कल का मौसम 2 नवंबर: बंगाल की खाड़ी में फिर उठा भयंकर तूफान! आंध्र प्रदेश पर मंडराया ‘मुरासु’ का खतरा, 120kmph की रफ्तार से चलेगी हवा

Cyclone Murasu Alert: चक्रवाती तूफान अर्नब का खतरा टलने के बाद अब बंगाल की खाड़ी में एक और मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इस वजह से देश के कई राज्यों में बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक सोमवार, 2 नवंबर को बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकते हैं।

चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ की वजह से कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश भी हो सकती है। इसका असर दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। वहीं, उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में मौसम साफ और सूखा रहेगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा छा सकता है। आइए जानते हैं कैसा होगा कल का मौसम

इन इलाकों पर सबसे ज्यादा खतरा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1 से 7 नवंबर के बीच दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के असर से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश भी हो सकती है। इसके अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में भी अलग-अलग दिनों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान का खतरा

मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ 2 नवंबर की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके बाद यह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ेगा और 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के आसपास तट से टकरा सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है और तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकते हैं। इसके असर से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। 4 नवंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है और 5 से 7 नवंबर तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।

इन राज्यों में होगी तेज बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 1 से 7 नवंबर के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कई जगहों पर बारिश हो सकती है। 3 से 5 नवंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश के बीच गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है। केरल और माहे में पूरे सप्ताह बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। वहीं, कर्नाटक के तटीय और दक्षिणी अंदरूनी इलाकों में 2 से 5 नवंबर तक बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना में 2 से 4 नवंबर तक बारिश का असर देखने को मिलेगा और 3 नवंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की आशंका है।

ओडिशा में भी होगी तेज बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 2 से 4 नवंबर के बीच ओडिशा में बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है। 3 और 4 नवंबर को कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में भी 2 नवंबर से बारिश शुरू होकर 3 और 4 नवंबर को तेज हो सकती है। वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्वी इलाकों में 1 से 5 नवंबर और पश्चिमी हिस्सों में 3 से 5 नवंबर के बीच हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ इलाकों में 1 और 2 नवंबर को बारिश हो सकती है। 5 नवंबर को भी यहां कुछ स्थानों पर बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 और 2 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी 1 और 2 नवंबर को कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा राज्य के कुछ इलाकों में सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा छा सकता है। पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश में 1 से 5 नवंबर तक बारिश हो सकती है। 2 नवंबर को यहां कुछ जगहों पर भारी बारिश का अनुमान है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 1 से 7 नवंबर तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश हो सकती है।

यूपी-बिहार में भी होगी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में 2 नवंबर को बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 5 नवंबर को भी बारिश की संभावना है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी 2 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में सुबह कोहरा छाने का अनुमान है। इसके अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल के हिमालयी इलाकों और बिहार में भी शुरुआती दिनों में बारिश हो सकती है।

मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

चक्रवाती तूफान और समुद्र में तेज हवाओं के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी व दक्षिण ओडिशा के तटों के पास समुद्र में न जाने की सलाह दी है। वहीं, लोगों को आंधी, बिजली और तेज हवाओं के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे मौसम में पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूर रहें। भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या भी हो सकती है, इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देख लें।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

चक्रवाती तूफान और समुद्र में तेज हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी तथा दक्षिण ओडिशा के तटों के आसपास समुद्र में न जाने की सलाह दी है। आम लोगों को भी गरज-चमक और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और यातायात की परेशानी हो सकती है। घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर देख लें।

IMD Weather Forecast: चक्रवात ‘मुरासु’ के कारण इन 10 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें दिल्ली से UP-बिहार समेत पूरे देश का मौसम

IMD Weather Forecast: नवंबर की शुरुआत के साथ ही देश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ तेजी से ताकतवर हो रहा है। इसके 2 नवंबर की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, यह तूफान 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच टकरा सकता है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने का अनुमान है। चक्रवात के असर से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

