इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तुरंत अस्पताल भेजने का आदेश; 16 सितंबर तक रहेंगे भर्ती

इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तुरंत अस्पताल भेजने का आदेश; 16 सितंबर तक रहेंगे भर्ती

imran khan to be shifted in hospital from jail

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने उन्हें इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अदियाला जेल में बंद इमरान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का निर्देश दिया गया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस फैसले का स्वागत किया है।


पीटीआई और इमरान खान का परिवार लंबे समय से उनकी खराब सेहत को लेकर चिंता जताता रहा है। PTI प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उनकी पार्टी चाहती है कि इमरान खान को तब तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक डॉक्टर उनकी सेहत को पूरी तरह ठीक न मान लें।

 

आंखों की रोशनी जाने का खतरा

गौरतलब है कि 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त, 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई है। इमरान इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों के मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। उनके बेटों ने भी पिछले साल उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।

 

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

Islamic NATO

दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के राजनीतिक क्षितिज पर एक बड़ा कूटनीतिक भूचाल आया है। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मिलकर 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defense Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इसे व्यापक रूप से 'इस्लामिक नाटो' (Islamic NATO) के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के तहत प्रावधान किया गया है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान का मुख्य दांव न केवल मध्य पूर्व के रक्षा ढांचे में खुद को स्थापित करना है, बल्कि भारत के पड़ोसी देशों—विशेष रूप से बांग्लादेश—को भी इस बहुपक्षीय प्रभाव क्षेत्र में आकर्षित कर भारत को पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से कूटनीतिक रूप से घेरना है। ALSO READ: 'इस्लामिक नाटो' का आगाज! जानिए कैसे पाकिस्तान समेत तीन मुल्कों की डील ने बढ़ाई भारत की टेंशन

मक्का रक्षा समझौता और बांग्लादेश का संभावित समीकरण

सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, तुर्की की आधुनिक रक्षा तकनीक और पाकिस्तान की सैन्य व परमाणु क्षमता के इस त्रिकोण के बाद अब पूर्वी मोर्चे पर बांग्लादेश के इस घटनाक्रम में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं:

  • बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और विदेश नीति का बदलाव: बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक माहौल में ढाका की विदेश नीति पाकिस्तान और तुर्की की तरफ झुकाव दिखा रही है।
  • तुर्की-बांग्लादेश रक्षा साझेदारी: तुर्की लंबे समय से बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरण आपूर्ति (जैसे ड्रोन और बख्तरबंद वाहन) को मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान और तुर्की का लक्ष्य बांग्लादेश को इस विस्तृत सुरक्षा/आर्थिक ब्लॉक से जोड़ना है।
  • टू-फ्रंट कूटनीतिक दबाव: यदि बांग्लादेश इस तरह के सुरक्षा या आर्थिक ब्लॉक का हिस्सा बनता है, तो भारत के पूर्वी हिस्से (चिकन नेक कॉरिडोर) के पास एक नया सुरक्षा समीकरण बन सकता है, जिससे भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ेगा।

islamic nato mecca accord


भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और काउंटर-रणनीति

भारत इस क्षेत्रीय गुटबंदी और बांग्लादेश के बदलते रुख पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत ने इसे संतुलित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है:

