नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:9:35 पर सरकारी SMS आया; अलर्ट में 2 घंटे देरी, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद अब अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, रसुवा जिला प्रशासन को चीन की तरफ से बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले करीब छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। अलर्ट की टाइमिंग को लेकर इन अलग-अलग दावों के बीच सिस्टम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 682 पहुंच गई, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे ही मिल गई थी जानकारी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरा-तफरी मचने पर वे परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम काम करना बंद कर गया। भूकंप के बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:9:15 पर सरकारी SMS आया; अलर्ट में 2 घंटे देरी, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं

नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 691 पहुंच गई है। तीन हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे जानकारी मिल गई थी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वे बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरातफरी मचने पर परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप जैसे झटकों के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके आए थे। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाले डेटा रिसीविंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

यह भी पढ़ें: 626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद में धादिंग में मिले इस लॉकर को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकालने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक लॉकर बाढ़ में बहने के बाद बेलखुखोला के पास मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय लोगों ने लॉकर तोड़कर उसके अंदर रखा कैश निकाल लिया है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती तलाशी में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के पास से 92.68 लाख नेपाली रुपए यानी करीब 57 लाख रुपए बरामद किए। कैश निकालने के आरोपी 19 से 49 साल के बीच पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोग गलछी-4 के मस्तार के रहने वाले हैं। कुछ गलछी-6 के आदमघाट और सिद्धलेक-7 के आदमतार के रहने वाले हैं। वहीं कुछ लोग मूल रूप से चितवन और परसा के हैं और फिलहाल धादिंग में रह रहे हैं। सभी की उम्र 19 से 49 साल के बीच है। पुलिस अब बरामद रकम के स्रोत की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं। महिला के शव से बालियां चुराने वाले 2 गिरफ्तार इसी दौरान नेपाल में बाढ़ से जुड़ी एक और चोरी का मामला सामने आया। नारायणी नदी में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक महिला के शव से सोने की बालियां निकालने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। वीडियो में दो लोग बाढ़ में बहकर आए महिला के शव से कथित तौर पर सोने की बालियां निकालते दिखाई दे रहे हैं। नेपाल की बाढ़ में में 626 मौतें, 2426 लापता नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग लापता हैं। शुक्रवार रात तक 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी थी। वहीं, 517 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी है। ये खबर भी पढ़ें: नेपाल में तबाही लाने वाले ग्लेशियर टूटने का VIDEO:800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था; अब तक 633 मौतें, 2500 लापता नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक बाढ़ आई थी। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Nepal Flood: ‘बम धमाके जैसी थी आवाज’ नेपाल से भारत लौटी महिला ने बताया कैसा था तबाही का भयानक मंजर

नेपाल में आई विशानकारी बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है वहीं हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आपदा के बाद राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन कई इलाकों में हालात अब भी खराब हैं। वहीं भारत के कई श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल जाते हैं। हाल ही में तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु कुछ दिन पहले धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। उन्हें नहीं पता था कि उनकी यात्रा अचानक मुसीबत में बदल जाएगी। वहीं शुक्रवार को सभी श्रद्धालु सुरतक्षित भारत लौट आए हैं। वहीं भारत आने के बाद उन्होंने नेपाल में हुए तबाही का भयानक मंजर के बारे में बताया।

भारत लौटे 21 श्रद्धालु

शुक्रवार को तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए। चेन्नई एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर कई तरह की इमोशनल नजर आईं। नेपाल में बिताए मुश्किल समय को याद कर वे भावुक और डरे हुए थे, लेकिन घर वापस पहुंचने की खुशी भी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। लंबी और कठिन यात्रा के बाद अपने देश लौटना उनके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। बता दें, 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ों से पानी, बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे आया, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास कई इलाकों में भारी तबाही मच गई। इस हादसे में कई गांव प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई।

