ट्रंप के प्रिय मुनीर है या मोदी?

उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिगर ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने प्रेसिडेन्ट निक्सन को ऐसे डपटा जैसे एक प्रोफेसर अपने किसी कमजोर स्टूडेंट की झाड़ लगाता है।… अभी फ्रांस में सबने देखा उसी देश के प्रधानमंत्री ट्रंप को एक्सीलेंसी बोल रहे थे। मतलब महामहिम। अपने समकक्ष नहीं। बहुत उंचे दर्जें पर समझकर। जिनसे बात नहीं होती है। केवल निवेदन होता है। 6 बार बोला।

शिमला समझौता, जो भारत की विजय का नाद था उसकी भाजपा ने (उस समय जनसंघ था) कितनी आलोचना की थी? वही आज इस्लामाबाद और उसके समझौते की दुनिया में वाहवाही है। विश्व नेताओं उसकी बधाई दे रहे हैं। उसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्रंप के सामने कि आपका हम अभिनंदन करते हैं। क्या इसकी जरूरत थी?और इससे भारत का क्या मैसेज बना है?

12 वर्षों से पाकिस्तान, ट्रंप और विदेशी नीति को ले कर मोदी सरकार ने भक्तों और गोदी मीडिया से एक अलग ही शेखी फैलाई हुई थी। पाकिस्तान मवाली देश और भारत विश्व नेता, विश्व गुरू। भक्त और मीडिया क्योंकि किसी के भी प्रति जवाबदेह नहीं हैं तो चाहे जो प्रचार हुआ। इस सबसे दुनिया में भारत की इमज कैसी बनती है इसकी उन्हें कोई चिंता नहीं है। इसी सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी के आगे ट्रंप ने कहा कि मैं आपके मीडिया को पंसद करता हूं। अच्छे अच्छे सवाल करता है। हमारा तो फंसाने वाले सवाल करता है। मतलब भारत का मीडिया  अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी गोदी मीडिया के रूप में प्रचारित हो गया!

बहराहल अमेरिका और ईरान के एमओयू का इस्लामाबाद समझौता हो गया है। इसमें नई दिल्ली कहीं नहीं है। भारत बधाई देने वालों की कतार में है। कांग्रेस छोड़ दीजिए। राजनीति भी। लेकिन विदेश सेवा के उन वरिष्ठ अधिकारियों की उस तड़प और दर्द का आप क्या करेंगे जिन्होंने अपना पूरा करियर भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने में बिताया। और पाकिस्तान जो इस काबिल कभी था ही नहीं और उसे भारत से ऊपर तो क्या बराबर भी कभी नहीं आने दिया।

पाकिस्तान की वह स्थिति अभी भी नहीं है। मगर हमने अपनी स्थिति जरूर खो दी है। लेकिन गोदी मीडिया इसी बात को लेकर खुशी मना रहा है कि ट्रंप ने कहा कि अगर मोदी रहेंगे और भारत पर हमला हुआ तो वे भारत के साथ खड़े रहेंगे। साथ ही यह भी कहा कि अगर कोई दूसरा होगा तो वे नहीं कह सकते। वाह! अन्तरराष्ट्रीय संबंध ऐसे चलते हैं? जिस अमेरिका-ईरान समझौते की बात हो रही है क्या वह ट्रंप और मसूद पेजेश्कियान, जिन्होंने ईरान की तरफ से साइन किए के बीच का समझौता है? कल को जब ट्रंप प्रेसिडेन्ट नहीं रहेंगे तो ईरान कह सकता है कि समझौता खत्म!

संयुक्त राष्ट्र किन -न के हस्ताक्षरों से बना था? सब खत्म हो गए। संगठन बना हुआ है। पर वहा की बहस बेमानी है। यह भी बहस बेमतलब कि वह कितना काम कर पा रहा है या नहीं? सवाल यह है जैसा ट्रंप ने कहकर मोदी भक्तों को बहला दिया कि अगर वे सत्ता में रहेंगे और मोदी रहेंगे तो यह होगा। नहीं तो नहीं!

