धुंध में लिपटे पहाड़ और झरनों की गर्जना, मॉनसून 2026 में एशिया की 10 सबसे खूबसूरत जगहें!

बारिश का मौसम सिर्फ ठंडी हवाएं और सुकून ही नहीं लाता, बल्कि कई जगहों की खूबसूरती भी कई गुना बढ़ा देता है। एशिया में ऐसे कई ट्रैवल डेस्टिनेशन (travel destination) हैं, जो मानसून (monsoon)के दौरान धुंध से ढकी पहाड़ियों, झरनों, हरियाली और खूबसूरत नजारों से किसी फिल्मी सीन जैसे लगते हैं। अगर आपको बारिश में घूमना पसंद है, तो ये जगहें आपकी अगली ट्रिप (trip) के लिए बेहतरीन साबित हो सकती हैं:

Udaipur, India (उदयपुर, भारत)

Udaipur in Monsoon: Best Places to Visit, Things to Do & Stays

राजस्थान का उदयपुर बारिश के मौसम में और भी खूबसूरत दिखने लगता है। दिल्ली, मुंबई और जयपुर जैसे शहरों से यहां ट्रेन, फ्लाइट और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मानसून में पिछोला झील (Lake Pichola) पानी से भर जाती है और सिटी पैलेस का नजारा देखने लायक होता है। आप मानसून पैलेस (Monsoon Palace) , फतेह सागर झील (Fateh Sagar Lake)और बोट राइड का भी आनंद ले सकते हैं।

Munnar, India (मुन्नार, भारत)

10 Places In India That Feel Like Europe During Monsoon

केरल का मुन्नार मानसून में किसी हरे स्वर्ग जैसा नजर आता है। कोच्चि एयरपोर्ट से लगभग 4 घंटे की रोड ट्रिप करके यहां पहुंचा जा सकता है। बारिश के दौरान चाय के बागान, अट्टुकल वॉटरफॉल (Attukal Waterfalls) और धुंध से ढकी पहाड़ियां पर्यटकों (tourists) को खूब आकर्षित करती हैं। यहां बैठकर गर्म चाय के साथ बारिश का आनंद लेना एक अलग ही एक्सपीरियंस है।

Baguio, Philippines (बगियो, फ़िलीपींस)

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अगर आप बारिश के मौसम में ठंडी हवा और पहाड़ों का मजा लेना चाहते हैं, तो फिलीपींस का बगियो शहर बेहतरीन जगह है। मनीला (Manila) से करीब 4 से 6 घंटे की सड़क यात्रा (road trip) करके यहां पहुंचा जा सकता है। में यहां की पहाड़ियां धुंध से ढक जाती हैं और मौसम काफी ठंडा हो जाता है। बरनहम पार्क (Burnham Park) में घूमना, लोकल कैफे में गर्म कॉफी पीना और आसपास के व्यू पॉइंट्स से नजारे देखना यहां का खास एक्सपीरियंस है।

Ubud, Indonesia (उबुद, इंडोनेशिया)

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उबुद बाली द्वीप ( island ) पर है। भारत से पहले बाली (Denpasar) की फ्लाइट लें और वहां से करीब डेढ़ घंटे की टैक्सी राइड करके उबुद पहुंच सकते हैं। बारिश के मौसम में यहां के धान के खेत, झरने और जंगल बेहद हरे-भरे हो जाते हैं। सुबह की सैर, योग सेशन और तेगालालंग राइस टैरेस (Tegalallang Rice Terrace) की खूबसूरती इस मौसम में और बढ़ जाती है।

Chiang Mai, Thailand (चियांग माई, थाईलैंड)

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थाईलैंड (Thailand )का चियांग माई मानसून में हरियाली से भर जाता है। बैंकॉक (Bangkok) से फ्लाइट या ट्रेन के जरिए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। बारिश के बाद यहां की पहाड़ियां, धान के खेत और दोई इनथानोन नेशनल पार्क (Doi Inthanon National Park) बेहद खूबसूरत दिखते हैं। सुबह मंदिर घूमने और शाम को नाइट मार्केट का मजा लेने का यह अच्छा समय माना जाता है।

