स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुरुवार को एक उत्साहजनक तस्वीर सामने आई। सऊदी अरब के तीन विशाल तेल टैंकर, जिनमें करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा था, बिना किसी रुकावट के इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजर गए। हफ्तों की तनातनी के बाद यह नजारा इस बात का संकेत था कि ईरान-अमेरिका के बीच कुछ बदल रहा है
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे संघर्ष के बाद शांति समझौते की घोषणा हुई है। इसके बाद भारत में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे?
दरअसल, युद्ध के दौरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर संकट गहरा गया था। इस वजह से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल आया और दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की चिंता पैदा हो गई थी।
अब शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की संभावना के बाद तेल बाजारों में राहत देखने को मिल रही है।
भारत के लिए क्यों अहम था यह युद्ध?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें चढ़ गईं।
दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का रास्ता इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। अगर यह लंबे समय तक बाधित रहता, तो भारत में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, हवाई किराए और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती थी। इससे महंगाई और सरकार का आयात बिल भी बढ़ता।
शांति समझौते के बाद क्या बदला?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते में होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने और ईरानी तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देने की बात शामिल है।
इस खबर के बाद बाजार को उम्मीद है कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी और तेल की कमी का खतरा कम होगा। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 77-78 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है।
भारत को क्या फायदा होगा?
- आयात बिल घटेगा: सस्ता कच्चा तेल खरीदने से भारत का विदेशी मुद्रा खर्च कम होगा और सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।
- महंगाई पर लगाम: तेल सस्ता होने से परिवहन लागत कम रहने की संभावना बढ़ती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव घट सकता है।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी: होर्मुज मार्ग सामान्य होने से भारत को पश्चिम एशिया से तेल की नियमित आपूर्ति मिलती रहेगी और आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होगा।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत घट जाएंगे?
फिलहाल इसका जवाब “नहीं” है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और रुपये-डॉलर की विनिमय दर भी शामिल होती है।
आमतौर पर तेल कंपनियां कुछ दिनों या हफ्तों तक यह देखती हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट स्थायी है या नहीं। उसके बाद ही कीमतों में बदलाव पर फैसला लिया जाता है।
अभी भी क्यों बनी हुई है अनिश्चितता?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फिलहाल एक अंतरिम समझौता है, जिसके तहत दोनों देशों के पास स्थायी समझौते के लिए 60 दिनों का समय है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में स्थायी राहत जैसे कई बड़े मुद्दे अभी भी सुलझने बाकी हैं। यदि बातचीत विफल होती है या तनाव फिर बढ़ता है, तो तेल की कीमतें दोबारा चढ़ सकती हैं।
इसके अलावा ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से शुल्क वसूला जा सकता है, जिससे तेल परिवहन की लागत प्रभावित हो सकती है।
आम लोगों के लिए क्या मतलब है?
फिलहाल यह खबर भारत के लिए राहत देने वाली है। तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा कम हुआ है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि अगले ही दिन पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम हो जाएंगी। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना जरूर बढ़ जाएगी।
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Gold Silver Rates Today: सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। दिल्ली सर्राफा बाजार में यह 960 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी भी 6660 प्रति किलोग्राम फिसल गई। शेयर बाजारों में तेजी का असर बुलियन की डिमांड पर पड़ा।
17 जून को भी गिरा था सोना
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 99.9 फीसदी प्योरिटी वाला सोना 960 रुपये गिरकर 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम (टैक्स सहित) पर आ गया। 17 जून को यह 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
चांदी भी बिकवाली दबाव में टूटी
