Monsoon Delayed Impact: मानसून की देरी का पहला झटका, समझिए क्यों महंगी हो सकती है उड़द दाल

Urad Dal Price Hike Rules: देश के आम उपभोक्ताओं के बजट पर मानसून की बेरुखी का पहला बड़ा झटका लगने जा रहा है। मानसून में देरी और बारिश की कमी के कारण देश में उड़द दाल की बुवाई में 40% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुवाई घटने से देश में दालों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में इसकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।

घरेलू कमी को पूरा करने के लिए भारत को विदेशों से आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि उड़द दाल के महंगे होने के पीछे की असली वजह क्या है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में 40% कम हुई बुवाई, किसानों ने बदला रुख

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान देश के प्रमुख उड़द उत्पादक राज्य हैं, जिनकी कुल हिस्सेदारी देश के कुल उत्पादन में लगभग आधी (50%) है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल मानसून की सुस्ती को देखते हुए इन राज्यों के किसानों ने अपनी रणनीति बदल ली है। किसान अब उड़द की जगह सोयाबीन, मक्का और मोटे अनाजों की बुवाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि इन फसलों में मौसम का जोखिम कम होता है और बाजार में इनके दाम भी बेहतर और स्थिर मिलते हैं।

मौसम की मार: क्यों उड़द की खेती से कतरा रहे हैं किसान?

उड़द की फसल मौसम के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। इसकी बढ़ोतरी के समय अगर बारिश कम हो, तो फसल सूख जाती है और अगर कटाई के समय ज्यादा बारिश हो जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों से मौसम के अनिश्चित पैटर्न के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि देश में उड़द का सालाना उत्पादन फाइनेंशियल ईयर 2022 के 28 लाख टन से घटकर फाइनेंशियल ईयर 2026 में महज 22 लाख टन रह गया है।

बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम, MSP भी बढ़ी

घरेलू उत्पादन में आई इस गिरावट का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है:

थोक बाजार का हाल: इंदौर के थोक बाजार में उड़द दाल की कीमत ₹9200 प्रति क्विंटल के पार पहुंच चुकी है, जो तीन साल पहले तक ₹5500 से ₹7200 के दायरे में थी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने उड़द की एमएसपी को साल 2022 के ₹6600 से बढ़ाकर अब ₹8200 प्रति क्विंटल कर दिया है। एमएसपी बढ़ने से किसानों का नुकसान तो सीमित होगा, लेकिन रिटेल मार्केट में आम खरीदारों के लिए लागत बढ़ना तय है।

विदेशी इंपोर्ट पर बढ़ी निर्भरता, मार्च 2027 तक का अनुमान

घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर उड़द का आयात करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में जहां भारत ने केवल 6.11 लाख टन उड़द का आयात किया था, वहीं फाइनेंशियल ईयर 2026 में यह बढ़कर 10.5 लाख टन पर पहुंच गया।कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए मार्च 2027 तक सालाना आयात का यह आंकड़ा 12 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है।

सरकार ने शुरू की ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ (PSS)

इस मानसून सीजन में अब तक राष्ट्रीय औसत वर्षा सामान्य से 42% कम रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को सुरक्षा देने के लिए उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा में ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ (PSS) के तहत मूंग, उड़द और मूंगफली की सरकारी खरीद को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से किसानों को सही दाम तो मिलेगा, लेकिन बाजार में सप्लाई सीमित होने से आम उपभोक्ताओं के लिए उड़द दाल की कीमतें तेज हो सकती हैं।

F&O ट्रेडिंग में जल्द बड़ा बदलाव! लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर SEBI का ये है नया प्लान

SEBI Long Term Derivatives Market: जल्द ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के उस प्रस्ताव को मार्केट एक्सपर्ट्स और पार्टिसिपेंट्स का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसमें उन्होंने बाजार में लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की बात कही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत होगा।

हालांकि, बाजार के दिग्गजों का यह भी कहना है कि ये लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स तभी कामयाब हो सकते हैं, जब लिक्विडिटी, मार्केट मेकिंग, मार्जिन नियमों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी जैसी ढांचागत कमियों को दूर किया जाए। आइए समझते हैं कि लॉन्ग-टर्म F&O को लेकर SEBI का क्या है पूरा प्लान और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।

क्यों है लॉन्ग-टर्म F&O पर सेबी का फोकस?

