Kamika Ekadashi 2026 Katha: आज द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी का व्रत आज, पूजा में जरूर सुनें ये व्रत कथा और जानें आज पूजा का मुहूर्त

Kamika Ekadashi 2026 Katha: कामिका एकादशी व्रत भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद पहला एकादशी व्रत होता है। यह उपवास सावन में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या की दोष से मुक्ति मिलती है, पाप मिटते हैं और श्री हरि की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत की पूजा में भक्तों को कामिका एकादशी की व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।

माना जाता है कि ऐसा करने वाले श्रद्धालुओं को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त रविवार को है। इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। इस योग में व्रत, पूजा पाठ, जप, तप और शुभ काम करने का आपको दोगुना फल प्राप्त होगा। आइए जानें कामिका एकादशी की व्रत कथा, मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त और पारण समय

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ : 8 अगस्त, दोपहर 1:59 बजे से

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का समापन : 9 अगस्त, 11:04 एम पर

कामिका एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

द्विपुष्कर योग : 11:04 ए एम से दोपहर 02:43 बजे तक

व्रत पारण समय : 10 अगस्त, सोमवार, सुबह 5:47 बजे से 8 बजे

द्वादशी तिथि का समापन : 10 अगस्त, सुबह 08:00 बजे

कामिका एकादशी व्रत कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में बताने का निवेदन किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि एक बार ब्रह्मदेव ने नारद जी को एक कथा सुनाई थी, वही कथा मैं आपको सुनाता हूं-

ब्रह्माजी ने नारद मुनि को बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी भी कहा जाता है। जो लोग यह व्रत रखते हैं, उनको सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत की कथा के अनुसार, एक गांव में एक ठाकुर रहता था। वह बड़ा ही क्रोधी था। एक दिन वो अपने घर से किसी काम के लिए निकला, तो उसका गांव के ही एक ब्राह्मण से किसी बात को लेकर वाद विवाद हो गया।

देखते ही देखते बात इतनी बिगड़ गई कि उसने क्रोध में आकर उस ब्राह्मण की हत्या कर दी। जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए गए पाप का एहसास हुआ। उस अपराध बोध से मुक्ति के लिए उसने उस ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, लेकिन गांव के अन्य ब्राह्मणों ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

उस ठाकुर पर ब्रह्म हत्या का दोष था। समय व्यतीत होने के साथ-साथ उसके मन पर ब्रह्म हत्या के दोष और आत्म ग्लानि का भार बढ़ने लगा। एक दिन उसकी मुलाकात एक ऋषि से हुई। उसने ब्रह्म हत्या की घटना बताई और उससे मुक्ति का उपाय पूछा। तब उस ऋषि मुनि ने उससे कहा कि ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए तुमको सावन कृष्ण एकादशी यानि कामिका एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा से ही तुम ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पा सकते हो। इससे तुम्हारे अन्य पाप भी मिट जाएंगे।

जब श्रावण कृष्ण एकादशी आई तो उस ठाकुर ने विधिपूर्वक कामिका एकादशी व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। रात्रि जागरण के समय वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो गया। स्वप्न में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उनकी कृपा से वह ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त हो गया।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी का व्रत इस दिन होगा, नोट करें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Kamika Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाले पहले एकादशी व्रत को कामिका एकदशी व्रत के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करने वाले भक्तों के सारे पाप मिट जाते हैं। पुराणों अनुसार कामिका एकादशी का व्रत हजार गौ दान के बराबर पुण्य देता है। कहते हैं इस दिन तीर्थ स्थानों पर स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी व्रत का सौभाग्य मिलता है। सावन माह की पहली एकादशी तिथि को लेकर लोगों को भ्रम हो रहा है कि ये 8 अगस्त को किया जाएगा या 9 अगस्त को किया जाएगा। असल में एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर से शुरू हो रही है और हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदयातिथि को देखते हुए मनाए जाते हैं। इसलिए सावन माह की पहली एकादशी तिथि का व्रत 9 अगस्त को किया जाएगा। आइए जानें इसके बारे में

