Index funds vs Active funds: इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड… 10 साल में ₹1 लाख से किसने बनाया ज्यादा पैसा?

Index funds vs Active funds: म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि में पैसा बढ़ाने का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन, कौन सा फंड ज्यादा बेहतर रिटर्न देता है? अब मान लीजिए कि दो दोस्त हैं। 10 साल पहले दोनों ने म्यूचुअल फंड में ₹1-1 लाख लगाए। पहले ने ज्यादा सोच-विचार नहीं किया और Nifty 50 Index Fund में पैसा लगा दिया। दूसरे को भरोसा था कि एक अच्छा फंड मैनेजर बाजार से बेहतर रिटर्न दिला सकता है, इसलिए उसने एक एक्टिव इक्विटी फंड चुना।

10 साल बाद पहले निवेशक का ₹1 लाख बढ़कर करीब ₹3.15 लाख हो गया। लेकिन दूसरे निवेशक के लिए नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कौन-सा फंड चुना था।

अगर उसने सही लार्ज कैप फंड चुना होता, तो उसकी रकम करीब ₹3.83 लाख हो सकती थी। लेकिन अगर फंड का चुनाव गलत हो जाता, तो वही ₹1 लाख सिर्फ ₹2.60 लाख तक पहुंचता। यानी इंडेक्स फंड से भी कम रिटर्न मिलता।

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फ्लेक्सी कैप फंड में और बड़ा अंतर

फ्लेक्सी कैप फंड्स में यह अंतर और ज्यादा बड़ा दिखता है। पिछले 10 साल में कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स ने ₹1 लाख को बढ़ाकर करीब ₹5.99 लाख कर दिया। वहीं कुछ फंड्स में यही रकम सिर्फ ₹2.53 लाख तक पहुंची।

यही इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क है। इंडेक्स फंड का मकसद बाजार जितना रिटर्न देना होता है, इसलिए इसमें रिटर्न का अंदाजा लगाना आसान होता है। दूसरी तरफ एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई का मौका भी होता है और कमजोर रिटर्न का जोखिम भी।

एक्टिव फंड ज्यादा रिटर्न कैसे दे सकते हैं?

Arthasadhana Investments की संस्थापक और QPFP®️ Namrata Singh कहती हैं कि एक्टिव फंड्स में बाजार से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है। खासकर उन कैटेगरी में, जहां फंड मैनेजर को अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश करने की आजादी होती है।

इंडेक्स फंड एक तय सूची के हिसाब से निवेश करते हैं। लेकिन एक्टिव फंड में फंड मैनेजर अपने हिसाब से फैसले ले सकता है। उसे अगर लगता है कि किसी सेक्टर में तेजी आने वाली है, तो वह वहां निवेश बढ़ा सकता है। अगर कोई सेक्टर महंगा लग रहा है, तो वहां निवेश कम कर सकता है। फ्लेक्सी कैप फंड्स में तो फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों के बीच भी आसानी से पैसा शिफ्ट कर सकता है।

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अनुभव मैनेजर पकड़ लेते हैं मौके

नम्रता सिंह का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में हालात लगातार बदलते रहते हैं। कभी कोई सेक्टर आगे निकल जाता है तो कभी दूसरा। ऐसे में अनुभवी फंड मैनेजर कई बार ऐसे मौके पकड़ लेते हैं, जो अभी इंडेक्स में पूरी तरह दिखाई नहीं देते।

यही वजह है कि इस अध्ययन में सबसे बेहतर फ्लेक्सी कैप फंड ने ₹1 लाख को करीब ₹6 लाख में बदल दिया। यह Nifty 50 Index Fund के रिटर्न से लगभग दोगुना है।

लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। जिस फ्लेक्सी कैप फंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, उसने 10 साल में ₹1 लाख को सिर्फ ₹2.53 लाख बनाया। वहीं सबसे कमजोर लार्ज कैप फंड की वैल्यू ₹2.60 लाख तक पहुंची। दोनों ही मामलों में रिटर्न Nifty 50 Index Fund से कम रहा। यानी एक्टिव फंड में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन-सा फंड चुना है।

नम्रता सिंह कहती हैं कि सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि फंड पैसा कैसे निवेश करता है, जोखिम को कैसे संभालता है और लंबे समय में उसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहा है।

फिर भी कई लोग इंडेक्स फंड क्यों चुनते हैं?