 

Hoi An, Vietnam (होई आन, वियतनाम)

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होई आन अपने पुराने शहर और रंग-बिरंगी लालटेनों के लिए मशहूर है। दा नांग एयरपोर्ट से करीब 45 मिनट की रोड ट्रिप करके यहां पहुंचा जा सकता है। बारिश के मौसम में यहां की गलियां और नदी किनारा और भी अट्रेक्टिव दिखते हैं। आप लालटेन बनाने की वर्कशॉप, लोकल फूड और नदी किनारे शाम बिताने का आनंद ले सकते हैं।

Luang Prabang, Laos (लुआंग प्रबांग, लाओस)

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लाओस का यह शांत शहर मानसून में हरियाली से भर जाता है। यहां फ्लाइट से पहुंचना सबसे आसान तरीका है। बारिश के दौरान कुआंग सी वॉटरफॉल (Kuang Si Waterfall) पूरे वेग से बहता है और देखने लायक नजारा पेश करता है। मंदिरों की सैर, मेकांग नदी में बोट राइड और नाइट मार्केट घूमना यहां की खास एक्टिविटी हैं।

Kyoto, Japan (क्योटो, जापान)

Tsuyu Rainy Days In Kyoto, Japan | Outlook Traveller

जापान का क्योटो बारिश के मौसम में बेहद शांत और खूबसूरत लगता है। टोक्यो या ओसाका से बुलेट ट्रेन के जरिए आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। मानसून में यहां के मंदिर, मॉस गार्डन (moss garden) और हाइड्रेंजिया (hydrangea) के फूल बेहद सुंदर नजर आते हैं। इस मौसम में टूरिस्ट की भीड़ भी कम रहती है, जिससे आराम से घूमने का मौका मिलता है।

George Town, Malaysia (जॉर्ज टाउन, मलेशिया)

 Kek Lok Si Temple complex George Town Malaysia aerial drone Southeast Asia Penang island

मलेशिया के पेनांग द्वीप (Penang Island) पर जॉर्ज टाउन अपने हेरिटेज (street food) और स्ट्रीट फूड (street food) के लिए जाना जाता है। पेनांग एयरपोर्ट (Penang Airport) से कुछ ही देर में यहां पहुंच सकते हैं। बारिश के मौसम में पुरानी इमारतें और सड़कें अलग ही खूबसूरती बिखेरती हैं। यहां का लोकल खाना, कैफे और स्ट्रीट आर्ट टूरिस्ट को खूब पसंद आते हैं।

Arugam Bay, Sri Lanka (अरुगम बे, श्रीलंका)

Sri Lanka with arugam bay coastline wild tropical plants southwest monsoon season 78542208 Stock Photo at Vecteezy

अगर आपको सर्फिंग पसंद है, तो श्रीलंका का अरुगम बे (Arugam Bay) बारिश के मौसम में शानदार जगह है। कोलंबो (Colombo) से डोमेस्टिक फ्लाइट या रोड के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। मानसून के दौरान यहां समुद्र की ऊंची लहरें सर्फिंग के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं। इसके अलावा शांत बीच, ताजा सी-फूड और खूबसूरत सूर्योदय भी यहां की खास पहचान हैं।

Weather Update : फिर बदलेगा मौसम, यहां उमस से मिलेगी राहत, इन राज्‍यों में बारिश का अलर्ट

Weather to change again, rain alert for these states

Weather Update News : एक बार फिर मौसम में बदलाव होने जा रहा है। मौसम विभाग ने आज पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, गोवा, झारखंड, सिक्किम, असम, हिमाचल, उत्तराखंड, मेघालय, मणिपुर, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। कुछ राज्यों में ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है। एक तरफ दिल्ली और एनसीआर के लोग उमस और गर्मी से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है। दक्षिण में तमिलनाडु के 19 जिलों में हीटवेव का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा कर्नाटक में बारिश न होने से सूखे जैसे हालात हैं।

 

