इंगलैंड ने फ्रांस को 6-4 से हराकर जीता FIFA World Cup का ब्रोंज मेडल

बुकायो साका की हैट्रिक की बदौलत इंग्लैंड ने फीफा विश्वकप 2026 के कांस्य पदक मुकाबले में फ्रांस को 6-4 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।मियामी स्टेडियम में शनिवार रात खेले गये मुकाबले के शुरुआती 20 मिनट में डेकलन राइस और एजरी कॉन्सा ने इंग्लैंड को बढ़त दिलाई। इसके बाद साका ने दो गोल कर टीम का स्कोर 4-0 से कर दिया। डेकलन राइस ने तीसरे मिनट, एजरी कॉन्सा ने 18वें तथा साका ने 37वें और स्टॉपेज समय में गोल दागे।

दूसरे हाफ में फ्रांस ने तीन गोल कर वापसी की और बराबरी करने के कई आसान अवसर भी बनाए, लेकिन उन्हें भुना नहीं सका। किलियन एमबापे ने पहला गोल (44) मिनट और 66वें मिनट में अपना दूसरा गोल किया। इन दो गोलों के बीच ब्रैडली बारकोला (54वें मिनट) गोल किया। इन दो गोलों की बदौलत एमबापे 2026 विश्वकप के गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे पहुंच गए। वह विश्व कप इतिहास में 22 गोल के साथ लियोनेल मेसी को पछाड़ते हुए सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गये है।

फ्रांस के लिए बराबरी करने का एक शानदार मौका माइकल ओलिस के पास था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से चूक गया। और यह चूक इंग्लैंड के लिए महंगी साबित हुई क्योंकि इंग्लैंड ने दूसरी तरफ से हमला किया और पेनल्टी हासिल की, जिस पर साका ने पेनल्टी से अपनी हैट्रिक पूरी।

डायोट उपामेकानो के शानदार पास के बाद फ्रांस के चौथे गोल के साथ उस्मान डेम्बेले ने मैच के अंतिम क्षणों में इंग्लैंड को चिंता में डाल दिया । मैच के अंतिम क्षणों में जूड बेलिंगहैम ने 98वें मिनट में निर्णायक गोल करके इंग्लैंड को 1966 के बाद से विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद की। विश्व कप में इंग्लैंड का पिछले 60 साल में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। 1966 में इंग्लैंड ने विश्व कप का खिताब जीता था।

दुनिया का सबसे सस्ता शहर बनी दिल्ली! डेट से लेकर इंटरनेट तक सब सस्ता, लेकिन सैलरी ने चौंकाया

दिल्ली में दुनिया का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी मिल भी मिलता है और 3 BHK फ्लैट का मासिक किराया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रॉपर्टी की कीमत भी कम है। डेट और सस्ते इंटरनेट के बीच दिल्ली का एक कड़वा सच भी सामने आया है।  ड्यूश बैंक के हालिया ग्लोबल कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी के खर्च के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शामिल है। चाहे घर का किराया हो या किसी साथी के साथ बाहर घूमने-फिरने का खर्च, दिल्ली में खर्च दूसरे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई भी कई प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे कम बताई गई है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

यह जानकारी ड्यूश बैंक की ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेस 2026’ रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट में दुनिया के 69 शहरों का आकलन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत, वेतन, मकानों की लागत और जीवन की गुणवत्ता जैसे कई पैमानों पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सामान्य और किफायती डेट (बाहर घूमने और खाने का खर्च) के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इसके लिए औसतन 103 डॉलर (करीब 9,920 रुपये) खर्च होते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड का जिनेवा इस मामले में सबसे महंगा शहर है, जहां इसी तरह की आउटिंग पर 475 डॉलर (करीब 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ते हैं।

इन चीजों के खर्च के आधार पर हुई तुलना, इंटरनेट भी सबसे सस्ता

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में शहरों की किफायत का आकलन कई रोजमर्रा के खर्चों के आधार पर किया गया। इसमें वाइन की एक बोतल, एक जोड़ी जींस, गर्मियों की एक ड्रेस, दो कप कॉफी, मिड-रेंज रेस्तरां में दो लोगों का डिनर, दो मूवी टिकट, सार्वजनिक परिवहन के दो टिकट और 5 किलोमीटर की टैक्सी यात्रा का खर्च शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मासिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट के मामले में भी दिल्ली सबसे सस्ता शहर रहा। यहां एक औसत इंटरनेट कनेक्शन की कीमत 7.3 डॉलर (करीब 703 रुपये) प्रति माह आंकी गई।