कई निवेशक फंड मैनेजर चुनने की झंझट में नहीं पड़ना चाहते। वे यह सोचकर निवेश करते हैं कि बाजार जितना रिटर्न मिल जाए, वही काफी है। ऐसे निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड एक आसान विकल्प बन जाते हैं। ये बाजार को हराने की कोशिश नहीं करते। इनका मकसद सिर्फ Nifty 50 जैसे किसी इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराना होता है।

इसके अलावा इंडेक्स फंड का खर्च भी आमतौर पर कम होता है और निवेशक को एक ही फंड के जरिए कई बड़ी कंपनियों में निवेश का मौका मिल जाता है।

नम्रता सिंह के मुताबिक, जो निवेशक सरल और नियम-आधारित निवेश पसंद करते हैं और फंड मैनेजर पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उनके लिए इंडेक्स फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वहीं जो लोग थोड़ा ज्यादा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं, वे अच्छे एक्टिव फंड्स पर विचार कर सकते हैं।

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यूएस फ्यूचर्स, भारत, दक्षिण कोरिया सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में मचा कोहराम

दुनियाभर के शेयर बाजारों में 23 जून को बड़ी गिरावट दिखी है। यूएस स्टॉक फ्यूचर्स 2 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। उधर, दक्षिण कोरिया का बाजार 11 फीसदी क्रैश चुका है। इधर, भारत में बाजार के बड़े सूचकांकों पर बड़ा दबाव दिख रहा है। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 172 अंक नीच है, जबकि सेंसेक्स 0.67 फीसदी यानी 513 अंक टूट चुका है। इन सभी बाजारों में गिरावट में आईटी कंपनियों का बड़ा हाथ है।

अमेरिकी बाजारों में आज दिख सकता है दबाव

यूएस फ्यूचर्स में 2 फीसदी गिरावट का मतलब है कि 23 जून को कारोबार शुरू होने पर अमेरिकी बाजारों पर बड़ा दबाव दिख सकता है। 22 जून को अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी। इसका असर नैस्डेक पर पड़ा था। यह 1.32 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। 23 जून को इसका असर भारत सहित प्रमुख एशियाई बाजारों पर पड़ा। इन बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। भारत में सबसे ज्यादा गिरावट आईटी शेयरों में दिखी। इससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा टूट गया।

प्रमुख एशियाई बाजारों में बड़ी बिकवाली 

जापान के प्रमुख सचूकांक Nikkei 225 में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई। हांगकांग का हैंगसेट 1.75 फीसदी नीचे चल रहा था। शंघाई कंपोजिट 1.38 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा था। थाइलैंड का सेट कंपोजिट इंडेक्स 1,69 फीसदी नीचे चल रहा था। इसका मतलब है कि दुनियाभर के प्रमुख शेयर बाजार बड़े दबाव में हैं। अचानक आई इस गिरावट की वजह से इनवेस्टर्स में घबराहट है।

दक्षिण कोरिया का बाजार 10 फीसदी क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट दक्षिण कोरिया के बाजार में आई है। कोस्पी 10 फीसदी क्रैश कर चुका है। SK Hynix और Samsung Electronics में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। इससे कुछ समय के लिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। लेकिन, दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इस साल दक्षिण कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई थी। विदेशी निवेशकों ने सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में खूब निवेश किए थे। इससे शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई थीं।

अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट

22 जून को अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट आई। हाल में जबर्दस्त तेजी के साथ सूचीबद्ध होने वाला स्पेसएक्स का शेयर 16 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। Alphabet का शेयर 5 फीसदी फिसला। Amazon और Microsoft के शेयरों में 2.3 से 4.7 फीसदी तक की गिरावट आई। अब बाजार की नजरें Micron Technology पर लगी है। कंपनी 24 जून को अपने तिमाही नतीजों का ऐलान करेगी।

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भारत में आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट 

इधर, भारत में भी आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी। TCS का शेयर 3 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। इंफोसिस में भी 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट दिखी। एचसीएल टेक में 1.57 फीसदी कमजोरी दिखी। विप्रो 2.85 फीसदी नीचे चल रहा था। टेक महिंद्रा का शेयर 2.15 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा था। एलटीआई माइंडट्री भी 2 फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहा था।

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टेक्नोलॉजी शेयरों की वैल्यूएशन को लेकर चिंता

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका, दणिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई थी। इनवेस्टर्स एआई के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन शेयरों में निवेश कर रहे थे। इससे इन शेयरों की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अब इनकी हाई वैल्यूएशंस को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे इन शेयरों में बिकवाली दिख रही है।

South Korea Stock Market: दक्षिण कोरिया का स्टॉक मार्केट क्रैश, Kospi 9 फीसदी से ज्यादा फिसला

