CJP Protest : जंतर मंतर इलाके में 8 घंटे बंद रहेगा इंटरनेट, सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की वजह से राजधानी द‍िल्‍ली में जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में आधी रात तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध-प्रदर्शन जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर भी धारा 163 लागू कर दी गई है।

बता दें क‍ि व‍िरोध-प्रदर्शन का असर राजधानी के कारोबार पर भी पड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए ‘नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन’ (NDTA) की सलाह के बाद आज शाम 6.30 बजे के बाद कनॉट प्लेस की सभी दुकानें और रेस्‍टोरेंट बंद कर दिए गए।

जंतर-मंतर के आसपास बंद रहेगा मोबाइल इंटरनेट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में कुछ समय के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आदेश जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला जन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। आदेश के मुताबिक, 23 जुलाई को शाम 4 बजे से रात 12 बजे (आधी रात) तक सभी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। यह आदेश दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है।

सरकार ने दिया ये आदेश

आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय गृह सचिव ने यह तय करने के बाद कि यह कदम जन सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए जरूरी है, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की भड़काऊ या गैरकानूनी गतिविधि को रोकना है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट सेवा बंद करने के फैसले को केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी मिल चुकी है। अवर सचिव महेंद्र विक्रम सिंह के हस्ताक्षर वाले इस आदेश को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजा गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

CJP Protest: करीना कपूर ने स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का किया समर्थन, बोलीं-‘बात सुनना कोई एहसान नहीं है’

CJP Protest: करीना कपूर और वरुण धवन ने दिल्ली में CJP की अगुवाई में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। सलमान खान, आलिया भट्ट, अनन्या पांडे और कई अन्य बड़े बॉलीवुड सितारों के बाद, करीना और वरुण ने भी छात्रों का साथ देते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी की मांगों को सुनना कोई “शिष्टाचार” नहीं, बल्कि “ज़िम्मेदारी” है।

करीना ने इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट्स के सपोर्ट में एक दिल को छू लेने वाला नोट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं कुछ दिनों से इस बारे में सोच रही थी, लेकिन अब और चुप नहीं रह सकती। इतने सारे युवा अपनी बात रखना चाहते हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज करना नामुमकिन है… और ऐसा किया भी नहीं जाना चाहिए।

हम सब जानते हैं कि एक बच्चे के लिए शिक्षा का क्या मतलब है। यह उन्हें आत्मविश्वास देती है। यह उन्हें उम्मीद देती है। यह परिवारों को भरोसा दिलाती है कि आने वाला कल आज से बेहतर हो सकता है। लेकिन शिक्षा तभी असरदार होती है जब बच्चे उस पर भरोसा करें। और जिस पल उन्हें यह शक होने लगता है कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और काबिलियत की असल में कोई अहमियत नहीं है, तो उनका भरोसा खत्म हो जाता है।”

करीना ने इस बात पर जोर दिया कि स्टूडेंट्स को ऐसा एजुकेशन सिस्टम मिलना चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें। उन्होंने लिखा, “किसी भी बच्चे को यह सोचने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए कि क्या उनकी कोशिशें काफ़ी होंगी। वे ऐसे सिस्टम के हक़दार हैं जिस पर वे भरोसा कर सकें, जहां काबिलियत की असल अहमियत हो, कोशिशों का इनाम मिले और हर बच्चा बराबरी के मौके से शुरुआत करे।

यह कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह तो कम से कम ज़रूरी बात है। जब पूरी पीढ़ी अपने भविष्य के बारे में एक आवाजं में बात करती है, तो उनकी बात सुनना कोई एहसान नहीं है जो हम करते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है। हमारे बच्चे हमें उतनी ही बारीकी से देखते हैं जितना हम उन्हें देखते हैं। हम अभी… बाद में नहीं, बल्कि अभी… कैसा रिएक्शन देते हैं, इससे उन्हें पता चलेगा कि निष्पक्षता और भरोसा असल में होते हैं या ये सिर्फ़ बड़ों के इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द हैं। वे आने वाले कल की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे ही आने वाला कल हैं।”