कुछ राज्यों में ओले गिरने की आशंका

एक बार फिर मौसम में बदलाव होने जा रहा है। मौसम विभाग ने आज पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, गोवा, झारखंड, सिक्किम, असम, हिमाचल, उत्तराखंड, मेघालय, मणिपुर, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। कुछ राज्यों में ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।

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तमिलनाडु के 19 जिलों में हीटवेव का रेड अलर्ट

एक तरफ दिल्ली और एनसीआर के लोग उमस और गर्मी से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है। दक्षिण में तमिलनाडु के 19 जिलों में हीटवेव का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा कर्नाटक में बारिश न होने से सूखे जैसे हालात हैं।

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इन राज्‍यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज ओडिशा में कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के जम्मू, पुंछ, कुलगाम, कठुआ, मुजफ्फराबाद, किश्तवाड़, अनंतनाग और उधमपुर में आज और कल भारी बारिश-आंधी का अलर्ट है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, बोकारो, सिमडेगा, खूंटी, दुमका, देवघर, हजारीबाग, धनबाद और पलामू में आज भारी बारिश की चेतावनी है।

 

बिहार के गया, औरंगाबाद, सिवान, भोजपुर, शेखपुरा, लखीसराय, पटना, कैमूर, बक्सर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर, अररिया और मुंगेर में आज भारी बारिश का अलर्ट है। दिल्ली में आज और कल भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। 

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मध्य प्रदेश के 31 जिलों में बारिश की चेतावनी

मध्य प्रदेश में करीब 9 दिन से थमा तेज बारिश का दौर अब फिर लौटने की तैयारी में है। मौसम विभाग ने आज बालाघाट और डिंडोरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 31 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

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पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका

पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश से नदियों में जल स्तर बढ़ सकता है और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका है। महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय है। मुंबई और आसपास के तटीय इलाकों में बादल छाए रहने का अनुमान है, वहीं पुणे और कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी है।

Gold Rate Today: सोना फिर लुढ़का, 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव आया नीचे; अब कितने में मिल रहा 10 ग्राम

देश में सोने की कीमत में फिर से गिरावट दिख रही है। ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट दोनों का दाम लुढ़का है। 17 जुलाई की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 143430 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई और कोलकाता में भाव 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम और चेन्नई में 143450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,030.84 डॉलर प्रति औंस पर है। ट्रेडर्स के मुताबिक, लोकल डिमांड संतुलित बनी हुई है, जबकि वैश्विक बाजारों में सोने में गिरावट है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131490143430
मुंबई131340143280
अहमदाबाद131390143330
चेन्नई131490143450
कोलकाता131340143280
हैदराबाद131340143280
जयपुर131490143430
भोपाल131390143330
लखनऊ131490143430
चंडीगढ़131490143430

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान देश में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून तिमाही में 7.49 अरब डॉलर था।

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट बरकरार है। 17 जुलाई की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। इसके अलावा लगातार प्रॉफिट-बुकिंग के कारण भी यह नीचे आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.79 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

स्टार्टअप को मिली ₹5 करोड़ की फंडिंग, फाउंडर ने खरीदी लग्जरी कार और…; इन्वेस्टर ने लगा दी क्लास

मुंबई के प्रमुख वेंचर कैपिटलिस्ट और Ice VC के फाउंडिंग पार्टनर मृणाल झावेरी ने एक युवा एंटरप्रेन्योर की खुलकर आलोचना की है। फंडिंग मिलते ही फाउंडर द्वारा लग्जरी खर्च करने को उन्होंने अनुचित बताते हुए कहा कि स्टार्टअप फंडिंग को सैलरी हाइक की तरह नहीं लेना चाहिए।

3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।

‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”

क्या हैं AI डेटा सेंटर और क्यों हो रहा है इनका विरोध?