South Korea Stock Market: दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में 23 जून को कोहराम मच गया। बाजार का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 9.99 फीसदी क्रैश कर गया। पहले 8 फीसदी क्रैश करने के बाद ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने पर गिरावट और बढ़ गई। अचानक आई इस बड़ी गिरावट ने इनवेस्टर्स को हैरान कर दिया है।

सेमीकंडक्टर शेयरों में आया था बड़ा उछाल

दक्षिण कोरिया का बाजार इस साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले बाजारों में शामिल था। कोस्पी ने ऊंचाई के कई नए रिकॉर्ड बनाए थे। इसकी बड़ी वजह सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में उछाल थी। विदेशी इनवेस्टर्स ने इन शेयरों में खूब पैसे लगाए। इससे इन कंपनियों के शेयरों में अप्रत्याशित तेजी आई थी। लेकिन, 23 जून को आई गिरावट ने इस तेजी पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है।

SK Hynix का शेयर 10 फीसदी से ज्यादा फिसला

सबसे ज्यादा गिरावट SK Hynix के शेयरों में दिखी। यह 10 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। Samsung Electronics का शेयर 7.5 फीसदी क्रैश कर गया। बताया जाता है कि सर्किट ब्रेकर हटने के बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने पर सैमसंग के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इससे यह शेयर 9 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया।

विदेशी निवेशकों ने बेचे 2.6 अरब डॉलर के शेयर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने दोपहर तक 2.6 अरब डॉलर के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। हालांकि, रिटेल ट्रेडर्स ने इस गिरावट में अपनी पोजीशन बढ़ाई। इस महीने कोस्पी 9,000 का लेवल पार कर गया था। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में डील की खबर थी। पहले पार कोस्पी इस लेवल पर पहुंचा था।

कई शेयरों की कीमतें एक साल में तीन गुनी 

दक्षिण कोरिया के बाजार में लगातार जबर्दस्त तेजी से रिस्क बढ़ गया था। कई शेयरों की कीमतें एक साल में तीन गुनी हो गई हैं। SK Hynix का शेयर इस साल 350 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसने प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग के शेयरों को पीछे छोड़ दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चिप बनाने वाली कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी से शेयर की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। इसमें लेवरेज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का बड़ा हाथ है।

इन शेयरों में भी बड़ी गिरावट 

स्टॉक मार्केट में गिरने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा थी। LG Energy Solution का शेयर 2.98 फीसदी नीचे चल रहा था। Hyundai Motor का शेयर 8.78 क्रैश कर गया था। Kia Corp के शेयरों में 6.47 फीसदी गिरावट आई।

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इन वजहों से बाजार में गिरावट

एनालिस्ट्स का कहना है कि दक्षिण कोरिया में आज आई गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग है। दूसरा, इस साल आई बड़ी तेजी की वजह से कई शेयरों की वैल्यूएशंस काफी बढ़ गई थीं। बाजार में एआई शेयरों के दम पर बाजार में आई तेजी के टिकने को लेकर संदेह जताया जा रहा था।

Stock Market Recovery: दो सेक्टर की गिरावट को थाम लिया अकेले, Sensex ने निचले स्तर से की वापसी, Nifty भी ग्रीन

Stock Market Recovery: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज शुरुआती कारोबार में घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल खुले। हालांकि शुरुआती गिरावट से उबरते हुए ये ग्रीन हो गए। इंट्रा-डे के निचले स्तर से सेंसेक्स प्वाइंट्स रिकवर हुआ तो निफ्टी भी एक बार फिर 24100 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मार्केट में रौनक बनी हुई है और स्मॉलकैप स्पेस में तो अधिक ही। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से कम बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:09 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 68.59 प्वाइंट्स यानी 0.09% की मामूली बढ़त के साथ 77,162.66 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 22.95 प्वाइंट्स यानी 0.10% की तेजी के साथ 24,125.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 215.41 प्वाइंट्स टूटकर 76,878.66 तक आ गया था जिससे 313.97 प्वाइंट्स रिकवर होकर यह 77,192.6 तक पहुंचा तो निफ्टी 50 भी 62.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,040.05 तक आया था जिससे यह 95.45 प्वाइंट्स चढ़कर 24,135.50 तक पहुंच गया।

Stock Market Recovery: ये है वजह

कच्चे तेल में फिसलन

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे कच्चा तेल का भाव आज भी नरम पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में ब्रेंट क्रूड एक समय उछलकर प्रति बैरल $120 के करीब पहुंच गया था लेकिन अब यह टूटकर $78 के भी नीचे आ चुका है।

