Guru Purnima 2026 Date: कब है गुरु पूर्णिमा? कुंडली से गुरु दोष दूर करने के लिए इस दिन कर सकते हैं 5 उपाय

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा सभी पूर्णिमा में महत्वपूर्ण मानी गई है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य द्वारा व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा यानि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं। यह दिन कुंडली के गुरु दोष को दूर करने का भी एक अच्छा अवसर है। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होगी और यह 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक मान्य होगी। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई बुधवार को मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:17 बजे से लेकर प्रात: 04:59 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 बजे से सुबह 07:22 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम : मुहूर्त सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक

चर-सामान्य मुहूर्त : दोपहर 03:51 बजे से शाम 05:32 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : शाम 05:32 बजे से शाम 07:14 बजे तक

प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। यह योग नए रिश्तों की शुरुआत और विवादों के निपटारे के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

कुंडली से गुरु दोष दूर करने के अचूक उपाय

कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति के विवाह, करियर, शिक्षा और मान-सम्मान में बाधाएं आने लगती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की संयुक्त पूजा करें। पूजा में पीले फूल, पीले फल, चंदन, पंचामृत और बेसन के लड्डू अर्पित करें। इस दिन घर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • पूजा के समय पीले हकीक या तुलसी की माला से `ॐ बृं बृहस्पतये नमः` और `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः` मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • गुरु पूर्णिमा पर किसी मंदिर या जरूरतमंद को पीले रंग की वस्तुएं दान करें। जैसे— चने की दाल, हल्दी, पीला अनाज, केसर, पीली मिठाइयां या पीले वस्त्र। इससे गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
  • यदि कुंडली में गुरु अत्यधिक कमजोर है, तो इस दिन (और उसके बाद हर गुरुवार को) नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर चने की दाल के 108 साबुत दाने “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए एक-एक करके अर्पित करें। इससे भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु जी की भी असीम कृपा मिलती है।

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपर्णू माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि यह व्रत करने वाले भक्तों पर सदैव श्री हरि की कृपा बनी रहती है। हिंदी महीनों के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के बाद अब शुक्ल पक्ष का देवशयनी या हरिशयनी एकादशी व्रत आने वाला है। इस तिथि को हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद से चतुर्मास शुरू हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे हम आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी एकादशी, हरिशयनी या पद्मनाभा एकादशी के नाम से जानते हैं।

हरिशयनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय): दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से शाम 07:39 बजे तक।

व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 06:13 बजे से सुबह 08:50 बजे के बीच।

देवशयनी एकादशी पर इस विधि से कराएं श्री हरि को शयन

चूंकि इस दिन के बाद भगवान चार महीनों के लिए विश्राम करने जाते हैं, इसलिए उनका शयन प्रारंभ होने से ठीक पहले पूरे विधि-विधान से विदाई-पूजन करने का बड़ा महत्व है।

  • देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • एक पवित्र चौकी पर भगवान विष्णु की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर को आसन देकर विराजमान करें।
  • भगवान नारायण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • उन्हें पीला चंदन लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं और तुलसी दल (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो) अर्पित करें।
  • भगवान के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें।
  • इसके बाद प्रभु को पान और सुपारी भेंट करें।
  • धूप-दीप जलाकर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आरती उतारें।
  • सामर्थ अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।
  • इसके बाद ही स्वयं फलाहार या व्रत का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • देवशयनी एकादशी की रात को भगवान के भजनों और स्तुति का कीर्तन करना चाहिए।
  • अंत में, स्वयं के सोने से पहले प्रभु को प्रतीकात्मक रूप से विश्राम (शयन) कराएं।

पूजा में करें इस मंत्र का जाप

पूजा में भगवान को शयन कराने के लिए इस विशेष मंत्र का जाप करें।

‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।

विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।’

मंत्र का अर्थ: हे संपूर्ण जगत के स्वामी! आपके सो जाने पर यह पूरा संसार सो जाता है और आपके जाग जाने पर ही यह संपूर्ण सृष्टि तथा समस्त चराचर जीव जाग उठते हैं।

