Silver Rate Today: 12 जुलाई को चांदी के भाव में हलचल, जानें देश के प्रमुख शहरों में ताजा रेट और कीमतों का गणित

Silver Rate Today: भारत में रविवार, 12 जुलाई को चांदी की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वायदा बाजार (एमसीएक्स) में जुलाई चांदी फ्यूचर्स में 0.01 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्ज की गई। जबकि आखिरी बंद भाव ₹2,22,680 प्रति किलोग्राम रहा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में स्थानीय मांग, टैक्स और अन्य कारकों के कारण चांदी के खुदरा भाव में अंतर देखने को मिला। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है।

जहां एक ओर वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में बेहद मामूली तेजी आई है। वहीं देश के अलग-अलग शहरों में इसके दामों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। देश के प्रमुख शहरों में अहमदाबाद में चांदी सबसे महंगी रही, जहां इसकी कीमत ₹2,63,900 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। वहीं, कर्नाटक के यादगिर में चांदी का भाव सबसे कम ₹2,52,100 प्रति किलोग्राम रहा। यानी अहमदाबाद की तुलना में यादगिर में एक किलो चांदी ₹11,800 सस्ती बिक रही है।

चांदी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन या बाजार में दिखाई देने वाला चांदी का भाव केवल बेस प्राइस होता है। ज्वेलरी खरीदते समय इसमें मेकिंग चार्ज और 3 प्रतिशत जीएसटी अलग से जोड़ा जाता है, जिससे अंतिम कीमत बढ़ जाती है। यदि चांदी के आभूषण में पत्थर लगे हों, तो उनकी कीमत और वजन अलग से जोड़ा या घटाया जाता है।

चांदी की शुद्धता

चांदी की शुद्धता की बात करें तो 999 फाइन सिल्वर (99.9%) सबसे शुद्ध माना जाता है। जबकि 925 स्टर्लिंग सिल्वर (92.5%) का इस्तेमाल सबसे ज्यादा आभूषण और घरेलू सामान बनाने में होता है। खरीदारी के समय ग्राहकों को BIS हॉलमार्क और शुद्धता का निशान (999 या 925) जरूर जांचना चाहिए। ताकि असली चांदी की पहचान सुनिश्चित हो सके।

निवेशकों को सलाह

जो निवेशक बिना भौतिक चांदी खरीदे निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए सिल्वर ETF, सिल्वर फंड ऑफ फंड्स और डिजिटल सिल्वर जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, डिजिटल सिल्वर में निवेश करने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि यह फिलहाल SEBI द्वारा विनियमित नहीं है, इसलिए निवेश से पहले जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।

चांदी का भाव

अहमदाबाद: ₹2,63,900 प्रति किलोग्राम (सबसे अधिक)

यादगिर: ₹2,52,100 प्रति किलोग्राम (सबसे कम)

(यानी अहमदाबाद की तुलना में यादगिर में 1 किलो चांदी ₹11,800 सस्ती है।)

क्या सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर है?

फिलहाल सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले सप्ताह कीमतों में गिरावट आई है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरें और भारत में त्योहारों व शादी के मौसम की मांग जैसे कारक आगे भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

भारत में सोने की कीमत किन बातों पर निर्भर करती है?

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव
  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी
  • फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
  • भारत में त्योहारों और शादी के मौसम की मांग
  • आयात शुल्क और अन्य सरकारी नीतियां

यदि आप बिना चांदी खरीदे निवेश करना चाहते हैं, तो:-

डिजिटल सिल्वर

सिल्वर ETF

सिल्वर फंड ऑफ फंड्स

में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, डिजिटल सिल्वर SEBI द्वारा विनियमित नहीं है, इसलिए निवेश से पहले जोखिमों को समझना जरूरी है।

एमसीएक्स (MCX) वायदा बाजार का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के जुलाई वायदा में हल्की हलचल देखी गई। न्यूज एजेंसी आईएएनएस (IANS) के मुताबिक, चांदी का जुलाई वायदा 0.01 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र के बंद होने तक चांदी वायदा का भाव ₹2,22,680 प्रति किलोग्राम पर बना हुआ है।

शहरों के अनुसार चांदी के दाम: कहां महंगी, कहां सस्ती?

