Iran-US War: अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी बार किया हमला, ट्रंप बोले- ‘तेहरान का अब अस्तित्व ही नहीं रहेगा’

Iran-US War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर सीजफायर को तोड़ा है।

अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते को नहीं मानता तो उसकी अस्तिव ही नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के कहा कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन करने के बाद की गई।

‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी विमानों ने युद्धविराम समझौते का ‘फिर से’ उल्लंघन करने के कारण ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है!” उन्होंने आगे कहा, “बहुत मुमकिन है कि वे कभी न सीखें! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था।”

ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!” अमेरिकी सेना के अनुसार, ये हमले ट्रंप के निर्देश पर किए गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

ईरान में कहां किया हमला?

CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया गया। बाद में यह साफ किया गया कि इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास कई जगहों पर ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने कहा कि ईरान के पास सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी सेनाओं ने कथित तौर पर ‘किकू’ (Kiku) नाम के ऑयल टैंकर पर वन-वे ड्रोन से हमला किया।

अमेरिका ने हमलों को ऑयल टैंकर पर हुए हमले से जोड़ा

CENTCOM के अनुसार, जब ‘किकू’ होर्मुज स्ट्रैट से गुज़र रहा था, तब उस पर हमला हुआ। उस समय उसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ था। यह टैंकर पिछले हफ्ते की शुरुआत में कतर के एक ऑयल फील्ड से निकला था और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था।

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की शिप-ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि यह जहाज ओमान के तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। यह रूट ईरान द्वारा अपने जलक्षेत्र से तय किए गए रास्ते के विकल्प के तौर पर उभरा है।

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शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

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समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

K Bhagyaraj Death: नहीं रहे फिल्ममेकर के भाग्यराज, दिल का दौरा पड़ने से 73 साल की उम्र में हुआ निधन

K Bhagyaraj Death: मशहूर एक्टर और डायरेक्टर के. भाग्यराज का शनिवार को चेन्नई में निधन हो गया। ANI के मुताबिक, अपोलो हॉस्पिटल ने भाग्यराज के निधन की पुष्टि की। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाग्यराज को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। वे 73 साल के थे। उनके अंतिम संस्कार के बारे में और जानकारी का इंतजार है।

भाग्यराज के परिवार में उनकी पत्नी और एक्ट्रेस पूर्णिमा भाग्यराज, उनके बेटे और एक्टर शांतनु भाग्यराज और बेटी सारण्या भाग्यराज हैं। भाग्यराज सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे और कुछ ही दिन पहले उन्हें गोवा में एक्ट्रेस और पॉलिटिशियन खुशबू सुंदर की बेटी की शादी में शामिल होते देखा गया था।

तमिलनाडु के इरोड जिले में कृष्णास्वामी भाग्यराज के रूप में जन्मे भाग्यराज ने अपना सफल करियर बनाने से पहले प्रशंसित फिल्म निर्माता भारतीराजा के सहायक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने सबसे पहले 16 वायथिनिले (1977) और सिगप्पु रोजक्कल (1978) जैसी फिल्मों में छोटी सहायक भूमिकाएं निभाईं।

इसके बाद उन्होंने भारतीराजा की दो फिल्मों – 16 वायथिनिले और किज़हक्के पोगम रेल – में सहायता की और भारतीराजा की फिल्मों किज़हक्के पोगम रेल (1978) और टिक टिक टिक (1981) के लिए स्क्रिप्ट लिखी। उन्होंने 1979 में सुवरिलाधा चिथिरंगल के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की। उन्होंने भारतीराजा की पुथिया वारपुगल में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में भी अपनी शुरुआत की।

भाग्यराज मुख्य रूप से मिडिल-क्लास परिवारों के लिए मनोरंजक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ऐसे किरदार और कहानियां बनाईं, जिनसे लोग आसानी से जुड़ सके, और इस तरह उन्होंने पारिवारिक मनोरंजन के नज़रिए को बदल दिया। मिडिल-क्लास परिवारों पर आधारित उनकी फिल्में, बेहतरीन पटकथा लेखन और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कहानियों ने 1980 और 1990 के दशक में तमिल सिनेमा को एक नई पहचान दी। उनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में ‘अंधा 7 नाटकाल्’ (1981), ‘मुंधनाई मुदिचु’ (1983), ‘थूरल निन्नु पोचु’ (1982), ‘इंद्रु पोई नालई वा’ (1981) और कई अन्य फिल्में शामिल हैं।