सवाल है ट्रंप के न रहने से अमेरिका खत्म हो जाएगा? भारत के बारे में तो ट्रंप ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि अमेरिका को बहुत कड़वा अनुभव है भारत के बारे में गलत बोलने का। राष्ट्रपति निक्सन ने बोला था। बहुत ही गंदा। क्या? वह हम यहां नहीं लिख रहे। मगर हां यह जरूर बता रहे हैं कि उसका जवाब तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने कैसा दिया था। जो ट्रंप सहित वहां बनने वाले सभी राष्ट्रपतियों को आज भी याद है। सुनी सुनाई नहीं। किताबों में लिखा है। उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसंगर ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने प्रेसिडेन्ट निक्सन को ऐसे डपटा जैसे एक

प्रोफेसर अपने किसी कमजोर स्टूडेंट की झाड़ लगाता है। उससे पहले अमेरिका के अधिकारियों ने भारत के अमेरिका स्थित राजदूत से पूछा था कि प्रेसिडेन्ट निक्सन अपने समकक्षों को मिस्टर लगा कर बोलते हैं क्या आपके प्राइममिनिस्टर को भी बोल सकते हैं? सवाल इन्दिरा जी तक आया। उन्होंने हंस कर कहा बोल सकते हैं। यह था इन्दिरा गांधी का आत्मविश्वास। और एक अभी फ्रांस में सबने देखा उसी देश के प्रधानमंत्री ट्रंप को एक्सीलेंसी बोल रहे थे। मतलब महामहिम। अपने समकक्ष नहीं। बहुत उंचे दर्जें पर समझकर। जिनसे बात नहीं होती है। केवल निवेदन होता है। 6 बार बोला।

ऐसी भारत की आज स्थिति हो गई है। गोदी मीडिया भक्तों को तो कुछ नहीं मालूम। मगर भाजपा में कुछ पढ़े लिखे नेता हैं। उन्हें मालूम होगा कि यह सारे अन्तरराष्ट्रीय समझौते इन्टरनेशनल स्टेडी में, सिविल सर्विस की परीक्षाओं  मे पढ़ाए जाते हैं। हमारे नेतृत्व की कमजोरी से पाकिस्तान ने वह दर्जा हासिल कर लिया कि जो अब सब जगह इस्लामाबाद समझौता भी पढ़ाया जाएगा। कूटनीति के कौशल, पाठ में हर जगह चर्चा में रहेगा।

पहले इस इस्लामाबाद का नाम आतंकवाद फैलाने के लिए आता था। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस्लामाबाद को अन्तरराष्ट्रीय जगत से अलग थलग कर दिया था। और आज उसी अमेरिका जो हमें कमजोर समझकर अपनी शान बताने के लिए कह रहा है कि हमला हुआ तो मैं तुम्हारे साथ खड़ा होऊंगा। मगर असल में ट्रंप की मेहरबानी से पाकिस्तान एक नई हैसियत में आज खड़ा है।  विश्व ताकत बन कर खड़ा हो गया है। वहां के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ

इस्लामाबाद से इसकी घोषणा कर रहे हैं।

वह कहते हैं ना –

और क्या देखने को बाकी है

आप से दिल लगाकर देख लिया!

मोदी से आपने दिल लगाया। और मोदी ने ट्रंप से। फैज की इस गजल का अगला शेर है –

वो मेरे हो के भी मेरे न हुए

उन को अपना बना कर देख लिया!

माई डियर फ्रेंड से हिज एक्सीलेंसी तक।

वे एक हाईपोथेटिकल ( काल्पनिक) सवाल के जवाब में कहते हैं कि अगर भारत पर हमला हुआ तो। यह बिल्कुल ऐसा ही जैसे कोई खुद को दबंग समझने वाला कमजोर पर रौब झाड़े कि ऐ अगर कोई तुमसे बात करे तो हमें बताना… हम उसका ऐसा कर देंगे वैसा कर देंगे। और डरा हुआ कमजोर कहे जी साहब आपका ही सहारा है।

और दूसरी तरफ सोचिए जरा। किसी आत्मविश्वास वाले ठीक आदमी से कोई कहे कि अगर कोई तुम पर हमला करे तो हम हैं। तो वह छूटते ही कहेगा किसकी मजाल है?