  1. आर्मेनिया और ग्रीस के साथ रक्षा गठबंधन: तुर्की-पाकिस्तान अक्ष को काटने के लिए भारत ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने सामरिक और रक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचाया है।
  2. सऊदी अरब व यूएई के साथ मजबूत द्विपक्षीय व्यापार: हालांकि सऊदी अरब इस मक्का समझौते का हिस्सा है, लेकिन भारत के साथ उसके भारी-भरकम आर्थिक व ऊर्जा संबंध बने हुए हैं, जिससे यह समझौता पूरी तरह भारत-विरोधी रुख में तब्दील होना आसान नहीं है।
  3. बांग्लादेश के साथ व्यावहारिक जुड़ाव: ढाका में राजनीतिक बदलाव के बावजूद, भारत अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश के साथ आर्थिक, बिजली आपूर्ति और व्यापारिक निर्भरता के जरिए संबंध सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तान द्वारा 'मक्का समझौते' के माध्यम से 'इस्लामिक नाटो' को आकार देना और उसमें बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसियों को आकर्षित करने की कोशिश भारत के लिए एक नई विदेश नीति चुनौती है। हालांकि, अरब देशों और पश्चिमी शक्तियों के अपने-अपने विरोधाभास इस ब्लॉक की वास्तविक सैन्य प्रभावकारिता को सीमित कर सकते हैं। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, पूर्वोत्तर सीमा और बहुपक्षीय कूटनीति को पहले से अधिक सतर्क और मजबूत रखना होगा।

स्पिन के सहारे पाकिस्तान का मेजबान इंग्लैंड को पहले टेस्ट में हराने का प्लान

ENGvsPAK पाकिस्तान के बल्लेबाज़ सऊद शकील का मानना है कि इंग्लैंड के हालात उनकी टीम के लिए अच्छे हो सकते हैं, जब बुधवार को लीड्स में पहला आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप मैच शुरू होगा। पाकिस्तान ने महीने की शुरुआत में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज पर आठ विकेट से जीत के बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ इंग्लैंड का दौरा किया और इंग्लैंड के साथ पहले टेस्ट से पहले बेकनहम में प्रोफेशनल काउंटी क्लब की चुनिंदा XI टीम पर सात विकेट से जीत के साथ अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा।

प्रोफेशनल काउंटी क्लब की चुनिंदा XI टीम के खिलाफ उस जीत में शकील स्टार रहे, क्योंकि उन्होंने शानदार नाबाद शतक लगाया, जबकि बाएं हाथ के स्पिनर अली उस्मान ने पांच विकेट लिए और वेस्टइंडीज के खिलाफ दिखाए गए अच्छे फॉर्म को जारी रखा। हालांकि शकील को पक्का नहीं पता कि हेडिंग्ले में पहला टेस्ट शुरू होने पर हालात कैसे होंगे, लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ को लगता है कि इंग्लैंड में हालिया गर्मी मैच के आगे बढ़ने के साथ पाकिस्तान के स्पिनरों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

शकील ने कहा, “मुझे लगता है कि इंग्लैंड में गर्मी जिस तरह की है, उससे पिचें काफी सूखी हो सकती हैं और स्पिन को मदद मिल सकती है। यहां (हालिया) न्यूजीलैंड सीरीज़ में, आखिरी टेस्ट में गेंद काफी स्पिन हो रही थी।”

लीड्स में होने वाला टेस्ट शकील का इंग्लैंड में पहला टेस्ट होगा, हालांकि 30 वर्षीय खिलाड़ी को मशहूर हेडिंग्ले मैदान की कुछ जानकारी है क्योंकि उन्होंने 2023 में काउंटी चैंपियनशिप के दौरान यॉर्कशायर के लिए तीन मैच खेले थे। इंग्लैंड एक नई टीम के साथ मैच में उतरेगा, जिसमें अनुभवी बल्लेबाज़ जो रूट टीम की कप्तानी करेंगे, क्योंकि लंबे समय तक कप्तान रहे बेन स्टोक्स ने हाल ही में संन्यास ले लिया है और कोच ब्रेंडन मैकुलम चले गए हैं।

यह देखना बाकी है कि क्या इंग्लैंड मैकुलम की देखरेख में हाल के दिनों में अपनाई गई ‘बैज़बॉल’ रणनीति को जारी रखेगा या नहीं; शकील का कहना है कि पाकिस्तान को विरोधी टीम की किसी भी चाल का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

