Gold-Silver in Jun Quarter: सोने के लिए दस साल की सबसे कमजोर तिमाही, चार वर्षों में सबसे तेज फिसल रही चांदी

Gold and Silver News: यह तिमाही खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और सोने-चांदी की जैसी चाल है, उस हिसाब से जून 2026 तिमाही इनके लिए झटका साबित हो रहा है। यह निगेटिव जोन में एंट्री करने जा रहा है और इसके साथ ही लगातार पांच तिमाहियों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट जाएगा। गोल्ड की हालत तो और खराब है क्योंकि यह दस साल की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की तरफ बढ़ रहा है, तो चांदी की चमक चार साल में सबसे अधिक फीकी होने वाली है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने और चांदी की लगातार गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई लेवल पर बने रहने और फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर बदलते रुझान के चलते है। चूंकि सोना और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता तो लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल इन्हें अमेरिकी ट्रेजरी जैसे निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक बना देता है।

कितना फीका हुआ सोना-चांदी?

जून तिमाही में अब तक गोल्ड के भाव 12% नीचे आ चुके हैं जो दिसंबर 2016 के बाद इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। वहीं चांदी 17.6% फिसल चुकी है, जो जून 2022 के बाद इसकी सबसे तेज गिरावट है। हालांकि अगर रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई देती है। गोल्ड प्रति औंस (28.35 ग्राम) $5,417 के रिकॉर्ड हाई से 24% नीचे आ चुका है तो 28 जनवरी को प्रति औंस $117 के रिकॉर्ड हाई से चांदी लगभग 47% गिर चुकी है।

सोने-चांदी की यह गिरावट पिछले दो साल में ताबड़तोड़ तेजी के बाद आई है। साल 2024 में 28% और साल 2025 में 65% की बढ़त के बाद, जनवरी और मार्च 2026 के बीच सोने की कीमत में 10% की तेजी आई तो दूसरी तरफ साल 2024 में 22% और साल 2025 में 148% चढ़ने के बाद जनवरी और फरवरी 2026 में चांदी की कीमत 28% बढ़ी।

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कब तक बना रहेगा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने सोने-चांदी पर दबाव डाला था लेकिन यह दबाव तब भी जारी रहा, जब इनके बीच शांति समझौता हो गया। पश्चिमी एशिया में युद्ध ने तेल की कीमतों में आग लगा दी थी और सख्त मौद्रिक नीतियों के आसार बढ़ा दिए। अब अमेरिकी फेड ने मौद्रिक नीतियों की हालिया बैठक के बाद नए चेयरमैन केविन वार्श ने फिलहाल ब्याज दरों में किसी बढ़ोतरी का ऐलान तो नहीं किया लेकिन इस साल एक बार दर बढ़ाने के संकेत दिए। इसने निवेशकों की चिंता बढ़ी दी और अमेरिका-ईरान के समझौते के पॉजिटिव इफेक्ट को फीका कर दिया। अमेरिकी फेड के मौद्रिक नीतियों के कमेटी की हालिया बैठक के बाद से डॉलर इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हो चुका है।

एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज) देवेया गागलानी (Deveya Gaglani) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने और कच्चे तेल की फिसलन के बावजूद अमेरिकी फेड के सख्त रुख, हाई इनफ्लेशन और डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल के कारण बुलियन यानी सोना-चांदी पर दबाव बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स हाल ही में एक साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। देवेया के अनुसार जब तक डॉलर $100 से ऊपर बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रहा सकता है।

अब किस बात पर रहेगी नजर

हाल ही में शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट ऑस्टन गूल्सबी (Austan Goolsbee) ने कहा था कि उन्हें महंगाई बढ़ने की रफ्तार को लेकर चिंता है और यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है है कि महंगाई बढ़ाने वाले सभी फैक्टर्स अस्थायी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से लक्ष्य से कहीं अधिक मुद्रास्फीति या इनफ्लेशन की समस्या से जूझ रही है और हाल के रुझान सही दिशा में नहीं हैं। अब कारोबारियों और निवेशकों की नजर गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर होगी, जिसके तेज होने के आसार हैं। इसका असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर करने वाली नीति पर दिख सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

बागी हुए ट्रंप के सांसद, अमेरिकी सीनेट में ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास

trump with assault rifle

अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है। 50-48 वोटों से मंजूर हुए इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कहा गया है। इससे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है।

1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी कार्रवाई खत्म करने की मांग की है। वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे ट्रम्प की पार्टी के भीतर बढ़ती बागवत भी सामने आई। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।

इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो UAE, बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है। इन देशों को आशंका है कि समझौते से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट शर्त नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित फंड पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इसमें खाड़ी देशों से आर्थिक सहयोग मांगा जा सकता है। ऐसे में वॉशिंगटन अपने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
Edited By: Naveen R Rangiyal  

LIVE: अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सांसद, पुणे में राजा रघुवंशी जैसा कांड, नीरव मोदी लौटाएगा 100 करोड़ के हीरे

Donald Trump

अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है। 50-48 वोटों से मंजूर हुए इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कहा गया है। इससे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। 1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी कार्रवाई खत्म करने की मांग की है। वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे ट्रम्प की पार्टी के भीतर बढ़ती बागवत भी सामने आई। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।

लंदन हाईकोर्ट से नीरव मोदी को बड़ा झटका : भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव को बैंक का 10.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार बताया है। लंदन कमर्शियल कोर्ट के जज साइमन टिंकलर ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि नीरव मोदी ने बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए कर्ज की व्यक्तिगत गारंटी दी थी और अब वह इस रकम की अदायगी के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है। कोर्ट ने कहा कि नीरव मोदी पर मुख्य रकम के तौर पर करीब 4.1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 38.9 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है। इसके अलावा बैंक की ओर से तय नियमों के हिसाब से ब्याज की रकम भी इसमें जोड़ी जाएगी। नीरव मोदी ने अदालत में बैंक के दावे को चुनौती दी थी। उसके वकीलों ने तर्क दिया कि बैंक की ओर से दी गई व्यक्तिगत गारंटी लागू नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बैंक ने सही तरीके से मांग नहीं की और कर्ज खत्म करने का आधार भी पर्याप्त नहीं था।

तुम्हारा पति और बेटा हमारे कब्जे में है; फोटो दिखाकर शातिरों ने महिला को धमकाया, फिर घर ले जाकर लूटे जेवर

कानपुर में बाइक सवार शातिरों ने अनोखे तरीके से लूट की घटना को अंजाम दिया। उन्होंने पहले  एक महिला को रोका और फिर मोबाइल पर उसे पति-बेटे की फोटो दिखाकर कहा कि दोनों हमारे कब्जे में हैं। दोनों की हत्या की धमकी देकर महिला का मंगलसूत्र और रुपये लूट लिए।

Market cues : निफ्टी के 23750 से नीचे जाने पर बढ़ेगी गिरावट, इसके ऊपर बने रहने पर 24000-24200 का लेवल मुमकिन

Trade setup for today : 23 जून को टेक शेयरों में आई ग्लोबल गिरावट के चलते बाजार पर दबाव बना और यह 1.2 प्रतिशत गिर गया। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने कंसोलिडेशन का संकेत दिया,लेकिन तेल की कीमतों में राहत के कारण निफ्टी अभी भी 20-डे EMA (23,750) और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन (23,640) के ऊपर बना हुआ है। अगर इंडेक्स इन लेवल्स को साफ तौर पर तोड़ता है, तो मार्केट में मंदड़िए ज़ोरदार वापसी कर सकते हैं। हालांकि,इसके ऊपर बने रहने से धीरे-धीरे 24,000 के लेवल और उसके बाद 24,200 (जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल है) की ओर बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। 24,200 के ऊपर लगातार ट्रेड होने पर ही बड़ी बढ़त की उम्मीद की जा सकती है। जानकारों के मुताबिक,तब तक एक तय दायरे में ट्रेडिंग और कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,781, 23,698 और 23,564

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,049, 24,132 और 24,265

निफ्टी ने कल एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई,जिसके दोनों तरफ छोटी शैडो थीं। यह उतार-चढ़ाव के बीच कमजोरी का संकेत है। इंडेक्स 100-डे EMA के नीचे बना रहा और 10-डे और 50-डे EMA के भी नीचे आ गया। हालांकि यह 20-डे EMA के ऊपर बना रहा। इंडेक्स अप्रैल की रैली के 23.6 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के नीचे भी फिसल गया,जो 24,000 से थोड़ा ऊपर है। RSI गिरकर 51.91 पर आ गया,लेकिन रेफरेंस लाइन से ऊपर बना रहा। MACD में बुलिश क्रॉसओवर बना रहा,हालांकि MACD लाइन और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर कम हो गया। यह हिस्टोग्राम की हल्के हरे रंग की बार्स में दिखा,जो लगातार तीसरे सेशन में छोटी होती गईं। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड तो पॉजिटिव है,लेकिन मोमेंटम कमजोर पड़ गया है और निकट भविष्य में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,752, 57,963 और 58,304