अभी पहलगाम में जब हमारे निर्दोष नागरिकों को पाकिस्तानी आतंकवादी हमले में मार दिया गया था तो ट्रंप आए थे मोदी के साथ? उसके बाद आपरेशन सिंदूर में? उसमें तो जब हमारी सेनाएं हमेशा के लिए एक फैसला करने की स्थिति में थीं तब ट्रंप ने आदेश के स्वर में स्टाप इट स्टाप इट कहकर उन्हें रोक दिया था।

वह सीजफायर जिसके लिए सौ बार ट्रंप ने बोला कि मैंने करवाया हमने तत्काल माना। और पाकिस्तान उसके बाद चौबीस घंटे तक हमले करता रहा।

मैं आपके साथ आ जाऊंगा! उस वक्त कहां थे? भारत को विश्व राजधानियों में नेताओं को भेजना पड़ा। कांग्रेस के और दूसरे विपक्षी दलों के लेकर! अमेरिका भी। क्यों? क्योंकि कोई आपके साथ नहीं था। जो देश परपंरागत रूप से भारत के साथ रहते आए थे उन्हें भी आपने अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने वाली नीतियों से दूर कर दिया।

अन्तरराष्ट्रीय संबंधों में व्यक्ति का महत्व नहीं होता है। और अगर पंडित जवाहर लाल नेहरू जैसा प्रतिष्ठित कोई व्यक्ति हो या इन्दिरा गांधी जैसी साहसी याद कर लें पहला परामाणु परीक्षण उन्होंने ही किया था तो या मनमोहन सिंह जैसा विद्वान तो फिर भी उसका कोई असर होता है मगर यह कहकर कि मेरी छाती 56 इंच की है। लाल आंखे हो जाती हैं। एक अकेला सब पर भारी हूं। गोदी मीडिया और भक्त तो मुरीद हो जाते हैं मगर अन्तरराष्ट्रीय जगत में इन चुटकुलों का कोई असर नहीं होता है।

अमेरिका-ईरान समझौता अच्छा है। शांति के हर प्रयास का स्वागत है। मगर हमने अपना जो अन्तरराष्ट्रीय स्थान गंवाया है और जो कभी इसके बिल्कुल योग्य नहीं था क्योंकि उसने अपनी जनता की भलाई के बदले धर्म, बड़े जमींदारों, पूंजीपतियों और अमेरिका के पिछलग्गू की भूमिका निभाई गई है उस राह से वैश्विक मंच पर आगे बहुत मुश्किल है।

जिस हकीकत को देश और दुनिया समझ रही है मगर मोदी और ट्रंप नहीं समझ रहे है। मोदी को ट्रंप प्रिय हैं हालांकि अब वे दोस्त से बॉस हो गए हैं। मतलब महामहिम! इससे कुछ भी नहीं सधना है।दुनिया ने जान लिया है की ट्रंप के प्रिय पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर है। वही मुनीर, जिन्हें पहलगाम आतंकवादी हमले का मास्टर माइंड बताया जाता है।

अमेरिका-ईरान ‘डील साइन’

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच निर्धारित समय से एक दिन पहले 18 जून को ही युद्धविराम समझौते पर दस्तखत हो गए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में समझौते पर दस्तखत करने के बाद बाहर निकल कर मीडिया के सामने चिल्ला कर कहा ‘डील साइन’। ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समझौते पर दस्तखत किया। पिछले करीब 50 साल में पहली बार अमेरिका और ईरान ने किसी समझौते पर दस्तखत किया है।

अंतरिम समझौते पर दस्तखत के समय दोनों देशों के राष्ट्रपति आमने सामने नहीं बैठे थे, बल्कि डिजिटल तरीके से जुड़े थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार की रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में युद्धविराम से जुड़े समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। समझौते के दस्तावेज पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है’। गौरतलब है कि वर्साय में पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी के साथ ऐतिहासिक समझौता हुआ था।

राष्ट्रपति ट्रंप के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी ईरान से डिजिटल तरीके से दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह साढ़े पांच बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में सैन्य अभियान खत्म किया जाएगा। साथ ही होर्मुज की खाड़ी को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी।