ऐसा लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ हो

इस हादसे में बचीं विजयभुवनेश्वरी ने उस डरावने पल को याद करते हुए बताया कि अचानक आई बाढ़ ने उनकी तीन बसों के काफिले को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने NDTV को बताया, “बाढ़ आने के दौरान इतनी तेज आवाज हुई, जैसे कोई बम धमाका हुआ हो। आगे और पीछे की बसें फंस गईं, इसलिए हम अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की ओर चढ़ गए। इसके बाद हम उस पहाड़ी पर पहुंचे, जहां आर्म्ड रिजर्व पुलिस कैंप था। वहां पुलिस ने हमारी मदद की और हमें सुरक्षित जगह पर रखा।” शुक्रवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत तमिलनाडु के मंत्री नारायणसामी आनंद और मंत्री डी सरथकुमार ने किया।

दूसरी जिंदगी मिल गई

उन्होंने बताया कि उस मुश्किल समय में उनके दिमाग में हर वक्त सिर्फ अपनी बेटी की चिंता चल रही थी। किरुबाथिरी के लिए यह हादसा किसी दूसरी जिंदगी मिलने जैसा था। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह एक नया जन्म है। मैं किसी से शिकायत नहीं कर सकती। क्लाइमेट चेंज एक सच्चाई है और गरीब लोगों को अक्सर दूसरों की गलतियों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।” वहीं, वल्लीनायकी ने बाढ़ के इस भयावह मंजर को ज्वालामुखी फटने जैसा बताया। उन्होंने बताया, “यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे कंक्रीट का कोई ज्वालामुखी फट गया हो और सब कुछ अपनी चपेट में ले रहा हो।”

अब तक 620 से ज्यादा लोगों की हुई मौत

तिब्बत सीमा के पास बाढ़ से प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए शनिवार को भारत की 11 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंची। यह टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और बचाव अभियान में सहयोग करेगी। नेपाल और तिब्बत में बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस आपदा में नेपाल में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

Nepal Flood Alert: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा उस भीषण फ्लैश फ्लड के सिर्फ चार दिन बाद सामने आया है, जिसमें देश के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपर की ओर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है।

चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि झील में कुछ बदलाव देखे गए हैं, जिसमें पानी का रंग लगातार गहरा होना शामिल है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि उसके मॉडल के मुताबिक, अगर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी आ सकता है। इससे नेपाल के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

नई चेतावनी किस वजह से जारी की गई?

चीनी अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को संभावित चेतावनी का संकेत बताया है।

नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, “परसों बननी शुरू हुई झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसका मतलब है कि यह फट सकती है।”

चीन ने कहा कि झील में अभी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले बहाव में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है।

फिलहाल, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कितना पानी जमा हुआ है?

ग्लेशियर के ढहने से मलबे की एक प्राकृतिक रुकावट बन गई, जिससे ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में एक अस्थायी झील बन गई है। कहा जा रहा है कि इसी घटना के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी।

यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

चीनी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है।

अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?

चीन ने इस बात का अंदाजा लगाने के लिए बाढ़ की मॉडलिंग की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो कितना पानी नीचे की ओर बह सकता है। चीनी संदेश में कहा गया, “अगर बांध का कोई हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है। यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा।”

अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इलाके पर नजर रख रहे हैं।

झील से पानी पहले ही बहने लगा है

शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था।

हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

बाढ़ की तबाही से अब भी जूझ रहा नेपाल

नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी नदी के ऊपरी हिस्से में भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

ताजा चेतावनी के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारी अब अस्थायी झील में पानी के स्तर के साथ-साथ उसे रोकने वाले प्राकृतिक बांध की मजबूती पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।

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नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। इस तबाही में कई परिवार अपनों से बिछड़ गए हैं। वहीं इस त्रासदी में कई बच्चे भी प्रभावित हुए है। वहीं इस बाढ़ के बीच 8 साल के जोयाल की कहानी काफी वायरल हो रही है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचने के लिए 8 साल के जोयाल जंगल की ओर भाग गया और कुछ समय तक पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उसकी मां बेहद परेशान थी। बाद में वह आखिरकार अपनी मां से मिल गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं पूरी कहानी