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,070, 56,859 और 56,519

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी में भी 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई और डेली टाइमफ्रेम पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनी,जो 58,000 के लेवल पर रेजिस्टेंस का सामना करने के बाद कमजोरी का संकेत है। बैंकिंग इंडेक्स ने पिछले हफ्ते के निचले स्तर को बनाए रखा और सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड करना जारी रखा। इसमें 20-डे EMA,100-डे EMA से ऊपर चला गया है और अब 200-डे EMA से ऊपर जाने की कगार पर है। RSI गिरकर 60.97 पर आ गया है और बेयरिश क्रॉसओवर की कगार पर है। MACD में तेजी का रुख बना रहा,हालांकि हल्के हरे रंग के हिस्टोग्राम बार और छोटे हो गए। इन सबसे पता चलता है कि बड़ा ट्रेंड तो पॉज़िटिव बना हुआ है,लेकिन मोमेंटम कम होने से संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में कंसोलिडेशन हो सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

23 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और वे नेट बायर रहे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस दौरान 680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाले इंडिया VIX में कल 8.57% की बढ़त हुई और यह 13.94 पर पहुंच गया,जो बुल्स के लिए बेचैनी का संकेत है। बुल्स के लिए अपने कम्फर्ट जोन में बने रहने के लिए इंडेक्स का 12 के लेवल से नीचे आना जरूरी है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 23 जून को पिछले सेशन के 0.97 से गिरकर 0.88 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Bajaj Auto Share Buyback: आज, 24 जून रिकॉर्ड डेट, वापस खरीदे जाएंगे ₹5633 करोड़ के शेयर; लेकिन किस भाव पर?

टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर मेकर Bajaj Auto Ltd शेयर बायबैक कर रही है। रिकॉर्ड डेट आज यानि 24 जून है। रिकॉर्ड डेट से पहले के क्लोजिंग डे पर जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। लेकिन याद रहे कि आज शेयर खरीदने वाले पात्र नहीं होंगे। बायबैक के तहत कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स से ₹10 प्रति शेयर फेस वैल्यू वाले 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी। शेयरों की यह संख्या कंपनी के कुल इक्विटी शेयरों का 1.68% है।

शेयर बायबैक की कीमत ₹12,000 प्रति शेयर तय की गई है। इस तरह बजाज ऑटो शेयर बायबैक के लिए कुल ₹5,633 करोड़ (₹5,632,80,00,000) खर्च करेगी। इस रकम में अन्य खर्च, ब्रोकरेज फीस और लागू टैक्स शामिल नहीं हैं।

कंपनी ने इस बायबैक की घोषणा 6 मई को तिमाही और सालाना नतीजे जारी करने के साथ की। इससे पहले बजाज ऑटो ने साल 2024 में शेयर बायबैक किया था। उस वक्त कंपनी ने शेयरहोल्डर्स से कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा ₹10,000 प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदा था।

टेंडरिंग विंडो की अवधि

बायबैक के तहत टेंडरिंग की अवधि 1 जुलाई, 2026 को शुरू होगी और 7 जुलाई, 2026 तक चलेगी। Bajaj Auto के प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों और कंपनी का कंट्रोल रखने वाले लोगों ने संकेत दिया है कि वे बायबैक में हिस्सा नहीं लेंगे। नतीजतन, एंटाइटेलमेंट रेश्यो की गणना करते समय उनकी होल्डिंग्स को शामिल नहीं किया जाएगा।

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Bajaj Auto का शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत चढ़ा

Bajaj Auto के शेयर की कीमत BSE पर 23 जून को 10015.45 रुपये पर बंद हुई। कंपनी का मार्केट कैप 2.79 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत और एक साल में 20 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 3 साल में शेयर की कीमत 117 प्रतिशत चढ़ी है। मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 55.01% हिस्सेदारी थी। बजाज ऑटो के अब लगभग 3 लाख खुदरा शेयरधारक हैं। पिछले दो सालों में कंपनी में म्यूचुअल फंड्स की शेयरहोल्डिंग 5.32% से बढ़कर 7.17% हो गई है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Google की नौकरी छोड़ने वाली 23 साल की इंजीनियर का बड़ा खुलासा, जानिए क्यों लिया ये फैसला

नौकरी की सुरक्षा और अच्छे वेतन को छोड़कर अपने सपनों के पीछे भागना हर किसी के बस की बात नहीं होती। खासकर तब, जब नौकरी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Google में हो। लेकिन 23 वर्षीय आशना दोशी ने वही रास्ता चुना, जिसे ज्यादातर लोग जोखिम भरा मानते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता नौकरी छोड़ना नहीं थी, बल्कि ये थी कि अगर उन्होंने अपने विचारों को मौका ही नहीं दिया, तो शायद जिंदगी भर इसका अफसोस रहेगा। यही सोच उन्हें एक नए सफर की ओर ले गई। आज आशना अपनी पसंद के काम पर ध्यान दे रही हैं और कुछ नया बनाने की कोशिश कर रही हैं।

उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सुरक्षित करियर और अपने सपनों के बीच फैसला लेने की दुविधा में रहते हैं। कभी-कभी बड़ा कदम उठाने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है, और आशना ने वही हिम्मत दिखाई।

ग्रेजुएशन से पहले मिला था Google का ऑफर

आशना को Georgia Tech में पढ़ाई के दौरान ही फरवरी 2024 में Google से फुल-टाइम नौकरी का ऑफर मिल गया था। हालांकि यह नौकरी कैलिफोर्निया में थी, जबकि वो न्यूयॉर्क में रहकर करियर शुरू करना चाहती थीं।

उस समय नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया। कुछ महीनों बाद उन्हें Google में ही न्यूयॉर्क स्थित एक दूसरी भूमिका मिल गई, जो उनकी योजना के मुताबिक थी।

Google में सब अच्छा था, लेकिन मन कहीं और था

Google में काम करते हुए आशना ने बेहतरीन तकनीकी अनुभव हासिल किया और प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि उनकी रुचि सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं रही।

उन्हें लोगों की कहानियां सुनना, नए विचारों पर चर्चा करना और कुछ अपना बनाने का सपना ज्यादा आकर्षित करने लगा।

साइड प्रोजेक्ट से शुरू हुआ नया सफर

साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने एक अन्य टेक इंजीनियर के साथ मिलकर “0 to 1” नाम का पॉडकास्ट शुरू किया। इस शो में उद्यमियों, इंजीनियरों और बिजनेस लीडर्स की सफलता और संघर्ष की कहानियां साझा की जाती थीं। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे पॉडकास्ट लोगों को पसंद आने लगा। एक साल के अंदर इसके यूट्यूब पर 1 लाख से ज्यादा व्यूज हो गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात Amazon और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी हुई।

AI की दुनिया में दिखा बड़ा मौका

पॉडकास्ट की सफलता के साथ आशना के मन में खुद का बिजनेस शुरू करने का विचार और मजबूत होता गया। उनका मानना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नए उद्यमियों के लिए कई बड़े अवसर लेकर आया है। उन्हें लगा कि यही सही समय है जब जोखिम उठाकर कुछ नया बनाया जाए।

Google को कहा अलविदा, स्टार्टअप पर लगाया दांव

मई में आशना ने Google की नौकरी छोड़ दी और अपने पॉडकास्ट पार्टनर के साथ मिलकर “Bounty” नाम का AI स्टार्टअप शुरू किया। यह एक AI आधारित मार्केटप्लेस है, जहां कंपनियां भर्ती, आउटरीच और लीड जनरेशन जैसे काम पोस्ट कर सकती हैं और केवल परिणाम मिलने पर भुगतान करती हैं।

कमाई घटी, लेकिन आत्मविश्वास बढ़ा

आशना मानती हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई है। फिलहाल उनका स्टार्टअप कमाई नहीं कर रहा है और पॉडकास्ट से भी कोई आय नहीं होती। इसके बावजूद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उनका कहना है कि सुरक्षित नौकरी में रहकर हमेशा “क्या होता अगर…” सोचते रहना उनसे ज्यादा मुश्किल होता।

सबसे बड़ा डर नौकरी छोड़ना नहीं, रुक जाना था

आशना का मानना है कि जिंदगी में कुछ नया करने की कोशिश न करना सबसे बड़ा जोखिम है। उनके अनुसार, Google छोड़ना डरावना नहीं था, बल्कि वहीं रहकर हमेशा यह सोचते रहना ज्यादा डरावना था कि वह और क्या कर सकती थीं। यही सोच उन्हें आज अपने सपनों के पीछे पूरी ताकत से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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GIFT Nifty बाजार के फ्लैट खुलने के दे रहा संकेत, ग्लोबल बाजार में मिला-जुला ट्रेड, क्रूड की कीमतों में दबाव

सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को फ्लैट खुल सकते हैं, जिसे GIFT Nifty से पॉजिटिव संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में कमी और चल रही US-ईरान शांति बातचीत को लेकर बेहतर सेंटीमेंट से सपोर्ट मिलेगा। ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी और US फेडरल रिजर्व के ज्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं के बावजूद भारतीय बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में बढ़त की संभावना है, जो रिस्क लेने की क्षमता पर असर डाल रही है।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.22 बजे 23,820.00 पर ट्रेड कर रहा था, जो 1.50 पॉइंट्स या 0.01 परसेंट नीचे था, जो मंगलवार की तेज सेल-ऑफ के बाद घरेलू इक्विटी के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत है।

