंट जैसे डॉक्युमेंट देकर आप अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी साबित कर सकते हैं और कम इंटरेस्ट रेट पर लोन पा सकते हैं.

  1. सही लेंडर से नेगोशिएशन करें

लोन अप्लाई करने से पहले अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, अमाउंट, रीपेमेंट शर्तों और फीस की तुलना करें. अगर आप पहले से किसी बैंक के ग्राहक हैं या आपकी उस लेंडर के साथ अच्छी रिलेशनशिप है, तो आपके पास इंटरेस्ट रेट नेगोशिएट करने का मौका होता है. सस्ता इंटरेस्ट रेट लेने के लिए लोन एप्लिकेशन के साथ लिखित में रिक्वेस्ट भेजना सबसे अच्छा तरीका है. 

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट पाने के लिए आपको अच्छे क्रेडिट स्कोर, स्टेबल इनकम और स्पेशल ऑफर पर ध्यान देना चाहिए. अलग-अलग विकल्पों की तुलना करके और शर्तों को समझकर आप बेहतर डील पा सकते हैं.

मनीकंट्रोल के ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर आप 10+ लेंडर से 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ले सकते हैं. इन पर सिर्फ 9.99% सालाना से इंटरेस्ट रेट शुरू होता है. साथ ही, इसका प्रोसेस 100% डिजिटल है और अप्रूवल भी जल्दी मिलता है.

LIC Jeevan Utsav: बच्चों के लिए आजीवन तोहफा, हर दिन ₹160 की बचत से करें जिंदगी भर सालाना ₹100000 का इंतजाम

LIC Jeevan Utsav: एलआईसी में लोगों की जरूरतों के हिसाब से कई पॉलिसी हैं, उसमें से एक लाइफटाइम पेंशन प्लान जीवन उत्सव है। इसकी खास बात ये है कि इसमें एक तय अवधि के बाद हर साल एक फिक्स्ड अमाउंट जिंदगी भर पॉलिसीहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट होता रहता है। इस पर मार्केट के उठा-पटक या आर्थिक मंदी या सुस्ती का कोई असर नहीं पड़ता। 1 साल की कम उम्र के किसी बच्चे लिए 16 साल तक हर दिन ₹160 बचाकर 18 वर्ष की उम्र से जिंदगी भर उसके लिए हर दिन ₹274 के हिसाब से सालाना ₹1 लाख की व्यवस्था की जा सकती है।

Jeevan Utsav: डिटेल्स

यह प्लान 30 दिन के नवजात शिशु से लेकर 65 वर्ष की उम्र के बुजुर्गो तक के लिए उपलब्ध है। 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 16 साल तक प्रीमियम चुकाना पड़ेगा तो 65 वर्ष के बुजुर्ग के लिए अधिकतम 5-10 वर्ष तक के पीरियड का ही प्रीमियम पेमेंट ऑप्शन इस पॉलिसी में है। इसमें कम से कम ₹5 लाख तक का सम एश्योर्ड लेना होता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। प्रीमियम भरने का पीरियड समाप्त होने के रेगुलर इनकम प्लान के तहत दो साल बाद से हर साल सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट होता रहेगा, जिंदगी भर। 100 साल की उम्र तक पैसा मिलता है और फिर पॉलिसी बंद कर जो भी मेच्योरिटी वैल्यू बनती है, वह पॉलिसी होल्डर्स को दे दी जाती है। किसी अनहोनी की स्थिति में पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर सम एश्योर्ड और हर साल का गारंटीड एडीशन नॉमिनी को मिलता है।

इसमें ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजिबिलिटी बेनेफिट राइडर), AB, AB (2 गुना), AB (3 गुना), टर्म राइडर और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) जैसे राइडर्स थोड़े से अतिरिक्त शुल्क के साथ मिलते हैं। एडीडीबी का मतलब है कि दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त पैसा मिलता है तो दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूबी का मतलब है कि दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो जाता है तो बच्चों की पॉलिसी में अभिभावक की मौत होने पर 18 साल की उम्र तक के सभी प्रीमियम माफ हो जाते हैं।

रिस्क कवर के मामले में एक बात बताना जरूरी है कि 8 साल से कम उम्र के बच्चों की पॉलिसी के मामले में पॉलिसी शुरू होने के 2 साल बाद या बच्चे के 8 साल का होने, दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क कवर शुरू होगा। 8 साल से अधिक उम्र में पॉलिसी लेने पर पर रिस्क तुरंत चालू हो जाएगा। एक और अहम बात ये है कि बच्चे के 18 साल का होने के बाद पॉलिसी अपने आप उसके नाम पर ट्रांसफर हो जाएगी।

अब एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कि ABC की उम्र 36 वर्ष है और एडीडीबी के राइडर के साथ वह 15 साल के लिए ₹10 लाख की पॉलिसी लेता है। 15 साल तक वह हर साल ₹66150, हर छह महीने पर ₹33653, हर तीन महीने पर ₹16950 या हर महीने ₹5691 में से एक विकल्प चुनता है और 15 साल तक लगातार प्रीमियम भरता है। 15 साल तक प्रीमियम भरने के बाद उसे दो साल तक रुकना होता है जिसके बाद 53 वर्ष की उम्र से उसे हर साल अपने बैंक खाते में सालाना ₹1 लाख यानी ₹10 लाख के सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट मिलता है।

किसी अनहोनी की स्थिति में बात करें तो एक्सीडेंट से पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर नॉमिनी को सम एश्योर्ड और जितने साल पॉलिसी मिली है, उतने समय का गारंटीड एडीशंस जोड़कर मिलेगा। जैसे कि 36 वर्ष की उम्र में पॉलिसी लेने के बाद ABC की मौत 45 वर्ष की उम्र में यानी 9 सालाना प्रीमियम भरने के बाद एक एक्सीडेंट में हो गई तो नॉमिनी को ₹24 लाख मिलेंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी यहां कभी भी कोई सलाह नहीं दी जाती है।