पाकिस्तान का एक कार्गो विमान मंगलवार रात कराची पहुंचने से पहले लापता हो गया। विमान शारजाह से कराची आ रहा था और उसमें 5 क्रू मेंबर सवार थे। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) के मुताबिक, रात 9:18 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को नेविगेशन सिस्टम में खराबी की जानकारी दी। कंट्रोल रूम ने विमान को मार्गदर्शन देने की कोशिश की, लेकिन करीब तीन मिनट बाद उसका संपर्क टूट गया। आखिरी बार विमान कराची से 155 नॉटिकल मील (287 किमी) पश्चिम में ट्रैक किया गया। विमान के लापता होने के बाद अरब सागर में बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है। पाकिस्तान नेवी, एयर फोर्स और अन्य एजेंसियां खोज अभियान में जुटी हैं। अधिकारियों ने अभी तक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने या किसी हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विमान के गायब होने की लोकेशन… हादसे की वजह फिलहाल साफ नहीं PAA ने कहा है कि विमान के लापता होने की वजह का अभी पता नहीं चल सका है। विमान और उसमें सवार 5 क्रू मेंबरों की स्थिति को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। फ्लाइट रडार 24 के शुरुआती डेटा के मुताबिक, आखिरी समय में विमान ने पहले ऊंचाई खोई, फिर कुछ ऊपर गया और इसके बाद अचानक तेजी से नीचे आया। शुरुआती अनुमान है कि विमान अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, विमान बलूचिस्तान के ओरमारा तट के पास लापता हुआ। वहीं, K2 Airways ने कहा है कि वह पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ जांच और सर्च ऑपरेशन में पूरा सहयोग कर रही है। 2018 में शुरू हुई थी K2 एयरवेज K2 एयरवेज कराची स्थित निजी कार्गो एयरलाइन है, जिसकी शुरुआत मई 2018 में हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ 27 साल पुराना Boeing 737 2024 में एयरलाइन के बेड़े में शामिल किया गया था। यह कंपनी का इकलौता विमान था और इसकी पिछली उड़ान 28 जून को हुई थी। एविएशन एक्सपर्ट इमरान असलम ने ARY न्यूज से कहा कि इंजन फेल होने की स्थिति में भी विमान आमतौर पर कुछ दूरी तक ग्लाइड करता है। उनके मुताबिक, विमान का इतनी तेजी से नीचे आना सामान्य नहीं है और इसकी वजह जांच के बाद ही साफ होगी। इससे पहले मई 2020 में पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का यात्री विमान कराची में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में 97 लोगों की मौत हुई थी। बाद की जांच में पायलट, सह-पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की मानवीय गलती को दुर्घटना का कारण माना गया था।
चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।
चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव अपने चरम पर है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाक के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस मामले पर पाकिस्तान कई बार गीदड़भभकी दे चुका है। अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने जहर उगला है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का फिर वही पुराना राग अलापा है। भारत को गीदड़ भभकी देते हुए बिलावल ने कहा कि, “पाकिस्तान कभी भी सिंधु नदी पर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। हम हर फ्रंट पर तैयार हैं।”
बिलावल ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर
बिलावल ने कहा किस पाकिस्तान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और सिंधु नदी के पानी पर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा। हम इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।” वहीं, पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित रहेगी।
पाकिस्तान पहले भी दे चुका है धमकी
बता दें कि, सिंधु जल समझौता, वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे के नियम तय करता है। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले पर यही पुराना राग अलापा था। उन्होंने कहा कि यह समझौता अब भी पूरी तरह वैध और लागू है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए भारत पर निशाना साधने की कोशिश की है।
बता दें कि, यह पहले मौका नहीं है जब भारत के खिलाफ बिलावल भुट्टो की बौखलाहट सामने आई है। इससे पहले बिलावल भुट्टो ने कहा था कि अगर भारत सिंधु जल संधि को स्थगित रखता है और उसपर बांध बनाता है तो भारत के खिलाफ युद्ध होगा।
