Gold Price Today: सोने में तेजी बरकरार; दिल्ली, जयपुर में ₹143940 पर पहुंचा 24 कैरेट; आपके शहर में क्या है रेट

देश में सोने की कीमत में तेजी जारी है। 3 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में भाव और बढ़ गया है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 143940 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत में मजबूती और डॉलर के कमजोर होने के कारण सोने की मांग में तेजी आई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,144.83 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने बाजार के अनुमानों के मुकाबले कम सख्त रुख की बात कही है, जिससे ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं। इसके अलावा अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहना भी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होने का एक कारण है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143940 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131960 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131810 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 146190 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131960143940
मुंबई131810143790
अहमदाबाद131860143840
चेन्नई134010146190
कोलकाता131810143790
हैदराबाद131810143790
जयपुर131960143940
भोपाल131860143840
लखनऊ131960143940
चंडीगढ़131960143940

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी तेजी कायम है। 3 जुलाई की सुबह कीमत बढ़कर 245100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। औद्योगिक मांग और निवेश के लिहाज से मांग बढ़ने के कारण चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 61.28 डॉलर प्रति औंस पर है। देश के अंदर सोने और चांदी की कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Kusumgar IPO: 8 जुलाई को खुलेगा ₹650 करोड़ का IPO, प्रमोटर OFS के जरिए बेचेंगे हिस्सेदारी

Kusumgar IPO: मुंबई की सिंथेटिक फैब्रिक बनाने वाली कंपनी Kusumgar का 650 करोड़ रुपये का IPO 8 जुलाई को निवेशकों के लिए खुलेगा। जुलाई महीने में खुलने वाला यह दूसरा IPO होगा। इससे पहले Knack Packaging का IPO 3 जुलाई को बंद होगा।

कब खुलेगा IPO और कब होगी लिस्टिंग?

IPO का एंकर बुक 7 जुलाई को खुलेगा। रिटेल इनवेस्टर 8 जुलाई से 10 जुलाई के बीच Kusumgar IPO में पैसे लगा सकेंगे। शेयरों के अलॉटमेंट को 13 जुलाई तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी के शेयर 15 जुलाई को शेयर बाजार में लिस्ट हो सकते हैं।

कंपनी को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी इसमें कोई फ्रेश इश्यू नहीं है। इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाला पूरा पैसा शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा। कंपनी के पास इस इश्यू से कोई पैसा नहीं आएगा।

IPO के जरिए कंपनी के प्रमोटर सिद्धार्थ योगेश कुसुमगर, उनकी पत्नी सपना सिद्धार्थ कुसुमगर और Siddharth Yogesh Kusumgar HUF अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, IPO लाने का मकसद ऑफर फॉर सेल पूरा करना और कंपनी के शेयरों को शेयर बाजार में लिस्ट कराना है।

क्या काम करती है Kusumgar?

Kusumgar इंजीनियर्ड फैब्रिक और उससे जुड़े सॉल्यूशन तैयार करती है। कंपनी पॉलीअमाइड, पॉलिएस्टर फिलामेंट और पॉलीयूरेथेन आधारित फैब्रिक बनाती है। इसके प्रोडक्ट एयरोस्पेस और डिफेंस, इंडस्ट्रियल, ऑटोमोबाइल, आउटडोर और लाइफस्टाइल जैसे कई सेक्टर में इस्तेमाल होते हैं।

कंपनी का कारोबार कैसा है?

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा। कंपनी का मुनाफा 12.3% घटकर 98.2 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, रेवेन्यू 11.2% गिरकर 692 करोड़ रुपये पर आ गया।

हालांकि, इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया था। उस दौरान मुनाफा 32.7% बढ़कर 112 करोड़ रुपये पहुंच गया था। वहीं, रेवेन्यू 66.5% बढ़कर 779 करोड़ रुपये हो गया था। यानी पिछले दो वित्त वर्षों में कंपनी के कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

कौन संभाल रहा है IPO?