Pharma Sector ने मार्केट को खींच लिया ऊपर

निफ्टी आईटी में डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की गिरावट को फार्मा सेक्टर ने अकेले संभाल लिया जिसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक मजबूत हुआ है। निफ्टी पीएसयू बैंक में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है लेकिन निफ्टी रियल्टी में 1% से अधिक उछाल है।

वैल्यू बाइंग

मार्केट में आज शुरुआती गिरावट का फायदा उठाते हुए निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स की नरमी से मार्केट को सपोर्ट मिला। India VIX फिलहाल 2.49% की गिरावट के साथ 12.52 पर है। इसके अधिक होने का मतलब आने वाले दिनों में वोलैटिलिटी के हाई होने और कम होने का मतलब वोलैटिलिटी के कम होने की संभावना है।

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Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे ट्रेड करने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना, 23800 पर अहम सपोर्ट

Trade setup for today : एक दिन की गिरावट के बाद 22 जून को निफ्टी 50 में रिकवरी आई और यह लगभग 0.4 प्रतिशत बढ़त लेकर बंद हुआ। इंडेक्स अपने शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा और ये सभी ऊपर की ओर बढ़ते रहे,जबकि मोमेंटम इंडिकेटर्स ने साइडवेज-टू-पॉजिटिव रुझान का संकेत दिया। बाजार जानकारों का कहना है कि मार्केट ट्रेंड के पॉजिटिव बने रहने की उम्मीद है। निफ्टी के लिए 24,150–24,200 का जोन और उसके बाद 24,300–24,500 की रेंज टारगेट हो सकती है। हालांकि,24,000 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। उसके बाद 23,800 पर अगला अहम सपोर्ट हो सकता है। जब तक इंडेक्स 24,200 के नीचे ट्रेड करेगा,तब तक कंसोलिडेशन की संभावना है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,078, 24,056 और 24,020

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,151, 24,173 और 24,210

निफ्टी 50 ने डेली टाइमफ्रेम पर’डोजि कैंडलस्टिक पैटर्न’बनाया,जो बुल्स और बेयर्स के बीच असमंजस की स्थिति को दिखाता है। इंडेक्स अप्रैल की रैली के 23.6 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के ऊपर बंद हुआ और अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। साथ ही 10-दिन का EMA 50-दिन के EMA के ऊपर चला गया। RSI बढ़कर 59.65 हो गया और इसने बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा। MACD जीरो लाइन और सिग्नल लाइन,दोनों के काफी ऊपर बना रहा। हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार हल्के पड़ते रहे। ये सभी इंडिकेटर साइडवेज से पॉजिटिव रुझान का संकेत देते हैं,जबकि ओवरऑल ट्रेंड बुलिश बना हुआ है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,999, 58,067 और 58,177

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,778, 57,710 और 57,599

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी ने भी डेली चार्ट पर’डोजि'(Doji)जैसा कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया और सोमवार को इसमें 0.4 प्रतिशत की बढ़त दिखी। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा,जिसमें 20-दिन का EMA, 100-दिन के EMA को पार करने की स्थिति में है। यह 15 जून को बने बुलिश गैप से भी काफी ऊपर बना रहा। RSI बढ़कर 69.14 पर पहुंच गया और इसने बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा। MACD भी सिग्नल लाइन और जीरो लाइन,दोनों के ऊपर बना रहा। जबकि हरे हिस्टोग्राम बार एक और सेशन के लिए कमजोर होते रहे। ये सभी इंडिकेटर बताते हैं कि मुख्य ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है,हालांकि ऊपरी लेवल पर कुछ कंसोलिडेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

22 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर रहे और उन्होंने 635 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस दौरान 1,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX कल 0.98% गिरकर 12.84 पर आ गया और 12-13 के निचले दायरे के पास बना रहा। इससे तेजड़ियों को राहत मिली। अगर वोलैटिलिटी इंडेक्स में और गिरावट आती है,तो इससे तेजी के माहौल को और सहारा मिल सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 22 जून को बढ़कर 0.97 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.91 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

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Market Prediction Today: गिफ्ट निफ्टी दे रहा भारतीय बाजार के फ्लैट खुलने के संकेत, US-ईरान वार्ता और फेड रेट आउटलुक पर इन्वेस्टर्स की नजर

Market Prediction Today: US-ईरान शांति समझौते को लेकर सावधानी के बीच, ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों को देखते हुए, भारतीय स्टॉक मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी 50, मंगलवार को फ्लैट खुलने की संभावना है। GIFT Nifty के ट्रेंड भी भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के लिए धीमी शुरुआत का संकेत दे रहे है। गिफ्ट निफ्टी 24,130 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 6 पॉइंट्स का प्रीमियम है।