जहां एक तरफ भारत आज आधुनिक और शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी कंगाली और बदहाली के आंसू रो रहा है। भारत में जहां रिकॉर्ड समय में बड़े-बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के आर्थिक संकट ने उसके सबसे प्रमुख शहरों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब रावलपिंडी डिवीजन में अपने विकास खर्चों में भारी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते लंबे समय से वादे किए गए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। इसने वहां के गवर्नेंस और अर्बन प्लानिंग के पैरालिसिस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
रावलपिंडी डिवीजन के बजट में 60 फीसदी की भारी कटौती
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नए वित्तीय वर्ष में रावलपिंडी डिवीजन में काम करने वाले सभी प्राधिकरणों के विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी को कवर करने वाले वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण अब नए सार्वजनिक निवेश के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। फंड की इस भारी किल्लत का मतलब यह है कि 30 जून 2027 से पहले किसी भी बड़े विकास कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत होने की कोई उम्मीद नहीं है।
अधर में लटका ‘लेह एक्सप्रेसवे’ और मियावाकी फॉरेस्ट
प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके साथ ही पूरे डिवीजन में मियावाकी जंगलों के विस्तार पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रावलपिंडी या उसके पड़ोसी जिलों में एक भी ऐसा अर्बन फॉरेस्ट विकसित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है उनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं। ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और अब पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।
ये मेगा प्रोजेक्ट्स भी हुए डिले या पूरी तरह से ड्रॉप
फंड की कमी और आर्थिक तंगी की मार केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ी है। मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अब कम से कम दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। रावलपिंडी में बार-बार आने वाली शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए डिजाइन की गई प्रस्तावित भूमिगत सीवरेज टनल योजना को अब पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए गाजी बरोथा वॉटर प्रोजेक्ट को भी बंद कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह रही कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 17 अरब रुपये से बढ़कर लगभग 110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसे वहन करना कंगाल पाकिस्तान के बस के बाहर था।
अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का ही सहारा!
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने विकास एजेंसियों को साफ तौर पर सूचित कर दिया है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स अब केवल एक ही शर्त पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनके लिए विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से वित्तीय सहायता या लोन सुरक्षित किया जा सके। इसके बिना पाकिस्तान सरकार के पास इन्हें पूरा करने का कोई पैसा नहीं है। रावलपिंडी विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष तारिक मुर्तजा ने इस बदहाली पर बात करते हुए बताया कि लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को उनके कार्यकाल के दौरान सभी आवश्यक मंजूरियां और फंडिंग मिल चुकी थी। लेकिन देश में हुए सरकार परिवर्तन के बाद इन सभी जनहित के प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया गया।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी भोपाल के सतगढ़ी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिससे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष नाता रहा है। आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर भोपाल को सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और कन्वेंशन सेंटर की बड़ी सौगात मिली है। आज एक नया इतिहास बन रहा है। यह इंडस्ट्रियल पार्क देश के पहले उद्योग मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जाना जाएगा। हम जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण पर विशेष जोर दिया। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र हमारे किसानों के लिए भी समृद्धि का द्वार खोलेंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा। गारमेंट इंडस्ट्री से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। हमारी सरकार खेत से कारखाने और उद्योग को बाजार से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। भोपाल प्राकृतिक सुंदरता और झील-तालाबों की नगरी है, लेकिन अब यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भी राजधानी की पहचान बनेगा। अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