भाग्यराज ने 25 से ज़्यादा फिल्मों का निर्देशन किया और 75 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। भाग्यराज ने अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘आखिरी रास्ता’ (1986) का निर्देशन करके हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन ने दोहरी भूमिका निभाई थी, जबकि जया प्रदा, श्रीदेवी और अनुपम खेर ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। भाग्यराज भी इस फ़िल्म में एक सहायक भूमिका में नज़र आए थे।

बाद में उन्होंने ‘मिस्टर बेचारा’ (1996) में सहायक भूमिकाएँ निभाईं, जिसमें अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिकाओं में थे, और ‘पापा द ग्रेट’ (2000) में कृष्णा कुमार, नगमा और सत्य प्रकाश के साथ काम किया।

Cinema Ka Flashback: जब ‘गुजारिश’ के लिए ऐश्वर्या राय को मिलने वाला था बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड, सुपरस्टार के कहने पर काजोल को थमा दी गई थी ट्रॉफी

Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड किसी के लिए किसी को पीछे खींचना….नीचा दिखाना….या आगे बढ़ाना बहुत आम बात है। इस ग्लैमर दुनिया में आप कब किसके लिए खास और किससे दुश्मन बन जाएं किसी को पता नहीं होता है। आए दिन दोस्ती से दुश्मनी…जलन से जुड़े किस्से सामने आते रहते हैं। एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है 2010-11 में एक अवॉर्ड शो से। इसके बाद से एक्टर्स के साथ-साथ दर्शकों का भी भरोसा इन शो से उठने लगा था।

ऐश्वर्या राय को भेजा गया इंवाइट

मीडिया रिपोर्ट और बॉलीवुड सोर्स के मुताबिक 2010 में ऐश्वर्या राय संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गुजारिश’ में नजर आई थीं। फिल्म में उनके अपोजिट ऋतिक रोशन थे। इस मूवी को दर्शकों का मिला जुला प्यार मिला था। लेकिन फिल्म में ऐश्वर्या के काम और खूबरत लुक्स के लोग कायल हो गए थे। इसी साल एक अवॉर्ड शो हुआ, जिसमें ऐश्वर्या को ये कहकर इंवाइट किया गया था कि जूरी ने बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड के लिए उनका नाम सजेस्ट किया है।

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लास्ट मोमेंट पर काजोल को दिया गया अवॉर्ड

ऐश्वर्या राय अवॉर्ड शो में अपना अवॉर्ड लेने पहुंची थी। लेकिन वहां जो हुआ उसने उन्हें काफी दुख और इंसल्टिंग महसूस कराया। शो में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड ऐश को न देकर My Name Is Khan के लिए काजोल को दे दिया गया। ये सब वहां मौजूद ऐश्वर्या के सामने हो रहा था।

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फिल्ममेकर का बड़ा खुलास

हंगामा तब मचा जब इस किस्से के कुछ समय बाद एक बड़े फिल्ममेकर ने इंटरव्यू में इस बात का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने सुपरस्टार का नाम लिए बिना कहा कि- एक्टर के कहने पर ऐश्वर्या राय की जगह काजोल को लास्ट मोमेंट पर ये अवॉर्ड दिया गया था। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात के कई दावे किए थे, कि लास्ट मोमेंट पर विनर का नाम एक्टर के कहने पर चेंज किया गया था। इस खुलासे के बाद से लोगों ने अवॉर्ड शो को कम आंकना शुरू कर दिया।

गुजारिश फिल्म

संजय लीला भंसाली की फिल्म गुजारिश 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय लीड रोल में थे। ऋतिक ने इसमें लकवा ग्रस्त जादूगर का किरदार निभाते हैं। स्टेज पर हुए एक हादसे के बाद उन्हें लकवा हो जाता है। इसके बाद वह अपने जादू को एक हिट रेडियो शो के ज़रिए लोगों तक पहुंचाता है, जिसमें उसका साथ ऐश देती हैं।

माई नेम इज खान फिल्म

यह फिल्म रिजवान खान (शाहरुख खान) की कहानी है, जो एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित एक मुस्लिम है। 11 सितंबर 2001 (9/11) के हमलों के बाद अमेरिका में इस्लामोफोबिया और नस्लीय भेदभाव काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद रिजवान अमेरिका के राष्ट्रपति से मिलने और दुनिया को यह मैसेज देने के लिए एक जर्नी पर निकलते हैं-जिसमें वह लोगों को बताते हैं “मेरा नाम खान है, और मैं आतंकवादी नहीं हूं।”

