HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक पर पड़ी अमेरिका में हो रही जांच की मार,1% टूटा शेयर

HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक के शेयर में आज 1 फीसदी की गिरावट है। अमेरिका की तीन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों ने HDFC बैंक के खिलाफ अमेरिकी फेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर अलग-अलग जांच शुरू की है। इस साल की शुरुआत में मीडिया में आई उन खबरों के बाद यह जांच शुरू की गई है जिनमें बैंक की ओर से कथित अनियमित भुगतान और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं की आंतरिक जांच का ज़िक्र किया गया था।

ग्लैंसी प्रोंगै वोल्के एंड रोटर LLP (Glancy Prongay),फ्रैंक आर. क्रूज़ के लॉ ऑफिस (Frank R. Cruz) और हॉवर्ड जी.स्मिथ के लॉ ऑफिस (Howard G. Smith) ने इस हफ्ते अलग-अलग बिज़नेस वायर नोटिस जारी करके इन जांचों का ऐलान किया है।

HDFC बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs)न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हैं। इसकी वजह से बैंक पर US सिक्योरिटीज कानून के तहत जानकारी देने की शर्तें लागू होती हैं।

ग्लैंसी प्रोंगै ने कहा है कि उसने HDFC बैंक के निवेशकों की ओर से कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में जांच शुरू कर दी है। वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने निवेशकों को कारोबार से जुड़ी ऐसी जानकारी दी जो काफी हद तक गुमराह करने वाली थी, और/या क्या उसने फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन किया है।

इसी तरह ‘द लॉ ऑफ़िसेज ऑफ़ हॉवर्ड जी स्मिथ’ ने कहा है कि वह फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर HDFC बैंक की जांच कर रही है। इसमें यह भी शामिल है कि क्या कंपनी ने झूठे और/या गुमराह करने वाले बयान जारी किए और/या निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया।

इसके अलावा,फ्रैंक आर क्रूज़ के लॉ ऑफिस ने भी कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में निवेशकों की ओर से जांच की घोषणा की है।

तीनों लॉ फर्म उन निवेशकों को संपर्क करने के लिए कह रही हैं जिन्हें नुकसान हुआ है,ताकि वे संभावित दावों का आकलन कर सकें।

अमेरिका में किस वजह से शुरू हुई HDFC बैंक की जांच ?

तीनों लॉ फर्मों की इन नोटिस में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’की 27 मई को छपी एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने अपने मार्केटिंग डिपार्टमेंट के जरिए किए गए पेमेंट की इंटरनल विजिलेंस जांच की थी। लॉ फर्म के नोटिस के मुताबिक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को ज्यादा ब्याज देने के लिए ₹45 करोड़ को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया था।

फर्मों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट छपने के बाद,27 मई,2026 को HDFC बैंक के शेयर की कीमत 1.02 डॉलर यानी 4.1% गिरकर 23.78 डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुए। इससे निवेशकों को नुकसान हुआ।

HDFC बैंक ने किसी भी गलत काम से किया इनकार

मई में रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद,HDFC बैंक ने CNBC-TV18 को दिए एक बयान में इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया था। बैंक ने कहा था “उसके पास मज़बूत इंटरनल निगरानी,ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस और सिस्टम हैं। सभी मामलों को बैंक के तय नियमों के अनुसार निपटाया जाता है और किसी भी इंटरनल रिव्यू के बाद अंतिम फैसला लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या दोषी होने की धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं”।

इस जांच का क्या होगा असर?