हालांकि, कम खर्च होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) के मामले में दिल्ली शीर्ष 50 शहरों में जगह नहीं बना सकी। इस रैंकिंग में लोगों की खरीदने की क्षमता, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की किफायती कीमत, प्रदूषण, मौसम और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली में लोगों की कमाई भी काफी कम

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घरों की कीमतें काफी कम हैं। शहर के बीचों-बीच एक वर्ग मीटर रिहायशी संपत्ति की औसत कीमत 2,465 डॉलर (करीब 2.37 लाख रुपये) है। इसी आधार पर 69 शहरों की सूची में दिल्ली 65वें स्थान पर रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में 9.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2019 के बाद से घरों की कीमतों में 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई है।

कमाई के मामले में दिल्ली सबसे पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के मामले में दिल्ली की स्थिति काफी कमजोर है। हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी (नेट सैलरी) के आधार पर दिल्ली 69 शहरों में 66वें स्थान पर रही। दिल्ली में औसत मासिक नेट सैलरी 538 डॉलर (करीब 51,800 रुपये) बताई गई है। यह न्यूयॉर्क में काम करने वाले लोगों की औसत कमाई का लगभग दसवां हिस्सा है। वहीं, स्विट्जरलैंड का ज़्यूरिख इस सूची में सबसे ऊपर रहा। वहां लोगों की औसत मासिक नेट सैलरी 8,363 डॉलर (करीब 8.05 लाख रुपये) दर्ज की गई।

पिछले 10 साल में डॉलर के हिसाब से घटी सैलरी

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में औसत मासिक सैलरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2012 में औसत सैलरी 633 डॉलर थी, जो 2016 में बढ़कर 653 डॉलर हो गई। इसके बाद 2019 में यह घटकर 556 डॉलर रह गई। 2025 में बढ़कर 607 डॉलर हुई, लेकिन 2026 में फिर गिरकर 538 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली की औसत सैलरी में 17.7 फीसदी की कमी आई है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

यह अध्ययन ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट के जिम रीड और गैलिना पोज़्दन्याकोवा ने तैयार किया है। 13 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से नमबेओ (Numbeo) के जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बाद में ड्यूश बैंक की रिसर्च टीम ने जांचकर और बेहतर बनाया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉफी पीने वालों के लिए दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में से एक है। यहां एक रेगुलर कैपुचीनो कॉफी की औसत कीमत 2.40 डॉलर (करीब 231 रुपये) है। वहीं, शहर के मुख्य इलाके में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 685 डॉलर (करीब 65,970 रुपये) बताया गया है।

बीयर और सिगरेट का खर्च अब भी कम

ड्यूश बैंक की “ओएसिस इंडेक्स” (Oasis Index) रैंकिंग में दिल्ली 52वें स्थान पर रही। इस इंडेक्स में पांच बीयर और सिगरेट के दो पैकेट खरीदने में आने वाले कुल खर्च के आधार पर शहरों की तुलना की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इस पूरी खरीदारी पर औसतन 18.8 डॉलर (करीब 1,800 रुपये) खर्च होते हैं। यह न्यूयॉर्क में इसी तरह की खरीदारी पर होने वाले खर्च का लगभग 35 फीसदी है।

रैंकिंग की बात करें तो 2025 के मुकाबले दिल्ली सात स्थान ऊपर आई है। हालांकि, 2016 की रैंकिंग की तुलना में यह एक पायदान नीचे खिसक गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉलर के हिसाब से पिछले 10 वर्षों में इस बास्केट की कीमत 36 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर? Q1 रिजल्ट के बाद ब्रोकरेज का ये है रुझान

South Indian Bank Share Price: साउथ इंडियन बैंक के जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने इसमें फटाफट पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके शेयरों को लेकर जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, वह इसके मौजूदा लेवल से करीब 37% ऊपर है। अभी इसकी मौजूदा स्थिति की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर शुक्रवार 17 जुलाई को यह 1.57% की गिरावट के साथ ₹44.62 पर बंद हुआ था।

किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर?