सुरक्षित निकाला गया बाहर

बाढ़ से प्रभावित नेपाल के रसुवा जिले से जोयाल घाले को हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जोयाल के पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कई कट और चोट के निशान थे। उसकी 28 वर्षीय मां मैटी माया तमांग पूरे दिन राहत शिविरों और लोगों को जुटाने वाली जगहों पर अपने दोनों बेटों को तलाशती रहीं। काफी समय तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उन्हें डर सताने लगा था कि शायद दोनों की बाढ़ में जान चली गई है।

कैसे पता चला बेटा जिंदा है

मैटी माया तमांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं सिर्फ रो रही थी और खुद को संभाल नहीं पा रही थी।” बाद में उन्हें पता चला कि उनका बेटा जोयाल जिंदा है। रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वह पास के नुवाकोट के एक अस्पताल में जोयाल से मिली थीं। जब तमांग को पता चला कि जोयाल जिंदा है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब आपने बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने तो पहले ही उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं उसे कभी ढूंढ पाऊंगी।” तमांग ने कहा, “जब मुझे अपने बड़े बेटे के बारे में पता चला, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस मिल गई हो।” तमांग को उनका छोटा बेटा भी सुरक्षित मिल चुका था।

हर तरफ फैले थे कीचड़

बुधवार सुबह जोयाल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे, जबकि उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। तमांग तुरंत स्कूल की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने बताया, “समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।” बाढ़ में स्कूल की पूरी इमारत तबाह हो गई थी। लेकिन, जोयाल किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में उसने बचावकर्मियों को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह पढ़ाई कर रहा था और अचानक चारों तरफ “बहुत ज्यादा अंधेरा” छा गया।

करीब 17 हजार बच्चे हुए प्रभावित

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयाल अपने एक दोस्त के साथ स्कूल से निकलकर पास के जंगल में चला गया। दोनों बच्चों ने पानी से बचने के लिए पेड़ों पर चढ़कर शरण ली। जब आठ साल के जोयाल से पूछा गया कि क्या उस समय उसे डर लगा था, तो उसने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। जोयाल और उसका भाई भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जो नेपाल में आई बाढ़ के कारण मुश्किल में फंस गए। यूनिसेफ के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में करीब 17 हजार बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। संस्था नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की जानकारी जुटा रही है जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं। इन बच्चों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है और उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें, लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे बाढ़ आ गई। इसके बाद बर्फ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे और घाटी में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया

नेपाल बाढ़ में जिंदगी बचाने का खतरनाक मिशन, घने कीचड़ और अंधेरी सुरंग के बीच फंसे लोगों तक ऐसे पहुंचे नेपाली सैनिक, वायरल हुआ Video

नेपाल इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के पानी के साथ आया मलबा और कीचड़ गांवों और इमारतों में फैल गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग जगहों पर फंस गए। हालात इतने मुश्किल हैं कि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन गया है। ऐसे समय में नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। हेलिकॉप्टर की मदद से ऊंची इमारतों और छतों पर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि जवान मुश्किल रास्तों से अंदर जाकर भी लोगों की तलाश कर रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने खराब मौसम, मलबा और दुर्गम इलाका बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस बीच सामने आए कुछ वीडियो बचाव अभियान की गंभीरता और जवानों की कोशिशों की तस्वीर दिखा रहे हैं।

छतों पर फंसे लोगों के लिए देवदूत बना हेलिकॉप्टर

रेस्क्यू ऑपरेशन के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सेना के हेलिकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते नजर आ रहे हैं। एक वीडियो में हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त इमारतों के ठीक ऊपर मंडराता दिखाई देता है, जबकि नीचे बाढ़ का मलबा फैला हुआ है। एक अन्य वीडियो में छत पर फंसा एक व्यक्ति लगातार हेलिकॉप्टर की ओर हाथ हिलाकर मदद मांगता दिखाई देता है। इसके बाद जवानों ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुश्किल हालात में सेना का यह ऑपरेशन लोगों की जान बचाने की जद्दोजहद को दिखाता है।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों तक पहुंचे जवान