वरुण धवन ने भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और इंस्टाग्राम पर लिखा, “छात्र हमारे देश का भविष्य हैं। जब किसी छात्र का सपना टूटता है, तो सिर्फ़ एक सपना ही नहीं टूटता, बल्कि पूरे परिवार का सपना टूट जाता है। जब उन्हें लगता है कि सिस्टम ने उन्हें निराश किया है, तो उन्हें सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।

उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए, उनकी सुरक्षा होनी चाहिए और उनकी बातों पर ईमानदारी से ध्यान दिया जाना चाहिए। मैं अधिकारियों से अपील करता हूँ कि वे इन चिंताओं पर ध्यान दें और एक निष्पक्ष, पारदर्शी और सार्थक समाधान की दिशा में काम करें जिससे जवाबदेही तय हो सके। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह छात्रों का विरोध प्रदर्शन ही बना रहेगा। ध्यान उन मुद्दों पर होना चाहिए जो छात्रों को प्रभावित करते हैं और उन समाधानों पर जो उनके लिए ज़रूरी हैं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और हर छात्र को इस अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। जय हिंद।”

जंतर-मंतर पर दिपके का साया बने आशुतोष रांका कौन हैं? जानें IIT, LSE और मैकिन्से से आंदोलन तक का सफर

Who is Ashutosh Ranka: IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई और फिर लंदन में मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनी में भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी! आम तौर पर लोग ऐसे करियर का सपना देखते हैं, लेकिन आशुतोष रांका इस सब से आगे बढ़कर देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। NEET पेपर लीक को लेकर CJP के ‘पॉलिसी हेड’ के रूप में केंद्र सरकार से सीधी बात करने वाले आशुतोष रांका कौन हैं और कैसे एक कॉर्पोरेट कंसल्टेंट छात्रों की सबसे बड़ी आवाज बन गया, आइए आपको बताते हैं।

कौन हैं आशुतोष रांका?

आशुतोष रांका ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। उन्हें इस पूरे आंदोलन का ‘पॉलिसी माइंड’ माना जा रहा है, क्योंकि वे शिक्षा सुधारों और सरकारी नीतियों के खिलाफ तार्किक और नीतिगत ड्राफ्ट तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से पढ़ाई की है और इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) जैसी विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की है। CJP में शामिल होने से पहले आशुतोष रांका लंदन में दुनिया की दिग्गज कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) में कंसल्टेंट के रूप में काम कर चुके हैं।

फिलहाल वो आंदोलन की नीतिगत रणनीति, शिक्षा सुधारों के ड्राफ्ट और केंद्र सरकार के साथ बातचीत में CJP का प्रतिनिधित्व कर रहे है।

कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ आंदोलन का हिस्सा क्यों बने?

जब जून में CJP ने अपने प्रवक्ताओं के पैनल का ऐलान किया, तब आशुतोष रांका के शानदार एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड को खास तौर पर हाईलाइट किया गया। IIT कानपुर, LSE और मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनियों में काम करने के अनुभव के कारण उनके पास नीतियों के विश्लेषण और रणनीतिक समझ का गहरा अनुभव है। नीट परीक्षा में हुई धांधली के बाद उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल छात्रों की मांगों को कानूनी और नीतिगत रूप से मजबूत बनाने के लिए किया।

केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अहम भूमिका

NEET आंदोलन के तहत जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच आशुतोष रांका ने सरकार के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सौरव दास के साथ आशुतोष रांका भी उस दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जिसने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा। वे केवल परीक्षा रद्द करने या जांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक और पारदर्शी सुधारों की रूपरेखा पर भी काम कर रहे हैं।

जंतर-मंतर पर डटे हैं CJP संस्थापक

जहां आशुतोष रांका और सौरव दास सरकार के साथ टेबल टॉक संभाल रहे हैं, वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने वाले एक बयान के विरोध में इस पार्टी की नींव रखी थी।

CJP Protest new advisory: कनॉट प्लेस में शाम 6:30 बजे तक बंद होंगी दुकानें, प्रोटेस्ट के बीच आई ये नई एडवाइजरी जानिए

दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आसपास की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) द्वारा जारी अडवाइजरी के तहत कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, दफ्तर और रेस्टोरेंट आज शाम 6:30 बजे तक बंद हो जाएंगे। एनडीटीए (NDTA) द्वारा गुरुवार को जारी इस एडवाइजरी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से टेलीफोन पर मिली सलाह के बाद लिया गया है।

एनडीएमसी नेतृत्व ने कनॉट प्लेस के सभी कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट्स को शाम 6:30 बजे तक दिन भर के लिए कामकाज बंद करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा और अनहोनी से बचाव के लिए उठाया गया कदम

व्यापारिक संगठन (NDTA) ने अपनी अडवाइजरी में इलाके के सभी दुकान मालिकों, कार्यालय संस्थानों और रेस्टोरेंट संचालकों से अनुरोध किया है कि वे इस निर्देश का सख्ती से पालन करें और सहयोग दें। सर्कुलर के मुताबिक सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस और उसके आसपास बनी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रतिष्ठान मालिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अप्रिय घटना, संपत्ति के नुकसान या चोट से बचने के लिए इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स (X) पर तीखी प्रतिक्रिया दी

इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एनडीटीए की इस एडवाइजरी को साझा करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। अपनी तीखी प्रतिक्रिया में केजरीवाल ने लिखा कि, ‘कनाट प्लेस की सभी दुकानों को आज शाम 6.30 pm बंद करने के आदेश। जबरदस्त सिक्योरिटी। ढेर सारी एम्बुलेंस। क्या मोदी सरकार आज फिर जंतर मंतर पर अपने बच्चों पर बर्बर हमला करेगी?’

दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब कोलकाता में नया फ्रंट? जानिए अभिजीत दिपके की CJP ने अब ये क्या नई डिमांड कर दी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खबर सामने आई है। न्यूज 18 के रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब कोलकाता में भी प्रदर्शन करने जा रही है।

कोलकाता में प्रदर्शन की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कोलकाता पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक आवेदन देकर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में रैली निकालने की अनुमति मांगी है। आवेदन के अनुसार, पार्टी ने कल शाम 4 बजे कॉलेज स्ट्रीट से रानी रश्मोनी एवेन्यू तक रैली आयोजित करने की इजाजत मांगी है। आयोजकों का कहना है कि इस रैली में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। साथ ही, जुलूस के दौरान दो वाहनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

कनॉट प्लेस में सभी दुकानें और ऑफिस शाम 6:30 बजे तक बंद करने का आदेश

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने 23 जुलाई को कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, ऑफिस और रेस्टोरेंट को आज शाम 6:30 बजे तक बंद करने की अपील की है। NDMC ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि NDMC चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सलाह पर कनॉट प्लेस के आसपास की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस करीब 1 किमी की दूरी पर हैं। जब जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन या पुलिस कार्रवाई होती है, तो उसका असर आसपास के इलाकों खासकर कनॉट प्लेस, जनपथ, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस और संसद मार्ग पर भी पड़ता है।

कल हुई थी हिंसा

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस इलाके में हुई हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में केस दर्ज कर लिया है। बीते बुधवार को हुई पत्थरबाजी में एसीपी विवेक भगत के अलावा पंजाबी बाग के एसीपी भी घायल हुए थे। साथ ही इंस्पेक्टर नंद किशोर समेत कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को भी चोट आई थी। बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी अनशन पर बैठी है। सीजेपी के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर हैं। ये सभी हाल ही में हुए नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सीजेपी के समर्थन में एक के बाद एक नेता जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और 21 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता दिल्ली में पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

हमेशा अभिजीत दिपके के बगल में दिखने वाले सौरव दास कौन? जानिए उनका पूरा बैकग्राउंड

Who is Saurav Das: देश भर में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन की पूरे देश में गूंज है। 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद से लोगों की जबान पर अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका का नाम है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके इस आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार हैं, लेकिन केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ टेबल टॉक से लेकर मीडिया के सामने छात्रों की मांगों को मजबूती से रखने का पूरा जिम्मा CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास संभाल रहे हैं।

CJP के मुख्य मीडिया यूनिट के हेड और स्पोक्सपर्सन के रूप में सौरव दास आज इस आंदोलन की सबसे पहचानी जाने वाली आवाज बन चुके हैं। जानें सौरव दास का पूरा बैकग्राउंड, पढ़ाई, पत्रकारिता के सफर और उनकी प्रोफाइल की पूरी डिटेल।

कौन हैं सौरव दास?