AI data center

– विनम्र मिश्रा (डेटा इंजीनियर, मुंबई)

 

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में जितनी चर्चा एआई (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर हुई है, शायद ही किसी और तकनीक पर हुई हो। लेकिन बीते कुछ महीनों से डेटा सेंटर का विषय अधिक चर्चा में है, जिस पर आज की यह एआई तकनीक और इसका भविष्य टिका हुआ है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

 

लोगों का दावा है कि ये डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में डेटा सेंटर के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं। हाल ही में अमेरिकी संसद में सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने जॉर्जिया प्रांत के एक डेटा सेंटर के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, आज इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

 

क्या है डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर को आप एक ऐसे विशाल ढांचे या इमारत के रूप में देख सकते हैं, जहाँ हजारों सर्वर या कंप्यूटर रखे होते हैं। आप जिस भी एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे का पूरा दिमाग इन्हीं सर्वर्स को समझिए। जाहिर है, दिमाग चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार, ये सर्वर भी भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। आज तेजी से काम करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर, जिन पर एआई काम करता है, वे आपके सामान्य कंप्यूटर से कई गुना अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। जिस एआई तकनीक का आज हम उपयोग कर रहे हैं या आगे करेंगे, उसके लिए एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों और हजारों सर्वर्स की जरूरत होती है।

 

क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता?

ये कंप्यूटर न केवल अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि काम करते समय गर्मी (Heat) के रूप में भारी ऊर्जा बाहर भी निकालते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपका कंप्यूटर या स्मार्टफोन थोड़ा गर्म हो जाता है। इसे आप स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब के उदाहरण से भी समझ सकते हैं।

 

कंप्यूटर लैब में जहाँ कई कंप्यूटर होते हैं, वहाँ उनसे निकलने वाली गर्मी इतनी अधिक हो सकती है कि वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को नुकसान पहुँचा दे। इसीलिए कंप्यूटर लैब को हमेशा वातानुकूलित (Air Conditioned) रखा जाता है।

 

इसी प्रकार, बड़े डेटा सेंटरों में इतनी भीषण गर्मी पैदा होती है कि वह सर्वर्स के हार्डवेयर को जलाकर नष्ट कर सकती है। ऐसे में उन्हें ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है। डेटा सेंटर के स्तर पर केवल एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल करने से बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी कारण कई डेटा सेंटर कूलिंग (ठंडा करने) के लिए पानी का उपयोग करते हैं। सर्वर्स के रैक (जहाँ कई सारे सर्वर रखे होते हैं) के पास से पानी की पाइपलाइन गुजारी जाती है, जो गर्मी सोखती है और बाद में यह गर्म पानी भाप बनकर उड़ जाता है।

 

डेटा सेंटरों को लगातार ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में पानी की भारी बर्बादी होती है। उदाहरण के लिए, गूगल के डेटा सेंटरों द्वारा वर्ष 2022 में उपभोग किया गया 5.6 बिलियन गैलन (लगभग 2,120 करोड़ लीटर) पानी, भारत के किसी मध्यम आकार के शहर के लगभग 4.3 लाख लोगों की पूरे साल की पानी की जरूरत के बराबर है।

 

ध्वनि प्रदूषण भी है एक बड़ी समस्या

डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की यह बेलगाम खपत कई जगहों पर स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लोगों का विरोध है कि उनके हक का पानी और बिजली इन डेटा सेंटरों को दी जा रही है। लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; डेटा सेंटरों से निकलने वाली तेज आवाज (ध्वनि) भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों से लगातार एक कम आवृत्ति वाली (Low-Frequency) भारी आवाज निकलती रहती है, जिससे आसपास के घरों में कंपन महसूस होता है। 'अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन' ने भी माना है कि ऐसी लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनि लगातार 24 घंटे सुनने के कारण हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

आज दुनिया भर में जहाँ एआई पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और टेक कंपनियाँ तथा सरकारें एआई की इस अंधी दौड़ में भाग रही हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को लेकर आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों की शिकायत बिल्कुल जायज है कि सरकारें और बड़ी कंपनियाँ विकास की आड़ में पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।

 

‘महीने में 10 लाख कमा कर 5 लाख दे रहा हूं टैक्स’, कनाडा में 18 महीने काम करने के बाद भारत लौटे व्यक्ति ने बयां किया दर्द

कई भारतीयों के लिए कनाडा एक ऐसी जगह है, जहां बेहतर मौके और आरामदायक जिंदगी का इंतजार होता है। लेकिन तब क्या होता है जब कोई ऐसा व्यक्ति, जिसने वह सपना जी लिया हो, कहे कि यह सब बेकार था? क्या सिर्फ ज्यादा कमाई से विदेश में बेहतर जिंदगी की गारंटी मिल सकती है?

