भुवनेश्वर कुमार को फिर मिले टीम इंडिया में मौका? 2027 वर्ल्ड कप को लेकर अश्विन ने की

साल 2027 का वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया तीनों देशों की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस बड़े टूर्नामेंट के लिए आईसीसी ने हाल ही में मेजबान शहरों की लिस्ट जारी कर दी है। विश्व कप के दौरान कुल 54 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनका आयोजन 12 अलग-अलग शहरों में किया जाएगा। 2027 वनडे विश्व कप के लिए संभावित भारतीय टीम को लेकर पूर्व खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने अपनी राय रखी है। रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वनडे टीम में वापसी को लेकर समर्थन किया है।

अश्विन के मुताबिक, भुवनेश्वर का अनुभव भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। खासकर 2027 वनडे विश्व कप में साउथ अफ्रीका की तेज और उछाल वाली पिचों पर भुवनेश्वर जैसे अनुभवी गेंदबाज टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

 

वनडे वर्ल्ड कप में इनको दी जगह

क्रिकइन्फो पर बातचीत के दौरान वनडे वर्ल्ड के लिए संभावित टीम की चर्चा पर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि, “वह भुवनेश्वर कुमार को 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों का हिस्सा देखना चाहते हैं। भुवनेश्वर को फर्स्ट क्लास क्रिकेट और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट लगातार खेलने चाहिए, ताकि वह पूरी तरह फिट होकर दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों के लिए तैयार रहें।” अश्विन के मुताबिक, “वहां भारत को भुवनेश्वर जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज की जरूरत पड़ेगी।” इसके अलावा उन्होंने अपनी संभावित टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव और मोहम्मद सिराज का सपोर्ट किया, जबकि संजू सैमसन और शिवम दुबे को जगह नहीं दी।

कब खेला था आखिरी वनडे

भुवनेश्वर कुमार ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच जनवरी 2022 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर खेला था। इसके बाद से वह वनडे टीम से बाहर हैं। उन्होंने साल 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था और अपनी पहली ही गेंद पर विकेट लेकर शानदार शुरुआत की थी। भुवनेश्वर ने अब तक भारत के लिए 121 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें 141 विकेट अपने नाम किए हैं। उनके अनुभव और नई गेंद से शानदार गेंदबाजी की वजह से उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में गिना जाता है।

कहां-कहां पर होगा मुकाबला

साल 2027 का वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। आईसीसी ने टूर्नामेंट के लिए 12 मेजबान शहरों का ऐलान कर दिया है, जहां कुल 54 मुकाबले होंगे। इनमें जोहान्सबर्ग, सेंचुरियन, डरबन, गेकेबरहा, कुगोम्पो सिटी, केप टाउन, पार्ल, ब्लोमफोंटेन, हरारे, बुलावायो, विक्टोरिया फॉल्स और विंडहोक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा मुकाबले साउथ अफ्रीका में खेले जाएंगे, जहां की तेज और उछाल वाली पिचें आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं।

आईपीएल और घरेलू टीम में खेलते हैं

भले ही भुवनेश्वर कुमार इस समय भारतीय वनडे टीम की योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वह घरेलू और आईपीएल क्रिकेट में लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया और टीम के खिताब बचाने के अभियान में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुभव और लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उनकी वापसी की चर्चा फिर से तेज हो गई है।

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती के ये 6 अवतार जानकर दंग रह जाएंगे आप

frinendship day 2026

दोस्ती का कोई एक रंग नहीं होता- यह तो सतरंगी गुलाल है! कभी बेपरवाह टांग खिंचाई, तो कभी ढाल बनकर साथ खड़े रहने का हौसला। कभी खट्टी-मीठी चटपटी, तो कभी सुकून देने वाली मीठी चाय जैसी। सच कहें तो हर दोस्ती अपने आप में एक अलग ही वाइब (Vibe) लेकर आती है। इस फ्रेंडशिप डे 2026 पर चलिए करते हैं दोस्ती के 6 अनोखे 'अवतारों' की एक मजेदार सैर!

 

1. 'बिज़नेस पार्टनर' वाली गाढ़ी दोस्ती

यह सिर्फ पैसों या काम का सौदा नहीं, बल्कि अटूट भरोसे पर टिकी एक ऐसी केमिस्ट्री है जहाँ दो दिमाग एक दिशा में सोचते हैं। जब दो दोस्त मिलकर कोई बिज़नेस खड़ा करते हैं, तो वे किसी सगे भाई-बहन से भी बढ़कर हो जाते हैं। अब आप इन्हें 'पार्टनर्स' कहें, 'फाउंडर्स' कहें या फिर 'लंगोटिया यार', इनकी ट्यूनिंग का कोई तोड़ नहीं होता!