देश के प्रमुख शहरों और क्षेत्रों में चांदी की कीमतों में ₹11,000 से भी ज्यादा का अंतर देखने को मिल रहा है:-

सबसे महंगी चांदी (अहमदाबाद): देश के प्रमुख शहरों में गुजरात के अहमदाबाद में चांदी की कीमत सबसे ज्यादा दर्ज की गई है, जहां यह ₹2,63,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर है।

सबसे सस्ती चांदी (यादगीर): कर्नाटक के यादगीर में चांदी के दाम सबसे कम रहे, जहां इसका भाव ₹2,52,100 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।

कीमतों में अंतर: अहमदाबाद के मुकाबले यादगीर में चांदी प्रति 10 ग्राम के अनुपात में ₹11,800 सस्ती मिल रही है।

निवेशकों को सलाह

ऑनलाइन दिखने वाला चांदी का यह रेट एक बेंचमार्क (आधार मूल्य) होता है। जब आप शोरूम से चांदी या ज्वेलरी खरीदते हैं, तो अंतिम कीमत में बेस सिल्वर प्राइस+ मेकिंग चार्जेस+ 3% जीएसटी (GST) जोड़ा जाता है। इसके अलावा, जो लोग बिना किसी मेकिंग चार्ज या स्टोरेज के झंझट के निवेश करना चाहते हैं, वे पेपर या डिजिटल विकल्पों जैसे सिल्वर ETFs (Exchange Traded Funds) का रुख कर रहे हैं।

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Milky Mist IPO: जुलाई में ही लॉन्च हो सकता है डेयरी सेक्टर का सबसे बड़ा इश्यू, ₹2035 करोड़ जुटाने पर नजर

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड अपना 20.35 अरब रुपये (2035 करोड़ रुपये) का IPO इसी महीने यानि जुलाई में ही लॉन्च कर सकती है। यह भारत के डेयरी सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। यह बात ब्लूमबर्ग की ​एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कही गई है। मिल्की मिस्ट पनीर से लेकर आइसक्रीम तक बनाती है। मिल्की मिस्ट अपने एक्सपेंशन प्लांस के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए IPO का विकल्प चुन रही है। इस इश्यू को SEBI ने अक्टूबर 2025 में मंजूरी दी थी।

कंपनी की शुरुआत 1985 में एक मिल्क ट्रेडिंग कंपनी के रूप में हुई थी। इसने 1994 में पनीर (कॉटेज चीज) का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद इसने दही, मक्खन, चीज, आइसक्रीम जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स को भी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में जोड़ा। कंपनी के फाउंडर टी सतीश कुमार हैं। तमिलनाडु के इरोड में स्थित मिल्की मिस्ट का संचालन कुमार, उनकी पत्नी अनीता सतीश कुमार और सीईओ के. रत्नम करते हैं।

इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग खत्म

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी ने इनवेस्टर्स के साथ रोडशो पूरे कर लिए हैं और वह इस महीने के आखिर में या अगस्त की शुरुआत में शेयरों की बिक्री शुरू करने का लक्ष्य बना रही है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग्स और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है। अक्सर, कंपनियां IPO के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े शहरों में कई मीटिंग आयोजित करती हैं।

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IPO में रहेंगे 17.85 अरब रुपये तक के नए शेयर

ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, मिल्की मिस्ट के पब्लिक इश्यू में 17.85 अरब रुपये तक के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही फाउंडर्स की ओर से 2.5 अरब रुपये तक के शेयरों को ऑफर फॉर सेल के तहत बिक्री के लिए रखा जाएगा। कंपनी प्री-IPO प्लेसमेंट के जरिए 3.57 अरब रुपये तक जुटा सकती है। ऐसा हुआ तो IPO में नए शेयरों के इश्यू का साइज घट जाएगा। फाइलिंग के अनुसार, मिल्की मिस्ट नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और कर्ज चुकाने के लिए करने की योजना बना रही है। IPO के लिए JM फाइनेंशियल लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड और IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के आईपीओ के बारे में बड़ा अपडेट, अगले महीने मिल सकती है सेबी की मंजूरी

सेबी अगले महीने एनएसई के आईपीओ को मंजूरी दे सकता है। मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इसके बाद एनएसई के लिए विदेश में रोड शो करने का रास्ता साफ हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ इस साल सितंबर में आ सकता है। यह देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं।

अगले महीने मिल सकता है ग्रीन सिग्नल

मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों के मुताबिक, “मौजूदा रफ्तार से इस आईपीओ को अगले महीने ग्रीन सिग्नल मिल जाने की संभावना है। इश्यू से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं।” सूत्र ने यह नहीं बताया कि किस तरह के सवालों के जवाब दिए गए हैं। लेकिन, उन्होंने कहा कि ज्यादातर समय इसका संबंध डिसक्लोजर के लैंग्वेज से होता है।