साउथ इंडियन बैंक के लिए एक और तिमाही बेहतरीन रही है और जून 2026 में इसके नतीजे शानदार रहे। बैंक के ग्रोथ, मुनाफे और एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार हुआ है। RAM (रिटेल एग्रीकल्चर एंड एमएसएमई) सेगमेंट में मजबूती के दम पर इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बैंक की क्रेडिट ग्रोथ तिमाही आधार पर 15.8% से बढ़कर 18.6% हो गई तो बेहतर CASA मिक्स की वजह से सीएएसए रेश्यो भी बढ़कर 33% हो गया।

फंडिंग कॉस्ट कम होने से NIM (नेट इंटेरेस्ट मार्जिन) में 28 बीपीएस की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह 3.23% पर पहुँच गया। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी के मुताबिक आगे भी मार्जिन के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि रिटेल/MSME मिक्स में सुधार से प्राइसिंग का दबाव कम हो जाएगा।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि ट्रेजरी से कम कमाई के बावजूद बैंक को मुनाफा अच्छा रहा और स्थिर ऑपरेटिंग परफॉरमेंस और मॉडरेट क्रेडिट कॉस्ट के दम पर लगातार नौवीं तिमाही में RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) 1% से ऊपर बना रहा। एसेट क्वालिटी भी अच्छी बनी रही और ग्रॉस स्लिपेज घटकर 52 बीपीएस हो गया।

ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि बैंक की मिड-टीन लोन ग्रोथ बनी रहेगी और FY27-28 के दौरान करीब 1.1 का RoA और करीब 13% का RoE (रिटर्न ऑफ इक्विटी) रह सकता है। इन सब बातों को देखकर ब्रोकरेज फर्म ने इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है और 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹61 फिक्स किया है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

साउथ इंडियन बैंक के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 5 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹28.13 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर 10 महीने में ही यह 77.39% ऊपर चढ़कर 7 जुलाई 2026 को ₹49.90 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Alpine Texworld कितना दे पाएगा लिस्टिंग गेन! ग्रे मार्केट से मिल रहे ‘कमजोर’ संकेत

Alpine Texworld Listing Gain: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ मार्केट में अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपाओ लॉन्च हुआ था। एक तरफ एसबीआई फंड्स के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी तो दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के आईपीओ को ओवरऑल 1.40 गुना बोली मिली थी। इसके शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। आईपीओ निवेशकों को शेयर ₹105 के भाव पर जारी हुए हैं। अब मंगलवार को लिस्टिंग पर मुनाफे की बात करें तो ग्रे मार्केट में इसके शेयर इश्यू प्राइस से ₹1 यानी 0.95% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। इससे शेयरों की फीकी लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। अब अलॉटमेंट की बात करें तो अगर आपने आईपीओ में बोली लगाई थी और अभी तक स्टेटस चेक नहीं किया है तो इसे या तो बीएसई की वेबसाइट पर या रजिस्ट्रार केफिनटेक की वेबसाइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Alpine Texworld चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर स्टेटस चेक करने का तरीका

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Alpine Texworld चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Alpine Texworld IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का ₹126 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का सुस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.09 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.54 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,20,24,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.08 करोड़ प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नई वीविंग यूनिट लगाने, ₹52.20 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Alpine Texworld के बारे में

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड कपड़ों की डाईंग और प्रोसेसिंग के बिजनेस में है। इसके पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 हजार टन के कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की है। इसके पास 112 हाई-स्पीड लूम हैं जो डेनिम, सूटिंग शर्टिंग, और RFD (रेडी-फॉर-डाईंग) फैब्रिक बनाते हैं। कंपनी को फिलहाल फोकस ग्रीन एनर्जी पर है और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट पर भी ध्यान दे रही है। अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध 151.68% बढ़कर ₹21.72 करोड़ और टोटल इनकम 47.34% उछलकर ₹350.18 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹177.60 करोड़ का कर्ज था तो रिजर्व और सरप्लस में ₹46.32 करोड़ पड़े थे।

एसबीआई फंड्स की कैसी रह सकती है लिस्टिंग?

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Renault Duster 1.3L turbo MT vs DCT: Performance compared

Renault Duster 1.3L turbo MT vs DCT: Real world performance comparison

The Renault Duster was one of the first midsize SUVs in India, which was relaunched in 2026 after being absent from the Indian automotive space since 2022. With the new-generation model, Renault has equipped the Duster with not only a fresh design and more modern-day amenities, but also two turbo-petrol engine options. Among these, the larger 1.3-litre turbo-petrol mill is offered with both manual and DCT choices. But which one offers better real-world performance? Let us find out.

