लॉर्ड्स पर ODI शतक जमाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने रोहित शर्मा

Rohit Sharma

लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर एकदिवसीय शतक जमाने वाले रोहित शर्मा पहले बल्लेबाज बन गए हैं। यह उपलब्धि रोहित शर्मा ने आदिल रशीद को चौका मारकर पाई। यह इस साल भी रोहित शर्मा का पहला शतक है। गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। 

इस साल फॉर्म ने साथ नहीं दिया- 6 महीने इंतजार हुआ शतक का

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

उत्तर प्रदेश में चंद महीनों में रिकॉर्ड आवेदन, 14 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों को मिला शादी अनुदान का लाभ

Uttar Pradesh government's public welfare schemes are bringing about positive changes in people's lives

– योगी सरकार की पहल बनी आर्थिक कमजोर परिवारों का सहारा, 1.05 लाख आवेदकों को लाभ देने का लक्ष्य

– प्रति बेटी 20 हजार रुपए की मिलती है सहायता, दिव्यांग, विधवा और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता

– इस वित्तीय वर्ष में 14,717 पात्र लाभार्थियों के खातों में पहुंचे 29.43 करोड़ रुपए

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना बेटियों के विवाह में बड़ी आर्थिक राहत बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के महज कुछ महीनों में ही इस योजना को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।

रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त होने के साथ ही अब तक 14 हजार से अधिक पात्र बेटियों को योजना का लाभ भी मिल चुका है। इससे स्पष्ट है कि सरकार की योजनाएं तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं और जरूरतमंद परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 82 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से पात्र पाए गए 14,717 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा चुका है। इसके लिए 29.43 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा गया है। पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिए के समय पर सहायता मिल रही है।

 

1.05 लाख आवेदकों को लाभ देने का लक्ष्य 

योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार पात्र आवेदकों को शादी अनुदान योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुरुआती महीनों में ही बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि योजना के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है।

सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराकर बेटियों के विवाह से जुड़ी आर्थिक परेशानियों को कम किया जाए। बेटी की शादी अक्सर सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना इन परिवारों के लिए संबल बनकर सामने आई है। 

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प्रति बेटी 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता

योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपए तक है।

इसके अलावा विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित तथा भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।

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सभी पात्र लाभार्थियों को दिया जा रहा लाभ

पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि शादी अनुदान योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मात्र कुछ महीनों में ही 82 हजार से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। जिसमें पात्र आवेदकों को लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है तथा योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

डेकेट ने शतक लगाकर और बेथल ने 91 रन बनाकर बनाया भारतीय गेंदबाजी का कीमा

ENGvsIND बेन डकेट की 141 रन की शानदार पारी और जैकब बेथेल के साथ पहले विकेट के लिए 192 रन की साझेदारी के बूते इंग्लैंड ने रविवार को निर्णायक तीसरे एकदिवसीय मैच में तीन विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।तीन मैचों की यह श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर है।

शतकवीर डकेट ने अनुभवहीन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की जमकर धुनाई की और मैच पर पूरी तरह इंग्लैंड की पकड़ मजबूत कर दी।भारत को मैच से पहले ही बड़ा झटका लगा, जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बाएं घुटने में लगी चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनकी अनुपस्थिति भारतीय टीम को भारी पड़ी और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया।

इस मैच में खेल रहे भारत के चार तेज गेंदबाजों प्रसिद्ध कृष्णा (10 ओवर में 69 रन देकर दो विकेट), अर्शदीप सिंह (10 ओवर में 72 रन), प्रिंस यादव (10 ओवर में 79 रन देकर एक विकेट) और गुरनूर बराड़ (10 ओवर में 97 रन) के संयुक्त खाते में महज 51 एकदिवसीय मैचों का अनुभव था। अनुभव और धार की कमी के कारण वे शानदार लय में बल्लेबाजी कर रही इंग्लैंड की टीम पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।

डकेट और बेथेल (93 गेंदों में 91 रन) ने अपनी योजना और शानदार बल्लेबाजी से भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। शुरुआती 10 ओवर के पावरप्ले में इंग्लैंड ने 58 रन बनाए, लेकिन 11वें से 30वें ओवर के बीच दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली और तेजी से रन बटोरे।

