Cyclone Murasu : आंध्र प्रदेश के तट से टकराया चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’, 120 की स्पीड से चली हवाएं; ओडिशा-तमिलनाडु में हाई अलर्ट

Cyclone Murasu : आंध्र प्रदेश के तट से टकराया चक्रवाती तूफान 'मुरासु', 120 की स्पीड से चली हवाएं; ओडिशा-तमिलनाडु में हाई अलर्ट

cyclone murasu landfall

Cyclone Murasu Update : गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclone Murasu) ने 3 नवंबर 2026 की तड़के आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दे दी है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस दौरान ओंगोल के पास 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चली। इससे तटीय इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है। खराब मौसम और चक्रवात के चलते आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 19 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।

 

लैंडफॉल और मौसम विभाग का अपडेट

मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक,  गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का लैंडफॉल रात को लगभग 1 बजे शुरू हुआ था। इस दौरान 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जो 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गईं। कावली से 60 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और बापटला से 70 किलोमीटर दक्षिण में भी इसका असर देखा गया।

 

अगले 12 घंटों के दौरान दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। समुद्री लहरों के कारण निचले इलाकों के जलमग्न होने का खतरा है। अधिकतम समुद्री लहरें बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में उठने का अनुमान है। समुद्र में लगभग 1.0-1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठने की आशंका है। निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा है।

 

मौसम विभाग द्वारा  मंगलवार सुबह जारी अपडेट के मुताबिक, गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा की ओर बढ़ा और आज भारतीय समयानुसार (IST) सुबह 03:30 से 05:30 बजे के बीच, ओंगोल के पास (अक्षांश 15.53° उत्तर और देशांतर 80.22° पूर्व के निकट) नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया, इस दौरान हवा की गति 100-110 किमी प्रति घंटा थी जो 120 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से झोंकों के रूप में चल रही थी।

आंध्रप्रदेश में अगले 2 दिन भारी बारिश की चेतावनी

4 और 5 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। 4 नवंबर को पालनाडु, प्रकाशम, कुरनूल और नंद्याल जिलों में भारी बारिश की संभावना है। 

 

ओडिशा में भी हाई अलर्ट

मौसम विभाग ने दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों में 4 नवंबर तक भारी बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार ने सोमवार को ही संवेदनशील और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था।  3 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। राज्य के दक्षिणी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

 

तमिलनाडु में भी स्कूल कॉलेज बंद

चक्रवात मुरासु के प्रभाव से तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई, तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू सहित उत्तरी तमिलनाडु के तटीय जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है। चेन्नई और तिरुवल्लूर में एहतियात के तौर पर स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।

Cyclone Murasu: आधी रात को 120 की रफ्तार से टकराएगा चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’! इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 2 मीटर तक उठेंगी समुद्री लहरें

Cyclone Murasu Landfall: देश के कई राज्यों में आज रात मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। बंगाल की खाड़ी में एक्टिव चक्रवात ‘मुरासु’ (Murasu) अब गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक, यह तूफान 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। इनके झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।

इस तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और रायलसीमा में भारी से बेहद भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश के साथ तूफानी हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं, तमिलनाडु में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा।

आधी रात को आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा तूफान ‘मुरासु’

मौसम विभाग की तरफ से 2 नवंबर 2026 को जारी वेदर बुलेटिन के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में केंद्रित था। उस समय यह आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से लगभग 160 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, चेन्नई से 180 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और ओंगोल से करीब 210 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में मौजूद था। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के दक्षिण में दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है।

तूफान के लैंडफॉल का संभावित समय 2 नवंबर की रात 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच बताया गया है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। जबकि झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

आंध्र प्रदेश के इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा

चक्रवात ‘मुरासु’ का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने कई जिलों में तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों को लेकर चेतावनी दी है।