Kusumgar ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 3.5 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर आरक्षित रखे हैं। इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) Axis Capital, IIFL Capital Services और Motilal Oswal Investment Advisors हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mojtaba Khamenei: इस डर की वजह से पिता अली खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा! ईरान से आया बिग अपडेट

Mojtaba Khamenei: ईरान से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है। इस फैसले के पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं और संभावित हमलों का डर बताया जा रहा है क्योंकि इस समय इजरायल के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खुद जनता से मिलना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऐसा न करने की सख्त सलाह दे रही हैं।

तेहरान के लिए रवाना होने से पहले इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बातचीत करते हुए इलाही ने कहा कि मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और मेरे कुछ दोस्तों से मिला जिन्होंने मोजतबा से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है और वे उनके लिए सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। मुझे लगता है कि वह बाहर नहीं आएंगे।

कड़े सुरक्षा पहरे के बीच होगा अंतिम संस्कार

अली खामेनेई के जनाजे में हजारों शोककुल लोगों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के तेहरान पहुंचने की उम्मीद है। यह समारोह इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए एक धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। इस साल की शुरुआत में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बीच हुए युद्ध के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। संभावित जवाबी कार्रवाई या टारगेटेड अटैक्स की आशंकाओं को देखते हुए अधिकारियों द्वारा अंतिम संस्कार के जुलूस के आसपास व्यापक सुरक्षा बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।

इलाही ने बताया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में माहौल बेहद भावुक है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत-बहुत बड़ा नुकसान है। उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी आत्मा, अपने प्राण खो दिए हैं। उनका मानना है कि कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और विदेशों से समर्थक दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए यात्रा कर रहे हैं। वे एकजुटता दिखाने और यह कहने आ रहे हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलेंगे।

मोजतबा की पब्लिक अपियरनेंस नहीं होने पर उठ रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई की संभावित अनुपस्थिति से उनकी स्थिति और उनके अधिकार को लेकर कयासबाजी और तेज होने की संभावना है। 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से वह लोगों के बीच से दूर रहे हैं। हालांकि उन्होंने एक दर्जन से अधिक लिखित संदेश जारी किए हैं और आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रमाणित सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिस हवाई हमले में खामेनेई परिवार के कई सदस्य और मोजतबा की पत्नी जहरा हदाद अदेल मारी गई थीं, उसी हमले में मोजतबा खुद भी घायल हो गए थे। उनकी इस लंबी अनुपस्थिति ने राजनयिक और खुफिया हलकों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति दोनों को लेकर अटकलों को हवा दी है। अगर वह अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होते हैं तो उनके नेतृत्व और सार्वजनिक वैधता पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।

आपको बता दें कि अपने पिता के विपरीत मोजतबा खामेनेई ने अपने करियर का अधिकांश समय पर्दे के पीछे बिताया है। अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने से बहुत पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने 1989 में देश का सर्वोच्च पद संभालने से पहले 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। इसके उलट मोजतबा ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध बनाए रखे।

साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन पर ईरान के कट्टरपंथी क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उन्होंने ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स और आंतरिक सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने के लिए कुद्स फोर्स और बासिज मिलिशिया के साथ मिलकर काम किया था। उनका नाम ईरान के राजनीतिक विवादों में भी बार-बार सामने आया है।

क्या मोजतबा कायम कर पाएंगे पिता जैसा दबदबा?

भले ही मोजतबा सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या वह अपने पिता जैसा प्रभाव हासिल कर पाएंगे। खुफिया आकलनों का हवाला देने वाली ब्लूमबर्ग की एक जांच के मुताबिक मोजतबा ने तेल राजस्व और अपतटीय निवेशों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव बनाया है। कई जानकारों का तर्क है कि संस्थागत शक्ति सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकार में नहीं बदल जाती। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने कहा कि मोजतबा के पास अभी भी उस कद की कमी है जो उनके पिता ने दशकों में बनाया था। जूनो ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की भूमिका अभी अस्पष्ट है। इस मोड़ पर इसकी संभावना बहुत कम है कि उनके पास उतना प्रभाव हो जितना उनके पिता का हुआ करता था।

तनाव के बावजूद ईरान जता रहा है भरोसा

जब इलाही से इजरायल की ओर से मिल रही नई धमकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद ईरान मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान की तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि ईरान युद्ध जीत गया। ईरान अब भी बहुत मजबूत है और डटने के लिए तैयार है। फिलहाल सभी की निगाहें तेहरान पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई ईरान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आखिरकार सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या नहीं।