वहीं, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसमी प्रणालियों के कारण कुछ राज्यों में बारिश, गरज-चमक और कोहरे की स्थिति बन सकती है। भारत ने इस तूफान को ‘मुरासु’ नाम दिया है, जिसका अर्थ युद्ध का नगाड़ा होता है। यह तूफान और तेज होकर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। आइए जानते हैं 1 से 7 नवंबर तक दिल्ली-NCR, यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत देशभर में मौसम का हाल….।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात ‘मुरासु’ हुआ सक्रिय, तेजी से बढ़ रही ताकत

मौसम विभाग की 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:05 बजे जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से में बना गहरा अवदाब चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ में तब्दील हो गया है। 1 नवंबर को सुबह 11:30 बजे यह सिस्टम समुद्र में सक्रिय था और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था।

IMD का अनुमान है कि 2 नवंबर की सुबह तक यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार करेगा। तूफान के कारण समुद्र में भी हलचल बढ़ने की आशंका है। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश तट के आसपास समुद्र की स्थिति बेहद खराब से अत्यंत खराब हो सकती है।

कब और कहां टकराएगा तूफान?

  • तूफान आने की तारीख: 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच।
  • संभावित स्थान: नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश का तट।
  • हवा की रफ्तार: 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा।
  • हवाओं के झोंके: 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक।

आंध्र प्रदेश में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

चक्रवात ‘मुरासु’ का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश भी हो सकती है। इसके अलावा 2 से 3 नवंबर के दौरान रायलसीमा में भी भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है।

1 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। 2 और 3 नवंबर को तटीय क्षेत्रों में हवा के झोंकों की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश के तट के आसपास 2 नवंबर की शाम से हवाओं की रफ्तार और बढ़ने का अनुमान है। आधी रात तक यह 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है।

तेलंगाना में 3 नवंबर को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

तेलंगाना में भी चक्रवात का असर गंभीर हो सकता है। IMD के अनुसार, 2 और 3 नवंबर को राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 3 नवंबर को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है। 2 नवंबर को राज्य में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं, 3 नवंबर को हवा की गति 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने और झोंकों के 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। मौसम विभाग ने 3 नवंबर को तेलंगाना में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं और थंडरस्क्वॉल की भी चेतावनी दी है।

तमिलनाडु में 1 और 2 नवंबर को मूसलाधार बारिश का खतरा

तमिलनाडु में चक्रवात का प्रभाव पहले से दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में राज्य में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है। IMD ने 1 और 2 नवंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है। कुछ स्थानों पर 1 से 3 नवंबर के दौरान भारी बारिश जारी रह सकती है। राज्य के तटीय इलाकों में 1 नवंबर से तेज हवाएं चलने की आशंका है। 2 नवंबर की शाम तक हवा की गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 3 नवंबर के बाद धीरे-धीरे हवाओं की रफ्तार कम होने का अनुमान है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 3-4 नवंबर को बिगड़ेगा मौसम

चक्रवात ‘मुरासु’ का असर ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने ओडिशा में 2 से 4 नवंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश की आशंका जताई है। दक्षिण ओडिशा में 3 और 4 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और थंडरस्क्वॉल की आशंका भी है।

इस दौरान हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं, झोंके की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकते हैं। छत्तीसगढ़ में 3 और 4 नवंबर को व्यापक बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। 2 नवंबर को भी राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा 3 और 4 नवंबर को गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप में भी बारिश का दौर

दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी नवंबर के पहले सप्ताह में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है:-

  • केरल और माहे: 1 से 7 नवंबर तक कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। 1 से 4 नवंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
  • तटीय कर्नाटक: 2 से 5 नवंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। 3 नवंबर को कुछ जगह भारी बारिश हो सकती है।
  • दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: 2 से 5 नवंबर तक बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 2 और 3 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट है।
  • उत्तर आंतरिक कर्नाटक: 3 से 5 नवंबर के दौरान कई इलाकों में बारिश हो सकती है। 3 और 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है।
  • लक्षद्वीप: 1 से 4 नवंबर तक कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और 5 से 7 नवंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।

मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में कैसा रहेगा मौसम?