तीनों लॉ फर्मों की घोषणाओं को HDFC बैंक के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई या मुकदमा नहीं माना जा सकता। अमेरिका में ऐसी जांच आम बात है,खासकर तब जब किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर की कीमत बुरी खबर के बाद तेजी से गिरती है।

शेयरहोल्डर लॉ फर्म्स अक्सर यह तय करने के लिए जांच नोटिस जारी करती हैं कि क्या निवेशकों को भ्रामक खुलासों के कारण हुए नुकसान के आरोप में सिक्योरिटी क्लास एक्शन दायर करने का कोई आधार है।

अभी इन फर्मों ने जांच की घोषणा की है और निवेशकों से जानकारी मांगी है। अभी यह एक्शन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों की ओर से जांच से जुड़े नोटिस हैं,न कि कोई रेगुलेटरी कार्रवाई या अदालती कार्यवाही। अब देखना यह होगा कि क्या यह आगे चलकर औपचारिक सिक्योरिटीज क्लास एक्शन (शेयरधारकों के सामूहिक कानूनी मुकदमे)में बदलेगा। अभी तक तो किसी निवेशक ने मुकदमे में रुचि नहीं दिखाई है।

CNBC-TV18 ने इस पर HDFC बैंक से प्रतिक्रिया मांगी है,प्रतिक्रिया का इंतजार है। शुक्रवार को HDFC बैंक के शेयर 4.45 रुपए यानी 0.60 फीसदी गिरकर 742.80 रुपए पर बंद हुए हैं। इंट्राडे में इसमें 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। आज का इसका दिन का लो 737.25 रुपए है। पिछले वीकेंड में जून तिमाही के नतीजे आने के बाद से यह स्टॉक लगातार पांचवें दिन नीचे आया है। इस साल अब तक यह स्टॉक 25% गिर चुका है।

 

Laurus Labs Q1 Results: मार्जिन 30% उछला, रेवेन्यू 29% बढ़ा, दूसरे पैरामीटर्स भी बेहतर रहे नतीजे

Laurus Labs Q1 Results:फार्मास्यूटिकल कंपनी लॉरस लैब्स ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है , कंपनी के तिमाही नतीजे सभी पैरामीटर्स पर साल-दर-साल के आधार पर अच्छे रहे है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ₹2,026 करोड़ का रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,570 करोड़ के आंकड़े से 29% ज़्यादा है।

तिमाही के लिए इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई (EBITDA) साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹382.1 करोड़ से ₹638.3 करोड़ पर हो गया।

तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन साल-दर-साल के आधार पर 24.3% से सात परसेंटेज पॉइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 31.5% हो गया। कंपनी के लिए यह मार्जिन कई सालों में सबसे ज़्यादा है, जिसमें अच्छे प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज की मदद मिली है।

जून तिमाही के आखिर में तिमाही के लिए ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 59.4% और मार्च तिमाही के 61.4% से बढ़कर 62.7% हो गया है।

अलग- अलग सेगमेंट का कैसा रहा प्रदर्शन

लॉरस लैब्स का CDMO बिज़नेस रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 67% और लगातार 48% बढ़कर ₹870 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस ग्रोथ का क्रेडिट लेट-स्टेज क्लिनिकल प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल API सप्लाई की लगातार प्रोग्रेस को दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके पास 125 से ज़्यादा एक्टिव प्रोजेक्ट्स के साथ एक बढ़ती हुई पाइपलाइन है।

लॉरस ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में कहा कि वह कस्टमर डिमांड के आधार पर कमर्शियल स्केल पेप्टाइड्स ब्लॉक को भी आगे बढ़ा रही है।

अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिज़नेस का रेवेन्यू तिमाही के दौरान 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गया। हालांकि, यह आंकड़ा सीक्वेंशियल बेसिस पर 5% कम था क्योंकि इसने मार्च क्वार्टर में ₹1,223 करोड़ का आंकड़ा बताया था।

लॉरस ने कहा कि डिवीजन के पास एक हेल्दी ऑर्डर बुक, स्टेबल ARV और स्थापित वॉल्यूम ग्रोथ है, जिससे 10% ग्रोथ हुई। इसने कहा कि इस बिज़नेस के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं।

कंपनी इमर्जिंग मार्केट्स में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन बढ़ा रही है। अपने बिज़नेस के मौके को मजबूत करने के लिए, इसने साउथ अफ्रीका में एक ऑफिस भी खोला है।

