FSSAI bans plastic: पान मसाला और गुटखा छोटे प्लास्टिक पाउच में नहीं आएगा! नया नियम लागू होने पर जानें कैसे बिकेगा माल

FSSAI bans plastic: पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के लिए पैकेजिंग को लेकर सरकार की तरफ से एक बड़ा बदलाव किया गया है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। नए नियमों के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़ेगा। FSSAI ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026’ का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसी के साथ अब ये नियम लागू हो गए हैं।

नए नियमों के तहत पान मसाला को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018 की शेड्यूल 4 में शामिल किया गया है। यह शेड्यूल अलग-अलग खाद्य उत्पादों के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली अनुमत पैकेजिंग सामग्री तय करता है।

अब किन चीजों से पैक हो सकेगा पान मसाला?

नए नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। इन प्राकृतिक या कागज आधारित सामग्रियों में किसी भी तरह का प्लास्टिक मौजूद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा पैकेजिंग में एल्युमिनियम फॉयल या किसी भी तरह की मेटलाइज्ड लेयर भी नहीं हो सकती। यानी केवल बाहर से कागज दिखाई देने वाली पैकेजिंग भी नियमों के दायरे से बाहर नहीं होगी। अगर उसके अंदर प्लास्टिक या धातु की छिपी हुई परत लगी है तो ऐसी पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी।

पॉलीथीन से लेकर PVC तक पर रोक

FSSAI ने प्रतिबंध को काफी व्यापक रखा है। पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और अन्य सिंथेटिक पॉलिमर, कोपॉलिमर या लैमिनेट जैसी सामग्रियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा असर उन पैकेजिंग फॉर्मेट पर पड़ेगा जिनमें कई परतों वाली प्लास्टिक या मेटल-कोटेड सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसी पैकेजिंग का इस्तेमाल आम तौर पर उत्पाद को नमी से बचाने, उसकी खुशबू बनाए रखने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब पान मसाला उद्योग को इन सुविधाओं के लिए प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।

टिन और कांच के डिब्बे बनेंगे विकल्प

FSSAI ने पान मसाला के लिए टिन और कांच के कंटेनर के इस्तेमाल की भी अनुमति दी है। इस बदलाव के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग तकनीक और डिजाइन पर दोबारा काम करना पड़ सकता है। इस तरह कंपनियों के सामने अब मुख्य रूप से दो तरह के विकल्प होंगे:-

  • पहला पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त प्राकृतिक सामग्री से बनी पैकेजिंग
  • जबकि दूसरा टिन या कांच के कठोर कंटेनर में हुई पैकेजिंग

कागज की पैकिंग में भी छिपा प्लास्टिक नहीं चलेगा

नए नियमों में पैकेजिंग के एक ऐसे तरीके को भी स्पष्ट किया गया है, जो लंबे समय से उद्योग में इस्तेमाल होता रहा है। कई उत्पादों की पैकिंग ऊपर से कागज जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या एल्युमिनियम की परत लगी होती है। अब ऐसी कंपोजिट पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी, अगर उसमें प्रतिबंधित सामग्री मौजूद है। यानी केवल पैकेजिंग का बाहरी हिस्सा कागज का होना पर्याप्त नहीं होगा। पूरी पैकेजिंग को निर्धारित मानकों के अनुरूप होना पड़ेगा।

छोटे निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती

नए नियमों का सबसे बड़ा असर उन निर्माताओं पर पड़ सकता है जो लंबे समय से फ्लेक्सिबल और मल्टी-लेयर पैकेजिंग पर निर्भर हैं। कंपनियों को अब अपनी सप्लाई चेन, पैकेजिंग सामग्री की खरीद, डिजाइन और पैकेजिंग तकनीक की समीक्षा करनी होगी। विशेष रूप से छोटे निर्माताओं के लिए प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग की ओर बदलाव करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें नई सामग्री और पैकेजिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पड़ेगी।

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम भी जोड़े गए

FSSAI के संशोधन में स्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से जुड़े प्रावधानों को भी फूड पैकेजिंग व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन प्रावधानों के तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को रखने, पैक करने या बेचने के लिए प्लास्टिक के सैशे के इस्तेमाल पर पहले से लागू प्रतिबंधों को मजबूत किया गया है। नियमों में इन उत्पादों के लिए किसी भी रूप में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को भी दोहराया गया है। इस तरह, सरकार ने पान मसाला की पैकेजिंग से जुड़े पर्यावरण नियमों के साथ फ़ूड सेफ़्टी के नियमों को भी एक जैसा कर दिया है।