प्रभावित होने वाले प्रमुख जिले 

– कृष्णा

– बापटला

– प्रकाशम

– एसपीएसआर नेल्लोर

– गुंटूर

– एलुरु

– एनटीआर

– पलनाडु

– पश्चिम गोदावरी

  • इन इलाकों में 2 नवंबर की दोपहर से हवाओं की रफ्तार बढ़ने की आशंका है। रात तक हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
  • 3 नवंबर की सुबह लैंडफॉल के बाद भी तेज हवाओं का असर बना रह सकता है। धीरे-धीरे इनकी रफ्तार कम होने का अनुमान है।

3 राज्यों में मूसलाधार बारिश, कुछ जगहों पर अत्यंत भारी वर्षा का अलर्ट

चक्रवात के कारण दक्षिण भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है।

  • तटीय आंध्र प्रदेश: 2-3 नवंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है।
  • रायलसीमा: 2-3 नवंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश की आशंका है।
  • तेलंगाना: इस दौरान भारी से अत्यंत भारी बारिश होगी।
  • तमिलनाडु: 2 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होगी।
  • ओडिशा: 2-4 नवंबर को कई इलाकों में बारिश होगी।
  • छत्तीसगढ़: 2-4 नवंबर को बारिश और गरज-चमक की आशंका है।
  • केरल: 2-8 नवंबर को कई इलाकों में बारिश होने की चेतावनी जारी हुई है।

तमिलनाडु से ओडिशा तक दिखेगा तूफान का असर

‘मुरासु’ चक्रवात का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी और ओडिशा के तटीय इलाकों में भी तेज हवाओं और बारिश की आशंका है:-

  • तमिलनाडु: चेन्नई, तिरुवल्लूर, रानीपेट, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू में तेज हवाएं चल सकती हैं। 2 नवंबर की दोपहर से 3 नवंबर की सुबह तक हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
  • ओडिशा: गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी में तेज हवाओं और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। यहां 2 नवंबर की शाम से 3 नवंबर दोपहर तक हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
  • पुडुचेरी: समुद्र में ऊंची लहरों और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यहां भी 3 नवंबर तक मौसम खराब रह सकता है।

समुद्र में उठ सकती हैं 2 मीटर तक ऊंची लहरें

चक्रवात ‘मुरासु’ के साथ समुद्र में तूफानी लहरों का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम विभाग ने दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में समुद्री पानी घुसने की आशंका जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक, लैंडफॉल के दौरान समुद्र में सामान्य ज्वार के स्तर से करीब 1.5 से 2 मीटर तक ऊंची तूफानी लहरें उठ सकती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बापटला के साथ कृष्णा और प्रकाशम जिलों में देखने को मिल सकता है।

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मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह

मौसम विभाग ने खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्र में न जाने की सलाह दी है:-

  • दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में 2 नवंबर को समुद्र में न जाएं।
  • दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 4 नवंबर की सुबह तक जाने से बचें।
  • पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में 4 नवंबर की दोपहर तक मछली पकड़ने न जाएं।
  • आंध्र प्रदेश के तट पर 4 नवंबर की दोपहर तक समुद्र में जाने पर रोक संबंधी सलाह जारी है।
  • उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट पर 4 नवंबर की सुबह तक सावधानी बरतने को कहा गया है।
  • दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में भी 4 नवंबर की दोपहर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
  • केरल और माहे में 2 से 8 नवंबर तक व्यापक बारिश होगी।
  • कर्नाटक के तटीय इलाकों में 2 से 8 नवंबर तक बारिश की आशंका है।
  • तेलंगाना में 2 से 4 नवंबर के बीच भारी बारिश होगी।
  • रायलसीमा में 2 और 3 नवंबर को व्यापक बारिश की आशंका है।
  • आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में 2 से 4 नवंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा।

Cyclone Murasu Alert: ओडिशा में आ रहा विनाशकारी चक्रवात ‘मुरासु’! 3 नवंबर को आंध्र तट से टकराएगा तूफान, भारी बारिश का अलर्ट

Cyclonic Storm ‘Murasu’ Alert: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर नए चक्रवाती तूफान का खतरा मंडराने लगा है। चक्रवात ‘अर्नब’ से हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ की तबाही से ओडिशा के कुछ जिले अभी उबरे भी नहीं हैं कि एक नया चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव तेजी से चक्रवाती तूफान में बदल रहा है। इसके 3 नवंबर की सुबह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ टकराने की आशंका है। संभावित खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने निचले और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है तूफान