मध्य भारत में भी कई मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं:-

  • मध्य प्रदेश: पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 5 नवंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश की आशंका है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 नवंबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
  • महाराष्ट्र: विदर्भ में 2 से 5 नवंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 1 से 5 नवंबर के बीच हल्की से मध्यम बारिश की आशंका है। मध्य महाराष्ट्र में 1 से 4 नवंबर तक गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। मराठवाड़ा में 3 नवंबर को मौसम खराब रहने का अनुमान है।
  • गुजरात: गुजरात क्षेत्र में 1 से 3 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। सौराष्ट्र और कच्छ में 1 नवंबर को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मौसम का हाल

पूर्वी भारत में भी नवंबर की शुरुआत बारिश के साथ हो सकती है। हालांकि, इन राज्यों में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसी गंभीर बारिश की चेतावनी नहीं है:-

  • बिहार: 1 और 2 नवंबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
  • झारखंड: 1 से 4 नवंबर के बीच कुछ इलाकों में बारिश की संभावना है।
  • पश्चिम बंगाल: गंगा के मैदानी इलाकों में 1 से 3 नवंबर और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 1 से 4 नवंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
  • ओडिशा: 2 से 4 नवंबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश और दक्षिणी हिस्सों में 3-4 नवंबर को बहुत भारी बारिश की आशंका है।
  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह: 1 से 7 नवंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी

पूर्वोत्तर के राज्यों में नवंबर के पहले सप्ताह में बारिश का दौर बना रह सकता है:-

  • अरुणाचल प्रदेश: 1 से 5 नवंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश और 2 नवंबर को कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है।
  • असम और मेघालय: 1 से 7 नवंबर तक कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: 1 से 7 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।

दिल्ली-NCR, यूपी, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल चक्रवात ‘मुरासु’ जैसा सीधा और व्यापक खतरा नहीं दिख रहा है। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से कुछ इलाकों में बारिश की आशंका है-

  • दिल्ली-NCR: IMD की इस विज्ञप्ति में दिल्ली के लिए भारी बारिश का कोई विशेष अलर्ट नहीं दिया गया है। हालांकि, उत्तर भारत के आसपास के कुछ हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
  • उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 और 2 नवंबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। यूपी के कुछ हिस्सों में 1 और 2 नवंबर को सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा छाने की आशंका है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में निचले वायुमंडलीय स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
  • पंजाब और हरियाणा: IMD के इस बुलेटिन में इन दोनों राज्यों के लिए 1 से 7 नवंबर के दौरान किसी बड़े बारिश अलर्ट का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • राजस्थान: राजस्थान के लिए भी इस प्रेस विज्ञप्ति में भारी बारिश की कोई विशेष चेतावनी नहीं दी गई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अन्य हिस्सों में मौसम बदल सकता है।
  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 1 और 2 नवंबर तथा 5 नवंबर को कुछ स्थानों पर बारिश या बर्फबारी की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 और 2 नवंबर को छिटपुट बारिश हो सकती है।

मछुआरों और समुद्र में जाने वालों के लिए भी चेतावनी

चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के कारण बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र की स्थिति बेहद खराब होने की आशंका है। दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चल रही हैं। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में 2 नवंबर से हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकते हैं।

आंध्र प्रदेश तट के आसपास 2 नवंबर की सुबह से समुद्र की स्थिति और बिगड़ने का अनुमान है। 2 नवंबर की सुबह से 3 नवंबर दोपहर तक समुद्र की स्थिति ऊंची से बहुत ऊंची लहरों वाली हो सकती है। ऐसे में समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है।

7 नवंबर तक देश के मौसम में जारी रहेगा उतार-चढ़ाव

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, नवंबर के पहले सप्ताह में दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। चक्रवात ‘मुरासु’ के कारण आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विशेष सतर्कता की जरूरत है। वहीं, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।

ये भी पढ़ें- Cyclone Murasu Alert: ओडिशा में आ रहा विनाशकारी चक्रवात ‘मुरासु’! 3 नवंबर को आंध्र तट से टकराएगा तूफान, भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अपने बुलेटिन में बताया कि उत्तर भारत में फिलहाल भारी बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं है। लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश और कुछ इलाकों में कोहरे की स्थिति बन सकती है। ऐसे में अगले कुछ दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

Cyclone Murasu Alert: ओडिशा में आ रहा विनाशकारी चक्रवात ‘मुरासु’! 3 नवंबर को आंध्र तट से टकराएगा तूफान, भारी बारिश का अलर्ट