गौरतलब है कि इस समझौते पर 19 जून को स्विटजरलैंड में जेनेवा के पास लूसर्न शहर में दस्तखत होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इस पर दस्तखत कर दिए गए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह दुनिया के लिए एक मजबूत ईरान का संदेश है। पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान वैश्विक शांति, अपनी गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने के साथ साथ विकास और क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर दस्तखत होने के बाद होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज की खाड़ी से गुजरे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुपर टैंकरों में करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था। दूसरी ओर यह भी खबर है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले 60 दिन में अमेरिका औरर ईरान के अंतिम समझौते को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ‘इजराइल टाइम्स’ के मुताबिक, नेतन्याहू दक्षिणपंथी मीडिया हस्तियों और इजराइल समर्थक अमेरिकी सांसदों के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाना चाहते हैं।

गिफ्ट निफ्टी दे रहा भारतीय बाजार के कमजोर खुलने के संकेत, 24000 पर कर रहा ट्रेड, जानें आज बाजार पर किन खबरों का दिखेगा असर

ग्लोबल मार्केट के पॉजिटिव संकेतों के बावजूद, शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी से नीचे खुलने की संभावना है, क्योंकि निवेशक पांच सेशन की मजबूत रैली के बाद प्रॉफिट लॉक करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिसने निफ्टी को 24,150 से ऊपर और सेंसेक्स को 77,400 के पार पहुंचा दिया है। विदेशी फंड की लगातार बिकवाली और ज़रूरी टेक्निकल लेवल के पास रुकावट से भी सेंटिमेंट सतर्क रह सकता है।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8 बजे 24,000 पर ट्रेड कर रहा था, जो 192 पॉइंट यानी 0.8 प्रतिशत नीचे था, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है। यह संकेत एशियाई मार्केट और वॉल स्ट्रीट में मोटे तौर पर पॉजिटिव ट्रेंड के उलट है, जिससे पता चलता है कि घरेलू ट्रेडर हालिया रैली के बाद प्रॉफिट बुक कर सकते हैं।

सतर्क शुरुआत का संकेत गुरुवार को भारतीय इक्विटी के लगातार पांचवें सेशन में ऊपर बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 254.36 पॉइंट्स या 0.33 परसेंट बढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 24,168 पर बंद हुआ।

ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और महंगाई की चिंताओं में कमी से रिस्क लेने की क्षमता बढ़ने से शुक्रवार को एशियाई इक्विटीज नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स लगातार छठे दिन 0.1 परसेंट बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 2.5 परसेंट से ज़्यादा चढ़ा। जापान का निक्केई फ्यूचर्स भी ऊपर गया।

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में रैली की वजह से वॉल स्ट्रीट रात भर मजबूती के साथ ऊपर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 1.91 परसेंट, S&P 500 1.08 परसेंट और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.14 परसेंट बढ़ा। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि Apple, Intel के साथ मिलकर यूनाइटेड स्टेट्स में चिप्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करेगा, सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने तेज़ी से अच्छा परफॉर्म किया, जिससे फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 6.4 परसेंट बढ़ गया।

इस बीच, US-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग एक्टिविटी धीरे-धीरे फिर से शुरू होने पर क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड $79 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि US क्रूड $76 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि तेल का फ्लो ठीक होने से महंगाई और एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम होगी। क्रूड की कीमतों में तेज़ गिरावट दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल इंपोर्टर भारत के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात बनी हुई है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग की संभावना के बावजूद, बड़ा बैकग्राउंड कंस्ट्रक्टिव बना हुआ है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा के बाद निवेशकों का रुझान मजबूत हुआ है। इन घटनाओं ने अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद को और मजबूत किया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हुई है और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में ज़्यादा स्थिरता की उम्मीदों को सहारा मिला है।”

संस्थागत निवेश मिला-जुला रहा। 18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक नेट सेलर थे, उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली के दबाव को झेलते हुए 3,516 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