 

2. '9-टू-5' का मरहम: लंच ब्रेक वाली दोस्ती

फाइलों के पहाड़, बॉस की डांट, टारगेट का प्रेशर या फिर घर की किचकिच—कॉलेज के बाद अगर कोई चीज़ कॉर्पोरेट लाइफ में बचाती है, तो वो है 'लंच टाइम गैंग'।

लंच के 30 मिनट में यहाँ सिर्फ टिफिन नहीं खुलते, बल्कि दिल के सारे दर्द बंट जाते हैं। यही वो जगह है जहाँ कोई सहयोगी आपके अटके सरकारी काम की जुगाड़ मिनटों में निकाल देता है या आपके पर्सनल संकट का एक्सपर्ट सॉल्यूशन दे देता है।

 

3. 'अरे! तुम्हें भी यह पसंद है?' वाली सिमिलर-वाइब दोस्ती

इस दोस्ती की शुरुआत सिर्फ एक जुमले से होती है—”क्या बात कर रहे हो, तुम्हें भी यह पसंद है?”

चाहे किसी हॉलीवुड मूवी की सनक हो, हैरी पॉटर का जादू, वही पुराना राइटर, या फिर स्ट्रीट फूड का सेम क्रेज़! बस जहाँ आपकी पसंद मैच हुई, वहीं बिना किसी मेहनत के एक नई और दिलचस्प 'हॉबी वाली दोस्ती' की शुरुआत हो जाती है।

 

4. 'डिजिटल दौर' वाली नो-बाउंड्री दोस्ती

टेक्नोलॉजी के पंखों पर सवार यह दोस्ती मीलों की दूरियों को पलक झपकते मिटा देती है। 80 के दशक के बिछड़े क्लासमेट्स हों या सरहद पार बैठा कोई अनजान साथी—इंटरनेट ने सबको एक धागे में पिरो दिया है। आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जहाँ एक तरफ 75 साल के दादू की 'फ्रेंड रिक्वेस्ट' होती है, वहीं दूसरी तरफ 7 साल की छोटी भानजी का 'हार्ट इमोजी'!

 

5. नॉस्टैल्जिया का खजाना: स्कूल-कॉलेज वाली दोस्ती

यह दोस्ती का 'गोल्डन एरा' है—सबसे निश्चल, सबसे बेफिक्र!

किताबों में मोर का पंख छुपाने से लेकर, चाय-समोसे की 'कॉन्ट्री', रात-रात भर जागकर नोट्स की जुगाड़ और एक-दूसरे के कपड़े-जूते मांगकर पहनना… यह सब इसी दौर की देन है। इस दोस्ती की पार्टियां भले ही बजट-फ्रेंडली हों, लेकिन इनका 'धूम-धड़ाका' और यादें पूरी ज़िंदगी के लिए अनलिमिटेड होती हैं।

 

6. 'गली-मोहल्ले' वाली साझी दोस्ती

भर दोपहर में छत पर धूप से बचने का जुगाड़ हो, या संकरी गली में साइकिल को स्टंप बनाकर क्रिकेट खेलना—यह दोस्ती भारत के हर मोहल्ले की जान है। कटोरी लेकर पड़ोसी के घर से चीनी या अचार मांग लाना हो, या किसी एक के घर की शादी में पूरे मोहल्ले के अंकल-आंटी का अपना घर समझकर काम में जुट जाना। जैसे छत पर सूखते अमचूर पर पूरे मोहल्ले के बच्चों का हक होता है, ठीक वैसे ही इस दोस्ती पर पूरे इलाके का प्यार होता है!

 

चलते-चलते:

आपकी लाइफ में इनमें से कौन-कौन से दोस्त मौजूद हैं? इस फ्रेंडशिप डे पर उन्हें यह आलेख टैग करके शुक्रिया कहना मत भूलिएगा!

गाली पर इतना बवाल क्यों? भाषा बिगड़ रही है, या समाज का असली चेहरा सामने आ रहा है?

