₹250 वाला काम अब सिर्फ ₹13 में… विदेशी बाजारों में अब तहलका मचाएंगे भारतीय आम, पाकिस्तान को लगेगा बड़ा झटका!

Mango Export: कुछ दिनों पहले ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने जिसमें अमेरिका के बाजारों में भारतीय आमों के लिए खूब डिमांड का जिक्र था। हालांकि, भारत में ₹50-₹100 किलो मिलने वाले आम US में करीब ₹1900 के चार पीस बिक रहे थे। इतने मंहगे प्राइस को लेकर खूब बहस हो रही थी। इन्हीं सब के बीच भारतीय आम के शौकीनों के साथ-साथ विदेशी बाजारों के लिए भी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत से विदेशों में आम भेजने का खर्च, जो अब तक ₹250 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता था, वह अब घटकर महज ₹13 से ₹20 प्रति किलोग्राम रह गया है।

भारत ने समुद्र के रास्ते सिंगापुर को आमों की एक बड़ी खेप सफलतापूर्वक भेजकर लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी बदलाव से न सिर्फ भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा, बल्कि विदेशी बाजारों में पाकिस्तान और अन्य देशों के आमों के मुकाबले भारतीय आम बेहद प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।

अब तक क्यों महंगा था आम का एक्सपोर्ट?

अब तक भारत से प्रीमियम क्वालिटी के आमों जैसे- हापुस, दशहरी, लंगड़ा, चौंसा का निर्यात मुख्य रूप से हवाई जहाज के जरिए होता था। हवाई सफर के कारण केवल ट्रांसपोर्टेशन की लागत ही ₹150 से ₹250 प्रति किलोग्राम तक आ जाती थी। इसके चलते विदेशों में भारतीय आम काफी महंगे बिकते थे और आम निवेशक या निर्यातक ज्यादा मात्रा में ट्रेडिंग नहीं कर पाते थे।

लेकिन, समुद्र के रास्ते किए गए इस सफल ट्रायल ने गेम ही बदल दिया है। अब यह खर्च सीधे ₹13 से ₹20 प्रति किलो पर सिमट गया है, जो कि पहले के मुकाबले लगभग 90% से भी ज्यादा सस्ता है।

कैसे मुमकिन हुआ यह कारनामा?

समुद्र के रास्ते आम भेजने में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कई दिनों के सफर में आम सड़ या गल न जाएं। इस चुनौती को पार करने के लिए लखनऊ स्थित ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर ने ‘एपीडा’ (APEDA) के साथ मिलकर एक खास वैज्ञानिक ‘सी-शिपमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार किया।

इस स्पेशल प्रयोग के तहत आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आमों को एक खास रीफर कंटेनर (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर) में रखकर समुद्र के रास्ते सिंगापुर भेजा गया। वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों का इस्तेमाल किया:

FUSICONT बायो-कंट्रोल तकनीक: वैज्ञानिकों ने बागों में फल लगने से लेकर कटाई तक अपनी खास तकनीक से निगरानी की ताकि आम पूरी तरह से केमिकल और पेस्टिसाइड रेजिड्यू-फ्री रहें।

हॉट वाटर और CISH-Met Wash ट्रीटमेंट: कटाई के बाद आमों को CISH द्वारा विकसित खास वॉश तकनीक और हॉट वाटर ट्रीटमेंट से गुजारा गया। इससे आमों की ‘शेल्फ लाइफ’ यानी खराब न होने की अवधि बढ़ गई और उनमें कोई बीमारी नहीं लगी।

30 दिनों तक नहीं खराब होंगे आम: इस तकनीक की मदद से समुद्र के ठंडे तापमान में भी आमों की लाइफ को 30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। सिंगापुर पहुंचने में इस कंसाइनमेंट को 16 दिन लगे और जब वहां कंटेनर खुला, तो आम बिल्कुल ताजा और बेहतरीन कंडीशन में मिले।

क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह सफलता?