चांदी पर भी बिकवाली का दबाव दिखा। यह 6,660 रुपये गिरकर 2,48,740 रुपये प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर बंद हुई। 17 जून को यह 2,55,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
शेयर बाजारों में मजबूती का असर
एनालिस्ट्स का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती जारी है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है। इससे इनवेस्टर्स बुलियन की जगह शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, विदेश में बुलियन में तेजी का रुख है।
फेड की पॉलिसी का बुलियन पर असर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी का असर भी बुलियन पर दिखा। एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी के बाद गोल्ड में कमजोरी दिखी। फेड की पॉलिसी से यह संकेत मिलता है कि अगर अमेरिकी इकोनॉमी में मजबूती बनी रहती है तो इस साल इंटरेस्ट रेट एक बार बढ़ सकता है।
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विदेश में बुलियन में हल्की तेजी
विदेश में गोल्ड में हल्की तेजी दिखी। यह 4,266.47 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर भी 0.38 फीसदी के उछाल के साथ 68.17 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के राष्ट्रपति और उन्होंने यूएस-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पर्वतीय रिसॉर्ट में बैठक की योजना बना रहे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह बैठक उनके समझौते को लागू करने के लिए शुरुआती बातचीत के तौर पर होगी।
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का वह स्वागत करता है। यह क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फिलहाल बैठक के एजेंडे और अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी जा सकती।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ हुए इस समझौते का जोरदार बचाव किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बताया, जिसके कारण मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका टल गई, होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोका जा सका।
फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।
ट्रंप ने कहा रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।
ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ शर्तों के साथ अमेरिका ईरान के सिविलियन परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार कर सकता है। यह अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक माना जा रहा है कि वॉशिंगटन आगे ईरान के साथ बातचीत को किस दिशा में ले जा सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान नए समझौते का पालन करता है, तो क्या उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, तो ट्रंप ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है।
उन्होंने कहा मैं उनसे हमेशा कहता रहा हूं कि दुनिया में आपके पास शायद तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर आपको परमाणु ऊर्जा की जरूरत ही क्या है?
उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन के लिए कुछ हद तक परमाणु ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है।
ट्रंप ने कहा कि वह लंबे समय से ईरान के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि देश के पास पहले से ही तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं।
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हैरी केन ने इंग्लैंड की पहली जीत में अहम भूमिका निभाई। केन के दो दमदार गोल की बदौलत इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराया। केन ने इन दो गोल के साथ ही खास उपलब्धि को भी अपने नाम कर लिया है।
हैरी केन इंग्लैंड की ओर से फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में संयुक्त रूप से पहले नंबर पर पहुंच गए हैं। उन्होंने इस मामले में पूर्व कप्तान गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी की। केन विश्व कप में अब लिनेकर के बराबर 10 गोल कर चुके हैं। इस मुकाबले से पहले लिनेकर की बराबरी करने के लिए केन को 2 गोल की दरकार थी। केन ने पहले ही हाफ में दो गोल करते हुए लिनेकर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
केन ने 12वें मिनट में स्पॉट से अपना पहला गोल किया, जिससे वह टूर्नामेंट के इतिहास में पांच पेनल्टी (शूटआउट को छोड़कर) करने वाले पहले खिलाड़ी बने। वहीं, हाफ टाइम से ठीक पहले उन्होंने मैच में अपना दूसरा गोल दागा। हैरी केन ने साल 2018 में अपना पहला फीफा वर्ल्ड कप खेला था। इस विश्व कप में इंग्लैंड ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था और हैरी केन 6 गोल के साथ गोल्डन बूट जीतने में सफल रहे थे। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी रहे थे। इसके बाद 2022 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और सेनेगल और फ्रांस के खिलाफ 2 गोल किए।