अप्रैल में शुरू हुई थी नियम बदलने की प्रक्रिया

इन बदलावों की प्रक्रिया इसी साल अप्रैल में शुरू हुई थी। 28 अप्रैल को FSSAI ने प्रस्तावित संशोधनों का ड्राफ्ट जारी किया था। इस ड्राफ्ट में पान मसाला को शेड्यूल 4 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से पैकेजिंग की अनुमति देने की बात कही गई थी।

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लेकिन शर्त थी कि इनमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर या मेटल की परत नहीं होनी चाहिए। ड्राफ्ट में टिन और कांच को भी पैकेजिंग के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद संबंधित पक्षों और उद्योग से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद FSSAI ने 10 अगस्त को अंतिम संशोधन अधिसूचित कर दिए।

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

Paneer, a bottle of iodine, and a glass bowl in the picture.

क्या आप भी खा रहे हैं 'एनालॉग पनीर'? सेहत के लिए खतरनाक मिलावटी पनीर को घर पर ऐसे पहचानें। अगर आप भी बाजार से लाकर बड़े चाव से पनीर खा रहे हैं, तो रुकिए! हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में वनस्पति तेल और स्टार्च से बना नकली यानी 'एनालॉग पनीर' भारी मात्रा में पकड़ा गया है।

 

  • बाजार में दूध की जगह पाम ऑयल और स्टार्च से तैयार एनालॉग पनीर धड़ल्ले से बिक रहा है।
  • आयोडीन टेस्ट, गर्म पानी और मसलकर देखने से असली और नकली पनीर का फर्क तुरंत पता चल जाता है।
  • मिलावटी पनीर खाने से डाइजेशन खराब होने के साथ कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ सकता है।

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क्यों ट्रेंड में है 'एनालॉग पनीर' और क्या है यह?

गुजरात और देश के कई राज्यों में Food & Drug Control Administration (FDCA) ने नकली मिल्क प्रोडक्ट्स और एनालॉग पनीर पर कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल, असली पनीर शुद्ध दूध से बनता है, जबकि 'एनालॉग पनीर' बनाने के लिए दूध का फैट निकालकर उसमें सस्ता पाम ऑयल, स्टार्च, डिटर्जेंट या यूरिया मिलाया जाता है। यह दिखने में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।

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असली vs नकली पनीर: घर पर पहचान करने के 5 आसान टिप्स

अगर आपको शक है कि आपका लाया हुआ पनीर नकली है, तो इन 5 आसान घरेलू तरीकों से तुरंत टेस्ट करें:

1. आयोडीन ड्रॉप टेस्ट (Iodine Test): पनीर के टुकड़े को पानी में उबालें और ठंडा होने पर उस पर 2-3 बूंदें आयोडीन सॉल्यूशन की डालें। अगर पनीर का रंग नीला (Blue) हो जाए, तो समझ जाएं कि इसमें स्टार्च या मैदा मिलाया गया है।

 

2. हाथ से मसलकर देखें: असली पनीर को हाथ से मसलने पर वह टूटकर बिखर जाएगा लेकिन ज्यादा रबड़ी जैसा नहीं चिपकेगा। नकली पनीर में रबड़ जैसी इलास्टिसिटी होती है और वह हाथ में चिपकता है।

 

3. उबालकर देखें (Boiling Test): पनीर के छोटे टुकड़े को पानी में उबालें। अगर पानी झागदार हो जाए या पनीर गलकर फैल जाए, तो इसमें डिटर्जेंट या केमिकल की मिलावट हो सकती है।

 

4. अरहर दाल टेस्ट: पनीर को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा सा अरहर दाल पाउडर डालें। 10 मिनट बाद अगर रंग हल्का लाल या गुलाबी होने लगे, तो इसमें यूरिया या डिटर्जेंट हो सकता है।

 

5. गंध और स्वाद (Smell & Taste): असली पनीर में दूध की सौंधी महक होती है, जबकि एनालॉग पनीर में कोई महक नहीं होती या फिर कच्चा तेल/केमिकल की गंध आती है।

 

एक्सपर्ट की राय:

