पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की 2 फोटो… कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन करने वाले संगठन JAAC के बारे में जानिए 5 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य JAAC ने सोशल मीडिया पर PoK के 10 जिलों की अनुमानित आबादी का आंकड़ा साझा किया। संगठन के मुताबिक, यदि प्रत्येक जिले से 50 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हों तो कुल संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उसका कहना है कि उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि प्रदर्शन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है। पिछले महीने हिंसा में 30 की मौत हुई थी 8 जून को PoK में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। भारत ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की मांग की थी PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान पर फेक न्यूज और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से लगातार झूठी खबरें और वीडियो फैलाने का पैटर्न देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की हताश कोशिश है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। PoK में 27 जुलाई को चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Viral News: दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम या बेंगलुरु जैसे महंगे शहरों की भागदौड़ छोड़कर एक कॉरपोरेट कपल ने जब हिमाचल प्रदेश के मनाली में बसने का फैसला किया, तो उनका मकसद पैसे बचाना नहीं बल्कि सुकून भरी जिंदगी जीना था। लेकिन इस फैसले ने उनकी जिंदगी के साथ-साथ बैंक बैलेंस भी बदल दिया। अब यह कपल हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर रहा है। अंजलि और नमन ने इंस्टाग्राम पर @anjali.aur.naman नाम से अपने अकाउंट के जरिए अपनी जिंदगी में हए बदलाव को लेकर जानकारी दी है।
दोनों रिमोट कॉरपोरेट जॉब करते हैं। उन्होंने बताया कि वे शहर छोड़कर मनाली इसलिए आए ताकि प्रकृति के बीच शांत और संतुलित जीवन जी सकें। उनका कहना है कि पैसे बचाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन यह अपने आप होने लगा।
किराए में हुई सबसे बड़ी बचत
शहरों में जहां वे हर महीने ₹45,000 किराया देते थे। वहीं, मनाली में उन्हें सिर्फ ₹28,000 में बेहतर घर मिल गया। यानी केवल किराए में ही ₹17,000 की मासिक बचत होने लगी। रिमोट वर्क की वजह से रोज ऑफिस जाने की जरूरत नहीं रही। इससे हर महीने करीब ₹3,000 का यात्रा खर्च बचने लगा।
कपल ने क्या कहा?
वीडियो में अंजलि कहती हैं, “हमने बिना कोशिश किए ही हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा बचाना शुरू कर दिया। हाय, हम अंजलि और नमन हैं। मनाली में रहने वाला एक कॉर्पोरेट कपल जो रिमोट वर्क करता है। हम यहां पैसे बचाने के लिए नहीं आए थे। बल्कि अपनी कॉर्पोरेट नौकरी करते हुए ‘स्लो ट्रैवल’ (आराम से यात्रा) का अनुभव करने आए थे।”
इसके बाद वह बताती हैं कि हिमालय के इस शहर में बसने के बाद उनके खर्च कैसे बदले। सबसे बड़ी बचत किराए में हुई, जो शहर में 45,000 रुपये से घटकर मनाली में 28,000 रुपये हो गया। इससे उनके रहने का मासिक खर्च 17,000 रुपये कम हो गया।
रिमोट वर्क से किराए का खर्च समाप्त
रिमोट वर्क की वजह से रोजाना आने-जाने का खर्च भी खत्म हो गया। इससे हर महीने लगभग 3,000 रुपये की बचत हुई। इसके अलावा ऑफिस डिनर, कॉफी के लिए बाहर जाना और स्नैक ब्रेक जैसे आम खर्च भी तेजी से कम हुए। इससे उनके महीने के बजट में 7,500 रुपये की और कमी आई।
हालांकि, सबसे बड़ी हैरानी की बात वीकेंड पर घूमने-फिरने के खर्च का खत्म होना था। शहर में रहते हुए यह कपल तेज-तर्रार शहरी जिंदगी से दूर छोटी-छोटी यात्राओं पर हर महीने लगभग 5,000 से 6,000 रुपये खर्च करता था। मनाली आने के बाद उन्हें ऐसे ब्रेक की योजना बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, क्योंकि प्रकृति और शांत माहौल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।
‘पैसे बचाने नहीं, जिंदगी बदलने आए थे’
अंजलि का कहना है, “हमने रिमोट वर्क इसलिए नहीं चुना कि पैसे बचेंगे। बल्कि इसलिए चुना क्योंकि हम अलग तरीके से जीना चाहते थे। बचत तो बस एक बोनस बन गई।”
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सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग महानगरों में बढ़ते खर्च, रिमोट वर्क के फायदे और छोटे शहरों में बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई लोग अब यह मानने लगे हैं कि अगर नौकरी रिमोट हो, तो छोटे शहरों में रहकर बेहतर जीवन और बड़ी बचत दोनों संभव हैं।
Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।
मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज
जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।
जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।
आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा
जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।
मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड
जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।
7 जून को सामने आया थआ मामला
राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।
‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’
पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।
वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”
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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।
भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।
भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिला बड़ा सबक
कुछ महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
अब छोटे लेकिन स्मार्ट हथियारों पर फोकस
भारत अब ऐसे हथियार खरीद रहा है जो सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत जवाब देने की क्षमता देंगे। इनमें शामिल हैं-
एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
शोल्डर-फायर्ड एंटी-टैंक मिसाइलें
शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम
कामिकाज़े ड्रोन
हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS)
इनका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, टैंक, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को तुरंत रोकना है।
पाकिस्तान और चीन…दो अलग-अलग चुनौतियां
भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन जैसी दो अलग-अलग सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, टैंक, तोपखाने और घुसपैठ का खतरा रहता है। चीन के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी, लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम और आधुनिक ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। इसी वजह से भारत तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
ड्रोन बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा
आज के युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल चलाना आर्थिक रूप से सही नहीं माना जाता। इसलिए दुनिया भर की सेनाएं अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अपना रही हैं, जो ड्रोन के संचार और नेविगेशन को जाम करके उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा भारत की सुरक्षा ढाल
सरकार एक राष्ट्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से पूरे देश की सुरक्षा करना है। इसमें लंबी दूरी की S-400, मध्यम दूरी की MR-SAM, छोटी दूरी की मिसाइलें और एंटी-ड्रोन सिस्टम मिलकर कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रदान करेंगे।
आकाश तरंग सिस्टम क्या है?
आकाश तरंग एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिसाइल चलाकर ड्रोन को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसकी रेडियो और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन अपना नियंत्रण खो देता है, वापस लौट जाता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। भविष्य के युद्धों में यह भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जा रहा है।
MR-SAM की ताकत
मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) लगभग 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बना सकती है। यह भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
इन सबको मिलाकर देखें तो खरीद की यह लिस्ट यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध के बारे में भारत की समझ कैसे बदल रही है। मिलिट्री प्लानर्स का मानना है कि भविष्य के युद्ध का फैसला सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने वाले फाइटर जेट या महाद्वीपों के बीच मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से नहीं होगा। इसका फैसला सैकड़ों सस्ते ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बिना पायलट वाले विमानों और टैक्टिकल लेवल पर स्मार्ट हथियार लिए सैनिकों से भी होगा।
कम दूरी के हथियार क्यों जरूरी हैं?
एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और पनडुब्बी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बने हुए हैं। हालांकि, कई मिलिट्री एनालिस्ट का तर्क है कि भविष्य की टैक्टिकल लड़ाइयों का नतीजा तय करने वाले हथियार छोटे, सस्ते और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले होंगे। आधुनिक एंटी-टैंक मिसाइल से लैस एक सैनिक करोड़ों रुपये की बख्तरबंद गाड़ी को नष्ट कर सकता है।
सस्ते ड्रोन का एक झुंड एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण बिना एक भी गोली चलाए ड्रोन को बेकार कर सकते हैं। पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें दुश्मन के विमानों को युद्ध के मैदान में आजादी से काम करने से रोक सकती हैं। इससे पता चलता है कि DAC की कई मंजूरियां सैकड़ों किलोमीटर के बजाय कुछ 10 किलोमीटर के दायरे में काम करने वाले सिस्टम पर क्यों केंद्रित हैं।
सिर्फ रणनीतिक क्षमताओं में निवेश करने के बजाय भारत उस चीज को भी मजबूत कर रहा है जिसे मिलिट्री प्लानर अक्सर ‘टैक्टिकल एज’ (युद्ध के मैदान में बढ़त) कहते हैं। भारत की मिलिट्री प्लानिंग अनोखी है क्योंकि उसे दो बिल्कुल अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए तैयारी करनी होती है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान एक तेजी से बदलने वाला युद्ध का मैदान बनाता है, जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने, ड्रोन और सीमा पार से घुसपैठ जैसी चीजें शामिल हैं।
वहीं, उत्तरी सीमा पर चीन की चुनौती ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध, एडवांस्ड सर्विलांस क्षमताएं, लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी और तेजी से बेहतर हो रहे बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि इलाके बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों मोर्चों पर एक जरूरत समान है। लगातार निगरानी, तेजी से टारगेट का पता लगाना और हवाई खतरों से कई स्तरों पर सुरक्षा। यही वजह है कि DAC की मंजूरी में एक साथ कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी इलाके में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर हमला किया है। BLA के मुताबिक, 3 जुलाई की शाम करीब 6:32 बजे उसके मजीद ब्रिगेड के एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को कैंप में घुसाकर विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से ज्यादा गार्ड्स मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दबे हो सकते हैं BLA ने दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स का कैंप पूरी तरह तबाह हो गया। संगठन के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद उसके फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने कैंप पर हमला किया और बच गए सुरक्षाकर्मियों को नजदीक से निशाना बनाया। BLA ने कहा कि मलबे में कई सुरक्षाकर्मी दबे हो सकते हैं, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। BLA के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच के रूप में हुई BLA ने अपने बयान में दावा किया कि हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल के रूप में हुई है, जिसे संगठन ने अपने मजीद ब्रिगेड का सदस्य बताया। BLA का कहना है कि वह इस ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो अपने आधिकारिक चैनलों के जरिए जारी करेगा। BLA बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। CPEC का अहम केंद्र है ग्वादर ग्वादर जिला पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डीप-सी पोर्ट का केंद्र है और हाल के सालों में उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख निशाना रहा है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा है। अरबों डॉलर की इस बुनियादी ढांचा परियोजना को बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों की ओर से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें… PoK में प्रदर्शन, लोग बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं:₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; JAAC के 600 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता हिरासत में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग जुटे। उन्हेंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुआई में चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी इलाके में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर हमला किया है। BLA के मुताबिक, 3 जुलाई की शाम करीब 6:32 बजे उसके मजीद ब्रिगेड के एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को कैंप में घुसाकर विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से ज्यादा गार्ड्स मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दबे हो सकते हैं BLA ने दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स का कैंप पूरी तरह तबाह हो गया। संगठन के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद उसके फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने कैंप पर हमला किया और बच गए सुरक्षाकर्मियों को नजदीक से निशाना बनाया। BLA ने कहा कि मलबे में कई सुरक्षाकर्मी दबे हो सकते हैं, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। BLA के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच के रूप में हुई BLA ने अपने बयान में दावा किया कि हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल के रूप में हुई है, जिसे संगठन ने अपने मजीद ब्रिगेड का सदस्य बताया। BLA का कहना है कि वह इस ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो अपने आधिकारिक चैनलों के जरिए जारी करेगा। BLA बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। CPEC का अहम केंद्र है ग्वादर ग्वादर जिला पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डीप-सी पोर्ट का केंद्र है और हाल के सालों में उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख निशाना रहा है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा है। अरबों डॉलर की इस बुनियादी ढांचा परियोजना को बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों की ओर से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें… PoK में प्रदर्शन, लोग बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं:₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; JAAC के 600 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता हिरासत में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग जुटे। उन्हेंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुआई में चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया। बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत के लिए पहला इंटरनेशनल मैच खेला। वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू करते ही कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किया। वैभव सबसे कम उम्र में भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले पुरुष खिलाड़ी बन गए और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वैभव ICC के फुल-मेंबर देश में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा पुरुष क्रिकेटर का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
नहीं तोड़ पाए ये रिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में भारत के लिए डेब्यू कर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। लेकिन सबसे कम उम्र में किसी फुल-मेंबर देश के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का विश्व रिकॉर्ड अभी भी पाकिस्तान के हसन रजा के नाम है। हसन रजा ने 1996 में जिम्बाब्वे के खिलाफ बहुत कम उम्र में अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला था। इसी वजह से वैभव इस रिकॉर्ड की सूची में दूसरे नंबर पर हैं।
पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण (केवल फुल-मेंबर देश)
| नंबर | प्लेयर | टीम | फॉर्मेट | डेब्यू पर उम्र | विरोधी टीम | जगह | डेब्यू की तारीख |
| 1 | हसन रज़ा | पाकिस्तान | टेस्ट | 14 साल 227 दिन | ज़िम्बाब्वे | फ़ैसलाबाद | 24 अक्टूबर 1996 |
| 2 | हसन रज़ा | पाकिस्तान | ODI | 14 साल 233 दिन | ज़िम्बाब्वे | क्वेटा | 30 अक्टूबर 1996 |
| 3 | वैभव सूर्यवंशी | इंडिया | T20I | 15 साल 99 दिन | इंग्लैंड | मैनचेस्टर | 26 जून 2026 |
| 4 | मोहम्मद शरीफ़ | बांग्लादेश | ODI | 15 साल 116 दिन | ज़िम्बाब्वे | हरारे | 7 अप्रैल 2001 |
| 5 | मुश्ताक मोहम्मद | पाकिस्तान | टेस्ट | 15 साल 124 दिन | वेस्ट इंडीज़ | लाहौर | 26 मार्च 1959 |
अगर सभी देशों के खिलाड़ियों की बात करें, तो वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले टॉप-10 खिलाड़ियों में शामिल नहीं हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, ये उपलब्धि रोमानिया के मैरियन घेरासिम के नाम है, जिन्होंने सिर्फ 14 साल और 16 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने अपने करियर में 12 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और आखिरी बार साल 2022 में मैदान पर नजर आए।
महिला खिलाड़ी में रिकॉर्ड किसके नाम
महिला क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड पाकिस्तान की साजिदा शाह के नाम दर्ज है। उन्होंने 23 जुलाई 2000 को आयरलैंड के खिलाफ वनडे मैच में सिर्फ 12 साल और 171 दिन की उम्र में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। इसी वजह से वह अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाली खिलाड़ी मानी जाती हैं।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत देश की टॉप लीडरशिप शुक्रवार को तेहरान में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था। इस दौरान सुरक्षा वजहों से अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई शामिल नहीं हुए। अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स ने इससे दूरी बरती। ईरान की तरफ से न्योता भेजे जाने के बावजूद इन्होंने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा। हालांकि पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान, जॉर्जिया जैसे देशों के टॉप लीडर्स समारोह में पहुंचे। वहीं, भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए। खामेनेई की अंतिम यात्रा की 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ के ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध-प्रदर्शनों से खुद को अलग करने के एक दिन बाद, पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने निराशा जताई है। जब दास से हाल ही में पंजाबी सिंगर-एक्टर के कमेंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इससे “नाराज़” हैं। उन्होंने दोसांझ से यह भी अपील की कि वे आगे आएं और भारत के युवाओं के मुद्दों पर बात करें।
दास ने कहा, “यह बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ कहना चाहिए। उन्हें युवाओं का हौसला बढ़ाना चाहिए। वे अपने संगीत के जरिए ऐसा करते हैं। इस आंदोलन के बारे में अपनी बात रखकर या युवाओं की समस्याओं पर बात करके भी वे ऐसा कर सकते हैं। उन्हें कुछ तो कहना चाहिए।”
हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत दोसांझ से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछा गया। दिलजीत ने साफ कर दिया कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि अपने बिजी ‘ऑरा टूर’ (Aura Tour) शेड्यूल की वजह से उन्हें इस स्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने लोगों से यह भी गुजारिश की कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रखा जाए, क्योंकि वह कोई राजनेता नहीं हैं और एक एंटरटेनर के तौर पर अपने काम पर ही ध्यान देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “भाई, मुझे विरोध प्रदर्शनों और ऐसी चीज़ों से दूर रखो। मैं एक आर्टिस्ट हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं।” दुनिया भर में मशहूर इस सिंगर ने आगे कहा कि दुनिया में हर चीज का एकदम सही या पूरी तरह से ठीक होना नामुमकिन है। उन्होंने कहा, “हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती। इस दुनिया में हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती।”