19 जून 2026 को हुई सेबी की बोर्ड बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि शॉर्ट-टर्म के अलावा लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स भी मार्केट में मिलने चाहिए। सेबी इस समय रिटेल निवेशकों के नुकसान को लेकर एक बड़ा स्टडी डेटा जुलाई 2026 में जारी करने वाला है, जिसके बाद डेरिवेटिव मार्केट की समीक्षा की जा रही है। सेबी का मानना है कि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से बाजार में केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेजिंग यानी जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कम करना क्यों जरूरी?

हेज फंड मैनेजर मयंक बंसल के मुताबिक, भारत का मौजूदा मार्जिन फ्रेमवर्क लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स को आकर्षक नहीं बनाता। इस समय लंबी अवधि के इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है:

रेगुलर इंडेक्स डेरिवेटिव्स मार्जिन: 9.3%

लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस के लिए स्पैन फ्लोर: 17.7% (जो कि काफी ज्यादा है)

एक्सपोजर मार्जिन (ELM): 5%

सेबी के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जी ने भी कहा कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन नियमों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत स्टडी और रिव्यू की जरूरत है।

मार्केट मेकर्स और STT पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

क्रॉस सीज कैपिटल के एमडी राजेश बहेती ने कहा कि इन प्रोडक्ट्स की सफलता के लिए ‘डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स’ की जरूरत होगी, जो दोनों तरफ यानी बाय और सेल के कोट्स उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव ट्रांजैक्शन कॉस्ट और STT से ज्यादा होना चाहिए।

एनएमआई के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का मानना है कि शुरुआत में इन्हें इंडेक्स डेरिवेटिव्स जैसे- निफ्टी, सेंसेक्स में लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और मैनिपुलेशन का रिस्क नहीं रहता। बाद में इसे चुनिंदा लिक्विड स्टॉक्स में बढ़ाया जा सकता है।

क्या वीकली एक्सपायरी जैसे वॉल्यूम की बराबरी कर पाएगा लॉन्ग-टर्म?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि मार्जिन कम होने के बाद भी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स कभी भी वीकली या मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स के वॉल्यूम की बराबरी नहीं कर पाएंगे। ऑप्शंस ग्रीक्स के काम करने के तरीके के कारण लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस में कम अवधि के मुकाबले प्रति यूनिट कैपिटल पर रिटर्न काफी कम मिलता है। अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी वीकली और शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम ही सबसे ज्यादा रहता है, जबकि लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल पेंशन फंड्स और एसेट मैनेजर्स अपनी होल्डिंग को हेज करने के लिए करते हैं।

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमन आर ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीएसई पहले से ही ‘BSE Focused IT Index’ और ‘Bankex’ जैसे लॉन्ग-टर्म सुइट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने भी माना कि एसटीटी और मार्जिन फ्रेमवर्क की समीक्षा से इसे तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

Delhi New EV Policy Explainer: 1 जुलाई से दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी, टू-व्हीलर और बड़ी गाड़ियां खरीदने पर मिलेगी इतनी छूट, देखें लिस्ट

Delhi New EV Policy 2026 Subsidies: दिल्ली में रहने वालों और नई गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली कैबिनेट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में राज्य की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही है।

अगर आप टू-व्हीलर, ऑटो या कमर्शियल गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो सरकार आपको भारी-भरकम छूट देने जा रही है। इस नीति को लागू करने के लिए सरकार करीब ₹7000 करोड़ खर्च करेगी और यह 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। आइए समझते हैं कि आपको किस गाड़ी पर कितनी छूट मिलेगी और कौन से नए नियम लागू होने जा रहे हैं।

गाड़ियों पर मिलने वाली सब्सिडी की पूरी लिस्ट

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर निहारिका के मुताबिक, नए नियमों के तहत अलग-अलग कैटेगरी की गाड़ियों पर मिलने वाली छूट और इंसेंटिव इस प्रकार हैं:

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (बाइक/स्कूटर): नया इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने पर अधिकतम ₹30000 तक की सीधी छूट यानी सब्सिडी मिलेगी।

इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा: तीन पहिया ऑटो खरीदने वाले ग्राहकों को ₹50000 तक का इंसेंटिव दिया जाएगा।

N1 इलेक्ट्रिक ट्रक्स (माल ढोने वाली गाड़ियां): बड़ी कमर्शियल गाड़ियों की खरीद पर सबसे ज्यादा ₹1 लाख तक की बड़ी छूट मिलेगी।