सोमवार को, US-ईरान शांति वार्ता में प्रोग्रेस की खबरों के बीच भारतीय स्टॉक मार्केट बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसमें बेंचमार्क निफ्टी 50 24,100 के लेवल से ऊपर बंद हुआ।सेंसेक्स 291.17 पॉइंट्स या 0.38% बढ़कर 77,094.07 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 89.80 पॉइंट्स या 0.37% बढ़कर 24,102.90 पर बंद हुआ।

ओपनिंग बेल से पहले ग्लोबल संकेत मिले-जुले रहे

वॉल स्ट्रीट रात भर नीचे बंद हुआ, जिसमें टेक्नोलॉजी स्टॉक्स दबाव में रहे। नैस्डैक कंपोजिट 1.32 परसेंट गिरा और S&P 500 0.37 परसेंट गिरा, जिसकी वजह अल्फाबेट समेत बड़े टेक्नोलॉजी नामों में गिरावट रही। हालांकि, हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल स्टॉक्स में बढ़त से डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.29 परसेंट बढ़ा।

मंगलवार को एशियाई मार्केट भी धीमे रहे। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.5 परसेंट गिरा, जबकि जापान का निक्केई 0.6 परसेंट फिसला। साउथ कोरिया का कोस्पी लगभग 2 परसेंट गिरा, हालांकि ताइवानी इक्विटीज़ ने नई ऊंचाई को छुआ। इस साल के आखिर में फेडरल रिजर्व के और रेट बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों के बीच इन्वेस्टर सावधान रहे।

इस बीच, पिछले सेशन में तेज गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड लगभग $78 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि US क्रूड $74 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि इन्वेस्टर US-ईरान बातचीत में प्रोग्रेस का अंदाज़ा लगा रहे थे और होर्मुज स्ट्रेट से तेल के फ्लो की बहाली पर ज़्यादा क्लैरिटी का इंतज़ार कर रहे थे।

यह उछाल सोमवार को तेल की कीमतों में 3 परसेंट से ज़्यादा की गिरावट के बाद आया है, जब अमेरिका ने ईरान को 60 दिन के बैन से छूट दी और अधिकारियों ने डिप्लोमैटिक बातचीत में प्रोग्रेस पर ज़ोर दिया। इस बढ़ोतरी के बावजूद, क्रूड तेल लड़ाई के पीक के दौरान देखे गए लेवल से काफी नीचे है, जो भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी के लिए एक सपोर्टिव बैकग्राउंड देता है।

क्या कहते है बाजार एक्सपर्ट

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, डिप्लोमैटिक डेवलपमेंट सेंटीमेंट को सपोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय बाज़ारों में सावधानी से पॉज़िटिव रुझान के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है क्योंकि US-ईरान बातचीत में डिप्लोमैटिक प्रोग्रेस से इन्वेस्टर सेंटिमेंट को सपोर्ट मिल रहा है। US वाइस प्रेसिडेंट के इस कमेंट से कि प्रस्तावित एग्रीमेंट को फ़ाइनल करने के लिए ‘अच्छी नींव’ है, इस उम्मीद को और मज़बूत किया है कि बातचीत कंस्ट्रक्टिव रास्ते पर है, जिससे मिडिल ईस्ट में एक स्थायी समाधान की उम्मीदें बढ़ रही हैं।”

जियोपॉलिटिक्स के अलावा, इन्वेस्टर ट्रेड के मोर्चे पर भी डेवलपमेंट पर नज़र रखेंगे। US ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव जैमीसन ग्रीर के इस हफ़्ते कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के साथ बातचीत के लिए भारत आने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों देश बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में काम कर रहे हैं। टैरिफ़ में छूट या बड़े ट्रेड सहयोग पर कोई भी प्रोग्रेस मार्केट सेंटिमेंट को और सपोर्ट कर सकती है।

एफआईआई फ्लो मिला-जुला

इंस्टीट्यूशनल फ़्लो मिले-जुले रहे। 22 जून को फ़ॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) नेट सेलर थे, जिन्होंने Rs 635 करोड़ के इक्विटी बेचे। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (DII) ने Rs 1,000 करोड़ के शेयर खरीदकर सपोर्ट देना जारी रखा।

