China: ट्रक के टायर पर बैठ 3 घंटे तक बाढ़ में तैरता रहा शख्स, वजह जानकर भावुक हो जाएंगे आप

दक्षिणी चीन से सामने आई एक भावुक कर देने वाली कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया है। गुआंग्शी झुआंग स्वायत्त क्षेत्र में रहने वाले 30 साल के जी (Xie) ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की चिंता में ऐसा कदम उठाया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। लगातार बारिश और भयानक बाढ़ के कारण जब माता-पिता से संपर्क टूट गया, तो बेटे ने इंतजार करने के बजाय खुद उन्हें खोजने का फैसला किया। खतरनाक बाढ़ के पानी, तेज बहाव और मुश्किल हालात के बीच शिए करीब तीन घंटे तक तैरता रहा और अपने माता-पिता तक पहुंचने की कोशिश करता रहा।

इस दौरान उसकी हिम्मत और परिवार के प्रति प्यार ने लोगों को भावुक कर दिया। जी (Xie) की ये कहानी बताती है कि अपनों की चिंता इंसान को बड़े से बड़े खतरे का सामना करने की ताकत दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी लोग उसकी बहादुरी की जमकर सराहना कर रहे हैं।

बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही

गुआंग्शी क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और कई लोगों की जान भी चली गई। जी (Xie) के माता-पिता किनझोउ शहर के पास एक गांव में रहते थे, जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल था।

पिता चावल बचाने गए और फिर नहीं लौटे

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बाढ़ का पानी घर के आसपास बढ़ने लगा था। घटना से एक रात पहले जी (Xie) की मां ने उसे फोन कर बताया कि उसके पिता हाल ही में कटे हुए चावल को बचाने के लिए बाहर गए हैं, लेकिन काफी समय बाद भी वापस नहीं लौटे। बिजली कटने और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने के कारण जी (Xie) अपने माता-पिता से दोबारा संपर्क नहीं कर पाया। उसे डर सताने लगा कि कहीं उसके 63 वर्षीय पिता बाढ़ के तेज बहाव में बह तो नहीं गए।

टायरों के सहारे शुरू किया खतरनाक सफर

अगली सुबह शिए ने अपने एक दोस्त के साथ माता-पिता के गांव जाने का फैसला किया। शहर से गांव की दूरी करीब 10 किलोमीटर थी और रास्ते में हर तरफ पानी भरा हुआ था। बाढ़ पार करने के लिए दोनों ने एक स्थानीय दुकान से ट्रक के दो पुराने टायर खरीदे और उन्हें तैरने के सहारे के रूप में इस्तेमाल किया।

तेज धार और ठंडे पानी के बीच जारी रही जंग

जी (Xie)पहले से अच्छा तैराक था, लेकिन उसने माना कि यह सफर आसान नहीं था। रास्ते में तेज बहाव और ठंडे पानी ने मुश्किलें बढ़ा दीं। कई जगह उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। बताया गया कि अंतिम एक किलोमीटर की दूरी तय करने में ही लगभग एक घंटा लग गया।

ऊपरी मंजिल पर फंसे मिले पिता

कई घंटों की मेहनत के बाद जब शिए अपने घर पहुंचा, तो उसने देखा कि बढ़ते पानी के कारण उसके पिता घर की ऊपरी मंजिल पर फंस गए थे। पिता को सुरक्षित देखकर बेटे को राहत मिली। इसके बाद जी (Xie) ने अपने पिता को घर के पीछे बने संकरे रास्ते से निकालकर ऊंचाई वाले दूसरे घर तक पहुंचाया, जहां वह सुरक्षित रह सके।

बेटे ने पहले बचाया, फिर पिता को समझाया

पिता को सुरक्षित देखने के बाद जी (Xie) ने उन्हें डांट भी लगाई। उसने कहा कि चावल बचाने के लिए अपनी जिंदगी खतरे में डालना सही फैसला नहीं था। शिए ने बताया कि पिता उसे देखकर मुस्कुराए थे, लेकिन उसने तुरंत उन्हें समझाया कि किसी भी सामान से ज्यादा जरूरी इंसान की जिंदगी होती है।

मुश्किल समय में बेटे के प्यार की मिसाल

जी (Xie) की यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। बाढ़ जैसी खतरनाक स्थिति में अपने माता-पिता के लिए उसकी हिम्मत, चिंता और प्यार ने लोगों को भावुक कर दिया। यह घटना दिखाती है कि परिवार के प्रति जिम्मेदारी और अपनापन इंसान को मुश्किल से मुश्किल हालात का सामना करने की ताकत दे सकता है।

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CM मोहन यादव का ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ विजन विकास को दे रहा नई दिशा, जनता को ला रहा करीब

Chief Minister Mohan Yadav's Destination Cabinet vision is giving new direction to development

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासन की पारंपरिक शैली और विकास को अपने विजन से नई दिशा दी है। राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन से बाहर निकलकर प्रदेश के विभिन्न शहरों, ऐतिहासिक स्थलों और पिछड़े क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने की 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' पहल न केवल शासन को जनता के करीब लाई है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और विकास को भी नई गति  प्रदान की है। यह पहल विकास और विरासत को साथ-साथ ले जाने का अनूठा उदाहरण बन गई है।

 

जनता तक शासन की सीधी पहुंच

पहले एमपी की कैबिनेट बैठकें हमेशा राजधानी भोपाल स्थित वल्लभ भवन में ही होती थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने इस परंपरा को तोड़ते हुए वर्ष 2024 से 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' के नए कांसेप्ट की शुरुआत की। इसका मकसद सिर्फ फैसले लेना नहीं, बल्कि उन स्थानों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को उजागर करना भी है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर कैबिनेट बैठकें छोटे शहरों, आदिवासी क्षेत्रों और गौरवशाली स्थलों पर हो रही हैं।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है और जनता तक शासन की पहुंच हो रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की डेस्टिनेशन कैबिनेट की यह अनूठी पहल राज्य के विकास में नया रंग भर रही है। इस मॉडल के जरिए सरकार जनता के बीच जाकर फैसले ले रही है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी हो गया है।

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जन- जन तक पहुंच रहे सरकार के फैसले

'डेस्टिनेशन कैबिनेट' सरीखी पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की मैदानी समीक्षा करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है। एक तरफ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर कैबिनेट बैठकें होने से उन क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल रही है, वहीं, सरकार के फैसलों को सिर्फ वल्लभ भवन तक सीमित रखने के बजाय, सरकार राज्य के कोने-कोने तक पहुंच रही है।