नए और बड़े बाजारों पर कब्जा: अब तक भारतीय आम सिर्फ कुछ प्रीमियम विदेशी स्टोर्स तक ही सीमित थे। लेकिन अब लागत कम होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स सिंगापुर, मलेशिया, हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में अपनी धाक जमा सकते हैं, जहां आम का आयात करीब $4-5 मिलियन का है। इसके अलावा, भारत संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े मार्केट को भी टारगेट कर सकता है, जिसका बाजार $20-25 मिलियन का है।

किसानों की बढ़ेगी आमदनी: लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इतनी बड़ी कटौती का सीधा फायदा आम उत्पादक किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिलेगा। वे अब बिना किसी नुकसान के डर के भारी मात्रा में आम विदेशों में मुनाफे के साथ बेच सकेंगे।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

Kangana Ranaut: ‘माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि…’, पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस पर कंगना रनौत ने कही ये बड़ी बात

Kangana Ranaut: पुणे के रहने वाले 26 साल के केतन अग्रवाल की मौत के मामले ने एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है और सोशल मीडिया पर इस पर काफी चर्चा हो रही है। शुरुआत में इसे एक दुखद हादसा माना जा रहा था क्योंकि खबर थी कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान वे गिर गए थे, लेकिन अब इस मामले की जांच कथित हत्या के तौर पर की जा रही है।

खबरों के मुताबिक, केतन की मंगेतर सिया गोयल और उनके कथित साथी चेतन चौधरी पर केतन की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। आगे की जांच के लिए दोनों अभी पुलिस की हिरासत में हैं। जैसे-जैसे इस मामले से जुड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं, एक्ट्रेस और नेता कंगना रनौत ने इस चौंकाने वाली घटना पर प्रतिक्रिया दी है।

कुछ समय पहले, कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बच्चों के कामों के लिए माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और किसी व्यक्ति के सोशल सर्कल के बढ़ते असर पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ये चीज़ें लोगों की सोच, पसंद और व्यवहार को आकार देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

सिया गोयल के पिता का बयान शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, “आजकल सिर्फ़ परिवारों, घरों या माता-पिता को देखकर आप बच्चों के संस्कारों के बारे में पक्का नहीं कह सकते; ज़्यादा ज़रूरी यह है कि उन्हें कौन ‘प्रोग्राम’ कर रहा है? वे किसके साथ समय बिताते हैं, और सोशल मीडिया, AI या असल ज़िंदगी में उन पर किन चीज़ों का असर है। माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि लोग एक साथ कई तरह की ज़िंदगी जी रहे हैं।

वे बहुत सोच-समझकर अपनी एक अच्छी छवि बनाते हैं क्योंकि असल बात यह है कि वे कैसे दिखते हैं, न कि वे कैसा महसूस करते हैं या असल में कैसे हैं। इसलिए, बच्चों के कामों के लिए परिवारों को गलत नहीं ठहराया जा सकता।”

इस बीच, सिया गोयल के माता-पिता ने हाल ही में चल रही जांच पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनकी मां ने बताया कि केतन के साथ सिया की शादी तय करने से पहले उन्होंने सिया से पूछा था। उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, “सिया की शादी तय करने से पहले हमने उससे बार-बार, कम से कम दस बार पूछा था। हमने उससे कहा, ‘सिया, हम तुम्हारी शादी की योजना बना रहे हैं। क्या तुम्हें केतन पसंद है? क्या तुम इस शादी के लिए आगे बढ़ना चाहती हो?’ हर बार उसने हमसे कहा, ‘हां, मुझे केतन पसंद है’।” हालांकि, उनके माता-पिता ने यह भी कहा कि अगर सिया दोषी पाई जाती है, तो अदालत को न्याय में देरी नहीं करनी चाहिए। उसे वही सज़ा मिलनी चाहिए।

LPG Rule Changes: होटल-रेस्तरां और फैक्ट्रियों को बड़ी राहत, कमर्शियल एलपीजी पर लगी सभी पाबंदियां हटीं, जानें- नए नियम

LPG Rule Changes: पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बनी सहमति के बाद केंद्र सरकार ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी (Commercial LPG) की आपूर्ति पर लगाई गई सभी क्षेत्रीय पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को संकट से पहले जैसे हालत पर बहाल कर दिया गया है।