टेक्निकल मोर्चे पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी ज़रूरी सपोर्ट लेवल से ऊपर एक कंस्ट्रक्टिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है। अभी की रुकावट 24,200 का निशान है, और इस लेवल से ऊपर लगातार ब्रेकआउट 24,400 की ओर बढ़ने का रास्ता बना सकता है। नीचे की तरफ, 24,000-23,900 ज़ोन एक ज़रूरी सपोर्ट एरिया बना हुआ है। इस रेंज से नीचे ब्रेक होने पर नई प्रॉफ़िट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 23,800 की ओर जा सकता है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : BSE सेंसेक्स और निफ्टी 50 जैसे बेंचमार्क इंडेक्स 23 जून को बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी में भी बढ़त देखने को मिल रही है। यह शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ 24,145.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

शुक्रवार को हुई बिकवाली के बाद,22 जून को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और US-ईरान शांति वार्ता में प्रगति को लेकर बनी उम्मीदों के चलते निफ्टी ने फिर से तेजी पकड़ी और 24,100 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 291.17 अंक या 0.38 प्रतिशत बढ़कर 77,094.07 पर और निफ्टी 89.80 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 24,102.90 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.50 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 32 अंक यानी 0.13 फीसदी की बढ़त के साथ 24,132 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 0.87 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.24 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 0.56 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 0.19 फीसदी की गिरावट है। कोस्पी 4.14 फीसदी नीचे दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.10 फीसदी की हल्की बढ़त नजर आ रही है।

Asian markets today: एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी 1.5% टूटा, जापान बॉन्ड यील्ड में बढ़त

अमेरिकी बाजार

सोमवार को S&P 500 और नैस्डैक गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह अल्फाबेट जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट थी। निवेशक अमेरिका-ईरान बातचीत से जुड़ी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। वहीं, हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में तेजी की वजह से डॉओ (Dow)बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 148.01 अंक या 0.29% बढ़कर 51,712.71 पर बंद हुआ। S&P 500 में 27.79 अंक या 0.37 फीसदी की गिरावट आई और यह 7,472.79 पर बंद हुआ,जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 351.33 अंक या 1.32% गिरकर 26,166.60 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

छह करेंसी की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला US डॉलर इंडेक्स मजबूत दिख रहा है। यह पिछले साल मई के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर के करीब आ गया। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.02 के स्तर पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ और ये क्रमशः 4.50% और 4.22% पर दिख रहे हैं।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसीज कमजोर हुईं हैं। जिससे पूरे क्षेत्र में जोखिम को लेकर सावधानी का माहौल दिखा। फिलीपीन पेसो का प्रदर्शन सबसे खराब दिख रहा है,जिसमें 0.315 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया में 0.219 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चीनी रेनमिनबी भी 0.117 प्रतिशत कमजोर हुई है,जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन और थाई बहत में क्रमशः 0.075 प्रतिशत और 0.055 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उधर जापानी येन में 0.006 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि ताइवान डॉलर और सिंगापुर डॉलर में क्रमशः 0.019 प्रतिशत और 0.023 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके विपरीत,मलेशियाई रिंगित ने 0.305 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।

कच्चा तेल सपाट

पिछले सेशन में भारी गिरावट के बाद मंगलवार को तेल की कीमतों में सुधार हुआ। इसकी वजह US-Iran शांति वार्ता को लेकर बनी थोड़ी उम्मीद थी,जबकि निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू होने में प्रगति के साफ संकेतों का इंतजार करते दिखे। WTI क्रूड में 0.03 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 0.23 फीसदी की गिरावट आई है।

सोना सपाट

मंगलवार को सोने की कीमतें स्थिर दिख रहीं हैं, क्योंकि निवेशकों ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर नजरें बनाए रखी हैं। जबकि, दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों का असर इस मेटल पर पड़ा। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.18 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं, चांदी 0.74 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

22 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर रहे और उन्होंने 635 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs)ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस दौरान 1,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, जानें क्या है गिरावट की वजह

INR vs USD: सोमवार, 22 जून को भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 94.36 पर खुला, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी और US-ईरान शांति बातचीत में प्रगति के संकेतों से घरेलू करेंसी के प्रति सेंटिमेंट को सपोर्ट मिलता रहा।

पिछले हफ्ते रुपया 0.8% बढ़कर 94.32 पर बंद हुआ था, जो लगभग तीन महीनों में इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त थी। करेंसी ने कई महीनों के हाई 94.18 को भी छुआ और अपनी जीत का सिलसिला लगातार छह सेशन तक जारी रखा, जो पिछले महीने 97 के करीब अपने रिकॉर्ड लो से तेजी से उबरा।