 

'डेस्टिनेशन कैबिनेट’ ने बदली शासन की कार्यशैली

मोहन सरकार ने ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ के जरिए शासन की कार्यशैली को बदला है। अब अधिकारी एसी कमरों की चहारदीवारी से निकलकर पहली बार फील्ड गवर्नेंस की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां फैसले वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल से बाहर सीधे जनता के बीच लिए जा रहे हैं। पहले आयोजित इन 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' बैठकों में ओरछा, चित्रकूट, महेश्वर, सिंग्रामपुर, विश्व धरोहर स्थल खजुराहो, नागलवाड़ी, इंदौर का राजवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को शामिल किया गया।

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इससे स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर उभारने और स्थानीय विकास को गति मिली है। पचमढ़ी में जनप्रिय शासक रहे भभूत सिंह की स्मृति में डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, वहीं रानी दुर्गावती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई की स्मृति में भी भव्य डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित की गई।

प्रदेश में जिन स्थानों में डेस्टिनेशन कैबिनेट का आयोजन किया जा चुका है उन क्षेत्रों में विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से प्राथमिकता मिल रही है। इससे स्थानीय विकास की गति तेज हो गई है। अब राजधानी भोपाल से सटे प्राचीन महल और स्मारक वाले गांव जगदीशपुर में रविवार 19 जुलाई को सरकार की डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित की जा रही है।

 

अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक

मोहन सरकार का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि शासन केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर रंग भरने का माध्यम भी है। इससे जहां एक तरफ पर्यटन विकास को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत विजन को धरातल पर उतारा जा रहा है।

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मोहन की 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' प्रदेश को इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन, कल्चरल डेस्टिनेशन के साथ डेवेलपमेंट डेस्टिनेशन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह नई पहल विकास, संस्कृति और जन-सहभागिता का सुंदर समन्वय और सामंजस्य है, जो मध्यप्रदेश को दिन पर दिन नई ऊंचाइयों की तरफ ले जा रही है।

…तो बंद हो गया होता यूपी का चीनी उद्योग : सीएम योगी

CM Yogi Amroha rally: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास, औद्योगिक निवेश व किसानों को गन्ना भुगतान संभव नहीं था। 2007 से 2017 के बीच सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 चीनी मिलों को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। यदि वे सरकारें अभी होतीं तो अब तक यूपी का चीनी उद्योग बंद हो चुका होता। डबल इंजन की भाजपा सरकार 122 चीनी मिलों का संचालन कर रही है। 3.23 लाख करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। गन्ना मूल्य भी बढ़कर 400 रुपए प्रति कुंतल हो गया है। यूपी अब चीनी, गन्ना, एथेनॉल उत्पादन करने वाला नंबर-वन राज्य है।

 

सीएम योगी शनिवार को वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला में अमरोहा व धनौरा विधानसभा क्षेत्र के लिए 207 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 43 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर जनपद के आध्यात्मिक इतिहास व महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कह सकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कहेगा। इसने हस्तशिल्प व कारीगरी के माध्यम से दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। ओडीओपी के जरिए अमरोहा के तबला व ढोलक की पहचान बनी है। यहां का किसान आम की उपज को वैश्विक बाजार में पहुंचा रहा है। मध्य गंगा नहर परियोजना भी पूरी हो रही है। गंगा एक्सप्रेसवे ने राह आसान कर दी है। 10 साल पहले कोई सोच नहीं सकता था कि अमरोहा से दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज की दूरी कम हो पाएगी। अब अमरोहा से हरिद्वार की दूरी भी आसान बनाएंगे और किसानों को जमीन का अच्छा दाम देंगे। विकास के नए प्रतिमान पर स्थापित हो रहा अमरोहा अपनी नई पहचान बनाएगा। औद्योगिक विकास के लिए हसनपुर में बन रहा पार्क जनपद को नई ऊंचाई देगा। 

यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ बरस रही समृद्धि 

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में आगामी 50-100 वर्ष की योजना को लेकर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। अब नौजवान बेरोजगार नहीं होगा, पलायन नहीं करेगा। 2017 के बाद से यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ समृद्धि बरस रही है। सरकार तिगरी व गढ़ के लिए काम कर रही है। मां गंगा तिगरी की तरफ कुछ बढ़ रही हैं, इसलिए सिंचाई विभाग को निर्देश दिया गया है कि गंगाजी को चैनलाइज कर तिगरी व गढ़ मेले के स्वरूप को और भव्य करो, जिससे यह पश्चिमी उप्र में माघ व कुंभ मेले की तरह चमकता दिखे। 

पहले आस्था पर होता था प्रहार, अब किसी त्योहार पर रोक नहीं 

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले आस्था पर प्रहार होता था। कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, रामनवमी की शोभायात्रा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक लगाई जाती थी। जयश्रीराम कहने पर लाठी-डंडे चलते थे और सरकारें मौन रहती थीं लेकिन अब किसी त्योहार पर रोक नहीं है, बल्कि सरकार आस्था का सम्मान करते हुए हरसंभव सहयोग करती है।

सुरक्षा में सेंध लगाने वाले जेल या जहन्नुम जाएंगे 

सीएम ने जनपदवासियों से कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों के हर प्रस्ताव को धरातल पर उतार रही है। विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी नहीं है, लेकिन इसके लिए समय, सोच, संवेदना, नीति और नीयत चाहिए। पिछली सरकारों में हर जनपद में दंगे होते थे, लोग असुरक्षित थे। हमने कहा कि सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम ही जगह है। हमारी सरकार ने माफिया को मिट्टी में मिलाने का काम किया।

यहां के लोग कभी एक मंत्री से थे आतंकित

सीएम ने कहा कि यूपी अब सुरक्षा का मॉडल दे रहा है। सुरक्षा सुशासन लाती है। सुशासन निवेश और निवेश समृद्धि लेकर आता है। अब हर भर्ती में अमरोहा-धनौरा का नौजवान भी नियुक्ति पत्र पाता है, लेकिन पहले रामपुर व सैफई का सिडिंकेट नौकरियों में डकैती डालता था। अब आपकी अपनी सरकार है, कोई हक पर डकैती नहीं डाल सकता। 2017 में महेंद्र खड़गवंशी के प्रचार में आया था तो लोग एक मंत्री के आतंक से भयभीत थे। तब मैंने कहा था कि भाजपा सरकार आएगी तो ये सभी दुम दबाकर बिल में घुसकर ही खुद को सुरक्षित कर पाएंगे। अब यहां किसी का भय या आतंक नहीं। 

