Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

The image depicts the problems that occur when blood sugar levels drop

Signs of Low Blood Sugar: शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर कम होना एक ऐसी स्थिति है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। हमारे दिमाग और शरीर को ठीक से काम करने के लिए ग्लूकोज की लगातार जरूरत होती है। जब इसका स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो शरीर तुरंत खतरे के संकेत भेजने लगता है।

 

आमतौर पर यह समस्या मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन कई बार लंबे समय तक भूखे रहने, अत्यधिक व्यायाम, कुछ दवाओं के सेवन या अन्य स्वास्थ्य कारणों से गैर-डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है। शुरुआत में हल्की कमजोरी, पसीना आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर कम होने पर शरीर में क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं, उनके शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए।

 

शरीर में शुगर कम होने पर दिखने वाले लक्षणों को हम इस तरह समझ सकते हैं:ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

1. जब शुगर कम होना शुरू होती है, जानें शुरुआती लक्षण

जैसे ही ब्लड शुगर का लेवल गिरता है, शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे ये शुरुआती परेशानियां होती हैं:

 

अचानक तेज भूख लगना: शरीर ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत खाने के संकेत देता है।

 

चक्कर आना या कमजोरी: सिर हल्का महसूस होने लगता है और पैर डगमगाने लगते हैं।

 

चिड़चिड़ापन या मूड बदलना: अचानक बिना बात के गुस्सा आना, रोने का मन करना या घबराहट होना।

 

हाथ-पैरों में कंपन या घबराहट: बिना किसी कारण के शरीर में कंपकंपी महसूस होने लगती है।

 

अत्यधिक पसीना आना और ठंड लगना: बिना गर्मी के भी अचानक विशेषकर गर्दन के पीछे ठंडा पसीना आने लगता है।

 

दिल की धड़कन तेज होना: ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है (Palpitations)।

 

2. जब शुगर बहुत ज्यादा गिर जाएल जानें गंभीर लक्षण

यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए और दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है:

 

आंखों के सामने धुंधलापन आना: साफ दिखाई न देना या एक की जगह दो चीजें दिखना।

 

भ्रम की स्थिति: बात समझने में दिक्कत होना या लड़खड़ाती आवाज में बोलना या सही से बोल न पाना।

 

नींद न खुलना या सुस्ती: बहुत ज्यादा सुस्ती छा जाना और सोने की इच्छा होना।

 

दौरे पड़ना या बेहोशी: यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जहां व्यक्ति अचानक अचेत (Unconscious) हो सकता है।ALSO READ: पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

 

आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको या आपके आस-पास किसी को शुगर कम होने के लक्षण दिखें, तो तुरंत '15:15 का नियम' अपनाएं:

 

1. तुरंत करें ये उपाय

15 ग्राम तुरंत पचने वाला कार्बोहाइड्रेट लें: जैसे ही लक्षण दिखें, मरीज को 3-4 चम्मच चीनी/ग्लूकोज पाउडर, 1/2 कप फ्रूट जूस, या 4-5 टॉफी चूसने के लिए दें। ध्यान रखें: चॉकलेट या बिस्कुट न दें, क्योंकि इनमें मौजूद फैट शुगर को जल्दी बढ़ने नहीं देता।

 

2. 15 मिनट का इंतजार करें

कुछ भी मीठा खिलाने के बाद मरीज को शांत बैठने दें या आराम करने दें और 15 मिनट तक इंतजार करें ताकि शुगर शरीर में एब्जॉर्ब हो सके।

 

3. ब्लड शुगर दोबारा चेक करें

15 मिनट बाद ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल दोबारा मापें। यदि लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो स्टेप 1 को दोबारा दोहराएं।

 

4. नॉर्मल खाना या स्नैक दें

जब शुगर लेवल 70 mg/dL से ऊपर आ जाए, तो मरीज को एक रोटी या बिस्कुट जैसी ठोस चीज खिलाएं ताकि शुगर लेवल दोबारा नीचे न गिरे। यह शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करेंगा।

 

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो या कुछ भी निगलने की स्थिति में न हो, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी, जूस या चीनी बिल्कुल न डालें। इससे वह उसकी सांस की नली में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन (IV Fluids) दिया जा सके।

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क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना

The Odyssey

एक राजा और महानायक होते हुए भी ओडिसस की ज़िंदगी कोई जश्न नहीं है, बल्कि एक लंबा इंतज़ार, एक बेबसी और ज़िंदगी के आख़िर में पसरा हुआ एक अंतहीन सन्नाटा है। यह एक ऐसे दुख की किरच के साथ घर लौटने की कहानी है, जिसके अंत में यही अर्थ मिलता है कि अंततः ज़िंदगी का कोई अर्थ नहीं। फिर वह ज़िंदगी स्वयं महाकवि होमर के ओडिसस की ही क्यों न हो।

इस फ़िल्म को देखते हुए बार-बार मुझे यह अहसास होता रहा कि ज़िंदगी और समंदर एक ही चीज़ हैं। ज़िंदगी बार-बार समंदर की तरह उफनती है, स्थिर होती है और फिर किसी अंतहीन गहराई की तरह पसर जाती है। इस गहराई का दूर-दूर तक कोई अर्थ नहीं, सिवाय इसके कि वह बस हमारी आँखों के सामने कभी बेसाख़्ता, तो कभी बेतरतीब-सी फैली रहती है—अपने अनंत और विराट विस्तार में फैले नीले समंदर की तरह।

न जाने क्यों, मुझे ‘द ओडिसी’ की कहानी में मुख्य किरदार (प्रोटैगोनिस्ट) समंदर लगता है। उसकी आवाज़, उसका मौन, उसकी गहराई, उसकी आत्मीयता और उसका विद्रोह। दूर तक फैले इस बे-शक्ल पानी में कितना कुछ है, जबकि असल में कुछ भी नहीं।

निर्देशक क्रिस्टोफ़र नोलन का ओडिसस भी समंदर की तरह अपनी गहराई, अपने अकेलेपन, अपनी विफलता और अपनी अंतहीन निरर्थकता के बीच अपनी ज़िंदगी के दस साल गुज़ारता है। वह कई बार एक ऐसे योद्धा की तरह नज़र आता है, जो लहरों के ख़िलाफ़ लड़ना चाहता है; तो कई जगह एक उलझा हुआ आदमी दिखाई देता है।
हालाँकि ट्रॉय के युद्ध के बाद इथाका के राजा ओडिसस के पास घर लौटने का एक मक़सद है। उसकी स्मृति में इंतज़ार करती हुई एक औरत है, जो उसकी पत्नी है। उसका एक मृतप्रायः कुत्ता भी इसलिए इंतज़ार कर रहा है कि जब ओडिसस लौटेगा, तभी वह मरेगा। और ऐसा ही होता है। ओडिसस के आते ही कुत्ता मर जाता है।
ओडिसस की वफ़ादार और बेहद ख़ूबसूरत पत्नी पेनेलोप उसका इंतज़ार कर रही है। वह ओडिसस के लिए अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर देने को तैयार है।

मैं हैरान हूँ। इस ख़ूबसूरत औरत को देखते हुए दृश्य नहीं, बल्कि पंक्तियाँ याद आती हैं। एक पंक्ति याद आती है—Waiting is the most intense way of living.

क्रिस्टोफ़र नोलन की फ़िल्म ‘द ओडिसी’ मानो समंदर पर लिखी हुई कोई उदास कविता हो।

यही वजह है कि ‘द ओडिसी’ में मुझे युद्ध के साथ-साथ प्रेम और इंतज़ार भी दो बड़े तत्त्व महसूस होते हैं। हालाँकि ‘द ओडिसी’ में भावनाओं का ट्रीटमेंट कुछ टूटा, खोया और दरका हुआ-सा है। मैं एक बार भी किसी दृश्य या किसी जेस्चर पर सिहर नहीं पाया। किंतु इसकी सिनेमाई भव्यता, ओडिसस की ज़िंदगी की त्रासदी और इस कहानी का दृश्य-विन्यास इसे इतना बड़ा बना देते हैं कि हम अपनी अदृश्य और नाज़ुक भावनाओं को कुछ देर के लिए कुचलकर भूल जाने को तैयार हो जाते हैं।

लुडविग गोरान्सन का संगीत—जिसमें सिंथेसाइज़र के साथ-साथ प्राचीन और पुनर्निर्मित ग्रीक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया है, शायद ब्रॉन्ज़ गोंग भी—समंदर की लहरों, गहरे अँधेरों, दृश्यों की विराटता, कहीं-कहीं पसरी हुई ख़ामोशी और समंदर की विशालता के बीच कभी-कभी शोपाँ की याद दिलाता है।

