भारत के स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर वर्ल्ड मीडिया:NYT ने लिखा- प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन झुके नहीं; गार्डियन बोला- छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पथराव भी हुआ। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को प्रमुखता से कवर किया है। पढ़िए, भारत के इस युवा आंदोलन पर विदेशी मीडिया ने क्या लिखा… न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे अडिग अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटे। अखबार के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाबदेही की मांग पर डटे रहे। अखबार ने लिखा कि संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समूहों के अनुसार, सोमवार की झड़प में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया। द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र आंदोलन जारी है। अखबार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर लौटे और आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 50 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। अखबार ने लिखा कि बाद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। द गार्डियन ने प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी चोटें आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 60 लोग घायल हुए, जबकि एक प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अखबार ने लिखा कि आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की। अल जजीरा: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन छात्र फिर सड़कों पर अल जजीरा ने लिखा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। रिपोर्ट में कहा गया कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। अल जजीरा ने घटनास्थल पर टूटे बैरिकेड, बिखरे सामान और संघर्ष के निशानों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर युवाओं में पिछले दो महीनों से नाराजगी है। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक आंदोलन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई। विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। BBC: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें कम से कम 60 लोग घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने 118 जवानों के घायल होने और 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बना मंच और अस्थायी टेंट भी हटा दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने BBC को बताया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। हालांकि, पुलिस और केंद्र सरकार ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। BBC ने अपनी रिपोर्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला।

पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

Sonam Wangchuk: 23 दिन से भूख हड़ताल…कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट

राजधानी दिल्ली में सोमवार 20 जुलाई को खूब गहमा-गहमी दिखी। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान में काफी कुछ देखने को मिला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अस्पताल में भर्ती हैं। उनके हेल्थ को लेकर अस्पताल से बड़ी जानकारी दी है।

बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें खुद अस्पताल से जाकर मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी जाती। फिलहाल सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके ब्लड शुगर स्तर को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि उन्हें शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार, उनकी जरूरी स्वास्थ्य जांच के सभी प्रमुख संकेत फिलहाल स्थिर हैं। अस्पताल ने कहा कि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। हालांकि, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिए जाने के बाद खून से जुड़े दूसरे जांच परिणामों में सुधार देखा गया है।

बुलेटिन के मुताबिक, वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से पूरी तरह उबरने और किसी भी संभावित परेशानी का समय रहते पता लगाने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। अस्पताल ने यह भी बताया कि आगे का इलाज उनकी सेहत में होने वाले सुधार और लैब जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।

Fact Check: क्या CJP प्रोटेस्ट के दौरान सड़कों पर हथियार लेकर उतरी सेना, जानें वायरल दावे की सच्चाई

भारतीय सेना ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे दावों में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी वीडियो, फोटो या संदेश पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें।

पथराव और तोड़फोड़…CJP प्रोटेस्ट में पांच IPS अधिकारी समेत 50 जवान घायल, पुलिस दर्ज करेगी FIR

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खूब गहमा-गहमी देखने को मिली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को संसद चलो मार्च का आयोजन किया। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। वहीं प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। वहीं, अब तक 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया FIR

पुलिस ने बताया कि अलग-अलग जगहों से मिली शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से बने वीडियो की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर से किसी भी प्रदर्शनकारी को नहीं हटाया गया। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई, जिन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाजी की, संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और पुलिस पर हमला किया।

पुलिस के अनुसार, कई तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है। अधिकारियों का दावा है कि पुलिस ने लंबे समय तक संयम बनाए रखा। पुलिस ने यह भी कहा कि नई दिल्ली में जब हिंसक भीड़ ने दुकानों को निशाना बनाने और लगातार पत्थरबाजी करने की कोशिश की, तब स्थिति को काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि जेपी नड्‌डा से मिले। इनका दावा है कि नड्डा ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि जंतर-मंतर और उसके आस-पास अब कोई कार्रवाई नहीं होगी।

CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सुबह शुरू हुआ आंदोलन दोपहर तक टकराव में बदल गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद झड़प, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की स्थिति बनी। CJP की ओर से अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया था, जिसे बाद में पुलिस और संगठन दोनों ने खारिज कर दिया। सुबह से देर शाम तक चले घटनाक्रम की पूरी झलक इन 10 तस्वीरों में देखें।

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प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया, मंच खाली कराया गया और टेंट भी हटाए गए। इसके बाद कनॉट प्लेस इलाके से भी प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प, सुरक्षा इंतजाम और हंगामे की तस्वीरें सामने आईं।

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जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में जुटे आंदोलनकारी, सुबह से जारी रहा विरोध प्रदर्शन।

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प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई, सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी रहा आंदोलन।

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका रास्ता।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प,  कई प्रदर्शनकारी बैरिकैट्‍स पर भी गिर पड़े।

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CJP प्रदर्शन  से दिनभर तनाव का माहौल रहा।

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संसद की सुरक्षा बढ़ाई गई, प्रदर्शन के बाद इलाके में तैनात किए गए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी

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सुबह से संसद की अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाई गई थी 

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प्रदर्शनकारियों ने नारे भी लगाए

CJP Delhi Protest : जंतर-मंतर पर भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बरसाई लाठियां

CJP Sansad March Lathicharge: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो मार्च’ के बीच भारी बवाल हो गया है। संसद भवन की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगा रखे थे, लेकिन जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया है।

इस समय जंतर-मंतर और दिल्ली के वीआईपी इलाकों में क्या हालात हैं, आइए जानते हैं अब तक के सभी बड़े अपडेट्स।

बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश के बाद एक्शन, पुलिस का लाठीचार्ज

सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP के नेतृत्व में हजारो प्रदर्शनकारी संसद की तरफ मार्च निकालने के लिए जंतर-मंतर पर जमा हुए है। नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू होने के कारण पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से मार्च न निकालने की अपील कर रही थी।

जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग और रफी मार्ग की तरफ बढ़ने के लिए पुलिस के मल्टी-लेयर बैरिकेड्स को धक्का देना और उन्हें पार करना शुरू किया, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया।

सफदरजंग अस्पताल में भी बढ़े सुरक्षा घेरे, समर्थक आक्रोशित

जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के बाद सफदरजंग अस्पताल के बाहर भी हलचल काफी तेज हो गई है। अस्पताल में भर्ती पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पहले से ही अनशन पर बैठे हैं। CJP समर्थकों का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस ने जानबूझकर बल प्रयोग किया है, जिससे कई लोग घायल हुए हैं।

लुटियंस जोन पूरी तरह ठप, ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई

लाठीचार्ज और हंगामे के बाद पूरी नई दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है, जिससे लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया है। पार्लियामेंट स्ट्रीट, रायसीना रोड, रफी मार्ग और अशोक रोड को सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।

पटेल चौक और विजय चौक पर पर सुरक्षा बलों और दंगा नियंत्रण वाहनों (RAF) की भारी तैनाती के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ऑफिस जाने वाले लोगों और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति धारा 163 के नियमों का उल्लंघन कर सड़कों पर हुड़दंग मचाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो के ये 5 स्टेशन बंद, घर से निकलने से पहले देख लें ट्रैफिक एडवाइजरी

CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोमवार (20 जुलाई) को सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से निकाले जा रहे विरोध मार्च के मद्देनजर उठाया गया है। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक पोस्ट में कहा कि अगले आदेश तक ये पांचों मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। CJP ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विरोध मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। संसद के मानसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए सोमवार को दिल्ली पुलिस अत्यधिक सतर्क है। जंतर-मंतर, संसद और अन्य प्रमुख स्थानों के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

अनशन पर अड़े वांगचुक, रखीं ये शर्तें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि उनकी भूख हड़ताल प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च के बाद भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल में हुई विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या राजनीतिक दलों के नेता उन्हें यह भरोसा देंगे कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक संदेश में वांगचुक ने लिखा, “आपमें से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी 20 जुलाई तक स्वीकार करती है, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा।”

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो उनका अनशन जारी रहेगा। वांगचुक ने कहा कि वह अपना अनशन तब भी समाप्त कर देंगे, यदि कॉकरोच जनता पार्टी का नेतृत्व और वह स्वयं संसद के गेट तक पहुंचते हैं और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद तथा नेता उन्हें यह आश्वासन देते हैं कि वे इस मुद्दे को अब संसद में उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “यदि मेरी सेहत या अन्य कारणों से मैं संसद तक नहीं पहुंच पाता, तो विभिन्न दलों के सम्मानित सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे यही आश्वासन दें।” वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

उन्होंने लिखा, “मैं सफदरजंग अस्पताल में अवैध हिरासत में हूं, जहां मेरी आवाजाही, अभिव्यक्ति और हर तरह के संचार की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई है।” शनिवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा था कि यदि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल आकर उन्हें यह भरोसा दें कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

आंग्मो ने ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल समर्थकों से वांगचुक की ओर से शांति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की अपील भी की थी कि आंदोलन का किसी तरह दुरुपयोग न हो। वांगचुक ने कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके के आंदोलन का समर्थन करते हुए 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

लगातार 21 दिन तक अनशन करने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। उनके समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

sonam wangchuk hunger strike

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने के लिए राजी है लेकिन उन्होंने इसके लिए 3 शर्ते रखी है। ALSO READ: क्‍या अनशन खत्‍म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्‍या बोली पत्‍नी?

 

क्या है सोनम वांगचुक की 3 शर्ते?

समर्थकों को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि—

 

(क) सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

 

(ख) यदि मैं और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का नेतृत्व संसद पहुंच जाएं, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता हमें यह आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में अवश्य उठाएंगे।

 

(ग) यदि मेरी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य कारणों से यह संभव न हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे ऊपर दिया गया आश्वासन दें। ALSO READ: Sonam Wangchuk News : 20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन, सोनम का X पर पोस्ट, पत्नी की हाईकोर्ट में याचिका

 

पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा, सफदरजंग अस्पताल में कथित अवैध हिरासत से, जहां मेरी आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी प्रकार के संचार के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उपचार उनकी सहमति से किया जा रहा है।

संसद मार्च पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

LIVE: CJP संसद मार्च पर अड़ी, दिल्ली में धारा 163 लागू

cjp protest delhi

Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्च पर अड़ी। दिल्ली में धारा 163 लागू। पल पल की जानकारी…

जम्मू-कश्मीर: कल रात से हो रही लगातार बारिश की वजह से रियासी ज़िले में चिनाब नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और नदी का पानी कई निचले इलाकों में बहने लगा है।कांग्रेस के लोकसभा सांसद विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए संसद में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) के दफ्तर में सुबह 10.30 बजे मिलेंगे।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, 'भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से ज़िंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।'

-संसद के मानसून सत्र और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

-पुलिस हाई अलर्ट पर है। 5000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है।

-संसद, इंडिया गेट और VVIP इलाकों के आस-पास के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

-दिल्ली पुलिस ने इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्टा होने पर रोक।