शकील ने कहा, “हर टेस्ट चुनौतीपूर्ण होता है। टेस्ट क्रिकेट हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। यह भी अलग नहीं है, और हम यह पक्का करने की कोशिश कर रहे हैं कि हम यहां अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।” “हम इस सीरीज़ को ‘बैज़बॉल’ के नज़रिए से नहीं देख रहे हैं। आपको हालात और ज़रूरत के हिसाब से खेलना चाहिए। इस मैदान पर आउटफ़ील्ड बहुत तेज़ है, जिससे आक्रामक शॉट खेलने में मदद मिल सकती है। लेकिन हम सिर्फ़ इसलिए अपना खेलने का तरीका नहीं बदलेंगे कि विरोधी टीम कैसे खेल रही है। हमारा मकसद उसी तरह से खेलना है जो हमें सबसे सही लगता है।”

PAK सुप्रीम कोर्ट का आदेश- इमरान खान को अस्पताल भेजें:इलाज के लिए आज ही ट्रांसफर करें; पूरी मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को आज ही अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट के बजाय सिर्फ उसकी समरी पेश की गई है। तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। इसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत पर चिंता जताई जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में एंजियोग्राफी कराने की सलाह का जिक्र था। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह जांच जेल के बाहर अस्पताल में कराई जा सकती है। PTI के वकील ने इमरान के शरीर में ब्लड क्लॉट बनने की वजह पता लगाने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने की मांग भी की। कोर्ट बोला- इमरान की सेहत पर राजनीति न करें सुप्रीम कोर्ट ने PTI से इमरान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा। कोर्ट ने मुलाकात के बाद PTI नेताओं और परिवार की ओर से मीडिया में दिए जाने वाले बयानों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अफगान ने कहा कि पार्टी को यह तय करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाया। जस्टिस वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी। इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी देने को कहा गया है। जेल रिपोर्ट में आंखों की बीमारी का जिक्र अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट जमा की थी। इसमें उनकी आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का इस बीमारी का इलाज चल रहा है और उनकी प्रभावित आंख की नजर लगभग सामान्य हो गई है। रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है। 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें सरकारी तोहफों और गैरकानूनी शादी से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इमरान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।

हॉकी विश्वकप में अब पाकिस्तान पर जीत बेहद जरूरी, हारे तो होंगे बाहर

भारत ने FIH हॉकी विश्वकप में वेल्स को 3-1 से हराकर शानदार शुरुआत की लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ लचर रक्षात्मक पंक्ति के कारण मैच को 2-4 से गंवाना पड़ा। ऐसे में अब 19 तारीख को पाकिस्तान के खिलाफ मैच निर्णायक बन जाता है। इसमें भारत को हर हाल में जीत चाहिए क्योंकि ड्रॉ भी भारत को मुश्किल में डाल सकता है।

वैसे तो कल पाकिस्तान भी वेल्स के साथ 3-3 की बराबरी पर रहा। यह भारत को एक बेहतर समीकरण बनाकर दे सकता है अगर पाकिस्तान के खिलाफ मैच ड्रॉ होता है तो लेकिन 51 साल बाद विश्वकप का सपना संजोए खड़ी भारतीय टीम शुरुआत में ही इतनी चिंता में नहीं दिखना चाहती थी।

पाकिस्तान की बात करें तो कभी हॉकी विश्वकप की सबसे सफल टीम रसातल में है। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है जिसकी तस्वीर खिलाड़ियों के प्रदर्शन से दिख जाती है।

वहीं  कागज पर भारत कहीं बेहतर टीम लगती है। टीम के पास अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन संतुलन है। दोनों टीमों के बीच में तकनीक और कौशल का इतना अंतर है कि अगर कल पाकिस्तान भारत को हराने में कामयाब होता है तो इसको बहुत बड़ा उलटफेर कहा जाएगा।

आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत और चार बार की विश्व कप विजेता पाकिस्तान के बीच भले ही मैदानी प्रतिद्वंद्विता का गौरवशाली इतिहास रहा हो लेकिन एशियाई दिग्गजों के बीच पिछले लगभग सभी मुकाबले बेमेल रहने से वह रोमांच खत्म हो गया है।

