ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब:ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा। RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

Barun Sobti: ‘वह अजीब तरह से बात कर रहे हैं…’, फराह खान के व्लॉग में बरुन सोबती को देखकर फैंस हुए परेशान

Barun Sobti: फराह खान का कुकिंग व्लॉग एक बार फिर से चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वजह सिर्फ़ खाना नहीं है। फ़िल्ममेकर ने हाल ही में अपने YouTube चैनल पर एक्टर बरुण सोबती को बुलाया, जिन्हें टीवी फ़ैंस ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ के अर्नव सिंह रायजादा के तौर पर जानते और पसंद करते हैं। जहां कई फ़ैंस एपिसोड में अपने “चाइल्डहुड क्रश” को देखकर बहुत खुश थे, वहीं कुछ दर्शकों ने व्लॉग के दौरान एक्टर के बर्ताव को लेकर भी तरह-तरह की बातें शुरू कर दीं।

बरुण, जिन्होंने सालों में टेलीविज़न और OTT पर अपनी ज़बरदस्त फ़ैन-फ़ॉलोइंग बनाई है, फ़राह के कुकिंग चैनल पर अपनी पत्नी पश्मीन मनचंदा के साथ नज़र आए। वीडियो के आते ही फ़ैंस कमेंट सेक्शन में उमड़ पड़े। कई लोगों ने एक्टर को इतने नॉर्मल माहौल में देखकर पुरानी यादें ताज़ा कीं और उत्साह ज़ाहिर किया।

बरुण की मौजूदगी की वजह से इस एपिसोड ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया। कई फ़ैन्स ने माना कि थंबनेल में उन्हें देखते ही उन्होंने वीडियो पर क्लिक कर दिया। एक यूज़र ने कमेंट किया, “किसी वीडियो पर इतनी जल्दी कभी क्लिक नहीं किया! फ़राह मैम, हमारे बचपन के क्रश को अपने चैनल पर लाने के लिए आपका शुक्रिया!”

हालांकि, अच्छे कमेंट्स के साथ-साथ कुछ दर्शकों ने यह भी कहा कि वरुण व्लॉग में कुछ अलग लग रहे थे। कुछ यूज़र्स ने एपिसोड के दौरान उनकी एनर्जी और बातचीत के तरीके पर सवाल उठाए। एक ने लिखा, “चाहे उन्हें कुछ भी हुआ हो, हमें व्लॉग बहुत पसंद आया।”

एक और दर्शक ने पूछा, “क्या उन्होंने वीड लिया है?” वहीं एक कमेंट में लिखा था, “फराह खान के शो पर पहली बार किसी गेस्ट की एनर्जी इतनी अजीब लगी। एक तीसरे यूज़र ने लिखा, “उनके साथ कुछ तो गड़बड़ है। वे अजीब तरह से बात कर रहे हैं।” इन कमेंट्स के बाद एपिसोड को लेकर और भी चर्चा होने लगी। कुछ दर्शक इस बात पर बहस करने लगे कि क्या वरुण कैमरे पर बस रिलैक्स्ड और कैज़ुअल थे या फिर उनका व्यवहार वाकई अजीब लग रहा था।

वीडियो में बरुण की पत्नी पश्मीन मनचंदा भी दिखीं और कुछ दर्शकों को लगा कि वह व्लॉग के दौरान स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थीं। एक यूज़र ने लिखा, “पत्नी के लिए बहुत बुरा लगा, यकीन नहीं होता कि उन्होंने व्लॉग कैसे बनाया। एक और यूज़र ने कमेंट किया, “मुझे उनकी पत्नी अच्छी लगीं कि वह स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थीं।”

इन अटकलों के बावजूद, कई फ़ैन्स ने बरुण का बचाव किया और इस एपिसोड की तारीफ़ की क्योंकि इसमें उन्हें एक्टर की ज़िंदगी की एक निजी और बिना बनावट वाली झलक देखने को मिली। कई लोगों के लिए, फ़राह के चैनल पर उनका दिखना ही उनके टीवी के दिनों और दर्शकों के बीच उनके ज़बरदस्त क्रेज़ की यादें ताज़ा करने के लिए काफ़ी था।