कामिका एकादशी 2026 सही तारीख

पंचांग अनुसार कामिका एकादशी तिथि 8 अगस्त की दोपहर 01:59 से शुरू होकर 9 अगस्त की सुबह 11:04 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 10 अगस्त को किया जाएगा और पारण का समय सुबह 05:47 से 08 बजे तक रहेगा।

कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त 2026

ब्रह्म मुहूर्त – 04:22 AM से 05:04 AM

प्रातः सन्ध्या – 04:43 AM से 05:47 AM

अभिजित मुहूर्त – 12:00 PM से 12:53 PM

विजय मुहूर्त – 02:40 PM से 03:33 PM

गोधूलि मुहूर्त – 07:06 PM से 07:27 PM

सायाह्न सन्ध्या – 07:06 PM से 08:10 PM

अमृत काल – 06:42 AM से 08:09 AM

द्विपुष्कर योग – 11:04 AM से 02:43 PM

इस दिन बन रहे हैं शुभ योग

कामिका एकादशी पर इस बार दो शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। वहीं, पूरे दिन हर्षण योग प्रभावी रहेगा और इसका समापन 10 अगस्त को रात 2 बजकर 4 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के हर दुख को हर लेते हैं।

कामिका एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं अनुसार कामिका एकादशी का व्रत रखने से सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं। साथ ही पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन तुलसी का पूजन भी जरूर करें। साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते भी अवश्य चढ़ाएं, इससे आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। साथ ही मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होगी।

कामिका एकादशी व्रत पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान से निवृत्त होकर पहले व्रत का संकल्प लें और फिर भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करें। भगवान को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत, तुलसी आदि जरूर अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें। साथ ही कामिका एकादशी की कथा पढ़ें। दिन भर फलाहारी व्रत रहें और एकादशी के अगले दिन किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर अपना व्रत खोलें।

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

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Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी होती है कामिका एकादशी, सुख-समृद्धि और भाग्य को मजबूत बनाने के लिए जरूर करें ये 5 उपाय

Kamika Ekadashi 2026: सावन में आने वाले एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। सावन हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है। यह माह भगवान शिव को अति प्रिय है, लेकिन इसके कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु का व्रत किया जाता है।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि, इस व्रत को रखने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है और जाने-अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि इस साल सावन माह की पहली एकादशी कब है, शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन-से सरल उपाय करने चाहिए।

कब है कामिका एकादशी 2026?

इस साल कामिका एकादशी की तिथि 8 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस व्रत कर पारण 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन शुभ समय सुबह 6 बजकर 36 मिनट से सुबह 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।

कामिका एकादशी पर करें ये उपाय

  • घर के मुख्य द्वार पर शाम के समय घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की पूजा करें। इससे आर्थिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • सावन में पड़ने वाली एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग अर्पित करें। इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • शिवलिंग पर जल में थोड़ा-सा कच्चा दूध मिलाकर अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। यह सरल उपाय कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है।
  • इस दिन आप तुलसी के पौधे के सामने भी घी का दीपक जलाकर रखें। इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • भगवान शिव को शमी के फूल और भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल अर्पित करें। इससे भाग्य मजबूत बनता है।
  • इस दिन सफेद और पीले रंग की वस्तुओं का दान करें। मान्यता है कि इससे पुण्य फल बढ़ता है और अटके कार्यों को भी गति मिलती हैं।

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Janmashtami Date 2026: 4 या 5 सितंबर, कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व? जानें सही तारीख और निशिथ काल पूजा मुहूर्त

Janmashtami Date 2026: जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म के कई प्रमुख व्रत और त्योहारों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने वासुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन को पूरी दुनिया में मौजूद कृष्ण भक्त बहुत धूमधाम से मनाते हैं। कृष्ण भक्त बेसब्री से इस पर्व के आने का इंतजार करते हैं। इस दिन देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होती है और 56 भोग लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल की पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सुख-सृमद्धि में वृद्धि होती है। इस अवसर पर घरों और मंदिरो में लड्डू गोपाल की झांकियां निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन किया जाता है। आइए जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की सही तारीख क्या है और इस दिन निशिथ काल पूजा मूहूर्त क्या है?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 02:25 बजे से होगा। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026, रात 12:13 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

रोहिणी नक्षत्र समय

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 4 सितंबर 2026, रात 12:29 बजे

रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:04 बजे

जन्माष्टमी का निशिथ काल शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है :

निशिथ काल मुहूर्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 2026, रात 12:43 बजे तक

पूजा अवधि : 45 मिनट

मध्यरात्रि का मुख्य क्षण : रात 12:20 बजे (5 सितंबर)

व्रत पारण का समय

शास्त्रानुसार पारण : 5 सितंबर 2026, सुबह 06:01 बजे के बाद

तत्काल/जन्मोत्सव के बाद पारण : 5 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 12:43 बजे के बाद (पूजा संपन्न होने पर)

जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें, जैसा भक्त की शक्ति एवं परंपरा हो।
  • दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप एवं श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें।
  • निशिता काल में विधिवत पूजा करने के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध, वाद-विवाद और तामसिक विचारों से दूर रहें, तथा मन को सात्विक बनाए रखें।

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Trigrahi yog 2026: कर्क राशि में इस दिन एकसाथ होंगे सूर्य, गुरु, बुध और बनाएंगे त्रिग्रही योग, जानें किन राशियों को मिलेगा इस संयोग का लाभ

Trigrahi yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि या नक्षत्र में गोचर ही अहम नहीं होता है, बल्कि उनकी अवस्था यानी वक्री-मार्गी चाल या अस्त उदय स्थिति भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी तरह ग्रहों का आपसी संयोग भी बहुत अहमियत रखता है। ऐसा ही एक संयोग 5 अगस्त को कर्क राशि में बनने जा रहा है। इस संयोग का नाम है त्रिग्रही योग। यह योग 5 अगस्त को कर्क राशि में बनने जा रहा है। 5 अगस्त 2026 को बुध कर्क राशि में आएंगे, जहां पहले सूर्य और गुरु विराजमान हैं। ये तीनों ग्रह मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण करेंगे। ज्योतिषों के अनुसार, त्रिग्रही योग 3 राशियों के लिए अत्यंत ही शुभ और लाभकारी रहेगा। सूर्य और बुध की युति से जहां बुधादित्य योग बनता है, वहीं गुरु और सूर्य-बुध के साथ आने से ज्ञान, मान-सम्मान और समृद्धि के द्वार खुलते हैं। इन राशि के जातकों को आर्थिक लाभ मिलेगा साथ ही कारोबार में भी मुनाफा होगा। तो यहां जानिए उन लकी राशियों के बारे में।

तीन राशियों के लिए बहुत शुभ होगा त्रिग्रही योग

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए त्रिग्रही योग फायदेमंद रहेगा। व्यापार में जबरदस्त फायदा मिलेगा। अटके हुए सारे कार्य बिना बाधा के शीघ्र पूरे हो जाएंगे। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिल सकता है। आय में बढ़ोतरी हो सकती है। घर-परिवार में खुशहाली और सकारात्मकता का माहौल रहेगा।

सिंह राशि : त्रिग्रही योग सिंह राशि वालों के लिए शुभ और लाभदायक रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। कारोबारियों के हाथ कोई बड़ी डील लग सकती है, जिससे भविष्य में अच्छा मुनाफा मिलेगा। निवेश के लिए भी यह अति उत्तम और लाभ वाला रहेगा।

वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लि भी त्रिग्रही योग अत्यंक शुभ और जीवन बदलने वारा साबित हो सकता है। इस राशि के जातकों को त्रिग्रही योग आर्थिक लाभ दिलाएगा। इस समय आपको किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। अचानक से धन का लाभ मिल सकता है। छात्रों को परीक्षा में सफलता मिलने का प्रबल योग है।

त्रिग्रही योग के शुभ प्रभाव बढ़ाने के उपाय

  • प्रतिदिन सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें अथवा भगवान विष्णु की पूजा में पीले फूल और तुलसी अर्पित करें।
  • बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं।

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Raksha Bandhan 2026: इस साल क्या भद्रा के साये में मनाया जाएगा रक्षा बंधन का पर्व? भाई की तरक्की के लिए बहनें राखी बांधने से पहले करें ये उपाय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व पूरे साल में आने वाले सभी उत्सव और त्योहारों में सबसे मासूम और प्यारा माना जाता है, क्योंकि ये भाई-बहन के बीच प्रेम और मधुरता का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी जीवन और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है।