स्क्रैपिंग का एक्स्ट्रा फायदा: अगर आप अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को कबाड़ में देकर नई ईवी खरीदते हैं, तो आपको अलग से स्क्रैपिंग इंसेंटिव का लाभ भी दिया जाएगा।

टैक्स और रजिस्ट्रेशन में 100% की छूट, हाइब्रिड को झटका

अगर आप पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदते हैं, तो आपको दिल्ली सरकार की तरफ से रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की पूरी छूट मिलेगी। यानी सीधे तौर पर हजारों रुपये की एक्स्ट्रा बचत होगी।

हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इस बार हाइब्रिड गाड़ियों पर किसी भी तरह की सब्सिडी या विशेष छूट का प्रावधान नहीं किया गया है। अच्छी बात यह है कि इस पॉलिसी में गाड़ियों की संख्या पर कोई लिमिट नहीं है, यानी एक खरीदार एक से ज्यादा ईवी खरीदने पर भी इन फायदों का लाभ उठा सकता है।

पेट्रोल-डीजल और CNG गाड़ियों पर कब से लगेगा बैन?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा और ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी गाड़ियों के नए रजिस्ट्रेशन को बंद करने का कड़ा फैसला लिया है:

1 जनवरी 2027 से: दिल्ली में सभी नए थ्री-व्हीलर्स (ऑटो) और N1 कैटेगरी के ट्रक्स का रजिस्ट्रेशन सिर्फ और सिर्फ EV के रूप में ही होगा।

1 अप्रैल 2028 से: दिल्ली में सभी नए टू-व्हीलर्स (बाइक और स्कूटर) का रजिस्ट्रेशन भी सिर्फ इलेक्ट्रिक वेरिएंट में ही किया जाएगा। यानी इसके बाद नए पेट्रोल स्कूटर नहीं खरीदे जा सकेंगे।

स्कूल बसों का इलेक्ट्रिफिकेशन: दिल्ली के स्कूलों में चलने वाली बसों के बेड़े को भी धीरे-धीरे चरणों में पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाएगा।

23000 नए चार्जिंग पॉइंट्स और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर

पावर मिनिस्टर आशीष सूद के अनुसार, जैसे-जैसे दिल्ली में ईवी गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, उसी रफ्तार से बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड को भी मजबूत किया जाएगा ताकि पावर सप्लाई में कोई दिक्कत न आए। इस पूरी पॉलिसी की अवधि 2026 से 2030 के दौरान दिल्लीभर में 23000 नए ईवी चार्जिंग पॉइंट्स लगाए जाएंगे ताकि लोगों को रेंज या चार्जिंग स्टेशन खोजने की चिंता न रहे।

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

ये भी पढ़ें- राम मंदिर दान चोरी केस में SBI स्टाफ से क्यों हो रही पूछताछ, बैंक अधिकारी कैसे आए निशाने पर? पढ़ें- इनसाइड स्टोरी

वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।

Awarapan 2 Teaser X Reactions: ‘अक्खा बॉलीवुड एक तरफ, इमरान हाशमी एक तरफ’, आवारापन 2′ का टीजर देख यूजर्स ने दिया मजेदार रिएक्शन

Awarapan 2 Teaser X Reactions: ‘आवारापन 2’ के टीज़र ने फ़ैन्स के दिलों को छू लिया है। वे X (पहले ट्विटर) पर इमरान हाशमी के 19 साल बाद मशहूर किरदार ‘शिवम पंडित’ के तौर पर वापसी का जश्न मना रहे हैं। पुरानी यादें ताज़ा करने वाले पलों, ज़बरदस्त एक्शन और मशहूर गाने ‘तो फिर आओ’ के नए वर्शन से भरपूर इस टीज़र ने दर्शकों को प्रभावित किया है।

कई लोगों ने इसकी पहली झलक को “शुरू से आखिर तक रोंगटे खड़े कर देने वाला” बताया, जबकि दूसरों ने फ़िल्म के इमोशनल अंदाज़, विज़ुअल्स और इमरान की स्क्रीन प्रेज़ेंस की तारीफ़ की। जैसे-जैसे ऑनलाइन उत्साह बढ़ रहा है, ‘आवारापन 2’  इस साल के सबसे चर्चित टीज़र रिलीज़ में से एक बन गया है।