तकनीकी मोर्चे पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी की तुरंत की रुकावट 24,200 का स्तर बनी हुई है। उस ज़ोन से ऊपर लगातार ब्रेकआउट 24,400 की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। नीचे की ओर, 24,000 का निशान एक ज़रूरी सपोर्ट एरिया बना हुआ है, जिसके टूटने पर 23,900-23,800 ज़ोन की ओर प्रॉफ़िट बुकिंग शुरू हो सकती है।

बैंक निफ्टी के लिए 58,000 का लेवल मुख्य रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि तुरंत सपोर्ट 57,800 पर है। सपोर्ट लेवल से ऊपर लगातार मजबूती से बड़े पैमाने पर रिकवरी का ट्रेंड बना रहने की उम्मीद है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”

बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”

औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?

इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।

इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।

वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।

बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 19 जून को बेंचमार्क इंडेक्स BSE सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत सुस्त रहने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी में मामूली बढ़त है। यह शुरुआती कारोबार में 24,008 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

18 जून को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी कल 24,200 के स्तर के करीब बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों से सेंटीमेंट बेहतर हुआ। निवेशकों ने US फेडरल रिजर्व के सख्त पॉलिसी रुख पर भी नजरें रखीं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 254.36 अंक या 0.33 प्रतिशत बढ़कर 77,409.98 पर और निफ्टी 82.30 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 24,168 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 08.00 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 12 अंक यानी 0.05 फीसदी की बढ़त के साथ 24,007 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 0.75 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स 0.47 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। कोस्पी 2.64 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.43 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी रही। सेमीकंडक्टर शेयरों में बढ़त की वजह से नैस्डैक में 1.9% की बढ़ोतरी हुई। वहीं,अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुईं। हालांकि निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को भी ध्यान में रखा। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 72.15 अंक या 0.14% बढ़कर 51,564.70 पर पहुंच गया,S&P 500 में 80.48 अंक या 1.08% की बढ़त हुई और यह 7,500.58 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 496.28 अंक या 1.91% बढ़कर 26,517.93 पर पहुंच गया।

डॉलर इंडेक्स

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दूसरी प्रमुख करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में बहुत कम बदलाव देखने को मिला है। फिलहास डॉलर इंडेक्स 100.77 के स्तर पर दिख रहा है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापानी येन सबसे मजबूत है। इसमें 0.174% की बढ़त देखने को मिल रही है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.125% की बढ़त है। सिंगापुर डॉलर में भी 0.008% की मामूली बढ़त हुई है जो बाजार में स्थिरता का संकेत है।

कमजोर प्रदर्शन करने वालों में फिलीपीन पेसो में सबसे ज्यादा 0.323% की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि इंडोनेशियाई रुपिया में 0.180% की गिरावट आई है। चीनी रेनमिनबी 0.106% कमजोर दिख रही है। ताइवान डॉलर में 0.028% की गिरावट आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया और सेशन के दौरान ₹3,516 करोड़ के शेयर खरीदे।

 

 

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Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग धीरे-धीरे हो रही सामान्य

Crude Oil Price Today: अंतरिम US-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग सामान्य होने लगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और इसमें हफ़्ते में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद थी। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 0.84% ​​गिरकर $79.18 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत 0.67% गिरकर $76.09 प्रति बैरल हो गई।

फंसे हुए तेल ले जा रहे जहाज़ गुरुवार को पानी के रास्ते से निकलने लगे, जबकि कुवैत ने कहा कि वह प्रोडक्शन बढ़ाना शुरू कर देगा। US सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरानी पोर्ट और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले ट्रैफिक पर लगी रोक हटा ली है, जबकि जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर, जो एक अहम नेवल इन्फॉर्मेशन बॉडी है, ने पानी के रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाजों को सलाह दी कि वे ओमान के समुद्र तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल करें ताकि माइन से बचा जा सके।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन डेवलपमेंट की तारीफ़ की, और ईरान के कट्टर समर्थकों, जिनमें कुछ साथी देश भी शामिल हैं, की इस आलोचना का जवाब दिया कि इस डील में तेहरान को बहुत ज़्यादा छूट दी गई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “मार्केट को यह पसंद आ रहा है कि तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं।”

