यूपी में विधवा पेंशन के लिए 380 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय व्यवस्था

यूपी में विधवा पेंशन के लिए 380 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय व्यवस्था

CM Yogi Adityanath

Widow Pension Scheme UP: प्रदेश की निराश्रित एवं विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने वाली इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना को लेकर योगी सरकार ने वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 380 करोड़ 15 लाख 74 हजार रुपए की धनराशि की व्यवस्था की गई है। यह राशि भारत सरकार से प्राप्त केंद्रांश (मदर सैंक्शन) के उपयोग के लिए नवीन लेखाशीर्षक यानी नए बजट हेड में उपलब्ध कराई गई है। इस संबंध में महिला कल्याण विभाग द्वारा शासनादेश जारी किया गया है।

 

इसमें स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार से प्राप्त मदर सैंक्शन की धनराशि का उपयोग चालू वित्तीय वर्ष में योजना के अंतर्गत किया जाएगा। इस वित्तीय व्यवस्था का उद्देश्य योजना के अंतर्गत पात्र निराश्रित और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पेंशन संबंधी खर्च को सुचारु बनाए रखना है।

वित्तीय नियमों के अनुसार इस्तेमाल होगी धनराशि

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना योगी सरकार की प्राथमिकता है। मिशन शक्ति सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित मद में ही किया जाएगा। धनराशि का आहरण एवं व्यय आवश्यकता और वित्तीय नियमों के अनुसार होगा।

जरूरतमंद महिलाओं तक समयबद्ध पहुंचेगी सहायता

अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश में निराश्रित और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विधवा पेंशन योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहारा देने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 380 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से योजना के संचालन और पात्र लाभार्थियों तक पेंशन का लाभ पहुंचाने में और मजबूती आएगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी पात्र महिला सामाजिक सुरक्षा के इस लाभ से वंचित न रहे और उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत समयबद्ध सहायता मिल सके।

India-spec Kia Sorento revealed ahead of September 4 launch

India-spec Kia Sorento revealed ahead of September 4 launch
Kia Sorento front quarter

Ahead of its launch on September 4, Kia has officially revealed the India-spec Sorento. It will be Kia’s new flagship ICE-powered model with three rows of seating and will be offered with strong-hybrid and diesel powertrains. The brand has also confirmed that the hybrid variant will be offered with all-wheel drive (AWD), which will make it unique in its segment. It will also be offered with Kia AI assistant – a first for the Sorento globally, debuting with the India-spec model. 

Kia has commenced production of the Sorento at its Anantapur facility today. With high levels of localisation, we expect very competitive pricing, likely around the Rs 30-35 lakh mark (Ex-showroom). 

Amrit Bharat Express: अहमदाबाद-भागलपुर ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ जल्द शुरू होगी, जानें- रूट, स्टॉपेज और पूरा टाइम टेबल

Amrit Bharat Express: गुजरात और बिहार के बीच रेल यात्रियों के लिए बड़ी गुड न्यूज है। भारतीय रेलवे जल्द ही अहमदाबाद-भागलपुर नई अमृत भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवा शुरू करने जा रहा है। इस ट्रेन के शुरू होने से गुजरात के प्रमुख औद्योगिक शहर अहमदाबाद और बिहार के महत्वपूर्ण कारोबारी केंद्र भागलपुर के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। भागलपुर को अपनी रेशम उद्योग की पहचान के कारण ‘सिल्क सिटी ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है।

‘हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन को नियमित करने का फैसला किया है। इसे अब 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद विकली अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे के इस फैसले से गुजरात और बिहार के बीच सफर करने वाले लोगों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

21 अगस्त से शुरू होगी टिकट बुकिंग

इस ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग 21 अगस्त से शुरू होगी। टिकट रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के साथ-साथ IRCTC की वेबसाइट के माध्यम से भी बुक किए जा सकेंगे। ट्रेन सप्ताह में एक दिन अहमदाबाद से भागलपुर और एक दिन भागलपुर से अहमदाबाद के लिए चलेगी।

अहमदाबाद से भागलपुर का पूरा शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवा 26 अगस्त से शुरू होगी। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ट्रेन की परिचालन गति करीब 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहेगी।

अहमदाबाद से रवाना होने का टाइम: हर बुधवार शाम 6:30 बजे

भागलपुर पहुंचने का समय: शुक्रवार सुबह 6:40 बजे

कुल यात्रा समय: करीब 36 घंटे 10 मिनट

भागलपुर से अहमदाबाद वापसी का समय

वापसी में ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस भागलपुर से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे रवाना होगी। इसकी नियमित सेवा 28 अगस्त से शुरू होगी। ट्रेन रविवार सुबह करीब 5:25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी। यानी भागलपुर से अहमदाबाद पहुंचने में लगभग 36 घंटे 40 मिनट का समय लगेगा।

किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन?

अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई महत्वपूर्ण शहरों और रेलवे जंक्शनों से होकर गुजरेगी। इस रूट के जरिए गुजरात और बिहार के अलावा रास्ते में पड़ने वाले कई बड़े शहरों और महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों को भी सीधा रेल संपर्क मिलेगा।

इसके प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं:-

अहमदाबाद-आनंद -छायापुरी-गोधरा- दाहोद-रतलाम -कोटा – सवाई माधोपुर – गंगापुर सिटी – आगरा – टूंडला -गोविंदपुरी – प्रयागराज – पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन – बक्सर -आरा – दानापुर -पटना -मोकामा – किऊल- जमालपुर – सुल्तानगंज -भागलपुर।

ट्रेन में होंगे कई तरह के कोच

अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की जरूरत के अनुसार जनरल, बिना रिजर्वेशन वाला कोच और स्लीपर क्लास के कोच उपलब्ध होंगे। इससे अलग-अलग बजट में यात्रा करने वाले यात्रियों को विकल्प मिल सकेंगे।

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गुजरात-बिहार के यात्रियों को क्या होगा फायदा?

अहमदाबाद और भागलपुर के बीच सीधी साप्ताहिक ट्रेन शुरू होने से दोनों राज्यों के यात्रियों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। गुजरात में बड़ी संख्या में बिहार और पूर्वी भारत से जुड़े लोग काम और कारोबार के लिए रहते हैं। वहीं, बिहार से गुजरात आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह ट्रेन एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगी।

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के पार, भारत के इंपोर्ट बिल में आ सकता है बड़ा उछाल

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर 20 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 94 डॉलर को पार कर गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव भी 87 डॉलर के पार हो गया। क्रूड में उछाल का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला।

ट्रंप के आक्रामक रुख से मध्यपूर्व में संकट गहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ ऐसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जो अब तक किसी देश के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों को भी चेताया है। इधर, ईरान पर ट्रंप के रुख का कोई असर नहीं पड़ा है। इससे मध्यपूर्व में स्थिति गंभीर हो गई है।

लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल

ट्रंप के ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाने से लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी रही। भारतीय समय के मुताबिक, शाम 5 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 2.63 फीसदी के उछाल के साथ 94.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 फीसदी उछाल के साथ 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

सीजफायर के बाद क्रूड ऑयल में आई थी नरमी

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। जून में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के ऐलान से क्रूड में गिरावट आई थी। लेकिन, युद्धविराम की अवधि बीत जाने के बाद फिर से क्रूड में तेजी दिख रही है।

भारत 85 फीसदी क्रूड की जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है

क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत के करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटा पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले तेज गिराव के बाद रुपये में स्थिरता दिख रही है। लेकिन, अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो फिर से रुपये पर दबाव दिख सकता है।

अप्रैल-जुलाई के बीच इंपोर्ट बिल में 56 फीसदी उछाल

अप्रैल-जुलाई के बीच भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 56.5 फीसदी बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, वॉल्यूम में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसका मतलब है कि क्रूड की कीमतों में उछाल इंपोर्ट बिल बढ़ने का मुख्य कारण है। इस साल अप्रैल-जुलाई में भारत ने 8.19 करोड़ टुन क्रूड का आयात किया। एक साल पहले की समान अवधि में 8.15 करोड़ टन क्रूड का आयात हुआ था।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 4 बार बढ़ा चुकी हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत सालाना 1.8-2 अरब बैरल क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर के इजाफा से देश का इंपोर्ट बिल एक साल में 2 अरब डॉलर तक बढ़ जाता है। जून में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से पहले क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई थीं। इसका सीधा असर लोगों के बजट पर पड़ा। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों सहित दूसरी चीजें भी महंगी हुईं।

Simple Wave family electric scooter to launch on September 2

Simple Wave family electric scooter to launch on September 2
Simple Wave family electric scooter to launch on September 2

Simple Energy has named its upcoming family electric scooter Simple Wave, which will be unveiled on September 2, 2026. The scooter marks the company’s entry into the mainstream family scooter segment, expanding its portfolio beyond the performance-oriented One range. The model was previously referred to as Arrive during its development and testing, with Simple Energy now confirming Wave as its production name.