रिज़ल्ट अनाउंसमेंट के बाद लॉरस लैब्स के शेयर आज 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,601.20 पर बंद हुआ। 2026 में अब तक स्टॉक 44% ऊपर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

A photo related to the festival of Rakhi, a symbol of the sacred bond of love between siblings. The image includes a caption for an essay on Raksha Bandhan

Rakhi, Raksha Bandhan Festival Essay: रक्षा बंधन केवल रेशम के धागों और मिठाइयों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस गहरी जड़ से जुड़ा है जो रिश्तों की पवित्रता, समर्पण और सुरक्षा का पाठ पढ़ाती है। पौराणिक काल से लेकर आज तक इस त्योहार की मूल आत्मा वही है- भाई और बहन के बीच निस्वार्थ प्रेम। परंतु समय के बदलाव के साथ-साथ वर्तमान दौर में रक्षा बंधन को मनाने के तरीकों, इसके अर्थ और इसके सामाजिक विस्तार में काफी नयापन आया है।ALSO READ: Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

 

  • प्रस्तावना
  • वर्तमान समय में रक्षा बंधन का महत्व
  • आधुनिक युग में रक्षा बंधन
  • सामाजिक संदेश
  • उपसंहार

 

प्रस्तावना

रक्षा बंधन भारत के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को दर्शाता है, जिसमें रिश्तों को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। यह केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान, कर्तव्य और सुरक्षा का प्रतीक भी है। बदलते समय के साथ रक्षा बंधन का स्वरूप भले ही आधुनिक हुआ हो, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी पहले जैसी ही पवित्र और मजबूत है।

 

वर्तमान समय में रक्षा बंधन का महत्व

आज के व्यस्त जीवन और भागदौड़ भरे समय में परिवार के सभी सदस्य एक साथ कम ही मिल पाते हैं। ऐसे में रक्षा बंधन का त्योहार परिवार को जोड़ने का एक सुंदर अवसर बनकर आता है। इस दिन भाई-बहन चाहे कितनी भी दूर क्यों न हों, वे एक-दूसरे से मिलने या ऑनलाइन माध्यम से अपनी शुभकामनाएं साझा करने का प्रयास करते हैं। इससे रिश्तों में अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है।

 

आज रक्षा बंधन केवल एक पारिवारिक त्योहार नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का भी प्रतीक बन गया है। कई स्थानों पर बहनें सैनिकों, पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और समाज की सेवा करने वाले लोगों को भी राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और विश्वास व्यक्त करती हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि रक्षा का संबंध केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा हुआ है।

 

आधुनिक युग में रक्षा बंधन

तकनीक के विकास ने इस पर्व को और अधिक सहज बना दिया है। जो भाई-बहन विदेश या दूसरे शहरों में रहते हैं, वे ऑनलाइन राखी भेजते हैं, वीडियो कॉल के माध्यम से त्योहार मनाते हैं और डिजिटल उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं ने भी इस पर्व को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लोग इको-फ्रेंडली राखियों का उपयोग करने लगे हैं। बीज वाली राखियां, हस्तनिर्मित राखियां और प्राकृतिक सामग्री से बनी राखियां पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देती हैं। साथ ही, प्लास्टिक के उपयोग से बचने की प्रेरणा भी मिलती है।

 

सामाजिक संदेश

रक्षा बंधन हमें केवल भाई-बहन के रिश्ते की याद नहीं दिलाता, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों का संदेश भी देता है। आज समाज में यह आवश्यक है कि रक्षा का अर्थ केवल सुरक्षा देने का वादा न होकर, महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी हो। यही इस पर्व की आधुनिक और व्यापक सोच है।

 