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हैरी केन इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। केन 2018 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल, 2020 और 2024 में यूरो कप का फाइनल खेलने वाली इंग्लैंड टीम का हिस्सा रहे हैं। केन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत भी शानदार अंदाज में की है। क्रोएशिया के खिलाफ केन के अलावा इंग्लैंड की तरफ से जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने एक-एक गोल दागा।
इंग्लैंड के लिए फीफा वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी
हैरी केन – 12 मैच में 10 गोल
गैरी लिनेकर – 12 मैच में 10 गोल
ज्योफ हर्स्ट – 6 मैच में 5 गोल
बॉबी चार्लटन – 14मैच में 4 गोल
माइकल ओवेन – 12 मैच में 4 गोल
डेविड बेकहम – 13 मैच में 3 गोल
स्टीवन गेरार्ड – 12 मैच में 3 गोल
मार्कस रैशफोर्ड – 11 मैच में 3 गोल
रोजर हंट – 6 मैच में 3 गोल
डेविड प्लैट – 6 मैच में 3 गोल
बुकायो साका – 4 मैच में 3 गोल
नेट लॉफ्टहाउस – 2 मैच में 3 गोल
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अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए ————————- पीस डील से जुड़ी ये खबरे भी पढ़ें… अमेरिका-ईरान समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल:होर्मुज सिर्फ 60 दिन फ्री, ईरान को ₹28 लाख करोड़ हर्जाना मिलेगा, बदले में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। पूरी खबर पढ़ें अमेरिका-ईरान जंग खत्म, तय तारीख से एक दिन पहले समझौता:दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज शाम फ्रांस के वर्सेल्स में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर से ठीक पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान समझौता ज्ञापन प्राप्त हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।
रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने बुधवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करते हुए और कूटनीति के लिए रास्ता खोलते हुए वह हासिल किया है, जिसे कई लोग असंभव मानते थे।
श्मिट ने कहा कि ईरान ने पहली बार परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भरोसे के बजाय सत्यापन के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
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अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ ईरान की शुरुआती शांति व्यवस्था तेहरान के लिए लेबनान में हिज्बुल्लाह की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का मार्ग खोल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के बाद ईरान को अनफ्रीज किए गए फंड और तेल सौदों से धन प्राप्त होना शुरू हो सकता है।
अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क पोस्ट ने न्यूज एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि इस एमओयू के तहत, ईरान को युद्ध के बाद के निवेश, प्रतिबंधों से राहत और अनफ्रीज्ड फंड से सैकड़ों अरबों का फायदा होगा। ऐसे में ईरान रिकंस्ट्रक्शन फंड का इस्तेमाल लेबनान में अपने बुरी तरह से तबाह हो चुके टेरर प्रॉक्सी को सहारा देने के लिए करेगा।
दो क्षेत्रीय राजनयिकों और दो वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को जल्द वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिससे समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।
हिज्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने पुष्टि की है कि ईरान संगठन को सार्वजनिक रूप से समर्थन देता है। अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष लगभग एक बिलियन डॉलर का ट्रांसफर भी इसमें शामिल था। कार्यालय ने कहा कि ईरान का समर्थन जारी रहेगा, चाहे फंड की वापसी से जुड़ी व्यवस्थाएं कुछ भी हों।
अमेरिका ने कहा है कि ईरान अपने अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समझौते का उल्लंघन होने पर धनराशि को फिर से फ्रीज किया जा सकता है।
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BitCoin Crash: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार अब भी मचा हुआ है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन रिकॉर्ड हाई से करीब 50% नीचे आ चुका है। बाकी भी क्रिप्टो की हालत अच्छी नहीं है और अधिकतर क्रिप्टो अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। बिटकॉइन की बात करें तो 7 अक्टूबर 2025 को $1.26 लाख के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के करीब आठ महीने में यह करीब 50% टूटकर $64 हजार के नीचे आ गया। सिर्फ यही नहीं, इस महीने तो यह $60 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की तरफ तोड़ दिया था जो इसके लिए पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।