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। भगवान शिव के इस महीने में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त के दिन किया जाएगा। यह तिथि और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और सभी परेशानियों व दोषों से मुक्ति मिलती है। जीवन में संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत विशेष अहमियत रखता है। कई विवाहित जोड़े सावन पुत्रदा एकादशी व्रत को बड़ी श्रद्धा और विध-विधान के साथ रखते हैं। वे भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी से संतान सुख के लिए आशीर्वाद, स्वास्थ्य और परिवार की खुशी की प्रार्थना करते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि प्रारंभ : 23 अगस्त 2026 को दोपहर 03:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 24 अगस्त 2026 को शाम 05:48 बजे तक

व्रत पारण का समय (अगले दिन): 24 अगस्त के व्रत का पारण 25 अगस्त को किया जाएगा

संतान प्राप्ति के लिए पूजा विधि

  • सावन पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा स्थल पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रखें।
  • तुलसी के पत्ते, फल, धूप, दीया और पानी चढ़ाएं।
  • पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते रहें।
  • दंपत्ति इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं और सावन पुत्रदा एकादशी व्रत कथा भी सुन सकते हैं।
  • इस दिन चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन या शराब से पूरी तरह दूर रहें।

सावन पुत्रदा एकादशी के नियम

  • प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर दिनभर सात्विकता और संयम का पालन करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और फल अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
  • दंपति एक साथ भगवान विष्णु से स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना करें।

सावन पुत्रदा एकादशी पर क्या ना करें?

  • इस दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन ना करें।
  • क्रोध, कटु वचन, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें।
  • व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों और विवाद से दूर रहें।
  • बिना कारण किसी जीव को कष्ट ना पहुंचाएं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए।

Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ माह में कब किया जाएगा गौरी व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और समापन की तिथि

Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी और क्यों मनाई जाती है? इस दिन बिना अच्छा मुहूर्त देखे कर सकते हैं कोई भी शुभ कार्य

Bhadli Navami 2026 Date: भड़ली नवमी को भड़रिया नवमी या कंदर्प नवमी भी कहते हैं। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन को अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के समान ही ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। इसका मतलब यह है कि इस पूरे दिन ग्रह और नक्षत्र की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग या ज्योतिषी से अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

कब मनाई जाएगी भड़ली नवमी 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार तिथियों का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:

नवमी तिथि प्रारंभ : 22 जुलाई 2026 को सुबह 05:16 बजे से

नवमी तिथि समाप्त : 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे तक

उदयातिथि के नियमों के अनुसार नवमी तिथि का सूर्योदय 22 जुलाई को हो रहा है, इसलिए मुख्य रूप से भड़ली नवमी का त्योहार और पूजा इसी दिन संपन्न की जाएगी।

भड़ली नवमी 2026 धार्मिक महत्तव

भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद ‘देवशयनी एकादशी’ आती है, जिससे चातुर्मास की शुरुआत होती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते क्योंकि इस दौरान उनका प्रत्यक्ष आशीर्वाद नहीं मिल पाता। इसलिए, भड़ली नवमी को विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए सीजन का आखिरी दिन मानकर धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, इसके बाद भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए विश्राम अवस्था में चले जाते हैं, इसलिए श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और आने वाले चार महीनों के लिए भगवान का संरक्षण व आशीर्वाद मांगते हैं। यह दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है। इस वजह से तांत्रिक और आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए मां दुर्गा (शक्ति) की पूजा करने और हवन अनुष्ठान संपन्न करने के लिहाज से यह बेहद पवित्र तिथि मानी जाती है।

इस दिन से करना माना जाता है शुभ

  • गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण इस दिन कन्या पूजन करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • यदि किसी के विवाह में रुकावटें आ रही हों, तो भड़ली नवमी के अबूझ मुहूर्त का लाभ उठाकर विवाह संपन्न कराया जाता है।
  • नया वाहन खरीदना, सोने-चांदी की खरीदारी करना या नए घर में प्रवेश करने के लिए भी लोग इस दिन को चुनते हैं।

Devshayani Ekadashi 2026: 3 बड़े योगों में किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण का समय

