West Bengal News Update: ‘ये राम राज्य है…’; हाथों में हथकड़ी और कमर में रस्सी… पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद TMC के बाहुबलियों का सरेआम निकाला जुलूस

West Bengal News Update: तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा थाने पर धावा बोलने का प्रयास करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 9 दिन पहले जहांगीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें उनके गढ़ फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तीन बार घुमाया गया। इसके जवाब में, खान के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और TMC नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की।

जहांगीर खान अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें गिरफ्तारी के बाद घुमाया गया है। पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, कई TMC नेताओं और उनके साथियों को पुलिस या पैरामिलिट्री फ़ोर्स ने उनके गढ़ों में सबके सामने घुमाया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इनमें से कुछ TMC नेताओं को सिर्फ़ अंडरवियर पहने, हथकड़ी और कमर पर बंधी रस्सी के साथ देखा गया। कुछ वायरल वीडियो में नेताओं को उकड़ू बैठकर कान पकड़े और सबके सामने माफी मांगते हुए घुमाया जा रहा था।

‘जानबूझकर बदनाम या अपमानित न करे’

इस तरह सबके सामने घुमाए जाने की एक घटना के बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से उन हालात और कानूनी प्रावधानों के बारे में रिपोर्ट मांगी जिनके तहत ऐसा हुआ। कोर्ट ने माना कि कानून के मुताबिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम या सबके सामने अपमानित नहीं किया जा सकता।

अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस ने कहा कि यह पूरी तरह से जांच से जुड़ा था। इसका मकसद अपराध वाली जगह पर घटना को फिर से दोहराकर देखना (reconstruction of crime scenes) था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि पुलिस बहुत ही नाजुक स्थिति में काम कर रही थी।

TMC ने ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का आरोप लगाया, BJP ने इसे ‘राम राज्य’ बताया

इस बीच, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी अपने नेताओं को सबके सामने घुमाने के कथित मामले को लेकर पुलिस के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आर्टिकल 21 का पूरी तरह से उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।”

वहीं, हावड़ा उत्तर से बीजेपी विधायक उमेश राय ने एक जनसभा में टीएमसी के आकाश सिंह की गिरफ्तारी पर कहा, “एक समय था जब वह 100 बाइकों के काफिले के साथ सड़कों पर घूमता था और लोगों को डराता-धमकाता था। आज उसी आदमी को कमर में रस्सी बांधकर घुमाया जा रहा है। असली राम राज्य ऐसा ही होता है।”

किन-किन TMC नेताओं को घुमाया गया?

आकाश सिंह

बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के चार दिन बाद 13 मई को हावड़ा की गोलाबाड़ी पुलिस ने आकाश सिंह को गिरफ्तार किया। फिर उसका सिर मुंडवाकर सिर्फ बनियान और अंडरवियर पहनाकर इलाके में घुमाया। स्थानीय स्तर पर ‘नॉर्थ हावड़ा के डॉन’ के तौर पर पहचाने जाने वाले आकाश पर लगभग 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पर गोली चलाने और एक सब-इंस्पेक्टर को घायल करने, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बम हमले करने, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं।

अभिजीत रॉय

उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले स्थानीय TMC युवा नेता रॉय को 28 मई को अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्हें कमर में रस्सी बांधकर इलाके में घुमाया गया। उस समय वहां भारी भीड़ जमा थी और लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रॉय पर बिजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में आरोप है।

साथ ही, उन पर म्युनिसिपल सफाई कर्मचारियों के लिए बनी प्लास्टिक की बाल्टियों समेत अन्य सामानों का गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक करने और उन्हें दोबारा बेचने का भी आरोप है। पुलिस ने बताया कि BJP के सत्ता में आने के बाद रॉय छिप गए थे। आखिरकार उन्हें पूर्वी मिदनापुर के मंदारमणि से गिरफ्तार किया गया।

जहांगीर खान

फाल्टा और डायमंड हार्बर में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक टकराव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। फाल्टा से तत्कालीन TMC उम्मीदवार ने एक आक्रामक बयान में खुद की तुलना ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ के मुख्य किरदार से करते हुए कहा था कि वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगा।