BitCoin Crash: इन 4 वजहों से मचा हाहाकार
अमेरिकी नीतियों के सपोर्ट से बदलकर झटका देने वाले में बदलाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की क्रिप्टो समर्थक नीतियों ने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसीज की चमक बढ़ा दी थी और संस्थागत निवेशकों ने जमकर पैसा डाला। हालांकि टैरिफ वार और अमेरिका की ईरान से जंग ने निवेशकों को डरा दिया और वे क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स से पैसे निकालकर सेफ एसेट्स में पैसे डालने लगे।
बिटकॉइन के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार माइकल का बेयरेश रुझान
माइकल सायलर (Michael Saylor) ने साल 2020 में अपनी कंपनी स्ट्रैटेजी की नकदी का बड़ा हिस्सा बिटकॉइन में निवेश करना शुरू किया और स्ट्रैटेजी ने इसके बाद लगातार बिटकॉइन खरीदना जारी रखा और यह दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट बिटकॉइन होल्डर कंपनियों में शामिल हो गई। हालांकि ‘स्ट्रैटेजी’ ने साल 2022 के बाद से पहली बार अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचा तो हड़कंप मच गया। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने $25 लाख के 32 बिटकॉइन बेचे तो बिटकॉइन टूटकर $72 हजार के नीचे आ गया था। इससे पहले स्ट्रैटेजी ने साल 2022 में 704 बिटकॉइन %$18 हजार के भाव पर बेचे थे।
SpaceX का जादू
हाल ही में स्पेसएक्स ने दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। एआई पर इसकी आक्रामक स्ट्रैटेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टो मार्केट का भी कुछ पैसा इसमें आया। स्पेसएक्स ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को और अमीर बनाया और दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर बन गए।
BitCoin ETF से ताबड़तोड़ निकासी
पिछले महीने बिटकॉइन ईटीएफ से $200 करोड़ से अधिक यानी करीब ₹16 हजार करोड़ की निकासी ने क्रिप्टो मार्केट पर दबाव डाला।
SpaceX ने Elon Musk को बनाया ट्रिलेनियर, लेकिन अब लटकी यह तलवार
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Market Insight : बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि पिछले सोमवार के निचले स्तर से हम निफ्टी में 1000 अंक ऊपर हैं। बैंक निफ्टी में करीब 3500-4000 अंक की रैली आ चुकी है। बैंक निफ्टी पर 52,800 से हमारा लॉन्ग नजरिया रहा है। पिछले सोमवार भी पैनिक ना करने की सलाह थी। अब यहां से 2 बड़े सवाल हैं। पहला– अगर लॉन्ग पोजिशन है तो क्या करें? दूसरा– अगर मैंने रैली मिस कर दी तो क्या करूं?
पहले सवाल का जवाब आसान है, अपने SL को ट्रेल कर लीजिए। अगर आप शुरू से लॉन्ग हैं तो पिछले सोमवार के निचले स्तर का ही SL रखें। लेकिन अगर आप स्विंग लॉन्ग में हैं तो 23,950 और 57,200 का SL रखें। बाजार में शायद एक नई और बड़ी वाली तेजी की शुरुआत हुई है। बाजार ने बहुत कुछ झेला और काफी मजबूती दिखाई है। सिर्फ मानसून का एक निगेटिव फैक्टर बचा है,शायद उसे भी हम पचा लें।
US-ईरान डील साइन
US और ईरान ने अलग-अलग जगह से डील पर साइन कर दिए हैं। डॉनल्ड ट्रंप ने साइन करके कहा, ये आसान नहीं था। US अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि MoU अब प्रभावी हो गया है। मीडिया के पास मौजूद MoU ड्राफ्ट के मुताबिक होर्मूज ‘तेजी से’फिर से खुलेगा। ईरान के न्यूक्लियर मुद्दे और आगे के फाइनेंशियल फायदे की आगे बातचीत होगी। अभी ये साफ नहीं है कि होर्मूज पूरी तरह खुल गया है या नहीं। JD वेंस और ईरान संसद स्पीकर गालिबाफ शुक्रवार को औपचारिक रूप से डील पर साइन करेंगे।
फेड का फैसला
US फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। US फेड ने दर 3.50%-3.75% की रेंज में बरकरार रखी है। फेड ने लगातार चौथी बार दरों को स्थिर रखा है। केविन वार्श की पहली फेड बैठक मीटिंग में साफ हॉकिश बदलाव दिखा है। फेड ने महंगाई का अनुमान बढ़ाया और ईजिंग बॉयस को हटा दिया है। फेड का डॉट प्लॉट सीमित हुआ है। अब 9 सदस्यों ने 2026 में रेट हाइक का अनुमान लगाया है।
बाजार ने दिया जोरदार रिएक्शन
2 साल की US बॉन्ड यील्ड्स 13 Bps उछली है। मनी मार्केट अब अक्टूबर तक रेट हाइक को पूरी तरह से पचा चुके हैं। फेड के बाद US डॉलर में उछाल आया, यह 100.40 पर पहुंच गया। US बाजारों में गिरावट आई,नैस्डेक 1.3% और S&P 1.2% गिरा। मगर US फ्यूचर्स में वापस रैली हुई है। सोने-चांदी में दबाव दिखा है। सोना $4250 और सिल्वर $68 के नीचे फिसली है। कच्चे तेल में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। ब्रेंट $78 पर है।
आज के संकेत
आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का दिन है। बाजार में मोमेंटम काफी मजबूत है। कल हम दिन के हाई पर बंद हुए और बैंक निफ्टी ने लीड किया।
बाजार: क्या ये नई तेजी की शुरुआत है?