  1. Simple Wave to launch on September 2
  2. Scooter was previously referred to as Arrive
  3. New model will target family buyers

Simple Wave to expand the brand’s portfolio

The brand current has the One range on sale.

The Wave has been developed for everyday mobility, with Simple Energy highlighting comfort, practicality and shared journeys. It will take on family-oriented electric scooters such as the Ather Rizta, TVS iQube and Bajaj Chetak.

The scooter has been spotted testing in India on several occasions. Earlier test mules featured a large single-piece seat, a spacious-looking floorboard, telescopic front suspension and twin rear shock absorbers. Braking hardware included a front disc and rear drum, while a TFT instrument display was also seen on test vehicles. Simple Energy has not yet confirmed the final production specification.

The Wave represents a move into a broader part of the electric scooter market for Simple Energy, whose existing products have focused on performance and technology. The company says its new scooter has been developed through its in-house R&D and engineering capabilities, including proprietary software and vehicle technologies.

Simple Energy also says it is the first Indian OEM to commercially manufacture heavy rare earth-free electric motors, highlighting its focus on developing key technologies in-house.

Technical details of the Wave have not yet been revealed. Battery capacity, motor output, claimed range, charging specifications, variants and pricing are expected to be announced at the September 2 launch.

With the Wave, Simple Energy will enter the family scooter market with a product aimed at everyday users, broadening its reach beyond its existing performance-oriented electric scooters.

Samsung Galaxy इवेंट की डेट कन्फर्म, इस दिन Galaxy S26 FE होगा लॉन्च, जानें फीचर्स

दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी Samsung ने Galaxy S26 FE को लॉन्च करने के लिए ‘Galaxy Event’ की घोषणा की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह इवेंट 27 अगस्त, 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके लिए वर्चुअल इवेंट भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार शाम 5:30 बजे शुरू होगा और इसे YouTube पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।

Samsung की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, ’27 अगस्त को सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ‘Galaxy Event August 2026′ आयोजित करेगा, जिसमें Galaxy S26 परिवार में सबसे नया स्मार्टफोन पेश किया जाएगा। इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने लिए सबसे जरूरी चीजों को महत्व देते हैं। इसमें कैमरा से लेकर AI तक के मुख्य Galaxy S26 अनुभव और लेटेस्ट One UI शामिल हैं।’

इस इवेंट की एक बड़ी खासियत Samsung Galaxy S26 FE का लॉन्च हो सकता है। ऐसी भी चर्चा है कि कंपनी Galaxy Tab S12 को भी बाजार में उतार सकती है। इसी सिलसिले में, आइए जानते हैं Samsung के आने वाले इस फोन के स्पेसिफिकेशन्स, कैमरा और दूसरे खास फीचर्स के बारे में।

Samsung Galaxy S26 FE: कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा, 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा और 8MP का टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 12MP का Sony IMX825 सेंसर मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, ये जानकारी फिलहाल सामने आई रिपोर्ट्स और लीक्स पर आधारित है।

Samsung Galaxy S26 FE में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.7-इंच का FHD+ डिस्प्ले हो सकता है। वहीं, इस डिवाइस में Samsung Exynos 2500 प्रोसेसर के साथ 12GB RAM और बेस वेरिएंट में 256GB इंटरनल स्टोरेज मिल सकता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह फोन Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगा, जिसमें ऊपर One UI 9 स्किन होगी। अफवाहों के अनुसार, इस फोन में 4,900mAh की बैटरी होगी, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।

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लाइसेंस राज की छुट्टी! सरकार बदलने जा रही है कारोबार के लाइसेंस का पूरा सिस्टम, 15 साल तक बढ़ा सकती है वैलिडिटी

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में लाइसेंस से जुड़ी शर्तों में बड़े बदलाव करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत,कई तरह के परमिट की वैलिडिटी को 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है। कारोबारियों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम हो सकेगा। बताते चलें कि अभी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के किसी बिजनेस को प्रोजेक्ट के पूरे समय में केंद्र,राज्य और स्थानीय निकायों से कम से कम 60 लाइसेंस की जरूरत होती है। इनमें केंद्र-स्तर की कई मंज़ूरियां भी शामिल हैं,जैसे पर्यावरण से जुड़ी मंज़री और फ़ूड सेफ्टी लाइसेंस। इन्हें समय-समय पर रिन्यू भी करवाना पड़ता है।