सौरव दास पेशे से एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कानून, न्यायपालिका, गवर्नेंस और नागरिक अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर कई वर्षों तक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। फिलहाल वो कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और सरकार के साथ बातचीत में मुख्य वार्ताकार।

CJP में शामिल होने से पहले भी वे नागरिक और पर्यावरणीय आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, जिसमें प्रदूषण विरोधी अभियान और ‘क्लाइमेट एक्शन फ्रंट’ जैसे प्रयास शामिल हैं। जून में CJP द्वारा पहला देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने से ठीक पहले सौरव दास को संगठन के प्रमुख सार्वजनिक संचारक के रूप में पेश किया गया था।

18 की उम्र में RTI से बनाई पहचान

सौरव दास की शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने साल 2016 से 2019 के दौरान एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज के दिनों में ही मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून का सक्रिय उपयोग करना शुरू कर दिया था।

RTI के माध्यम से मिली जानकारियों के आधार पर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कई कमियों और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उजागर किया। उनकी खोजी रिपोर्ट ‘द कारवां’, ‘आर्टिकल 14’, ‘द वायर’ और ‘अल जजीरा’ जैसे नामचीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

NEET आंदोलन के हैं सूत्रधार

NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सौरव दास छात्रों का पक्ष रखने वाले सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास शामिल थे, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीधी मुलाकात की और छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा।

वे लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, प्रभावित अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग पर कायम हैं। पुलिस की कार्रवाई और तनावपूर्ण स्थितियों के बीच भी सौरव दास ने हमेशा आंदोलन को अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने की अपील की है।

कौन हैं अभिजीत दिपके, कितनी पढ़ाई की है? CJP के संस्थापक का पूरा बैकग्राउंड जानिए

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

indian education system

cjp protest in delhi: हमारे देश में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए युवाओं को NEET, JEE और UPSC जैसी कठिनतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, देश की नीतियां और भविष्य तय करने वाले राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता या मानक परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। केवल किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़कर कोई भी व्यक्ति नीति-निर्माता बन सकता है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जहाँ देश के निर्माण में लगे विशेषज्ञों के लिए योग्यता के कड़े पैमाने हैं, वहीं पूरे तंत्र को चलाने वाले वर्ग के लिए ऐसी कोई जवाबदेही तय नहीं है। एक अंगूठा टेक भी शिक्षा मंत्री बन सकता है।

 

1. वर्तमान शिक्षा प्रणाली की मौलिक कमियाँ

स्मृति-केंद्रित मूल्यांकन: हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था बुद्धिमत्ता की जगह केवल रटने की क्षमता (Memory) की परीक्षा लेती है। यही कारण है कि अकादमिक स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थी भी व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के सामने कई बार असहाय सिद्ध होते हैं।

 

प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा का दबाव: पारंपरिक शिक्षा बच्चों में सहयोग के स्थान पर तुलना और प्रतिस्पर्धा की भावना भरती है। “प्रथम आने” की यह अंधी दौड़ अंततः मानसिक तनाव, ईर्ष्या और सामाजिक विसंगतियों को जन्म देती है।

 

जीविका बनाम जीवन का बोध: वर्तमान शिक्षा नीति का पूरा जोर केवल इस बात पर है कि “रोटी कैसे कमाई जाए”। यह विद्यार्थी को आजीविका कमाना तो सिखाती है, लेकिन शांत, संतुलित और आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला से दूर रखती है।

 

2. स्कूल बनाम कोचिंग: शिक्षा व्यवस्था का दोहरा रवैया

भारत में शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, ज्ञानवर्धन और प्रतिभा का विकास माना गया था। लेकिन आज की वास्तविक स्थिति यह है कि देश का शिक्षा ढांचा एक ऐसी अंधी दौड़ में बदल चुका है, जहाँ छात्र और अभिभावक दोनों मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव तले पिस रहे हैं। 'स्कूल बनाम कोचिंग' की दुविधा और 'आरक्षण-आधारित व्यवस्था' से उपजी हताशा- ये दो ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर व्यापक और बेबाक चर्चा की तत्काल आवश्यकता है।

 

आज के समय में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि बच्चे को अंततः प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग ही जाना है, तो स्कूल प्रणाली का औचित्य क्या रह जाता है?