निफ्टी ने 26,300 पर डबल टॉप बनाया था। सितंबर 2024 और जनवरी 2026 में हम करीब 26,300 तक गए थे। मगर मजे की बात ये कि दोनों बार करेक्शन में बॉटम एक ही रहा। मार्च 2025 में भी और मार्च 2026 में भी बॉटम बना। यहां से वापस 26,300 का रास्ता खुला है। बाजार ने इतनी बड़ी FII बिकवाली के बावजूद अपने लो नहीं तोड़े हैं। अब यहां से बाजार को अर्निंग्स में फेवरेबल बेस इफेक्ट मिलेगा। हो सकता है Q1 में कुछ दिक्कत आए क्योंकि ब्रेंट $100 के ऊपर रहा। मगर बाजार अब इस फैक्टर को पचा चुका है।
Q2 से नतीजों में तेज रिकवरी की उम्मीद रहेगी, क्योंकि बेस इफेक्ट अब हमारे फेवर में काम करेगा। FIIs की बिकवाली भी काफी हद तक हो चुकी है। अगर बाजार में मोमेंटम आया तो खरीदारी भी आ सकती है। ऐसा नहीं है कि इन 2 सालों में बाजार पूरा निगेटिव रहा। इन 2 सालों में भी चुनिंदा शेयरों में 50-200% रिटर्न मिले हैं। यहां से शायद वापस एक ब्रॉड बेस्ड रैली की भी शुरुआत हो सकती है।
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बाजार: क्या हो रणनीति?
बाजार में अपनी रणनीति को अब थोड़ा बदलना होगा। यह बाजार डे ट्रेडर से ज्यादा पोजिशनल ट्रेडर को रिवॉर्ड कर रहा है। हर घंटे के हर 100 अंक के मूव पकड़ने का लालच मत रखिए। बड़ा ट्रेंड पकड़िए और उसके साथ बने रहिए। पूरे मार्च में हमने निगेटिव नजरिया रखा और प्ले भी किया। पूरे अप्रैल में पॉजिटिव नजरिया लिया और स्टॉक स्पेसिफिक नजरिया रखा। मई में लगातार दोनों तरफ के मौके ढूंढे गए और जून में लगातार सिर्फ पॉजिटिव नजरिया रहा है। अपने फायदे वाले सौदों को पकड़ के रखिए और SL के साथ कैरी कीजिए। हर 5% के मूव पर अपने ट्रेलिंग SL को ऊपर ले आएं।
PSU बैंक,ऑटो,रियल एस्टेट,NBFCs अभी भी सबसे मजबूत हैं। इसके अलावा IT में भी अब डबल बॉटम के संकेत मिले हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप में एक अलग ही बुल मार्केट चल रही है। अभी भी काफी अच्छे शेयर 200 DMA के आसपास मिल जाएंगे। पोर्टफोलियो में से अपने बड़े अंडरपरफॉर्मर्स को अब हटाइए।
निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट जोन 23,950-24,000 पर और बड़ा सपोर्ट जोन 23,800-23,850 पर है। मौजूदा लॉन्ग सौदों के लिए 23,950 का क्लोजिंग और 23,850 का इंट्राडे SL रखें। नए लॉन्ग सौदों के लिए खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 23,950-24,050 है। SL 23,850 पर रखें। निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,100-24,150 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24,200-24,250 पर है। अगर निफ्टी 24,250 पार हो तो SL ट्रेल करके 24,100 पर लाएं। फिलहाल निफ्टी में कोई बिकवाली का ट्रेड नहीं है।
बैंक निफ्टी पर स्ट्रैटेजी
बैंक निफ्टी में हमारा एकतरफा पॉजिटिव नजरिया रहा है। 52,800 से सिर्फ लॉन्ग रहने की सलाह रही है और हर रैली पर स्टॉप लॉस को ऊपर लाया गया है। कल तक ट्रेलिंग स्टॉप लॉस 56,800 पर था। अब क्लोजिंग बेसिस पर 57,200 और इंट्राडे में 57,000 का SL रखें। 57,200-57,400 तक की कोई भी गिरावट में खरीदारी करें,SL 57,000 पर रखें।
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