X पर फ़ैन्स इमरान हाशमी की दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस से काफ़ी प्रभावित हुए और कई लोगों ने उन्हें टीज़र की सबसे बड़ी खासियत बताया। कई लोगों ने उनके ज़बरदस्त बॉडी ट्रांसफ़ॉर्मेशन की तारीफ़ करते हुए कहा कि वे “टॉप फ़ॉर्म” में हैं, जबकि दूसरों ने उनके असरदार डायलॉग डिलीवरी और ‘तो फिर आओ’ गाने की वापसी की सराहना की और कहा कि इसे सुनकर उनके “रोंगटे खड़े हो गए”।

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एक फ़ैन ने लिखा, “अक्खा बॉलीवुड एक तरफ़, इमरान हाशमी एक तरफ़,” जिसका मतलब था कि सिर्फ़ इस एक्टर की वजह से ही ‘आवारापन 2’ देखी जा सकती है। जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि ‘द बैडज़ ऑफ़ बॉलीवुड’ में राघव जुयाल का ‘अक्खा’ वाला डायलॉग सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो गया है।

एक और व्यक्ति ने टीज़र को “बहुत बढ़िया” बताया और कास्ट में शबाना आज़मी और सुविंदर विक्की के शामिल होने की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस जोड़ी ने सीक्वल में ज़बरदस्त एक्टिंग का हुनर ​​दिखाया है। कुल मिलाकर, टीज़र ने फ़ैन्स को “बेहद उत्साहित” कर दिया है और कई लोग इसे इस पसंदीदा कल्ट क्लासिक की शानदार वापसी मान रहे हैं।

‘आवारापन 2’ का टीज़र सिर्फ़ पुरानी यादों पर निर्भर रहने के बजाय, शिवम पंडित के इमोशनल सफ़र को फिर से दिखाता है और साथ ही नए एक्शन और किरदारों को भी पेश करता है। शुरुआत का वॉइसओवर माहौल बनाता है, जो दर्शकों को याद दिलाता है कि शिवम आज भी त्याग और किस्मत के बोझ तले दबा हुआ इंसान है। इमरान हाशमी आसानी से इस किरदार में वापस आ जाते हैं। उनका रफ़ लुक, दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस और साफ़ तौर पर दिखता फ़िज़िकल बदलाव यह साबित करता है कि किरदार में बदलाव तो आया है, लेकिन वह अपने अतीत से पूरी तरह निकल नहीं पाया है।

टीज़र ‘तो फिर आओ’ गाने के नए वर्शन के ज़रिए फ़ैन्स के ओरिजिनल फ़िल्म से जुड़े इमोशनल लगाव को भी समझदारी से भुनाता है। यह मशहूर गाना सिर्फ़ पुरानी यादें ताज़ा करने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह उदासी भरे माहौल को और गहरा करता है और इशारा देता है कि दुख और प्यार ही शिवम की कहानी को आगे बढ़ाएंगे। आलिया की कब्र पर उसका जाना इस बात को और पक्का करता है कि यह सीक्वल 2007 की कल्ट क्लासिक फ़िल्म की इमोशनल विरासत से सीधे जुड़ा है, न कि यह कोई अलग-थलग एक्शन फ़िल्म है।

फ़िल्म का आखिरी डायलॉग – “इस बार या तो ये आवारापन खत्म होगा या मैं” – यह संकेत देकर कहानी का रोमांच और बढ़ा देता है कि शिवम का सफ़र अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। ‘आवारापन 2’ 14 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

खेत बेचने पर कितना लगता है टैक्स? ITR में कहां और कैसे दिखाएं यह कमाई, जानिए टैक्स विभाग के जरूरी नियम

Tax on Agricultural Land Sale: भारत में कृषि भूमि यानी खेत बेचने को लेकर आम तौर पर यही माना जाता है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन टैक्स नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। कृषि भूमि बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन ‘ग्रामीण’ इलाके में आती है या ‘शहरी’ इलाके में।

कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें।

ग्रामीण कृषि भूमि: यहां नहीं लगता कोई कैपिटल गेन्स टैक्स

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत, ‘ग्रामीण कृषि भूमि’ को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।

टैक्स छूट: चूंकि यह कैपिटल एसेट नहीं है, इसलिए इसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ नहीं लगता है।

ITR में कहां दिखाएं: चूंकि यह कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री है, इसलिए इसे आईटीआर के Schedule EI यानी टैक्स-फ्री आमदनी वाले कॉलम में दिखाना चाहिए। कई लोग इसे गलती से Schedule CG में दिखा देते हैं, जिससे सिस्टम ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेट कर लेता है और बेवजह परेशानी खड़ी होती है।

शहरी कृषि भूमि: देना होगा टैक्स, लेकिन यहां मिलेगी राहत

अगर आपकी कृषि भूमि ‘शहरी’ दायरे में आती है, तो इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54B बनाई गई है। इसके तहत अगर आप जमीन बेचने से मिले पैसों से कोई दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

कैसे तय होता है कि जमीन ‘ग्रामीण’ है या ‘शहरी’?