जल्द भारत आने वाले है ट्रंप! अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान, फाइनल स्टेज में है ‘ट्रेड डील’

India-US Relations: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बड़ा पॉजिटिव अपडेट आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

समाचार एजेंसी ‘आईएएनएस’ से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद शानदार चल रहे हैं। ट्रंप के संभावित भारत दौरे पर उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएं। भारत और अमेरिका बेहद करीबी पार्टनर और सहयोगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के रिश्ते इससे बेहतर नहीं हो सकते, जो कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।’

राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का पहला भारत दौरा!

अगर यह दौरा तय समय पर होता है, तो व्हाइट हाउस में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप फरवरी 2020 में भारत आए थे। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जो पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 12-13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका का दौरा किया था। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी की वह पहली अमेरिकी यात्रा थी, जिसमें व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई थी।

ट्रेड डील पर कहां फंसा है पेंच?

दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है, लेकिन भारतीय वार्ताकार कुछ शर्तों पर पूरी स्पष्टता चाहते हैं:

धारा 301 टैरिफ: भारत ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ पर अधिक स्पष्टता मांगी है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि डील फाइनल होने से पहले भारत को अन्य व्यापारिक साझेदारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलनी चाहिए।

अमेरिकी ट्रेजरी का रुख: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ये टैरिफ धारा 301 के तहत पिछले स्तरों पर वापस आ जाएंगे।

हाल के महीनों में क्यों बढ़ा था तनाव?

पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों में कुछ खटास देखी गई थी, जिसे सुधारने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में भारत आए हुए हैं:

रूसी तेल और भारी टैरिफ: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भारतीय आयातों पर कुल 50% का भारी टैरिफ लगा दिया था। इसमें 25% का पारस्परिक टैरिफ और भारत द्वारा रूस से लगातार तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त जुर्माना शामिल था, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद, वर्तमान में भारतीय निर्यातों पर केवल 10% का बेसलाइन टैरिफ लग रहा है, जबकि वाशिंगटन अपनी व्यापार नीतियों की समीक्षा कर रहा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी हैं वैचारिक मतभेद

व्यापार के अलावा दोनों देशों के बीच एक अन्य कूटनीतिक मतभेद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर भी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था।

हालांकि, भारत ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा सिरे से खारिज किया है। भारत का स्पष्ट स्टैंड है कि यह सीजफायर दोनों देशों के बीच बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के, सीधे डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) स्तर की बातचीत के जरिए हुआ था।

PF Withdrawal Rules: क्या PF का पूरा पैसा निकाला जा सकता है? जानिए नियम और शर्तें

EPFO Rules: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को मुख्य रूप से रिटायरमेंट यानी बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य बचत के रूप में तैयार किया गया है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वे जब चाहें अपने पीएफ खाते से 100% पैसा निकाल सकते हैं? खासकर ऐसे समय में जब EPFO 3.0 और डिजिटल सेवाओं के अपग्रेडेशन की चर्चाएं जोरों पर हैं, पीएफ विड्रॉल के नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

अगर आप भी अपने पीएफ का पूरा पैसा निकालने की सोच रहे हैं, तो इसका सीधा जवाब है- नहीं, आप नौकरी के दौरान जब चाहें तब पूरा पैसा नहीं निकाल सकते। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, एक्टिव नौकरी के दौरान पूरा फंड निकालने पर रोक है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसकी इजाजत मिलती है। आइए जानते हैं पीएफ विड्रॉल से जुड़े जरूरी नियम।

कब निकाल सकते हैं अपने पीएफ का 100% पैसा?

EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, केवल दो मुख्य परिस्थितियों में ही आप अपने खाते से पूरा फंड निकाल सकते हैं:

1. रिटायरमेंट के समय: जब कर्मचारी की उम्र 58 वर्ष हो जाती है, तब वह फाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकता है और अपने खाते में जमा पूरा पैसा निकाल सकता है।

2. नौकरी छूटने या बेरोजगारी की स्थिति में: अगर आपकी नौकरी चली जाती है, तो आप बेरोजगारी के दौरान वित्तीय मदद के लिए पैसा निकाल सकते हैं।

1 महीना बेरोजगार रहने पर: आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा निकाल सकते हैं।

2 महीने या उससे अधिक बेरोजगार रहने पर: आप बचे हुए बाकी बचे हुए 25% के लिए भी क्लेम कर सकते हैं और इस तरह पूरा 100% फंड निकाल सकते हैं।

नौकरी बदलने पर क्या पैसा निकालना सही है?