फ़िल्म में परदे पर अतीत और वर्तमान किसी मौसम की तरह आते-जाते रहते हैं। इन दृश्यों के बीच ओडिसस अपने घर लौटने की कहानी कहता हुआ लड़ाई लड़ रहा है। इस संघर्ष में एक बाहर की लड़ाई है और भीतर की एक भावुक लड़ाई भी। ओडिसस राक्षसों से लेकर प्रेतात्माओं तक से लड़ता है। कभी अच्छी आत्माएँ और देवता उसकी मदद करते हैं। वह अपने स्मृतिलोप से भी लड़ता है और अपने अपराधबोध से भी।

घर लौटने के इस संघर्ष में वह अपने सारे योद्धाओं को खो देता है। कभी समंदर, तो कभी राक्षस उसके सारे प्रिय साथियों को निगल जाते हैं और आख़िर में वह अकेला, ख़ाली हाथ घर लौटता है। इसलिए कई जगह ओडिसस की आत्मा मुझे कलिंग के युद्ध में जीतकर भी अपनी आत्मा से हार चुके सम्राट अशोक की आत्मा जैसी लगती है। कलिंग विजय के लिए सम्राट अशोक ने एक ओर भीषण नरसंहार किया और दूसरी ओर, जीत के बाद भी वह अकेले और एक उलझे हुए दार्शनिक की तरह खड़ा नज़र आया—नितांत अकेला और निसंग। हज़ारों लाशों के बीच खड़ा एक सम्राट, जो यह तय नहीं कर पाया कि वह जीता है या हार गया।

दिलचस्प बात यह है कि जिस अनुवादक एमिली विल्सन ने ‘द ओडिसी’ का अँग्रेज़ी में अनुवाद किया है, उसकी पहली पंक्ति ही कहती है—”Tell me, Muse, of the man of many ways.”

‘द ओडिसी’ महाकवि होमर की लिखी तक़रीबन तीन हज़ार वर्ष पुरानी कविता पर आधारित ग्रीक साहित्य का एक मील का पत्थर है। यह भारत के महाकाव्यों ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के समकक्ष माना जाने वाला काव्य है, जिसके रचयिता होमर के वजूद को लेकर भी अनेक रहस्य और मत हैं। कुछ उन्हें एक ही व्यक्ति मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि होमर एक नहीं, बल्कि इस नाम के कई व्यक्ति थे।

कुछ आधुनिक इतिहासकारों का मानना है कि ‘होमर’ कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि प्राचीन ग्रीस के चारणों (घूम-घूमकर कविता गाने वाले कवियों) के एक समूह का नाम मात्र था। कई सदियों से चली आ रही इन मौखिक या वाचिक रचनाओं को जब एक साथ संकलित किया गया, तो उसे ‘होमर’ का नाम दे दिया गया। इस रहस्य को होमरिक प्रश्न (The Homeric Question) कहा गया है।

बहरहाल, क्रिस्टोफ़र नोलन ‘ओपनहाइमर’ बनाकर फ़िल्म-निर्माण का वह बेंचमार्क स्थापित कर चुके हैं कि अगले स्तर पर ‘द ओडिसी’ जैसी फ़िल्म लगभग अनिवार्य थी। अब उनके दर्शकों को भी ‘द ओडिसी’ केवल एक दृश्य-अनुभव की तरह नहीं, बल्कि एक महाकाव्य, एक त्रासदी और मनुष्य के अकेलेपन की यात्रा की तरह देखनी चाहिए। शायद तभी वे उस जगह तक पहुँच पाएँगे, जहाँ पहुँचकर नोलन ने इस फ़िल्म की कल्पना की है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 21 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना है। क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी करीब 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