सीएम ने चेतन चौहान को भी याद किया

मुख्यमंत्री ने पूर्व क्रिकेटर व पूर्व मंत्री चेतन चौहान को भी याद किया। कहा कि वह नौगावां सादात व जनपद में खेल, विकास को बढ़ाने के लिए समर्पित थे। एनडीए सरकार चौधरी चरण सिंह के सपनों को साकार कर रही है। हर तबके को बिना भेदभाव सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जबकि 2017 के पहले यह संभव नहीं था।

 

गरीबों के हक पर डकैती डालते थे सपा-कांग्रेस के लोग

सीएम ने कहा कि कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने अपनी लाचारगी जताते हुए कहा था कि 100 में से 85 पैसे ही नीचे जनता तक पहुंचते हैं। यह छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि, गरीब के राशन, आवास, पेंशन, शौचालय का पैसा था, जिस पर सपा व कांग्रेस वाले डकैती डालते थे। अब डबल इंजन सरकार में गरीब को पूरी रकम सीधे उसके बैंक खाते में मिलती है। 

हर वर्ग के लिए योजनाएं लाई है सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर वर्ग के लिए योजनाएं हैं। निराश्रितों के लिए अटल आवासीय विद्यालय, गरीब, पिछड़ी व अनुसूचित जाति की बच्चियों के लिए कस्तूरबा गांधी विद्यालय है। आज मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का शिलान्यास भी हो रहा है। बेटियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार ने हाल में शिक्षकों के लिए हर वर्ष पांच लाख रुपए के कैशलेस इलाज की व्यवस्था की है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपए किया गया है। हर शिक्षामित्र, अनुदेशक, शिक्षक के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना भी लागू की गई। आपदा की चपेट में आने वाले शिक्षक के परिजनों को 80 लाख से डेढ़ करोड़ की सहायता मिलेगी। शिक्षामित्र या अनुदेशक के साथ घटना-दुर्घटना होने पर परिवार वालों को 30 से 80 लाख रुपए तथा रसोइया के परिजनों को दो लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। आपदा की चपेट में आने वाले किसानों के परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना में 24 घंटे के भीतर पांच लाख रुपए की सहायता दिलाई जाती है। 

विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं तरारा व खड़गवंशी, अमरोहा व नौगावां सादात वाले रजाई तानकर सोते हैं 

सीएम ने कहा कि किसानों-नौजवानों के हित में सरकारें आती हैं तो हर वर्ग के विकास के लिए कार्य होता है। जहां खानदान का कब्जा हो और एक ही परिवार सभी पदों पर काबिज हो, वहां विकास नहीं हो सकता। आपने राजीव तरारा व महेंद्र सिंह खड़गवंशी जैसे अच्छे विधायकों व कंवर सिंह तंवर को सांसद चुना तो विकास कार्य हो रहे हैं। हमारे विधायक निरंतर विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं। अमरोहा सदर व नौगावां सादात वाले शासन में पैरवी नहीं करते, वे जीतने के बाद रजाई तानकर सो गए। जनता ने इन दोनों क्षेत्रों में भी कमल खिलाया होता तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती। सीएम ने अमरोहावासियों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार हर हित का ध्यान रखेगी। उन्होंने पैरोकारी के लिए अच्छे विधायक व सांसद चुनने की अपील करते हुए आमजन को आश्वस्त किया कि जल्द ही वे नौगावां सादात व हसनपुर भी आएंगे।

 

इस अवसर पर कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, सांसद कंवर सिंह तंवर, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर, विधायक राजीव तरारा, महेंद्र सिंह खड़गवंशी, विधान परिषद सदस्य हरि सिंह ढिल्लो, भाजपा के जिलाध्यक्ष उदय गिरि गोस्वामी आदि मौजूद रहे।

बेटी और व्यापारी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों की जगह है जेल या जहन्नुम में : योगी

Yogi Bulandshahr visit: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भय, दहशत और असुरक्षा का माहौल था। उस समय बुलंदशहर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दंगे होते थे और कर्फ्यू लगता था। उस दौर में बेटियां और व्यापारी स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे तथा कई परिवारों ने अपनी बेटियों की पढ़ाई तक बंद करा दी थी। पहले हर जिले में माफिया और हर थाने में वसूली का सिंडिकेट सक्रिय था। गरीबों को न्याय नहीं मिलता था, महिलाओं की सुरक्षा नहीं थी और व्यापारियों को भय के माहौल में काम करना पड़ता था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब यहां सब चंगा है। सरकार ने माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने दोहराया कि माफिया को मिट्टी में मिलाएंगे और ऐसा करके दिखाया गया। बेटी और व्यापारी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए केवल दो ही जगह हैं-जेल या जहन्नुम।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुलंदशहर व सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र में 574 करोड़ से अधिक की 57 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को लैपटॉप/चेक/ चाबी/थर्मल प्रिंटर/आयुष्मान कार्ड/छात्रवृत्ति/सब्सिडी/टूलकिट एवं प्रमाण पत्र वितरित किए। इससे पहले प्रदर्शनी का अवलोकन करने के दौरान सीएम ने छोटे बच्चों को खिलौना देकर दुलार किया।

गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट से मिलेगी नई रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर भी पूरी तरह बदल चुका है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब वह बुलंदशहर आए थे, तब यहां भय और दहशत का माहौल था, लेकिन आज बुलंदशहर निर्भय होकर विकास की प्रक्रिया से मजबूती के साथ जुड़ चुका है। देश का सबसे बड़ा गंगा एक्सप्रेसवे बुलंदशहर से होकर गुजर रहा है, जिससे प्रयागराज तक की यात्रा करीब पांच घंटे में पूरी होगी। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों की मांग पर गंगा एक्सप्रेसवे को जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे को भी स्वीकृति दे दी गई है। किसानों के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग को भी सरकार ने स्वीकार किया है।