Budh Mangal Dashank Yog 2026: बुध और मंगल ने बनाया दशांक योग, जानें किन राशियों के पैसों और करियर में लाएगा धांसु बदलाव

Budh Mangal Dashank Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की एक-दूसरे के साथ युति के साथ ही दूरी भी काफी मायने रखती है। ग्रहों की एक-दूसरे से खास दूरी पर भी कुछ दुर्लभ और पावरफुल योगों का निर्माण होता है। ऐसा ही एक योग इस समय बुध और मंगल ग्रह की स्थिति ने बनाया है। इस योग का नाम दशांक योग है। इसे ज्योतिष के सबसे पावरफुल योगों में से एक माना जाता है। इस समय ग्रहों के राजकुमार बुध और सेनापति मंगल एक-दूसरे से 36 डिग्री के कोण पर स्थित होकर दशांक योग का निर्माण कर रहे हैं।

वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धिमत्ता, वाणी, व्यापार, संचार, गणित और लेखन का कारक माना जाता है। वहीं, मंगल ऊर्जा, साहस, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता, भूमि से जुड़े कार्यों और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह किसी खास कोणीय स्थिति में आते हैं, तो व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और कार्य करने की शैली में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलता है। इस योग के प्रभाव से 6 राशियों के पैसों की स्थिति और करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

दशांक योग क्या है?

जब दो ग्रह लगभग 36 डिग्री की दूरी पर होते हैं, तब दशांक योग बनता है। यह योग 16 जुलाई 2026 की रात 8:27 बजे बुध और मंगल के बीच 36 डिग्री का कोण बनने पर निर्मित हुआ है। यह संबंध रचनात्मकता, तेज दिमाग, नवाचार और अचानक मिलने वाले अवसरों का संकेत देता है। इस योग का प्रभाव लगभग तीन दिनों तक, यानी 19 जुलाई 2026 तक प्रमुख रूप से बना रहेगा। इस दौरान बुध अपनी ही राशि मिथुन में वक्री अवस्था में रहेंगे, जबकि मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे होंगे।

6 राशियों के जातक पाएंगे बड़े अवसर

वृषभ राशि : मंगल आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। बुध धन से जुड़े मामलों को मजबूत करेंगे, जिससे व्यापार में लाभ, नए क्लाइंट और आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। रुके हुए कामों में भी प्रगति के संकेत हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।

मिथुन राशि : बुध के अपनी ही राशि में होने से यह योग आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए कार्य पूरे होंगे। मीडिया, लेखन, आईटी, बैंकिंग और संचार से जुड़े लोगों को नए मौके मिल सकते हैं। भगवान गणेश की पूजा करें और ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।

सिंह राशि : यह योग आय और लाभ के अवसर बढ़ाएगा। पुराने अटके हुए पैसे मिल सकते हैं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है। सूर्य को जल अर्पित करें और तांबे का दान करें।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के संकेत हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी, प्रमोशन या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आपकी योजनाओं की सराहना होगी। हरी मूंग का दान करें और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

मकर राशि : यह योग प्रतियोगी परीक्षाओं, इंटरव्यू और कानूनी मामलों में सफलता दिला सकता है। शत्रुओं पर विजय और कार्यक्षेत्र में प्रशंसा मिलने के योग हैं। हनुमान जी की पूजा करें और मसूर दाल का दान करें।

कुंभ राशि : पंचम भाव सक्रिय होने से विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को लाभ होगा। एकाग्रता बढ़ेगी और प्रेम संबंधों में भी सुधार आएगा। भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकें दान करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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Guru Purnima 2026 Date: इस साल प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह दिन गुरुओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता व्यक्त करने और कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन को महाभारत और पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी कारण इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और बुद्धि, ज्ञान तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस साल गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का योग बन रहा है। यह दिन गुरु दोष दूर करने के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रीति योग और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र बन रहा है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। प्रीति योग में आप नए रिश्तों की शुरुआत कर सकते हैं, कोई विवाद है तो उसको निपटाने का प्रयास कर सकते हैं या कोई महत्वपूर्ण डील फाइनल करके मान-सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

गुरु पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि का आरंभ : 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन : 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे तक