17 जुलाई से विदेश में रोड शो का प्लान

एक दूसरे सूत्र ने कहा, “चूंकि को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे बड़े मसलों को पहले से ही आईपीओ से डीलिंक्ड कर दिया गया है और ये सेटलमेंट प्रोसेस में हैं, जिससे अब बड़ा मसला नहीं रह गया है। इसलिए अब सेबी और एक्सचेंज को बाकी चीजों पर फोकस करना है।” सूत्र ने बताया कि घरेलू निवेशकों के लिए रोड शो का प्लान बन चुका है। मर्चेंट बैंकर्स ने विदेशी निवेशकों के लिए 17 जुलाई से रोड शो का प्लान बनाया है। ये रोड शो अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम, हांगकांग और सिंगापुर में होंगे।

सितंबर में आ सकता है आईपीओ

अगर सबकुछ प्लान के हिसाब से चलता है तो एनएसई का आईपीओ सितंबर में आ सकता है। हालांकि, सबकुछ सेबी के ऑब्जर्वेशन लेटर पर निर्भर करता है। NSE ने आईपीओ के एप्रूवल के समय और रोड शो के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया। मनीकंट्रोल के सवाल के जवाब में एनएसई के प्रवक्ता ने कहा, “कंपनी (NSE) ने सेबी के पास डीआरएचपी फाइल कर दिया है। इस वक्त हम इससे ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं।”

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एक्सचेंज को भी डिसक्लोजर नियमों का पालन करना है जरूरी

सूत्र ने बताया, “एक्सचेंज और सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस सेबी के नियम के तहत उन सभी नियमों का पालन करते हैं, जिनका पालन दूसरी कंपनियों को करना पड़ता है।” मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) सेबी के सभी डिसक्लोजर नियमों का पालन करते हैं। इसके बाद भी बीएसई और एमसीएक्स के आईपीओ के रिव्यू में लगा समय एक समान नहीं था। बीएसई ने सेबी के पाश 12 सितंबर, 2016 को डीआरएचपी फाइल किया था। उसे सेबी का ऑब्जर्वेशन 30 दिसंबर, 2016 को मिला था। इसके मुकाबले एमसीएक्स का आईपीओ करीब 7 महीने में एप्रूव्ड हो गया था।

जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईपीओ की तैयारियों में जुटी एनएसई को अधिक डाईवर्सिफाइड कह दिया तो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए। तेज गिरावट के साथ ये निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स के टॉप लूजर बन गए जो खुद 2% कमजोर हुआ है। बता दें कि एनएसई ने बाजार नियामक सेबी के पास ₹30 हजार करोड़ के रिकॉर्डतोड़ आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस ड्राफ्ट ने लिस्टेड मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा। अभी देश में सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया का है जिसने ₹27858 करोड़ का आईपीओ सालव 2024 में पेश किया था।

NSE को लेकर क्या कहना है Jefferies का

जेफरीज का कहना है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है। जेफरीज ने जिक्र किया है कि एनएसई ने वैश्विक पियर्स की तुलना में अपना एक टेक प्रोडक्ट सुईट बनाया है और यह कमोडिटीज बिजनेस में विस्तार कर रही है। एनएसई के क्लियरिंग कॉरपोरेशन की कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ मार्केट में 91% हिस्सेदारी है। एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक सुईट है जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 13% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक ओवरऑल इंडियन एक्सचेंज का 70% रेवेवन्यू एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स हैं।

कंपनी के सेहत की बात करें तो जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने मिलकर एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए पर दबाव डाला। जेफरीज के मुताबिक सेबी सेटलमेंट फीस एक बार का होता है तो इसे निकालने पर देखें तो एनएसई का नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।

Options कितनी कमाऊ है एक्सचेंजेज के लिए?