दोनों की 192 रन की साझेदारी भारत के खिलाफ किसी भी विकेट के लिए इंग्लैंड की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी बन गयी। डकेट ने इसके साथ ही ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर वनडे की सबसे बड़ी पारी के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स (इंग्लैंड के खिलाफ 1979 में नाबाद 138 रन) के 47 साल पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

भारत को अक्षर पटेल (10 ओवर में 61 रन) के अलावा दूसरे विशेषज्ञ स्पिनर की कमी खली, ऐसे में कुलदीप यादव को मौका नहीं देने पर सवाल उठ रहे हैं।डकेट ने अपनी शानदार पारी में 18 चौके और एक छक्का लगाया, जबकि शुरुआत में अधिक सहज दिख रहे बेथेल ने 11 चौके और एक छक्का जड़ा। वह हालांकि प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर बाउंड्री के पास रोहित शर्मा को कैच देकर शतक से चूक गए।

इसके बाद शानदार लय में चल रहे जो रूट ने 48 गेंदों में नाबाद 74 रन बनाए। यह इस श्रृंखला में उनका लगातार तीसरा अर्धशतक था, जिसकी मदद से इंग्लैंड का स्कोर 350 के पार पहुंचा। अंत में जोस बटलर ने भी सिर्फ 13 गेंदों में नाबाद 41 रन की विस्फोटक पारी खेली।

गुरनूर बराड़ के लिए यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कठिन अनुभव साबित हुआ और उन्होंने अपने 10 ओवर में लगभग 100 रन लुटा दिए।पारी की शुरुआत में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को लॉर्ड्स के प्रसिद्ध ढलान (स्लोप) पर अपनी लेंथ नियंत्रित करने में दिक्कत हुई। बेथेल ने उनकी गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से छक्का लगाया और फिर मिडविकेट और मिड-ऑन के बीच शानदार चौका भी जड़ा।

लंबे समय बाद इस प्रारूप में वापसी कर रहे अर्शदीप सिंह भी अपनी लाइन पर नियंत्रण नहीं रख सके, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने कई बार बेथेल को परेशान किया, लेकिन बीच-बीच में ढीली गेंदें भी फेंकीं, जिनका बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया।

बेथेल ने केवल 51 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड ने 16वें ओवर में ही 100 रन पूरे कर लिए। तब तक भारतीय गेंदबाज 15 चौके खा चुके थे और उनकी लाइन-लेंथ इतनी खराब रही कि दोनों सलामी बल्लेबाज आसानी से लय में आ गए। पूरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने 42 चौके और छह छक्के खाए।

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के मैदान पर बनाया सबसे बड़ा स्कोर, 387 रन ठोके भारत के खिलाफ

ENGvsIND इंग्लैंड ने लंदन के लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान में इतिहास रचते हुए भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ निर्धारित 50 ओवरों में 387 रन बनाए। इस पारी में बहुत सारे रिकॉर्ड बने। भारत के खिलाफ बेन डकेट और जैकब बेथल ने सर्वाधिक 193 रनों की साझेदारी की। यह लॉर्ड्स पर सबसे बड़ी सलामी साझेदारी थी। इसके अलावा बेन डकेट ने 140 रन बनाए जो इस मैदान पर किसी भी बल्लेबाज का एकदिवसीय प्रारुप में सर्वाधिक स्कोर है।

भारतीय गेंदबाजी के हाल बेहाल रहे। सिर्फ प्रसिद्ध कृष्णा को 2 विकेट मिले वहीं। प्रिंस यादव को 1 विकेट मिला। भारत को अगर यह मैच जीतना है तो एकदिवसीय प्रारुप में रिकॉर्ड रन चेज करना होगा। भारत के लिए सबसे महंगे गुरनूर बरार रहे जिन्होंने 10 ओवर में 97 रन दिए। 

इंग्लैंड ने पहले दस ओवर में 58 रन बनाए। 10 से 40 ओवर में 210 रन बनाए। और अंतिम 10 ओवर में 126 रन बनाए। इसमें से 62 रन अंतिम 3 ओवरों में आए।आज इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया। जसप्रीत बुमराह की कमी भारतीय गेंदबाजों को बहुत खली जो घुटने की चोट से बाहर रहे।