बुलंदशहर और जेवर एयरपोर्ट की दूरी वॉकिंग डिस्टेंस जैसी महसूस होगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी के साथ बुलंदशहर औद्योगीकरण के नए युग में प्रवेश करेगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो चुका है और यह केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की समृद्धि का आधार बनने जा रहा है। करीब 14 हजार एकड़ में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट एयरक्राफ्ट रिपेयर एंड मेंटिनेंस (एमआरओ) का बड़ा केंद्र बनने के साथ-साथ कार्गो संचालन तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए उत्कृष्ट एयर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुलंदशहर और जेवर एयरपोर्ट के बीच की दूरी इतनी कम हो जाएगी कि वह वॉकिंग डिस्टेंस जैसी महसूस होगी। उन्होंने बताया कि हाल ही में जनप्रतिनिधियों ने बुलंदशहर के लिए रिंग रोड की मांग रखी थी। उसी समय प्रस्ताव को तत्काल आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया था और अब यह बताते हुए प्रसन्नता है कि रिंग रोड का प्रस्ताव भी स्वीकृत हो चुका है।

बुलंदशहर की पहचान, जय जवान और जय किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बुलंदशहर में विकास, सुरक्षा और समृद्धि एक साथ दिखाई देती है। खुर्जा की क्रॉकरी को वैश्विक पहचान मिली है, युवाओं को छात्रवृत्ति और रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वह श्रद्धेय रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर से आ रहे हैं और बुलंदशहर देश को सबसे अधिक सैनिक देने वाले जनपदों में शामिल है। यहां लगभग हर गांव में पूर्व सैनिक या सैन्य अधिकारी मिल जाएंगे, इसलिए बुलंदशहर में 'जय जवान, जय किसान' का भाव साकार होता है।

मोबाइल निर्माण और उद्योग में यूपी नंबर वन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बुलंदशहर में बाबू जी के नाम पर कल्याण सिंह मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुका है। खुर्जा की क्रॉकरी और क्षेत्र के गन्ना किसानों की पहचान अब बेहतर कनेक्टिविटी के साथ देश-दुनिया तक पहुंचेगी। जेवर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ इंटरनेशनल फिल्म सिटी, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी और फिनटेक सिटी का भी विकास किया जा रहा है, जिसका सबसे अधिक लाभ बुलंदशहर को मिलेगा। उत्तर प्रदेश आज मोबाइल निर्माण में देश में पहले स्थान पर है। देश में बनने वाले 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे हैं। प्रदेश चीनी मिलों के संचालन, गन्ना उत्पादन और इथेनॉल उत्पादन में भी देश में नंबर एक है।

बॉटम से टॉप पर पहुंचा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, लेकिन आज प्रदेश विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी की पहचान टूटी सड़कों और अंधेरे से होती थी, जबकि अब यहां ग्लोबल स्टैंडर्ड के एक्सप्रेसवे और बेहतर आधारभूत ढांचा विकसित हुआ है। बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे केवल यात्रा का समय कम नहीं करते, बल्कि विकास और समृद्धि की गति भी बढ़ाते हैं। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से अर्थव्यवस्था तेज होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

 

बुलंदशहर के किसानों ने सरकार पर भरोसा करते हुए विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी। सरकार ने किसानों से किया गया वादा निभाते हुए उनका मुआवजा बढ़ाया है और बढ़ी हुई राशि उपलब्ध कराई जा रही है। बुलंदशहर की जनता ने लोकसभा की दोनों सीटों और सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को समर्थन दिया है। बुलंदशहर की जनता का हम पर बहुत बड़ा कर्ज है और हम विकास कार्यों के माध्यम से उसे ब्याज सहित चुकाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है यूपी 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने युवाओं से वादा किया था कि उनकी नौकरियों में कोई सेंध नहीं लगाएगा। आज सरकारी भर्तियां पूरी पारदर्शिता से हो रही हैं और बुलंदशहर के युवा भी नियुक्ति पत्र प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसी की सिफारिश या पैसे के आधार पर नियुक्ति नहीं होती और युवाओं के अधिकारों पर कोई डाका नहीं डाल सकता। प्रदेश में मुख्यमंत्री युवा योजना के माध्यम से युवा अपना उद्यम स्थापित कर रहे हैं। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के जरिए पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिल रही है।

 

प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश लगातार पहले या दूसरे स्थान पर रहता है। प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर बन रहे हैं।

टीम वर्क और डबल इंजन सरकार की गति का परिणाम है कि विकास हो रहा 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास टीम वर्क और डबल इंजन सरकार की गति का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश विरासत और विकास की यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। वर्ष 2017 से पहले की सरकारों के पास जनता, किसानों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों के लिए समय और संवेदनशीलता नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों को राशन, आवास, स्वास्थ्य बीमा और रसोई गैस जैसी योजनाओं का लाभ पहले भी दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आज प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना और उज्ज्वला जैसी योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंच रहा है।

बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में 29 चीनी मिलें बंद हुईं और 21 चीनी मिलों को औने-पौने दाम पर बेच दिया गया। वर्तमान सरकार बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है और उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने गन्ना किसानों और अन्नदाता किसानों के उत्थान के लिए लगातार काम किया है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

पिछली सरकारों ने किसानों और युवाओं का शोषण किया

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने किसानों, युवाओं, महिलाओं और व्यापारियों के हितों की अनदेखी की। किसानों और युवाओं का शोषण किया गया, महिलाओं की सुरक्षा से समझौता हुआ और व्यापारियों व उद्यमियों को भय के माहौल में काम करना पड़ा। इन परिस्थितियों के कारण उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंच गया था, लेकिन अब प्रदेश उस स्थिति से बाहर निकल चुका है।

विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश विरासत और विकास के समन्वय का उदाहरण बन चुका है। विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेकर सरकार आगे बढ़ रही है और इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनता के आशीर्वाद की आवश्यकता है। केवल बुलंदशहर सदर और सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्रों में ही लगभग पौने छह सौ करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है। इसके अलावा जिले और क्षेत्र में अनेक अन्य विकास परियोजनाएं पहले से संचालित हैं।