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इन दिनों गालियां फिर राष्ट्रीय बहस का विषय हैं। कभी किसी स्टैंड-अप कॉमेडियन के कारण, कभी किसी ओटीटी सीरीज़ के कारण, कभी किसी यूट्यूबर की भाषा को लेकर, तो कभी किसी छात्र आंदोलन में इस्तेमाल हुए जार्गन पर।

ऐसा लगता है मानो देश के सामने सबसे बड़ा संकट बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य या अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि शब्दों का हो। लेकिन असली सवाल यह है—क्या गालियां अचानक पैदा हुई हैं, या पहली बार माइक्रोफोन पर सुनाई देने लगी हैं?

गाली का इतिहास, इंटरनेट से कहीं पुराना है
यदि कोई यह मानता है कि गालियां इंटरनेट, ओटीटी, जेन-जी या सोशल मीडिया की देन हैं, तो उसे एक बार बनारस के अस्सी घाट की शामें, उत्तर भारत के गांवों की चौपालें, पुलिस थानों की भाषा, ट्रक चालकों की बातचीत और शादी-ब्याह में गाए जाने वाले पारंपरिक 'गारी गीत' याद कर लेने चाहिए।

भारतीय लोकसंस्कृति में गालियों का इतिहास लगभग उतना ही पुराना है, जितना लोकगीतों का। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले वे चौपालों, घाटों और आंगनों में गूंजती थीं, आज एल्गोरिदम उन्हें ट्रेंड करा देता है।

काशीनाथ सिंह ने अपने चर्चित उपन्यास 'काशी का अस्सी' में बनारस की उस भाषा को दर्ज किया है, जिसमें गाली हमेशा अपमान नहीं होती। वह आत्मीयता भी है, ठहाका भी, अपनापन भी और सत्ता से बेखौफ होकर बात करने का अंदाज़ भी। बनारस में कई बार गाली रिश्ते की दूरी नहीं, बल्कि निकटता का प्रमाण होती है।

उत्तर भारत के अनेक विवाहों में आज भी 'गारी' एक रस्म है। दूल्हे और उसके परिवार को गाकर सुनाई जाने वाली ये गालियां अपमान के लिए नहीं, बल्कि सदियों पुराने सामाजिक संकोच को तोड़ने, रिश्तों में सहजता लाने और औपचारिकता की दीवार गिराने के लिए होती हैं।

यानी भारतीय समाज ने गाली को केवल आक्रोश की भाषा नहीं बनाया; कई बार उसे हास्य, अपनत्व और लोकसंस्कृति का भी हिस्सा बनाया है।
दिलचस्प यह है कि यही समाज कबीर का भी है—

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥”

यानी हमारी संस्कृति में मधुर वाणी भी है और ठेठ गाली भी। दोनों सदियों से साथ-साथ चली हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले गालियां मोहल्ले तक सीमित थीं, अब राष्ट्रीय बहस का विषय हैं।

असली समस्या गाली नहीं, हमारा पाखंड है
हिंदी भाषी समाज शायद दुनिया के सबसे दिलचस्प भाषाई विरोधाभासों में से एक है।
औपचारिक मंच पर हम शालीनता की प्रतिमूर्ति बन जाते हैं। “आदरणीय”, “माननीय”, “श्रद्धेय” जैसे शब्दों से वाक्य शुरू करते हैं। लेकिन सड़क पर, ट्रैफिक में, क्रिकेट मैच के दौरान, दोस्तों की महफिल में, पुलिस थानों में और कभी-कभी घरों के भीतर भी वही समाज ऐसी भाषा बोलता है, जिसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में संकोच करता है।

यानी हमारी भाषा दो हिस्सों में बंट चुकी है—एक कैमरे के लिए, दूसरी कैमरे के पीछे।
रहीम ने बहुत पहले चेताया था—

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पाताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”

लेकिन लगता है कि हमने इस दोहे को दीवार पर टांग दिया, व्यवहार में नहीं।
ओटीटी ने भाषा नहीं बिगाड़ी, उसने मेकअप उतार दिया
हर नई वेब सीरीज़ के बाद कहा जाता है कि ओटीटी समाज को बिगाड़ रहा है।
क्या सचमुच?
या उसने सिर्फ वही भाषा रिकॉर्ड कर ली, जिसे समाज वर्षों से ऑफ रिकॉर्ड बोलता आया है?
जिस समाज में पुलिस की डांट अक्सर गाली से शुरू होती हो, जहां चुनावी मंचों से लेकर विधानसभाओं और संसद तक कई बार असंसदीय शब्द रिकॉर्ड से हटाने पड़ते हों, वहां ओटीटी पर नैतिकता का पूरा बोझ डाल देना आसान रास्ता है।
आईना हमेशा दोषी नहीं होता। कई बार चेहरा भी देख लेना चाहिए।

गाली आखिर करती क्या है?