FIFA World Cup Final के कारण इन दो पूर्वोत्तर राज्यों में सोमवार को घोषित हुई स्कूल की छुट्टी

FIFA World Cup

मणिपुर और मेघालय की सरकारों ने छात्रों को फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल का लुत्फ उठाने का मौका देने के लिए सोमवार को राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी की घोषणा की है।फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में गत विजेता अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन से होगा।

मणिपुर के शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, ‘‘मणिपुर के राज्यपाल ने निर्देश दिए हैं कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई अथवा किसी अन्य बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों के साथ-साथ सभी सरकारी, अनुदानित और निजी महाविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान तथा विश्वविद्यालय 20 जुलाई को बंद रहेंगे।’’

आदेश में यह भी कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को प्रातः 12:30 बजे (रात्रि 12:30 बजे) होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले का राज्यभर के विद्यार्थी उत्साहपूर्वक आनंद ले सकें, इसी उद्देश्य से यह अवकाश घोषित किया गया है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने सोमवार को राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित करने की घोषणा की है।यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब पूरे राज्य में विश्व कप को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मैचों के लाइव प्रसारण के लिए शिलांग के एक पार्किंग स्थल के अलावा जोवाई और तुरा में स्थापित ‘सीएम फैन पार्क’ को फुटबॉल प्रेमियों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

मेघालय में फुटबॉल के इस उत्सव को वैश्विक पहचान भी मिली, जब हाल ही में फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर राज्य में फुटबॉल के प्रति लोगों के उत्साह की सराहना की।मुख्यमंत्री संगमा ने रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैंने सोमवार को स्कूलों और कॉलेजों सहित राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश रखने का फैसला लिया है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं, बल्कि लोगों का जुनून और जीवनशैली का हिस्सा है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए युवाओं को इस बहुप्रतीक्षित फाइनल का पूरा आनंद लेने का अवसर देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।उन्होंने ‘सीएम फैन पार्क’ को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया, जहां हजारों फुटबॉल प्रेमी एक साथ विश्व कप मुकाबलों का आनंद ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी प्रशंसकों को रोमांचक फाइनल मुकाबले के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

जापान ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनी PV सिंधु

PV Sindhu

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने रविवार को यहां शानदार आक्रामक बैडमिंटन खेलते हुए स्थानीय प्रबल दावेदार अकाने यामागुची को सीधे गेम में हराकर पहली बार जापान ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट का खिताब जीता।

जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी 31 साल की सिंधू ने लगातार आक्रमण के साथ-साथ रणनीतिक अनुशासन और अहम पलों में संयम बनाए रखते हुए तीन बार की विश्व चैंपियन यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया और दो साल से अधिक समय बाद अपना पहला खिताब जीता।

सिंधू ने अपना पिछला खिताब 2024 में सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय में जीता था।जापान ओपन की यह जीत 2019 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद उनकी सबसे बड़ी खिताबी जीत है।

आत्मविश्वास का मिला फल, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में पदक के लिए लय बनाए रखना होगा अहम: सिंधू 

 जापान ओपन में छह वर्षों में अपना सबसे बड़ा खिताब जीतने के बाद भावुक हुई पीवी सिंधू ने कहा कि आखिरकार अटूट आत्मविश्वास का फल मिला और अब उनका लक्ष्य अगले महीने होने वाली विश्व चैंपियनशिप में इसी लय और संयम को बनाए रखना है जिसमें वह रिकॉर्ड छठा पदक जीतने की कोशिश करेंगी।

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू ने रविवार को आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान जापान की स्टार और तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर खिताब अपने नाम किया।

करीब दो साल के खिताबी सूखे को समाप्त करने के बाद भावुक सिंधू ने कहा, ‘‘मेरी आंखों में आंसू थे क्योंकि मेरे लिए यह जीत बहुत महत्वपूर्ण थी। मैं लंबे समय से खुद पर बहुत मेहनत कर रही थी और पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर रही थी। ’’सिंधू का पिछला खिताब दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल में आया था। तोक्यो में मिली यह जीत 2019 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने 2022 में सिंगापुर ओपन सुपर 500 का खिताब भी जीता था।

CM मोहन यादव ने असंभव को किया संभव, UCC को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें लिव-इन के लिए क्या हैं शर्तें?