“एनालॉग या मिलावटी पनीर में ट्रांस-फैट्स और सिंथेटिक केमिकल्स होते हैं। इसके लगातार सेवन से पेट में इन्फेक्शन, एसिडिटी, लिवर पर असर और बैड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ सकता है। हमेशा सर्टिफाइड डेयरी या विश्वसनीय ब्रांड्स से ही डेयरी प्रोडक्ट्स खरीदें।”- डॉ. अनामिका शर्मा (सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट)

 

पनीर खरीदते समय ये 3 गलतियां भूलकर भी न करें

  • बहुत सस्ता पनीर खरीदना: अगर बाजार भाव से आधा रेट पर खुला पनीर मिल रहा है, तो 90% आशंका है कि वह एनालॉग पनीर ही है।
  • सख्त और चमकीले पनीर के चक्कर में पड़ना: बहुत ज्यादा सफेद और रबड़ जैसा खींचने वाला पनीर स्वाद में भले ठीक लगे, लेकिन वह सेहत बिगाड़ सकता है।
  • बिना पैकेजिंग/FSSAI मार्क का पनीर लेना: बिना एफएसएसएआई (FSSAI) रजिस्ट्रेशन वाली दुकानों से खुला पनीर खरीदने से बचें।

 

सेहतमंद रहने के लिए स्वाद के साथ-साथ शुद्धता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। अगली बार जब भी आप बाजार से पनीर लाएं, तो ऊपर बताए गए आयोडीन या बॉइलिंग टेस्ट से उसकी गुणवत्ता जरूर जांचें। क्या आपके शहर में भी मिलावटी या नकली पनीर बिकने की शिकायतें आई हैं? हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं और इस जानकारी को अपने परिजनों के साथ शेयर करें!

UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

MDR Charges on UPI payment

सरकार ने संसद में ऐसा बिल पेश किया है जिससे 2000 रुपए से ऊपर के UPI बिजनेस ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR चार्ज लगाने का रास्ता खुल सकता है। यह चार्ज व्यक्ति से व्यक्ति के ट्रांसफर पर यह लागू नहीं होगा। प्रस्तावित चार्ज केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों की जेब से पैसे नहीं कटेंगे। ALSO READ: योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

 

निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया बिल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर एमडीआर लगाने के प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इसे कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

 

क्या है MDR? 

एमडीआर वह फीस है जो मर्चेंट यानी दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा के लिए बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक एमडीआर फ्रेमवर्क को रेगुलेट करता है। जनवरी 2020 से सरकार ने डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने के लिए यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर जरूरी कर दिया है। ALSO READ: Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

 

बड़े व्यापारियों के लिए मुफ्त नहीं रहेगा UPI

यूपीआई भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जहां हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं। ऐसे में सिस्टम को मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकार और रेगुलेटर्स नए विकल्प तलाश रहे हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम यूजर्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़े व्यापारियों के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त नहीं रहेगा।

 

95 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा MDR?

दावा किया जा रहा है कि 2000 की सीमा कुल यूपीआई लेनदेन का सिर्फ 5 फीसदी कवर करेगी, लेकिन इन लेनदेन का मूल्य कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का 65 फीसदी है। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना या ऑटो-टैक्सी के भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा। जुलाई में 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपए रही। कहा जा रहा है कि अगर लागू भी हुआ तो 95 फीसदी लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी बिजनेस इस फीस को ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, जो बहुत छोटी राशि होगी।

Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

dabur fssai

खाद्य नियामक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने Dabur India के कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कार्रवाई उन उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री में किए गए ‘100 per cent’ यानी 100 प्रतिशत दावों को लेकर की गई है। FSSAI का कहना है कि इस तरह के दावे भ्रामक हो सकते हैं और खाद्य नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

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FSSAI ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उसने Dabur India Ltd के खिलाफ prohibition order जारी किया है। यह कार्रवाई कंपनी की वेबसाइट पर ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री को लेकर की गई, जिन पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’, ‘100% Organic’ और ‘100% Tender Coconut Water’ जैसे दावे किए गए थे। नियामक के अनुसार ऐसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित करना मुश्किल और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हो सकते हैं। ‘100%’ दावे पर FSSAI ने क्यों उठाया सवाल?