कई कर्मचारियों को यह गलतफहमी होती है कि जब वे कंपनी बदलते हैं, तो उन्हें पुराना पीएफ का पैसा निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO हमेशा यही सलाह देता है कि नौकरी बदलने पर पैसा निकालने के बजाय अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का इस्तेमाल करके पीएफ को नई कंपनी में ट्रांसफर कर लें।

ऐसा करना क्यों जरूरी है?

  • ब्याज का नुकसान नहीं: फंड ट्रांसफर करने से आपके पैसे पर सालाना ब्याज मिलना जारी रहता है।
  • सर्विस रिकॉर्ड: आपकी नौकरी का रिकॉर्ड बिना टूटे लगातार चलता रहता है।
  • टैक्स का झंझट: बार-बार नौकरी बदलने पर पैसा निकालने से आपके रिटायरमेंट का फंड तो कम होता ही है, साथ ही कुछ मामलों में इस पर टैक्स भी देना पड़ सकता है।

नौकरी के दौरान केवल आंशिक विड्रॉल की अनुमति

भले ही नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर पाबंदी हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को कुछ खास और जरूरी जरूरतों के लिए एडवांस के रूप में आंशिक निकासी की अनुमति देता है। आप इन कामों के लिए नौकरी के दौरान पैसा निकाल सकते हैं:

  • उच्च शिक्षा और बच्चों या खुद की शादी के लिए।
  • घर खरीदने, जमीन खरीदने या मकान बनवाने के लिए।
  • होम लोन का पुनर्भुगतान करने के लिए।
  • खुद के या परिवार के गंभीर इलाज के लिए।

नोट: इन सभी श्रेणियों के लिए आपकी सर्विस की अवधि और विड्रॉल की लिमिट के नियम अलग-अलग होते हैं।

पैसा निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

भले ही पीएफ का पैसा निकालने से आपको तुरंत कैश मिल जाता है, लेकिन ऐसा करने से आपके बुढ़ापे की सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। ईपीएफ एक बेहतरीन निवेश माध्यम है जहां आपको अनिवार्य बचत, नियोक्ता का योगदान और टैक्स-फ्री सालाना ब्याज का तगड़ा कॉम्बिनेशन मिलता है। इसलिए, जब तक कोई बेहद गंभीर इमरजेंसी न हो, अपने पीएफ कॉर्पस को हाथ न लगाएं और नौकरी बदलने पर इसे हमेशा ट्रांसफर ही करें।

मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ी जंग? अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की खुली धमकी- ‘वाशिंगटन को भुगतना होगा अंजाम’

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में अभी शांति समझौता पूरी तरह लागू भी नहीं हुआ था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में हुए सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन इसी बीच अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी कर दी है।

इस हमले के बाद ईरान भड़क उठा है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस हरकत के बाद वाशिंगटन को सिर्फ ‘पीछे हटना और पछताना’ पड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अमेरिका का यह ‘ब्लेम गेम’ यानी एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का खेल नहीं चलेगा। आइए जानते हैं कि इस ताजा विवाद की असल वजह क्या है।

क्यों भड़का विवाद? अमेरिका ने क्यों किए ईरान पर हमले?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज लोकेशन्स के साथ-साथ तटीय रडार साइटों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। अमेरिका ने साफ किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक कमर्शियल जहाज पर किए गए हमले का बदला है।

25 जून की घटना: अमेरिकी सेना के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया था।

रणनीतिक रास्ता: यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुआ, जो दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से का मुख्य रास्ता है। इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक्शन लिया।

ईरान का पलटवार: ‘बातचीत के बीच में पीठ पर छुरा घोंपा’

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर और सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा, ‘अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच में ही ईरान पर हमला कर दिया है। नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिखा दिया है कि वह बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों को नहीं मानते हैं।’

अजीजी ने चेतावनी दी कि सीजफायर का यह लापरवाह उल्लंघन अमेरिका को भारी पड़ेगा। अजीजी के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने भी ऐलान कर दिया कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

‘हिंसा का जवाब हिंसा से मिलेगा’

इस बीच अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को दोटूक चेतावनी दी है। उन्होंने ‘X’ पर लिखा, ‘ईरान ने सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और हमने उसका सम्मान किया। अगर उन्हें एमओयू (MOU) के लागू होने के तरीके को लेकर कोई आपत्ति या असहमति थी, तो वे बात कर सकते थे। लेकिन हिंसा का जवाब हमेशा हिंसा से ही दिया जाएगा।’ वेंस ने ईरान से अपील की कि वे विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं।

नाजुक मोड़ पर बातचीत: क्या फिर छिड़ेगी जंग?