फाल्टा एकमात्र विधानसभा क्षेत्र था जहां दोबारा मतदान (री-पोल) हुआ था। हालांकि, जब तक मतदान हुआ, पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल बदल चुका था। खान ने चुनाव से हटकर TMC को चौंका दिया था। इसके बाद पार्टी में हुई फूट के दौरान कई नेताओं ने खान के प्रति नेतृत्व के नरम रवैये को अपनी नाराजगी की एक वजह बताया था। शुरुआत में डकैती और हत्या की कोशिश के मामलों में नाम आने के बाद, खान पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए।

गिरफ्तारी के बाद खान को तीन अलग-अलग मौकों पर फाल्टा में घुमाया गया था। एक वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस की निगरानी में अपने कान पकड़कर सबके सामने माफी मांगते हुए देखा गया। पुलिस का कहना है कि यह सब क्राइम सीन को फिर से समझने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए किया गया था। साथ ही दावा किया कि खान ने खुद ही अपने कान पकड़े, उठक-बैठक की और जनता से माफ़ी मांगी।

गुड्डू अंसारी

उत्तर 24 परगना के कमारहाटी के एक जाने-माने स्थानीय नेता, अंसारी को वरिष्ठ TMC नेता और कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा का करीबी सहयोगी माना जाता था। मित्रा उन पार्टी नेताओं में से एक थे जो पार्टी में बंटवारे के बाद भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे। अंसारी को 31 मई को गिरफ्तार किया गया और बाद में हथकड़ी पहनाकर कमारहाटी में घुमाया गया।

पुलिस का आरोप है कि अंसारी अलग-अलग तरह के कारोबार में कई सिंडिकेट चलाते थे। वह इलाके पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। बेलघरिया पुलिस के एक अधिकारी ने इस तरह सबके सामने घुमाने का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना था।

शमीम अहमद

‘गब्बर’ के नाम से पहचाने जाने वाले अहमद, शिबपुर में वार्ड नंबर 36 के अध्यक्ष हैं। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री का करीबी माना जाता है। उनकी पत्नी, शमीमा बानू, पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। अहमद को 21 मई को मुंबई के चेंबूर से गिरफ्तार किया गया और बाद में कोलकाता पुलिस उन्हें दक्षिण हावड़ा के संकराइल में भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में कमर से रस्सी बांधकर घुमाती हुई ले गई। पुलिस ने उन पर 7 मई को हावड़ा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सिकंदर खान के नेतृत्व में BJP की जीत के बाद निकाली गई रैली पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए थे।

शाहिन मोल्ला

शाहिन मोल्ला उर्फ ​​सनी एक ट्रैफिक होम गार्ड थे। उन्हें TMC के एक पूर्व मंत्री से करीबी होने के कारण दक्षिण हावड़ा में प्रभावशाली माना जाता था। उन्हें संकराइल पुलिस ने 23 मई को करोड़ों रुपये की कथित रंगदारी (एक्सटॉर्शन) रैकेट के मामले में अरेस्ट किया। गिरफ्तारी के बाद सेंट्रल फ़ोर्स और संकराइल पुलिस के जवान उन्हें कमर से रस्सी बांधकर सेंट्रल हावड़ा के चौरा बस्ती इलाके से पैदल ले गए। बंगाल पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई जांच के सिलसिले में की गई थी।

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IT Sector का भारी दबाव, Sensex-Nifty कभी लाल तो कभी हरा, इन 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Stock Market moving up and down: कच्चे तेल की नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन में कमी के बावजूद घरेलू स्टॉक मार्केट में खास जोश नहीं दिख रहा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में ग्रीन और रेड जोन में झूल रहे। ब्रोडर लेवल पर भी मिला-जुला रुझान है और निफ्टी मिडकैप 100 में फिलहाल मामूली बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। फिलहाल 10:14 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 120.12 प्वाइंट्स यानी 0.16% की बढ़त के साथ 77,275.74 और और निफ्टी (Nifty) भी 43.20 प्वाइंट्स यानी 0.18% के उछाल के साथ 24,128.90 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 111.23 प्वाइंट्स फिसलकर 77,044.39 और 164.70 की बढ़त के साथ 77,320.32 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 26.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,058.85 और 53.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,085.70 तक पहुंचा।

Stock Market in pressure: ये है वजह

अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर लेकिन आगे बढ़ाने के संकेत