रक्षा बंधन के पर्व की शुरुआत पौराणिक काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय सुदर्शन चक्र के कारण श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी, जिससे उनकी उंगली से खून निकलने लगा। द्रौपदी ने यह दृश्य देखा और तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर उनकी उंगली में बांध दिया। भगवान कृष्ण द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भावुक हो गए। श्रीकृष्ण ने जीवन भर द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और जब द्रौपदी के सम्मान पर संकट आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया। माना जाता है कि इस दिन बहनें राखी बांधने से पहले अगर एक उपाय कर लें, तो उससे भाइयों की तरक्की होती है। आइए जानें इस साल कब मनाया जाएगा राखी का त्योहार और क्या इस दिन रहेगा भद्रा का साया

कब है रक्षा बंधन ?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि में रहेगी। इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। उदया तिथि के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन त्योहार मनाया जा सकेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में रक्षा बंधन वर्जित माना गया है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। हालांकि सावन पूर्णिमा पर 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। लेकिन 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि के साथ-साथ भद्रा रहित भी रहेगी।

राखी बांधने से पहले करें भगवान गणेश और विष्णु का पूजन

राखी बांधने से पहले भगवान गणेश और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

राखी बांधने का शुभ समय

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट के बीच अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस अवधि को रक्षा सूत्र बांधने के लिए शुभ माना गया है। इसके अलावा बहनें सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट के समय अभिजीत मुहूर्त में भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

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Kamika Ekadashi 2026 Date: द्विपुष्कर योग में मनाई जाएगी सावन की पहली एकादशी, जानें तारीख, विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

Kamika Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। हिंदू कैलेंडर हर माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत भी इनमें से एक है। कामिका एकादशी का व्रत सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल कामिका एकादशी व्रत में द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। माना जाता है कि इस योग में श्रद्धापूर्वक श्रीहरि की पूजा करने से दोगुने पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन, चातुर्मास का पहला महीना होने के कारण इसमें भगवान विष्णु की आराधना और तुलसी दल अर्पित करने का विशेष फल प्राप्त होता है।

कामिका एकादशी 2026 तारीख

सावन कृष्ण पक्ष एकादशी की तारीख 8 अगस्त 2026, दोपहर 01:59 बजे से लग रही है। इस तिथि का समापन 9 अगस्त 2026, सुबह 11:04 बजे। उदयातिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत रविवार, 9 अगस्त 2026 को किया जाएगा।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त

कामिका एकादशी के दिन पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:22 बजे से लेकर प्रात:काल 05:04 बजे तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक है। उस दिन शुभ-उत्तम मुहूर्त दोपहर 02:06 बजे से लेकर दोपहर 03:46 बजे तक है।

द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी व्रत

इस साल कामिका एकादशी के दिन द्विपुष्कर योग दिन में 11 बजकर 04 मिनट पर बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। द्विपुष्कर योग में आप जो भी दान, पुण्य, पूजा, पाठ आदि कर्म करते हैं, उसका दोगुना फल प्राप्त होता है।

इसके अलावा उस दिन हर्षण योग प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को मध्यरात्रि 2:04 बजे तक रहेगा, उसके बाद वज्र योग होगा। व्रत के दिन मृगशिरा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से आर्द्रा नक्षत्र है।

कामिका एकादशी व्रत पारण समय

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।

पारण की तारीख : सोमवार, 10 अगस्त 2026

पारण का शुभ समय : सुबह 05:47 बजे से सुबह 08:00 बजे तक

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रामायणम्: पार्ट 1 का ट्रेलर रिलीज

नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायणम्: पार्ट 1’ का आधिकारिक ट्रेलर गुरुवार को दुनिया भर में रिलीज़ कर दिया गया। हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम सहित पांच भारतीय भाषाओं में जारी ट्रेलर में राम और रावण के बीच होने वाले महायुद्ध की भव्य झलक दिखाई गई है।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म प्राइम फोकस स्टूडियोज़, डीएनईजी और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के सहयोग से तैयार की गई है। फिल्म दिवाली 2026 पर विश्वभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इसके वैश्विक वितरण की जिम्मेदारी सोनी पिक्चर्स संभालेगी, जबकि उत्तर भारत में इसका वितरण धर्मा प्रोडक्शंस करेगा।

फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और पैन इंडिया स्टार यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। कलाकारों की टोली में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रवि दुबे, अजिंक्य देव, कुणाल कपूर और रकुल प्रीत सिंह भी शामिल हैं।

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फिल्म की कहानी भगवान विष्णु के राम अवतार, उनके वनवास और रावण के साथ होने वाले धर्म-अधर्म के संघर्ष पर आधारित है। निर्माताओं के अनुसार यह दो भागों में बनने वाली एक भव्य सिनेमाई प्रस्तुति है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना है।

फिल्म की पटकथा श्रीधर राघवन ने लिखी है, जबकि संगीत ऑस्कर विजेता हांस ज़िमर और ए.आर. रहमान ने तैयार किया है। फिल्म में अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का उपयोग किया गया है।

निर्माता नमित मल्होत्रा ने कहा कि रामायण केवल एक महागाथा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर भव्यता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

निर्देशक नितेश तिवारी ने कहा कि रामायण विश्व की महानतम कहानियों में से एक है और इसे पूरी श्रद्धा, प्रामाणिकता तथा सम्मान के साथ पर्दे पर उतारना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही है।

Pic Credit : ANI

Ramayana Trailer: नमिता मल्होत्रा की ‘रामायणम्’ के ट्रेलर ने रिलीज होते ही जीता लोगों का दिल, पार किया 50 लाख व्यूज का आंकड़ा

Ramayana Trailer: ‘रामायणम्’ भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक है। इसे भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे बड़े और इंतजार किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। दो भागों में बनने वाली इस भव्य फिल्म का दुनियाभर के दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकारों को साथ लेकर बनाई गई इस फिल्म का ट्रेलर आज ब्रह्म मुहूर्त के शुभ समय पर रिलीज किया गया, जो इस महाकाव्य की आध्यात्मिक भावना के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया और कुछ ही घंटों में एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। रामायणम् के ट्रेलर ने सिर्फ 6 घंटे में 50 लाख व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया। यह फिल्म को लेकर लोगों के जबरदस्त उत्साह और इंतजार को साफ दिखाता है। ट्रेलर को मिल रहे शानदार रिस्पॉन्स ने साबित कर दिया है कि इस भव्य फिल्म का इंतजार सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में हो रहा है।

रामायणम् का ट्रेलर भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्म बनने की एक दमदार झलक दिखाता है। इसमें भगवान विष्णु के श्रीराम (रणबीर कपूर) के रूप में अवतार लेने और धर्म की स्थापना करने की कहानी दिखाई गई है। वहीं यश रावण के शक्तिशाली और अमर राक्षस राजा के किरदार में नजर आते हैं, जो अपने घमंड और बदले की भावना से भरा हुआ है। ट्रेलर में माता सीता (साई पल्लवी) और लक्ष्मण (रवि दुबे) को भी श्रीराम के सबसे मजबूत साथियों के रूप में दिखाया गया है। शानदार वीएफएक्स, भव्य विजुअल्स, पूरी स्टारकास्ट की दमदार परफॉर्मेंस और शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक ट्रेलर के हर सीन को और भी खास बना देते हैं। श्रीधर राघवन द्वारा रूपांतरित इस फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी हांस जिमर और ए. आर. रहमान ने मिलकर संभाली है, जो पूर्व और पश्चिम के संगीत का एक खास संगम है।

दुनिया की सबसे महान कहानियों में से एक रामायण की कहानी को नए और भव्य अंदाज में बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी निर्देशक नितेश तिवारी ने की है। रामायणम् का मकसद इस महाकाव्य की भावनाओं और भव्यता को पहले कभी न देखे गए स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाना है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम के किरदार में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। वहीं यश रावण के दमदार किरदार में दिखाई देंगे और सनी देओल हनुमान की भूमिका में नजर आएंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और 8 बार अकादमी अवॉर्ड जीत चुके वीएफएक्स स्टूडियो DNEG ने यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है। रामायणम्: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म की ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन सोनी पिक्चर्स करेगी, जबकि उत्तर भारत में इसे धर्मा प्रोडक्शंस रिलीज करेगा।