भोपाल औद्योगिक नगरी के रूप में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से प्रदेश के विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक अंचल में देश-दुनिया के निवेशक औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर रहे हैं। कल ही चंबल के शिवपुरी में ढाई हजार करोड़ लागत से रक्षा क्षेत्र की बड़ी औद्योगिक ईकाई का भूमि-पूजन किया है। इससे पूर्व मुरैना को सोलर सेक्टर की बड़ी सौगात दी है। उन्होंने कहा कि रोजगार आधारित उद्योगों के लिए गुना में 2 हजार करोड़ का सीमेंट प्लांट भी बनाया जा रहा है। शिवपुरी में बनने वाली मिसाइलों की क्षमता 1000 किलोमीटर की होगी, जो पाकिस्तान के किसी भी कोने तक पहुंच सकेगी।
हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत@2047 के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश भी विकास के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भोपाल में पहली बार जीआईएस जैसे बड़ा आयोजन संपन्न हुआ, जिसे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आशीर्वाद मिला। जीआईएस 2025 में आए 30 लाख करोड़ से अधिक निवेश को देखकर विरोधियों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। इस आयोजन में देश-दुनिया के बड़े उद्योगपति और औद्योगिक घराने शामिल हुए।
राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज 30 लाख करोड़ के निवेश में से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। प्रदेश में पहली बार 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर आने का नया कीर्तिमान बना है। किसान कल्याण वर्ष में जनवरी से लेकर अब तक निवेशकों के साथ 86 हजार करोड़ के एमओयू साइन हुए हैं। प्रदेशभर में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में ही 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की बहनों को भी हर महीने सौगात मिल रही है। अब तक मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना में राज्य सरकार 50 हजार करोड़ से अधिक राशि लाड़ली बहनों को दे चुकी है। अब बहनें रोजगार आधारित उद्योगों में काम करेंगी तो उन्हें 5000 रुपए अलग से दिया मिलेगा।
सभी के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' की बात कही थी। उनके इस संकल्प को साकार करने के लिए राज्य में अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। समाज के हर वर्ग के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए। प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है कि डंके की चोट पर हर हालत में यूसीसी मध्यप्रदेश में लागू होगा। इसके लिए कमेटी ने सभी धर्म-समुदाय के सुझाव लिए ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो। अब मध्यप्रदेश एक समान कानून लागू करने वाला देश के बड़े राज्यों में शामिल प्रदेश बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन से हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हमारे साथ काम कर रहे हैं। इन देशों से 10 हजार करोड़ का विदेशी निवेश भी मध्यप्रदेश को मिला है।
प्रदेश में छोटे-मझोले उद्योगों की देनदारी खत्म कर दी गई है। बिजली, पानी और सड़क हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से राजाभोज विमानतल की दूरी महज 25 किलोमीटर है। रानी कमलापति स्टेशन भी मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है। भोपाल का वेस्टर्न बायपास भी यहीं से गुजरेगा। उन्होंने कहा कि सतगढ़ी के 25 एकड़ क्षेत्र में 10 हजार क्षमता वाला एक आधुनिक कन्वेंशन सेंटर भी बनेगा। यह प्रदेश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर होगा। मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक विकास और पारदर्शी व्यवस्था के साथ तेजी से आगे बढ़ता जाएगा। सतगढ़ी क्षेत्र औद्योगिक विकास की दिशा में एक मंदिर के समान होगा। सागर ग्रुप के सुधीर अग्रवाल सतगढ़ी में 100 करोड़ का निवेश करेंगे।
रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है पार्क-मध्य प्रदेश में औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग (IPIP) तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME) के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आज का भूमिपूजन केवल एक औद्योगिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि भोपाल और मध्यप्रदेश के औद्योगिक भविष्य की नई आधारशिला रखने का अवसर है। सतगढ़ी स्थित यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। पार्क का स्थान रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग से लगभग 1.4 किमी की दूरी पर स्थित है तथा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रमुख शहरी क्षेत्रों से उत्कृष्ट संपर्क रखता है। इससे भोपाल पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई अर्थव्यवस्था के उद्योगों का भी केंद्र बनेगा।