कोई भी खेती की जमीन सिर्फ इसलिए ग्रामीण नहीं हो जाती क्योंकि वहां खेती हो रही है। टैक्स नियमों के अनुसार, नजदीकी नगर पालिका की आबादी और वहां से हवाई दूरी के आधार पर इसका फैसला होता है:

स्थानीय निकाय की आबादीनगर पालिका सीमा से जरूरी  न्यूनतम दूरी जमीन का वर्गीकरण
10,000 से 1 लाख के बीच2 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
1 लाख से 10 लाख के बीच6 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
10 लाख से अधिक 8 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)

अगर जमीन इन तय सीमाओं के भीतर आती है, तो उसे ‘शहरी कृषि भूमि’ माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

इनकम टैक्स नोटिस से बचना है, तो पास रखें ये 4 दस्तावेज

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस टैक्स छूट को लेकर स्पष्टीकरण मांगता है, तो आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

तहसीलदार का सर्टिफिकेट: स्थानीय राजस्व प्राधिकारी से मिला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र, जो नजदीकी नगर पालिका से जमीन की सटीक हवाई दूरी और वहां की आबादी की पुष्टि करता हो।

राज्य के राजस्व रिकॉर्ड: जमीन के आधिकारिक दस्तावेज जैसे 7/12 एक्सट्रैक्ट, RTC, या जमाबंदी, जो यह साबित करें कि जमीन आधिकारिक तौर पर कृषि भूमि ही है।

खेती करने का सबूत: बीज, खाद के बिल, सिंचाई के रिकॉर्ड या मंडी की रसीदें, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही थी।

बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: रजिस्टर्ड सेल डीड और बैंक स्टेटमेंट, जो यह साबित करें कि पूरा लेनदेन वैध तरीके से हुआ है और कोई अवैध नकद लेनदेन नहीं हुआ है।

अक्सर होने वाली गलतियां जो लाती हैं टैक्स नोटिस

पूरी तरह छिपा लेना: कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं लगना है तो आईटीआर में क्यों बताएं? यह सबसे बड़ी गलती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी टैक्स विभाग को देता है, जो आपके एआईएस (AIS) में दिखती है। अगर आप इसे ITR में नहीं दिखाएंगे, तो डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है।

खेती न होने पर भी छूट का दावा: अगर कोई जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है लेकिन सालों से वहां कोई खेती नहीं हुई है, तो विभाग आपकी छूट को खारिज कर सकता है। इसलिए कृषि आय या ऑपरेशन्स का सबूत रखना बेहद जरूरी है।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

New Financial Rules From 1 July: हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आती है। ठीक इसी तरह 1 जुलाई 2026 से भी देश में पैसों से जुड़े कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम टैक्सपेयर्स, बैंक ग्राहकों, क्रेडिट कार्ड यूजर्स और पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने वाले लोगों की जेब पर पड़ेगा।

एक तरफ जहां पासपोर्ट बनवाना अब काफी महंगा होने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों की मनमानी और गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने पर सख्त एक्शन की तैयारी में है। आइए समझते हैं कि 1 जुलाई से कौन से 6 बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं।

1. ITR Filing: आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन नजदीक

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आप इस डेडलाइन को मिस करते हैं, तो आपको न सिर्फ लेट फीस और पेनाल्टी भरनी होगी, बल्कि आप अपनी पसंद का टैक्स रिजीम चुनने और पुराने नुकसान को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी गंवा बैठेंगे।

2. Aadhaar Update: आधार में ईमेल अपडेट कराना हुआ बिल्कुल फ्री

आधार कार्ड धारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। 1 जुलाई से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए रजिस्टर्ड ईमेल आईडी अपडेट करने की ₹75 की फीस को पूरी तरह माफ कर दिया है। यह विशेष सुविधा अगले 6 महीनों के लिए यानी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त रहेगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, डिजिटल अपडेट को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