सरकार संवाद, समन्वय और समृद्धि के मॉडल पर कार्य कर रही

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संवाद, समन्वय और समृद्धि के मॉडल पर कार्य कर रही है। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार सुरक्षा और सुशासन का ऐसा मॉडल देगी, जिसकी कोई तुलना नहीं होगी और जो रामराज्य की अवधारणा को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। बुलंदशहर की जनता ने अच्छे जनप्रतिनिधि चुने हैं, जो क्षेत्र की समस्याओं और विकास योजनाओं को लखनऊ और दिल्ली तक प्रभावी ढंग से पहुंचा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि क्षेत्र को लगातार नई विकास परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। सीएम ने बुलंदशहर सदर, सिकंदराबाद और जिले के सभी नागरिकों को विकास परियोजनाओं के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

लाभार्थियों को वितरित किए गए चेक/लैपटॉप/ स्वीकृत पत्र और चाबी 

  • पूजा शर्मा (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत 4 लाख 25 हजार का चेक)
  • राजकुमार वर्मा (4 लाख का चेक)
  • महेंद्र प्रताप (टूल किट)
  • कविता शर्मा (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 33 करोड़ 60 हजार का चेक)
  • गीता रानी (विद्युत बिल संग्रहण के लिए थर्मल प्रिंटर)
  • ऋषि पाल (कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 24 लाख रुपए का अनुदान व चाबी)
  • अजय चौधरी (फार्म मशीनरी बैंक की चाबी) 
  • श्याम कुमार (5 लाख रुपए का आयुष्मान कार्ड)
  • मीनाक्षी (छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र)
  • तनुज शर्मा (मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लैपटॉप)
  • डॉली (मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लैपटॉप)
  • पूजा शर्मा (प्रधानमंत्री आवास योजना शहरीय के लिए स्वीकृत पत्र)
  • पूरन गुप्ता (प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वनिध योजना के अंतर्गत 50 हजार का चेक)
  • हेमलता (मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए चाबी)
  • कपिल चौधरी (मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के 4 लाख 80 हजार रुपए से अधिक का चेक)

ये रहे मौजूद 

इस अवसर पर राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर, राज्य सभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर, सांसद महेश शर्मा, सांसद डॉ. भोला सिंह, विधायक प्रदीप चौधरी, विधायक लक्ष्मी राज सिंह, विधायक देवेंद्र सिंह लोधी, विधायक मीनाक्षी सिंह, विधायक संजय शर्मा, विधायक सीपी सिंह, विधान परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी, विधान परिषद के सदस्य श्रीचंद्र शर्मा क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, जिलाध्यक्ष विकास चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. अंतुल तेवतिया आदि मौजूद रहे।

‘न इलाज, न मेडिकल रिपोर्ट’… सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने अस्पताल पर उठाए ये सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। वहीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने शनिवार को आरोप लगाया कि भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इसकी जानकारी न तो उन्हें दी गई और न ही परिवार के किसी सदस्य को।

पत्नी गीतांजलि ने उठाए ये सवाल

मीडिया से बातचीत में आंग्मो ने कहा कि शुक्रवार शाम सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने वांगचुक की जांच की थी। उस समय उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य थे। उन्होंने अस्पताल के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है। आंग्मो ने कहा, “सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से यहां बिना उन्हें या मुझे बताए लाया गया। शुक्रवार शाम डॉक्टरों ने उनकी जांच की थी और उनके सभी स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य थे। अब अस्पताल कह रहा है कि उनका पोटेशियम स्तर बहुत कम हो गया है और यह जानलेवा है। लेकिन जब हमने मेडिकल रिपोर्ट दिखाने को कहा, तो हमें रिपोर्ट नहीं दी गई।”

डॉक्टर कर रहे निगरानी

गीतांजलि जे. आंग्मो ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करने का कोई आदेश नहीं दिया था। उनके मुताबिक, अदालत ने सिर्फ उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच और निगरानी करने के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि फिलहाल वांगचुक का कोई इलाज नहीं किया जा रहा है। डॉक्टर केवल उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं और जरूरी मेडिकल टेस्ट कर रहे हैं। आंग्मो ने कहा कि अस्पताल की रिपोर्ट नहीं मिलने की वजह से परिवार अब किसी बाहरी लैब में दोबारा जांच कराने की तैयारी कर रहा है। आंग्मो ने कहा, “अभी उनका कोई इलाज नहीं चल रहा है। डॉक्टर सिर्फ निगरानी कर रहे हैं और मेडिकल टेस्ट कर रहे हैं। हम अब बाहरी लैब में भी उनकी जांच कराने जा रहे हैं।”

गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल की ओर से बताए गए 2.9 पोटेशियम स्तर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले यह स्तर 4.3 था, इसलिए किसी भी दवा या इलाज से पहले वह रिपोर्ट की दोबारा पुष्टि कराना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक का अनशन अभी भी जारी है। वह केवल नमक मिला पानी पी रहे हैं और चीनी का सेवन नहीं कर रहे हैं। आंग्मो ने कहा, “मैं सरकार की आभारी हूं कि उन्होंने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन आगे का फैसला हम खुद करेंगे। इस मामले में सरकार के किसी और हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से वांगचुक को कमजोरी और मांसपेशियों में कमी महसूस हो रही है। इसके बावजूद वह पूरी तरह सतर्क हैं और मानसिक रूप से मजबूत बने हुए हैं। आंग्मो ने कहा कि सोमवार को प्रस्तावित मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा, चाहे सोनम वांगचुक उसमें शामिल हो पाएं या नहीं।

Priyanka Chopra: राजामौली ने शेयर किया ‘वाराणसी’ से प्रियंका चोपड़ा जोनस का धांसू लुक, कैप्शन हुआ वायरल

Priyanka Chopra: प्रियंका चोपड़ा जोनस अपनी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘वाराणसी’ में दमदार अंदाज में नजर आने वाली हैं। ‘द ब्लफ’ स्टार इंडियन सिनेमा में अपनी वापसी के लिए ‘RRR’ के मशहूर डायरेक्टर एसएस राजामौली के साथ काम कर रही हैं और ‘एंटरटेनमेंट वीकली’ उनके किरदार की पहली तस्वीरें खास तौर पर शेयर कर रहा है।

राजामौली ने सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस की दो फोटोज शेयर की हैं। पहली फिल्म से है। इसमें प्रियंका ब्लैक आउटफिट में एक्शन मोड में दिख रही हैं। वहीं दूसरी फोटो में वह हंसती खिलखिलाती कैजुअल लुक में नजर आ रही हैं। फिल्ममेकर ने कैप्शन में लिखा- मुस्कुराए तो ग्रेस….ना मुस्कुराए तो आग- मंदाकिनी।