सांपों को आमतौर पर डर और खतरे से जोड़ा जाता है, लेकिन प्रकृति ने कुछ ऐसे दुर्लभ और बेहद खूबसूरत सांप भी बनाए हैं जो अपनी चमकदार त्वचा से लोगों को हैरान कर देते हैं। ये सांप रोशनी पड़ते ही इंद्रधनुषी रंगों में चमकने लगते हैं, जैसे किसी ने उन पर रंगों की परत बिखेर दी हो। यह खूबसूरती किसी जादू का नहीं बल्कि उनकी त्वचा की माइक्रो-लेवल संरचना और प्रकाश के परावर्तन का नतीजा होती है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले ये इरिडेसेंट स्नेक्स विज्ञान और प्रकृति का अनोखा मेल पेश करते हैं।
जंगलों, नदियों और यहां तक कि जमीन के नीचे रहने वाले ये जीव अपने अनोखे रंगों और पैटर्न की वजह से बेहद खास माने जाते हैं। आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले ये सांप इस बात का सबूत हैं कि प्रकृति सिर्फ डरावनी नहीं, बल्कि उतनी ही खूबसूरत और रहस्यमयी भी हो सकती है।
रेनबो बोआ
मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप अपनी शानदार इंद्रधनुषी चमक के लिए जाना जाता है। इसकी स्किन पर मौजूद सूक्ष्म संरचनाएं रोशनी को अलग-अलग एंगल से तोड़ती हैं, जिससे नीला, हरा, सुनहरा और बैंगनी रंग झलकता है।
सनबीम स्नेक
दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलने वाला यह सांप सामान्य रूप से गहरे भूरे रंग का होता है, लेकिन धूप में इसकी त्वचा अचानक चमकदार रंगों में बदल जाती है। इसकी खास बात यह है कि त्वचा के नीचे मौजूद पिगमेंट इसकी चमक को और बढ़ा देता है।
व्हाइट-लिप्ड पाइथन
न्यू गिनी का यह पाइथन अपने सफेद होंठों की वजह से पहचाना जाता है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती इसकी चमकदार स्किन में छिपी है। इसकी त्वचा में मौजूद माइक्रो-लेयर्स रोशनी को परावर्तित करके इसे चमकदार बना देते हैं।
बोएलेंस पाइथन
यह सांप अपने जीवन में रंग बदलता है—छोटे में लाल और सफेद धारियों वाला, जबकि बड़े होने पर यह काला और सुनहरा दिखने लगता है। इसकी चमकदार स्किन इसे “ऑयल-स्लिक” जैसा इफेक्ट देती है।
इरिडेसेंट शील्डटेल
भारत के पश्चिमी घाटों में पाया जाने वाला यह सांप बहुत कम दिखाई देता है। इसकी त्वचा पर मौजूद चमकदार परतें इसे जमीन के अंदर भी हल्की इंद्रधनुषी चमक देती हैं, जिससे यह बेहद खास बन जाता है।
ईस्टर्न इंडिगो स्नेक
उत्तर अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप काले रंग का होता है, लेकिन सूरज की रोशनी पड़ते ही इसमें नीले रंग की चमक दिखाई देती है। यह अपने पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्यूबन बोआ: सादगी में छिपी हल्की चमक
क्यूबा का यह सबसे बड़ा सांप अपने भूरे और तन रंग के कारण आसानी से छिप जाता है। इसकी चमक बहुत तेज नहीं होती, लेकिन सही रोशनी में यह हल्की कांच जैसी चमक दिखाता है, जो इसे रहस्यमय बनाती है।
पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम लगाने से 18 महिलाओं की किडनी पर संकट! भारत में बिक्री को लेकर उठे बड़े सवाल
बाजार में ऐसी कई स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम मौजूद हैं जो कुछ ही दिनों में गोरा और बेदाग रंग देने का दावा करती हैं। आकर्षक विज्ञापनों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लेकिन हर चमकदार पैकेज के पीछे सुरक्षित उत्पाद हो, यह जरूरी नहीं है। हाल ही में एक मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिना जांचे-परखे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है। इस घटना के बाद स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता, उनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों और ऑनलाइन बिकने वाले कॉस्मेटिक सामान की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्वचा की देखभाल के लिए हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पादों का ही चुनाव करना चाहिए, क्योंकि सुंदर दिखने की जल्दबाजी कभी-कभी सेहत पर भारी पड़ सकती है।
तीन ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर लगा तत्काल बैन
महाराष्ट्र FDA ने जांच के बाद तीन स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी। इनमें Goree Beauty Cream, Face Fresh Gold (Beauty Cream और Beauty Serum) और Golden Star Beauty Cream शामिल हैं। जांच में इन्हें Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किया गया।
लैब टेस्ट में मिला जहरीला सच
एफडीए की लैब जांच में इन क्रीमों में मरकरी (पारा) और लेड (सीसा) की मात्रा तय मानकों से कई गुना ज्यादा पाई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे तत्व लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