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जापानी कंपनियों को भारत के गांवों तक लेकर आएंगे श्रीधर वेम्बु! इसके लिए वो पहुंच रहे जापान और उनका ये है प्लान

Sridhar Vembu: जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बु ने एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वेम्बु जापान की यात्रा पर जा रहे हैं। उनका मकसद जापान की छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के साथ साझेदारी तलाशना है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य जापान की इन कंपनियों को भारत के ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों से जोड़ना है ताकि देश के गांवों में कारीगरी व शिल्प कौशल की संस्कृति को फिर से जीवित किया जा सके।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए श्रीधर वेम्बु ने अपने इस पूरे एजेंडे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह जापान के छोटे शहरों में स्थित व्यवसायों के साथ काम करना चाहते हैं और उनकी विशेषज्ञता को भारत के छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाना चाहते हैं। वेम्बु ने लिखा कि मैं कल जापान जा रहा हूं। एजेंडा जापान के छोटे शहरों की छोटी से मध्यम आकार की कंपनियों के साथ साझेदारी करना और उन्हें भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लाना है।

शिल्प कौशल और कारीगरी को पुनर्जीवित करने पर फोकस

श्रीधर वेम्बु की मुताबिक इस पहल की जड़ें पारंपरिक शिल्प कौशल को फिर से बहाल करने की इच्छा से जुड़ी हैं। इसे उन्होंने तमिल शब्द आसारी (Aasaari) और संस्कृत शब्द विश्वकर्मा (Vishwakarma) के जरिए भी अपने विजन को समझाने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि जापान की कई छोटी कंपनियां आज भी इन मूल्यों को संजोए हुए हैं। इन कंपनियों ने प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और अन्य अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले क्षेत्रों में विश्व स्तरीय क्षमताएं विकसित की हैं। वेम्बु ने कहा कि जापानी लोग उन क्षेत्रों में वैश्विक लीडर हैं जिनमें जटिल और बारीक शिल्प कौशल की आवश्यकता होती है।

पुराने दोस्त ब्रिट्टो-सान से मिली इस मिशन की प्रेरणा

वेम्बु ने बताया कि इस पूरे मिशन में उन्हें उनके एक पुराने मित्र ब्रिट्टो से मार्गदर्शन मिल रहा है। मूल रूप से मदुरै के रहने वाले ब्रिट्टो ने जापान में कई दशक बिताए हैं और वहां की व्यावसायिक संस्कृति की उन्हें गहरी समझ है। ब्रिट्टो ने बाद में ताकुमी मोशन कंट्रोल्स की स्थापना की थी। जोहो के संस्थापक ने रेखांकित किया कि जापानी शब्द ताकुमी का अर्थ शिल्पकार होता है। ये जो जापानी विनिर्माण परंपराओं के प्रति उनके साझा सम्मान को दर्शाता है। वेम्बु ने लिखा कि जापानी शिल्प कौशल के प्रति हमारे आदर और प्रशंसा ने ब्रिट्टो-सान और मुझे एक साथ जोड़ा। अब यह हमारे लिए एक मिशन बन गया है।

वेम्बु के रूरल-फर्स्ट विजन से मेल खाती है यह पहल

यह घोषणा ग्रामीण विकास और विकेंद्रीकरण पर वेम्बु के लंबे समय से चले आ रहे फोकस के बिल्कुल अनुकूल है। वे पिछले कई वर्षों से लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि विश्व स्तरीय तकनीक और नवाचार का निर्माण बड़े महानगरों से बाहर भी किया जा सकता है। इसी सोच के तहत जोहो छोटे शहरों और गांवों में अपने परिचालन और प्रशिक्षण पहलों का विस्तार कर रही है।

यह जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही दिन पहले वेम्बु ने बताया था कि जोहो के रेवेन्यू का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत के बाहर से आता है। भारतीय सरकार से उन्हें सिर्फ 2 प्रतिशत रेवेन्यू मिलता है। जोहो की वैश्विक स्तर पर बड़ी मौजूदगी है। इसके कार्यालय जापान, अमेरिका, नीदरलैंड, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में हैं।