दिलजीत दोसांझ हाल ही में इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में नजर आए थे। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित एक पीरियड ड्रामा है। नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म 2026 की अहम सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। इसे दर्शकों से काफी तारीफ मिली है और लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया की वजह से बॉक्स ऑफिस पर भी लगातार अच्छी कमाई हुई है।
Aaj Ka Mausam 3 July: देश भर में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 जुलाई के लिए अपना मॉर्निंग वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अगले 2-3 दिनों में और मजबूत होने के आसार हैं। इस मजबूत सिस्टम और कई अन्य चक्रवातीय परिसंचरणों के कारण आज देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, वज्रपात और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर भारत के कुछ मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में अगले दो दिनों तक बारिश थोड़ी कम रहेगी लेकिन 5 जुलाई से एक बार फिर मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होगा। राहत की बात यह है कि देश के अधिकतम तापमान में 8 जुलाई तक कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
इन 5 राज्यों में बेहद से बेहद बारिश की चेतावनी
आईएमडी के मॉर्निंग बुलेटिन के मुताबिक आज देश के पांच प्रमुख राज्यों/क्षेत्रों में मानसून का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बेहद भारी बारिश का अलर्ट है:
- गुजरात
- कोंकण और गोवा
- मध्य महाराष्ट्र (3 से 5 जुलाई के दौरान कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश)
- पश्चिम मध्य प्रदेश (3 और 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश)
- ओडिशा (3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना)
यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश
मौसम विभाग ने देश के मध्य, पहाड़ी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
मध्य और पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में आज बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूरे मध्य भारत में आज मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत: पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आज बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में 3 से 6 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
दक्षिण भारत: केरल व माहे और तटीय कर्नाटक।
उत्तर प्रदेश और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश
देश के कई अन्य हिस्सों में भी आज भारी बारिश का दौर जारी रहेगा:
उत्तर प्रदेश और बिहार: उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्से) और बिहार में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। यूपी और बिहार में 3-4 जुलाई को छिटपुट से मध्यम बारिश के बाद 5 से 7 जुलाई के बीच फिर से व्यापक बारिश का दौर आएगा।
उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में आज भारी बारिश का अलर्ट है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में आज और कल (3-4 जुलाई) केवल छिटपुट बारिश होगी, लेकिन यहां 5 से 8 जुलाई के बीच भारी बारिश की वापसी होगी।
पश्चिम और पूर्वी भारत: मराठवाड़ा, गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड (4 से 8 जुलाई के बीच व्यापक बारिश)।
दक्षिण भारत: आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल।
पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (इन राज्यों में 3-4 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है)।
आंधी-तूफान का अलर्ट: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में थंडरस्टॉर्म और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है:
40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी क्षेत्रों, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, गुजरात राज्य, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में आज 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने (झोंके 60 किमी/घंटे तक) और बिजली चमकने की आशंका है।
30-40 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, असम व मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, पूरे कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप, तेलंगाना और तमिलनाडु में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
तेज सतही हवाएं: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में आज तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।
उमस भरा मौसम: अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय के मैदानी इलाकों में 3 से 6 जुलाई के दौरान मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा।
मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी
समुद्र में उठने वाली तेज लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है-
अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तटों के साथ-साथ सोमालिया व ओमान तटों पर 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में भी 3 से 5 जुलाई के दौरान मौसम बेहद खराब रहेगा। मछुआरों को 7 जुलाई तक इन क्षेत्रों में न जाने की हिदायत है।
बंगाल की खाड़ी: आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के तटों सहित मध्य, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम तूफानी रहेगा। यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक देश के वायुमंडल में इस समय कई शक्तिशाली प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सीमा आज 3 जुलाई को पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक सक्रिय है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और मध्य पाकिस्तान से सटे उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई तक दो अलग-अलग चक्रवातीय हवाओं के क्षेत्र बने हुए हैं। उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर एरिया तक फैली मुख्य मानसूनी ट्रफ लाइन, दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक फैली ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (जो वर्तमान में 66°E देशांतर के साथ सक्रिय है) मिलकर देश भर में इस भारी बारिश को बढ़ावा दे रहे हैं।
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