हाल की रिकवरी ने मार्केट सेंटिमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है, जिससे यह चिंता कम हुई है कि रुपया लंबे समय तक डेप्रिसिएशन ट्रेंड में फंसा हुआ है।

करेंसी ट्रेडर्स ने कहा कि तेल की कीमतों में नरमी और वाशिंगटन और तेहरान के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत में लगातार प्रगति से और बढ़त हो सकती है।

रुपये को सपोर्ट करते हुए, अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.7% गिरकर $79.24 प्रति बैरल पर आ गया, जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि स्विट्जरलैंड में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ बातचीत से अच्छी प्रगति हुई है। यह बातचीत ईरानी अधिकारियों और US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के बीच मीटिंग के बाद हुई।

ईरान के कमेंट्स से इन्वेस्टर्स की यह चिंता शांत हुई कि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के नए मिलिट्री एक्शन की चेतावनी देने और तेहरान द्वारा एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देने के बाद, नाजुक शांति प्रक्रिया बिगड़ सकती है।

हाल के हफ्तों में तेल मार्केट बहुत ज़्यादा वोलाटाइल रहे हैं, ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए $82 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया था, इस डर से कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में फिर से रुकावट आएगी। हालांकि, जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से कीमतों को कम करने में मदद मिली है, जिससे भारत जैसी बड़ी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को राहत मिली है।

रुपया सपोर्टिव फ्लो और ग्लोबल रिस्क के बीच फंसा

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट के मुताबिक, रुपया फिलहाल दो अलग-अलग ताकतों से प्रभावित हो रहा है। एक तरफ, लगातार कर्ज का आना और फॉरेन करेंसी डिपॉजिट घरेलू करेंसी को सपोर्ट कर रहे हैं। दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में बनी अनिश्चितता और एक मजबूत US डॉलर लगातार मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि रुपया जल्द ही एक रेंज में रहेगा, और मार्केट की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सपोर्टिव कैपिटल फ्लो बाहरी जियोपॉलिटिकल और डॉलर से जुड़े दबावों से ज़्यादा हो सकता है या नहीं।

एनालिस्ट्स ने कहा, “रुपया असल में बेहतर होते घरेलू फंडामेंटल्स और बाहरी अनिश्चितताओं के बीच खींचतान में फंसा हुआ है। जब तक किसी एक को निर्णायक फायदा नहीं मिल जाता, करेंसी की चाल नपी-तुली रहने की संभावना है।”

CR फॉरेक्स एडवाइजर्स के MD अमित पाबारी के अनुसार, टेक्निकली, 94.00–94.20 ज़ोन एक मुख्य सपोर्ट एरिया के तौर पर काम करता रहेगा, जबकि 94.80–95.00 तुरंत रेजिस्टेंस बैंड बना रहेगा। डेट इनफ्लो में सुधार के संकेत और तेल की कीमतें काफी हद तक कंट्रोल में रहने के साथ, रुपये की बढ़त के पक्ष में रुझान बना हुआ है, जिसमें USD/INR के 94.00–93.80 ज़ोन की ओर बढ़ने की संभावना है।

GIFT Nifty सेंसेक्स-निफ्टी के लिए अच्छी शुरुआत के दे रहा संकेत, इन खास इवेंट्स पर बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Rally: 5 सेकंड में ही बरसे ₹3 लाख करोड़, IT Sector के जोश पर 400 प्वाइंट्स चढ़ा Sensex

Share Market Rally: लगातार पांच कारोबारी दिनों की बढ़त के बाद एक कारोबारी दिन पहले जो गिरावट आई थी, उससे उबरते हुए आज घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) ने बढ़त के साथ शुरुआत की। अधिकतर एशियाई बाजारों से मजबूत संकेतों के बीच सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 400 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24100 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी खरीदारी का शानदार माहौल है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी आधे फीसदी की बढ़त है।

सेक्टरवाइज सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन निफ्टी आईटी में कुछ अधिक ही जोश दिख रहा है और यह 1% से अधिक मजबूत है। बाकी सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% से कम ही बढ़त है। खरीदारी के इस माहौल में ओवरऑल BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में मार्केट खुलते ही ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:16 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 300.07 प्वाइंट्स यानी 0.39% की बढ़त के साथ 77,102.97 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 86.95 प्वाइंट्स यानी 1.45% के उछाल के साथ 24,100.05 पर है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 420.88 प्वाइंट्स उछलकर 77,223.78 और निफ्टी 120.60 प्वाइंट्स चढ़कर 24,133.70 तक पहुंच गया था।