क्रूड की बिकवाली का मतलब है कि फ्यूचर्स ने युद्ध से हुई लगभग सारी बढ़त गंवा दी है, जो फरवरी में तब शुरू हुई थी जब US और इज़राइल ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हमला किया था। यह स्ट्रेट — जो फारस की खाड़ी को ग्लोबल मार्केट से जोड़ता है और आम तौर पर ग्लोबल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा ले जाता है — तेहरान और US दोनों की तरफ से डबल ब्लॉकेड का सामना कर रहा था।

वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने इस चिंता को कम करके आंका कि ईरान आखिरकार स्ट्रेट से होने वाले ट्रैफिक पर टोल लगा सकता है, यह एक ऐसा कदम है जो तेहरान के लिए पैसे कमाने का ज़रिया बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में विवादित डिटेल्स पर काम करने के लिए 60 दिन का समय शुरू हो गया है।

हालांकि क्रूड की कीमतें गिर गई हैं, होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलना एक मुश्किल और लंबा चलने वाला ऑपरेशन साबित हो सकता है। इस प्रोसेस को ठीक से चलाने के लिए, जहाज़ों को सही जगह पर रखना, कुओं को फिर से चालू करना, इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और डी-माइनिंग ऑपरेशन पर सहमति बनाना ज़रूरी है। कुछ जहाज़ मालिक पानी के रास्ते और फ़ारस की खाड़ी के हालात को लेकर सावधान हैं।

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US-Iran Deal: बेताब ट्रंप ने हर तरह की पैंतरेबाजी की…अमेरिका और ईरान के बीच थमी जंग, समझौते के बाद मोजतबा खामेनेई का आया पहला बयान

Mojtaba Khamenei on US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रही जंग को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने MoU पर औपचारिक रूप से साइन किए। अब इस डील पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया सामने

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- इजराइल अलग-थलग पड़ा:कोई भी उन्हें पसंद नहीं करता; सिर्फ 90 लाख आबादी वाले देश के पास कोई ऑप्शन नहीं

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना कर रहे इजराइली नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस डील का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा होते, तो दुनिया में अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर इस तरह सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा, “इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे नेता हैं जो इजराइल के प्रति सबसे ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।” उन्होंने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से हर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। वेंस ने सवाल उठाया, “आपके पास दूसरा विकल्प क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- इजराइल अलग-थलग पड़ चुका:कोई भी उन्हें पसंद नहीं करता; सिर्फ 90 लाख आबादी वाले देश के पास कोई ऑपशन नहीं

अमेरिकी उपराष्ट्रति जेडी वेंस ने इजराइल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुई डील की आलोचना करने वालों को हकीकत समझना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर वे नेतन्याहू सरकार में होते तो दुनिया में अपने सबसे ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा- इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजराइल के लिए सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने ट्रम्प की आलोचना करने वाले इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना की। उन्होंने नाम लेकर उनसे पूछा कि आपके पास ऑप्शन क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मार कर नहीं किया जा सकता। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर अमेरिकी जांच, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल तेज

Mojtaba Khamenei iran new supreme leader

अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जांच उन आरोपों पर केंद्रित है जिनमें दावा किया गया है कि खामेनेई ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा निवेश पोर्टफोलियो तैयार किया। इसमें वॉल स्ट्रीट के प्रमुख बैंकों में भी निवेश शामिल था।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां खामेनेई से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की समीक्षा कर रही हैं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या किसी अमेरिकी वित्तीय संस्थान ने इन लेन-देन को सुविधाजनक बनाने में कोई भूमिका निभाई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बैंकों की गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है, उनमें JPMorgan Chase और Citigroup जैसे बड़े अमेरिकी बैंक शामिल हैं। 

 

हालांकि, जांच शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि खामेनेई के खिलाफ आपराधिक आरोप तय कर दिए गए हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह इस पूरी जांच के मुख्य केंद्र में बने हुए हैं।

 

मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता उस समय बने थे, जब उनके पिता और तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा देश की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखते हैं।

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इस बीच, अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। हालांकि, इसी महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और ईरान के नेतृत्व संबंधी मामलों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। Edited by : Sudhir Sharma