LPG Price Today: घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के ताजा रेट जारी, आपके शहर में कितनी है कीमत?

LPG Price Today: एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की खबर है। आज घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। 7 जून को आखिरी बार घरेलू सिलेंडर में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। वहीं, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में पहले ही 42 रुपये से 53.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। सबसे खास बात यह है कि युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू सिलेंडर की कीमतों में सिर्फ दो बार इजाफा हुआ है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर लगातार महंगा होता गया है।

आज घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम (रुपये में)

शहरघरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किग्रा)कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किग्रा)
नई दिल्ली942.003,113.50
कोलकाता968.003,255.50
मुंबई941.503,067.50
चेन्नई957.503,283.00
गुरुग्राम950.503,130.00
नोएडा939.503,113.50
बेंगलुरु944.503,198.00
भुवनेश्वर968.003,290.00
चंडीगढ़951.503,136.00
हैदराबाद994.003,367.00
जयपुर945.503,141.00
लखनऊ979.503,236.00
पटना1,031.503,400.00
तिरुवनंतपुरम951.003,152.00

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से राहत

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के चलते अब होर्मुज से जहाजों का आवागमन आसान हो जाएगा। हालांकि, ये इतनी जल्दी नहीं होगा लेकिन आने वाले समय में स्थिति एक बार फिर से सामान्य हो सकती है। मौजूदा समय में भारत को एक घरेलू LPG सिलेंडर पर 1600 रुपये का खर्च पड़ रहा है। लेकिन देश में इसे 1000 रुपये के करीब बेचा जा रहा है। यानी सीधा-सीधा लगभग 600 रुपये का नुकसान कंपनियों को हो रहा है। वहीं, सप्लाई के सामान्य होने के बाद कीमतों में गिरावट हो सकती है।

आपको बता दें कि भारत अपनी LPG की जरूरत का लगभग 90 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता रहा है। लेकिन पश्चिमी देशों में युद्ध शुरू होने के बाद भारत की सप्लाई पर असर पड़ा है। जिस वजह से देश में LPG सिलेंडर की किल्लत महसूस होने लगी। वहीं, सरकार ने इस समस्या से बचने के लिए घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन को शुरू किया। मौजूदा समय में 25 दिन में शहरों में और 45 दिन में गावों में LPG सिलेंडर की बुकिंग की जा सकती है।

यह भी पढ़ें: Petrol Diesel Price Today: कहां सबसे महंगा और सबसे सस्ता मिल रहा पेट्रोल-डीजल? जानिए आज के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: कहां सबसे महंगा और सबसे सस्ता मिल रहा पेट्रोल-डीजल? जानिए आज के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: देशभर में शनिवार, 20 जून को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लगातार दूसरे दिन ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे वाहन चालकों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है। गौरतलब है कि मई महीने में तेल कंपनियों ने चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे।

आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें (रुपये प्रति लीटर)

शहरपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)
नई दिल्ली102.1295.20
मुंबई111.1897.83
कोलकाता113.4799.82
चेन्नई107.7799.55
गुरुग्राम102.7795.44
नोएडा102.1295.56
बेंगलुरु110.9398.80
भुवनेश्वर109.92100.92
चंडीगढ़98.1086.09
हैदराबाद115.69103.82
जयपुर112.6697.78
लखनऊ102.0595.55
पटना113.3599.36
तिरुवनंतपुरम115.49104.40

एक नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार ने अपनी हालिया पखवाड़ा समीक्षा में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स पहले जैसा ही रखा है। 16 जून से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि ATF के एक्सपोर्ट पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बनी हुई है।

सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां?

देश में सबसे महंगा पेट्रोल हैदराबाद में बिक रहा है, जहां इसकी कीमत 115.69 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है, जहां पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

वहीं, डीजल की सबसे ज्यादा कीमत तिरुवनंतपुरम में है, जहां एक लीटर डीजल 104.40 रुपये में बिक रहा है। इसके बाद हैदराबाद में डीजल की कीमत 103.82 रुपये प्रति लीटर है।

कहां सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल?