पूजन व स्नान-दान के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:17 से 04:59 तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 से 07:22 तक

अमृत मुहूर्त : सुबह 07:22 से 09:04 तक

शुभ मुहूर्त : सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इस वजह से हर इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। वेद व्यास जी ने महाभारत और वेदों की रचना की थी। भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनकी दी गई शिक्षा के प्रति आभार और कृतज्ञता जताते हैं। गुरु के ज्ञान से ही जीवन में सफलता के लिए हमें सही मार्ग मिलता है।

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Jagannath Rath Yatra: पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसे हालात, 200 श्रद्धालु अस्पताल पहुंचे, एक की मौत की भी खबर

Jagannath Rath Yatra in Puri: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार (16 जुलाई) को भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में करीब 200 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए पुरी मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी भीड़ की वजह से करीब 200 श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनका इलाज पुरी मेडिकल अस्पताल में चल रहा है।

Odisha TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बड़ा डंडा’ पर रथ खिंचते हुए देखने का इंतजार कर रहे एक श्रद्धालु की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रथ खींचने के दौरान बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। भीड़ के दबाव और उमस के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना ‘पहांडी’ रस्म के दौरान बाहरी सुरक्षा घेरे से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। भारी भीड़ के कारण अफरातफरी मच गई, जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और स्थिति को संभालने के लिए बचाव दलों को तैनात किया गया।

एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर

सूत्रों ने बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दम घुटने से एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। एंबुलेंस की मदद से प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी रथ खींचने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ जैसी स्थिति किन कारणों से पैदा हुई।

‘पहंडी’ अनुष्ठान संपन्न

ओडिशा के पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। ‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।

घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।

उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा ‘शून्य पहंडी’ (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।

अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया। ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने ‘कालिया ठाकुर’ के सामने प्रस्तुति दी।

‘पहंडी’ अनुष्ठान में तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये रथ मंदिर के ‘सिंह द्वार’ के सामने खड़े किए जाते हैं, ताकि उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा सके। इस 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।

बारिश के बीच भारी भीड़

पुरी में हो रही भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। वे ‘बड़ा डंडा’ पर नृत्य करते और रथ यात्रा का जश्न मनाते हुए देखे गए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी के अनुसार, पुरी में पिछले 48 घंटों में 233 मिमी बारिश हुई है। समुद्र के किनारे बसे इस शहर में दिन के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

इससे पहले दिन में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा पर ज़ोर दिया। बारिश की वजह से जल-जमाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा, इसलिए उन्होंने पुरी जिला प्रशासन, नगरपालिका अधिकारियों और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने और पानी निकालने के लिए तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत 24 या 25 जुलाई 2026 कब किया जाएगा? जानें तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चाह माह की योगनिद्र में पाताल लोक चले जाते हैं और चतुर्मास आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश आदि शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। श्री हरि सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस दौरान सृष्टि का कामकाज भगवान शिव के पास रहता है।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे साल की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी तिथियों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन को बड़ी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाते हैं। आइए जानें इस साल देव शयनी एकादशी तिथि का व्रत किस दिन किया जाएगा।

कब है हरिशयनी एकादशी?

साल 2026 में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा। चूंकि उदयातिथि 25 जुलाई को मिल रही है, इसलिए वैष्णव और सामान्य श्रद्धालु दोनों ही इस दिन व्रत रखेंगे। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी और अगले 4 महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।

देवशयनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख : 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 12:19 PM से 01:11 PM तक

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:39 AM से 08:22 AM के बीच।

देवशयनी एकादशी 2026 पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है :

सुबह की तैयारी : एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प : मंदिर के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थापना : भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।

सामग्री अर्पित करें : भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

तुलसी दल : भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय हैं, उन्हें भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

मंत्र और कथा : भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

शयन कराना : पूजा के अंत में भगवान विष्णु को एक सुंदर छोटे गद्दे और तकिये वाले बिस्तर पर प्रतीकात्मक रूप से सुलाया जाता है यानी योग निद्रा में भेजा जाता है।