  • गाली केवल अश्लीलता नहीं है।
  • वह गुस्से का शॉर्टकट है।
  • हताशा का विस्फोट है।
  • व्यंग्य का हथियार है।
  • और कई बार प्रतिरोध की भाषा भी।

दार्शनिक लुडविग विट्गेंस्टाइन ने लिखा था— मेरी भाषा की सीमाएँ ही मेरी दुनिया की सीमाएँ हैं।”
यदि समाज की भाषा अधिक आक्रामक हो रही है, तो संभव है कि समाज के भीतर बेचैनी भी उतनी ही बढ़ रही हो।

कई बार बहुत सारे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पारिवारिक दबावों से बोझिल व्यक्ति के लिए अपनी असहायता, गुस्सा और झुंझलाहट निकालने का सबसे आसान माध्यम एक गाली ही बन जाती है। बिना हिंसा किए, अपमान, निरादर, क्षोभ और प्रतिरोध की जितनी तीखी अभिव्यक्ति कुछ हिंदी गालियां कर देती हैं, उतनी कई बार लंबे भाषण भी नहीं कर पाते।
इसका अर्थ यह नहीं कि हर गाली जायज़ है। लेकिन हर गाली को केवल खराब संस्कार कह देना भी उतना ही अधूरा विश्लेषण है।

गाली और बराबरी का नया विमर्श
एक दिलचस्प बदलाव और आया है। सदियों तक अधिकांश गालियां स्त्रियों के शरीर और रिश्तों के माध्यम से पुरुष का अपमान करती रहीं। यानी भाषा भी पितृसत्ता का औज़ार बनी रही।
लेकिन आज वही गालियां महिलाएं भी बोल रही हैं।

  • क्या यह भाषा का पतन है?
  • या भाषाई बराबरी का दावा?

उत्तर आसान नहीं है।
महादेवी वर्मा ने लिखा था कि श्रृंखलाएँ केवल लोहे की नहीं होतीं, भाषा की भी होती हैं।” (भावार्थ) संभव है कि नई पीढ़ी उन्हीं भाषाई श्रृंखलाओं को तोड़ने की कोशिश कर रही हो। कुछ इसे पतन कहेंगे, कुछ इसे समानता का दावा। दोनों दृष्टियाँ विचारणीय हैं।

लेकिन सावधान…
यह लेख गालियों का समर्थन नहीं है। क्योंकि जिस दिन तर्क की जगह गाली ले लेगी, उस दिन लोकतंत्र कमजोर होगा। असहमति आवश्यक है। अपमान नहीं।
व्यंग्य लोकतंत्र को जीवित रखता है। लेकिन गाली यदि विचार का विकल्प बन जाए, तो वह संवाद नहीं, शोर पैदा करती है। यहीं सबसे बड़ी सावधानी की जरूरत है।
आज की भाषा में मीम हैं, रील हैं, तंज हैं, वायरल वीडियो हैं और गालियां भी। इनसे असहमत होना आपका अधिकार है।
लेकिन इनके अस्तित्व से इनकार करना शायद वास्तविकता से इनकार करना है। आखिरकार, सवाल यह नहीं कि समाज गालियां क्यों दे रहा है।

सवाल यह है कि समाज इतना गुस्से में क्यों है?
क्योंकि शब्द अपने आप पैदा नहीं होते, वे समय की कोख से जन्म लेते हैं। गालियाँ भाषा का सौंदर्य नहीं हैं,

लेकिन वे समाज की मनःस्थिति का एक्स-रे अवश्य हैं।
इसलिए हर गाली की आलोचना कीजिए, लेकिन उसे जन्म देने वाली सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की भी पड़ताल कीजिए। क्योंकि भाषा कभी निर्वात में पैदा नहीं होती।
वह हमेशा समाज का आईना होती है। और आईना, चाहे कितना भी असुविधाजनक क्यों न लगे, झूठ नहीं बोलता।

57 ODI विश्वकप मैच होंगे 3 देशों के इन खूबसूरत 12 स्टेडियमों में (Video)

दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप 2027 के लिए सभी टीमें अपनी टीमों को अंतिम रूप दे रही हैं। अगले साल यह विश्वकप अक्टूबर और नवंबर के बीच खेला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने भी प्रबंधन से जुड़ी सारी व्यवस्थाओं पर सहमति देना शुरु कर दिया है।