दूसरी ओर, चंडीगढ़ में पेट्रोल सबसे सस्ता है, जहां इसकी कीमत 98.10 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये प्रति लीटर और नई दिल्ली में 102.12 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जो कई बड़े शहरों की तुलना में कम है।

अगर सबसे सस्ते डीजल की बात करें, तो चंडीगढ़ सबसे आगे है, जहां एक लीटर डीजल की कीमत 86.09 रुपये है।

यह भी पढ़ें: बारिश की कमी चीनी प्रोडक्शन पर डाल सकती है असर, लेकिन यह एक कारण सेक्टर पर आगे बनाए रखेगा फोकस

ट्रंप का सर्टिफिकेट, अब बाजार बनना तय

सोचें, डोनाल्ड ट्रंप पर। अमेरिका का कैसा मजाक बना डाला है। चाहे जो कर रहे हैं मगर लोकतंत्र के तकाजे में कोई कुछ भी नहीं कर सकता। ईरान ने अमेरिका को हैसियत दिखा दी है। मेरा मानना है कि साठ दिनों  बाद ईरान ही खाड़ी का मालिक होगा। दुनिया का संकट बना रहेगा। बावजूद इसके ट्रंप के झूठ, झांसे हॉट केक की तरह हैं। इसलिए भारत में भी उनका यह कहा अमृत वाक्य है कि नरेंद्र मोदी एक “टफ नेगोशिएटर” हैं। मोदी देखने में देवदूत जैसे लगते हैं और वे राजनीति में “किलर” हैं।

सवाल है क्यों ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह ‘चरित्र प्रमाणपत्र’ दिया? इसलिए क्योंकि दुनिया जानती है कि ज्योंहि प्रमाणपत्र मिलेगा त्योंहि मोदी और उनका मीडिया हिंदू भक्तों के बीच ट्रंपजी के कहे का घर-घर पहुंचा देगा। देखों हमारे भगवान को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी देवदूत जैसा कहा!

ध्यान रहे, ट्रंप अपने आपको धूर्त, मास्टर सौदेबाज कहते हैं। उन्हे हर किसी को बेवकूफ बनाना आता है। वे प्रोपर्टी डीलर हैं। मिट्टी को भी सोने के भाव बेच सकते हैं। अमेरिका को जैसा अभी चूना लगा रहे हैं, वैसा एक भी राष्ट्रपति अमेरिकी इतिहास में नहीं हुआ है। ऐसे व्यापारी, सौदेबाज की पहली कला यह होती है कि सौदा करने से पहले सामने वाले को उसकी कीमत से थोड़ा ज्यादा महान महसूस करा दिया जाए।

ट्रंप ने आज ही लिखा है कि वे अपने आपको हिटलर, स्टालिन, माओं, सिकंदर आदि से बड़ा शक्तिमान मानते हैं। उन्हे भी इतिहास ऐसे ही याद करेगा। ट्रंप और नरेंद्र मोदी में फर्क यह है कि ट्रंप का लक्ष्य पृथ्वी के इतिहास का नंबर एक युगपुरुष होना है वही नरेंद्र मोदी को कलियुगी भारत का सबसे बड़ा देवता कहलाना है। एक की महानता का लेवल पृथ्वी का आधुनिक इतिहास है। वही दूसरे का कलियुगी हिंदुओं का नंबर एक भगवान बनना है। बारह साल, बारह युग! भारत में कभी चंद्रशेखर नाम के एक प्रधानमंत्री हुआ करते थे। उनके चेलों ने चालीस दिन बनाम चालीस साल के ऐसे नारे बनाए थे कि देश भर के चिरकूट उनका  कीर्तन करते थे।