सरकार ने बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल कर दी है। अब इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ताओं को संकट से पहले खपत के 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे होटल, रेस्तरां और अन्य उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।

ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद मिली राहत

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से सुचारु रूप से खुलने का रास्ता साफ हुआ है। यह समुद्री रूट्स भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।

सरकार ने बताया कि हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी और आयातित एलपीजी कार्गो की बेहतर उपलब्धता के कारण आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है। इसी को देखते हुए कमर्शियल एलपीजी पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया है।

बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी बहाल

सरकार ने बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल कर दी है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान बल्क एलपीजी की सप्लाई रोक दी गई थी। लेकिन अब इसे संकट-पूर्व खपत के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे होटल, रेस्तरां, कैटरिंग व्यवसाय, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी, जो अपने डेली कामों के लिए एलपीजी पर निर्भर रहते हैं।

सरकार ने बल्क LPG की सप्लाई को संकट के चरम पर रोक दिया था। अब बल्क LPG की सप्लाई संकट से पहले के खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक करने की अनुमति होगी। इससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी। ईरान युद्ध के दौरान केंद्र ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए निर्देश दिया था कि C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम का इस्तेमाल केवल LPG उत्पादन के लिए किया जाए।

क्यों कड़े किए गए थे नियम?

इस कदम से इन फीडस्टॉक को पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों से हटाकर घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी। सप्लाई की स्थिति में सुधार के साथ, सरकार ने अब LPG पूल के लिए C3-C4 स्ट्रीम के डायवर्जन को कम करने और पेट्रोकेमिकल तथा अन्य महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है।

मंत्रालय के अनुसार, नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम का बढ़ा हुआ आवंटन घरेलू LPG उपलब्धता को प्रभावित किए बिना लागू किया जाएगा। घरेलू LPG उत्पादन को कम से कम 40 हजार मीट्रिक टन (TMT) प्रति दिन बनाए रखा जाएगा। केंद्र ने सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) को निर्देश दिया है कि वह बढ़ी हुई C3-C4 स्ट्रीम का संगठन-वार आवंटन जारी करे और मंत्रालय को समय-समय पर रिपोर्ट सौंपे।

युद्ध के कारण लगी थी पाबंदियां

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान सरकार ने विशेष कदम उठाए थे। उस समय सी3-सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स का उपयोग केवल एलपीजी उत्पादन के लिए करने का निर्देश दिया गया था। इसके चलते पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मिलने वाली कच्चे माल की आपूर्ति सीमित कर दी गई थी। ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

अब हालात में सुधार के बाद सरकार ने सी3-सी4 स्ट्रीम्स का बड़ा हिस्सा फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को आवंटित करने का फैसला किया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल मिलेगा और उत्पादन गतिविधियों को गति मिलेगी। जबकि घरेलू एलपीजी आपूर्ति पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि ग्लोबल सप्लाई में रुकावट शुरू होने के बाद से ही घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट LPG सप्लाई सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

मंत्रालय ने कहा, “इस मकसद को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल पैक्ड LPG की सप्लाई पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। मुश्किल ग्लोबल सप्लाई चेन के बावजूद, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की समय पर की गई पॉलिसी से जुड़ी कोशिशों और तालमेल से सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली।”

पेट्रोलियम मंत्रालय का फ्यूचर प्लान

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में स्वदेशी एलपीजी उत्पादन न्यूनतम 40 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन (TMT) के लेवल पर बनाए रखा जाएगा। साथ ही सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) को विभिन्न संगठनों के लिए सी3-सी4 स्ट्रीम्स का आवंटन तय करने और समय-समय पर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान भी घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध एलपीजी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सरकार के समन्वित प्रयासों के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देश में एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी रही।

सरकार ने थपथपाई पीठ

सरकार का मानना है कि ताजा फैसला ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक जरूरतों और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उद्योगों को राहत मिलेगी। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और देश में स्वच्छ एवं सुरक्षित ईंधन की उपलब्धता को और मजबूत किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने आगे कहा कि यह नया फ़ैसला सरकार के उस संतुलित नज़रिए को दिखाता है, जिसमें देश की एनर्जी सिक्योरिटी की सुरक्षा के साथ-साथ उद्योगों और व्यवसायों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और पूरे देश में साफ और सुरक्षित ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना शामिल है।