अमेरिकी फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श ने अपनी अगुवाई में पहली बार तय हुई मौद्रिक नीतियों में दरों को स्थिर रखा है। हालांकि फेडरल रिजर्व ने इस साल दरों में बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं। इसके चलते ही मार्केट में उठा-पटक दिख रही है।

IT Sector का दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया जिससे दुनिया भर में टेक स्टॉक्स को लेकर निवेशकों का रुझान फीका पड़ा। भारतीय मार्केट में भी इसने आईटी शेयरों को तोड़ दिया और निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक फिसल गया। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होने पर आमतौर पर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर दबाव आता है क्योंकि इससे भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य घट जाता है और वैश्विक कंपनियों के खर्च में भी कमी आ सकती है और यही वैश्विक कंपनियां भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की प्रमुख ग्राहक हैं। वहीं दूसरी तरफ मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और एफएमसीजी जैसे अहम सेक्टर मार्केट को ऊपर खींचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 1.66% की गिरावट के साथ 12.97 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है वोलैटिलिटी का कम होना।

एशियाई बाजारों से मिला-जुला रुझान

घरेलू मार्केट पर आज एशियाई बाजारों के मिले-जुले रुझानों का भी असर दिख रहा है। एक तरफ जापान का निक्केई 225 करीब 2% उछल पड़ा तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 2% चढ़कर 9,040.52 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 1% की बढ़त है। वहीं दूसरी तरफ इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी की गिरावट है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में दोनों तरफ मूवमेंट दिख रहा है।

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US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

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दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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होर्मुज खुला, लेकिन सिर्फ 60 दिन फ्री रहेगा:अमेरिका ₹28 लाख करोड़ देगा, बदले में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा; समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

अमेरिका-ईरान जंग खत्म, दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए:ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन; पाकिस्तानी PM शहबाज ने इस्लामाबाद समझौता बताया

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है।’ ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गुरुवार को इस समझौते पर मध्यस्थ के तौर पर दस्तखत किए। उन्होंने X पर पोस्ट कर इसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ बताया। पीस डील से जुड़ी 5 फोटोज… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प बोले- ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका:हमने टारगेट से ज्यादा हासिल किया, 60 दिन में समझौता नहीं हुआ तो फिर बम बरसाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने तय लक्ष्यों से भी ज्यादा हासिल किया है। फ्रांस में G7 समिट से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा कि ईरान का नेतृत्व अब पहले जैसा नहीं रहेगा और वह आगे अलग तरीके से व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता तो युद्ध जारी रख सकता था, लेकिन आर्थिक तबाही से बचने के लिए शांति का रास्ता चुना। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर देगा। उन्होंने कहा, “हम कभी नहीं चाहेंगे कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। जरूरत पड़ी तो दोबारा हमला करेंगे।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही का भरोसा: ईरान और ओमान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। 2. ट्रम्प बोले- हिजबुल्लाह से सीरिया निपट सकता है: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर इजराइल हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में आम लोगों की मौत नहीं रोक पा रहा है, तो सीरिया यह जिम्मेदारी संभाल सकता है। 3. लेबनान में जंग खत्म करने की मांग: ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि सिर्फ ईरान में संघर्ष रुकना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो और इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत पर चीन की चेतावनी: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मौजूदा सहमति अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा चरण पहले से ज्यादा मुश्किल होगा और स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को लगातार प्रयास करने होंगे। 5. कुछ दिनों में पूरा ईरान समझौता सार्वजनिक होगा: ट्रम्प ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते को शब्द-दर-शब्द पढ़कर भी सुनाएंगे, ताकि उसकी सही जानकारी सामने आ सके। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मोदी ने ट्रम्प से कहा- भारतीय नाविकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण:ट्रम्प बोले-जब तक मैं राष्ट्रपति, व्हाइट हाउस में भारत का दोस्त मौजूद रहेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा- जब तक मैं प्रेसिडेंट हूं, व्हाइट हाउस में मोदी का हमेशा अच्छा दोस्त मौजूद रहेगा। अगर भारत या मोदी पर हमला होता है और मोदी लीडर होंगे तो हम उनकी मदद करेंगे। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा- जब तक मोदी लीडर हैं, इंडिया हर फील्ड में बड़ा रोल निभाएगा। मोदी शांत और जबरदस्त नेता हैं, लेकिन मैं मोदी की तरह नहीं हूं। वहीं ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने कहा कि समुद्र में भारतीयों की सुरक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि ईरान के साथ डील में भारतीयों की सुरक्षा पक्की की जाएगी। पीएम ने कहा कि होर्मुज खुला रहना जरूरी है। मैं वेस्ट एशिया में शांति की कोशिशों में ट्रम्प की लीडरशिप की तारीफ करता हूं। ट्रम्प के नेतृत्व में शांति की उम्मीद दिख रही है। फ्रांस के एवियन में दो दिवसीय 52वें G7 समिट का आयोजन हुआ। आज समिट का दूसरा दिन था। मोदी और ट्रम्प भी समिट में शामिल हुए थे। मोदी-ट्रम्प मुलाकात की 4 तस्वीरें… मोदी ने दोनों दिन भारतीय की मौत का मुद्दा उठाया पीएम मोदी ने G7 समिट में दोनों दिन होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने समिट के पहले दिन मंगलवार को आउटरीच सेशन में कहा था कि इस अहम समुद्री मार्ग में कई भारतीयों ने जान गंवाई है और वैश्विक व्यापार को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है। मोदी के G7 दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अमेरिका में मिलने वाले प्रति घंटा वेतन में गिरावट जारी:मध्यम वर्ग की आय धीमी गति से बढ़ रही, एआई से भी बढ़ी समस्या

अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है, वहीं आम वर्कर्स बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। पिछले सप्ताह इसकी झलक दो घटनाओं में दिखाई दी। बुधवार को लेबर ब्यूरो ने बताया कि ऊर्जा कीमतों(बिजली, पेट्रोल, गैस, डीजल) में बढ़ोतरी ने औसत अमेरिकी कर्मचारी की पिछले डेढ़ साल की वास्तविक वेतन वृद्धि लगभग खत्म कर दी। वहीं शुक्रवार को स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले खरबपति बन गए। अर्थशास्त्रियों गैब्रियल जकमैन और इमैनुएलसाएज के अनुसार, 19वीं सदी के उत्तरार्ध के तथाकथित “गिल्डेड एज’ में सबसे अमीर अमेरिकियों की संपत्ति देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन के लगभग 3% के बराबर थी। आज अमेरिका के शीर्ष 0.00001% यानी लगभग 20 लोगों की संपत्ति राष्ट्रीय उत्पादन (अमेरिकी कंपनियों द्वारा अमेरिका और अन्य देशों में सालाना किया जाने वाला उत्पादन ) के 12% तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में शीर्ष स्तर पर संपत्ति का इतना बड़ा केंद्रीकरण पहले कभी नहीं देखा गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्टीफेनी स्टेंटचेवा केअनुसार, शेयर बाजार में लगातार उछाल ने लोगों में यह भावना पैदा की है कि आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के लिए अधिक काम कर रही है। हालांकि आधे से अधिक अमेरिकी परिवार प्रत्यक्ष रूप से या रिटायरमेंट फंड के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश रखते हैं और उन्हें भी लाभ मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दशक में मध्यम वर्ग की संपत्ति अमीरों की तुलना में कहीं धीमी गति से बढ़ी है। ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण मई में अमेरिका की मुद्रास्फीति तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। महंगाई को समायोजित करने के बाद प्रति घंटे मिलने वाला वास्तविक वेतन लगातार तीन महीनों से घट रहा है। नतीजतन, ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में हुई वेतनवृद्धि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। अमेरिकी परिवार पहले ही कोविड-19 महामारी,चार दशक की सबसे ऊंची महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, टैरिफ और मंदी की आशंकाओं का सामना कर चुके हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) एक नई चिंता बनकर उभरा है। कई तकनीकी कंपनियों के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि एआई आने वाले वर्षों में अनेक श्रेणियों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल के अर्थशास्त्री ग्लेन हबार्ड का कहना है कि जब तकनीकी कंपनियां स्वयं यह संदेश देती हैं कि उनकी तकनीक लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है, तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इसी वजह से अमेरिका में आर्थिक असमानता, सुपररिच वर्ग के बढ़ते प्रभाव और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस पहले से अधिक तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने के साथ कमाई घटी – अमेरिका में महामारी के बाद महंगाई चार दशक में सबसे अधिक हो गई । – राष्ट्रीय आय में वर्कर्स के हिस्से में लगातार गिरावट। – अमीरों की तुलना में मध्यमवर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी की गति धीमी। – लंबे समय तक महंगाई रहने से कंज्यूमर खर्च से बचते हैं। – प्रति घंटा वेतनों में तीन माह से गिरावट जारी। एआई कंपनियों के कई बड़े आईपीओ आएंगे टेक कंपनियों को अभी हाल में शेयर मार्केट की तेजी से फायदा हुआ है। स्पेसएक्स के बाद एआई कंपनियों के बड़े-बड़े आईपीओ की श्रृंखला आ सकती है। महंगाई और आय में गिरावट की चिंता के बीच एआई में उछाल से लोगों का अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी से असहज होना असामान्य नहीं है। कम आय वालों को करना पड़ रहा संघर्ष अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई के दौर से कंज्यूमर का आर्थिक व्यवहार लंबे समय तक प्रभावित रहता है। यह उनके बजट पर बोझ के साथ अनुचित भी है, क्योंकि अमीर लोग तो महंगाई का सामना अपेक्षाकृत आसानी से कर लेते हैं जबकि कम आय वाले परिवारों को संघर्ष करना पड़ता है। कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटरों का विरोध सर्वेक्षणों के अनुसार कई वर्कर्स करिअर पर एआई टेक्नोलॉजी के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। अमेरिका के कई राज्यों में वोटर अपने इलाके में डेटा सेंटरों के निर्माण पर विरोध जता चुके हैं। वे अपने बिजली के बिल, पानी सप्लाई और हवा की क्वालिटी पर इसके असर की बात कह रहे हैं।