20 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गिरावट के साथ बंद हुए। जून तिमाही के नतीजों के बाद प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार का मूड खराब कर दिया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 442.93 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर और निफ्टी 95.80 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,238.50 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाज़ारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। गिफ्ट निफ्टी 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं, जापान के निक्केई में 2.28 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.53 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.39 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है। वहीं, ताइवानी बाजार में 3.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। कोस्पी करीब 3.73 फीसदी भाग गया है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.34 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 307.16 अंक या 0.59% गिरकर 51,839.26 पर आ गया, S&P 500 में 14.41 अंक या 0.19% की गिरावट हुई और यह 7,443.28 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 12.17 अंक या 0.05% गिरकर 25,508.07 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर एक हफ्ते के उच्चतम स्तर के आस-पास आ गया है। बाजार मध्य पूर्व से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के बीच उलझन में है। एक तरफ इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो रही हैं,तो दूसरी तरफ़ युद्धविराम की उम्मीदों से कुछ राहत भी मिल रही है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.96 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है और यह क्रमशः 4.58% और 4.20% पर दिख रहे हैं।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है, जिसमें 0.108% की बढ़त हुई है। इसके बाद चीनी रेनमिनबी में 0.087% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर में 0.023% की मामूली बढ़त दिख रही है। जबकि फिलीपीन पेसो में 0.006% की मामूली बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। जापानी येन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन सबसे कमजोर करेंसी है। इसमें 0.264% की गिरावट आई है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया का नंबर रहा, जो 0.15% गिरा है। ताइवान डॉलर में 0.081% की गिरावट आई है,जबकि थाई बहत 0.056% कमजोर हुआ है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

20 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,121 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,312 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

 

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Gold-Silver Price : MCX पर सोने-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Gold-Silver Price : सोमवार,20 जुलाई को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह हाजिर बाजार में मजबूत मांग और चांदी के लिए ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव रुझान के बीच ट्रेडर्स का नई पोजीशन बनाना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर,अगस्त डिलीवरी वाले फ्यूचर्स में ₹294 या 0.21% की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 720 लॉट का कारोबार हुआ। एनालिस्ट्स ने इस बढ़ोतरी की वजह मार्केट में नई खरीदारी को बताया है।

सिल्वर फ्यूचर्स में भी तेजी आई है। MCX पर सितंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट ₹1,618 या 0.75% बढ़कर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है, जिसमें 1,371 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहीं। Comex सिल्वर फ्यूचर्स 1.21% बढ़कर $56.59 प्रति औंस पर आ गया है। हालांकि,न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स में थोड़ी गिरावट देखी गई और ये 0.17% गिरकर $4,011 प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की क्या है वजह ?

भू-राजनीतिक तनाव,महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों से जुड़ी उम्मीदे जैसे ग्लोबल संकेतों के कारण हाल के दिनों में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर,इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि पिछले हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। इसमें भी चांदी में ज्यादा गिरावट आई।

उन्होंने आगे कहा कि एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है,जिसमें वेस्ट एशिया में तनाव ने कीमती धातुओं को पुश करने के बजाय उन पर दबाव बनाया है। US-ईरान के बीच टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर बन चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं,जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गईं और सितंबर में US फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना और मजबूत हो गई है।

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल

पृथ्वीराज कोठारी की राय है कि सेंट्रल बैंक की खरीदारी(खासकर चीन की तरफ से) सोने की कीमतों को सपोर्ट देती रही है,जबकि वेस्टर्न एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और भारतीय रिटेल निवेशकों की तरफ से मांग में कमी के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है। इस समय सोने की फेयर वैल्यू 4,100 डॉलर प्रति औंस के आस-पास है। अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसके भाव 3,900 डॉलर प्रति औंस की ओर गिर सकते हैं। वहीं,अगर यह 4,200 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना रहता है,तो इसके 4,500 डॉलर तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।

 

 

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क्या भारत में लॉन्च होंगे OnePlus 16 और Oppo Find X10 Ultra नई लीक से सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

अगर एक नई लीक रिपोर्ट पर भरोसा किया जाए तो OnePlus और Oppo के आने वाले दो फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स भारत में लॉन्च नहीं हो सकते हैं। नई जानकारी के अनुसार, चीनी स्मार्टफोन बनाने वाली ये कंपनियां OnePlus 16 और Oppo Find X10 Ultra के लिए भारतीय बाजार को छोड़ सकती हैं, जबकि Oppo का एक और प्रीमियम डिवाइस 2027 में भारत आ सकता है। हालांकि, अभी तक दोनों कंपनियों ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए फिलहाल इन खबरों को सिर्फ एक लीक और संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब चलिए जानते हैं इस ताजा लीक से जुड़ी सभी जानकारी।

OnePlus 16 और Oppo Find X10 Ultra शायद भारत में लॉन्च न हों

X पर टिपस्टर देबयन रॉय (@Gadgetsdata) के अनुसार, ऐसी अफवाहें हैं कि OnePlus 16 और Oppo Find X10 Ultra भारत में लॉन्च नहीं होंगे।