ये सवाल एंटरप्रेन्योर हर्ष गुप्ता की एक वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के केंद्र में हैं। वे परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पर टोरंटो गए थे, लेकिन सिर्फ 18 महीने बाद ही लौट आए। अपने बिजनेस से महीने में लगभग 10 लाख रुपये कमाने के बावजूद, गुप्ता ने कहा कि ज्यादा टैक्स, रहने का बहुत ज्यादा खर्च, हेल्थकेयर में देरी और कॉम्पिटिटिव जॉब मार्केट ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।

थ्रेड्स पर अपना अनुभव शेयर करते हुए गुप्ता ने लिखा, “अगर आप भारतीय हैं और कनाडा जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये 10 बातें आपको पता होनी चाहिए।” उन्होंने विदेश जाने की योजना बना रहे किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक – अच्छी नौकरी खोजने – से शुरुआत की। गुप्ता के अनुसार, कनाडा में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलना बहुत से लोगों की उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है, सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है और हर नौकरी के लिए हजारों लोग अप्लाई करते हैं।

गुप्ता ने लिखा, “अच्छी नौकरियां मिलना मुश्किल है। सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है। Shopify के अलावा कोई भी ग्लोबल लेवल की बड़ी कंपनी नहीं है। ज्यादा लोग CAD 15/घंटा (1,000 रुपये) पर काम कर रहे हैं। रहने का खर्च आपकी कमर तोड़ देगा। मैं डाउनटाउन टोरंटो में रहता था। एक साधारण 600 sq ft के अपार्टमेंट के लिए महीने का किराया 2 लाख रुपये था।”

फिर टैक्स का झटका लगा। गुप्ता ने कहा कि सबसे बड़े सरप्राइज में से एक वह टैक्स था, जो उन्हें अच्छी कमाई के बावजूद देना पड़ा। “टैक्स बहुत ज्यादा हैं। मैं अपने बिजनेस से महीने में 10 लाख रुपये कमाता था और 5 लाख रुपये टैक्स में देता था।”

एंटरप्रेन्योर ने कनाडा के हेल्थकेयर सिस्टम पर भी सवाल उठाए और कहा कि मेडिकल केयर मिलना उतना आसान नहीं था, जितना उन्होंने सोचा था। उन्होंने लिखा, “मुफ्त हेल्थकेयर एक मिथक है।” गुप्ता ने बताया कि उन्हें फैमिली डॉक्टर मिलने में छह महीने का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट लेने में दो महीने से ज्यादा का समय लगा। उन्होंने दवाओं की कीमत को भी एक और चिंता का विषय बताया।

मौसम भी एक चुनौती थी। गुप्ता के लिए, कनाडा की लंबी सर्दियां सिर्फ कम तापमान की बात नहीं थीं। उन्होंने रोज़मर्रा की जिंदगी पर भी असर डाला। उन्होंने लिखा, “यहां ठंड है और उदासी भी। अक्टूबर से अप्रैल तक, कोई बाहर नहीं निकलता। मैं टोरंटो की बात कर रहा हूं, किसी छोटे शहर की नहीं। हर दिन ढेरों कपड़े पहनने पड़ते हैं।”

गुप्ता का कहना था कि कनाडा में रहने का ज्यादा खर्च और तुलनात्मक रूप से कम सैलरी ने लोगों की जीवन की गुणवत्ता और नजरिए पर असर डाला है। उन्होंने यह भी कहा कि कई काबिल लोग बेहतर मौकों की तलाश में दूसरी जगहों पर चले जाते हैं। उनके अनुसार, परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि इसमें बहुत समय लगता है और एलिजिबिलिटी कट-ऑफ लगातार बढ़ रहे हैं।