Cyclonic Storm ‘Murasu’ Alert: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर नए चक्रवाती तूफान का खतरा मंडराने लगा है। चक्रवात ‘अर्नब’ से हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ की तबाही से ओडिशा के कुछ जिले अभी उबरे भी नहीं हैं कि एक नया चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव तेजी से चक्रवाती तूफान में बदल रहा है। इसके 3 नवंबर की सुबह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ टकराने की आशंका है। संभावित खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने निचले और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है तूफान

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र तीव्र होकर अवदाब के क्षेत्र में बदल गया है। अब इसके चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की आशंका है। यह तूफान तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दस्तक दी थी। उस समय तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

तेज रफ्तार से चलेंगी हवाएं

IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “संभावित चक्रवाती तूफान में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की आशंका है। इस दौरान हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यह मंगलवार तीन नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है।” आईएमडी ने बुलेटिन में कहा है कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा अंडमान सागर के ऊपर बना अवदाब का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा और 31 अक्टूबर को 11 बजकर 30 मिनट पर उसी क्षेत्र में दबाव में बदल गया।

अगले 12 घंटे के दौरान कैसे रहेगा वेदर?

बुलेटिन के अनुसार, इसके अगले 12 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की बहुत अधिक आशंका है। बयान में कहा गया है कि इसके बाद के 12 घंटों के दौरान यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए और तीव्र होकर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। बुलेटिन में बताया गया कि इसके दो नवंबर की शाम तक दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों से होते हुए आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंचने की आशंका है।

अवदाब का क्षेत्र ऐसी मौसमी स्थिति है, जो निम्न दबाव के क्षेत्र से अधिक तीव्र होती है। लेकिन चक्रवाती तूफान से कम प्रभावशाली होती है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, “हम इस प्रणाली की प्रगति पर नजर रख रहे हैं और इसके आगे बढ़ने के साथ ही नयी जानकारी जारी करेंगे। आईएमडी ने ओडिशा के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है।

ओडिशा के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

नए चक्रवाती सिस्टम का असर दक्षिणी ओडिशा में भी देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 3 और 4 नवंबर को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताई है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने दक्षिणी ओडिशा के जिलों के लिए 2 और 3 नवंबर को बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने का अनुमान है। चिंता की बात यह है कि इन इलाकों में पहले ही 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराए चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण भारी बारिश और बाढ़ का असर देखा जा चुका है।

60 से 70 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं हवाएं

IMD ने ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार:-

  • 2 नवंबर की शाम से हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटा रह सकती है। झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
  • 3 नवंबर को हवा की स्पीड बढ़कर 50 से 60 किमी प्रति घंटा हो सकती है। झोंकों की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।
  • 4 नवंबर को दोपहर तक हवा की रफ्तार धीरे-धीरे घटकर 40 से 50 किमी प्रति घंटा रह सकती है।

ओडिशा सरकार अलर्ट, निचले इलाकों से लोगों को निकालने का आदेश

संभावित चक्रवात और भारी बारिश के खतरे को देखते हुए ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने शनिवार को अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित बाढ़, जलभराव और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। सरकार ने निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को राहत शिविरों और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

गंजाम और गजपति में पहले से जारी हैं राहत-बचाव कार्य

ओडिशा के गंजाम और गजपति जिले पहले ही चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। ऐसे में नए तूफान की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंजाम जिला प्रशासन ने बाढ़ और जलभराव की आशंका वाले संवेदनशील इलाकों में भोजन, पीने के पानी और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को राहत शिविरों की तैयारी पूरी करने के लिए कहा गया है।

प्रशासनिक बयान के मुताबिक, ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तहसीलदारों को विस्तृत माइक्रो-प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जोखिम वाले स्थानों पर रहने वाले सभी लोगों को रविवार रात तक सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाने को कहा गया है।

लगातार दो चक्रवातों से बढ़ी चिंता

ओडिशा के दक्षिणी जिलों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद अब एक नए चक्रवाती सिस्टम का खतरा सामने है। पहले से प्रभावित इलाकों में दोबारा भारी बारिश होने पर बाढ़ और जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने, जरूरी सामान उपलब्ध कराने और राहत-बचाव व्यवस्था को तैयार रखने की है।

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