हालांकि, यह बात हैरान करने वाली लग सकती है, लेकिन पहले आई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीनी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी में बदलाव करने पर विचार कर रही थी। बाद में OnePlus ने साफ किया कि वह भारत में अपना कामकाज जारी रखेगी, जबकि नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करना बंद कर देगी। इसलिए, OnePlus 16 के भारत में लॉन्च न होने की ताजा अफवाह अभी तक कन्फर्म नहीं हुई है।

इसी लीक में यह भी दावा किया गया है कि Oppo Find X10 Ultra की जगह Oppo Find X10 Pro Max साल 2027 में भारत में कंपनी का सबसे प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन बन सकता है।

Oppo Find X10 Pro Max के स्पेसिफिकेशन्स लीक हुए

लीक के अनुसार, Oppo Find X10 Pro Max में हाई रिफ्रेश रेट वाला 2K फ्लैट LTPO OLED डिस्प्ले होने की उम्मीद है। कैमरे की बात करें तो, इस डिवाइस में ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन और बड़े 1/1.3-इंच सेंसर वाला 200MP का प्राइमरी कैमरा हो सकता है।

ऐसी भी चर्चा है कि इसके रियर कैमरा सेटअप में 200MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर, ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन और टेलीमैक्रो सपोर्ट वाला 200MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा, और साथ ही 50MP का मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर शामिल होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, Oppo Find X10 Pro Max में MediaTek Dimensity 9600 Pro चिपसेट दिया जा सकता है। इसके अलावा, फोन में 8000mAh से 9000mAh तक की बड़ी बैटरी मिलने की उम्मीद है। इस स्मार्टफोन में IP69 रेटिंग, अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और एक खास Snap Key जैसे फीचर्स भी दिए जा सकते हैं।

वहीं, इससे पहले आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि OnePlus 16 को इस साल के अंत में चीन में लॉन्च किया जा सकता है। इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro प्रोसेसर, 185Hz डिस्प्ले, करीब 9000mAh की बैटरी और 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा मिलने की उम्मीद है।

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन पुरस्कार चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

चीन में डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:खाना पहुंचाते हुए लिखी कई कविताएं, ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है- किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है। कस्टमर से मिली फटकार के बाद लिखी कविता- वायरल हुई वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता की एक पंक्ति है- सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

Salman Khan: क्या उनकी तबीयत ठीक नहीं है ? सलमान खान का हाल देख फैंस हुए परेशान

Salman Khan: मुंबई में सुपरस्टार सलमान खान के हालिया पब्लिक अपीयरेंस ने फैंस को चिंता में डाल दिया है। एक्टर का काफी दुबला-पतला शरीर ऑनलाइन चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। जब उनके बाहर निकलने के वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, तो कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक्टर की सेहत को लेकर चिंता जताई। बहुत से लोग यह सोच रहे हैं कि उनका वज़न इतना कम क्यों हो गया है और उम्मीद कर रहे हैं कि वे ठीक हों।

शुक्रवार को सलमान ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के ऑफिस का दौरा किया, जहां उन्होंने अथॉरिटी के अत्याधुनिक डेटा कलेक्शन और वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (IT सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान, एक्टर ने लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

सोशल मीडिया पर सलमान के दौरे के कई वीडियो सामने आए, लेकिन उनका लुक तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया। एक्टर के शरीर की बनावट देखकर फैंस और शुभचिंतकों ने चिंता ज़ाहिर की। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या उनकी सेहत ठीक है।

एक ने लिखा, “वह बीमार लग रहे हैं… भगवान आपका भला करे”, वहीं दूसरे ने कहा, “वह बीमार लग रहे हैं, मुझे लगता है कि उन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम है”। एक ने पूछा, “मेरे किंग को क्या हुआ है?” “सलमान खान को क्या हो गया?? पहले तो मुझे लगा कि यह वो नहीं हैं, लेकिन मैंने वहां शेरा को भी देखा। उनकी उम्र धर्मेंद्र जैसी लग रही है,”।

एक परेशान फैन ने लिखा, “यकीन नहीं होता कि ये सलमान खान हैं,” और एक ने पूछा, “क्या सलमान खान और उनकी सेहत सब ठीक है..?” एक ने हैरानी जताते हुए कहा, “इसे देखकर सच में दुख होता है। आप साफ देख सकते हैं कि उनकी आंखों में कितनी थकान और अस्वस्थता दिख रही है। फिल्मों में तो भाई अकेले 50 लोगों से भिड़ जाते हैं, लेकिन अभी सलमान को देखिए, उनका वो जलवा पूरी तरह गायब हो गया है और साफ दिख रहा है कि उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। सलमान खान को क्या हुआ है? क्या उन्हें कोई बीमारी है?”