गुप्ता ने अपनी बात यह कहते हुए खत्म की कि कनाडा शायद हर किसी के लिए सही जगह नहीं है। उन्होंने समझाया, “यह उन लोगों के लिए बना है, जिनके पास कोई बेहतर विकल्प नहीं है। अगर फ़ूड डिलीवरी, ट्रकिंग, खेती या ब्लू-कॉलर काम ही आपकी सीमा है, तो यह ठीक है। अगर आपमें महत्वाकांक्षा और पैसा कमाने की चाह है, तो यह जगह आपके लिए नहीं है। इंटरनेट पर दिखने वाले सुंदर नजारों, साफ हवा और ‘शांति’ के झांसे में न आएं। यह साल में 4-5 महीने तो बहुत अच्छा लगता है। बाकी समय सब कुछ उदास और फीका रहता है।”

एक यूजर ने कमेंट किया, “सैलरी ‘भारत से बस थोड़ी ज्यादा’ है – किस गलतफहमी वाली दुनिया में एक विकसित देश में औसत सैलरी भारत से ‘बस थोड़ी’ ज्यादा होती है??” दूसरों ने कहा कि उनका अनुभव बहुत अलग रहा है। एक यूजर ने लिखा, “एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो सच में कनाडा जाकर बसा है, मेरा नजरिया बहुत अलग है। मैं भारत के एक बड़े शहर से आया हूं, और एक महिला और नए माता-पिता के तौर पर, मेरा सच में मानना ​​है कि परिवार पालने के लिए कनाडा सबसे अच्छे देशों में से एक है। हां, रहने का खर्च ज्यादा है। लेकिन अगर दोनों पार्टनर कड़ी मेहनत करने को तैयार हों, तो समय के साथ जिंदगी बेहतर होती जाती है। रातों-रात कुछ नहीं होता, लेकिन चीजें बेहतर जरूर होती हैं।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “कृपया वहां वापस चले जाएं, जहां से आप आए थे। जो लोग सच में दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें इस पोस्ट की जरूरत नहीं है क्योंकि यह गलत है। पहली बात, जो लोग CAD में कमाते हैं, वे चीजों को समझने के लिए INR में नहीं बदलते। क्या आप कभी मुंबई में किराए के घर में रहे हैं? उससे यह पता नहीं चलता कि पूरे भारत में किराया और रहने का खर्च ज्यादा है। अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल है, तो तैयारी करें और इंटरव्यू पास करें!”

हालांकि, कुछ लोगों को लगा कि गुप्ता ने ऐसी चिंताएं उठाई हैं जिनका सामना हाल के सालों में कनाडा आए कई नए लोगों ने किया है। एक यूजर ने कहा, “मुझे उन सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए बुरा लगता है, जो कोविड के बाद बड़े पैमाने पर हुए इमिग्रेशन के दौरान यहां आए थे। भारत में रिक्रूटरों ने उन्हें कनाडा की खूबसूरत तस्वीर और PR स्टेटस का वादा करके धोखा दिया। कनाडा का इमिग्रेंट्स के प्रति रवैया निश्चित रूप से बदला है। यह दुखद है।”

Gold Price Today: सोने में तेजी लौटी, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बढ़े दाम; चेक करें 10 बड़े शहरों का रेट

देश में सोने की कीमत में तेजी लौट आई है। ज्यादातर शहरों में दाम चढ़ा है। 16 जुलाई की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई और कोलकाता में भाव 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और चेन्नई में 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,029.66 डॉलर प्रति औंस पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत मंगलवार के 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ही बनी रही।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131760143730
मुंबई131610143580
अहमदाबाद131660143630
चेन्नई131810143790
कोलकाता131610143580
हैदराबाद131610143580
जयपुर131760143730
भोपाल131660143630
लखनऊ131760143730
चंडीगढ़131760143730

HSBC ने कहा है कि 2026 में गोल्ड की औसत कीमत 4,560 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। 2027 में गोल्ड की औसत कीमत 4,925 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। इस साल के अंत में कीमत 4,750 डॉलर तक जा सकती है। अगले साल के अंत तक कीमत 5,025 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।

चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट है। 16 जुलाई की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 58.26 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

भारत के इन 3 शहरों ने मारी बाजी, 2026 की वर्ल्ड बेस्ट सिटीज लिस्ट में छाया इनका जलवा!