यह संकेत 23 जून को भारतीय बाज़ारों में लगभग दो हफ़्तों की सबसे बड़ी गिरावट के बाद आया है। सेंसेक्स 893.39 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 278.80 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 23,824.10 पर बंद हुआ। कमज़ोर ग्लोबल संकेतों और US-ईरान शांति बातचीत को लेकर अनिश्चितता ने सेंटिमेंट पर असर डाला, जबकि निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेश कम करना जारी रखा।

ओपनिंग बेल से पहले ग्लोबल बाज़ार मिले-जुले रहे

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली के एक और दौर से वॉल स्ट्रीट रात भर तेज़ी से नीचे बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 2.21 प्रतिशत गिरा, जबकि S&P 500 1.44 प्रतिशत गिरकर एक हफ़्ते से ज़्यादा के निचले स्तर पर आ गया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज काफ़ी मज़बूत था, जो सिर्फ़ 0.09 प्रतिशत गिरा।

इन्वेस्टर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते डेट-फंडेड खर्च और इस बात की संभावना को लेकर चिंतित थे कि US फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में और सख्त रुख अपना सकता है। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर पड़ा क्योंकि इन्वेस्टर्स ने महीनों की अच्छी बढ़त के बाद वैल्यूएशन का फिर से आकलन किया।

हालांकि, बुधवार को एशियाई मार्केट्स में स्थिरता के संकेत दिखे। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स थोड़ा बदला, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी मंगलवार की 10 परसेंट की तेज गिरावट के बाद 2.2 परसेंट उछला। जापान का निक्केई बढ़त और गिरावट के बीच ऊपर-नीचे होता रहा और आखिरी बार थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट जारी रही, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात सामने आई। ब्रेंट क्रूड $76.7 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि US क्रूड $73 प्रति बैरल से नीचे था। दोनों बेंचमार्क अब चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब ट्रेड कर रहे हैं क्योंकि US-ईरान बातचीत में प्रगति और होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए टैंकर ट्रैफिक फिर से शुरू होने से सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हो गई है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ गिरावट भारतीय इक्विटीज़ के लिए सबसे मज़बूत सपोर्ट में से एक बनकर उभरी है।

निफ्टी के लिए 24,000 पर सबसे बड़ी रुकावट 

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, घरेलू मार्केट ग्लोबल इक्विटीज़ में कमज़ोरी के मुकाबले पॉज़िटिव जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट को बैलेंस कर रहा है। उन्होंने कहा, “US-ईरान शांति बातचीत में प्रोग्रेस से सुधर रहे सेंटिमेंट को ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमज़ोरी और US फेडरल रिज़र्व के ज़्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं से बैलेंस किया जा रहा है।” US-ईरान शांति बातचीत में लगातार प्रोग्रेस हो रही है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताओं को कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि जब तक कोई फॉर्मल एग्रीमेंट फाइनल और लागू नहीं हो जाता, तब तक इन्वेस्टर्स के सावधान रहने की संभावना है।

ग्लोबल डेवलपमेंट के अलावा, मार्केट पार्टिसिपेंट्स मॉनसून की प्रोग्रेस पर भी करीब से नज़र रख रहे हैं। कई इलाकों में बारिश की कमी ने एग्रीकल्चरल आउटपुट, फ़ूड इन्फ्लेशन और रूरल डिमांड को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले हफ़्तों में मॉनसून ट्रेंड्स मार्केट के लिए एक ज़रूरी वेरिएबल बन गए हैं।

मंगलवार के तेज़ करेक्शन के बावजूद इंस्टीट्यूशनल फ्लो सपोर्टिव रहे। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) 23 जून को मार्जिनल नेट बायर्स बने, उन्होंने 17 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने 680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि 24,000 के निशान से नीचे जाने के बाद निफ्टी पर दबाव बना हुआ है। अभी सबसे बड़ी रुकावट 24,000 पर है, और इस लेवल से ऊपर लगातार बढ़ने से बुलिश मोमेंटम फिर से आ सकता है और 24,100-24,200 ज़ोन की ओर रिकवरी का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ, 23,800 एक ज़रूरी सपोर्ट लेवल बना हुआ है। इस ज़ोन से नीचे एक बड़ा ब्रेक नया सेलिंग प्रेशर पैदा कर सकता है और इंडेक्स को 23,600 के लेवल पर ले जा सकता है।

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