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र तीव्र होकर अवदाब के क्षेत्र में बदल गया है। अब इसके चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की आशंका है। यह तूफान तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दस्तक दी थी। उस समय तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

तेज रफ्तार से चलेंगी हवाएं

IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “संभावित चक्रवाती तूफान में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की आशंका है। इस दौरान हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यह मंगलवार तीन नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है।” आईएमडी ने बुलेटिन में कहा है कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा अंडमान सागर के ऊपर बना अवदाब का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा और 31 अक्टूबर को 11 बजकर 30 मिनट पर उसी क्षेत्र में दबाव में बदल गया।

अगले 12 घंटे के दौरान कैसे रहेगा वेदर?

बुलेटिन के अनुसार, इसके अगले 12 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की बहुत अधिक आशंका है। बयान में कहा गया है कि इसके बाद के 12 घंटों के दौरान यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए और तीव्र होकर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। बुलेटिन में बताया गया कि इसके दो नवंबर की शाम तक दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों से होते हुए आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंचने की आशंका है।

अवदाब का क्षेत्र ऐसी मौसमी स्थिति है, जो निम्न दबाव के क्षेत्र से अधिक तीव्र होती है। लेकिन चक्रवाती तूफान से कम प्रभावशाली होती है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, “हम इस प्रणाली की प्रगति पर नजर रख रहे हैं और इसके आगे बढ़ने के साथ ही नयी जानकारी जारी करेंगे। आईएमडी ने ओडिशा के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है।

ओडिशा के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

नए चक्रवाती सिस्टम का असर दक्षिणी ओडिशा में भी देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 3 और 4 नवंबर को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताई है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने दक्षिणी ओडिशा के जिलों के लिए 2 और 3 नवंबर को बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने का अनुमान है। चिंता की बात यह है कि इन इलाकों में पहले ही 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराए चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण भारी बारिश और बाढ़ का असर देखा जा चुका है।

60 से 70 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं हवाएं

IMD ने ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार:-

  • 2 नवंबर की शाम से हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटा रह सकती है। झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
  • 3 नवंबर को हवा की स्पीड बढ़कर 50 से 60 किमी प्रति घंटा हो सकती है। झोंकों की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।
  • 4 नवंबर को दोपहर तक हवा की रफ्तार धीरे-धीरे घटकर 40 से 50 किमी प्रति घंटा रह सकती है।

ओडिशा सरकार अलर्ट, निचले इलाकों से लोगों को निकालने का आदेश

संभावित चक्रवात और भारी बारिश के खतरे को देखते हुए ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने शनिवार को अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित बाढ़, जलभराव और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। सरकार ने निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को राहत शिविरों और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

गंजाम और गजपति में पहले से जारी हैं राहत-बचाव कार्य

ओडिशा के गंजाम और गजपति जिले पहले ही चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। ऐसे में नए तूफान की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंजाम जिला प्रशासन ने बाढ़ और जलभराव की आशंका वाले संवेदनशील इलाकों में भोजन, पीने के पानी और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को राहत शिविरों की तैयारी पूरी करने के लिए कहा गया है।

प्रशासनिक बयान के मुताबिक, ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तहसीलदारों को विस्तृत माइक्रो-प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जोखिम वाले स्थानों पर रहने वाले सभी लोगों को रविवार रात तक सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाने को कहा गया है।

लगातार दो चक्रवातों से बढ़ी चिंता

ओडिशा के दक्षिणी जिलों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद अब एक नए चक्रवाती सिस्टम का खतरा सामने है। पहले से प्रभावित इलाकों में दोबारा भारी बारिश होने पर बाढ़ और जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने, जरूरी सामान उपलब्ध कराने और राहत-बचाव व्यवस्था को तैयार रखने की है।