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2020-26 के बीच इक्विटी ऑप्शंस सालाना 56% की रफ्तार से बढ़ा जबकि कैश मार्केट टर्नओवर इस दौरन 19% की ही रफ्तार से बढ़ा। ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) वित्त वर्ष 2026 में डेली कैश मार्केट मार्केट टर्नओवर का 70% रहा। इस प्रकार इंडियन एक्सचेंजेज पर ऑपरेटिंग रेवेन्यू की 70% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक यह एक्सचेंजों के रेवेन्यू को मार्केट परफॉरमेंस साइकिल से जोड़ता है क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग प्राइस की बजाय वोलेटिलिटी से अधिक जुड़ी है। अमेरिका से तुलना करें तो भारत में ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के ट्रेड्स अधिक हैं लेकिन प्रीमियम पांचवा हिस्सा।

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Stocks to Watch: 7 जुलाई को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 7 जुलाई को कई स्टॉक्स खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। इनमें कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के मजबूत बिजनेस अपडेट जारी किए हैं। कुछ ने अधिग्रहण, मर्जर, फंड जुटाने और नई साझेदारी जैसे बड़े ऐलान किए हैं। इन कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard में सरकार OFS के जरिए हिस्सेदारी बेचेगी। पहले 2.52% हिस्सेदारी बिक्री के लिए लाई जाएगी। ज्यादा मांग होने पर इतनी ही अतिरिक्त हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है। OFS का फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। 7 जुलाई को गैर-रिटेल और 8 जुलाई को रिटेल निवेशक बोली लगा सकेंगे।

Tata Motors PV

टाटा ग्रुप की ऑटो कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles Ltd ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। Punch और Nexon का प्रोडक्शन 80,001 से बढ़कर 1,17,711 यूनिट हो गया। Curvv और Sierra की बिक्री 8,272 यूनिट से बढ़कर 25,150 यूनिट पहुंच गई। यानी लगभग तीन गुना बढ़ोतरी हुई।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent Ltd ने जून तिमाही में अच्छा कारोबार किया है। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू सालाना आधार पर 19% बढ़ा है। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह Westside और Zudio स्टोर्स का लगातार विस्तार रहा।

Torrent Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Torrent Pharmaceuticals को कानूनी राहत मिली है। NCLT की अहमदाबाद बेंच ने JB Chemicals & Pharmaceuticals के कंपनी में विलय को मंजूरी दे दी है। अब दोनों कंपनियों के मर्जर की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

Tata Motors Passenger Vehicles

ऑटो कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles Ltd ने जून तिमाही में अपने ज्यादातर पैसेंजर व्हीकल मॉडल्स की बिक्री और प्रोडक्शन बढ़ाया है। कंपनी के मुताबिक, Punch, Nexon, Curvv, Sierra, Safari और Harrier जैसे मॉडल्स की मांग मजबूत रही।

Varun Beverages

एफएमसीजी कंपनी Varun Beverages Ltd ने केन्या में बड़ा अधिग्रहण किया है। कंपनी की इकाई VBL Industries (Kenya) Ltd ने Devyani Food Industries (Kenya) Ltd के डेयरी ड्रिंक्स, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर कारोबार को खरीदने का समझौता किया है। इस डील की कीमत 3.2 करोड़ डॉलर, यानी करीब 305 करोड़ रुपये है।

Titan

टाटा ग्रुप की ज्वेलरी कंपनी Titan Company Ltd ने जून तिमाही में दमदार कारोबार किया है। कंपनी के कंज्यूमर बिजनेस में 41% की ग्रोथ दर्ज की गई। ज्वेलरी बिजनेस 39% बढ़ा। घड़ियों और आईकेयर कारोबार में भी 23-23% की बढ़ोतरी रही। कंपनी ने इस दौरान 77 नए स्टोर भी खोले।

Hexaware Technologies

आईटी सर्विसेज कंपनी Hexaware Technologies Ltd ने SmartRent Inc. के साथ नई साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मिलकर AI आधारित सॉल्यूशंस तैयार करेंगी। इनकी मदद से कस्टमर ऑपरेशंस और रेवेन्यू से जुड़े कामों को ज्यादा तेज और स्मार्ट बनाया जाएगा।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance का बोर्ड 10 जुलाई को बैठक करेगा। इस बैठक में नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) के जरिए फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। अगर बोर्ड मंजूरी देता है, तो कंपनी बॉन्ड जारी कर पूंजी जुटा सकती है।

Blue Jet Healthcare

फार्मा कंपनी Blue Jet Healthcare ने ग्रोथ के लिए 600 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च किया है। इश्यू का सांकेतिक भाव 506 रुपये प्रति शेयर रखा गया है, जो सोमवार के बंद भाव 572 रुपये से करीब 10% कम है। कंपनी ने SEBI के नियमों के तहत 531.70 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस भी तय किया है।

Cochin Shipyard OFS : डिफेंस कंपनी में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, 7% डिस्काउंट पर है फ्लोर प्राइस

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PC Jeweller Share Price: चढ़ते बाजार में ज्वेलरी स्टॉक में जबरदस्त सेलिंग, कीमत 9% तक लुढ़की; लेकिन क्यों?

ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी पीसी ज्वेलर लिमिटेड के निवेशकों के लिए 6 जुलाई का दिन बेहद खराब बीत रहा है। शेयर की कीमत में दिन में 9 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। बीएसई पर भाव 9.37 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मार्केट कैप घटकर 7900 करोड़ रुपये के करीब रह गया है। शेयर एक साल में 40 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देख चुका है। कंपनी ने 2 जुलाई को अप्रैल-जून 2026 तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया था। इसके बाद शुक्रवार, 3 जुलाई को शेयर में इंट्राडे के दौरान 10 प्रतिशत तक की तेजी दिखी थी। हालांकि बाद में शेयर BSE पर 4.4 प्रतिशत बढ़त के साथ बंद हुआ था।

माना जा रहा है कि सोमवार की गिरावट शेयर में ऊंचे स्तरों पर की जा रही प्रॉफिट बुकिंग का नतीजा हो। लेकिन एक वजह स्टॉक एक्सचेंज की ओर से मांगा गया क्लैरिफिकेशन भी हो सकता है। शुक्रवार को शेयर में हैवी वॉल्यूम को देखते हुए BSE ने पीसी ज्वेलर से सफाई मांगी थी।

तो क्या है PC Jeweller का जवाब

जवाब में पीसी ज्वेलर ने कहा है कि हम यह बताना चाहते हैं कि SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के अनुसार, कंपनी उन सभी घटनाओं, जानकारियों आदि का समय पर खुलासा करती रही है, जिनका कंपनी के कामकाज/प्रदर्शन पर असर पड़ता है। इनमें प्राइस सेंसिटिव इनफॉरमेशन आदि भी शामिल हैं। कंपनी भविष्य में भी ऐसे खुलासे करती रहेगी।

आगे कहा कि किसी शेयर की कीमत/वॉल्यूम में कोई भी उतार-चढ़ाव बाजार पर निर्भर करता है और यह कई फैक्टर्स के कारण होता है, जिनमें कंपनी की ओर से दी गई कोई भी जानकारी, घटना या इवेंट आदि को लेकर निवेशकों की सोच भी शामिल है। पीसी ज्वेलर ने कहा है कि फिलहाल उसके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जो शेयर की कीमत/वॉल्यूम पर असर डाल सकती हो और जिसका खुलासा करना जरूरी हो।

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Q1 में कैसा रहा बिजनेस

पीसी ज्वेलर का कहना है कि अप्रैल-जून 2026 में उसका कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 21% बढ़ा। कंपनी कर्ज-मुक्त होने के अपने लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और उसे उम्मीद है कि वह चालू तिमाही यानि कि जुलाई-सितंबर 2026 में यह मुकाम हासिल कर लेगी। कंपनी ने जॉइंट सेटलमेंट एग्रीमेंट की शर्तों के तहत बैंकों का बकाया कर्ज जून तिमाही के दौरान लगभग 24% कम किया है। चालू तिमाही में बाकी कर्ज चुकाने और कर्ज-मुक्त होने से आने वाले समय में उसकी वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mutual Fund SIF: म्यूचुअल फंड बेचने वालों के लिए आएगी नई परीक्षा, SEBI और NISM कर रहे तैयारी

Mutual Fund SIF: सेबी (SEBI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) मिलकर नई परीक्षा लाने की तैयारी कर रहे हैं। यह परीक्षा म्यूचुअल फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF) बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए होगी।

यह जानकारी सेबी के होल टाइम मेंबर अमरजीत सिंह ने नई दिल्ली में ASSOCHAM के 17वें म्यूचुअल फंड समिट में दी।

नई परीक्षा क्यों लाई जा रही है?

अमरजीत सिंह ने कहा कि इस परीक्षा का मकसद डिस्ट्रीब्यूटर्स की समझ को और बेहतर बनाना है।

उनका कहना है कि जो लोग म्यूचुअल फंड और SIF बेचते हैं, उन्हें इन प्रोडक्ट्स की पूरी जानकारी होनी चाहिए। नई परीक्षा इसी बात को सुनिश्चित करेगी।

SIF को मिला अच्छा रिस्पॉन्स

अमरजीत सिंह ने बताया कि पिछले साल शुरू स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF) को निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

31 मई 2026 तक SIF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 13,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। इस दौरान 56,000 से ज्यादा फोलियो खुले।

21 नई इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी लॉन्च

SIF के तहत अब तक 21 इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी लॉन्च की जा चुकी हैं।