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Chaturmas Fasting Rules: चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं, अपना लिए ये नियम तो होंगे 5 फायदे

An image providing information regarding the rules of Chaturmas 2026, as well as what to eat and what to avoid

Chaturmas Food Guide: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। चातुर्मास यानी देवशयनी एकादशी/ आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर देवप्रबोधनी एकादशी/ कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलने वाले 4 महीने का आध्यात्मिक समय। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी/ देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी/ देवउठनी एकादशी तक के चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और भक्त पूजा, जप, तप, दान तथा सात्विक जीवन अपनाकर पुण्य अर्जित करते हैं।ALSO READ: Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

 

चातुर्मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इस समय सात्विक और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। चूंकि इन 4 महीनों में वर्षा ऋतु/मानसून अपने चरम पर होती है, जिससे हमारा पाचन तंत्र यानी डाइजेशन सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। इसीलिए सनातन धर्म में इस दौरान खान-पान के कुछ कड़े और वैज्ञानिक नियम बनाए गए हैं।

 

यहां जानें महीने के अनुसार नियम, जो आपको जानकारी देंगे कि चातुर्मास में क्या खाएं, क्या न खाएं?

 

चातुर्मास में हर महीने के हिसाब से कुछ विशेष चीजों को छोड़ने का नियम है, क्योंकि उस मौसम में उन चीजों में बैक्टीरिया या कीड़े लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है:

 

1. क्या बिल्कुल न खाएं?

पहला महीना श्रावण मास: हरी पत्तेदार सब्जियां, साग, पालक, आदि खाना पूरी तरह वर्जित है। बारिश के कारण इनमें कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया पनपने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

 

दूसरा महीना भाद्रपद मास: दही और मट्ठा/ छाछ का सेवन बंद कर देना चाहिए। इस मौसम में पेट में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

तीसरा महीना आश्विन मास: दूध का सेवन नहीं करना चाहिए या इसे बहुत कम कर देना चाहिए।

 

चौथा महीना कार्तिक मास: द्विदलन यानी दालें- जैसे चना, उड़द, मसूर, अरहर और बैंगन, मूली आदि खाने की मनाही होती है।

 

चारों महीने सामान्य परहेज: प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।ALSO READ: चातुर्मास 2026: सिद्धि की कामना है तो इन 4 कार्यों को न भूलें

 

2. क्या खाना सेहत के लिए अच्छा है?

हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दलिया, मूंग की छिलके वाली दाल, लौकी, तोरई, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाई जा सकती हैं।

 

गुनगुना पानी: इस मौसम में उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

 

सेंधा नमक: साधारण नमक की जगह भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करना अधिक फायदेमंद होता है।

 

चातुर्मास के नियम अपनाने के 5 बड़े फायदे

यदि आप इन 4 महीनों में अपनी जीभ पर नियंत्रण रखकर सात्विक भोजन अपनाते हैं, तो आपको ये 5 बड़े लाभ मिलते हैं:

 

1. मजबूत पाचन तंत्र

बारिश के मौसम में हमारी जठराग्नि यानी पाचन की शक्ति मंद हो जाती है। जब आप गरिष्ठ/ भारी, मांसाहारी या पत्तेदार भोजन नहीं खाते हैं, तो आपके पेट को आराम मिलता है। इससे गैस, अपच, और एसिडिटी जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।

 

2. इंफेक्शन और बीमारियों से बचाव

मानसून में हवा और पानी के जरिए बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों और डेयरी प्रोडक्ट्स को सही समय पर डाइट से हटाने से आप फूड पॉइजनिंग, डायरिया, टायफायड और पेट के कीड़ों से सुरक्षित रहते हैं।

 

3. बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन

चातुर्मास में केवल एक समय भोजन करने या सात्विक डाइट लेने से शरीर की सफाई होती है, यह भोजन शरीर के टॉक्सिंस अर्थात् विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह आपकी त्वचा पर चमक लाता है और वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

4. मानसिक शांति और एकाग्रता 

आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी- 'जैसा अन्न, वैसा मन'। यानी तामसिक भोजन, जैसे- लहसुन, प्याज, मांस के छोड़ने से आपके शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन सुधरता है। इससे आलस्य दूर होता है, गुस्सा कम आता है और मन शांत तथा केंद्रित रहता है।