भारत के तीन खूबसूरत शहरों ने दुनिया के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन में अपनी जगह बनाई है। ‘ट्रैवल + लेज़र’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में उदयपुर, जयपुर और मुंबई को दुनिया के टॉप 25 शहरों में शामिल किया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के 6.61 लाख से ज्यादा रीडर्स के वोट और उनके ट्रेवल एक्सपीरियंस के बेस पर तैयार की गई है, आइए जानते हैं आखिर ये तीनों भारतीय शहर दुनिया के बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट में क्यों शामिल हुए और यहां घूमने की क्या खास वजह है:

दुनिया की टॉप 25 लिस्ट में तीन भारतीय शहर

Must Visit Countries In Southern Europe With A Schengen Visa

‘ट्रैवल + लेजर’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में भारत के उदयपुर, जयपुर और मुंबई ने दुनिया के टॉप 25 शहरों में जगह बनाई। यह लिस्ट लाख से भी ज्यादा लोगों के ग्लोबल रीडर सर्वे के बेस पर तैयार की गई है, जिसमें शहरों को उनके टूरिस्ट एक्सपीरियंस, संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए आंका गया।

उदयपुर बना सबसे ऊंची रैंक वाला भारतीय शहर

शीश महल के बारे में जानकारी – Swan Tours – Blogs

उदयपुर दुनिया में 12वें और एशिया में 8वें स्थान पर रहा। इसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है। यहां की पिछोला झील, सिटी पैलेस, फतेह सागर झील, हेरिटेज होटल और राजस्थानी संस्कृति पर्यटकों को बेहद पसंद आती है।

अगर आप शाही माहौल, शांत झीलों में बोट राइड और खूबसूरत सूर्यास्त का आनंद लेना चाहते हैं, तो उदयपुर जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है।

जयपुर ने भी बनाई खास पहचान

जयपुर में आपका स्वागत है: भारत का गुलाबी शहर » अगोडा: कम खर्च में दुनिया देखें

जयपुर ने दुनिया में 16वीं और एशिया में 10वीं रैंक हासिल की। ‘पिंक सिटी’ अपने ऐतिहासिक किलों, हवेलियों, महलों और रंग-बिरंगे बाजारों के लिए मशहूर है।

यहां आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस और लोकल मार्केट घूमने लायक हैं। हिस्ट्री, आर्किटेक्टर, शॉपिंग और राजस्थानी खाने का मजा लेना चाहते हैं, तो जयपुर एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है।

मुंबई की संस्कृति और लाइफस्टाइल को मिली पहचान

मुंबई महाराष्ट्र के गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी | SamanyaGyan

मुंबई दुनिया में 21वें और एशिया में 12वें स्थान पर रही। यह शहर मॉडर्न लाइफस्टाइल और ट्रेडिशन का शानदार ब्लेंड है। यहां गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, बॉलीवुड, स्ट्रीट फूड और नाइटलाइफ टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं।

अगर आप समुद्र किनारे घूमना, अलग-अलग तरह का खाना चखना और शहर की तेज रफ्तार जिंदगी का एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं, तो मुंबई जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी है।

दुनिया के टॉप 5 शहर कौन-से हैं?

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इस साल की ग्लोबल रैंकिंग में सैन मिगुएल डी एलेंडे (मेक्सिको) पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्योटो (जापान), चियांग माई (थाईलैंड), होई आन (वियतनाम) और ओआक्साका (मेक्सिको) ने टॉप 5 में जगह बनाई।

भारत के तीन शहरों का इस लिस्ट में शामिल होना देश के टूरिस्म के लिए बड़ा अचीवमेंट माना जा रहा है।