उपसंहार

रक्षा बंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो प्रेम, विश्वास, अपनापन और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। आधुनिक समय में इसके मनाने के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वही है- रिश्तों को सहेजना और उन्हें सम्मान देना। यदि हम इस त्योहार के मूल संदेश को अपने जीवन में अपनाएं, तो परिवार के साथ-साथ समाज में भी प्रेम, एकता और सद्भाव का वातावरण मजबूत होगा। इसलिए रक्षा बंधन केवल एक धार्मिक या पारिवारिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उत्सव है।

 

आज बदलते समय के साथ रक्षा बंधन का स्वरूप और भी व्यापक हो गया है। आज यह त्योहार केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु-शिष्य, मित्र, सैनिकों, समाजसेवियों और मानवता के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक भी बन चुका है। आधुनिक युग में ऑनलाइन राखी, वीडियो कॉल और डिजिटल उपहारों ने इस पर्व को वैश्विक पहचान दिलाई है, जबकि इको-फ्रेंडली राखियों का चलन पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।

 

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मंगलुरु के छात्रों ने बनाई AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक कार, जो खुद पहचानती है रास्ता

जहां टेस्ला जैसी ग्लोबल कंपनियां ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही हैं, वहीं मंगलुरु के मुक्का में स्थित श्रीनिवास यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SUIET) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स और फैकल्टी की एक टीम ने बहुत कम लागत में अपनी AI-पावर्ड सेल्फ-ड्राइविंग इलेक्ट्रिक गाड़ी ‘श्री-वाहन’ बनाई है।

इस गाड़ी को आधिकारिक तौर पर 23 जुलाई, 2026 को पेश किया गया था। यह सिर्फ़ स्टूडेंट्स का एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक काम करने वाला प्रोटोटाइप है जिसे आगे चलकर असल दुनिया में इस्तेमाल के लिए विकसित किया जा सकता है।

टीम ने इस वाहन को पूरी तरह से नए सिरे से बनाने के बजाय एक मौजूदा कार को मॉडिफाई किया और उसे इलेक्ट्रिक और AI-आधारित ऑटोनॉमस व्हीकल में बदल दिया। इस पूरे प्रोटोटाइप को तैयार करने में टीम को करीब छह महीने लगे और इसकी लागत लगभग 4-5 लाख रुपये आई।

यह सड़क को कैसे “देखता” है

यह वाहन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ LiDAR, कैमरा-बेस्ड विजन सिस्टम, GPS नेविगेशन, अल्ट्रासोनिक सेंसर, ओडोमेट्री, विजुअल SLAM और सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से चलती है। ये सभी तकनीकें मिलकर गाड़ी को बिना ड्राइवर के पहले से तय रास्ते पर सुरक्षित रूप से चलने में मदद करते हैं।

अगर रास्ते में कोई व्यक्ति या रुकावट आती है, तो सेंसर उसे पहचान लेते हैं और गाड़ी अपने-आप रुक जाती है। ऑपरेटर गाड़ी में लगे कैमरे से उस पर नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे दूर से कंट्रोल भी कर सकते हैं। इसके अलावा, गाड़ी में AI असिस्टेंट सिस्टम भी लगा है।

स्पीड और रेंज

टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा के लिए, ऑटोनॉमस मोड में गाड़ी की स्पीड 5 km/h तक सीमित रखी गई है। मैनुअल मोड में यह 20 से 28 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकता है। इसमें 5 किलोवाट की लिथियम-आयन बैटरी लगी है, जो एक बार फुल चार्ज होने पर 15 से 22 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।

यह गाड़ी लगभग 360 kg का भार उठा सकती है, यानी इसमें छह लोग बैठ सकते हैं या इतना ही वजन का सामान ले जाया जा सकता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर इसे एम्बुलेंस में भी बदला जा सके।

इसका इस्तेमाल कहां-कहां हो सकता है

इस गाड़ी को कई संभावित कामों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है: जैसे कि एजुकेशनल कैंपस में छात्रों को लाना-ले जाना, इंडस्ट्रियल इलाकों में स्टाफ को पहुंचाना, अस्पतालों में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, एम्बुलेंस के तौर पर इस्तेमाल होना, मिलिट्री इलाकों में ज्यादा जोखिम वाले जोन तक जरूरी सामान पहुंचाना और रिमोट-कंट्रोल से होने वाले डिफेंस ऑपरेशन में मदद करना।

आगे क्या होगा?