पाबंदियों में ढील से कई तरह के कमर्शियल प्रतिष्ठानों को फीयदा होने की उम्मीद है, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और दूसरे ऐसे औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं जो अपने कामकाज के लिए काफ़ी हद तक LPG पर निर्भर हैं।

स्टोरी की मुख्य बातें (All You Need To Know)

बल्क LPG सप्लाई भी बहाल: संकट के समय सरकार ने बल्क एलपीजी (Bulk LPG) की सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। अब इसे आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। अब उद्योग अपनी जरूरत का 50% तक बल्क एलपीजी ले सकेंगे।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर को फायदा: संकट के दौरान सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू करके C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स का पूरा इस्तेमाल सिर्फ घरेलू एलपीजी बनाने में करने का निर्देश दिया था. अब हालात सुधरने पर इस डायवर्जन को कम कर दिया गया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य संबंधित उद्योगों को फिर से पर्याप्त कच्चा माल मिल सकेगा।

घरेलू एलपीजी पर आंच नहीं: सरकार ने साफ किया है कि उद्योगों को दी जाने वाली इस ढील से घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। देश में घरेलू एलपीजी का उत्पादन न्यूनतम 40 हजार मीट्रिक टन (TMT) प्रतिदिन पर बरकरार रखा जाएगा।

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

सरकार के इस फैसले से उन सभी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टरों को सीधा फायदा पहुंचेगा जो एलपीजी पर निर्भर हैं:-

होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स

छोटे और बड़े औद्योगिक उपभोक्ता

Passport fees hiked: जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नए रेट और नियम

Passport fees hiked: विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। भारत सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। संशोधित नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने और री-इश्यू कराने के लिए अधिक शुल्क देना होगा। 36 पेज के नए या री-इश्यू पासपोर्ट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹2,500 और तत्काल कैटेगरी में ₹5,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, 60 पेज के पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क ₹3,500 और तत्काल शुल्क 6,000 रुपये होगा।

रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी

खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है। 36 पेज के पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹5,000 और तत्काल में ₹7,500 देने होंगे। इसके अलावा पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाणपत्रों के लिए ₹750 फीस तय किया गया है। नए शुल्क 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होंगे।

नई दरों के तहत, एडल्ट कैटेगरी में अप्लाई करने वाले एडल्ट और 15-18 साल के नाबालिगों को नॉर्मल प्रोसेस के तहत नए 36-पेज के पासपोर्ट या री-इश्यू के लिए 2,500 रुपये देने होंगे। तत्काल कैटेगरी के तहत यह फीस बढ़कर 5,000 रुपये हो जाएगी।

60-पेज की पासपोर्ट

60-पेज की पासपोर्ट बुकलेट के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 3,500 रुपये और तत्काल प्रोसेसिंग के तहत 6,000 रुपये की फीस लगेगी। सबसे अधिक बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट को बदलने पर की गई है। 36-पेज का रिप्लेसमेंट पासपोर्ट नॉर्मल प्रोसेसिंग के तहत 5,000 रुपये और तत्काल के तहत 7,500 रुपये का पड़ेगा। 60-पेज के रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए फीस नॉर्मल और तत्काल कैटेगरी के तहत क्रमशः 6,000 रुपये और 8,500 रुपये तय की गई है।

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट को बदलने के लिए अप्लाई करने वाले नाबालिगों को नॉर्मल कैटेगरी के तहत 4,250 रुपये और तत्काल के तहत 6,750 रुपये देने होंगे। पासपोर्ट से जुड़ी अन्य सर्विस, जैसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए भारत में फीस 750 रुपये तय की गई है।

सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी की कीमत

पहचान के सर्टिफिकेट (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 1,000 रुपये होगी। विदेश में दी जाने वाली सेवाओं के लिए इमरजेंसी सर्टिफिकेट की कीमत 15 डॉलर होगी। जबकि पहचान प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 50 USD होगी। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन सेवाओं के लिए कोई तत्काल सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