FSSAI के मुताबिक खाद्य उत्पादों पर ऐसे absolute claims यानी पूर्णता का दावा करने वाले शब्द उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति या गुणवत्ता को लेकर गलत धारणा दे सकते हैं। नियामक ने इन्हें ambiguous, unverifiable and likely to mislead यानी अस्पष्ट, सत्यापन योग्य नहीं और भ्रामक होने की आशंका वाला बताया है। FSSAI के खाद्य दावों संबंधी दिशा-निर्देशों में भी दावों को सच्चा, स्पष्ट, सार्थक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रखने पर जोर दिया गया है। उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब?

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इस कार्रवाई का मुख्य फोकस उत्पादों की गुणवत्ता पर सामान्य प्रतिबंध लगाने के बजाय लेबलिंग और मार्केटिंग में किए गए ‘100%’ दावों पर है। इसलिए इसे सीधे तौर पर यह नहीं समझना चाहिए कि सूची में शामिल सभी Dabur उत्पाद असुरक्षित घोषित कर दिए गए हैं। मामला मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा है कि पैकेजिंग और बिक्री के दौरान उत्पाद के बारे में किस तरह के दावे किए जा सकते हैं।

डाबर के प्रोडक्ट्स पर FSSAI का बड़ा एक्शन! कई प्रोडक्ट्स पर लगाई रोक, शेयरों में 2.4% की गिरावट

Dabur India Share Price Fall: FMCG सेक्टर की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया के शेयरों में मंगलवार, 4 अगस्त को 2.42% की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी के शेयर टूटकर ₹415.50 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह खाद्य नियामक FSSAI द्वारा कंपनी के कई पॉपुलर फूड प्रोडक्ट्स पर भ्रामक ‘100%’ दावों के साथ बिक्री करने पर लगाया गया प्रतिबंध है।

खाद्य नियामक ने डाबर इंडिया को आदेश दिया है कि वह अपने उन सभी खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोके, जिन पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’ या ‘100% Organic’ जैसे भ्रामक और अस्पष्ट दावे लिखे गए हैं।

किन-किन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगा ब्रेक?

FSSAI ने डाबर के इन प्रोडक्ट्स पर रोक लगा दी हैं:

  • शहद और गाय का घी
  • एप्पल साइडर विनेगर
  • वर्जिन कोकोनट ऑयल व तिल का तेल
  • नारियल पानी और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क

FSSAI ने क्यों लिया इतना कड़ा फैसला?

खाद्य सुरक्षा नियामक ने स्पष्ट किया कि ‘100% शुद्धता’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे दावे नियमों के खिलाफ हैं। FSSAI के मुताबिक, FSS (Advertising & Claims) रेगुलेशन, 2018 के तहत ऐसे दावे अस्पष्ट, असत्यापित हैं और ये आम उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले हैं।

जांच में सामने आया कि ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध FSSAI ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट के ही ‘जैविक भारत’ का लोगो प्रदर्शित किया जा रहा था। ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ जैसे मिश्रित खाद्य पदार्थ पर ‘100% Purity’ लिखना नियमानुसार पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

नोटिस के बावजूद नहीं हुआ सुधार, अब 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट

FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर इंडिया को ऐसे ‘100%’ प्योर वाले दावों को हटाने और विज्ञापन बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक पॉजिटिव कदम नहीं उठाया गया। अब नियामक ने कड़ा रुख अपनाते हुए डाबर को 15 दिनों के भीतर ‘Action Taken Report (ATR)’ सौंपने का आदेश दिया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि उसे FSSAI का नोटिस मिल गया है और वह अपनी वेबसाइट व लेबलिंग की जांच कर आवश्यक कदम उठा रही है।

एफएमसीजी कंपनियों पर FSSAI का चौतरफा शिकंजा

यह कार्रवाई केवल डाबर तक सीमित नहीं है, बल्कि FSSAI पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स के क्षेत्र में विज्ञापन संबंधी नियमों को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। हाल ही में पेप्सिको India ने अपने मशहूर ड्रिंक ‘Sting’ की कैन और बोतलों से ‘Energy’ शब्द हटा दिया था, क्योंकि नियामक ने ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता देना बंद कर दिया है।इससे पहले जूस बनाने वाली कंपनियों को भी टेट्रा पैक्स से ‘100% फ्रूट जूस’ का दावा हटाने के निर्देश दिए गए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : ईरान डील की उम्मीद में अमेरिकी बाजारों में कल अच्छी तेजी रही। डाओ रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। टेक शेयरों के दम पर नैस्डैक भी 2 फीसदी ऊपर रहा। 10 साल की बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट आई है। हालांकि एशियाई बाजारों में दबाव है। जापान और कोरिया के बाजार नीचे आए हैं। इधर वीकली एक्सपायरी के दिन गिफ्ट निफ्टी में भी मामूली दबाव के साथ कामकाज हो रहा है।

करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

3 अगस्त को भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार चौथे सेशन में बढ़त रही। निफ्टी 24,700 के ऊपर बंद हुआ। मीडिया स्टॉक्स को छोड़कर सभी सेक्टर्स में बड़े पैमाने पर खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी आई। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 544.39 अंक या 0.70 फीसदी बढ़कर 78,639.03 पर और निफ्टी 390.70 अंक या 1.60 फीसदी बढ़कर 24,774.30 पर बंद हुआ। छोटे-मझोले शेयरों में भी खरीदारी दिखी। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की बढ़त हुई।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 23 अंक यानी 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ 24,642 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 0.35 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। हालांकि, स्ट्रेट टाइम्स में 0.25 फीसदी की तेजी दिख रही है। हैंग सेंग में 0.57 फीसदी और ताइवानी बाजार में 0.07 फीसदी की कमजोरी दिख रही है। लेकिन कोस्पी में करीब 0.83 फीसदी की बढ़त है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में भी 0.08 फीसदी की हल्की बढ़त नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

जुलाई में अमेरिकी विनिर्माण गतिविधि चार सालों से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। जिससे डॉव जोन्स रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ। टेक शेयरों के दम पर नैस्डैक भी 2 फीसदी ऊपर बंद हुआ।

Market cues : हालिया रैली के बाद अब निफ्टी में हल्का कंसोलिडेशन मुमकिन, 24774 के ऊपर जाने पर ही बढ़ेगी तेजी

डॉलर इंडेक्स

येन के मुकाबले डॉलर 0.3% बढ़कर 157.625 येन पर आ गया है। यह पिछले हफ्ते येन को सहारा देने के लिए अमेरिकी और जापानी अधिकारियों के मिलकर किए गए दखल के बाद फिर से मजबूत हुआ है। छह करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला US डॉलर इंडेक्स पिछले दो महीनों के सबसे निचले लेवल 99.99 के पास दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 0.2 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.684% पर आ गई है।

एशियाई करेंसी

US डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई करेंसी नीचे ट्रेड कर रही हैं। साउथ कोरियन वॉन में सबसे ज़्यादा बढ़त हुई है। यह 0.40% बढ़ा है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया (+0.14%) और ताइवान डॉलर (+0.07%) का नंबर आता है।

उधर दूसरी तरफ जापानी येन सबसे कमजोर बना हुआ है। यह 0.23% गिरा है। जबकि सिंगापुर डॉलर,थाई बहत,चीनी रेनमिनबी,फिलीपीन पेसो और मलेशियन रिंगित भी नीचे आए हैं।

ईरान के पास सुलह का आखिरी मौका: ट्रंप

US-ईरान बातचीत को लेकर सस्पेंस कायम है। ट्रंप ने कहा है कि नया प्रस्ताव ईरान के पास सुलह का आखिरी मौका है। हलांकि ईरान का किसी भी सीधी बातचीत से इनकार है। ईरान ने कहा है कि हॉर्मूज से जहाजों की आवाजाही के लिए ओमान से बात चल रही है। ब्रेंट $84 के पास दिख रहा है।

CAS के कन्फ्यूजन पर NSE की सफाई

क्लोजिंग ऑक्शन सेसन यानी CAS पर को लेकर कल के कंफ्यूजन पर NSE ने देर रात सफाई जारी की। इसमें कहा गया कि SEBI के नियम के हिसाब से ट्रेडिंग हुई। प्री-ओपन से ज्यादा ट्रेडिंग मेंबर्स और यूनीक PAN से ऑर्डर आए।

आज नॉन रिटेल के लिए खुलेगा LIC का OFS

आज LIC का ऑफर फॉर सेल नॉन रिटेल के लिए खुल रहा है। इसके जरिए सरकार 2.5% हिस्सा बेचेगी। इसमें 4% का अतिरिक्त ग्रीन शू ऑप्शन भी मौजूद है। फ्लोर प्राइस करीब 11 फीसदी डिस्काउंट पर 382 रुपए प्रति शेयर है। OFS से सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपए जुटा सकती है।