इनमें Hybrid Long Short Strategy में सबसे ज्यादा निवेश आया है। इससे पता चलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी नए तरह के निवेश विकल्पों में बढ़ रही है।

Life Cycle Fund पर भी जोर

अमरजीत सिंह ने सेबी के नए Life Cycle Fund फ्रेमवर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन फंड्स में समय के साथ निवेश का बंटवारा अपने-आप बदलता रहता है। जैसे-जैसे आपका लक्ष्य करीब आता है, वैसे-वैसे जोखिम कम होता जाता है।

उनका कहना है कि ऐसे फंड लोगों को लंबे समय तक लक्ष्य के हिसाब से निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

सोशल मीडिया देखकर निवेश न करें

अमरजीत सिंह ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड देखकर निवेश नहीं करना चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि निवेश हमेशा अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और कितने समय के लिए निवेश करना है, इन बातों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

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SEBI ने वाडीलाल के प्रमोटर फैमिली ट्रस्ट को ओपन ऑफर पेश करने से छूट दी, जानिए क्या है पूरा मामला

सेबी ने आईवीजी ट्रस्ट को ओपन ऑफर पेश करने से छूट दी है। वाडीलाल इंडस्ट्रीज और और वाडीलाल एंटरप्राइजेज ने इस ट्रस्ट की शुरुआत की थी। रेगुलेटर के इस कदम से सक्सेशन प्लानिंग के तहत गांधी फैमिली की शेयरहोल्डिंग की इनटर्नल रीस्ट्रक्चरिंग का रास्ता साफ हो गया है।

सेबी ने इस बारे में 3 जुलाई को दो अलग-अलग आदेश जारी किए। सेबी के होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने आईवीजी ट्रस्ट को टेकओवर कोड के प्रावधानों से छूट दे दी। आम तौर पर इस प्रावधान के तहत किसी कंपनी का अधिग्रहण करने वाली कंपनी को उस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी में एक सीमा से ज्यादा हो जाने पर ओपन ऑफर पेश करना होता है। यह ओपन ऑफर पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए होता है।

सेबी ने कहा है कि प्रस्तावित अधिग्रहण इनटर्नल फैमिली रीऑर्गेनाइजेशन है। इसमें किसी तरह का कमर्शियल ऑब्जेक्टिव शामिल नहीं है। इससे प्रमोटर ग्रुप की कुल शेयरहोल्डिंग में भी बदलाव नहीं हो रहा है। इससे पब्लिक शेयरहोल्डिंग या कंट्रोल में भी किसी तरह का बदलाव नहीं हो रहा। रीस्ट्रक्चरिंग का यह मामला IVG Trust से जुड़ा है। इस ट्रस्ट की स्थापना जुलाई 2025 में हुई थी। Ila V. Gandhi इस ट्रस्त की सेटलर हैं। वीरेंद्रभाई रामचंद्र गांधी और उनके बेटे जनमेजय वीरेंद्रभाई गांधी इसके ट्रस्टीज हैं। बेनेफिशियरीज में वीरेंद्रभाई गांधी, इला गांधी, जनमेजय गांधी और उनके वंशज शामिल हैं।

यह ट्रस्ट वाडीलाल इंडस्ट्रीज के लिए 2,81,458 शेयरों का अधिग्रहण करेगा। यह कंपनी में 3.92 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। इससे पहले इला गांधी और जनमेजय गांधी को अपनी हिस्सेदारी वीरेंद्रभाई गांधी को गिफ्ट में देनी होगी। उसके बाद वह कंसॉलिडेटेड हिस्सेदारी ट्रस्ट को ट्रांसफर कर देंगे। ट्रस्ट परोक्ष रूप से प्रमोटर की कंपनियों वाडीलाल इंटरनेशनल, Veronica Constructions और Axilord Pvt Ltd का भी नियंत्रण हासिल करेगा। ट्रस्ट इन कंपनियों में प्रमोटर की शेयरहोल्डिंग के ट्रांसफर के जरिए कंट्रोल हासिल करेगा। कुल मिलाकर इन कंपनियों की वाडीलाल इंडस्ट्रीज में 47.2 फीसदी हिस्सेदारी है।

सेबी के आदेश के मुताबिक, ट्रांसफर के जरिए वाडीलाल इंडस्ट्रीज में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 64.72 फीसदी पर अपरिवर्तित रहेगी। पब्लिक शेयरहोल्डिंग भी 35.28 फीसदी बनी रहेगी। टेकओवर कोड के प्रावधानों के तहत ओपन ऑफर पेश करने से छूट के लिए अप्लिकेशन अगस्त 2025 में फाइल किया गया था। बाद में इसे रिवाइज किया गया। सेबी ने मामले पर विचार करने और अपने सवालों के जवाब से संतुष्ट होने के बाद ट्रस्ट को ओपन ऑफर पेश करने से छूट दे दी।

सेबी ने 144 करोड़ रुपए के पंप एंड डंप मामले का जोमौटो ऑर्डर और फ्लाइट टिकट से किया पर्दाफाश, मुख्य आरोपी पर लगी 10 करोड़ रुपए की पेनाल्टी

SEBI ने 144 करोड़ रुपये के पंप एंड डंप स्कैम के एक बड़े मामले में फाइनल ऑर्डर जारी कर दिया है। सेबी ने सारी रकम जब्त करने के साथ ही आरोपियों पर सख्त एक्शन लिया है। SEBI ने 144 करोड़ रुपए के जिस पंप एंड डंप स्कैम पर फाइनल ऑर्डर निकाला है वह पंप एंड डंप के अब तक के सबसे बड़े मामलों में से एक है। इस पंप एंड डंप में 226 एंटिटीज शामिल हैं। इसके जरिए साल 2017-2020 के बीच 5 शेयरों में खेल हुआ है।

इन पांच शेयरों में पंप एंड डंप का खेल

पंप एंड डंप का यह खेल जिन शेयरों में हुआ है उनमे मौरिया उद्योग (Mauria Udyog), विशाल फैब्रिक्स (Vishal Fabrics), 7NR रिटेल (7NR Retail), GBL इंडस्ट्रीज़ (GBL Industries) और दार्जिलिंग रोपवे (Darjeeling Ropeway) शामिल हैं।

क्या है SEBI का फाइनल ऑर्डर?

SEBI के फाइनल ऑर्डर में कहा गया है कि इन शेयरों में गलत तरीके से कमाए गए 144 करोड़ रुपए जब्त किए जाएंगे। स्कैम के मुख्य आरोपी हनीफ शेख पर 7 साल का बैन लगेगा। हनीफ शेख पर 10 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगेगी। बाकी आरोपियों पर 4 से 6 साल की रोक लगेगी। इन पर सेबी ने 5 लाख से 2 करोड़ की पेनल्टी लगाई है।

पंप एंड डंप का खेल, SEBI ने कैसे किया खुलासा?

मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। हनीफ शेख के 4 मोबाइल नंबर्स की जांच दौरान यह खुलासा हुआ है। एयरलाइन बुकिंग और होटल रिजर्वेशन के जरिए हनीफ शेख के खिलाफ सबूत जुटाए गए हैं। स्कैम के खुलासे के लिए फूड डिलीवरी एप और कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। WhatsApp पर हुई बातचीत और पैसों के लेन-देन से भी सबूत इकट्ठा किए गए। मामले की जांच के लिए डोमेन रजिस्ट्रेशन की हिस्ट्री और बल्क SMS गेटवे को भी खंगाला गया। इससे पता चला कि मौरिया उद्योग (Mauria Udyog) के 62 कर्मचारियों ने शेयर बेचे थे। शेयरों में हेरफेर के जरिए मुनाफा कमाने के लिए कई शेल अकाउंट का इस्तेमाल हुआ।

SEBI ने इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए बैंक रिकॉर्ड के अलावा भी कई चीजें देखीं। SEBI ने चार ऐसे मोबाइल नंबरों की जांच की जिनके बारे में शक था कि वे हनीफ शेख के हैं,जबकि शेख का दावा था कि वे नंबर उसके कर्मचारियों के हैं,उसके नहीं। SEBI को इस जांच के दौरान इंडिगो फ़्लाइट के ऐसे रिकॉर्ड मिले जिनसे पता चला कि बुकिंग के लिए आरोपी के अपने फोन नंबर और ईमेल का इस्तेमाल किया गया था। इससे उसका यह दावा गलत साबित हो गया कि नंबर किसी कर्मचारी का था।

होटल बुकिंग के रिकॉर्ड का इस्तेमाल घोटाले से जुड़े लोगों के बीच आपसी संबंध साबित करने के लिए किया गया। ज़ोमैटो फ़ूड डिलीवरी डेटा को यह पक्का करने के लिए क्रॉस-चेक किया गया कि असल में कौन सा फोन नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा था। वेबसाइट की ओनरशिप का पता लगाने के लिए SEBI ने गोडैडी (GoDaddy)डोमेन रिकॉर्ड,एडमिन लॉगिन हिस्ट्री और मार्केटिंग एजेंसी के इनवॉइस की जांच की ताकि यह पता चल सके कि प्रोमोशनल वेबसाइट्स को असल में कौन कंट्रोल कर रहा था।