Renault Duster 1.3L turbo MT vs DCT: Specifications and price

The MT’s lower weight helps it with higher power- and torque-to-weight ratios

Renault Duster 1.3L turbo-petrol MT vs DCT: Specifications and price

 

Duster 1.3TP MT

Duster 1.3TP DCT

Engine

4-cyl, turbo-petrol

4-cyl, turbo-petrol

Displacement (cc)

1333

1333

Power (hp)

163

163

Torque (Nm)

280

280

Gearbox

6-speed MT

6-speed DCT

Kerb weight

1372

1393

Power-to-weight*

118.80

117.01

Torque-to-weight^

204.08

201

Price range (Rs, lakh)

12.99-17.19

14.49-18.49

*Power-to-weight figures are hp per tonne

^Torque-to-weight figures are Nm per tonne

The Renault Duster’s 1.3-litre turbo-petrol engine offers the same output (163hp, 280Nm) with the 6-speed manual and the 6-speed dual-clutch transmission (DCT) options. However, as the manual version is 21kg lighter, it has slightly better power-to-weight and torque-to-weight ratios than the DCT version.

The manual transmission variants have lower price tags than the DCT variants. The Duster manual starts at Rs 12.99 lakh, which is Rs 1.5 lakh cheaper than the entry-spec DCT, and goes up to Rs 17.19 lakh, which is Rs 1.30 lakh less than the top-spec DCT.

Renault Duster 1.3L turbo MT vs DCT: 0-100kph acceleration test

The manual option offers quicker acceleration off the line compared to the DCT

Renault Duster 1.3L turbo-petrol MT vs DCT: Acceleration from rest (in seconds)

 

Duster 1.3TP MT

Duster 1.3TP DCT

20kph

1.15

1.71

40kph

2.42

3.55

60kph

4.61

5.52

80kph

6.65

7.94

100kph

10.32

11.33

120kph

13.86

15.37

In our 0-100kph tests, we found that the Duster’s turbo-petrol manual version was faster than the DCT at all speeds. The manual version starts strongly, clocking 20kph 0.56 seconds faster, taking the difference to over a second by the time it reaches 40kph. The DCT catches up slightly at 60kph, reducing the difference to 0.91 seconds. However, the MT starts pulling faster again, and by the time it reaches 100kph, it has a 1.01-second lead.

In our experience, the manual feels engaging and rewarding when the engine is in the rev band. The clutch is light, and the shift action is precise too, which increases the powertrain’s likeability among enthusiasts. However, at slow speeds, turbo lag is evident, which, coupled with the tall gearing ratios, leads to a cumbersome city driving experience. It requires an extra downshift for a smoother drive experience.

The DCT’s wet clutch makes it the better option for city driving, as it prioritises smoothness over outright acceleration, feeling similar to a torque converter gearbox. While tall gearing is an issue at low-speed driving here too, the paddle shifters add an extra layer of engagement. 

Renault Duster 1.3L turbo MT vs DCT: Rolling acceleration tests

The DCT version clocked considerably quicker in-gear acceleration times

Renault Duster 1.3L turbo-petrol MT vs DCT: Rolling acceleration (in seconds)

 

Duster 1.3TP MT

Duster 1.3TP DCT

20-80kph (3rd gear)

10.33

6.07

40-100kph (4th gear)

11.08

7.60

Unlike the outright 0-100kph acceleration times, the DCT version posted quicker in-gear acceleration times. In the third gear, it had a 4.26-second lead in the 20-80kph time, and in fourth gear, it was quicker by 3.48 seconds to record a 40-100kph run. 

Autocar India’s testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendation and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Prices are ex-showroom, India. 

SBI Funds Listing Gain: IPO को ताबड़तोड़ बोली, अब लिस्टिंग का इंतजार, पहले दिन इतने मुनाफे की गुंजाइश

SBI Funds Listing Gain: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपाओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला। शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। हर कैटेगरी के निवेशकों के धांसू रिस्पांस के बाद आईपीओ निवेशकों को शेयर ₹574 के भाव पर जारी हुए हैं। अब मंगलवार को मंगल होने की उम्मीद है क्योंकि ग्रे मार्केट से 16% से अधिक लिस्टिंग गेन के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसके शेयर इश्यू प्राइस से ₹92.5 यानी 16.11% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। इससे शेयरों की मजबूत लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। अब अलॉटमेंट की बात करें तो अगर आपने आईपीओ में बोल लगाई थी और अभी तक स्टेटस चेक नहीं किया है तो इसे या तो बीएसई की वेबसाइट पर या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की वेबसाइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम SBI Funds चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे चेक करें स्टेटस