 

समय और संसाधन की बर्बादी: एक सामान्य विद्यार्थी सुबह 6 से 8 घंटे स्कूल में बिताता है और उसके तुरंत बाद कोचिंग संस्थानों का रुख करता है। इससे न तो उसे स्व-अध्ययन (Self-study) का समय मिलता है और न ही मानसिक विश्राम का।

 

'डमी स्कूल' कल्चर का पनपना: 11वीं और 12वीं कक्षा में प्रवेश लेते ही छात्र 'डमी स्कूलing' का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्कूल केवल नाममात्र के लिए रह जाते हैं और उनकी पूरी पढ़ाई का केंद्र कोचिंग सेंटर बन जाते हैं। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हमारी मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के मापदंडों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

 

आर्थिक व मानसिक शोषण: अभिभावक स्कूल और कोचिंग दोनों की भारी-भरकम फीस भरते हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब किसी कारणवश बच्चे का चयन नहीं होता, तो परिवार आर्थिक रूप से टूट जाता है और बच्चा भयंकर अवसाद (Depression) या हताशा का शिकार हो जाता है।

 

3. योग्यता, आरक्षण और युवाओं की अनिश्चितता

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था ने मेधावी और मेहनती युवाओं के सामने एक अनूठा संकट खड़ा कर दिया है।

 

मेहनत और परिणाम का असंतुलन: जो छात्र दिन-रात एक करके अत्यधिक कठिन परिश्रम करते हैं, उन्हें अक्सर प्रक्रिया के अंत में यह पता चलता है कि कट-ऑफ और सीटों के आरक्षण के कारण उनके सारे प्रयास निष्फल हो गए। यह स्थिति किसी भी युवा के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।

 

भविष्य के प्रति अनिश्चितता: परीक्षा और नौकरी दोनों स्तरों पर व्याप्त यह व्यवस्था उन बच्चों के लिए अत्यधिक कष्टदायी साबित हो रही है, जो केवल अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। जब पढ़ाई का पैमाना केवल अंक या ज्ञान न रहकर जातिगत या श्रेणीगत श्रेणियां बन जाता है, तो प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और निराशा का जन्म होता है।

 

संवाद का अभाव: इस नीतिगत भेद पर कोई भी राजनीतिक दल या नीति-निर्माता खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। सवाल यह है कि यह व्यवस्था कितनी और पीढ़ियों तक इसी रूप में चलती रहेगी और कब तक योग्यता को हाशिये पर रखा जाएगा?

 

4. भौतिकवादी दृष्टिकोण और प्रलोभन की संस्कृति

सफलता की संकीर्ण परिभाषा: बचपन से ही बच्चों के मन में यह विचार गहराई से बिठा दिया जाता है कि पद, ऊँची तनख्वाह, गाड़ी और बंगला ही सफलता के एकमात्र पैमाने हैं।

 

नैतिकता पर हावी पद-लोभ: व्यवस्था बच्चों को 'शांत व गुणी इंसान' या 'वैज्ञानिक' बनने के बजाय 'ऊँची कुर्सी' पाने का प्रलोभन देती है। इस दौड़ में सफलता पाने के साधनों की शुद्धता पीछे छूट जाती है और केवल परिणाम को ही महत्व दिया जाता है।

 

संघर्ष का भाव: यह दृष्टिकोण समाज में एक ऐसा माहौल बनाता है जहाँ हर व्यक्ति दूसरे के खिलाफ संघर्षरत दिखाई देता है, जिससे सहज मैत्री-भाव और सामाजिक सद्भाव समाप्त हो जाता है।

 