Meeting of Madhya Pradesh Cabinet was held under chairmanship of Chief Minister Dr Mohan Yadav

– जगदीशपुर में हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट की ऐतिहासिक मीटिंग

– तीन तलाक-हलाला से जुड़े मामले अब अपराध की श्रेणी में

– अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगी समान नागरिक संहिता

– प्रदेश के मुखिया ने कैबिनेट के बाद खुद दी यूसीसी की जानकारी 

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला, सब एक ही नियम से तय होगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असंभव को संभव कर दिया है। उनकी अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने को सहमति दे दी है। 

 

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि भारत के संविधान में बताए गए एक समानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक खास कदम है। इसे मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए , चाहे उनका धर्म कोई भी हो, शादी, तलाक, वैवाहिक झगड़ों से जुड़े भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के मकसद से बनाया गया है।

इस कोड का मुख्य मकसद महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि शादी, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े अलग-अलग पर्सनल कानूनों के तहत उनके साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म किया जा सके।

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उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग और कभी-कभी बिना लिखित नियमों वाली प्रथाओं में सुधार करके और एक समान व निष्पक्ष ढांचा बनाकर, यह कोड पर्सनल सिविल कानून को आधुनिक बनाता है, ताकि पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार मिल सकें। साथ ही, यह धार्मिक रीति-रिवाजों, समारोहों और पारंपरिक प्रथाओं की भी साफ तौर पर सुरक्षा करता है, बशर्ते वे सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हों।

 

धर्मनिरपेक्षता के विजन के मद्देनजर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत के संविधान के भाग-4 में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में यह उपबंध किया गया है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। इसके उ‌द्देश्य के परिप्रेक्ष्य में राज्य में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार तथा सहवासी-संबंध और उनसे संबंधित विषयों के विनियमन के लिए “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026” का प्रारूप तैयार किया गया है।

प्रस्तावित संहिता का उ‌द्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत विधियों के अंतर्गत समान प्रकृति के नागरिक विषयों में प्रचलित भिन्नताओं को एक समेकित विधिक ढांचे में विनियमित करना तथा समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और विधि के शासन के संवैधानिक मूल्यों को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के उद्देश्य से 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट तैयार किया है।

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यह प्रस्तावित कोड भारत के संविधान में निहित एकसमानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस संहिता का मुख्य मकसद पर्सनल कानूनों के तहत महिलाओं के साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म करना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है।

पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देने के साथ-साथ यह कोड उन धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक प्रथाओं की साफ तौर पर सुरक्षा करता है जो सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हैं। यह कोड उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड के गहन अध्ययन और उनके मार्गदर्शन से तैयार किया गया है।

 

सीएम डॉ. यादव ने बताईं संहिता की मुख्य विशेषताएं

1- अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण: संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा।

इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925' के अर्थ मान्य होंगे।

 

2- विवाह और तलाक से जुड़े बड़े सुधार

बहुविवाह-तीन तलाक पर पूर्ण रोक: यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है।

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मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।

लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 'MP ई-नगर पालिका पोर्टल' और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए 'निकाह हलाला' जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

 

3- बच्चों के अधिकार और कस्टडी

'अवैध' शब्द की समाप्ति: संहिता ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए कानूनी ढांचे से 'अवैध' (illegitimate) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।

 

4- उत्तराधिकार का एकसमान और जेंडर-न्यूट्रल ढांचा

लिंग-तटस्थ अधिकार: बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे।

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बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। पिछली पीढ़ियों के लिए एक 'यूनिट सिस्टम' और 'सर्वाइवरशिप का अधिकार' लागू किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो 'एस्चीट' सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी।

 

5- वसीयत (Will) की पूर्ण स्वतंत्रता

– एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी 'अनिवार्य उत्तराधिकार' की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' के तहत संचालित होगी।

 

6- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य विनियमन (Live-in Relationship)

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।

 

7- महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा

लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है।

बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।

फुटबॉल का ऐसा जुनून! वर्ल्ड कप फाइनल देखने के लिए भारत के इस राज्य में स्कूलों की छुट्टी

फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला देर रात स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। वहीं फाइनल को लेकर भारत में भी फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। इसी को देखते हुए केरल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सोमवार को सामान्य शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है, ताकि छात्र आराम से फाइनल मुकाबला देख सकें।

यह फैसला छात्रों की मांग के बाद लिया गया। छात्रों का कहना था कि अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होने वाला फाइनल मुकाबला देर रात खेला जाएगा, इसलिए मैच देखने के बाद अगली सुबह स्कूल जाना उनके लिए मुश्किल होगा। भारतीय समय के अनुसार यह रोमांचक मुकाबला सोमवार देर रात 12:30 बजे शुरू होगा। सरकार के इस फैसले से फुटबॉल प्रेमी छात्रों में काफी खुशी है।

शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

केरल के शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने सोशल मीडिया के जरिए स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की। उन्होंने छात्रों से मजाकिया अंदाज में पूछा, “अब खुश हो, बच्चों?” सरकार के इस फैसले की पूरे केरल में चर्चा हो रही है। राज्य में फुटबॉल को लेकर लोगों में जबरदस्त दीवानगी है और बड़ी संख्या में लोग फीफा वर्ल्ड कप के मुकाबले देखते हैं। छुट्टी की मांग को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। सीपीआई (एम) के नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सरकार से छात्रों के हित में स्कूलों में छुट्टी घोषित करने की अपील की थी। उनका कहना था कि देर रात तक फाइनल देखने के बाद छात्रों के लिए अगले दिन स्कूल जाना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए शनिवार की छुट्टी को कार्य दिवस बनाकर उसकी भरपाई की जा सकती है।

विपक्ष ने भी किया समर्थन

स्कूलों में छुट्टी की मांग को विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के नेताओं ने भी समर्थन दिया। वहीं, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने भी माना कि फीफा वर्ल्ड कप फाइनल को लेकर पूरे केरल में फुटबॉल का जबरदस्त उत्साह है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होने वाले फाइनल मुकाबले को लेकर राज्य में खासा उत्साह है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि युवा फुटबॉल प्रेमी बिना किसी चिंता के देर रात तक मैच का आनंद लें और उन्हें अगले दिन स्कूल या कॉलेज जाने की फिक्र न रहे। इसी वजह से सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी घोषित की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जागकर मैच देखें, अपनी पसंदीदा टीम का उत्साह बढ़ाएं और इस रोमांचक मुकाबले का पूरा आनंद लें।

खिताब बचाने उतरेगी अर्जेंटीना

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना टीम अपने विश्व कप खिताब को बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। वहीं, पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली स्पेन की टीम अपना दूसरा फीफा वर्ल्ड कप खिताब जीतने की कोशिश करेगी।

Best debuts at Goodwood Festival of Speed 2026

audi nuvolari on goodwood hill climb

The 2026 iteration of the Goodwood Festival of Speed was held from July 9 to July 12 in the UK. As is the case every year, carmakers both mass-market and exotic were present at Goodwood Festival of Speed 2026 to display their wildest and most performant offerings. We’ve compiled some of the best debuts (physical and dynamic) that took place at Goodwood Festival of Speed 2026.

जसप्रीत बुमराह के बिना गेंदबाजी करने उतरा भारत, इंग्लैंड ने चुनी बल्लेबाजी

ENGvsIND इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने रविवार को यहां भारत के खिलाफ श्रृंखला के तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।तीन मैच की श्रृंखला फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। भारत को इस मुकाबले में अपने स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की सेवाएं नहीं मिलेंगी जो घुटने की चोट के कारण टीम से बाहर हैं।

बीसीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘कार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे के दौरान क्षेत्ररक्षण करते समय जसप्रीत बुमराह के बाएं घुटने में चोट लगी थी। इसके कारण वह तीसरे वनडे के चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। ’’भारतीय टीम ने इस मुकाबले के लिए केएल राहुल, अर्शदीप सिंह और तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को अंतिम एकादश में शामिल किया।

भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल,  प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव।

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स,  सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोस टंग, आदिल राशिद।