यह पूरा टकराव बेहद नाजुक समय पर हुआ है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजनयिक बातचीत चल रही थी। पिछले हफ्ते ही दोनों पक्षों के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ था, जिसके बाद एक व्यापक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का बातचीत का समय तय किया गया था। लेकिन इन हमलों के बाद शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

8th Pay Commission: 1 करोड़ कर्मचारियों की चांदी! बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की तैयारी, फिटमेंट फैक्टर और DA पर आए ये 10 बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Latest News: देश के 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वां वेतन आयोग अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है और इसके तहत कर्मचारियों की किस्मत बदलने वाली है। ऐतिहासिक रूप से हर 10 साल में बनने वाला यह आयोग इस बार कर्मचारियों की झोली में बंपर सैलरी हाइक करने की तैयारी में है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह हाई-प्रोफाइल पैनल इस समय देशव्यापी दौरों पर है और 30 जून 2026 तक ऑनलाइन डेटा जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18000 से सीधे ₹69000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 तक बढ़ाने की डिमांड रखी हुई है।

रेलवे, डिफेंस से लेकर तमाम सरकारी विभागों के 1 करोड़ से अधिक परिवारों की जेब पर सीधा असर डालने वाले इस महा-बदलाव को लेकर 10 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर नौकरीपेशा और रिटायर्ड कर्मचारी के लिए जानना बेहद जरूरी है।

8वें वेतन आयोग के टॉप 10 सबसे बड़े अपडेट्स

1. ₹69000 तक न्यूनतम बेसिक पे की मांग

सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर बड़े कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें सौंप दी हैं। नेशनल काउंसिल (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर ₹69000 करने की मांग की है। वहीं, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन ने इसे ₹65000 करने की वकालत की है।

2. रेलवे यूनियनों की अलग मांग

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आधुनिक आर्थिक कारकों के आधार पर न्यूनतम वेतन ₹52600 करने की मांग की है। इसके अलावा, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) का कहना है कि न्यूनतम वेतन की गणना 1 जनवरी 2026 के प्राइस इंडेक्स के आधार पर होनी चाहिए।

3. फिटमेंट फैक्टर पर बड़ा अपडेट

कर्मचारियों की सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर की सबसे बड़ी भूमिका होती है। रेलवे यूनियन (IRTSA) ने मांग की है कि सेफ्टी कैटेगरी के पदों (लेवल 6) के लिए उच्च इंडेक्सिंग अपनाई जाए। उन्होंने 2.92, 3.50 और 3.80 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है।

8th Pay Commission: 1 करोड़ कर्मचारियों की चांदी! बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की तैयारी, फिटमेंट फैक्टर और DA पर आए ये 10 बड़े अपडेट्स

4. महंगाई भत्ते को लेकर नया फॉर्मूला

महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी संगठनों ने अपनी बात रखी है:

NC-JCM: इन्फ्लेशन-लिंक्ड यानी महंगाई से जुड़ा वेज मॉडल होना चाहिए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन: न्यूनतम 4% डीए बढ़ोतरी और 50% होने पर डीए को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए।

5. डेटा सबमिशन की आखिरी तारीख 30 जून

8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन सौंपने की खिड़की 15 जून को बंद कर दी है। हालांकि, हितधारकों के लिए ऑनलाइन डेटा सबमिट करने का पोर्टल 30 जून 2026 तक खुला रहेगा।

6. आयोग के सदस्यों की टीम

इस समय 8वें वेतन आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जो इसकी अध्यक्ष हैं। उनके साथ पैनल में पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और पूर्व आईएएस पंकज जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं।

7. ओडिशा और पश्चिम बंगाल का दौरा

कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से सीधे चर्चा करने के लिए आयोग लगातार राज्यों के दौरे कर रहा है। इसी कड़ी में आयोग 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 July को कोलकाता का दौरा करने जा रहा है।

8. 1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को फायदा

इस वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। इसमें रक्षा और रेलवे के कर्मचारी और रिटायरीज भी शामिल हैं।

9. कब आएगी फाइनल रिपोर्ट?