पेटीएम में आज 2002 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

पेटीएम में आज 2002 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। शुरुआती निवेशक 2.3% हिस्सा बेच सकते हैं। फ्लोर प्राइस 5% डिस्काउंट पर करीब 1,340 रुपए प्रति शेयर तय की गई है। वहीं MEESHO में 1,900 करोड़ रुपए के बड़े सौदे हो सकते हैं। फ्लोर प्राइस 5% डिस्काउंट पर 182 रुपए प्रति शेयर तय की गई है।

डाबर को FSSAI से झटका

फूड रेगुलेटर FSSAI ने डाबर इंडिया को झटका दिया है। 100% दावों वाले फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश दिया गया है। गाय का घी, कोकोनट वॉटर,कोकोनट मिल्क जैसे की प्रो़क्ट्स पर एक्शन लिया गया है। FSSAI ने कहा ‘100% Natural’ और ‘100% Pure’ जैसे दावे भ्रामक हैं।

DLF के नतीजे कमजोर,रेवेन्यू और मार्जिन घटा

चौथी तिमाही में DLF के नतीजे कमजोर रहे है। इसका मुनाफा 4 परसेंट बढ़ा है। लेकिन रेवेन्यू में 53 परसेंट की गिरावट दिखी है। मार्जिन पर भी दबाव दिखा है। वहीं KEI इंडस्ट्रीज का प्रॉफिट 40% बढ़ा है। मार्जिन में भी सुधार दिखा है। IREDA के मुनाफे में 37% की बढ़त दिखी है। इसकी ब्याज से होने वाली कमाई में 24% की ग्रोथ दिखी है।

भारती एयरटेल, ONGC के नतीजे आज

निफ्टी में शामिल भारती एयरटेल और ONGC के पहली तिमाही के नतीजे आज आएंगे। भारती एयरटेल का मुनाफा 20% बढ़ सकता है। इसका ARPU 1.5 फीसदी बढ़ सकता है। साथ ही BSE और गोदरेज प्रॉपर्टी समेत वायदा नतीजों की लंबी लिस्ट है जिनका आज इंतजार रहेगा।

डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के नियमों में बदलाव हो सकता है। सरकार आज लोकसभा में बिल ला सकती है। FPIs को टैक्स छूट देने वाले अध्यादेश पर भी बिल पेश हो सकता है।

Swiggy Instamart से खराब दूध, एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट की हो रही डिलीवरी! FSSAI ने जारी किए 9 नोटिस

फूड रेगुलेटर FSSAI ने क्विक कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी किए हैं। प्लेटफॉर्म पर सड़े-गले और एक्सपायर हो चुके फूड प्रोडक्ट की सप्लाई के आरोप लगे हैं। FSSAI ने यह कदम कई ग्राहकों की शिकायतों के बाद उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इस बारे में जानकारी दी। रेगुलेटर ने कहा कि उसने FSS एक्ट 2006 के तहत नियमों के उल्लंघन को देखते हुए Instamart को 9 नोटिस जारी किए हैं।

FSSAI के मुताबिक, ग्राहकों की शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि Swiggy Instamart के जरिए एक्सपायर हो चुके, खराब, सड़े-गले, दूषित और असुरक्षित फूड प्रोडक्ट की सप्लाई की गई। रेगुलेटर ने प्लेटफॉर्म को डिटेल में स्पष्टीकरण देने और कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर इंस्टामार्ट के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

रिटर्न करने के बाद फिर से खराब प्रोडक्ट की सप्लाई

ग्राहकों की शिकायतों के बारे में विस्तार से बताते हुए FSSAI ने कहा कि एक शिशु आहार (infant food formulation) बहुत खराब और असुरक्षित स्थिति में पाया गया। इसके दूषित होने और गलत तरीके से स्टोरेज व हैंडलिंग के संकेत मिले। प्रोडक्ट को वापस करने के बाद भी, कथित तौर पर उसे दोबारा सप्लाई किया गया। शिकायतों में Swiggy Instamart के जरिए दूषित अंडे और दूध, खराब पैकेज्ड फूड आइटम्स की डिलीवरी के आरोप भी लगाए गए। FSSAI ने गलत, अमान्य या ऐसे लाइसेंस नंबर भी देखे, जो मौजूद ही नहीं हैं। फूड बिजनेस करने वाली कंपनियों को कथित तौर पर उनके FSSAI रजिस्ट्रेशन में दर्ज नामों से अलग नामों से लिस्ट किया जा रहा था।