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) के लाइसेंस को अभी हर 1 से 5 साल में रिन्यू करवाने की जरूरत होती है। सुधार की इस प्रक्रिया में पर्यावरण,ड्रग रेग्युलेशन,विस्फोटक और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) जैसे इंडस्ट्री पर असर डालने वाले कई क्षेत्र शामिल हैं।

वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भुगतान

इस सुधार को नॉन-फाइनेंशियल रेगुलेटरी रिफॉर्म्स पर बनी एक हाई-लेवल कमिटी आगे बढ़ा रही है। इसके हेड नीति आयोग के सदस्य और पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा हैं। इस कमिटी का गठन अगस्त 2025 में किया गया था। इसका मसद नियमों का पालन करने के बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार के रेगुलेशन, सर्टिफिकेशन,लाइसेंस और परमिशन की समीक्षा करना था।

इन सुधारों के तहत अब लाइसेंस की वैधता और फीस के भुगतान के नियम अलग-अलग होंगे। सूत्रों के मुताबिक कारोबारियों को तय फीस हर साल देनी होगी,लेकिन जब लाइसेंस 10 या 15 साल के लिए मान्य होगा तो उन्हें रिन्यूअल के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि कारोबारियों को सालाना फीस तो देनी होगी लेकिन उन्हें रिन्यूअल से जुड़े बार-बार होने वाले कागजी काम और प्रक्रियाओं से छुटकारा मिल जाएगा।

अभी अलग-अलग इंडस्ट्री को उनकी जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग लाइसेंस लेने होते हैं। इस पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग लाइसेंस को एक ही लाइसेंस में मिलाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। कारोबारियों को अभी भी अलग-अलग लाइसेंस जरूरी लाइसेंस लेने होंगे। इस कवायद का मकसद सिर्फ नियमों को आसान बनाना और अनुपालन का बोझ कम करना है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस

यह कोशिश भारत में ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस(कारोबार करने में आसानी)को बेहतर बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का ही एक हिस्सा है। वर्ल्ड बैंक के ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2014 में 142वीं थी जो 2020 में सुधरकर 63वीं हो गई। डेटा की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं के कारण इस इंडेक्स को बंद करने से पहले यह इसका आखिरी एडिशन था। अब भारत इस साल के आखिर में वर्ल्ड बैंक के नए बिज़नेस रेडी(B-READY) असेसमेंट में शामिल होगा।

 

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 21 अगस्त को कैसी रह सकती है इसकी चाल

ICC ने दी पाक क्रिकेट को राहत, इस स्टेडियम से हटाया डिमेरिट अंक

pakistan cricket team

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जून में खेले गए तीसरे वनडे के लिए लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम की पिच को दिए गए डिमेरिट अंक को गुरुवार को वापस ले लिया।पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कहा कि आईसीसी अपील पैनल ने जून में खेले गए मुकाबलों के लिए लगाए गए डिमेरिट अंकों के खिलाफ पीसीबी और क्रिकेट कनाडा की अपील के बाद पिच रेटिंग की समीक्षा की।मैच के फुटेज, रेफरी की रिपोर्ट और कप्तानों की टिप्पणियों की समीक्षा के बाद पैनल ने अपना फैसला पलट दिया।

आईसीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘चार जून को पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीसरे पुरुष एकदिवसीय में पिच को ‘असंतोषजनक’ रेटिंग दिए जाने के बाद लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम पर लगाया गया डिमेरिट अंक वापस ले लिया गया है। पैनल ने पाया कि मैच रेफरी ने आईसीसी की पिच और आउटफील्ड निगरानी प्रक्रिया के दिशानिर्देशों का पालन किया था, लेकिन पिच पर अत्यधिक असमान उछाल या स्पिन देखने को नहीं मिली।’’

अपील पैनल ने कहा कि हालांकि मैच रेफरी ने दिशानिर्देशों का पालन किया था इस्तेमाल की गई पिच की स्थिति ‘‘संतोषजनक पिच के अनुरूप’’ थी और उसमें ‘‘अत्यधिक असमान उछाल, सीम मूवमेंट या स्पिन’’ नहीं थी। इसलिए पैनल ने डिमेरिट अंक वापस लेने का फैसला किया।पाकिस्तान ने तीन मैचों की श्रृंखला 2-1 से जीती थी। तीनों मुकाबलों में दोनों टीमों के स्पिनरों का दबदबा रहा।

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

भारत में मोबाइल SIM कार्ड को लेकर नियम और सख्त होने जा रहे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करेगा, जो अपने नाम पर निर्धारित अधिकतम संख्या में SIM कार्ड पहले ही ले चुके हैं। ऐसे यूजर्स को अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन लेने से रोका जाएगा।

 

देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 SIM कार्ड की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य SIM कार्ड के जरिए होने वाले धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।

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10वां SIM लेने की कोशिश की तो क्या होगा?