मौजूदा फॉर्म को देखते हुए भारत का पलड़ा भारी लग रहा है लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मैच सिर्फ कौशल का नहीं होता, खिलाड़ियों को जज्बात पर काबू रखकर भी खेलना होगा। भारतीय टीम ने हालांकि विश्व कप से ठीक पहले लंदन में प्रो लीग के यूरोप चरण में पाकिस्तान पर 7-1 और 4-3 से जीत दर्ज की थी। पाकिस्तानी टीम ने आखिरी बाद भारत को 2016 चैम्पियंस ट्रॉफी में हराया था।

उसके बाद से भारत और पाकिस्तान के प्रदर्शन ग्राफ में जमीन आसमान का अंतर आ गया है। भारतीय टीम लगातार दो ओलंपिक पदक जीत चुकी है जबकि विश्व कप की सबसे सफल टीम रही चार बार की चैम्पियन पाकिस्तान टूर्नामेंट में आठ साल बाद लौटी है। एफआईएच प्रो लीग में सारे मैच हारकर आखिरी स्थान पर रही थी और टूर्नामेंट से ठीक पहले कोच हरमान क्रूस के लौट जाने से तैयारियों पर भी असर पड़ा है।

भारत के हरमनप्रीत सिंह पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं वैसे ही जैसे विराट कोहली पाकिस्तानी टीम के खिलाफ हमेशा बेहतरीन बल्लेबाजी करते हैं। भारत बनाम पाकिस्तान मैच का  जो भी नतीजा हो इंग्लैंड अब पूल डी के शीर्ष पर ही रहेगी।  भारत इस ग्रुप की दूसरी टीम बनने के करीब है लेकिन जो ग्रुप उसको इस पूल के बाद मिलेगा वह काफी कठिन होने वाला है।

इँग्लैंड के खिलाफ लचर रक्षापंक्ति ने टीम के अभियान की कलई खोलकर रख दी है। ऐसे में भारत को ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि आने वाले मुकाबलों में भी 70 मिनट तक बेहतरीन खेल दिखाना होगा।

मैच का समय – 19 अगस्त, शाम 6.30 बजे

कहां देखें- स्टार स्पोर्ट्स सिलेक्ट या फिर जियोहॉटस्टार

30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा
ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म
दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई
करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की
रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया
पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वो इनके पिता का नाम तक नहीं जानती थीं। ये ग्रूमिंग गैंग्स पूरे ब्रिटेन में काम करते थे, लेकिन रोशडेल, रॉदरहैम और टेलफॉर्ड राज्यों में इन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को फंसाया।

Hockey World Cup: इंग्लैंड से हारने के बाद सेमीफाइनल में कैसे पहुंचेगी टीम इंडिया, पाकिस्तान के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। एम्सटेलवीन के वैगनर स्टेडियम में खेले गए पूल D के इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत में एक गोल गंवाया, लेकिन दूसरे क्वार्टर में दो गोल कर 2-1 की बढ़त बना ली। इसके बाद इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे हाफ में तीन गोल दागे और मैच 4-2 से अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ने भारत को हराकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की और छह अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना ली।

वहीं भारत के खाते में दो मैचों से तीन अंक हैं और टीम पूल D की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर बनी हुई है। आइए जानते हैं भारत कैसे पहुंच सकता है सेमीफाइनल में

पाकिस्तान के खिलाफ मैच अहम

भारत के पास अभी भी FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल (दूसरे राउंड) में पहुंचने का मौका है। टीम का अगला मुकाबला 19 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ होगा। अगर हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम इस मैच में जीत हासिल कर लेती है, तो वह टूर्नामेंट के अगले दौर के लिए क्वालिफाई कर जाएगी। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारत के लिए बेहद अहम है। अगर भारत जीत जाता है तो वह इंग्लैंड के साथ दूसरे राउंड में पहुंच जाएगा। वहीं पाकिस्तान से हार मिलने पर भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। अगर मैच ड्रॉ रहता है, तो भी भारत के पास आगे बढ़ने का मौका रहेगा, लेकिन इसके लिए वेल्स को इंग्लैंड के खिलाफ जीत नहीं मिलनी चाहिए।