ना केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने  एकदिवसीय विश्वकप के लिए लोगो की घोषणा कर दी है बल्कि 57 कहां कहां खेले जाएंगे इसकी घोषणा भी कर दी है। कुल 3 देश दक्षिण अफ्रीका-जिम्बाब्वे और नामिबिया देशों के 12 स्टेडियम पर मुहर लगाई गई है जिनमे से 8 दक्षिण अफ्रीका के हैं, जिम्बाब्वे के 3 और नामिबिया का एक स्टेडियम है।

दक्षिण अफ्रीका के 8 स्टेडियम और शहर इस प्रकार है। कुगोम्पो सिटी में बफौलो पार्क, केपटाउन में न्यूलैंड मैदान, जोहन्सबर्ग में वॉन्डर्स स्टेडियम, टश्वाने का सेंचुरियन, गेब्रिया का सेंट जोर्ज पार्क, ब्लोमेफोटीन का मैंगाउंग ओवल, डरबन का किंग्समीड पार्क, पार्ल का बोलैंड पार्क चुनिंदा स्टेडियमों में है जिनमें मैच खेले जाने हैं।

वहीं जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब, बुलवायो के क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब और विक्टोरिया फॉल्स के मोसी ओआ टुनिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में विश्वकप मैच खेले जाएंगे। नामिबिया का एकमात्र नामिबिया क्रिकेट ग्राउंड जो विंडहोक में स्थित है उसको चुना गया है।गौरतलब है कि यह विश्वकप क्रिकेट में खेला गया सर्वाधिक मैचों का विश्वकप होने जा रहा है।

साल 2003 के बाद यह देश एकदिवसीय विश्वकप का आयोजन कर रहे हैं। इस विश्वकप में मेजबान टीमों को खास सफलता नहीं मिली थी और ग्रुप स्टेज में ही विदाई लेनी पड़ी थी। वहीं इसका फाइनल ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुआ था जिसमें ऑस्ट्रेलिया विजयी हुई थी।

Vaibhav Sooryavanshi: दलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी को क्यों बनाया गया उपकप्तान? सेलेक्टर ने बताया इस फैसले के पीछे की वजह

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आईपीएल 2026 के बाद से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट जोन टीम का उपकप्तान बनाया गया है। इस टूर्नामेंट की शुरुआत 23 अगस्त से बेंगलुरु में होगी। वहीं वैभव के उपकप्तान बनाए जाने के फैसले को लेकर क्रिकेट जगत में अलग-अलग राय सामने आई हैं। कई पूर्व खिलाड़ी और एक्सपर्ट के मुताबिक, इतनी कम उम्र में वैभव को बड़ी जिम्मेदारी देना जल्दबाजी हो सकती है। वहीं हाल ही में सेलेक्टर ने बताया की वैभव को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई है।

फैसले का किया बचाव

ईस्ट जोन सेलेक्टर समिति के सदस्य और ओडिशा के पूर्व रणजी क्रिकेटर प्रवंजन मलिक ने इस फैसले का बचाव किय। प्रवंजन मलिक ने क्रिकबज से बातचीत में कहा, “वैभव को कप्तान नहीं, बल्कि उपकप्तान बनाया गया है। टीम की कप्तानी ईशान किशन करेंगे। ईशान विकेटकीपर भी हैं, इसलिए मैच के दौरान उनकी भूमिका लगातार एक्टिव रहेगी। इसका मतलब यह नहीं है कि वैभव पूरे समय टीम की कप्तानी करेंगे। वह अभी सीखने के दौर में हैं और हर दिन पहले से ज्यादा मैच्योर हो रहे हैं। उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देने से उनकी नेतृत्व क्षमता और मैच की समझ बेहतर होगी।”

भविष्य के लीडरशीप क्षमता विकसित करना

मलिक ने ये भी बताया कि वैभव सूर्यवंशी पहले से ही बिहार की घरेलू टीम के उपकप्तान हैं और 2026 अंडर-19 विश्व कप में भी उपकप्तान की भूमिका भी निभा चुके हैं। उन्होंने कहा, “वैभव देश के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ उनका आईपीएल सीजन भी शानदार रहा। वह बिहार की प्रथम श्रेणी टीम के भी उपकप्तान हैं।” मलिक ने आगे कहा, “दलीप ट्रॉफी में उपकप्तानी की जिम्मेदारी उनके लिए बड़ा अवसर है। हमारा मानना है कि युवा खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देना जरूरी है, क्योंकि इससे उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।”