नए फीस स्ट्रक्चर पर एक नजर डालें

1. सामान्य और तत्काल पासपोर्ट (36 और 60 पेज) के रुल्स

36 पेज का नया/री-इश्यू पासपोर्ट (नॉर्मल): अब इसके लिए ₹2,500 देने होंगे।

36 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): तत्काल स्कीम के तहत यह फीस ₹5,000 होगी।

60 पेज का पासपोर्ट (नॉर्मल): इसके लिए ₹3,500 की फीस तय की गई है।

60 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): इसके लिए आपको ₹6,000 चुकाने होंगे।

2. पासपोर्ट खोने या खराब होने पर (रिप्लेसमेंट)

36 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): ₹5,000 की फीस लगेगी।

36 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए ₹7,500 देने होंगे।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): इसकी फीस ₹6,000 तय की गई है।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए सबसे ज्यादा ₹8,500 चुकाने होंगे।

3. अन्य जरूरी सेवाएं

पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और सरेंडर सर्टिफिकेट जैसी अन्य मिसलेनियस सेवाओं के लिए भारत में ₹750 की फीस लगेगी।

Clipboard12pasport

भारत से बाहर आपातकालीन सर्टिफिकेट (Emergency Certificate) के लिए 15 USD और आइडेंटिटी सर्टिफिकेट के लिए 50 USD की फीस तय की गई है।

वैलिडिटी (वैधता) के नियम

भारत सरकार ने साफ किया है कि वयस्कों (Adults) के लिए जारी किए गए पासपोर्ट 10 साल के लिए वैध रहेंगे। वहीं, नाबालिगों (Minors) के लिए जारी पासपोर्ट की वैधता 5 साल या उनके 18 वर्ष के होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी।

ये भी पढ़ें- Indian Citizenship Proof: ‘मेरे भारतीय होने का आखिर सबूत क्या है?’; पासपोर्ट को लेकर MEA के बयान से छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

कल का मौसम 26 जून: IMD ने बिहार संग इन 11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, दिल्ली और इन इलाकों में आएगा 60kmph स्पीड वाली आंधी-तूफान

Weather update for June 26: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के अनुकूल माहौल के बीच 26 जून के लिए मौसम का लेटेस्ट बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक बिहार समेत देश के 11 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब सहित कई मैदानी इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज आंधी-तूफान और गरज-चमक की चेतावनी भी दी है।

आइए जानते हैं कि 26 जून को आपके राज्य में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है और आईएमडी ने किन इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है-

इन 11 से ज्यादा राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 26 जून को देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है:-

बहुत भारी बारिश: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है।

भारी बारिश वाले राज्य: बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तटीय कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली-NCR और इन राज्यों में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान

मौसम विभाग के मुताबिक 26 जून को देश के कई हिस्सों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाओं का दौर देखा जाएगा। बिहार, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज आंधी-तूफान आने की आशंका है।

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तटीय और आंतरिक कर्नाटक के इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

यूपी और झारखंड में लू का प्रकोप

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं कुछ राज्यों में गर्मी का सितम अभी जारी रहेगा। पूर्वी यूपी के अलग-अलग इलाकों में 26 जून को भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। उत्तर-पश्चिम भारत में 28 जून तक तापमान में 2-3°C की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद ही राहत मिलने की उम्मीद है। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में भी 26 जून को लू चलने की चेतावनी दी गई है।

मानसून की ताजा स्थिति

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल सूरत, इंदौर, मंडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों, झारखंड, बिहार तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

ये भी पढ़ें- Monsoon Watch: IMD ने बताया यूपी में एंट्री से अभी कितनी दूर है मानसून, अबतक 57% कम बारिश, क्या 28 जून से बदलेगी तस्वीर?

Ketan Agarwal Murder: ‘मर्डर इसने किया, मैंने नहीं…’; मंगेतर मर्डर केस में सिया गोयल पुलिस के सामने अलग ही कहानी सुनाने लगी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के लोहगढ़ किले के पास हुए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह अब सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर का मामला बन चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के सामने दोनों आरोपी अलग-अलग कहानियां सुनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगेतर और बॉयफ्रेंड का ब्लेम गेम!