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Cyclone Murasu Latest Update: चक्रवात ‘अर्नब’ के असर से अभी आंध्र प्रदेश के कई इलाके पूरी तरह उबर भी नहीं पाए हैं कि बंगाल की खाड़ी में एक और शक्तिशाली तूफान ‘मुरासु’ बनने का खतरा मंडराने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना दबाव का क्षेत्र गहरे दबाव (Deep Depression) में बदल चुका है। इसके 1 नवंबर की रात तक चक्रवाती तूफान और 2 नवंबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच दस्तक दे सकता है।

इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। इसके प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दस्तक दी थी। उस समय तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

कब देगा दस्तक?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “संभावित चक्रवाती तूफान में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। इस दौरान हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यह मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है।” आईएमडी ने बुलेटिन में कहा है कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा अंडमान सागर के ऊपर बना अवदाब का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा और 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर उसी क्षेत्र में दबाव में बदल गया।

बुलेटिन के अनुसार, इसके अगले 12 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की बहुत अधिक आशंका है। बयान में कहा गया है कि इसके बाद के 12 घंटों के दौरान यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए और तीव्र होकर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। बुलेटिन में बताया गया कि इसके दो नवंबर की शाम तक दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों से होते हुए आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंचने की आशंका है।

बंगाल की खाड़ी में कैसे बना नया तूफान?

IMD के 1 नवंबर 2026 की सुबह जारी बुलेटिन के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए गहरे दबाव में बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 नवंबर की सुबह 5:30 बजे यह सिस्टम लगभग 11.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 86.4 डिग्री पूर्वी देशांतर पर केंद्रित था। यह सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इसके 1 नवंबर की रात तक चक्रवाती तूफान और 2 नवंबर को गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है।

क्यों रखा जाएगा तूफान का नाम ‘मुरासु’?

बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा यह सिस्टम चक्रवाती तूफान बनने पर ‘मुरासु’ (Murasu) के नाम से जाना जाएगा। यह नाम भारत की ओर से सुझाया गया है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ नगाड़ा या ढोल होता है। अभी मौसम विभाग इसे गहरे दबाव के रूप में दर्ज कर रहा है। चक्रवाती तूफान का दर्जा मिलने के बाद ही इसका नाम ‘मुरासु’ होगा।

3 नवंबर को कहां टकराएगा तूफान?

इस तूफान को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके संभावित लैंडफॉल को लेकर है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, यह सिस्टम 3 नवंबर की सुबह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में टकरा सकता है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, लैंडफॉल की सटीक जगह और समय में बदलाव संभव है।

भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

चक्रवात मुरासु का असर केवल समुद्र तटीय इलाकों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। इसके प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के कई जिलों में अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के अनुसार, आज यानी 1 नवंबर को कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम, मार्कापुरम और नेल्लोर जिलों में मध्यम से भारी बारिश की आशंका है।

इसके अलावा 2 नवंबर को एलुरु, पश्चिम गोदावरी, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, प्रकाशम, मार्कापुरम, नेल्लोर और तिरुपति जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इस दौरान पूर्वी गोदावरी, कोनसीमा, नांदयाल, कडप्पा, अन्नमय्या और चित्तूर में भी भारी बारिश हो सकती है। जबकि तीन नवंबर को विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, विजयनगरम, कुरनूल, नांदयाल, कडप्पा, अन्नमय्या, नेल्लोर, चित्तूर और तिरुपति के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश की आशंका है।

मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह

चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब होने की आशंका है। मौसम विभाग ने समुद्र में ऊंची लहरों और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी दी है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मछुआरों को बुधवार तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। समुद्र में जाने पर प्रतिबंध का उद्देश्य मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद फिर संकट में आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के लिए यह नई मौसमी चुनौती इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राज्य अभी पिछले चक्रवात ‘अर्नब’ से हुए नुकसान से उबर रहा है। 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। इसके कारण कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। अब नए चक्रवात की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

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खासकर उन इलाकों में राहत और बचाव की तैयारियों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, जहां पहले ही बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला था। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग तूफान की दिशा, गति और तीव्रता पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती तटीय जिलों में संभावित भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्री परिस्थितियों से निपटने की है।