उन्होंने आगे कहा, “कौन जानता है, भविष्य में वह भारतीय टीम के कप्तान भी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्हें उपकप्तान बनाया गया है।” मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि चयनकर्ताओं ने वैभव को उपकप्तान बनाने से पहले उनसे इस फैसले पर कोई चर्चा नहीं की थी।

जो रूट को 4 साल बाद फिर मिली इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट टीम की कमान

इंग्लैंड के लिए रनों का अंबार लगाने वाले जो रूट टेस्ट टीम के कप्तान चुने गए हैं। वह 4 साल बाद इंग्लैंड की कप्तानी करेंगे। टेस्ट रनों के मामले में जो रूट सिर्फ सचिन तेंदुलकर से पीछे हैं और उन्होंने इस प्रारुप में 41 शतक लगाए हैं जो सिर्फ जैक कैलिस और सचिन तेंदुलकर से पीछे है।

इससे पहले द एथलेटिक ने पिछले शुक्रवार को यह रिपोर्ट किया था कि रूट को 2027 के एशेज तक के लिए टेस्ट कप्तान बनाया जा सकता है। ECB का कहना था कि इस संबंध में अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है लेकिन इस समय वह पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में टीम की अगुवाई करने की दौड़ में सबसे आगे हैं।

35 वर्षीय रूट 2017 से 2022 तक इंग्लैंड के पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान थे। उन्होंने 65 टेस्ट में इंग्लैंड की अगुवाई की है और उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 27 मैच जीते जबकि 27 में उन्हें हार मिली। लेकिन पिछले 18 टेस्ट मैचों में कप्तानी करते हुए रूट को एक ही जीत हासिल हुई है। बेन स्टोक्स की अनुपस्थिति में पिछले महीने द ओवल में उन्होंने कप्तानी की और इंग्लैंड की 253 रनों से हार के बावजूद उन्होंने कहा कि कप्तान के रूप में वापस आते हुए उन्होंने इस भूमिका का काफ़ी लुत्फ़ उठाया।

हैरी ब्रूक को तीनों प्रारूप में एशेज तक के लिए कप्तान बनाए जाने की योजना पर पूर्णविराम लगा दिया गया है। ECB यह भी विचार कर रहा था कि ब्रूक को टेस्ट कप्तान बनाते हुए किसी अन्य खिलाड़ी को सफ़ेद गेंद के किसी एक या दोनों प्रारूप में कप्तानी दी जाए। जेकब बेथेल (जो कि अभी चोटिल हैं) जैसे किसी कम अनुभव वाले खिलाड़ी को टेस्ट कप्तान बनाते हुए दांव अमूमन इंग्लैंड क्रिकेट जैसा बोर्ड नहीं खेलता। ब्रूक सफ़ेद गेंद के दोनों प्रारूप में कप्तान हैं। ब्रूक की अगुवाई में ही हाल ही में इंग्लैंड ने घर पर भारत को टी 20 में 4-0 और वनडे सीरीज़ में 2-1 से मात दी थी।

63 वर्ष की हुई मंदाकिनी

बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री मंदाकिनी आज 63 वर्ष की हो गयीं।मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को मेरठ में एक एंग्लो-इंडियन परिवार में हुआ था। उनके पिता जोसफ ब्रिटिश नागरिक थे, जबकि उनकी मां मुस्लिम थीं। मंदाकिनी का बचपन का नाम यास्मीन जोसेफ था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में प्रदर्शित बंगाली फिल्म ‘अंतारेर भालोबाशा’ से की थी।

वर्ष 1985 में ही मंदाकिनी ने फिल्म ‘मेरा साथी’ से बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसी वर्ष उनकी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ प्रदर्शित हुई, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। राज कपूर निर्मित और निर्देशित इस फिल्म में उनके साथ राजीव कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी को हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाई।

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फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए मंदाकिनी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, इस फिल्म के लिए राज कपूर की पहली पसंद पद्मिनी कोल्हापुरे थीं, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।

‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद मंदाकिनी ने ‘जाल’, ‘लोहा’, ‘डांस डांस’, ‘जीते हैं शान से’, ‘कमांडो’, ‘तेजाब’ और ‘जंगबाज’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। वर्ष 1996 में प्रदर्शित फिल्म ‘जोरदार’ उनकी अंतिम फिल्म साबित हुई।