छोटी टीमों ने बड़ी टीमों को जीतने से रोका, 1 दिन में 4 मुकाबले हुए ड्रॉ

FIFA World Cup

ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि फीफा विश्वकप 2026  में एक ही दिन में 4 ड्रॉ मुकाबले खेले जाएं। लेकिन सोमवार को ऐसा हुआ गोलरहित ड्रॉ से लेकर 2-2 की बराबरी वाले मैच भी देखने को मिले। इन मुकाबले में खास बात यह रही कि बड़ी टीमें छोटी टीमों के खिलाफ निर्णायक जीत अर्जित करने में विफल रही।

विश्वकप डेब्यू पर केप वर्डे ने विश्वविजेता स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका

खिलाड़ियों के शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन की बदौलत अफ्रीकी देश केप वर्डे ने मौजूदा यूरोपीय चैंपियन और 2026 विश्व कप के प्रबल दावेदार स्पेन के खिलाफ मुकाबला गोल रहित ड्रॉ खेला।

मुकाबले की शुरुआत से ही की मजबूत रणनीति अपनाते हुए अफ्रीकी देश केप वर्डे ने लामिन-यामल के बिना खेल रही स्पेन को इस हद तक बेअसर कर दिया कि स्पेन के सेंटर फॉरवर्ड मिकेल ओयार्ज़ाबल को शुरुआती आधे घंटे तक गेंद को छूने का भी मौका नहीं मिला। यह एक रिकार्ड है (1966 विश्व कप के बाद से जब से ये रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं, तब से किसी भी खिलाड़ी के बिना गेंद को छुए रहने का यह सबसे लंबा समय है)।

दूसरे हाफ में जब यामल मैदान में आए, तो स्पेन थोड़ा अधिक दृढ़ और आक्रामक नजर आया, लेकिन 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा और उनकी रक्षात्मक पंक्ति को भेदना नामुमकिन था। स्पेन के पास 74 प्रतिशत गेंद का कब्ज़ा था, उसने उल्लेखनीय रूप से 27 शॉट लगाए लेकिन केप वर्डे के किले को नहीं भेद पाये। अंतत: मुकाबला गोल राहित ड्रा पर समाप्त हुआ।