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके SBI Funds चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

SBI Funds IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

एसबीआई फंड्स का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 41.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 140.11 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 22.51 गुना खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.76 गुना, एंप्लॉयीज का हिस्सा 4.65 गुना और शेयरहोल्डर्स का हिस्सा 9.52 गुना भरा था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ हैं बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हुई है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग ने बेचे हैं। चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिला बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिला।

SBI Funds के बारे में

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

Lohia Corp IPO: कानपुर की लोहिया कॉर्प का आईपीओ 23 जुलाई को खुलेगा, जानिए इश्यू के बारे में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

JK Cement Q1 Result: 20% बढ़ा रेवेन्यू लेकिन 14% गिरा मुनाफा, ये है वजह, सोमवार को रहेगी शेयरों पर नजर

JK Cement Q1 Result: सीमेंट सेक्टर की दिग्गज कंपनी जेके सीमेंट के लिए चालू वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत मिली-जुली रही। एक तरफ इसके रेवेन्यू में 20% से अधिक की तेजी आई तो दूसरी तरफ ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी को झटका लगा और शुद्ध मुनाफा भी 14% से अधिक घट गया। कंपनी ने 18 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश किए और अब सोमवार 20 जुलाई को मार्केट खुलने पर शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। अभी इसके शेयरों के स्थिति की बात करें तो 17 जुलाई को बीएसई पर यह 0.65% की गिरावट के साथ ₹5388.90 (JK Cement Share Price)s पर बंद हुआ था। पिछले साल 20 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह एक साल के हाई ₹7,565 पर था जिससे 10 महीने में यह 38.27% फिसलकर 12 जून 2026 को एक साल के निचले स्तर ₹4,670.05 पर आ गया था।

JK Cement Q1 Result: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जेके सीमेंट का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 20.3% बढ़कर ₹4,031.7 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन शुद्ध मुनाफा इस दौरान 14.5% गिरकर ₹277 करोड़ पर आ गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी को जून तिमाही में दबाव झेलना पड़ा। इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.8% गिरकर जून तिमाही में ₹647.7 करोड़ पर आ गया तो ईबीआईटीडीए मार्जिन भी सिकुड़कर 20.5% से 16.1% पर आ गया। मार्जिन में गिरावट के चलते इसकी कमाई पर दबाव पड़ा और रेवेन्यू में दोहरे अंकों की ग्रोथ के बावजूद शुद्ध मुनाफा नीचे आया।

जून तिमाही में कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत बनी रही और सालाना आधार पर इसमें 18% की तेजी आई। ग्रे सीमेंट का वॉल्यूम 19% तो व्हाइट सीमेंट और पुट्टी का वॉल्यूम 11% बढ़ा। जून तिमाही में ग्रे सीमेंट की बिक्री 59.6 लाख टन रही तो व्हाइट सीमेंट की बिक्री 5.4 लाख टन रही जोकि सालाना आधार पर 29% अधिक रहा।

कंपनी के मुताबिक दोहरे अंकों में वॉल्यूम ग्रोथ की वजह वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में शुरू हुए 6 MTPA क्षमता विस्तार और यूएई से कम आयात पर व्हाइट सीमेंट वॉल्यूम में हुई बढ़ोतरी है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट को लेकर कंपनी का कहना है कि प्राइस हाइक और व्हाइट सीमेंट वॉल्यूम में तेजी के बावजूद मेंटेनेंस और पैकेजिंग कॉस्ट में उछाल के चलते इसे झटका लगा।

विस्तार की योजना को लेकर कंपनी का कहना है कि ग्रे सीमेंट कैपेसिटी बढ़ाने का काम योजना के मुताबिक ही बढ़ रहा है। अभी इसकी क्षमता 32.3 MTPA है जिसे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2028 तक 40 MTPA और वित्त वर्ष 2030 तक 50 MTPA करने की योजना है। इसे लेकर कंपनी ने अगले दो साल में ₹5000-₹6000 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की योजना बनाई है।

Stock in Focus: 20 जुलाई को इस नवरत्न कंपनी के शेयरों पर रहेगी नजर, विलय के बड़े प्लान को बोर्ड की मंजूरी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले:85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर

अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।