 

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता

चातुर्मास के समय में लिया गया हल्का भोजन और गुनगुना पानी आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-खांसी, जुकाम और मौसमी बुखार से लड़ने की आपकी शारीरिक क्षमता मजबूत होती है।

 

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Yogini Ekadashi 2026 Vrat Today: आज कर रहे हैं योगिनी एकादशी का व्रत, जानें कब से कब तक रहेगा राहुकाल

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Today: योगिनी एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत करने से 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य फल मिलता है। इस बार योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन किया जा रहा है, 10 जुलाई और 11 जुलाई 2026 को। 10 जुलाई को आषाढ़ माह की एकादशी तिथि सूर्योदय के समय व्यप्त नहीं थी, जबकि आज यानी 11 जुलाई को सूर्योदय एकादशी तिथि में हुआ है। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार आज भी योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। कल जहां भगवान विष्णु के गृहस्थ भक्तों ने व्रत किया था, वहीं आज श्री हरि के वैष्णव भक्त यह उपवास कर रहे हैं। आज के दिन पूजा करते समय राहुकाल का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें आज राहुकाल का समय क्या है?

11 जुलाई राहुकाल का समय

11 जुलाई दिन शनिवार को राहुकाल सुबह 8 बजकर 59 मिनट से सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

राहु जल्दबाजी में लिए फैसलों का प्रतीक

राहु भ्रम, माया, अचानक इच्छा, प्रलोभन और जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों का प्रतीक है। राहुकाल के दौरान, मन स्पष्ट नहीं होता है। इसलिए वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल नए प्रोजेक्ट शुरू करने, महत्वपूर्ण निर्णय लेने या बड़ी मात्रा में धन खर्च करने के लिए एक अशुभ समय माना गया है।

राहुकाल के दौरान बड़े खर्चों से बचें

ज्योतिष में राहुकाल को ऐसा समय माना जाता है जब नए और शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में राहु को भ्रम, अनिश्चितता, लालच और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना जाता है। इसलिए इस समय किए गए बड़े आर्थिक निर्णयों में बाधा या पछतावे की आशंका की स्थिति बन सकती है। ज्योतिष के अनुसार, महत्वपूर्ण कार्य ऐसे समय में शुरू हों जब ग्रहों का प्रभाव अनुकूल माना जाए। इसलिए घर, वाहन, सोना, जमीन, या किसी बड़े निवेश की शुरुआत राहुकाल में अशुभ मानी जाती है। वित्तीय निर्णयों के लिए एक स्पष्ट और शांत दिमाग की जरूरत होती है। राहुकाल एक ऐसा समय हो सकता है जब लोग डर, लालच, दबाव या उत्तेजना से प्रभावित हो सकते हैं।

राहुकाल में न लें ये अहम वित्तीय फैसले

इस अवधि के दौरान कार, फोन, लैपटॉप, सोना, संपत्ति, महंगे कपड़े, उपकरण या लक्जरी उत्पाद ना खरीदें। इसी तरह, कोई भी फाइनेंस से संबंधित डॉक्यूमेंट्स पर साइन ना करें, पैसा उधार ना दें, संदिग्ध योजनाओं में निवेश ना करें, आपातकाल को छोड़कर किसी भी तरह के बड़े भुगतान करने से बचें, लिखित डॉक्यूमेंट्स के बिना कोई अग्रिम भुगतान ना करें।

राहुकाल के दौरान सरल उपाय

राहुकाल के दौरान ॐ राहवे नमः का 108 बार जप करें या कुछ मिनटों के लिए शांत रहें। किसी से भी बहस ना करें, झूठ ना बोलें, शॉर्टकट ना अपनाएं, लालची ना बनें। साथ ही, शनिवार को आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, काले तिल या कंबल दान करना चुन सकते हैं।

Yogini Ekadashi 2026 Upay: आज योगिनी एकादशी के पावन दिन पर तुलसी के इन उपायों से बदल सकते हैं अपनी किस्मत, पैसा और तरक्की से भर जाएगी झोली