 

एक बार निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां उसी व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेंगी। नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति के नाम पर 9 SIM कार्ड हैं, तो उसकी जानकारी और उपलब्ध होने पर फोटो भी Digital Intelligence Platform (DIP) पर दिखाई देगी। टेलीकॉम कंपनियां नया कनेक्शन देने से पहले यह जांच सकेंगी कि ग्राहक पहले ही तय सीमा तक SIM ले चुका है या नहीं।

 

यह व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू होने की योजना है। शुरुआत में टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन जारी करने से पहले DIP में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्रॉस-चेक करेंगी। इसके बाद सिस्टम को धीरे-धीरे अधिक ऑटोमेटेड बनाया जाएगा।

 

पहले से लिमिट से ज्यादा SIM हैं तो क्या होगा?

 

नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे, जिनके नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे अतिरिक्त SIM कार्ड की पहचान कर उन्हें डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। DoT की तकनीक पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए SIM कार्ड या निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन की पहचान करने में सक्षम है।

 

SIM कार्ड के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम

 

सरकार के इस कदम का बड़ा मकसद उन SIM कार्ड के इस्तेमाल को रोकना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी दूसरे लोगों की पहचान बनाकर, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध करने के लिए करते हैं। DIP के जरिए DoT पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ SIM और टेलीकॉम दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करता है।

 

नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम तैयार

 

DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रियल-टाइम SIM जांच व्यवस्था लागू करने और अपने सिस्टम को Digital Intelligence Platform के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की समयसीमा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले ग्राहकों की पहचान जल्द हो सके और अतिरिक्त कनेक्शन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

ASTR भी करेगा फर्जी SIM की पहचान

 

सरकार ने फर्जी दस्तावेजों या निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में जारी किए गए SIM कार्ड की पहचान के लिए ASTR नाम का AI आधारित सिस्टम भी तैयार किया है। यह तकनीक संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने में मदद करती है।

 

CNAP से कॉल आने पर दिखेगा नाम

 

SIM कार्ड की संख्या सीमित करने के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के रूप में हो रहा है। CNAP के जरिए जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आएगी तो मोबाइल स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ा नाम दिखाई देगा, भले ही वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो। CNAP में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा, न कि किसी क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस का।

 

कुल मिलाकर, SIM की सीमा सख्त करना, DIP के जरिए जानकारी साझा करना और CNAP लागू करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फर्जी मोबाइल कनेक्शन के जरिए पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों पर शिकंजा कसना है।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, JPSC-JSSC उम्मीदवारों को बड़ी राहत

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Jharkhand CM announces rs 3 crore relief for flood victims

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी हासिल की थी और अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थे।

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याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील है कि राज्य सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही भर्ती परीक्षाओं और उसके बाद हुई नियुक्तियों को एकतरफा तरीके से रद्द कर दिया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी सेवाओं में नियुक्त भी हो चुके थे। ऐसे में सरकार के फैसले से सीधे तौर पर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था।

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उम्मीदवारों ने प्राकृतिक न्याय का दिया हवाला

 

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice) का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी उम्मीदवार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच या सुनवाई के सभी सफल अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।

 

उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं दी थीं, मेरिट लिस्ट में स्थान हासिल किया और इसके बाद उन्हें सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया। इसलिए पूरी भर्ती प्रक्रिया को एक साथ रद्द करने के बजाय प्रत्येक अभ्यर्थी की भूमिका की अलग-अलग जांच की जानी चाहिए।

 

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी उठे सवाल

 

JSSC-CGL मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी है कि परीक्षा के परिणाम पहले हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में घोषित किए गए थे। ऐसे में बाद में राज्य सरकार की ओर से पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले की कानूनी वैधता पर सवाल उठता है।

 

गौरतलब है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID और SIT की जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर झारखंड सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और नियुक्त उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है।