एक ने लिखा, “क्या ये सच में सलमान खान हैं? क्या वो ठीक हैं? ऐसा तो नहीं लग रहा।” दूसरे ने लिखा, “दोस्तों, सलमान खान को क्या हुआ है?” एक ने लिखा, “बस उनके चेहरे को देखिए, वो किसी दादाजी जैसे लग रहे हैं। वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं।” वहीं एक और ने पूछा, “सलमान खान को क्या हुआ है? भाई सच में 80 साल के बुज़ुर्ग जैसे लग रहे हैं।”

हालांकि, कुछ फ़ैन्स उनके बचाव में भी आए और लिखा, “किसी भारतीय फ़िल्म सुपरस्टार के लिए सबके सामने अपनी उम्र को ज़ाहिर करना बहुत हिम्मत का काम है। रजनीकांत ने ऐसा किया था। बॉलीवुड में कैमरे के सामने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार करने की हिम्मत दिखाने के लिए सलमान खान बहुत सम्मान के हकदार हैं।”

एक ने लिखा, “बॉलीवुड सेलेब्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं, और यहाँ सलमान खान एक पब्लिक इवेंट में 60 साल के व्यक्ति जैसे दिख रहे हैं। वो ऐसे इसलिए आए क्योंकि या तो उन्होंने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार कर लिया है या फिर उनके अंदर कुछ गड़बड़ है। मुझे यकीन है कि उनकी PR टीम ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी होगी।”

सलमान जल्द ही ‘मातृभूमि’ में नज़र आएंगे, जिसमें बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। मार्च तक इस फ़िल्म का नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था और कहा जा रहा था कि यह गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई असल झड़प पर आधारित है। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट ने एक अलग मोड़ ले लिया है – इसका नाम बदल दिया गया है, चीन और गलवान घाटी के ज़िक्र को हटा दिया गया है, और कहा जा रहा है कि टीम बड़े पैमाने पर दोबारा शूटिंग कर रही है।

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस और अपूर्व लाखिया द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मातृभूमि’ में सलमान एक इंडियन आर्मी कर्नल के रोल में हैं। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

हाल ही में, कई अफ़वाहों और बिना पुष्टि वाली खबरों में दावा किया गया था कि ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को CBFC के साथ दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, और अब यह फिल्म अनिश्चित काल के लिए टल सकती है या इसे रद्द भी किया जा सकता है। हाल ही में, सलमान खान फिल्म्स ने ऐसी सभी खबरों को खारिज करते हुए इन अटकलों को “गलत” और “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक बयान में, प्रोडक्शन बैनर ने साफ़ किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास नहीं भेजा गया है, इसलिए सर्टिफिकेशन में किसी भी तरह की आपत्ति या देरी की खबरें गलत हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

उन्होंने नयनतारा के साथ अपनी आने वाली फ़िल्म के लिए ईद 2027 की तारीख़ भी तय कर ली है। इस फ़िल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है और फ़िलहाल इसे SVC63 कहा जा रहा है; इसे वामशी पैदिपल्ली डायरेक्ट करेंगे। एक्टर को हाल ही में ‘राजा शिवाजी’ में जीवा महाला के कैमियो रोल में देखा गया था, और सोशल मीडिया यूज़र्स को उनका ज़बरदस्त योद्धा वाला अवतार बहुत पसंद आया। ‘राजा शिवाजी’ में रितेश देशमुख और जेनेलिया देशमुख भी थे।

Samsung ने अमेरिका में मचाया कहर, इस कारण कई एंप्लॉयीज की कर दी छुट्टी

Samsung Lays Off: सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अमेरिका में अपने एंप्लॉयीज को तगड़ा शॉक दिया है। कंपनी ने अमेरिका मपने डिस्प्ले, मोबाइल फोन और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस से कुछ एंप्लॉयीज को बाहर किया है और इसकी मार मुख्य रूप से न्यू जर्सी और टेक्सास में पड़ी है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी कंपनी के डॉक्यूमेंट्स और मामले से परिचित दो सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसमें कितने एंप्लॉयीज की नौकरी गई है, ये तो नहीं पता चल सका लेकिन डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक यूनिट ने 30 जून को कुछ एंप्लॉयीज को पूरी कंपनी में छंटनी के बारे में जानकारी दी थी और कहा था कि इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।