भारत-पाकिस्तान ड्रॉ हुआ तो कैसे होगा फैसला

अगर भारत और पाकिस्तान का मुकाबला ड्रॉ रहता है और वेल्स इंग्लैंड को हरा देता है, तो पूल D में भारत और वेल्स के बीच गोल डिफरेंस के आधार पर फैसला होगा। जिस टीम का गोल डिफरेंस बेहतर रहेगा, वह दूसरे स्थान पर रहकर अगले राउंड में पहुंचेगी। फिलहाल भारत का गोल डिफरेंस 0 है, जबकि वेल्स का -2 है। वेल्स को अपने पहले पूल D मुकाबले में भारत के खिलाफ 1-3 से हार मिली थी। अब भारत के अगले मुकाबले का नतीजा पूल D की तस्वीर तय करेगा।

पाकिस्तान ग्रुप में सबसे नीचे

अगर भारत पाकिस्तान से हार जाता है और वेल्स इंग्लैंड को नहीं हरा पाता, तो इंग्लैंड पूल में पहले स्थान पर रहेगा। वहीं पाकिस्तान चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे राउंड के लिए क्वालिफाई कर जाएगा। पाकिस्तान की टीम फिलहाल पूल D की अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर है। टीम ने अब तक दो मुकाबले खेले हैं, लेकिन उसे एक भी जीत नहीं मिली है। पहले मैच में पाकिस्तान को इंग्लैंड के हाथों 1-4 से हार मिली थी, जबकि वेल्स के खिलाफ उसका मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ। अब भारत के खिलाफ होने वाला मैच पाकिस्तान के लिए काफी अहम रहने वाला है।

विश्वकप में भारतीय हॉकी टीम को इंग्लैंड ने 2-4 से हराकर चौंकाया

भारत को FIH पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के पूल डी मैच में इंग्लैंड के हाथों सोमवार को 2-4 से हार का सामना करना पड़ा।मैच की शुरुआत में पहले क्वार्टर में निक बांडुरक ने गोल करके इंग्लैंड को बढ़त दिलाई, लेकिन दूसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह के गोल की बदौलत भारत ने जोरदार वापसी की।

हालांकि, आखिरी दो क्वार्टर में इंग्लैंड ने भारत को पीछे छोड़ दिया। तीसरे क्वार्टर में स्टुअर्ट रशमेयर और हेनरी क्रॉफ्ट ने गोल करके इंग्लैंड को बढ़त दिलाई, जबकि बांडुरक ने एक और गोल करके इंग्लैंड की जीत पक्की कर दी।

इस नतीजे का मतलब है कि अगले दौर में जगह पक्की करने के लिए भारत को पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी पूल मैच जीतना होगा। क्वालिफिकेशन पक्का करने के लिए भारत को जीतना ज़रूरी है, लेकिन अगर मैच ड्रॉ होता है तो उनके बाहर होने का खतरा रहेगा। हारने पर वे वर्ल्ड कप से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे।19 अगस्त को होने वाले इस बड़े मुकाबले पर सबकी नज़रें टिकी हैं!