अभी यह गाड़ी सिर्फ पहले से मैप किए गए रास्तों पर ही चलती है। अगले चरण में, टीम का प्लान है कि इसमें बिना मैप वाले इलाकों में भी खुद चलने की क्षमता जोड़ी जाए और ज्यादा क्षमता वाली बैटरी लगाई जाए, ताकि इसे पूरी तरह काम करने वाली एम्बुलेंस बनाया जा सके।

इसके अलावा, संस्थान का मकसद भारतीय सड़कों के हिसाब से एक ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम बनाना और आगे चलकर इस टेक्नोलॉजी को कमर्शियलाइज करना भी है।

‘श्री-वहन’ यह दिखाता है कि मौजूदा तकनीक का इस्तेमाल करके पुराने वाहनों को कम लागत वाले AI-संचालित ऑटोनॉमस वाहनों में बदला जा सकता है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब टेस्ला जैसी वैश्विक कंपनियां भी बड़े बजट के साथ इसी तरह की तकनीक विकसित करने पर काम कर रही हैं।

इस प्रोजेटक्ट से छात्रों का क्या है फायदा?

यह प्रोजेक्ट छात्रों की रिसर्च करने की क्षमता को दिखाता है, उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव के साथ सीखने का मौका देता है और भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रोजेक्ट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विश्वास सी. शेट्टी ने मार्गदर्शन किया, जबकि रिसर्च एसोसिएट विशाख मेनन ने रिसर्च और डेवलपमेंट का नेतृत्व किया। श्रेयस, अद्वितीय, उज्ज्वल, अक्षय, मंजूनाथ और प्रख्यात जैसे छात्रों ने इस प्रोजेक्ट में अहम योगदान दिया।

श्रीनिवास यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. ए. श्रीनिवास राव के अनुसार, इस तरह के रिसर्च छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास देते हैं और साथ ही समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

हिंदुस्तान जिंक का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 144.8 प्रतिशत बढ़कर 5469 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 2234 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 13747 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 7771 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 6749 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 5065 करोड़ रुपये के थे। EBITDA एक साल पहले से 109 प्रतिशत बढ़कर 8074 करोड़ रुपये रहा, जो कि किसी तिमाही में दर्ज किया गया अब तक का सबसे ज्यादा EBITDA है।

जून 2026 तिमाही में हिंदुस्तान जिंक का माइन्ड मेटल प्रोडक्शन 268 KT रहा। रिफाइंड मेटल प्रोडक्शन सालाना आधार पर 4% की बढ़ोतरी के साथ 260 KT दर्ज किया गया। जिंक के प्रोडक्शन की कॉस्ट 851 डॉलर प्रति टन रही, जो कि किसी एक तिमाही में देखी गई लोएस्ट कॉस्ट है। सिल्वर प्रोडक्शन 149 टन दर्ज किया गया।

Meesho Share Price: घाटे में कमी के बावजूद बिकवाली का दबाव, शेयर 6% तक लुढ़का

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FMSCI granted National Sports Federation status

FMSCI National Sports Federation

The FMSCI (Federation of Motor Sports Club of India) has been provisionally recognised as a National Sports Federation (NSF) by the Sports Ministry. This move strengthens the motorsport governing body’s standing in India, as the government pushes to grow the racing ecosystem and bring more international events like F1 back to the country. 

  1. FMSCI now eligible for financial grants
  2. Dedicated task force set up to asses India’s motorsport ecosystem

What does NSF status mean for Indian motorsport?