केतन अग्रवाल की कथित हत्या के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों ही सलाखों के पीछे हैं। लेकिन पूछताछ के दौरान दोनों का रवैया एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक चेतन ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया है कि वह सिया के साथ भाग जाना चाहता था। उसका आरोप है कि सिया गोयल ने ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने यानी उसकी हत्या करने पर जोर दिया था।

दूसरी तरफ सिया गोयल ने पुलिस को एक बिल्कुल अलग कहानी सुनाई है। सिया का दावा है कि हत्या की पूरी योजना चेतन चौधरी के दिमाग की उपज थी। सिया ने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को भी केतन को मारने की एक कोशिश की गई थी लेकिन जब वह योजना विफल हो गई तो चेतन उसके सामने भावुक होकर रोने लगा था।

पुलिस का दावा- यह दोनों की डिफेंस स्ट्रेटेजी

दोनों आरोपियों द्वारा एक-दूसरे पर मढ़ जा रहे आरोपों को लेकर जांच टीम का हिस्सा रहे एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि वे साजिश का जिम्मा एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से उनकी डिफेंस स्ट्रेटेजी लग रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि मौजूदा सूबत साफ कर रहे हैं कि इस साजिश में दोनों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।

पुणे के कैफे में हुई मुलाकात और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस इस मामले में डिजिटल और फिजिकल सबूतों को पुख्ता करने में जुटी है। जांच में पुलिस को पता चला है कि सिया और चेतन के बीच 31 मई से 4 जून के बीच पुणे के एक कैफे में मुलाकात हुई थी। पुलिस अब इस बैठक की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या यह मुलाकात भी उसी मर्डर की साजिश का हिस्सा थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए कम्युनिकेशन को खंगाला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मर्डर पूरी तरह से प्री-प्लान्ड था।

शादी की तैयारी और अनचाहा रिश्ता: क्या थी मर्डर की वजह?

मृतक केतन अग्रवाल एक बड़े रियल एस्टेट व्यवसायी का बेटा था और अपनी पारिवारिक फर्म में निदेशक के पद पर काम कर रहा था। वह बोस्टन से अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था। केतन और सिया के परिवार एक-दूसरे को 1990 के दशक से जानते थे। इसी साल गुलबर्गा में एक शादी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसके बाद शादी की बातचीत तेजी से आगे बढ़ी और महज एक सप्ताह के भीतर दोनों की सगाई हो गई।

पुलिस के मुताबिक सिया पहले से ही चेतन चौधरी के साथ रिलेशनशिप में थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बावजूद दोनों परिवारों की ओर से इस साल के अंत में राजस्थान में एक भव्य और विस्तृत शादी समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही थीं।

हादसे की मनगढ़ंत कहानी से ऐसे उठा पर्दा

बीती 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद सिया ने केतन के परिवार और पुलिस को सूचित करते हुए दावा किया था कि केतन का पैर अनजाने में फिसल गया और यह एक हादसा था। पुलिस को सिया के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं।

इसके बाद जब पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वहां एक संदिग्ध शख्स दिखाई दिया, जिसकी पहचान बाद में सिया के बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के रूप में हुई। इसी सुराग ने पुलिस को गहरी जांच के लिए प्रेरित किया और यह साफ हो गया कि केतन फिसला नहीं था बल्कि उसे सिया और चेतन ने कथित तौर पर धक्का दिया था।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

जांच के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इस पूरी आपराधिक साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

Ketan Agarwal Murder Update: पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है। केतन अग्रवाल की कथित हत्या से एक दिन पहले सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पुणे के एक कैफै में मिले थे। यह CCTV फ़ुटेज अब जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है। बताया जा रहा है कि 17 जून को पुणे में सिया गोयल और उनके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के बीच एक कॉफी डेट हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साज़िश रची गई थी।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना अग्रवाल को पुणे के लोहागढ़ किले में एक खाई में धकेले जाने से एक दिन पहले हुई थी। शुरुआती जांच के अनुसार, दोनों ने कैफै में बैठकर हत्या के बारे में बातचीत की और योजना बनाई। पुलिस ने बताया कि सिया ने चेतन के साथ लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी शेयर की थी। इसके बाद YouTube वीडियो की मदद से उससे उस जगह के बारे में चर्चा की थी।

मारने का आइडिया कैसे आया?