चेंबूर से खुली पूरे मामले की कड़ी
इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले मुंबई के चेंबूर में एक दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसने आयात प्रतिबंध के बावजूद कथित तौर पर पाकिस्तान में बनी Goree Beauty Cream का स्टॉक रखा और उसकी बिक्री की।
18 मरीज… और एक जैसी आदत
डॉक्टरों ने जब नागपुर में दो साल के दौरान किडनी की बीमारी से जूझ रही 18 महिलाओं के मामलों का अध्ययन किया तो एक समानता सामने आई। सभी महिलाएं लंबे समय से एक ही स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल कर रही थीं। इसी के बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई।
752 गुना ज्यादा मरकरी होने का दावा
हेल्थ कंटेंट क्रिएटर चिराग बरजात्या ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि महाराष्ट्र FDA की रिपोर्ट में Goree Beauty Cream में मरकरी की मात्रा कानूनी सीमा से 752 गुना अधिक पाई गई। उनका कहना है कि यही कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की वजह बन सकता है।
कैसे नुकसान पहुंचाती है मरकरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, मरकरी त्वचा में बनने वाले मेलानिन को कम कर देती है, जिससे रंग हल्का दिखाई देता है। लेकिन यह असली निखार नहीं बल्कि रासायनिक असर होता है। धीरे-धीरे यह धातु त्वचा के जरिए शरीर में पहुंचकर खासकर किडनी में जमा होने लगती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।
ऑनलाइन बिक्री पर उठे बड़े सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह क्रीम कई इंस्टाग्राम पेजों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Meesho पर भी उपलब्ध थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि प्रतिबंध और आयात नियमों के बावजूद ऐसा प्रोडक्ट भारतीय बाजार तक कैसे पहुंचा।
लोगों की बढ़ी चिंता, मीशो ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लोगों से बिना जांचे-परखे स्किन-व्हाइटनिंग प्रोडक्ट्स से दूर रहने की अपील की। वहीं Meesho ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उसने इसकी जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विशेषज्ञों की सलाह
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऐसी स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम इस्तेमाल करता है, तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जांच जरूर करें। बिना लेबल वाले या संदिग्ध स्रोत से खरीदे गए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
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Dr Syama Prasad Mukherjee History: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद, विधिवेत्ता, सांसद और दूरदर्शी राजनीतिक नेता थे। कम आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से लेकर स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करने तक, उनका सार्वजनिक जीवन अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा।
वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास किया, जिसका प्रभाव आगे के दशकों में भी दिखाई दिया। आज भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके राष्ट्रसेवा के संकल्प, शिक्षा के प्रति समर्पण, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक योगदान के लिए याद किया जाता है।
1. सबसे कम उम्र के कुलपति
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेधावी छात्र थे। उन्होंने केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला था। वह इस पद पर बैठने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।
2. स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री
जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। वे देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। सन् 1943 से 1946 तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे थे।
3. नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा
जब नेहरू सरकार ने 1950 में पाकिस्तान के साथ 'नेहरू-लियाकत समझौते' पर हस्ताक्षर किए, तो डॉ. मुखर्जी इसके सख्त खिलाफ थे। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
4. भारतीय जनसंघ की स्थापना
मंत्रिमंडल से हटने के बाद, उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की। यही संगठन आगे चलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में पुनर्गठित हुआ।
5. एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे
वे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 के घोर विरोधी थे। उन्होंने कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और वहां जाने के लिए परमिट (Permit) की व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का यह प्रसिद्ध नारा दिया।
6. बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश और गिरफ्तारी
उस समय भारत के नागरिकों को भी कश्मीर जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी। डॉ. मुखर्जी ने इस कानून को चुनौती देने के लिए मई 1953 में बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें वहां की सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।
7. बैरिस्टर की उपाधि और राजनीति में प्रवेश
उन्होंने इंग्लैंड (लंदन) के 'द ऑनरेबल सोसाइटी ऑफ लिंक्न्स इन' से कानून की पढ़ाई की और 1927 में बैरिस्टर बने। भारत लौटने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए।
8. बंगाल विभाजन में अहम भूमिका
जब 1947 में भारत का विभाजन हो रहा था, तब उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संघर्ष किया कि मुस्लिम लीग पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल न कर पाए। उन्हीं के प्रयासों के कारण हिंदू बहुल पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा।
9. 'महाबोधि सोसाइटी' के अध्यक्ष
वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे। वे बौद्ध धर्म और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। वे महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने सांची में बौद्ध अवशेषों को सुरक्षित रखने और एशियाई देशों में इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
10. रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन
23 जून 1953 को कश्मीर में नजरबंदी के दौरान ही अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है, क्योंकि उनकी मां और कई बड़े नेताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। उन्हें 'महान देशभक्त और शहीद' के रूप में याद किया जाता है।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रहने वाले एक युवक ने कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में रहने वाली एक युवती से मिलने के लिए लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार कर ली। दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया ऐप स्नैपचैट पर हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई। हालांकि, यह सीमा पार की प्रेम कहानी ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी और युवक को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया।
स्नैपचैट वाली मोहब्बत में PoK से भारत आ गया युवक
रिपोर्ट के मुताबिक, PoK के मुजफ्फराबाद निवासी जीशान मीर की पहचान जम्मू-कश्मीर के उरी की रहने वाली इरम मजीद से स्नैपचैट के जरिए हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि प्रेमिका से मिलने की चाह में जीशान ने गैरकानूनी तरीके से LoC पार की। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सीमा में आने के करीब एक महीने बाद 31 मई को जीशान मीर को उरी के सिलिकोट सेक्टर के पास भारतीय सेना की 12 ग्रेनेडियर्स की टीम ने पकड़ लिया था। सभी कानूनी और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 4 जुलाई को कमान अमन सेतु क्रॉसिंग पर उसे पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
भारतीय सेना ने पकड़ा
अधिकारियों ने बताया कि भारत में रहने के दौरान भारतीय सेना ने जीशान मीर के साथ मानवीय आधार पर सम्मान और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया। यह सेना की पेशेवर कार्यशैली और मानवीय मूल्यों के अनुरूप था। यह मामला हाल के वर्षों में सामने आई सीमा पार की प्रेम कहानियों में एक नया उदाहरण बन गया है।
इससे पहले साल 2023 में पाकिस्तान की रहने वाली सीमा हैदर भी काफी चर्चा में रही थीं। वह अपने चार बच्चों के साथ गैरकानूनी तरीके से भारत आई थीं ताकि अपने साथी सचिन मीना के साथ रह सकें। दोनों की पहचान ऑनलाइन गेम PUBG खेलते समय हुई थी और बाद में दोनों के बीच प्यार हो गया। भारत आने के बाद सीमा हैदर को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अब वह ग्रेटर नोएडा में सचिन मीना के साथ रहती हैं और दोनों के दो बच्चे हैं।
साल 2023 में ऐसा ही एक और मामला सामने आया था। पाकिस्तान की 19 वर्षीय इकरा जीवानी अपने साथी मुलायम सिंह यादव के साथ रहने के लिए नेपाल के रास्ते गैरकानूनी तरीके से भारत पहुंची थीं। दोनों की पहचान मोबाइल पर लूडो खेलते समय हुई थी। बाद में दोनों ने शादी कर ली और बेंगलुरु में रहने लगे। कुछ समय बाद अधिकारियों ने उन्हें ढूंढ़ निकाला। इसके बाद इकरा को गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें वापस पाकिस्तान भेज दिया गया।