‘वाराणसी’ में वह मंदाकिनी का किरदार निभा रही हैं। यह एक “जबरदस्त किरदार है, जो मजबूत और यूनिक होने के साथ-साथ यादगार भी होने वाला है। ग्लोबल हिट फिल्म RRR के बाद राजामौली की यह पहली ओरिजिनल फिल्म है।

‘वाराणसी’ को एक “महाकाव्य जैसी एक्शन-एडवेंचर फिल्म” बताया जा रहा है, जिसकी कहानी हजारों साल के समय में फैली है। प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आज के दौर तक और कई महाद्वीपों से इसका कनेक्शन हैं। इसमें किरदार अंटार्कटिका, अफ्रीका और वाराणसी की यात्रा करते हैं।

फिल्म में लीड एक्टर ‘रुद्र’ का रोल महेश बाबू ने निभाया है, जो भगवान राम के किरदार में भी दिखेंगे। पृथ्वीराज सुकुमारन लीड विलेन ‘कुंभ’ के रोल में हैं। वह व्हीलचेयर पर नजर आते हैं। उनकी सोच “खतरनाक हद तक बेकाबू” है। चोपड़ा का किरदार ‘मंदाकिनी’ इन दोनों पुरुषों के बीच फंसी हुई है।

अपनी भव्य फ़िल्मों के लिए मशहूर राजामौली ने केन्या सरकार से मिली खास इजाजत के साथ, केन्या के मसाई मारा में असली जंगली जानवरों के बीच वाराणसी के सीन शूट किए हैं। हालांकि चोपड़ा ने अपने रोल के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं बताया है, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने पति निक और देवर केविन और जो के पॉडकास्ट “हे जोनास” में इस फ़िल्म के बारे में बात की।

एक्ट्रेस ने कहा कि “मैं पिछले लगभग 14 महीनों से इस पर काम कर रही हूं। लेकिन एस.एस. राजामौली फ़िल्में बनाने में इतना ही समय लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मुझे इस फ़िल्म के लिए बुलाया था, और यह दुनिया भर में और अलग-अलग समय-काल में होने वाला एक ज़बरदस्त एडवेंचर है। इसमें थोड़ा समय तो लगा है, लेकिन मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित हूं। मैंने इसमें कई शानदार स्लो-मोशन जंप किए हैं, इससे ज्यादा नहीं बात कर सकती।”

भारत का दिल यूं ही नहीं कहलाता मध्य प्रदेश, ये 10 डेस्टिनेशन शिमला-मनाली से भी हैं खूबसूरत!

मध्य प्रदेश में जुलाई से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे खूबसूरत माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मानसून की वजह से सूखे पहाड़, जंगल और घाटियां हरे-भरे हो जाते हैं। झरनों में पानी भर जाता है और नेचुरल नजारे बेहद शानदार दिखाई देते हैं। मध्य प्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसकी वजह सिर्फ इसकी जियोग्राफिकल लोकेशन नहीं, बल्कि इसकी अनोखी पहचान भी है। यहां प्राचीन धरोहरों से लेकर घने जंगल, आध्यात्मिक जगह और प्राकृतिक नज़ारे हर तरह के टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं। यहां ऐसी जगहें हैं जहां इस मौसम में नेचर का सबसे सुंदर रूप देखने को मिलता है:

रंग-बिरंगी संस्कृति और झीलों का अट्रैक्शन

222 Upper Lake Bhopal Stock Photos - Free & Royalty-Free Stock Photos from Dreamstime

मध्य प्रदेश प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी कल्चरल डाइवर्सिटी के लिए भी जाना जाता है। यहां की झीलें, हरियाली और शांत वातावरण टूरिस्ट को खास अट्रैक्ट करते हैं। राज्य में हिंदी के अलावा कई भाषाएं बोली जाती हैं। यही डाइवर्सिटी मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक रूप से बेहद खास बनाती है।

1. Pachmarhi, पचमढ़ी – सतपुड़ा की रानी

जटा शंकर गुफाएं, पचमढ़ी, मध्य प्रदेश पर्यटन 2021 | गुफाएं, शिव, जटा शंकर गुफाएं की तस्वीरें - TripInvites - TripInvites

मध्य प्रदेश का सबसे पॉपुलर हिल स्टेशन पचमढ़ी मानसून में बेहद खूबसूरत हो जाता है। चारों तरफ हरियाली, बादलों से ढकी पहाड़ियां और बहते झरने इसे एक शानदार नेचुरल जगह बनाते हैं। यहां बी फॉल, अप्सरा विहार वॉटरफॉल और जटाशंकर गुफा जैसे जगह घूमने लायक हैं। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां की पहाड़ियां हरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं।

 

2. Bhedaghat, भेड़ाघाट – संगमरमर की चट्टानों और झरनों का नजारा

भेड़ाघाट का धुंआधार जलप्रपात - Khabar Lahariya (खबर लहरिया)

जबलपुर के पास भेड़ाघाट अपनी सफेद संगमरमर की चट्टानों और धुआंधार वॉटरफॉल के लिए पॉपुलर है। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी का बहाव बढ़ जाता है और धुआंधार झरना बेहद शक्तिशाली दिखाई देता है। यहां नाव की सवारी करते हुए दोनों ओर ऊंची संगमरमर की चट्टानों का व्यू बेहद अट्रैक्टिव लगता है।

3. Tamia, तामिया – छिपा हुआ हरा-भरा हिल स्टेशन

Tamia in Chhindwara is a peaceful place offering everything from trekking to picnics find out how to get there- भीड़ से दूर सुकून चाहिए... तामिया है सबसे खूबसूरत जगह, ट्रेकिंग से लेकर

तामिया मध्य प्रदेश की कम भीड़ वाली खूबसूरत जगहों में से एक है। मानसून में यहां की घाटियां, जंगल और पहाड़ियां पूरी तरह हरी हो जाती हैं। पातालकोट घाटी के शानदार दृश्य यहां का मेन अट्रैक्शन हैं। बादलों से ढकी घाटियां और शांत वातावरण इसे नेचर लवर के लिए खास बनाते हैं।

 

4. Kapildhara Waterfall, कपिलधारा वॉटरफॉल – अमरकंटक का खूबसूरत झरना

KapilDhar-WaterFall – मराठवाडा टुरिझम डेव्हलपमेंट चेंबर

अमरकंटक एरिया में कपिलधारा वॉटरफॉल बारिश के मौसम में अपने पूरे रूप में दिखाई देता है। ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास फैली हरियाली मन को अट्रैक्ट करती है। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां का वातावरण बेहद ठंडा और सुहावना रहता है।