मिस्र बनाम बेल्जियम मुकाबला 1-1 से रहा ड्रॉ

फीफा विश्वकप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और बेल्जियम के बीच खेला गया रोमांचक मुकाबला 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ और दोनों टीमों ने अंक बांटे।सिएटल स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में मिस्र ने मैच की शुरुआत में ही बेहतर प्रदर्शन किया और मोहम्मद सलाह के पास पर इमाम अशूर ने बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर थिबाउट कर्टोइस को पछाड़ते हुए बढ़त बना ली। यह एक शानदार गोल था। अशूर की लगातार आक्रामक दौड़ और सलाह की चतुराई, जिन्होंने सेंटर में नंबर 10 की भूमिका निभाते हुए बेल्जियम के डिफेंस के खिलाफ लगातार खाली जगह का फायदा उठाया, जो उन्हें रोकने के लिए संघर्ष कर रहा था।

बेल्जियम को भी मौके मिले, जिनमें केविन डी ब्रुइन का शानदार फ्रीकिक भी शामिल था, जो पोस्ट से टकराया। लेकिन रिकॉर्ड गोल करने वाले रोमेलु लुकाकू के मैदान में आने से ही मैच का रुख बदला। मैदान में आते ही 22 सेकंड के भीतर ही यह दमदार स्ट्राइकर बॉक्स में घुस गया और उसकी मौजूदगी से मोहम्मद हानी को इतनी उलझन हुई कि थॉमस म्यूनीर के निचले क्रॉस को उन्होंने अपने ही गोल में डाल दिया। हानी के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण था।

बेल्जियम ने जीत के लिए पूरी ताकत झोक दी, लेकिन मजबूत रक्षा पंक्ति और मुस्तफा शोबेर के शानदार बचाव के दम पर मिस्र ने एक अंक हासिल कर लिया। अफ्रीकी दिग्गज टीम को अभी तक विश्व कप में एक भी जीत नहीं मिली है।

सऊदी अरब बनाम उरुग्वे मुकाबला 1-1 से रहा ड्रा

सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच खेला गया फीफा विश्वकप 2026 ग्रुप एच का मुकाबला दोनों ओर से आक्रामक प्रदर्शन के बावजूद 1-1 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इसी के साथ ग्रुप एच में सभी टीमें एक-एक अंक पर बराबरी पर आ गईं। यहां खेले गये मुकाबले अब्दुलेलह अल अमरी ने अपनी टीम के लिए पहला गोल किया जब फर्नांडो मुस्लेरा द्वारा छोड़ी गई लंबी दूरी की शॉट को रिबाउंड पर सबसे पहले पहुंचकर उन्होंने गोल दागा।

पहले हाफ में उरुग्वे 1-0 से पीछे था, लेकिन दूसरे हाफ में उसने जोरदार शुरुआत की। डार्विन नुनेज को बाहर करने के बाद, मार्सेलो बिएल्सा ने मध्यांतर में एक बड़ा संदेश दिया और उनकी टीम ने वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा कि वह अपनी टीम के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने अंत तक गोल पर 27 शॉट लगाए (जिनमें से 20 दूसरे हाफ में आए) और मोहम्मद अल ओवैस के शानदार बचाव की बदौलत ही वे सिर्फ एक गोल तक सीमित रह सके। वह गोल तब हुआ जब मैक्सी अरौजो ने बॉक्स के अंदर एक ढीली गेंद पर कब्जा जमाया और मुश्किल कोण से ओवैस को चकमा देते हुए गोल दाग दिया।

ईरान बनाम न्यूजीलैंड मैच 2-2 से ड्रा रहा

ईरान ने अपने 2026 फीफा विश्व कप अभियान की शुरुआत न्यूजीलैंड के खिलाफ एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में 2-2 ड्रॉ के साथ की, इस दौरान न्यूजीलैंड की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। लॉस एंजिल्स के सोफी स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में एलिजा जस्ट ने दो बार न्यूजीलैंड को बढ़त दिलाई, लेकिन ईरान के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हर बार शानदार वापसी की।

रामिन रेजाइयन ने गोल किया और मोहम्मद मोहेबी को असिस्ट किया, जिससे ईरान ने लॉस एंजिल्स में जोरदार समर्थन के बीच आक्रामक खेल दिखाया। मैच के चारों गोल बेहतरीन तालमेल से बने मूव्स के दम पर आए और इस दौरान दोनों टीमों आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया।ईरान के लिए रेजाईयन 33वें, मोहेबी ने 64वें मिनट में गोल किये। वहीं न्यूजीलैड की ओर से एलिजा जस्ट सातवें और 54 वें मिनट में गोल दागे।