भटक गया हूं। असल मुद्दा है कि जल्द भारत का बाजार अमेरिकी का कैप्टिव बाजार होगा। ट्रंप अमेरिका से भारत को पशुओं की खुराक भिजवाएँगे तो सोयाबीन, मक्का से लेकर वे सामान भी आएंगे, जिससे भारत के विदेश व्यापार की कंगाली में आटा और गीला होगा। अब अमेरिका का बनवाया समझौता आसानी से लापतागंज में बिकेगा। 140 करोड़ ग्राहकों के बाजार में अमेरिका की उपस्थिति इसलिए बड़ी होनी है क्योंकि अमेरिका यह भी वचन ले रहा है कि इतने वर्षों में इतना अमेरिकी सामान भारत को खरीदना ही है। सोचें, एक के बाद एक मुक्त व्यापार समझौतों की बाढ़ में फंसता बाजार। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड, अमेरिका से व्यापार (खरीद) के सौदे ही सौदे तो वही चीन बिना सौदे के पहले से ही सबसे बड़ा विक्रेता।

पता है व्यापारिक घाटे में सबसे बड़ा घाटे वाला कौन सा देश है? भारत। यों नंबर एक पर अमेरिका है। मगर वह इसलिए है क्योंकि अमेरिकी इतने अमीर है कि उन्हे काले हाथ करके सामान बनाना पसंद नहीं। अमेरिकियों की कमाई के असल जरिए दूसरे हैं। वह डॉलर छापता है। दुनिया को पूंजी, तकनीक देता है। अब वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी मालिक है जिससे उसे डालर मिलेगा तो भारत की आईटी, सेवा क्षेत्र की डालर कमाई भी लापता होनीं है।

ट्रंप के मजाक की गंभीर व्याख्या

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन शहर में जी 7 बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्यादातर बातें मजाक में कहीं। अमेरिका मीडिया ने इसे इसी रूप में लिया। जब ट्रंप ने कहा कि भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसके बचाव में आएगा। तो उन्होंने साथ ही नरेंद्र मोदी की ओर से इशारा करके कहा कि मोदी अगर सत्ता में रहे तो अमेरिका बचाने आएगा। अगर कोई दूसरा रहा तो फिर सोचना होगा।

यह मोदी की अबकी बार ट्रंप सरकार वाली कूटनीति का जवाब था। जैसे मोदी ने अमेरिका के लोगों से ट्रंप को चुनने को कहा था वैसे ही ट्रंप ने भारत के लोगों से मोदी को चुनने को कह दिया। हालांकि जब मोदी नारा लगा कर आए थे तब अमेरिका के लोगों ने ट्रंप को हरवा दिया था।

बहरहाल, अमेरिका मीडिया में जो रिपोर्ट छपी या जो वीडिया आए है उसमें रिपोर्टर्स कह रहे थे कि ट्रंप ने मजाक किया। फॉक्स न्यूज की वीडियो में कहा गया, ‘प्रेसिडेंट ट्रंप क्रैक्स ए जोक अबाउट अमेरिकाज कमिटमेंट टू डिफेंड इंडिया ऐज लॉन्ग ऐज प्राइम मिनिस्टर मोदी इज स्टिल लीडिंग द कंट्री…’। लेकिन भारत में मीडिया ने इसे बहुत गंभीरता से लिया। ब्रह्मा चैलानी ने ट्विट करके यह फॉक्स न्यूज का वीडियो साझा किया और कहा कि इस मजाक को भारतीय मीडिया ने भारत की रक्षा करने के अमेरिका के पवित्र संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।

भारतीय मीडिया को लेकर ट्रंप का मजाक और भी ऐतिहासिक था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक भारतीय पत्रकार ने अपने सवाल की शुरुआत यह कहते हुए की, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौता करके आप एक इतिहास बनाने जा रहे हैं..’। इस पर ट्रंप ने मोदी की ओर देख कर कहा कि यह रिपोर्टर मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मोदी से कहा कि आपके वाले रिपोर्टर्स हमारे से बहुत अच्छे हैं!