आमतौर पर आयोग को अपनी सिफारिशें देने में 18 महीने का समय लगता है। इस लिहाज से फरवरी 2027 से पहले आधिकारिक सिफारिशें आना मुश्किल है। हालांकि, ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

8th Pay Commission: 1 करोड़ कर्मचारियों की चांदी! बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की तैयारी, फिटमेंट फैक्टर और DA पर आए ये 10 बड़े अपडेट्स

10. जेब में कब तक आएगा पैसा?

पिछले ट्रेंड्स को देखें तो वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद उन्हें पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का वक्त लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली सैलरी बढ़ोतरी का पूरा फायदा कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल पाएगा।

EPF पोर्टल के बाद उमंग ऐप भी लॉक! पीएफ खाताधारकों के लिए जरूरी अपडेट, जानें कब तक नहीं कर पाएंगे क्लेम

EPFO Alerts: अगर आप भी नौकरीपेशा हैं और अपने PF खाते से एडवांस निकालने, क्लेम सेटलमेंट करने या बैलेंस चेक करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन क्लेम सर्विसेज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

इतना ही नहीं, ईपीएफओ पोर्टल के साथ-साथ सरकारी उमंग ऐप (Umang App) पर मिलने वाली पीएफ सेवाएं भी अगले कुछ दिनों तक उपलब्ध नहीं रहेंगी। इस शटडाउन के कारण करोड़ों पीएफ सब्सक्राइबर्स प्रभावित हो सकते हैं। जानिए ये सेवाएं कब से कब तक बंद रहेंगी और आप कब से दोबारा काम कर पाएंगे।

EPFO पोर्टल: 3 दिनों तक बंद रहेगी क्लेम सर्विस

EPFO द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन और डेटाबेस सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक तय प्लानिंग के तहत माइग्रेशन का काम किया जा रहा है। ऑनलाइन क्लेम सबमिशन और प्रोसेसिंग की सेवाएं 26 जून की रात 00:00 बजे से लेकर 28 जून की रात 23:59 बजे तक पूरी तरह बंद रहेंगी। पीएफ पोर्टल पर ये सभी डिजिटल सेवाएं 29 जून को सुबह 00:00 बजे से दोबारा सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देंगी।

इस मेंटेनेंस पीरियड के दौरान पीएफ मेंबर्स न तो नया ऑनलाइन क्लेम डाल सकेंगे और न ही पुराने क्लेम प्रोसेस होंगे। जो क्लेम इस शटडाउन से पहले सबमिट किए जा चुके हैं, उन पर भी काम सेवाएं बहाल होने के बाद ही शुरू होगा।

उमंग ऐप भी 2 जुलाई तक रहेगा ठप

पोर्टल के अलावा, ईपीएफओ ने एक अन्य नोटिस में बताया है कि शेड्यूल मेंटेनेंस के चलते लोकप्रिय सरकारी ऐप ‘उमंग’ पर भी पीएफ से जुड़ी सेवाएं 2 जुलाई 2026 तक बंद रहेंगी। उमंग ऐप पर यह रुकावट ज्यादा लंबी होने के कारण खाताधारक अगले कुछ दिनों तक इन जरूरी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे:

  1. पीएफ बैलेंस चेक करना
  2. नया क्लेम फाइल करना और क्लेम स्टेटस ट्रैक करना
  3. UAN से जुड़ी सेवाएं
  4. शिकायत दर्ज कराना
  5. स्कीम सर्टिफिकेट और जीवन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना

क्यों लिया गया यह फैसला?

ईपीएफओ का कहना है कि इस तकनीकी अपग्रेडेशन और डेटाबेस कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य अपनी डिजिटल सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बनाना है। इस अपग्रेड के बाद क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगा, जिससे भविष्य में सब्सक्राइबर्स को क्लेम सेटलमेंट में कम समय लगेगा और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस मिलेगा।

अगर आपका कोई पीएफ से जुड़ा बेहद जरूरी काम है, तो 29 जून तक EPFO पोर्टल के लिए और 2 जुलाई उमंग ऐप के लिए तक का इंतजार करें।