दक्षिण कोरियाई कंपनी ने रविवार को बताया कि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका (SEA) के हेडक्वार्टर को टेक्सास ले जाने की योजना से न्यू जर्सी के एंगलवुड क्लिफ्स में 739 एंप्लॉयीज की नौकरी पर असर पड़ा है। इसमें से अधिकतर को नई जगह काम करने का ऑफर दिया गया तो कुछ की छुट्टी कर दी गई है। SEA का फोकस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स पर है और इसमें चिप्स का बिजनेस शामिल नहीं है। न्यूज एजेंसी रायटर्स को सूत्रों ने बताया कि टेक्सास के प्लानो में एसईए के ऑफिस में करीब 100 वर्कर्स की छुट्टी की गई है जिसमें से कुछ मोबाइल डिविजिन के थे।

Samsung के भीतर बिजनेस की अलग-अलग तस्वीरें

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में यह जो छंटनी हुई, वह हेडक्वार्टर शिफ्ट होने के चलते हुई है लेकिन यह कंपनी के अलग-अलग बिजनेस की स्थिति को भी दिखाता है। एक तरफ कंपनी का चिप बिजनेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के कारण रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसके मोबाइल, टीवी और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस पर चिप की बढ़ती लागत और कॉम्पटीशन का दबाव बना हुआ है।

सैमसंग पहले ही संकेत दे चुकी है कि एआई से जुड़ी चिप्स की मजबूत मांग के चलते दूसरी तिमाही का मुनाफा 19 गुना तक बढ़ सकता है और पिछले महीने ही कंपनी ने नए चिप प्लांट्स में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश की योजना का भी ऐलान किया था। वहीं दूसरी तरफ कंपनी का मोबाइल बिजनेस पहली बार घाटे में जा सकता है। इसे एपल के साथ-साथ चीन की कंपनियों- टीसीएल और हिसेंसे से टीवी और घरेलू उपकरणों के बाजार में कड़ी चुनौती मिल रही है। इसके अलावा एआई बूम के कारण चिप्स की लागत बढ़ी है जिससे कंपनी के सभी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा है।

चौंकाने वाला है फैसला

हेडक्वार्टर शिफ्ट करने का सैमसंग का फैसला चौंकाने वाला है क्योंकि न्यू जर्सी में इसके एंप्लॉयीज एक साल से भी कम समय पहले नए ऑफिस में शिफ्ट हुए थे। सितंबर में नए ऑफिस के उद्घाटन के मौके पर अमेरिकी सांसद जॉश गॉटहाइमर भी मौजूद थे और उनकी प्रेस रिलीज के मुताबिक एसईए न्यू जर्सी में करीब 1200 एंप्लॉयीज हैं। रायटर्स ने कुछ लिंक्डइन पोस्ट को रिव्यू कर पाया कि टेक्सास और न्यू जर्सी में सीनियर सेल्स और मार्केटिंग ऑफिशियल्स समेत 30 से अधिक वर्कर्स पिछले दो हफ्ते में या तो कंपनी छोड़ चुके हैं या उनकी छंटनी हुई है। साल 2025 के आखिर तक चिप डिविजन मिलाकर अमेरिका में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के 11,770 एंप्लॉयीज थे।

अभी और हो सकती है छंटनी?

टेस्ला, ओरेकल और दूसरी टेक कंपनियों की तरह ही सैमसंग भी अपने हेडक्वार्टर या बड़े ऑपरेशन्स को कम टैक्स और आसान नियमों के लिए मशहूर टेक्सास ले जाने वाली कंपनियां में शामिल हो गई है। हालांकि इसके चलते एंप्लॉयीज की नौकरी पर असर पड़ा है। अब सैमसंग के एंप्लॉयीज आगे भी छंटनी को लेकर परेशान हैं। एसईए के एक एंप्लॉयी के मुताबिक कंपनी चिप पर फोकस बढ़ा रहा है तो एंप्लायंस, होम एंटरटेनमेंट और मोबाइल डिवीजनों को एक साथ ला सकती है जिससे छंटनी हो सकती है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट