Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SIP Calculator: ₹1000 की SIP से हर महीने ₹1 लाख की कमाई! जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

SIP Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित कमाई कौन नहीं चाहता? अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। अगर आप कम उम्र में छोटी SIP शुरू करें, हर साल उसे थोड़ा बढ़ाते रहें और लंबे समय तक निवेश जारी रखें, तो रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। इसके बाद उसी फंड से Systematic Withdrawal Plan (SWP) के जरिए हर महीने इनकम ली जा सकती है।

₹1 करोड़ का फंड कैसे बन सकता है?

अब मान लीजिए आपने 28 साल की उम्र में हर महीने ₹1,000 की SIP शुरू की। हर साल SIP में 10% की बढ़ोतरी करते रहे और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला, तो रिटायरमेंट तक अच्छा-खासा फंड तैयार हो सकता है। ऐसे में आपके निवेश की तस्वीर कुछ ऐसी दिखेगी।

  • निवेश की अवधि: 32 साल
  • कुल निवेश: ₹24.13 लाख
  • अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़
  • कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख

यानी आपने अपनी जेब से करीब ₹24 लाख लगाए, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से फंड ₹1 करोड़ से ज्यादा हो गया।

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हर साल SIP बढ़ाना क्यों जरूरी है?

इस रणनीति की सबसे बड़ी ताकत SIP स्टेप-अप है। नौकरी में ज्यादातर लोगों की सैलरी हर साल बढ़ती है। अगर उसी हिसाब से SIP भी बढ़ा दें, तो ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता और निवेश तेजी से बढ़ता रहता है।

अगर SIP की रकम पूरे 32 साल तक ₹1,000 ही रहे, तो ₹1 करोड़ का फंड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाना लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा करता है।

हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेगा?

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की जरूरत नहीं होती। यहीं SWP काम आता है। इसमें आप अपने म्यूचुअल फंड से हर महीने तय रकम निकालते रहते हैं। बाकी पैसा फंड में ही लगा रहता है और उस पर रिटर्न भी मिलता रहता है।

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मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद आपके पास ₹1.5 करोड़ का फंड है। इसे किसी डेट या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड में निवेश किया गया है। अगर इस पर 6% सालाना रिटर्न मिलता है और आप हर महीने ₹1 लाख निकालते हैं, तो करीब 12 साल तक नियमित इनकम मिल सकती है। इसका हिसाब कुछ ऐसा है।

  • शुरुआती निवेश: ₹1.5 करोड़
  • हर महीने निकासी: ₹1 लाख
  • निकासी की अवधि: 12 साल
  • कुल निकासी: ₹1.44 करोड़
  • निकासी के दौरान अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाख

यानी पैसा भी मिलता रहेगा और फंड भी एकदम से खत्म नहीं होगा।

निवेश से पहले ये बातें याद रखें

आपको ध्यान रखना चाहिए कि 12% और 6% का रिटर्न तय नहीं होता। बाजार के हिसाब से रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर अपने निवेश का रिव्यू जरूर करें। साथ ही महंगाई को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आज ₹1 लाख की जो कीमत है, आने वाले वर्षों में वह उतनी नहीं रहेगी।

अगर आप समय पर निवेश शुरू करें, हर साल SIP बढ़ाते रहें और रिटायरमेंट के बाद सही तरीके से SWP का इस्तेमाल करें, तो यही रणनीति आपको रिटायरमेंट के बाद भी नियमित इनकम देने में मदद कर सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retirement Planning: मंथली ₹5,000 SIP और ₹12,500 PPF से कैसे बन सकता है ₹2 करोड़ का फंड?

क्या आपने रिटायरमेंट प्लानिंग की है? अगर नहीं की है तो इसे जल्द पूरा कर लें। लंबी अवधि में नियमित रूप से निवेश करने पर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है। कई लोग देर से निवेश शुरू करते हैं, जिससे उनके पैसे को बढ़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता है। आप हर महीने 5000 रुपये के सिप और 12,500 रुपये के पीपीएफ में निवेश से आसानी से 2 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।

पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद स्कीम

पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए काफी अट्रैक्टिव स्कीम है। इस स्कीम में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। टैक्स के लिहाज से यह स्कीम काफी फायदेमंद है। यह एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट की कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि न तो इसमें पैसा जमा करने पर टैक्स लगता है, न तो इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है और न ही मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगता है।

पीपीएफ में मैच्योरिटी पर भी नहीं लगता है टैक्स

मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया कि पीपीएफ के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। यह पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। यह स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। अगर आप हर महीने 12500 रुपये का निवेश इस स्कीम में करते हैं तो 15 साल में आप कुल 22,50,000 रुपये का निवेश करते हैं। इस पर आपको 18,18,209 रुपये इंटरेस्ट मिलेगा। इस तरह मैच्योरिटी पर आपको 40,68,209 रुपये मिलेंगे।

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 5000 का सिप

आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में सिप से हर महीने 5000 रुपये का निवेश 15 साल तक करना है। इस तरह आप 15 साल में कुल 9,00,000 रुपये का निवेश करेंगे। सालाना 12 फीसदी रिटर्न के हिसाब से 15 साल आपका पैसा बढ़कर 23,79,657 रुपये हो जाएगा। अगर इसमें पीपीएफ से मिले 40,68,209 रुपये को मिला दिया जाए तो कुल 64,47,866 रुपये हो जाते हैं। इस पैसे को आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त निवेश करना होगा।

ऐसे तैयार हो जाएगा 25 साल में 2 करोड़ का फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त 64,47,866 रुपये का निवेश 10 साल में बढ़कर 2,00,26,093 रुपये हो जाएगा। इस कैलकुलेशन के लिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अंदाजा लगाया गया है। इस तरह आपको सिर्फ 15 साल तक हर महीने पीपीएफ में 12,500 रुपये और सिप में 5000 रुपये का निवेश करना है। 15 साल बाद आपको दोनों निवेश से मिले पैसे को म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में 10 साल के लिए निवेश करना है। इस तरह आपको निवेश सिर्फ 15 साल करना है। लेकिन, 2 लाख रुपये का फंड 25 साल में तैयार होगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स भी चुकाना होगा

एक बात आपको ध्यान में रखना होगा कि म्यूचुअल फंड में निवेश से हुए मुनाफे पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस देना होगा। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि आपको 23,79,657 रुपये पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। यह टैक्स 2,97,457.125 रुपये बनेगा। इसे तीन लाख रुपये माना जा सकता है।

टैक्स चुकाने के बाद 25 साल कुछ महीने में तैयार होगा फंड

इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड में हर महीने 5000 रुपये निवेश करने पर टैक्स काटकर आपके हाथ में करीब 20,79,657 रुपये आएंगे। अब इसमें पीपीएफ से मिले पैसे को जोड़ देते हैं, क्योंकि पीपीएफ पर टैक्स नहीं लगता है। दोनों मिलकर 61,47,866 रुपये हो जाते है। इस पैसे को एकमुश्त निवेश करने पर 10 साल कुछ महीने में 2 करोड़ का फंड तैयार हो जाएगा।

EPFO Pension: 10 साल नौकरी के बाद हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

EPFO Pension:  श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 29 जून को Employees’ Pension Scheme (EPS) 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इसके साथ ही EPS-1995 और 1971 फैमिली पेंशन स्कीम की जगह अब नई EPS-2026 लागू हो गई है। ऐसे में करीब 6 करोड़ EPFO सदस्यों के मन में सवाल है कि क्या अब पेंशन के नियम बदल गए हैं? क्या ज्यादा पेंशन मिलेगी? या रिटायरमेंट प्लानिंग में कुछ बदलाव करना होगा?

राहत की बात यह है कि मंथली पेंशन निकालने का फॉर्मूला और 10 साल की न्यूनतम सर्विस वाला नियम पहले जैसा ही रखा गया है।

10 साल की नौकरी पूरी करना जरूरी

अगर आप EPS के तहत हर महीने पेंशन चाहते हैं, तो आपको कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य नौकरी (Pensionable Service) पूरी करनी होगी। इसके बाद 58 साल की उम्र पूरी होने पर आपको मासिक पेंशन मिलनी शुरू होगी। अगर आप चाहें, तो 50 साल की उम्र के बाद कम पेंशन के साथ अर्ली पेंशन भी ले सकते हैं।

लेकिन अगर आपने 10 साल की नौकरी पूरी नहीं की, तो आपको हर महीने पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसे में आपके पास दो ही विकल्प होंगे। या तो EPS का पैसा निकाल लें, या स्कीम सर्टिफिकेट लेकर आगे की नौकरी में अपनी सर्विस जोड़ दें।

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कैसे निकलती है पेंशन?

EPFO एक फॉर्मूले के आधार पर पेंशन तय करता है।

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70

यहां पेंशन योग्य वेतन का मतलब आपके आखिरी 60 महीनों के औसत मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) से है। हालांकि, ज्यादातर कर्मचारियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 15,000 रुपये मानी जाती है।

15,000 रुपये सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन?

अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये है, तो 10 साल की नौकरी पर आपको करीब 2,143 रुपये महीने की पेंशन मिलेगी। रकम भले ज्यादा न लगे, लेकिन यह जीवनभर मिलने वाली गारंटीड पेंशन होती है।

वहीं, 20 साल की नौकरी पूरी करने पर यह बढ़कर करीब 4,286 रुपये हो जाएगी। वहीं, 35 साल की अधिकतम पेंशन योग्य सेवा पूरी करने पर आपको 7,500 रुपये प्रति माह पेंशन मिल सकती है। जितनी लंबी आपकी सेवा होगी, उतनी ही ज्यादा पेंशन मिलेगी।

न्यूनतम पेंशन अभी भी 1,000 रुपये

फिलहाल EPS के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह ही है। इसका मतलब है कि अगर 10 साल की नौकरी के बाद आपकी पेंशन 1000 रुपये से कम बनती है, तो उसकी भरपाई सरकार करेगा। मिसाल के लिए, अगर आपकी पेंशन 500 रुपये बनती है, तो बाकी 500 सरकार देगी।

न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 5,000 से 7,500 रुपये करने की मांग काफी समय से उठ रही है। पेंशनधारकों का कहना है कि महंगाई काफी बढ़ चुकी है, ऐसे में 1000 रुपये की न्यूनतम पेंशन किसी भी सूरतेहाल में पर्याप्त नहीं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।

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नौकरी बदलते समय ये गलती न करें

अगर आप नौकरी बदल रहे हैं, तो EPF और EPS को नई नौकरी में ट्रांसफर कराना जरूरी होता है। अगर 10 साल पूरे होने से पहले EPS की राशि निकाल लेते हैं, तो आपकी पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service) टूट सकती है। इससे भविष्य में मिलने वाली मासिक पेंशन पर असर पड़ सकता है।

नई नौकरी में UAN के जरिए EPF अकाउंट ट्रांसफर कराने से आपकी सर्विस लगातार जुड़ी रहती है। इससे 10 साल की पात्रता पूरी करने में आसानी होगी। फिर आपको रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन का लाभ भी मिल सकेगा।

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस तारीख को खाते में क्रेडिट होगा ब्याज का पैसा, जानें कितना मिलेगा ब्याज

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

अगर आप निकालना चाहते हैं अपना पूरा PF बैलेंस, तो जानिए इस बारे में क्या कहते हैं EPFO ​​के नियम

EPF मुख्य रूप से बुढ़ापे के लिए पैसे बचाने के मकसद से बनाया गया है। हालांकि,समय के साथ EPFO ​​ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं,जिनसे सदस्य अपनी बचत कभी भी निकाल सकते हैं। EPFO 3.0 और सेवाओं के डिजिटाइजेशन को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच,कई सदस्य यह सोच सकते हैं कि क्या वे जब चाहें तब अपने प्रोविडेंट फंड बैलेंस का 100 प्रतिशत हिस्सा निकाल सकते हैं।

इसका छोटा सा जवाब है,नहीं। हालांकि कुछ खास स्थितियों में पूरा पैसा निकालने की इजाज़त है,लेकिन EPFO ​​के नियम नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर रोक लगाते हैं।

आप अपना 100 प्रतिशत PF बैलेंस कब निकाल सकते हैं?

सबसे आम स्थिति जिसमें कोई सदस्य अपना पूरा EPF फंड निकाल सकता है,वह है रिटायरमेंट। मौजूदा EPFO ​​नियमों के तहत,सदस्य 58 साल की उम्र पूरी होने पर फ़ाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस स्टेज पर,वे आम तौर पर अपने अकाउंट में जमा पूरा EPF बैलेंस निकाल सकते हैं।

अगर कोई सदस्य नौकरी छोड़ने के बाद एक तय समय तक बेरोजगार रहता है,तो वह अपना पूरा बैलेंस निकाल सकता है। अभी,EPFO ​​एक महीने की बेरोजगारी के बाद EPF बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकालने की इजाजत देता है। अगर बेरोजगारी दो महीने या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है,तो सदस्य बाकी बचा हुआ बैलेंस निकालने के लिए भी आवेदन कर सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य बेरोजगारी की अवधि के दौरान वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

अगर आप नौकरी बदलते हैं तो क्या होगा?

कई कर्मचारियों को लगता है कि नौकरी बदलने पर उन्हें अपना PF फंड निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO ​​सलाह देता है कि अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का इस्तेमाल करके EPF अकाउंट का पैसा नए एम्प्लॉयर के पास ट्रांसफर कर लिया जाए। इससे फंड पर ब्याज मिलता रहता है और सदस्य का सर्विस रिकॉर्ड भी बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

बार-बार नौकरी बदलने पर पूरी रकम निकाल लेने से भविष्य में आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग पर बुरा असर पड़ सकता है। हालात के आधार पर,इस पर टैक्स भी लग सकता है।

खास जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की अनुमति

हालांकि, पूरी निकासी पर रोक है,लेकिन EPFO ​​कुछ मंजूरी प्राप्त कामों के लिए आंशिक निकासी (जिसे एडवांस भी कहा जाता है)की अनुमति देता है। इनमें हायर एजुकेशन,शादी,घर खरीदना,घर बनाना,होम लोन चुकाना,मेडिकल ट्रीटमेंट और कुछ दूसरी स्थितियां शामिल हैं। एलिजिबिलिटी की शर्तें मकसद और सर्विस के समय के हिसाब से अलग-अलग होती हैं। निकाली जा सकने वाली रकम भी एक कैटेगरी से दूसरी कैटेगरी में अलग-अलग होती है। इसलिए,मेंबर्स को अक्सर नौकरी करते हुए भी अपनी सेविंग्स का कुछ हिस्सा मिल जाता है।

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PF फंड निकालने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

पूरा पैसा निकालने का फ़ैसला करने से पहले,यह याद रखना जरूरी है कि EPF उन कुछ रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स में से एक है जिसमें अनिवार्य बचत, एम्प्लॉयर का योगदान और सालाना ब्याज जमा होने का फायदा मिलता है। पूरा फंड निकाल लेने से हाथ में कैश तो बढ़ सकता है,लेकिन लंबे समय में इस तरीके से आपकी रिटायरमेंट की बचत खतरे में पड़ सकती है। अगर रिटायरमेंट प्लान से पैसे निकालने की जरूरत न हो,तो उस फंड को निवेश करने या नौकरी बदलने पर भी बनाए रखना फायदेमंद होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नौकरी करते हुए मैं अपने PF बैलेंस का 100% हिस्सा निकाल सकता हूं?

आमतौर पर,नहीं। पूरा पैसा निकालने की इजाजत या तो रिटायरमेंट पर या फिर बेरोजगारी की स्थिति में जरूरी शर्तें पूरी होने पर ही मिलती है। कुछ खास वजहों से ही PF का कुछ हिस्सा निकालने की इजाजत दी जाती है।

नौकरी छूटने के बाद मैं कितना PF निकाल सकता हूं?

बेरोजगारी के एक महीने बाद EPF की 75 प्रतिशत रकम निकाली जा सकती है। नियमों के अनुसार,बेरोजगारी के एक और महीने बाद बाकी रकम निकाली जा सकती है।

क्या मुझे नौकरी बदलते समय अपना PF निकाल लेना चाहिए?

ज्यादातर मामलों में सबसे अच्छा तरीका यह है कि UAN-बेस्ड ट्रांसफर सुविधा का इस्तेमाल करके EPF की रकम को नए एम्प्लॉयर को ट्रांसफर कर दिया जाए।

 

 

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Retirement Planning: आप रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो ये बातें जरूर जान लें

क्या रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपने पैसे जुटाने शुरू कर दिए हैं? अगर नहीं तो इसमें आपको देर नहीं करना चाहिए। लेकिन, इससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। यह सुनने में आसान लगता है लेकिन यह सवाल मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि आज आपको अपने लिए जितना फंड पर्याप्त लगता है, उसकी वैल्यू 10-15 साल बाद काफी कम रह जाएगी।

रिटायरमेंट बाद के खर्च का अंदाजा

कई लोग रिटायरमेंट बाद के खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना खर्च करते हैं, उतना रिटायरमेंट के बाद आपको खर्च करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। कुछ खर्च आपके बजट से निकल जाएंगे तो कुछ नए खर्च आपके बजट में शामिल हो जाएंगे। उदाहरण के लिए घर की EMI चुकाने की जरूरत आपको नहीं रह जाएगी। लेकिन मेडिकल केयर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

इनफ्लेशन से पैसे की वैल्यू घटती रहती है

इनफ्लेशन के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आज आपके परिवार का मंथली खर्च 45,000 रुपये है। 20 साल बाद आपको सेम लाइफ स्टाइल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा मंथली खर्च करना पड़ेगा। इसकी वजह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से पैसे की वैल्यू 6 फीसदी तक घटती जाती है।

कम से कम 25 साल के खर्च का इंतजाम जरूरी

दूसरा, लोगों को यह पता नहीं होता कि रिटायरमेंट बाद उन्हें कितने सालों तक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे उतने लंबे समय तक पैसे खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति 60 साल में रिटायर करता है तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च के बारे में सोचना चाहिए।

यह भी पढ़ें: EPF पोर्टल के बाद उमंग ऐप भी लॉक! पीएफ खाताधारकों के लिए जरूरी अपडेट, जानें कब तक नहीं कर पाएंगे क्लेम

निवेश के कई विकल्पों का कर सकते हैं इस्तेमाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करने के लिए निवेश के कई विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, म्यूचुअल फंड की स्कीम आदि शामिल हैं। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ भी शामिल होगा। आप जितना जल्द रिटारमेंट के लिए निवेश शुरू करेंगे, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश होगी। साथ ही लंबी अवधि में आपके पैसे पर कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलेगा।

EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

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SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

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PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।