Headed by Arindam Ghosh, the FMSCI had applied for NSF status on June 11, 2026. As per an order dated July 23, 2026, the Sports Ministry has approved this request provisionally after relaxing some norms regarding minimum affiliation required for state units. 
NSF status means that the FMSCI is now eligible for financial grants from the Sports Ministry. As part of the process, FMSCI has been directed to amend its constitution and Memorandum of Association to align with the provisions of the National Sports Governance Act, 2025. The Ministry has also reserved the right to revoke the recognition should the federation fail to comply with its guidelines.

Last month, Sports Minister Mansukh Mandaviya had announced plans to set up a dedicated task force to assess the motorsport ecosystem in India. “The Task Force will evaluate the international, economic, tourism, and investment benefits arising from hosting major motorsport events in India. It will also identify key priorities, infrastructure requirements, and operational needs necessary for the sustainable development of the sector and submit its recommendations to the Sports Ministry,” Mandaviya added. 

The push to bring F1 back to India

F1 Indian GP

The FMSCI being granted NSF status comes amid renewed momentum around India’s motorsport ambitions, particularly the possible return of the F1 Indian GP. The Adani Group, currently in the running to acquire the Buddh International Circuit (BIC), has confirmed it is exploring plans to revive the race at the venue, which hosted the Indian GP from 2011 to 2013 before it was dropped from the calendar. That was largely due to the Uttar Pradesh government’s taxation policy at the time, which classified F1 as entertainment rather than sport.

While Mandaviya had earlier suggested the Indian GP could return as soon as 2027, F1 has maintained that this timeline isn’t realistic, noting that organising races is a complex, time-intensive process.

In a recent interaction with FanCode, Formula 1 CEO and president Stefano Domenicali confirmed that there is indeed “big interest” from the championship to return to India. But he also cautioned that a revival of the Indian GP is still several years away and will require several conditions to be met. 

“It is very important to say that we need to feel the interest from all the stakeholders of India because this is a project that, when we reach back to your country, has to be big,” explained Domenicali. “It has to be the right one, with the right level of investment and the right level of people, because your market is just phenomenal. I just want to guarantee that we’re going to be there for sure one day and in the right condition.”
 

भारतीय ODI और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उतरे छात्रों के समर्थन में

Shubhman Gill

भारतीय एकदिवसीय और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने अपनी इंस्टा पोस्ट के जरिए नीट पेपर लीक पर जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है। पिछले साल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत के कप्तान शुभमन गिल ने टीम इंडिया की बागडोर टेस्ट और एकदिवसीय प्रारुप में थामी थी।

गिल ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि युवा पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और देश के भविष्य को आकार देने के लिए हर मौका मिलना चाहिए।

गिल ने लिखा, ‘‘एक युवा भारतीय के रूप में मेरा मानना है कि हमारी पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और उस भविष्य को बनाने के लिए हर अवसर मिलना चाहिए जिसकी हम सभी आकांक्षा रखते हैं। ’’छब्बीस साल के गिल ने कहा कि वह उन युवाओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने पूरे देश में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का रास्ता चुना है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हर उस युवा के लिए बहुत सम्मान है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास रखता है। ’’किसी विशेष प्रदर्शन या राजनीतिक मुद्दे का उल्लेख किए बिना गिल ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और छात्रों की चिंताओं से निपटने के दौरान सहानुभूति रखने की अपील की।

उन्होंने लिखा, ‘‘शिक्षा में हमारे देश के भविष्य को आकार देने की ताकत है। मुझे उम्मीद है कि हम संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और हर छात्र के सर्वश्रेष्ठ हित को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे। ’’गिल ने लिखा, ‘‘भारत के भविष्य के लिए। ’’

EPFO: खुशखबरी! ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा ट्रांसफर किया, अपना पीएफ बैलेंस ऐसे चेक करें

EPFO: एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने इंटरेस्ट का पैसा सब्सक्राइबर्स के ईपीएफ अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 का इंटरेस्ट है। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में पीएफ बैलेंस पर 8.25 फीसदी इंटरेस्ट को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोग अपने ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट अमाउंट क्रेडिट होने का इंतजार कर रहे थे।