5. सामाजिक और वैचारिक विभाजन के केंद्र

संस्थागत सांप्रदायिकता: देश में शिक्षा का ढांचा धार्मिक और सांप्रदायिक आधारों पर बंटा हुआ प्रतीत होता है। विभिन्न धार्मिक व निजी शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने एजेंडे के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित कर रही हैं, जिससे एकीकृत राष्ट्रीय चेतना का निर्माण बाधित होता है।

 

कैंपस में वैचारिक ध्रुवीकरण: उच्च शिक्षण संस्थान अक्सर वैज्ञानिक शोध और मौलिक चिंतन के केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक विचारधाराओं (लेफ्ट और राइट विंग) के टकराव के अड्डे बन जाते हैं। छात्र राष्ट्र निर्माण या नवाचार के बजाय आंदोलनों तक सीमित होकर रह जाते हैं।

 

6. प्राथमिकताओं का विपर्यय और भविष्य की चुनौतियाँ

सकारात्मक प्रेरणा का अभाव: हमारी सामाजिक सोच बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार या नेता बनने का दबाव तो देती है, लेकिन उन्हें एक संवेदनशील इंसान, मौलिक साहित्यकार या वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा नहीं देती।

 

वैज्ञानिक सोच बनाम सांस्कृतिक संघर्ष: यदि हम आने वाली पीढ़ियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास करने में विफल रहे, तो समाज वैचारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्षों में ही उलझा रहेगा।

 

शिक्षा में क्रांति की जरूरत:

आज़ादी के बाद से शिक्षा नीतियों में अनेक बदलाव हुए, लेकिन वे मुख्य रूप से सतही ही रहे। जब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल 'आज्ञाकारी कर्मचारी' बनाने के ढर्रे से बाहर निकलकर संशय, मौलिक सोच, वैज्ञानिक चेतना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा नहीं देती, तब तक एक सशक्त और विवेकशील समाज का निर्माण संभव नहीं है। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली न तो विद्यार्थी को सर्वांगीण विकास दे पा रही है और न ही उसे निष्पक्ष अवसर की गारंटी दे रही है। यदि हमें देश के युवा धन को अवसाद, पलायन और आंदोलन से बचाना है, तो दो शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव करना होंगे। 

कौन हैं अभिजीत दिपके, कितनी पढ़ाई की है? CJP के संस्थापक का पूरा बैकग्राउंड जानिए

सोशल मीडिया के दौर में कई अभियान कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल के दिनों में Cockroach Janta Party (CJP) भी ऐसी ही एक मुहिम बनकर उभरी है, जिसने अपने अलग अंदाज और डिजिटल कैंपेन के जरिए लोगों का ध्यान खींचा। इस अभियान के साथ एक नाम लगातार सुर्खियों में है अभिजीत दिपके। उनकी रणनीति, सोशल मीडिया पर पकड़ और युवाओं से जुड़ने का तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है।

बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि आखिर अभिजीत दिपके कौन हैं, उन्होंने कहां से पढ़ाई की, उनका प्रोफेशनल बैकग्राउंड क्या है और कैसे वे इस तेजी से वायरल हो रहे अभियान का प्रमुख चेहरा बन गए। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा, करियर और अब तक के सफर से जुड़ी अहम बातें।

कौन हैं अभिजीत दिपके?

अभिजीत दिपके एक राजनीतिक कम्युनिकेशन प्रोफेशनल और डिजिटल कैंपेन स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने Cockroach Janta Party की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में की, जिसे युवाओं ने तेजी से समर्थन दिया।

प्लेटफॉर्म खुद को “आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज” बताता है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा कथित NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग करता है।

सिर्फ कुछ दिनों में लाखों-करोड़ों का समर्थन

CJP की शुरुआत के कुछ ही दिनों में इसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी। इंस्टाग्राम पर कुछ ही समय में करोड़ों लोग इस मुहिम से जुड़ गए, जबकि X (पूर्व ट्विटर) पर भी मीम्स, रील्स और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए यह अभियान वायरल हो गया।

इसके अलावा, संगठन ने अपनी वेबसाइट और एंथम भी लॉन्च किया तथा एक लाख से अधिक लोगों ने इससे जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।

क्या है अभिजीत दिपके की शैक्षणिक योग्यता?