दूसरे क्वार्टर में दो गोल करने वाली भारतीय टीम ने आखिरी 30 मिनट में इंग्लैंड को डिफेंस में सेंध लगाने का मौका दे दिया । इंग्लैंड के लिये निकोलस बेंडारूक ने (14वें और 55वें मिनट ) दो गोल किये जबकि स्टुअर्ट रशमेयेर ने 39वें और हेनरी क्रोफ्ट ने 43वें मिनट में गोल दागा । भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (17वां ) और दिलप्रीत सिंह (25वां ) ने गोल किये।

पूल डी में दोनों मैच जीतकर इंग्लैंड शीर्ष पर है जबकि एक जीत और एक हार के बाद भारत दूसरे स्थान पर है । वेल्स से ड्रॉ खेलने के बाद पाकिस्तान एक हार और एक ड्रॉ के साथ तीसरे और वेल्स गोल औसत के आधार पर आखिरी स्थान पर है।

BrahMos और Agni-V में कौन ज्यादा ताकतवर? दोनों मिसाइलों का काम बिल्कुल अलग, समझिए फर्क

भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक मिसाइल है। जिसकी गति और मारक क्षमता देखकर पूरी दुनिया हैरान रहती है। भारत के इन मिसाइलों का एक नजारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में दिखा था।  पिछले 40 साल में भारत ने मिसाइल तकनीक विकसित करने की शुरुआत से लेकर आधुनिक और बेहद ताकतवर मिसाइल सिस्टम तैयार करने तक लंबा सफर तय किया है। आज देश जमीन, समुद्र और हवा से होने वाले खतरों का मुकाबला करने की अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। इस सफर में ब्रह्मोस और अग्नि-5 भारत की मिसाइल ताकत के दो बड़े उदाहरण हैं।

हालांकि ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही भारत की ताकतवर मिसाइलों में शामिल हैं, लेकिन इन्हें एक-दूसरे से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। दोनों का काम और इस्तेमाल अलग है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, अग्नि-5 भारत की रणनीतिक सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन को किसी बड़े हमले से रोकना और भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना उनकी ताकत के आधार पर करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों मिसाइलें अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से दोनों का अपना अलग और महत्वपूर्ण स्थान है।

अलग-अलग मिशन तय करते हैं दोनों मिसाइलों की भूमिका

ब्रह्मोस और अग्नि-5 के बीच अंतर समझने का सबसे आसान तरीका यह जानना है कि दोनों को किस मकसद से बनाया गया है। दोनों आधुनिक और ताकतवर मिसाइलें हैं, लेकिन युद्ध में उनका इस्तेमाल अलग-अलग काम के लिए होता है।

ब्रह्मोस नाम ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदियों के नाम से लिया गया है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित की है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, यानी यह आवाज की रफ्तार से भी कई गुना तेज उड़ सकती है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें युद्धपोत, एयरफील्ड, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर जैसे लक्ष्य शामिल हो सकते हैं। यह मिसाइल भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल है और भारत की प्रमुख स्ट्राइक मिसाइलों में से एक है।

वहीं, अग्नि-5 एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे डीआरडीओ ने भारत की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता मजबूत करने के लिए विकसित किया है।

ब्रह्मोस के विपरीत अग्नि-5 का इस्तेमाल आम युद्ध के मैदान में किसी ठिकाने पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी से आने वाले बड़े खतरों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है। यह भारत की परमाणु प्रतिरोध नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल अलग-अलग तरीके से काम करती हैं

ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही मिसाइलें हैं, लेकिन इनके उड़ने और टारगेट तक पहुंचने का तरीका बिल्कुल अलग है। इसी वजह से दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग काम के लिए किया जाता है।

ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है। यह वायुमंडल के अंदर एक विमान की तरह उड़ते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसमें रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे बहुत तेज गति से उड़ने में मदद करता है। यह कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे समय रहते पहचानना और रोकना मुश्किल हो सकता है।

वहीं, अग्नि-5 एक बैलिस्टिक मिसाइल है। यह ब्रह्मोस से बिल्कुल अलग तरीके से लक्ष्य तक पहुंचती है। लॉन्च होने के बाद यह बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर तेज गति से नीचे आते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इस तरह यह लॉन्च वाली जगह से हजारों किलोमीटर दूर तक स्थित लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होती है।