अपने फिल्मी करियर के दौरान मंदाकिनी का नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ भी जोड़ा गया। उन्हें कई बार क्रिकेट मैदान पर दाऊद के साथ देखा गया था, हालांकि मंदाकिनी ने इन चर्चाओं पर कई बार सफाई दी।

वर्ष 1990 में मंदाकिनी ने बौद्ध धर्मगुरु डॉ. कगयुर टी रिंपोचे ठाकुर से विवाह कर लिया। वर्तमान समय में मंदाकिनी फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं और अपने निजी जीवन में व्यस्त हैं।

Pic Credit : ANI

लोकसभा में विपक्ष का हंगामा, लगातार आठवें दिन नहीं चल सका प्रश्नकाल

लोकसभा में बृहस्पतिवार को विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल लगातार आठवें दिन नहीं चल सका और कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनट के भीतर दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस सदस्यों को बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान पैदा हुई गतिरोध की स्थिति का मुद्दा उठाते देखा गया। वह दिल्ली में पिछले सप्ताह प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी दोहराते सुने गए।

बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्हें बधाई दी। बिरला ने पैरा एथलीट दिलीप गावित के स्वर्ण पदक प्राप्त करने और मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनकाथ के रजत पदक जीतने का उल्लेख किया।

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उन्होंने रजत पदक विजेता मुरली श्रीशंकर का भी उल्लेख किया जो राष्ट्रमंडल खेलों में लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक के साथ लगातार दो पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराना चाहा, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांगें उठाने लगे।

वह बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान पैदा हुई गतिरोध की स्थिति का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में पिछले सप्ताह प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग दोहरा रहे थे।

बिरला ने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल बाधित नहीं करने का अपना आग्रह दोहराया। शोर-शराबा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे की स्थिति के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका है।

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दिलीप ट्रॉफी में भी शिरकत करेंगें वैभव सूर्यवंशी, खेलेंगे ईशान किशन की कप्तानी में

कम उम्र में ही अपनी बल्लेबाज़ी से धूम मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को आने वाली दिलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट ज़ोन टीम का उप-कप्तान बनाया गया है। यह उनकी तेज़ी से आगे बढ़ने की कहानी का एक और अहम पड़ाव है, क्योंकि हाल के महीनों में ही उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाई है।विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान किशन इस प्रतिष्ठित इंटर-ज़ोनल रेड-बॉल टूर्नामेंट में 15 सदस्यों वाली टीम की कप्तानी करेंगे। यह टूर्नामेंट 23 अगस्त को बेंगलुरु में शुरू होगा।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘Player of the series’ चुने गए।

ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।

शमी के शामिल होने से टीम को बहुत अनुभव मिलेगा। 35 साल के यह तेज़ गेंदबाज़ 2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल के बाद से भारत के लिए नहीं खेले हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलते रहे हैं। उन्होंने 2025-26 घरेलू सीज़न में बंगाल का प्रतिनिधित्व किया और आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स के 14 में से 13 मैचों में भी खेले।

दिलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट ज़ोन की टीम: अभिमन्यु ईश्वरन (बंगाल), सुदीप कुमार घरामी (बंगाल), शाहबाज़ अहमद (बंगाल), सूरज सिंधु जायसवाल (बंगाल), मोहम्मद शमी (बंगाल), मुकेश कुमार (बंगाल), ईशान किशन (कप्तान, झारखंड), कुमार कुशाग्र (झारखंड ), शिखर मोहन (झारखंड ), अनुकूल रॉय (झारखंड), विराट सिंह (झारखंड), सुभ्रांशु सेनापति (ओडिशा), वैभव सूर्यवंशी (उप-कप्तान, बिहार), डेनिश दास (असम) और अभिजीत सरकार (त्रिपुरा)। स्टैंडबाय: आयुष लोहारूका (बिहार), श्रीदाम पॉल (त्रिपुरा), संबित एस बराल (ओडिशा), शरणदीप सिंह (झारखंड) और स्वास्तिक सामल (ओडिशा)।

अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा 

आस्ट्रेलिया में 2020-21 दौरे पर सिताराहीन भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अपनी कप्तानी में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले भारत के सीनियर बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को यह कहकर अलविदा कह दिया कि आगे बढने का सही समय आ गया है।