बरुण सोबती भारतीय टेलीविज़न के सबसे पसंदीदा एक्टर्स में से एक बने हुए हैं। उन्होंने 2009 में ‘श्रद्धा’ शो से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की और बाद में ‘दिल मिल गए’ और ‘बात हमारी पक्की है’ में नज़र आए। हालांकि, 2011 में उनका करियर तब पूरी तरह बदल गया जब उन्होंने ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ में सनाया ईरानी के साथ अर्णव सिंह रायज़ादा का रोल निभाया।

यह रोमांटिक ड्रामा बहुत सफल रहा और बरुण घर-घर में पहचाने जाने लगे। सनाया ईरानी के साथ उनकी जोड़ी को न सिर्फ़ भारत में बल्कि विदेशों में भी दर्शकों का बहुत प्यार मिला। शो खत्म होने के कई साल बाद भी, बरुण की पहचान अर्णव के किरदार से जुड़ी हुई है, जो भारतीय टेलीविज़न के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक लीड किरदारों में से एक है।

टेलीविज़न पर सफलता पाने के बाद, बरुण ने फ़िल्मों और स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। उन्होंने ‘मेन और मिस्टर राइट’ से फ़िल्मों में डेब्यू किया और बाद में ‘तू है मेरा संडे’ और ’22 यार्ड्स’ में नज़र आए। OTT पर, कई प्रोजेक्ट्स के ज़रिए उन्हें नई पहचान और तारीफ़ मिली, जिससे वे अपनी रोमांटिक टेलीविज़न वाली छवि से आगे बढ़ पाए। वे ‘तन्हाइयां’, ‘द ग्रेट इंडियन डिसफंक्शनल फ़ैमिली’, ‘असुर’, ‘द मिसिंग स्टोन’, ‘हलाहल’, ‘बदतमीज़ दिल’, ‘कोहरा’ और ‘रात जवान है’ जैसे शोज़ में नज़र आए।

‘असुर’ में निखिल नायर और ‘कोहरा’ में अमरपाल गरूंडी के तौर पर उनके काम को दर्शकों और क्रिटिक्स से बहुत तारीफ़ मिली। इन दोनों किरदारों ने स्ट्रीमिंग स्पेस में गहरे और कई परतों वाले रोल निभाने में सक्षम एक्टर के तौर पर बरुण की जगह पक्की कर दी। हालांकि फ़राह खान के व्लॉग में उनके हालिया अपीयरेंस पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं, लेकिन इसने फ़ैन्स को यह भी याद दिलाया है कि अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों के बीच उन्हें कितना प्यार मिलता है।

“मुझसे फोटो के लिए गिड़गिड़ाई थीं मेलोनी”… ट्रंप के दावे पर भड़कीं इटली की पीएम, कहा- ‘हम कभी भी भीख नहीं मांगते’

अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”

इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”

मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”

ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”

मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”

इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा

ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।

इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”

कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?

आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।

लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?

दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।

हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

 

सीएम योगी ने 4901.65 करोड़ के कार्य प्रस्तावों को दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को महज 13 दिनों बाद फिर गोंडा का दौरा किया। उन्होंने अपने दो घंटे के कार्यक्रम के दौरान 33 विधानसभा क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन भी देखा। इसमें प्रमुख रूप से मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ धाम संग अन्य धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी को बेहतर करने के निर्देश दिए। 

सीएम योगी ने देवीपाटन मंडल के मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्गों के विकास को मंजूरी दी। कुल 4901.65 करोड़ रुपए की एक हजार से अधिक विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को स्वीकृति दी। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव सभागार में लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की। साथ ही नई कार्य योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन किया।

इस दौरान देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती की सड़क व संपर्क मार्ग परियोजनाओं की प्रगति परखी। इसके साथ बस्ती मंडल के बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण, संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण और पुल, सेतु से जुड़े निर्माण कार्यों पर मंथन किया। मुख्यमंत्री को देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क, पुल, सेतु और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभिन्न विकास परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गड्ढामुक्त अभियान की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 810 कामों को मंजूरी दी। इसमें करीब 1472.83 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अंचलों में 1602 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाकर बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। करीब पचास से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण व दुरुस्तीकरण किया जाएगा।

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की करीब 50-50 करोड़ की विकास परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण देखा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात के लिए सड़क मार्गों के दुरुस्तीकरण पर केंद्रित प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ देखा। इसमें आधारभूत संरचना के कार्य भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने पिछड़े क्षेत्रों व आकांक्षात्मक ब्लॉक क्षेत्रों में जारी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