 

5. Raneh Falls, रानेह फॉल्स – रंग-बिरंगी चट्टानों के बीच झरना

Discover the Raneh Fall from Khajuraho (Guided Halfday Sightseeing Tour by Car) (with Reviews)

खजुराहो के पास स्थित रानेह फॉल्स बारिश के मौसम में देखने लायक होता है। यहां केन नदी गहरी घाटी से होकर बहती है और आसपास अलग-अलग रंगों की ग्रेनाइट चट्टानें दिखाई देती हैं। मानसून के समय पानी का फ्लो बढ़ जाता है और पूरा क्षेत्र नेचुरल ब्यूटी से भर जाता है।

 

हजारों साल पुरानी धरोहरों की पहचान

Madhya Pradesh | District Portal

मध्य प्रदेश का गौरवशाली इतिहास इसकी प्राचीन इमारतों, मंदिरों और स्मारकों में आज भी जीवित है। यहां मौजूद सदियों पुराने मंदिर अपनी यूनिक क्राफ्टमैनशिप और आर्किटेक्टर के लिए दुनियाभर में पॉपुलर हैं। बारीक नक्काशी, ऐतिहासिक किले और प्राचीन धरोहरें इस राज्य की समृद्ध विरासत को दिखाती हैं। इतिहास में इंटरेस्ट रखने वालों के लिए यह राज्य किसी खजाने से कम नहीं है।

 

6. Orchha, ओरछा – नदी, जंगल और नेचुरल ब्यूटी

Chaturbhuj Temple Orchha: A Divine Architectural Marvel | Incredible India

ओरछा अपने ऐतिहासिक महलों और मंदिरों के लिए पॉपुलर है, लेकिन बारिश के मौसम में यहां की नेचुरल ब्यूटी भी देखने लायक होती है। बेतवा नदी का बहाव, आसपास की हरियाली और शांत वातावरण इसे मानसून ट्रिप के लिए शानदार जगह बनाते हैं। यहां हिस्ट्री और नेचर दोनों का आनंद लिया जा सकता है।

 

7. Tincha Waterfall, तिंचा वॉटरफॉल – इंदौर के पास मानसून का पसंदीदा स्थान

Rahatgarh Waterfalls Bhalkund Jalprapat in Rahatgarh,Sagar - Best Tourist Attraction near me in Sagar - Justdial

इंदौर के पास तिंचा फॉल्स बारिश के मौसम में बेहद अट्रैक्टिव हो जाता है। पहाड़ियों के बीच से गिरता पानी और आसपास की हरियाली यहां का मेन अट्रैक्शन है। यह जगह दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए काफी पॉपुलर है।

 

8. Patalpani Waterfall, पातालपानी वॉटरफॉल – झरने और पहाड़ियों का संगम

पाताल पानी जलप्रपात, मध्य प्रदेश पाताल पानी एक बेहद खूबसूरत जलप्रपात है और इंदौर के पास स्थित एक प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट है। इस जलप्रपात की ...

इंदौर के पास पातालपानी झरना मानसून में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। ऊंचाई से गिरता पानी, आसपास के जंगल और पहाड़ी रास्ते इसे अट्रैक्टिव बनाते हैं। बारिश के समय यहां का वातावरण काफी हरा-भरा हो जाता है।

 

बाघों का सबसे बड़ा ठिकाना

Madhya Pradesh Declared "Tiger State" of India and Shortlisted for Two Prestigious Travel and Awards

भारत में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं, इसलिए इसे ‘टाइगर स्टेट ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यहां के घने जंगल और रिच बायोडाइवर्सिटी वाइल्डलाइफ के लिए अच्छा घर हैं। राज्य के नेशनल पार्क बाघों के साथ-साथ कई रेयर वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन के लिए भी पॉपुलर हैं। हर साल लाखों टूरिस्ट जंगल सफारी का रोमांच और बाघों की एक झलक पाने यहां पहुंचते हैं।

 

 

घूमने का सबसे अच्छा समय

जुलाई–सितंबर: झरनों और हरियाली का सबसे शानदार समय

अक्टूबर: मौसम सुहावना, ट्रेकिंग और घूमने के लिए परफेक्ट

बारिश के समय पहाड़ी इलाकों में जाते समय फिसलन और तेज बहाव वाले पानी से सावधानी रखना जरूरी है।

Poco M8 Power और Poco X8 की एंट्री भारत में जल्द! मिलेगी 8000mAh बैटरी, जानें कीमत और फीचर्स

Poco जल्द ही भारत में अपने स्मार्टफोन लाइनअप में दो नए डिवाइस शामिल कर सकता है। हाल ही में आई एक लीक के अनुसार, Xiaomi का यह सब-ब्रांड आने वाले हफ्तों में देश में Poco M8 Power और Poco X8 लॉन्च कर सकता है। कहा जा रहा है कि ये दोनों हैंडसेट हाल ही में लॉन्च हुए Redmi Note 17 और Redmi Note 17 Pro के रीब्रांडेड वर्जन होंगे, जिनमें Poco की ब्रांडिंग के साथ वही पुराने हार्डवेयर देखने को मिलेंगे। हालांकि, कंपनी ने अभी तक लॉन्च की जानकारी नहीं दी है, लेकिन ताजा लीक से यह अंदाजा लग सकता है कि क्या उम्मीद की जा सकती है। यहां उन Poco स्मार्टफोन के बारे में सब कुछ बताया गया है जिनकी चर्चा हो रही है।

Poco M8 Power और Poco X8 की लॉन्च टाइमलाइन लीक

टिप्सटर योगेश बरार के अनुसार, चीनी स्मार्टफोन कंपनी Poco इस साल की मौजूदा तिमाही में Poco M8 Power और Poco X8 को भारत में लॉन्च कर सकती है। हालांकि, लॉन्च की सही तारीख का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन टाइमलाइन से पता चलता है कि ये स्मार्टफोन अगले कुछ हफ्तों या महीनों में लॉन्च हो सकते हैं।