भारत के लिये 2013 में पदार्पण करने वाले 38 वर्ष के रहाणे ने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 खेले हैं। वह 2023 में वेस्टइंडीज में टेस्ट श्रृंखला के बाद भारत के लिये नहीं खेले हैं। उन्होंने इस साल आईपीएल के दौरान भी हालांकि कहा था कि उन्होंने वापसी की उम्मीद छोड़ी नहीं है।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश में कहा जीवन का सत्य यही है कि हर शुरूआत का एक अंक होता है। जब समय आ जाये तो आपको उसका सम्मान करके आगे बढ जाना चाहिये। मैने बल्लेबाजी में हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया है और मुझे इसका महत्व पता है।

उन्होंने कहा ,‘‘मुझे आज लग रहा है कि आगे बढने का सही समय है इसलिये मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से विदा ले रहा हूं।

रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक और 26 अर्धशतक के साथ 38 . 46 की औसत से 5077 रन बनाये। इसके अलावा 90 वनडे में 35 . 26 की औसत से तीन शतक और 24 अर्धशतक के साथ 2962 रन जोड़े। टी20 में उन्होंने 375 रन बनाये हैं।

रहाणे के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि 2021 का आस्ट्रेलिया दौरा थी जब नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में उन्होंने सितारों के बिना खेल रही भारतीय टीम की अगुवाई की और तमाम कयासों को धता बताते हुए आस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में 2 . 1 से हराया।

एडीलेड में पहला टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद कोहली पितृत्व अवकाश पर भारत लौट आये थे। एडीलेड में भारतीय टीम दूसरी पारी में 36 रन पर आउट हो गई थी।

उसके बाद रहाणे ने कप्तानी की और जसप्रीत बुमराह तथा रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी में भी श्रृंखला जीती। दूसरे टेस्ट में रहाणे ने आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण का डटकर सामना करते हुए 223 गेंद में 112 रन बनाये। भारत ने ब्रिसबेन में चौथा और आखिरी टेस्ट तीन विकेट से जीता। वहीं मेलबर्न टेस्ट आठ विकेट से जीतकर श्रृंखला में बराबरी की थी।

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रहाणे ने अपने संदेश में कहा शुरूआत में अभ्यास के लिये डोम्बिवली से ट्रेन से सफर करने के दिनों से आज तक मैने खेल को सब कुछ दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी के हर मौके पर मेरा सपना हमेशा से भारत के लिये खेलने का था।

दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री करने वाले रहाणे ने कहा कि वह खेल से जुड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा मैने हमेशा से एक ही नियम माना है कि अपने से पहले टीम और देश को रखना है। मैने पूरी ईमानदारी से क्रिकेट खेला है। प्रथम श्रेणी क्रिकेटर के तौर पर मेरे पदार्पण से आज तक भारतीय क्रिकेट ने काफी प्रगति की है। मुझे गर्व है कि मैं पिछले 20 साल से इसका हिस्सा रहा हूं।

रहाणे ने कहा भारतीय क्रिकेट के साथ मेरा अध्याय खत्म हो रहा है लेकिन खेल के साथ नहीं। मैं अगली पीढी की मदद करना चाहता हूं और उन मूल्यों को साझा करना चाहता हूं जो क्रिकेट ने मुझे सिखाये हैं।

रहाणे ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिये खेला है। केकेआर ने उन्हें कप्तानी से फारिग कर दिया है।

रहाणे ने कहा कि उनके नाम का आशय होता है ‘जिसे हराया नहीं जा सके’ लेकिन क्रिकेट ने उन्हें सिखाया कि हार से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा इस सफर में कई बार हारे और कई बार जीते लेकिन क्रिकेट खेलने का आनंद, जीवनभर की यादें मेरे कैरियर का सबसे बड़ा संतोष रहा।

उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा अजिंक्य मतलब जिसे हराया नहीं जा सके लेकिन क्रिकेट ने कई बार हार का अनुभव कराया। क्रिकेटर के तौर पर हम कामयाबी से ज्यादा नाकामी देखते हैं। मेरी टीम मैच हारी। मैने गलतियां की लेकिन एक जगह है जहां मैं कभी नहीं हारा और वह है आपके दिल में।

आपने मुझे अपनों सा समझा। आपके प्यार, भरोसे और सहयोग के लिये धन्यवाद। कैप नंबर 278 अब विदा लेता है। रहाणे ने 2024 . 25 सत्र में मुंबई की कप्तानी की। उनकी कप्तानी में मुंबई ने 2023 . 24 में रणजी ट्रॉफी जीती थी।

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