सुधार के नाम पर कुछ नहीं, बस रिफंड

FSSAI का कहना है, “कुछ शिकायतों में आरोप लगाया गया कि शिकायतें आगे बढ़ाए जाने या उच्च स्तर पर ले जाए जाने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, शिकायत का समाधान नहीं हुआ, सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। एक शिकायत में कहा गया कि फूड सेफ्टी से जुड़ी बताई गई चिंताओं का समाधान किए बिना केवल रिफंड की पेशकश की गई।”

रेगुलेटर ने कहा कि नोटिसों में कई गंभीर चिंताओं को उठाया गया है। इनमें सेलर को प्लेटफॉर्म पर एड करना, नियमों का पालन होने की जांच, ट्रेसेबिलिटी, फूड क्वालिटी की निगरानी, ​​ग्राहकों की शिकायतों का समाधान, फूड बिजनेस गतिविधियों की निगरानी और खाद्य सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित करने को चिंताएं शामिल हैं। हाल ही में FSSAI ने एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कई कंपनियों, शराब बनाने वाली कंपनियों, फूड कंपनियों और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किए थे।

आप जो फेमस Red Bull, Sting पीते हैं उनके समेत 6 बड़े ब्रांड्स को मिल गया FSSAI का नोटिस, ऐसा क्या कर दिया?

FSSAI: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह बेवरेज (पेय) ब्रांड्स को “एनर्जी ड्रिंक” शब्द के इस्तेमाल और कथित तौर पर गुमराह करने वाले दावों को लेकर नोटिस जारी किए हैं। फूड रेगुलेटर के मुताबिक, “एनर्जी ड्रिंक” या इसी तरह के बेचे जाने वाले दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए अभी तक कोई मानक तय नहीं किया गया है।

एक इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, “FSSAI ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ होने का दावा करने वाले कई बेवरेज ब्रांड्स को गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावों के लिए नोटिस जारी किए हैं।”

जिन ब्रांड्स को नोटिस मिले

ये नोटिस Red Bull, Sting, Monster, Campa Energy, Hell Energy, Adrenaline Rush और Gold Boost  को जारी किए गए हैं। आरोप है कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग और दावों के जरिए ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं। हालांकि, इन कंपनियों की तरफ से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

नोटिस क्यों जारी किए गए?

FSSAI का कहना है कि भारत में अब तक Energy Drink नाम की कोई आधिकारिक फूड कैटेगरी या उसका कोई अलग मानक तय नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि किसी प्रोडक्ट को सिर्फ Energy Drink कहकर बेचना या उसी नाम से प्रचार करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। रेगुलेटर का कहना है कि फूड कैटेगरी सिस्टम केवल प्रशासनिक वर्गीकरण के लिए है। इसे प्रोडक्ट का नाम या मार्केटिंग टर्म नहीं बनाया जा सकता।

FSSAI ने प्रोडक्ट के दावों के बारे में क्या कहा?

FSSAI ने कहा है कि किसी भी खाने-पीने के प्रोडक्ट्स पर ऐसे दावे नहीं किए जा सकते जो शरीर या दवा से जुड़े हों (functional या therapeutic claims)। रेगुलेटर के अनुसार, “शरीर और दिमाग को मजबूत करना”, “ध्यान बढ़ाना”, “एनर्जी लेवल बढ़ाना”, “कमजोरी दूर करना” जैसे दावे या ऐसे ही अन्य दावे खाद्य उत्पादों पर करना नियमों के खिलाफ है। ये दावे FSS Act 2006 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार मान्य नहीं हैं।

हाल की कार्रवाई

FSSAI ने हाल के महीनों में गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावों को लेकर फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रेगुलेटर ने ग्राहकों से मिली शिकायतों के आधार पर भी कार्रवाई की है और फूड सेफ्टी व रेगुलेटरी नियमों के पालन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी कार्रवाई की जानकारी भी शेयर की है।

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