सब्सक्राइबर्स को आ रहे इंटरेस्ट क्रेडिट होने के एसएमएस

ईपीएफ के कई सब्सक्राइबर्स को इंटरेस्ट अमाउंट क्रेडिट होने के एसएमएस आए हैं। उनमें बताया गया है कि FY26 के इंटरेस्ट का पैसा उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया है। हालांकि, इस बात की संभावना है कि इंटरेस्ट ट्रांसफर अलर्ट मिलने के बावजूद आपके ईपीएफ में तुरंत रिवाइज्ड बैलेंस नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि EPFO अभी करोड़ों सब्सक्राइबर्स के अकाउंट्स को अपडेट कर रहा है। इसलिए आपके अकाउंट में आया पैसे दिखने में समय लग सकता है।

34 करोड़ ईपीएफ अकाउंट्स में 1.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर होंगे

ईपीएफओ को करीब 34 करोड़ ईपीएफ अकाउंट्स में सालाना इंटरेस्ट के करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफ करने हैं। इस साल पिछले साल के मुकाबले इंटरेस्ट ट्रांसफर का प्रोसेस जल्द पूरा हुआ है। इसकी वजह ईपीएफओ की नई सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सिस्टम (CITES) प्लेटफॉर्म है। इसके चलते इंटरेस्ट ट्रांसफर का प्रोसेस ऑटोमेटेड हो गया है।

सब्सक्राइबर्स अपने रिवाइज्ड ईपीएफ बैलेंस को ऐसे चेक कर सकते हैं

ईपीएफए के सब्सक्राइबर्स अपने ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट के रिवाइज्ड बैलेंस को चेक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ईपीएफओ के मेंबर पासबुक पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा। इसके लिए UAN और पासवर्ड होना जरूरी है। आपको पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद ‘व्यू पासबुक’ को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद आपको ईपीएफ बैलेंस और इंटरेस्ट अमाउंट की एंट्री दिखेगी।

ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट ट्रांसफर की एंट्री दिखने में समय लग सकता है

अगर आपके ईपीएफ अकाउंट में तुरंत इंटरेस्ट अमाउंट की एंट्री नहीं दिखती है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ईपीएफओ कई चरणों में अकाउंट को अपडेट करता है। इसलिए सभी सब्सक्राईबर्स के ईपीएफ अकाउंट अपडेट होने में थोड़ा समय लग सकता है।

सब्सक्राइबर्स ईपीएफ अकाउंट बैलेंस का 75 फीसदी निकाल सकते हैं

सब्सक्राइबर्स उमंग ऐप के जरिए भी अपना ईपीएफ बैलेंस चेक कर सकते हैं। लेकिन, अभी मेंटेनेंस की वजह से इस ऐप का ईपीएफ बैलेंस फीचर काम नहीं कर रहा है। ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स से जुड़ी सभी सेवाओं को ऑनलाइन बना दिया है। साथ ही विड्रॉल के नियमों में भी बदलाव किया गया है। ईपीएफ स्कीम, 2026 के तहत अपने ईपीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक निकाल सकते हैं।

गुजरात के असिस्टेंट कोच विजेता दहिया को इंस्टा पर मिलने लगी गालियां, बोले मैं कॉकरोच नहीं

इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस के असिस्टेंट कोच विजेता दहिया को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता में से एक विजेता दहिया के हमनाम होने की सजा कुछ ऐसे मिली की लोगों ने उनको उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर गालियां बरसाना शुरु कर दिया। इंस्टा पर गालियां इतनी बढ़ गई कि ऐसे में उन्हें स्टेटस अपलोड कर यह साबित करना पड़ा कि वह कॉकरोच जनता पार्टी वाले विजेता दहिया नहीं है।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के साथ जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन का समर्थन कॉकरोच जनता पार्टी शुरुआत से कर रही है। 1973 में जन्मे विजेता दहिया शुरुआत से ही गुजरात टाइटंस के कोचिंग स्टाफ से जुड़े है। हालांकि इस बार समान नाम होने के कारण उन पर फोटो शेयरिंग एप्प इंस्टाग्राम पर गालियां बरसाई गई।