ग्रामीण भारत के विकास के लिए पहले भी किए हैं बड़े प्रयास

जोहो प्रमुख का यह ताजा जापान मिशन उनके उस ग्रामीण-विकास दर्शन का हिस्सा है जिसकी वे एक दशक से अधिक समय से वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में अपार प्रतिभा छिपी है, और यदि उन्हें अवसर व इंफ्रास्ट्रक्चर मिले तो वे नवाचार, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बन सकते हैं।

तेनकासी का सफल मॉडल

इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए जोहो ने 2011 में ग्रामीण तमिलनाडु के तेनकासी जिले के एक गांव मथलमपराई में एक टेक्नोलॉजी सेंटर शुरू किया था। उद्योग की इस धारणा को तोड़ते हुए कि हाई-एंड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल बड़े शहरों में हो सकता है, यह सेंटर आज एक बड़े रूरल टेक इकोसिस्टम में बदल चुका है। यहां सैकड़ों स्थानीय पेशेवर काम करते हैं। चेन्नई जैसे बड़े शहरों में नौकरियों के अत्यधिक संकेंद्रण को रोकने के लिए वेम्बु ने जानबूझकर ग्रामीण क्षेत्रों का रुख किया। इसके तहत तिरुनेलवेली, मदुरै और कुंभकोणम क्षेत्रों सहित पूरे तमिलनाडु में अतिरिक्त ग्रामीण परिसर और सैटेलाइट कार्यालय स्थापित किए गए हैं।

स्थानीय स्टार्टअप्स में निवेश

महानगरों से बाहर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ड्रोन स्टार्टअप याली एयरोस्पेस और पावर-टूल्स वेंचर करुवी जैसे स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी उपक्रमों में भी निवेश किया है।

गांवों की तरफ रिवर्स माइग्रेशन की अपील

श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में गांवों की ओर रिवर्स माइग्रेशन का आह्वान किया है। उनका तर्क है कि दशकों से बड़े शहरों की ओर हो रहे पलायन ने ग्रामीण समुदायों से प्रतिभाओं को पूरी तरह निचोड़ लिया है। वेम्बु के मुताबिक, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए लोगों के निवास स्थान के करीब ही रोजगार, उद्यमिता और दीर्घकालिक निवेश लाने की सख्त जरूरत है।

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

PNB Q1 Update: सरकारी बैंक का ग्लोबल बिजनेस 10% बढ़ा, डिपॉजिट और लोन में भी उछाल

PNB Q1 Update: सरकारी बैंक का ग्लोबल बिजनेस 10% बढ़ा, डिपॉजिट और लोन में भी उछाल

PNB Q1 Update: सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने गुरुवार (2 जुलाई) को जून तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया। बैंक का ग्लोबल बिजनेस 30 जून 2026 तक सालाना आधार पर 10.32% बढ़कर 29,99,876 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक ने कहा कि यह बढ़ोतरी डिपॉजिट और एडवांस (लोन) में लगातार ग्रोथ से हुई है।

डिपॉजिट और लोन दोनों में बढ़ोतरी

30 जून 2026 तक बैंक का ग्लोबल डिपॉजिट 16,70,180 करोड़ रुपये रहा। वहीं, ग्लोबल एडवांस बढ़कर 12,05,763 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। घरेलू कारोबार की बात करें तो डोमेस्टिक डिपॉजिट 12,75,036 करोड़ रुपये और डोमेस्टिक एडवांस 11,92,950 करोड़ रुपये रहा।

घरेलू कारोबार भी बढ़ा

बैंक का डोमेस्टिक बिजनेस बढ़कर 28,75,943 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, ग्लोबल क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेश्यो 30 जून 2026 तक 73.92% रहा।

मार्च 2026 के मुकाबले भी बैंक का कारोबार बढ़ा है। इस दौरान ग्लोबल बिजनेस में 1.02% और डोमेस्टिक बिजनेस में 1.19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, ग्लोबल डिपॉजिट और एडवांस क्रमशः 1.28% और 1.31% बढ़े।

सालाना आधार पर कैसी रही ग्रोथ?