पुलिस के मुताबिक, 31 मई को सिया और केतन लोहागढ़ किले गए थे। वहां केतन एक खतरनाक जगह बैठा था। तभी सिया के दिमाग में उसे मारने का आइडिया आया। बताया जा रहा है कि 14 जून को भी केतन को किले से धक्का देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर घटना को हादसा बताने की साजिश रची थी, लेकिन केतन बच गया था। इसके बाद सिया ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी से पुणे के एक कैफे में मिली। वहां दोनों ने लोहागढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने की योजना पर डिटेल्स चर्चा की थी।

बैकअप प्लान भी था तैयार 

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, इस दौरान दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था। ‘इंडिया टुडे’ को मिले CCTV फुटेज में वे दोनों हत्या के एक दिन पहले शाम करीब 4:35 बजे कैफ़े में आते और लगभग 5:30 बजे वहां से निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पुणे के पास लोहागढ़ किले में अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ ट्रेकिंग के दौरान 18 जून को खाई में गिरने से केतन अग्रवाल की मौत हो गई। केतन अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी, सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर थे। कपल की सगाई इसी साल हुई थी और नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों परिवारों ने राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य शादी की योजना बनाई थी।

SIT गठित करने का निर्देश

इस बीच, महाराष्ट्र विधानसभा के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 26 वर्षीय अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने 18 जून को पुणे में लोहागढ़ किले के निकट एक घाटी में उन्हें कथित तौर पर धक्का दे दिया था।

सिया गोयल (20) और चौधरी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अग्रवाल और गोयल की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में होने वाली थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सदस्य सुनील शेलके ने राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की थी कि हत्या के मामले में गोयल के परिवार को भी आरोपी बनाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से उसके (सिया) किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने कहा कि हत्या का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए। खरे ने सरकार को हत्या की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।

शेलके ने राज्य सरकार से पीड़ित के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। विधायक ने कहा कि केतन अग्रवाल के परिवार को शुरुआत में बताया गया था कि उसकी मौत एक हादसे में हुई है। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में बाद में यह सामने आया कि यह हत्या का मामला था।

उन्होंने आरोपियों सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि जांच के दौरान फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं। शेलके ने अधिकारियों से मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच करने की अपील की और मांग की कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द अदालत में की जाए।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder: ‘केतन अभी जिंदा है…’; मंगेतर के खाई में गिरने के बाद सिया गोयल ने जब सुनी ये बात तो उसके उड़ गए थे होश, ऐसा हो गया था चेहरा

Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder: ‘केतन अभी जिंदा है…’; मंगेतर के खाई में गिरने के बाद सिया गोयल ने जब सुनी ये बात तो उसके उड़ गए थे होश, ऐसा हो गया था चेहरा

इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

Siya Goyal: केतन अग्रवाल से शादी के लिए तैयार नहीं थी सिया गोयल, परिवार का था दबाव;’; पुणे कारोबारी हत्याकांड में पुलिस का बड़ा दावा

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले पर घूमने गए  युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। वह अपने परिवार के दबाव में यह रिश्ता स्वीकार की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही तनाव इस कथित साजिश की एक अहम वजह हो सकता है।

पहले हादसा माना गया था मामला

जांच में सामने आया कि 18 जून को ‘ट्रेकिंग’ के दौरान सिया (20) और उसके प्रेमी चेतन (22) ने 26 वर्षीय केतन को खाई में कथित तौर पर धक्का देकर मार डाला। वह लोहागढ़ किले में एक चट्टान से गिर गए थे। उस समय दुर्घटनावश हुई मौत मानकर मामला दर्ज किया गया था। सिया ने भी केतन के परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था, जिससे वह खाई में जा गिरे।