लीक में यह भी दावा किया गया है कि ये दोनों मॉडल असल में Redmi Note 17 और Redmi Note 17 Pro के ही रीब्रांडेड वर्जन होंगे, जिन्हें हाल ही में चीन में लॉन्च किया गया है। बता दें कि Poco के लिए यह कोई नई रणनीति नहीं है, क्योंकि यह चीनी टेक कंपनी अक्सर कई ग्लोबल मार्केट में Redmi स्मार्टफोन को अलग-अलग नामों से लॉन्च करती रही है।

हालांकि, टिपस्टर ने यह भी संकेत दिया कि कीमत का अनुमान “खराब” है, जिससे पता चलता है कि भारत में मिलने वाले मॉडल की कीमत चीन में मौजूद Redmi मॉडल की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है।

स्पेसिफिकेशन्स और कीमत (अनुमानित)

माना जा रहा है कि Poco M8 Power का ज्यादातर हार्डवेयर Redmi Note 17 जैसा ही होगा। बता दें कि Redmi का यह डिवाइस इस महीने की शुरुआत में चीन में लॉन्च किया गया था, जिसकी शुरुआती कीमत 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए CNY 1,299 (लगभग 18,000 रुपये) थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फोन Qualcomm Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट पर चल सकता है और इसमें बड़ी 8,000mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि मार्केट के हिसाब से Poco M8 Power और Poco X8 में अलग-अलग Snapdragon चिपसेट हो सकते हैं, हालांकि अभी चिपसेट के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है।

400 साल पुरानी, 3000 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप नरवर किले से चोरी, अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह पर शक

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मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी एक ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई है। पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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रात के अंधेरे में बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम

जानकारी के मुताबिक, चोरी की घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात हुई। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अज्ञात बदमाश किसी बड़े वाहन से किले के पिछले हिस्से के रास्ते अंदर पहुंचे और वहां रखी भारी-भरकम तोप को वाहन में लादकर फरार हो गए। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस अब चोरी के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

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प्राचीन वस्तु तस्करों पर पुलिस की नजर

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तोप के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस मामले में प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने वाले गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।  पुलिस के मुताबिक पुलिस किले और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा वाहन की आवाजाही, संभावित रास्तों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

 

प्रशासन की लापरवाही उजागर

इस चोरी के बाद प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले यह तोप अपने स्थान से गिर गई थी, लेकिन उसे दोबारा सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर चोरों ने इसे आसानी से चोरी कर लिया।

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नरवर किले में अब बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें

राज्य पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक ने कहा कि वह जल्द ही नरवर किले का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और पुलिस के साथ मिलकर चोरी हुई धरोहर को बरामद करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, नरवर किले में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें मौजूद थीं, लेकिन एक तोप चोरी होने के बाद अब यहां केवल 13 तोपें बची हैं।

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400 साल पुरानी विरासत पर बड़ा खतरा

नरवर किला मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मौजूद प्राचीन हथियार और स्थापत्य कला इतिहास के गौरव को दर्शाते हैं। ऐसे में ऐतिहासिक तोप की चोरी ने प्रदेश में धरोहरों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

Commodity News : वित्त वर्ष 2026 में भारत का इलायची निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 43.6 करोड़ डॉलर पर रहा

Commodity News : कॉमर्स मिनिस्ट्री के ताजे आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट 43.68 करोड़ डॉलर पर रहा है। यह आंकड़ा 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर पर रहा था। इसका मतलब है कि 2023-24 के मुकाबले 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 में साबुत इलायची का निर्यात में 43.68 करोड़ डॉलर रहा। जबकि 2024-25 में यह 20.12 करोड़ डॉलर और 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर रहा था।

खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से बढ़ी मांग

मात्रा के हिसाब से देखें तो 2025-26 में साबुत इलायची का एक्सपोर्ट बढ़कर 16,399 टन हो गया। जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 7,674 टन और 2023-24 में 7,083 टन रहा था। कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि एक्सपोर्ट में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी से प्रीमियम मसालों की बढ़ती ग्लोबल मांग,बेहतर क्वालिटी का प्रोडक्शन और विदेशी खरीदारों के बीच भारतीय इलायची की बढ़ती पसंद का पता चलता है। इसकी खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से है दुनिया भर में मांग बढ़ी है।

इन देशों को होता है सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट

भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट मुख्यत: UAE ($135.22 मिलियन),सऊदी अरब ($125.16 मिलियन),बांग्लादेश ($47.71 मिलियन),कुवैत ($20 मिलियन),इराक ($13.71 मिलियन)और मलेशिया ($8.48 मिलियन) को होता है। नीदरलैंड,ऑस्ट्रेलिया,बहरीन,कनाडा,चीन,मिस्र और ईरान जैसे देश भी भारत से यह मसाला इम्पोर्ट करते हैं।

भारत में दो तरह की इलायची का होता है उत्पादन

भारत में इलायची की खेती मुख्य रूप से दो किस्मों में बंटी हुई है। छोटी इलायची,जो दक्षिणी पश्चिमी घाट में उगाई जाती है और बड़ी इलायची जिसकी खेती हिमालय के निचले उत्तर-पूर्वी इलाके में की जाती है।

इलायची के कुल उत्पादन में केरल की 56-58% हिस्सेदारी

केरल देश में छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है,जो कुल उत्पादन का 56-58% से ज्यादा हिस्सा प्रोड्यूस करता है। केरल के मुख्य इलायची उत्पादक जिलों में इडुक्की,वायनाड और पलक्कड़ शामिल हैं।

इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है,जहां इसकी खेती कूर्ग,हासन और चिकमगलूर में होती है। तमिलनाडु इसके उत्पादन में तीसरे नंबर पर आता है। जहां इसकी खेती मुख्य रूप से नीलगिरि,पलानी और पुलनी की पहाड़ियों में की जाती है।

 ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है बड़ी इलायची

बड़ी इलायची,जिसका इस्तेमाल अक्सर आयुर्वेदिक दवाओं और मजेदार मसालों के मिश्रण में किया जाता है,मुख्य रूप से सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है।

भारत में इलायची की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसे एक नगदी फसल के तौर पर भी उगाया जाता है। इसकी खेती के जरिए देश के किसान बंपर कमाई कर रहे हैं। इलायची की मांग देश के अलावा विदेश में भी है। इलायची का इस्तेमाल भोजन,कन्फेक्शनरी,पेय पदार्थों को बनाने के दौरान किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग मिठाई में खुशबू के लिए भी किया जाता है।

 

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