एक साल पहले की तुलना में डोमेस्टिक डिपॉजिट में 12.85% और डोमेस्टिक एडवांस में 11.74% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, बैंक ने कहा कि ये आंकड़े अस्थायी (Provisional) हैं। स्टैच्यूटरी सेंट्रल ऑडिटर्स के रिव्यू के बाद इनमें बदलाव हो सकता है।

किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

पिछले महीने PNB के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अशोक चंद्र ने कहा था कि बैंक आगे भी रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME (RAM) लोन पर खास ध्यान देगा। इसके साथ ही CASA (करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट) डिपॉजिट बढ़ाने, डिजिटलीकरण और ग्राहक सेवा पर भी फोकस रहेगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत बैलेंस शीट और पर्याप्त पूंजी के दम पर देश की बढ़ती कर्ज जरूरतों को पूरा करने की अच्छी स्थिति में है।

RAM पोर्टफोलियो और CASA में सुधार

31 मार्च 2026 तक बैंक का RAM (Retail, Agriculture and MSME) पोर्टफोलियो बढ़कर 6.76 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 6.03 लाख करोड़ रुपये था। यानी इसमें 12% की बढ़ोतरी हुई। घरेलू एडवांस में RAM सेगमेंट की हिस्सेदारी 56.6% रही।

वहीं, CASA रेश्यो 31 मार्च 2026 तक 37% था। बैंक के करंट अकाउंट डिपॉजिट 79,294 करोड़ रुपये और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट 5.30 लाख करोड़ रुपये रहे।

शाखाओं का विस्तार जारी रहेगा

अशोक चंद्र ने कहा कि बैंक आने वाले समय में भी अपनी शाखाओं का विस्तार जारी रखेगा। ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं देना बैंक की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि PNB विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक PNB के पास 10,324 शाखाओं का नेटवर्क है।

गुरुवार को PNB का शेयर 0.51% की गिरावट के साथ 106.95 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.75% गिरा है।

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

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Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल के शेयरों की बुलेट जैसी रफ्तार, जानिए क्या है एनालिस्ट्स की राय

Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 2 जुलाई को 17 फीसदी उछाल आया। शेयरों में लगातार दूसरे दिन तेजी दिखी। एक दिन पहले शेयर का भाव 20 फीसदी चढ़ा था, जिसके बाद अपर सर्किट लग गया था। बीते दो दिनों में यह शेयर करीब 37 फीसदी चढ़ चुका है।

15 जून को लिस्ट हुआ था शेयर

गुरुवार को वेदांता ऑयल एंड गैस का शेयर एनएसई पर 45.69 रुपये पर पहुंच गया। 15 जून को यह शेयर एनएसई पर 38 रुपये और बीएसई पर 39 रुपये पर लिस्ट हुआ था। गुरुवार को 45 रुपये की कीमत का मतलब है कि यह शेयर एनएसई में अपने लिस्टिंग प्राइस से 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है।

ग्रोथ के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एनालिस्ट मीट में प्रोडक्शन बढ़ाने, रिजर्व को बढ़ाने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाने के बारे में विस्तार से बताया। कंपनी का मानना है कि पूरे राजस्थान, कोस्टल एसेट्स, उत्तरपूर्व भारत और डीपवाटर में कंपनी के लिए ग्रोथ की काभी संभावनाएं हैं। इसे ऑयल रिकवरी प्रोग्राम पर सरकार के बढ़ते फोकस का भी फायदा मिलेगा।

ऑपरेटिंग खर्च बढ़ाने पर फोकस

पीएल कैपिटल के एनालिस्ट्स का कहना है कि वेदांता् ऑयल FY29 तक उत्पादन बढ़ाकर दोगुना करना चाहती है। कंपनी का फोकस ऑपरेटिंग खर्च घटाने पर भी है। FY26 में यह 16.5 डॉलर प्रति बैरल था। कंपनी इसे घटाकर 10-13 डॉलर प्रति बैरल तक लाना चाहती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एसेट-लेवल रोडमैप के बारे में बताया है। शॉर्ट टर्म में कई फैक्टर्स कंपनी को प्रोडक्शन बढ़ाने में हेल्पफुल हो सकते हैं।

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1 जुलाई को T2T से बाहर आया शेयर

वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर के शेयर 15 जून को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था। T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है। 1 जुलाई को ये शेयर टी2टी से बाहर आ गए।

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Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने 2 जुलाई को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च करने का ऐलान किया। कंपनी ने इसके लिए 3,034.68 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस कंपनी के मौजूदा बाजार भाव 3,165 रुपये प्रति शेयर से करीब 4% कम है।

इस इश्यू के लिए SBI Capital Markets, Jefferies India, ICICI Securities और IIFL Capital Services को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) बनाया गया है। QIP का अंतिम इश्यू प्राइस इनसे चर्चा के बाद तय होगा।

IHC करेगी $11 अरब का निवेश

इस बीच, अदाणी ग्रुप के लिए एक और बड़ी खबर आई है। अबू धाबी की International Holding Company (IHC) ओडिशा में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हो सकता है।

50-50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत IHC और अदाणी ग्रुप की 50-50% हिस्सेदारी होगी।

इस जॉइंट वेंचर के तहत एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ओडिशा का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी ज्यादा होगी।

  • 40 लाख टन (4 MTPA) एल्युमिना
  • 20 लाख टन (2 MTPA) एल्युमिनियम
  • 10 लाख टन (1 MTPA) डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स

53,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक, कुल 53,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें 35,000 नौकरियां निर्माण के दौरान मिलेंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा।

अभी एल्युमिनियम कारोबार में नहीं है अदाणी ग्रुप

अदाणी ग्रुप अभी एल्युमिनियम बनाने के कारोबार में नहीं है। हालांकि, कंपनी पहले ही ओडिशा में एल्युमिना रिफाइनरी और एल्युमिनियम प्रोजेक्ट लगाने की योजना का ऐलान कर चुकी है।

वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट कॉपर स्मेल्टर है। इसे बनाने में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

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UP RERA ने 1278 करोड़ के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद और आगरा में नए घर, दुकानें खरीदनी हैं तो इनपर रखें नजर

New Housing projects in UP: उत्तर प्रदेश में अपना घर या दुकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने राज्य के चार प्रमुख जिलों में 10 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इन सभी प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर लगभग 1278 करोड़ रुपये का अनुमानित इन्वेस्टमेंट होगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में हुई अथॉरिटी की बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से लखनऊ, नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), आगरा और गाजियाबाद में करीब 4498 आवासीय और व्यावसायिक यूनिट्स का विकास किया जाएगा।

लखनऊ: सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स और 2284 यूनिट्स को मिली मंजूरी

मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स और यूनिट्स की संख्या के मामले में राजधानी लखनऊ सबसे आगे है। लखनऊ में करीब 438.29 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाले 6 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन 6 प्रोजेक्ट्स में 5 आवासीय और 1 मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट शामिल है। इनके जरिए कुल 2284 यूनिट्स डेवलप की जाएंगी।

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा): निवेश के मामले में अव्वल, बनेंगे शॉप्स और स्टूडियो स्पेस

निवेश के मामले में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) सूची में सबसे ऊपर रहा है। यहां 496.27 करोड़ रुपये की लागत वाले 2 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को रेरा से मंजूरी मिली है। इन प्रोजेक्ट्स के तहत कुल 981 कमर्शियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी। इनमें दुकानें और स्टूडियो स्पेस शामिल होंगे।

आगरा और गाजियाबाद में भी रियल एस्टेट को रफ्तार

आगरा और गाजियाबाद जिलों के लिए भी नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई गई है। आगरा में 223.04 करोड़ रुपये के एक आवासीय प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इसके तहत शहर में 761 हाउसिंग यूनिट्स (आवास) का विकास किया जाएगा। गाजियाबाद में 120.88 करोड़ रुपये के निवेश वाले एक कमर्शियल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके तहत 472 कमर्शियल यूनिट्स बनाने की योजना है।

रोजगार के नए अवसर और समय पर पूरा करने की निगरानी

यूपी रेरा ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स आवासीय, व्यावसायिक और मिक्स्ड-यूज विकास से जुड़े हैं। इनसे राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इनकी मदद से घरों और आधुनिक कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा। अथॉरिटी ने साफ किया है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे हों। इन निवेशों से निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही कंस्ट्रक्शन मैटेरियल, इंजीनियरिंग सर्विसेज, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में भी मांग बढ़ेगी।