निवेशकों की दौलत में ₹3.10 लाख करोड़ का उछाल

एक कारोबारी दिन पहले यानी 19 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,76,96,162.72 करोड़ था। आज यानी 22 जून 2026 को मार्केट खुलते ही यह ₹4,80,07,068.95 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी ₹3,10,906.23 करोड़ बढ़ गई है।

Sensex के 22 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें शुरुआती कारोबार में 22 शेयर ग्रीन जोन में हैं। सबसे अधिक तेजी फिलहाल टेक महिंद्रा, इंफोसिस और एचसीएलटेक में है। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट फिलहाल पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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119 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर फिलहाल 3043 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 1979 शेयर मजबूत दिख रहे हैं तो 840 में गिरावट का रुझान है और 224 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। इसके अलावा 119 शेयर एक साल के हाई और 18 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 103 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 63 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : 23800 के ऊपर टिके रहने पर निफ्टी में 24500 का लेवल मुमकिन, 23800 के नीचे जाने पर बढ़ सकती है गिरावट

Trade setup for today : 19 जून को निफ्टी में 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। इसने MACD में बुलिश क्रॉसओवर भी बनाए रखा,हालांकि RSI में थोड़ी नरमी आई। वहीं,शुक्रवार को बढ़त के बावजूद इंडिया VIX निचले स्तर पर ही बना रहा। बाजार जानकारों के मुताबिक,कंसोलिडेशन के दौर में निफ्टी को 23,800 के सपोर्ट जोन (10-दिन और 50-दिन के EMA) को बनाए रखने की जरूरत है। अगर यह लेवल टूटता है,तो इंडेक्स के 23,700–23,600 तक गिरने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि,अगर इंडेक्स 23,800 के ऊपर बना रहता है,तो यह 24,200–24,300 और उसके बाद 24,500 की ओर बढ़ सकता है,जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,932, 23,898 और 23,842

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,043, 24,077 और 24,133

गैप-डाउन ओपनिंग के बाद,डेली चार्ट पर निफ्टी 50 ने निचले शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली बुलिश कैंडल बनाई। इससे पता चलता है कि ऊंचे स्तरों से थोड़ी गिरावट आई है,लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी में भी दिलचस्पी दिखी है। हालांकि,अगले सेशन में इंडेक्स 100-दिन के EMA के ऊपर नहीं टिक पाया,लेकिन यह अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा और ये दोनों ही ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। 10-दिन का EMA भी 50-दिन के EMA के ऊपर जाने की कगार पर है। RSI में थोड़ी नरमी आई लेकिन यह अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना रहा,जबकि MACD ज़ीरो लाइन और सिग्नल लाइन दोनों के ऊपर रहा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार में मोमेंटम में कुछ कमी दिखी। ये सभी बातें बताती हैं कि थोड़े समय के कंसोलिडेशन के बावजूद ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,782, 57,862 और 57,992

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,522, 57,441 और 57,311

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी की लगातार छह दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया और प्रॉफ़िट बुकिंग के कारण इसमें 0.5% की गिरावट आई,लेकिन यह पिछले दिन के निचले स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहा। डेली टाइमफ़्रेम पर बैंकिंग इंडेक्स ने छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें नीचे की तरफ़ एक छोटी शैडो थी। यह हल्की गिरावट (करेक्शन)का संकेत है,जबकि कुल मिलाकर ट्रेंड अभी भी बुल्स के पक्ष में है। इंडेक्स अप्रैल के स्विंग हाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक आए करेक्शन के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल से ऊपर बना रहा। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से भी ऊपर रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। RSI गिरकर 67.81 पर आ गया, लेकिन अपनी सिग्नल लाइन से काफी ऊपर बना रहा,जबकि MACD ने अपना बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार थोड़े हल्के पड़ गए। ये सभी बातें बताती हैं कि कुछ प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल बुलिश ट्रेंड बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

लगातार 23 सेशन तक नेट बायर बने रहने के बाद,19 जून को घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने ₹1,159 करोड़ के शेयर बेचे। इसके उलट,विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट बायर बनकर उभरे और उन्होंने ₹4,859 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे विदेशी निवेशकों की फिर से दिलचस्पी का संकेत मिलता है।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 2.35 प्रतिशत बढ़कर 12.97 पर पहुंचने के बावजूद निचले स्तर पर बना रहा। यह इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। मार्केट में तेज़ी के नज़रिए को बनाए रखने के लिए इसके 14 के स्तर से नीचे बने रहना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 19 जून को पिछले सेशन के 1.12 से गिरकर 0.91 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

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