आसान शब्दों में कहें तो ब्रह्मोस तेज गति से कम ऊंचाई पर उड़कर सटीक हमला करने वाली मिसाइल है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता को मजबूत करना है।

स्पीड और रेंज

ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के लिए जानी जाती है। यह करीब मैक 3 की गति से उड़ सकती है। इतनी तेज गति के कारण यह कुछ ही समय में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। कम ऊंचाई पर उड़ने और लक्ष्य के करीब पहुंचने के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के कारण इसे रोकना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, अग्नि-5 को लंबी दूरी के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। इसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में तुरंत हमला करने के बजाय भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

आसान भाषा में समझें तो ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी रफ्तार और सटीक हमला करने की क्षमता है, जबकि अग्नि-5 की खासियत उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक भूमिका है।

कौन सी मिसाइल ज्यादा ताकतवर है?

ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना करते समय अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि दोनों में से कौन ज्यादा ताकतवर है। लेकिन इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों मिसाइलों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बनाया गया है। इसलिए इनकी ताकत का आकलन मिशन के हिसाब से करना ज्यादा सही होगा।

अगर लक्ष्य दुश्मन के युद्धपोत, एयरबेस या सैन्य कमांड सेंटर पर तेजी से हमला करना है, तो ब्रह्मोस ज्यादा उपयोगी है। इसकी तेज रफ्तार, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता इसे एक प्रभावी क्रूज मिसाइल बनाती है।

वहीं, अगर बात लंबी दूरी की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को बड़े हमले से रोकने की है, तो अग्नि-5 की भूमिका अहम हो जाती है। इसकी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता भारत की रणनीतिक मिसाइल ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भूमिका में मिसाइल की रफ्तार से ज्यादा उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक क्षमता मायने रखती है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी कहना सही नहीं होगा। ब्रह्मोस भारत की तेज और सटीक पारंपरिक हमला करने की क्षमता को मजबूत करती है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करती है। दोनों की भूमिकाएं अलग हैं और इसी वजह से दोनों भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी? आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणना के आंकड़ों में कितना फर्क, जानें कहां रहते हैं

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों और हिंदू समुदाय की स्थिति पर बात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी बताई। हालांकि, पाकिस्तान की हालिया जनगणना के आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। इससे हिंदू आबादी को लेकर दिए गए आंकड़े पर सवाल उठने लगे हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी?

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में 38,67,729 लोगों ने खुद को हिंदू बताया, जो कुल आबादी का करीब 1.61 फीसदी है। वहीं, 13,49,487 लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में दर्ज किया गया, जो 0.56 फीसदी है। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर यह संख्या 52,17,216 यानी कुल आबादी का करीब 2.17 फीसदी बैठती है। यानी पाकिस्तान के आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में हिंदू आबादी 4 फीसदी नहीं, बल्कि अलग-अलग श्रेणियों को मिलाने पर भी करीब 2.17 फीसदी है।

आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणनी के आंकड़ों में कितना फर्क

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में धर्म के आधार पर आबादी के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। इसमें कुल 24.04 करोड़ से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें करीब 23.16 करोड़ मुस्लिम, 33 लाख ईसाई और 38.67 लाख हिंदू जाति के लोग दर्ज हैं। इसके अलावा करीब 13.49 लाख लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में रखा गया है। जनगणना के हिसाब से केवल हिंदू जाति की आबादी 1.61 फीसदी है, जबकि हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर यह आंकड़ा 2.17 फीसदी हो जाता है।

पाकिस्तान की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया गया है। ऐसे में केवल हिंदू आबादी के 1.61 फीसदी आंकड़े को देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि शेड्यूल्ड कास्ट में 13 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं। हालांकि, दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर भी कुल संख्या करीब 52.2 लाख होती है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का 2.17 फीसदी है, 4 फीसदी नहीं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 2023 की जनगणना के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, जिनमें देश, प्रांत और ग्रामीण-शहरी स्तर पर धर्म से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