बल्क SMS रिकॉर्ड से पता चला कि सिर्फ़ एक स्टॉक के लिए 2.1 करोड़ से ज्यादा मैसेज भेजे गए। सभी पांच स्टॉक्स के लिए 60,000 से ज्यादा अलग-अलग नंबरों को टारगेट किया गया। जांच से पता चला कि हेरफेर वाले समय के दौरान मौरिया उद्योग के 62 कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स ने शेयर बेचे। शेयर की बढ़ी हुई कीमतों से हुआ मुनाफा कई शेल/कंड्यूट अकाउंट्स (फर्जी या बिचौलिया खातों) के जरिए आगे बढ़ाया गया। इस लेयरिंग (पैसे को कई खातों में घुमाने) का मकसद असली फायदा उठाने वालों की पहचान छिपाना था।

क्या होता है पंप एंड डंप का खेल?

शेयर बाजार में निवेश करने वाले हर व्‍यक्ति को इसकी बारीकियों की जानकारी नहीं होती। इनमें से कई निवेशक एक्‍सपर्ट की सलाह के आधार पर किसी शेयर को खरीदते या बेचते हैं। निवेशकों की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पंप एंड डंप का खेल खेला जाता है। सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर्स और यूट्यूबर्स भी ऐसे ही फर्जी ज्ञान का फायदा उठाकर निवेशकों को गुमराह करते हैं। मार्केट गुरु बने ऐसे धोखेबाज किसी कंपनी के शेयर को लेकर हाइप बनाते हैं और निवेशकों से उसमें पैसे लगाने की बात करते है।

इन फर्जी गुरुओं का एक कही मंत्र होता है,निवेशकों से पैसे लगवाकर किसी शेयर की कीमत बढ़वाओ और फिर उसे बेचकर निकल लो। वास्तव में ये फर्जी गुरु पहले से ही ऐसी किसी कंपनी का शेयर खरीद लेते हैं और निवेशकों को उसके बारे में अच्‍छी-अच्‍छी बातें बताकर खूब पैसे लगाने के लिए प्रोत्‍साहित करते हैं। जब निवेशक उस शेयर को खरीदना शुरू करते हैं तो जाहिर है कि मांग बढ़ने से एक्‍सचेंज पर उस शेयर की कीमत में भी बड़ा इजाफा हो जाता है। बस यही तो इनका मकसद है और ये फर्जी गुरु तत्‍काल बढ़ी कीमत पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा काट लेते हैं। यानी पहले पंप करके शेयर के भाव बढ़ाओ और फिर उसे डंप कर दो।

 

 

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SBI Funds Management IPO: ₹117000 करोड़ वैल्यूएशन पर नजर, 13 जुलाई वाले हफ्ते में हो सकता है लॉन्च

भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO से लगभग 1,17,000 करोड़ रुपये या 12.3 अरब डॉलर की वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी इस महीने यानि कि जुलाई के आखिर में शेयर बाजारों में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है, “इनवेस्टर रोडशो (मीटिंग) पूरी हो चुके हैं और जांच-पड़ताल के बाद वैल्यूएशन रेंज तय कर ली गई है। योजना यह है कि SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO 13 जुलाई वाले सप्ताह में लॉन्च हो और लिस्टिंग 22 जुलाई तक हो जाए।”

यह भी कहा जा रहा है कि कहा कि SBI फंड्स मैनेजमेंट प्री-IPO राउंड के जरिए पैसे जुटा सकती है।कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 12 जून का मंजूरी दी थी। SBI फंड्स मैनेजमेंट ने 19 मार्च, 2026 को SEBI के पास अपना DRHP जमा किया था। IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा। इसमें प्रमोटर और मौजूदा निवेशकों की ओर से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। लिहाजा IPO से होने वाली कमाई शेयर बेचने वालों के पास जाएगी।

OFS में प्रमोटर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 12.83 करोड़ शेयर (6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी) और पेरिस स्थित अमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.53 करोड़ शेयर (3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी) बेचेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की SBI फंड्स मैनेजमेंट में 61.76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 36.26 प्रतिशत हिस्सेदारी अमुंडी इंडिया होल्डिंग के पास है।