उन्होंने ने दो राज्य राजमार्गों, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी, 81 लघु सेतुओं, और सात बड़े पुलों को बनाने की मंजूरी दी। शहरी क्षेत्रों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास मार्गों, ओवरब्रिज आदि के कामों को मंजूरी दी। देवीपाटन मंडल में सड़क सुरक्षा के कार्यों को कराने का कभी निर्देश दिया। इसके साथ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 12 हेलीपैड के निर्माण कार्यों को भी मंजूरी दी।

उन्होंने हरदौपट्टी संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, कटरा बाजार के पंडितपुरवा नहवा परसौरा वाया खजुहा संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, सुभानपुर बेलवानोहर मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य, हट्टीपुरवा से कुढ़ियांव संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, चांदपुरडीहा संपर्क मार्ग निर्माण कार्य आदि की अद्यतन स्थिति पर भी जानकारी ली।

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अमेरिका-ईरान समझौते के बाद एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ पहुंचा गुजरात

अमेरिका और ईरान में हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है और जहाजों की आवाजाही भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इस बीच एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ होर्मुज स्ट्रेट को पार करके गुजरात के दाहेज पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। तीन महीने से ज्यादा के इंतजार के बाद, इसने 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का कार्गो पहुंचाया है। 

जहाज के ट्रैकिंग डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक यह जहाज बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच खाड़ी इलाके में खड़ा था। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह शुक्रवार सुबह करीब 7:32 बजे दाहेज टर्मिनल पर पहुंचा।

एलएनजी कार्गो को कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल पर लोड किया गया। टैंकर 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी ले जा रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक संवेदनशील समय के दौरान भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए एक बड़ी डिलीवरी है।

जहाज दिशा को शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम के तहत चलाया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के लिए किराए पर लिया गया है। जहाज का होर्मुज स्ट्रेट से सफल ट्रांजिट ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे दुनिया भर के मुख्य शिपिंग लेन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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सूत्रों ने बताया कि टैंकर अपनी यात्रा पूरी करने से पहले तीन महीने से ज्यादा समय तक खाड़ी क्षेत्र में रहा था। तेल और गैस शिपमेंट के लिए दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक, होर्मुज स्ट्रेट से इसका सुरक्षित गुजरना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना गया है।

भरूच में दाहेज एलएनजी टर्मिनल भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस इंपोर्ट हब है और देश के नेचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता है।

दिशा के आने से एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने और इंडस्ट्रियल और घरेलू खपत के लिए स्थिर ऊर्जा सप्लाई को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव के बीच एलएनजी कैरियर के सुरक्षित आने से भारत के ऊर्जा क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स को राहत मिली है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक जरूरी रास्ता बना हुआ है और इस इलाके में कोई भी रुकावट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन पर प्रभाव डाल सकती है।

इस यात्रा का सफलतापूर्वक पूरा होना भारत में बिना रुकावट ऊर्जा इम्पोर्ट के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व को दिखाता है।

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स्लीवलेस ड्रेस पहनी, ईरानी सिंगर को 74 कोड़ों की सजा:2 साल तक देश छोड़ने पर भी बैन, बिना हिजाब के 2024 में गाना गाया था

ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। इस दौरान वह बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में थीं। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने में 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखीं परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती ईरानी महिलाएं ईरान में महिलाओं पर कई सामाजिक प्रतिबंध हैं। कानून के अनुसार वे सार्वजनिक जगह पर अकेले गाना नहीं गा सकतीं और बिना हिजाब लोगों के सामने नहीं आ सकतीं। गायिका परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में परफॉर्म कर इन नियमों का खुलकर विरोध किया। परस्तू पहली बार 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आई थीं। उन पर इन प्रदर्शनों के समर्थन में गाना गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की और उनके घर की तलाशी भी ली थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 साल की महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली ————————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान पीस डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें

ईरानी सिंगर को 74 कोड़े की सजा:2 साल देश छोड़ने पर बैन; 2024 में बिना हिजाब स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था

ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखी परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती महिलाएं ईरान के कानून के मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अकेले गाना नहीं गा सकतीं और न ही बिना हिजाब लोगों के सामने आ सकती हैं। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों के साथ परफॉर्म कर इन लंबे समय से लागू प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी। वीडियो वायरल होने के बाद परस्तू अहमदी और उनके साथ मौजूद कुछ सिंगर्स को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। परस्तू 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पहली बार चर्चा में आई थीं। तब उन पर हिजाब विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था और उनके घर की तलाशी भी ली गई थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। घंदेहरी ने कहा कि ईरानी सरकार दुनिया के सामने खुद को उदार और सुधारवादी दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन कलाकारों के खिलाफ ऐसे कदम उसकी असली तस्वीर सामने लाते हैं। उनके मुताबिक, सरकार जो दिखाती है और जमीन पर जो होता है, दोनों में बड़ा फर्क है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। खजाएली का कहना है कि कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या आम लोगों को कोड़े मारने जैसी सजा सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का मामला भी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मानवाधिकार संगठन कोड़ों की सजा को न्यायिक दंड नहीं, बल्कि यातना और अमानवीय व्यवहार मानते हैं। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 वर्षीय महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली

Varun Beverages का शेयर 23% चढ़ सकता है, सीएलएसए ने दिया 654 रुपये का टारगेट प्राइस

वरुण बेवरेजेज का शेयर 23 फीसदी चढ़ सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है। कंपनी के शेयर में 19 जून को तेजी दिखी। 12 बजे यह 0.22 फीसदी उछाल के साथ 532.70 रुपये पर चल रहा था।

654 रुपये तक जा सकता है शेयर

CLSA का कहना है कि वरुण बेवरेजेज के शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। उसने शेयर के लिए 654 रुपये का प्राइस टारगेट दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि वरुण बेवरेजेज ने कैलपिस ब्रांड के लिए जापान के असाही ग्रुप होल्डिंग्स के साथ समझौता किया है। इससे वरुण बेवरेजेज के पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी।

असाही ग्रुप से समझौते का होगा फायदा

वरुण बेवरेजेज ने 18 जून को बताया था कि उसने कैलपिस ब्रांड की मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और बिक्री के लिए असाही ग्रुप के साथ समझौता किया है। कैलपिस फर्मेंटेड मिल्क-बेस्ड बेवरेजेज है, जो जापान में 100 साल से ज्यादा समय से मौजूद है। असाही पर प्रोडक्ट डेवलपमेंट की जिम्मेदारी होगी। वह वरुण को टेक्निकल सपोर्ट भी उपलब्ध कराएगी। वरुण पर मार्केटिंग और ब्रांड मैनेजमेंट की जिम्मेदारी होगी।

मार्च तिमाही में अच्छा प्रदर्शन

सीएलएसए ने कहा है कि इस पार्टनरशिप से वरुण बेवरेजेज को अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी अपने कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार करेगी। कंपनी का प्रदर्शन मार्च तिमाही में बेहतर रहा है। इस दौरान इसका नेट प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़कर 872 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू में भी 18.3 फीसदी इजाफा हुआ।

24 एनालिस्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

वरुण बेवरेजेज को कवर करने वाले 28 एनालिस्ट्स में से 24 ने इसके शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। 4 एनालिस्ट्स ने शेयरों को होल्ड करने की सलाह दी है। बीते एक महीने में यह शेयर 8.7 फीसदी चढ़ा है। इधर, 19 जून को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। बीते पांच दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया।

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शेयर बाजार में तेजी पर लगा ब्रेक

19 जून को 12 बजे निफ्टी 0.89 फीसदी यानी 216 अंक गिरकर 23,951 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.03 फीसदी यानी 792 अंक की कमजोरी के साथ 76,626 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.68 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली। इससे पहले अमेरिका-ईरान में डील की खबर से लगातार पांच सत्रों में बाजार में तेजी दिखी थी।

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Rajesh Exports Share Price: 5% उछाल के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लगा अपर सर्किट, 5 सत्रों में 28% चढ़ा है स्टॉक

Rajesh Exports Share Price: राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 19 जून को बड़ी तेजी आई। 5 फीसदी चढ़ने के बाद शेयर में अपर सर्किट लग गया। बीते पांच ट्रेडिंग सेशंस में यह शेयर करीब 28 फीसदी चढ़ चुका है। कंपनी और इसके फाउंडर राजेश मेहता के खिलाफ सेबी के अंतरिम आदेश के बाद शेयर में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, अब शेयर तब के क्लोजिंग लेवल से करीब 11 फीसदी नीचे रह गया है।