साल 2022 में बनी गुजरात टाइटंस के सफर की बात करें तो टीम ने अपने पहले ही संस्करण में राजस्थान रॉयल्स को हराकर इंडियन प्रीमियर लीग जीता। इसके बाद वह अहमदाबाद  के नरेंद्र मोदी स्टे़डियम में उपविजेता रही। साल 2024 में भी टीम प्लेऑफ में पहुंची वहीं साल 2025 में टीम को निराशा हाथ लगी। इसके अलावा साल 2026 में टीम वापस उपविजेता बनी।

पहली जीत पाने में 8 मैच लग गए कप्तान श्रेयस अय्यर को, दिया यह बयान

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए कप्तानी एक दिवास्वप्न की जगह एक दुस्वपन की तरह आई। यरोप के दौरे पर वह पहले ऐसे भारतीय टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान बने जिसे पहले 7 मैचों के बाद भी जीत का स्वाद नहीं मिला। लेकिन अफ्रीका महाद्वीप जाते साथ ही उनका स्वागत जीत के साथ हुआ। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी 20 में गुरूवार को जीत हासिल करने के बाद कहा कि पहली जीत हासिल कर अच्छा लगा।

अय्यर ने मैच के बाद कहा, ”हमारे खिलाड़ियों ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया था। रणनीति को बहुत अच्छे ढंग से अमली जामा पहनाया। और बतौर कप्तान मुझे पहली जीत मिली। विकेट में बाउंस थी, मयंक ने हमें बेहतरीन शुरुआत दिलाई और विपक्षी बल्लेबाज़ों को अधिक रूम नहीं दिया। जैसा कि मैंने कहा कि निर्भीक युवा बल्लेबाज़ (वैभव सूर्यवंशी) ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी की। वह पहले भी यहां खेल चुके हैं और अंडर-19 विश्व कप फ़ाइनल में भी उन्होंने 175 रनों की पारी खेली थी।

भारत ने 8 ओवर रहते जिम्बाब्वे के खिलाफ जीता पहला T20I मैच

मयंक यादव और प्रिंस यादव (दो-दो विकेट) की शानदार गेंदबाजी के बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (50) के तूफानी अर्धतक की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे को पहले टी 20 में गुरूवार को सात विकेट से हराकर श्रेयस अय्यर को उनकी कप्तानी में पहली जीत का स्वाद दे दिया।

भारत ने जिम्बाब्वे को सात विकेट पर 125 रन पर रोकने के बाद 13.2 ओवर में तीन विकेट पर 126 रन बनाकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। श्रेयस अय्यर की अपनी कप्तानी में छह टी 20 मैचों में लगातार हार के बाद यह पहली जीत है। इस जीत के सूत्रधार रहे वैभव सूर्यवंशी और मयंक यादव। मयंक यादव ने चार ओवर में मात्र 18 रन देते हुए दो अहम विकेट निकाले और ज़िम्बाब्वे को 125 के एक छोटे स्कोर पर रोकने में अहम भूमिक निभाई। सूर्यवंशी ने 19 गेंदों पर 50 रनों की पारी खेली और ज़िम्बाब्वे को मुक़ाबले में उम्मीद पाने का भी मौक़ा नहीं दिया।

सूर्यवंशी ने मात्र 19 गेंदों में चार चौकों और चार छक्कों की मदद से 50 रन की आतिशी पारी खेलकर भारत की जीत का मार्ग प्रशस्त किया। ईशान किशन ने 24 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 35 रन बनाकर भारत की जीत में योगदान दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने 24 गेंदों में नाबाद 28 और तिलक वर्मा ने नाबाद छह रन बनाये।