अभिजीत दिपके ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भारत में पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए।

  • पुणे से जर्नलिज्म की पढ़ाई की।
  • अमेरिका की Boston University से मास्टर ऑफ पब्लिक रिलेशंस की डिग्री हासिल की।
  • पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बताया कि वह नौकरी के अवसरों की तलाश में हैं।

राजनीतिक कम्युनिकेशन में भी रहा अनुभव

Cockroach Janta Party शुरू करने से पहले अभिजीत दिपके 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया कैंपेन और चुनावी रणनीति पर काम किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान उन्होंने युवाओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के लिए मीम-आधारित डिजिटल कैंपेन में भी भूमिका निभाई थी।

NEET विवाद के बाद तेज हुई मुहिम

CJP का अभियान सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। संगठन ने कथित NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन भी किए। समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और संसद की ओर मार्च निकालकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

48 घंटे की भूख हड़ताल भी की

अभिजीत दिपके ने इस अभियान के तहत 48 घंटे की भूख हड़ताल भी की। बाद में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद यह अनशन समाप्त हुआ। इस दौरान संगठन ने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन भी सौंपा।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंची मुहिम

Cockroach Janta Party का तेजी से बढ़ता प्रभाव यह दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरू हुआ कोई अभियान बहुत कम समय में बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। मीम्स, व्यंग्य और सोशल मीडिया की ताकत के सहारे यह पहल अब ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

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कॉकरोच वाली पोस्ट डालकर विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत! अब मांगा जाएगा जवाब

CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में आरएएफ यानी रैपिड एक्शन फोर्स की एक अधिकारी विवादों में घिर गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की अधिकारी सोनिया सहरावत से उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर जल्द ही जवाब मांगा जा सकता है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद उनकी सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट और गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई थीं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में उनसे जल्द स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

न्यूज18 के रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सोशल मीडिया से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन के संकेत मिले हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सीआरपीएफ पहले सोनिया सहरावत से उनका पक्ष जानेगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च अधिकारी उनसे जवाब मांगेंगे और इसकी जानकारी उन्हें पहले ही दे दी गई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए न्यूज18 ने सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह और सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थीं सोनिया सहरावत

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) में तैनात सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान झड़प में घायल हो गई थीं। इसके बाद वह सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा सबसे चर्चित चेहरा बन गईं। उस दिन सोनिया सहरावत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात आरएएफ की टीम का हिस्सा थीं। झड़प के अगले दिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी तेजी से वायरल हो गई। इस पोस्ट की सीजेपी और कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की, जिसके बाद फोर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के दौरान सोनिया सहरावत के कंधे में चोट लगी और उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ। उनका इलाज किया गया, लेकिन 20 जुलाई के बाद से उन्होंने दोबारा ड्यूटी जॉइन नहीं की है। फिलहाल वह स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को सोनिया सहरावत अन्य घायल जवानों के साथ सीआरपीएफ मुख्यालय पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने भी उनसे मुलाकात की।

अब जांच के दायरे में अकाउंट

असिस्टेंट कमांडेंट  सोनिया सहरावत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6.28 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह यहां अक्सर अपनी निजी जिंदगी और कभी-कभी वर्दी में ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। हालांकि, हाल ही में वायरल हुई उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद अब उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां आधिकारिक जांच के दायरे में आ गई हैं। इस बीच, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बुधवार को सोनिया सहरावत और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अन्य सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मुश्किल हालात में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए जवानों की सराहना की और उनके काम की प्रशंसा की।

सीआरपीएफ की सोशल मीडिया नीति क्या कहती है?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने जवानों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, जवानों को किसी भी पोस्ट में तथ्य और निजी राय के बीच साफ अंतर रखना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया, ब्लॉग या किसी भी ऑनलाइन मंच पर साझा किए गए कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। जवानों को यह भी साफ लिखने की सलाह दी गई है कि उनकी निजी राय सरकार या सीआरपीएफ का आधिकारिक रुख नहीं है। सीआरपीएफ ने अपने कर्मियों को सरकारी नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने और सोशल मीडिया पर राजनीतिक या धार्मिक टिप्पणी करने से भी मना किया है। बल का कहना है कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों की सोशल मीडिया पोस्ट को संगठन के नेतृत्व ने उचित नहीं माना था।