1951 में हुई थी पहली जनगणना 

पाकिस्तान में पहली जनगणना 1951 में, देश के बंटवारे के करीब चार साल बाद हुई थी। उस समय पाकिस्तान दो हिस्सों में बंटा हुआ था, जिन्हें वेस्ट पाकिस्तान और ईस्ट पाकिस्तान कहा जाता था। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 1951 की जनगणना में दोनों हिस्सों की आबादी को दर्ज किया गया था और अकेले वेस्ट पाकिस्तान की आबादी करीब 3.37 करोड़ थी।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हिंदू आबादी की संख्या समय के साथ बढ़ी है। 1998 की जनगणना में पाकिस्तान में करीब 24.4 लाख हिंदू दर्ज किए गए थे। यह उस समय देश की कुल आबादी का लगभग 2.02 फीसदी था। यानी संख्या के लिहाज से हिंदू आबादी में बढ़ोतरी देखने को मिली है, हालांकि कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी अलग-अलग जनगणना में बदलती रही है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की कुल संख्या बढ़कर 52 लाख से ज्यादा हो गई। हालांकि, आबादी में इनकी हिस्सेदारी अब भी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बताए 4 फीसदी से काफी कम है। 1998 की जनगणना में हिंदू आबादी 2.02 फीसदी थी, जबकि 2023 में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर भी यह आंकड़ा सिर्फ 2.17 फीसदी रहा।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों की आज के आंकड़ों से सीधी तुलना करना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि 1951 की जनगणना में पूर्वी पाकिस्तान भी शामिल था, जो बाद में अलग होकर बांग्लादेश बन गया। इसलिए उस समय के आंकड़ों को आज के पाकिस्तान से मिलाते समय एक जैसे क्षेत्रों को आधार बनाना जरूरी है, ताकि तुलना सही तरीके से की जा सके।

सिंध में रहते हैं सबसे ज्यादा हिन्दू 

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, देश की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा सिंध प्रांत में रहता है। यहां 35,75,848 लोग हिंदू जाति और 13,25,559 लोग शेड्यूल्ड कास्ट के तौर पर दर्ज किए गए हैं। दोनों को मिलाकर यह संख्या करीब 49 लाख है, जो सिंध की कुल आबादी का 8.81 फीसदी है। देशभर में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट के रूप में दर्ज कुल आबादी में सिंध की हिस्सेदारी करीब 94 फीसदी है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की तुलना में दूसरे हिस्सों में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी काफी कम दर्ज की गई है। 2023 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में करीब 2.49 लाख लोग इन दोनों श्रेणियों में शामिल हैं, जो राज्य की आबादी का लगभग 0.20 फीसदी है। बलूचिस्तान में यह संख्या करीब 59 हजार, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में लगभग 6,100 रही। वहीं, इस्लामाबाद में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर 900 से भी कम लोग दर्ज किए गए।

सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय की आबादी खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अधिक है। 2023 की जनगणना के मुताबिक, उमरकोट पाकिस्तान का एकमात्र जिला है, जहां हिंदू आबादी बहुमत में है। सिंध में हिंदू समुदाय से जुड़े सुरक्षा, जबरन धर्म परिवर्तन और पलायन जैसे मुद्दे भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। जनगणना के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट समुदाय की आबादी शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार, गांवों में करीब 27 लाख हिंदू जाति और 11.69 लाख शेड्यूल्ड कास्ट के लोग रहते हैं, जबकि शहरों में इनकी संख्या क्रमशः करीब 11.64 लाख और 1.80 लाख है। दोनों श्रेणियों को मिलाकर करीब 52.2 लाख लोगों में से लगभग 38.7 लाख ग्रामीण इलाकों में और करीब 13.5 लाख शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।

सिंध में हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आर्थिक परेशानियों के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं और संस्थानों तक पहुंच की कमी जैसी चुनौतियां भी बताई गई हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हिंदू समुदाय की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।