शुरुआत में इसे एक दुर्घटना माना गया था। सिया ने परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए, जिसके बाद मामले को हत्या के एंगल से देखा जाने लगा।

पुलिस का दावा- शादी नहीं करना चाहती थी सिया

ANI के मुताबिक पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ, डिजिटल सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि सिया गोयल इस शादी को लेकर सहज नहीं थी। उसने पहले भी विवाह को एक साल के लिए टालने की इच्छा जताई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सिया खुद को शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं मानती थी। लेकिन परिवार की अपेक्षाओं और दबाव के कारण वह रिश्ते को आगे बढ़ा रही थी।

CCTV फुटेज से खुला राज

जांच में बड़ा सुराग किले परिसर के सीसीटीवी कैमरों से मिला। पुलिस ने फुटेज में देखा कि केतन और सिया के पीछे कुछ दूरी पर एक संदिग्ध व्यक्ति चल रहा था। बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी (Chetan Chaudhary) के रूप में हुई, जिसे पुलिस सिया का कथित प्रेमी बता रही है।

गर्मी में हूडी पहनकर घूम रहा था युवक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध युवक ने शॉर्ट्स और हूडी पहन रखी थी। उसने हूडी को इस तरह नीचे खींच रखा था कि उसका चेहरा दिखाई न दे। उसके ऊपर हेडसेट भी लगा हुआ था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक अन्य फुटेज में सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है। उसी समय हूडी पहने युवक नीचे बैठ जाता है। इस गतिविधि ने पुलिस का संदेह और बढ़ा दिया।

फरवरी में हुई थी सगाई, नवंबर में होनी थी शादी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य समारोह में होने वाली थी। इसके लिए पैलेस वेन्यू भी बुक किया जा चुका था।

तीन बार कर चुकी थी मारने की कोशिश

पुलिस का दावा है कि सिया लगातार केतन को लोहागढ़ किले ले जाने के लिए दबाव डाल रही थी। जांच के अनुसार वह उसे 31 मई, 4 जून, 14 जून और 18 जून को वहां लेकर गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि 14 जून को भी केतन को खाई में धक्का देने की कोशिश की गई थी। लेकिन वह एक झाड़ी पकड़कर बच गया था। इसके बाद 18 जून को कथित तौर पर दोबारा साजिश को अंजाम दिया गया।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

फिलहाल पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी से पूछताछ कर रही है। दोनों का मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों  की जांच में जुटी हुई है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

मामले ने खड़े किए कई सवाल

इस चर्चित मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारिवारिक दबाव में होने वाली शादियां युवाओं पर मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं। वहीं, पुलिस का दावा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला एक सुनियोजित हत्या की साजिश का उदाहरण बन सकता है।

मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य और परिस्थितियां सामने आईं जिन्होंने इस कथित हादसे पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद हमने मामले की गहन पड़ताल शुरू की। जब किले के टिकट काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई तो उसमें केतन और सिया एक साथ किले की ओर जाते दिखाई दिए जिससे जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा मिली।” फुटेज को बारीकी से खंगालने पर पुलिस की नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो केतन और सिया से कुछ मीटर पीछे चल रहा था।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder: होने वाली बहू सिया का जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए ससुर ने बुक किए थे 70 रूम, जिसकी ख्वाहिशों को पलकों पर रखा उसने ये सिला दिया!

अधिकारी ने कहा, “उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और ‘हुडी’ पहन रखी थी। हुडी’ का अगला हिस्सा इतना नीचे कर रखा था कि उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसने हुडी के ऊपर हेडसेट भी लगा रखा था। एक अन्य फुटेज में हमने देखा कि सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है और उसी समय हुडी पहने वह व्यक्ति भी अचानक बैठ जाता है। यह संयोग बेहद संदिग्ध लगा। अधिकारी ने बताया कि बाद में पुलिस ने 18 जून को उस समय के तापमान का पता लगाया जो करीब 33 डिग्री सेल्सियस था और यह बात खटकी कि इतनी गर्मी में कोई व्यक्ति आखिर ‘हुडी’ पहनकर क्यों घूम रहा था।