बाढ़ के बाद रसुवा जिले में अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर की सुरंग के अंदर भी कई लोग फंस गए थे। इनमें मजदूरों के अलावा कुछ पर्यटक भी शामिल थे। सामने आए वीडियो में नेपाली सेना के दो जवान कीचड़ से भरे रास्ते से आगे बढ़ते हुए सुरंग के अंदर जाते दिखाई देते हैं। बाहर मलबे और कीचड़ की मोटी परत के बावजूद जवानों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की।

नेपाल में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में 579 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में सात लोगों की जान गई है। दोनों तरफ 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में करीब 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में यह संख्या 558 बताई गई है। इनमें 540 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

हजारों जवान राहत और बचाव में जुटे

नेपाल की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के अनुसार, राहत और बचाव अभियान में करीब 14,829 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में सेना की टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हेलिकॉप्टर और जमीनी टीमें उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो अब भी कहीं मलबे, सुरंगों या ऊंची इमारतों में फंसे हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश

इस आपदा का असर भारत के नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 149 लोग चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। करीब 400 भारतीय चीन में सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं लगभग 320 भारतीयों के अभी भी लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी है। नेपाल में जारी यह राहत अभियान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा से लड़ाई नहीं, बल्कि मलबे के बीच जिंदगी की तलाश की लगातार कोशिश है। हर रेस्क्यू के साथ सेना और बचाव दल उन परिवारों के लिए उम्मीद जगा रहे हैं, जो अब भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

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नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

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नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच गुजरात के लापता लोगों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। राज्य सरकार ने नेपाल में लापता हुए नागरिकों की नई सूची जारी की है। इस सूची में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित राज्य के विभिन्न जिलों के लोग शामिल हैं। वहीं, 2 और एनआरआई (NRI) के भी संपर्क से बाहर होने की खबर है। ALSO READ: नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

 

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक गुजरात के कुल 25 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इस स्थिति के कारण उनके परिजनों में भारी चिंता का माहौल है। रिश्तेदार लगातार राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रशासन से अपने स्वजनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। 

 

विदेशी नागरिकता वाले गुजराती भी लापता

लापता लोगों में केवल स्थानीय गुजराती ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे एनआरआई (NRI) गुजराती भी शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, लापता 25 लोगों में से कुछ नागरिक न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से नेपाल की यात्रा पर आए थे और बाढ़ के बाद उनका संपर्क टूट गया है। 

 

राज्य सरकार और प्रशासन की लगातार निगरानी

राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाकर सूची अपडेट कर रही है। मौजूदा 25 लोगों की सूची के बाद जैसे-जैसे संपर्क स्थापित होगा, इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना है। लापता लोगों के संबंध में कोई भी नई जानकारी मिलते ही तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा। 

 

हेल्पलाइन नंबर 

 079-23251900 

 9978405304 

 1070 

 

जिलेवार लापता गुजरातियों का विवरण

 

सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अहमदाबाद के 5, आनंद के 4, सूरत के 4, खेड़ा के 4, गांधीनगर के 4, अमरेली के 2, राजकोट के 1 और वलसाड के 1 नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता भी है। 

 

नेपाल में बाढ़ का कहर और भारी तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रास्ते बंद होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। 

 

150 से अधिक गुजरातियों के प्रभावित होने की खबर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताया कि वायरल हो रहे भयानक वीडियो में लोग, मकान और वाहन तिनके की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आपदा में जान-माल के वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने में अभी लंबा समय लग सकता है। नेपाल के रसुवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आई इस आपदा में अब तक 392 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 290 भारतीयों सहित 1,400 से अधिक लोग लापता हैं। देशभर से और विशेष रूप से गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक वहां गए थे, जिनमें से प्राथमिक जानकारी के अनुसार 150 से अधिक गुजरातियों के भी इस हादसे में प्रभावित होने की रिपोर्ट मिल रही है। 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 315 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार नेपाली प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीयों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।