CM मोहन यादव का ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ विजन विकास को दे रहा नई दिशा, जनता को ला रहा करीब

Chief Minister Mohan Yadav's Destination Cabinet vision is giving new direction to development

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासन की पारंपरिक शैली और विकास को अपने विजन से नई दिशा दी है। राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन से बाहर निकलकर प्रदेश के विभिन्न शहरों, ऐतिहासिक स्थलों और पिछड़े क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने की 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' पहल न केवल शासन को जनता के करीब लाई है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और विकास को भी नई गति  प्रदान की है। यह पहल विकास और विरासत को साथ-साथ ले जाने का अनूठा उदाहरण बन गई है।

 

जनता तक शासन की सीधी पहुंच

पहले एमपी की कैबिनेट बैठकें हमेशा राजधानी भोपाल स्थित वल्लभ भवन में ही होती थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने इस परंपरा को तोड़ते हुए वर्ष 2024 से 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' के नए कांसेप्ट की शुरुआत की। इसका मकसद सिर्फ फैसले लेना नहीं, बल्कि उन स्थानों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को उजागर करना भी है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर कैबिनेट बैठकें छोटे शहरों, आदिवासी क्षेत्रों और गौरवशाली स्थलों पर हो रही हैं।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है और जनता तक शासन की पहुंच हो रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की डेस्टिनेशन कैबिनेट की यह अनूठी पहल राज्य के विकास में नया रंग भर रही है। इस मॉडल के जरिए सरकार जनता के बीच जाकर फैसले ले रही है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी हो गया है।

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जन- जन तक पहुंच रहे सरकार के फैसले

'डेस्टिनेशन कैबिनेट' सरीखी पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की मैदानी समीक्षा करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है। एक तरफ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर कैबिनेट बैठकें होने से उन क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल रही है, वहीं, सरकार के फैसलों को सिर्फ वल्लभ भवन तक सीमित रखने के बजाय, सरकार राज्य के कोने-कोने तक पहुंच रही है।

 

'डेस्टिनेशन कैबिनेट’ ने बदली शासन की कार्यशैली

मोहन सरकार ने ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ के जरिए शासन की कार्यशैली को बदला है। अब अधिकारी एसी कमरों की चहारदीवारी से निकलकर पहली बार फील्ड गवर्नेंस की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां फैसले वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल से बाहर सीधे जनता के बीच लिए जा रहे हैं। पहले आयोजित इन 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' बैठकों में ओरछा, चित्रकूट, महेश्वर, सिंग्रामपुर, विश्व धरोहर स्थल खजुराहो, नागलवाड़ी, इंदौर का राजवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को शामिल किया गया।

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इससे स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर उभारने और स्थानीय विकास को गति मिली है। पचमढ़ी में जनप्रिय शासक रहे भभूत सिंह की स्मृति में डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, वहीं रानी दुर्गावती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई की स्मृति में भी भव्य डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित की गई।

प्रदेश में जिन स्थानों में डेस्टिनेशन कैबिनेट का आयोजन किया जा चुका है उन क्षेत्रों में विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से प्राथमिकता मिल रही है। इससे स्थानीय विकास की गति तेज हो गई है। अब राजधानी भोपाल से सटे प्राचीन महल और स्मारक वाले गांव जगदीशपुर में रविवार 19 जुलाई को सरकार की डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित की जा रही है।

 

अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक

मोहन सरकार का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि शासन केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर रंग भरने का माध्यम भी है। इससे जहां एक तरफ पर्यटन विकास को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत विजन को धरातल पर उतारा जा रहा है।

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मोहन की 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' प्रदेश को इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन, कल्चरल डेस्टिनेशन के साथ डेवेलपमेंट डेस्टिनेशन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह नई पहल विकास, संस्कृति और जन-सहभागिता का सुंदर समन्वय और सामंजस्य है, जो मध्यप्रदेश को दिन पर दिन नई ऊंचाइयों की तरफ ले जा रही है।