ईरान बोला- समझौता टूटा तो अमेरिका जिम्मेदार होगा:लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराए वॉशिंगटन; हिजबुल्लाह बोला- इजराइल का कब्जा मंजूर नहीं

ईरान ने कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। अगर समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में दिया। इधर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन इजराइली कब्जे को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम है। संगठन लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और विदेशी दबदबे को खारिज करता है। कासिम ने कहा, अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता टली: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली पहली औपचारिक वार्ता टाल दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में लगातार इजराइली हमलों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। 2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 लोगों की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर रात से हुए इजराइली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ी: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है। हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। 4. ट्रम्प बोले- ईरान को एक पैसा भी नहीं मिलेगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका मजबूरी में बातचीत की मेज पर नहीं आया, बल्कि ईरान खुद आया है। उन्होंने कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका से एक पैसा भी नहीं मिलेगा। 5. पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और अगले दौर की बातचीत को कूटनीति और संवाद के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ईरान-अमेरिका पीस डील में नया ट्विस्ट… ट्रंप बोले- हम एक पैसा नहीं देंगे, दस सेंट भी नहीं; ईरान को जल्दबाजी थी हमें नहीं…

अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे टकराव को खत्म करने और बातचीत का नया रास्ता खोलने के लिए 14-पॉइंट वाले समझौते पर दस्तखत होने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान मजबूरी में वॉशिंगटन के पास आया था और जोर देकर कह

Read More

क्या अमेरिका के इस टॉप साइंटिस्ट ने वुहान लैब को दिए थे पैसे, जहां से फैली थी Covid-19 महामारी? इस ‘खुलासे’ से दुनिया में मचा तहलका!

अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।

चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन “पहले कभी न देखे गए” खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:

खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।

सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।

‘डीप स्टेट’ का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया

गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।

पीछे से घुमाई पूरी बाजी

बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।

“संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ”

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।

गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— “क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?” तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ

तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, “कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।”

गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। ईरान ने कहा कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के तहत इस अहम जलमार्ग से कमर्शियल शिपिंग जारी है। सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन दावों को “बेबुनियाद” और गलत बताया।

बघाई ने स्ट्रेट के बंद होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद, तेहरान ने सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही “फिलहाल सामान्य रूप से चल रही है”।

दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ईरान की नौसेना ने अचानक एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा।

दावा- ईरान ने दी थी खुली धमकी!

इसमें बताया गया कि समुद्री रेडियो चैनलों पर ईरान के सबसे खतरनाक सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता हुआ था, अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहा है।

ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “क्योंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना और अमेरिकी आतंकवादी ताकतों का फारस की खाड़ी से बाहर निकलना हमारी मुख्य शर्तें थीं, इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद रहेगा। सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा (यानी उड़ा दिया जाएगा)।”

आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी इसे बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान पर पहुंच गए थे।

लेबनान पर इजरायल के हमले से नाराज हुआ ईरान!

बताया गया कि ईरान के इस गुस्से के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका-ईरान डील के तहत यह माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रुक जाएगी। लेकिन कल आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 33 घायल हो गए।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना “जब तक जरूरी होगा” लेबनान में ही रहेगी। वहीं, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव (इजरायल) में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।”

अमेरिका का दावा: “हमने तो रास्ता खोल दिया था”

दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ही ऐलान किया था कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है।

यहां तक कि समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी ‘AXSMarine’ के मुताबिक, इस समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी संख्या थी। लेकिन अब ईरान के इस नए कदम ने पूरी दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध और भयंकर आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

ट्रम्प बोले-मेलानी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं:इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। ट्रम्प ने दावा किया कि G7 समिट के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। ट्रम्प ने इतालवी टीवी चैनल La7 से बातचीत में कहा, “वह मेरे साथ फोटो चाहती थीं। मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।” इस पर मेलोनी ने कहा, विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अगले हफ्ते का अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के गंभीर और अपमानजनक शब्द सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि पूरे इटली का अपमान हैं। G7 में साथ दिखे थे ट्रम्प और मेलोनी फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प और मेलोनी को एक सोफे पर बैठकर लंबी बातचीत करते देखा गया था। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच रिश्ते सुधरने के संकेत भी मिले थे, लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ गया है। मेलोनी ट्रम्प की पुरानी समर्थक रही हैं और 2025 में उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली इकलौती यूरोपीय नेता थीं। हालांकि, इस साल ईरान युद्ध और पोप लियो को लेकर ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आने लगे थे। ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने कहा कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के ऐतिहासिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के ऐसे बयानों ने पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान खुद अमेरिका को होगा। मोदी और मेलोनी की दोस्ती भी चर्चा में इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के करीबी संबंध भी चर्चा में हैं। दोनों नेता हाल के G7 सम्मेलन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ नजर आए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी दोस्ती को #Melodi नाम से भी लोकप्रियता मिली है। फ्रांस के एवियां में आयोजित 2026 G7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने मजाक में नरेंद्र मोदी से कहा था कि दोनों इंस्टाग्राम के सबसे चर्चित जोड़े हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की रोम यात्रा के दौरान उन्होंने मेलोनी को भारत की मशहूर मेलोडी टॉफियां भी गिफ्ट की थीं। इस बातचीत से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और इसे 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। मेलोनी ने सार्वजनिक तौर पर नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया है। दोनों नेताओं की अनौपचारिक तस्वीरें और सेल्फी सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहती हैं।

पीएम मोदी को बड़े ग्लोबल लीडर के तौर पर क्यों पसंद करते हैं ट्रंप? खुद कही ये बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के उन नेताओं में शामिल बताया है, जिनकी वह सबसे ज्यादा सराहना करते हैं। नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर बात करते हुए ट्रंप ने मोदी का नाम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लिया। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद समाचार वेबसाइट Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ अपने संबंधों और वैश्विक राजनीति को लेकर अपने विचार साझा किए। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वे किन विश्व नेताओं की सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं, तो ट्रंप ने भारत और चीन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम लिया।

शी जिनपिंग और पीएम मोदी का लिया नाम

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन विश्व नेताओं में शामिल बताया, जिनकी वह सबसे अधिक प्रशंसा करते हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग को पूरी तरह काम पर केंद्रित नेता बताया, जबकि नरेंद्र मोदी को बेहद मजबूत और सख्त नेतृत्व वाला नेता कहा। हाल के दिनों में ट्रंप की ओर से पीएम मोदी के बारे में की गई सकारात्मक टिप्पणियों में यह एक और महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और मोदी की 16 महीने से अधिक समय बाद पहली आमने-सामने मुलाकात हुई थी।

भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर

बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में व्यापार, प्रतिबंधों और ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे मुद्दों पर कुछ मतभेद जरूर रहे हैं, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा है। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। इससे ज्यादा करीबी रिश्ते शायद ही हो सकते हैं। हमारे देशों के बीच मजबूत साझेदारी है और इसकी शुरुआत हम दोनों नेताओं से होती है।” ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सख्त और कुशल वार्ताकार भी बताया। उन्होंने अपनी पहले की टिप्पणी दोहराते हुए कहा कि मोदी बातचीत के दौरान मजबूती से अपनी बात रखते हैं। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

ट्रेड डील पर कही ये बात

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के काफी करीब है। उन्होंने इस मौके पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत और नेतृत्व क्षमता की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली है और वह देखने में बहुत शांत और सौम्य लगते हैं। हालांकि, बातचीत और फैसलों के मामले में वह काफी मजबूत और सख्त नेता हैं। ट्रंप के अनुसार, मोदी अपनी बात मजबूती से रखते हैं और सामने वाले को अपने नेतृत्व शैली से प्रभावित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का शांत स्वभाव और दृढ़ नेतृत्व उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।

इस सवाल से किया इनकार

Axios का यह इंटरव्यू मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों के बाद डोनाल्ड ट्रंप की नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने दुनिया के कई नेताओं के साथ अपने संबंधों और अनुभवों पर भी चर्चा की। हालांकि, जब उनसे उन नेताओं के बारे में पूछा गया जिन्हें वह कमजोर मानते हैं, तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस बात पर भी खेद जताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन G7 समूह का हिस्सा नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से वर्साय पैलेस में दिए गए स्पेशल स्टेट डिनर का भी जिक्र किया।