सेबी ने 3 जून को दिया था अंतरिम आदेश

सेबी ने 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट्स उसके फाउंडर चेयरमैन के खिलाफ अंतरिम आदेश दिया था। उसके बाद लगातार 7 सत्रों में शेयर गिरा था। इससे पिछले महीने इसका भाव गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर 77.05 रुपये पर आ गया था। रेगुलेटर ने मामले की जांच पूरी होने तक राजेश एक्सपोर्ट्स और मेहता पर सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने पर रोक लगा दी है। कंपनी पर FY21 और FY25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने का आरोप है।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने आरोपों को गलत बताया

सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स की विदेश में स्थित सब्सिडियरीज के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बढ़ाकर दिखाया गया। रेगुलेटर के मुताबिक, FY21 और FY25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में उसकी सब्सिडियरीज कंपनियों की हिस्सेदारी 97-99 फीसदी थी। हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को गलत बताया है। पिछले हफ्ते कंपनी ने इस बारे में सफाई पेश की थी। उसने कहा था कि सेबी के आदेश में सिर्फ प्रारंभिक ऑब्जर्वेशन शामिल है। उसने यह भी कहा था कि उसका रेवेन्यू और फाइनेंशियल डिसक्लोजर्स सही हैं।

राजेश एक्सपोर्ट्स आरोपों का जवाब तैयार कर रही

राजेश एक्सपोर्ट्स ने यह भी कहा था कि वह सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स के साथ सेबी के आरोपों का जवाब तैयार कर रही है। उसने मनीकंट्रोल को बताया कि अलग-अलग एक्सचेंज के डिसक्लोजर्स में डेटा में जो फर्क है, उसकी वजह रिपोर्टिंग के अलग-अलग तरीके हैं। इनसे डेटा में किसी तरह की अनियमितता का संकेत नहीं मिलता है।

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इस साल 45 फीसदी गिरा है कंपनी का शेयर 

राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर इस साल अब तक 45 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इधर, 19 जून को शेयर बाजारों में 5 दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया। 11:20 बजे निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 212 अंक गिरकर 23956 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1 फीसदी की कमजोरी यानी 783 अंक गिरकर 76,624 पर चल रहा था। इससे पहले अमेरिका-ईरान में डील की खबर से शेयर बाजारों में लगातार तेजी देखने को मिली थी।

ईरान डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह

अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंटफुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे। दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं। ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुवाई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है। चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे। वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही 16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टू फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाई नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था। जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने का सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं। वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रुबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है। मार्को रुबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी। उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया। मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं। ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे। जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं। एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था। वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम। नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बीबीसी से कहा, जेडी वेंस पर जिम्मेदारी डाल देना ट्रम्प की पुरानी आदत रही है। वहीं, दूसरे सूत्र ने कहा, अगर कोई विवाद खड़ा हो जाए तो जेडी वेंस को आगे कर देना ट्रम्प के लिए कोई नई बात नहीं है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान के साथ हुआ यह ऐतिहासिक समझौता जेडी वेंस के राजनीतिक करियर के लिए एक दोधारी तलवार बन चुका है। अखबार के मुताबिक वेंस इस समय भले ही व्हाइट हाउस के सबसे शक्तिशाली संकटमोचक दिख रहे हों, लेकिन वे वास्तव में एक राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में खुद को बनाए रखने के लिए वेंस को हर हाल में अगले 60 दिनों (स्विट्जरलैंड वार्ता) में इस ईरान डील को बिना किसी विवाद के सफल बनाना ही होगा, वरना उनका ‘प्रेसिडेंशियल ड्रीम’ यहीं दफन हो सकता है। —————————— वेंस से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के बाद कौन संभालेगा अमेरिका:पहले उपराष्ट्रपति वेंस आगे थे, वेनेजुएला पर हमले के बाद विदेश मंत्री रूबियो का रुतबा बढ़ा अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ। अमेरिकी मीडिया हाउस पॉलिटिको के मुताबिक ट्रम्प ने वेनेजुएला की जिम्मेदारी पूरी तरह मार्को रूबियो को सौंप दी है। इस पूरे ऑपरेशन में रूबियो की अहम भूमिका के बाद उनकी अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावना तेजी से बढ़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…