बल की ओर से जारी सलाह में जवानों से यह भी कहा गया है कि वे अपने परिवार और दोस्तों को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में जागरूक करें, ताकि वे अनजाने में कोई संवेदनशील जानकारी साझा न कर दें। इसके अलावा, परिवार की निजता का ध्यान रखने, जरूरत न होने पर लोकेशन और जियो-टैगिंग बंद रखने, निजी अकाउंट की सेटिंग का इस्तेमाल करने और संवेदनशील या विवादित मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरी सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।

महाराष्ट्र के 423 शहरों के लिए ₹44800 करोड़ का प्लान, सड़क-पानी और ट्रैफिक की तस्वीर बदल जाएगी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी 423 शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड नाम से 44800 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना की घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह कार्यक्रम शहरों को अधिक आधुनिक, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम बनाएगा। यह फंड वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे अगले तीन सालों के लिए इसे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है।

फंड का ढांचा: कैसे जुटाया जाएगा 44800 करोड़ रुपये का बजट?

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता इसका ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल है। इसके तहत परियोजनाओं को केंद्र सरकार की सहायता, बाजार उधारी और राज्य के सहयोग के संयोजन के माध्यम से फाइनेंस किया जाएगा। एलिबिल परियोजनाओं को केंद्र सरकार से 25 प्रतिशत तक की फंडिंग मिल सकती है। परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए जुटाना होगा। बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार या संबंधित शहरी स्थानीय निकाय द्वारा दी जाएगी।

छोटे शहरों के लिए विशेष सुविधा

यह योजना महाराष्ट्र के सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए खुली है। छोटे शहरों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए लोन रीपेमेंट गारंटी मैकेनिज्म पेश किया है। इससे छोटी नगरपालिकाओं के लिए वित्तीय बाजारों से धन जुटाना और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को शुरू करना आसान हो जाएगा।

इन 3 मुख्य क्षेत्रों पर रहेगा फोकस और ये प्रोजेक्ट होंगे शामिल

यह फंड मुख्य रूप से तीन व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। पहला जल आपूर्ति और स्वच्छता, दूसरा क्रिएटिव अर्बन डेवलपमेंट और तीसरा शहरों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में मजबूत करना।

किन-किन परियोजनाओं को मिलेगा बजट?

योजना के तहत फंडिंग के लिए एलिजिबल प्रोडेक्ट्स यहां नीचे देखे जा सकते हैं:-

डिजिटल गवर्नेंस और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

पुराने शहरी इलाकों व बाजारों का पुनर्विकास

नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट, ट्रांजिट हब्स और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट

शहरी बाढ़ नियंत्रण और इंटिग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट

ग्रीनफील्ड और सेमी-ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट, सड़कें, फ्लाईओवर्स और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट

लैंड बैंक तैयार करना और शहरी क्षेत्रों से डेयरी गतिविधियों को बाहर ले जाना

20 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए विशेष प्रोजेक्ट

जिन शहरों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है, वहां सरकार कई सुविधाओं को भी प्राथमिकता देगी। इसमें कन्वेंशन सेंटर्स और मनोरंजन सुविधाएं, मॉडर्न पब्लिक लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स इंफ्रा, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, ध्यान केंद्र और वेलनेस पार्क जैसी चीजें शामिल हैं।

परियोजनाओं को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने किया है कि प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन होगा। हर शहर में समर्पित मिशन मैनेजमेंट सेल्स बनाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक परियोजनाओं को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स के माध्यम से भी लागू किया जा सकता है।

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इसे सिर्फ एक फंडिंग स्कीम की बजाय कायाकल्प का रोडमैप बताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह फंड नागरिक सुविधाओं में सुधार करेगा, शहरी सेवाओं को मजबूत करेगा, निवेश लेकर आएगा, रोजगार पैदा करेगा और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सरकार का उद्देश्य एक कॉम्पिटेटिव , टिकाऊ और फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट शहरों को तैयार करना है।