प्रोजेक्ट्स को दी गई इस मंजूरी पर यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि अथॉरिटी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को समय पर मंजूरी मिलने और उनकी प्रभावी निगरानी से प्रमोटर्स और घर खरीदारों दोनों के लिए अधिक भरोसे का माहौल तैयार हो रहा है।

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Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

Parle Products IPO: Parle-G, Melody और Mango Bite जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली Parle Products अगले साल 1 अरब डॉलर (करीब 9,530 करोड़ रुपये) से बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। मामले की जानकारी रखने वाले कई सूत्रों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।

सूत्रों के मुताबिक, चूंकि ये देश प्रतिष्ठित ब्रांड है, ऐसे में प्रस्तावित IPO का साइज1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी 10.5 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, बाजार की स्थिति के हिसाब से IPO का साइड और वैल्यूएशन बदल सकता है।

किन बैंकों को मिल सकती है जिम्मेदारी?

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अप्रैल में Request for Proposal (RFP) जारी किया था। इसके बाद कई इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। फिलहाल कंपनी ने Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और HSBC Securities को सलाहकार के तौर पर चुना है।

दो अन्य सूत्रों ने भी इन नामों की पुष्टि की। इनमें से एक ने बताया कि कंपनी चौथे इन्वेस्टमेंट बैंक को भी सलाहकार समूह में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में बातचीत जारी है।

Parle Products ने क्या कहा?

Moneycontrol ने जब Parle Products से संपर्क किया तो कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) मयंक शाह ने कहा कि कंपनी बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती। फिलहाल उसका पूरा फोकस कारोबार को बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी कंपनी की तरह Parle Products भी ग्रोथ के लिए तमाम विकल्पों का मूल्यांकन करती रहती है।

वहीं, Kotak Mahindra Capital और Axis Capital ने इस खबर पर कोई जवाब नहीं दिया। HSBC Securities ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

Parle Agro से अलग है Parle Products

विजय चौहान के अगुआई वाली Parle Products असल में जयंतीलाल चौहान, सचौना चौान नादिया चौहान के नेतृत्व वाली Parle Agro से अलग कंपनी है। Parle Agro Frooti, Appy Fizz और Bailley जैसे ब्रांड बनाती है। परिवार के बंटवारे के बाद दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही हैं।

किन कंपनियों से है मुकाबला?

भारतीय बाजार में Parle Products की प्रतिस्पर्धा Britannia, ITC (Sunfeast), Mondelez India, Perfetti, Priya Gold, Anmol Industries और Cremica जैसी कंपनियों से है।

Hurun India 500 की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Parle Products का अनुमानित वैल्यूएशन 75,420 करोड़ रुपये था। इस वैल्यूएशन के साथ यह भारत की सातवीं सबसे मूल्यवान गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनी थी।

पहले IPO से किया था इनकार

20 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी भेंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद CMO मयंक शाह ने कहा था कि इससे भारतीय ब्रांड को वैश्विक पहचान मिलेगी।

उसी दौरान जब उनसे IPO की योजना के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल कंपनी लिस्टिंग पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि Parle Products लंबे समय से एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और फिलहाल उसी तरह बने रहने की योजना है।

कंपनी का कारोबार कितना बड़ा है?

मुंबई के विले पार्ले में मुख्यालय वाली Parle Products की स्थापना 1929 में हुई थी। Parle-G के अलावा कंपनी के पोर्टफोलियो में KrackJack, Monaco, Hide & Seek और Poppins जैसे लोकप्रिय ब्रांड भी शामिल हैं।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5% बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, इसी दौरान उसका मुनाफा 39% घटकर 979.53 करोड़ रुपये रह गया।

बिस्किट और कन्फेक्शनरी के अलावा कंपनी केक, रस्क, आटा और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसे सेगमेंट में भी मौजूद है। कंपनी के प्रोडक्ट अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में बिकते हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, कैमरून, घाना, इथियोपिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, नेपाल और मेक्सिको समेत कई देशों में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी हैं।

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