3. Credit Card Rules: एसबीआई और एचडीएफसी कार्ड यूजर्स को झटका

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए 1 जुलाई से दो बड़े बदलाव हो रहे हैं:

SBI Card: एसबीआई कार्ड अपने कुछ चुनिंदा ‘PhonePe SBI Credit Cards’ जैसे- PURPLE और SELECT BLACK के लिए रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम में संशोधन कर रहा है। नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट अर्निंग की सीमा तय की जा रही है और कुछ ट्रांजैक्शंस को इस लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।

HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों को अब हर तिमाही में 3 मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस तभी मिलेंगे, जब उन्होंने पिछली तिमाही में कम से कम ₹60000 खर्च किए हों। उदाहरण के लिए, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में लाउंज का फायदा लेने के लिए आपको अप्रैल-जून 2026 के बीच ₹60000 खर्च करना जरूरी था।

4. Passport Fees: अब जेब करनी होगी ज्यादा ढीली, बढ़ गए दाम

अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो 1 जुलाई से आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के तहत फीस में बढ़ोतरी कर दी है:

सामान्य पासपोर्ट (36 पेज): इसकी फीस ₹1500 से बढ़कर अब ₹2500 हो गई है।

तत्काल पासपोर्ट (36 पेज): तत्काल पॉलिसी के तहत अब आपको ₹3500 की जगह ₹5000 देने होंगे।

60 पेज का पासपोर्ट: साधारण के लिए फीस ₹3500 और तत्काल के लिए ₹6000 तय की गई है।

5. RBI New Rules: बैंकों की मनमानी खत्म, ‘मिस-सेलिंग’ पर मिलेगा पूरा रिफंड

बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 1 जुलाई 2026 से ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ के तहत नया सख्त ढांचा लागू कर रहा है। अक्सर बैंक कर्मचारी या एजेंट ग्राहकों को बिना बताए या गुमराह करके इंश्योरेंस पॉलिसी या अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेच देते थे।

नए नियम के मुताबिक, अगर मिस-सेलिंग साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और साथ ही नुकसान के लिए मुआवजा भी देना होगा। इस नियम के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों को झांसा देने वाले ‘डार्क पैटर्न्स’ पर भी रोक लगेगी।

₹10000 की मंथली SIP से बने ₹1.78 करोड़! टाटा के इस फंड ने 22 साल में बदल दी निवेशकों की किस्मत

Tata Value Fund 22 Years Completion: अगर आप म्यूचुअल फंड में लॉन्ग-टर्म निवेश की ताकत को समझना चाहते हैं, तो टाटा एसेट मैनेजमेंट का ‘टाटा वैल्यू फंड’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। 29 जून 2026 को इस ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम ने अपनी लॉन्चिंग के शानदार 22 साल पूरे कर लिए हैं। इस फंड को 29 जून 2004 को लॉन्च किया गया था।

फंड के जून 2026 के प्रोडक्ट नोट के मुताबिक, जिन निवेशकों ने इस स्कीम की शुरुआत से ही इसमें भरोसा जताया, वे आज करोड़पति बन चुके हैं। आइए समझते हैं कि इस वैल्यू फंड ने निवेशकों को कैसा रिटर्न दिया है और इसका मौजूदा पोर्टफोलियो कैसा है।

SIP रिटर्न का जादू: ₹26.3 लाख का निवेश बना ₹1.78 करोड़

टाटा वैल्यू फंड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्कीम की शुरुआत से लेकर अब तक के रिटर्न इस प्रकार हैं:

मंथली SIP का कमाल: अगर किसी निवेशक ने जून 2004 में ₹10000 प्रति महीने की SIP शुरू की होती, तो 31 मई 2026 तक उसका कुल निवेश ₹26.3 लाख होता। आज इसकी वैल्यू बढ़कर करीब ₹1.78 करोड़ हो चुकी है। इस लिहाज से फंड ने शुरुआत से अब तक 15.07% का सालाना एसआईपी रिटर्न दिया है।

लंप सम निवेश की ताकत: अगर किसी निवेशक ने लॉन्चिंग के समय इस फंड में सिर्फ ₹10000 एकमुश्त डाले होते, तो आज वह रकम बढ़कर करीब ₹3.39 लाख हो चुकी होती। यह 17.44% का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्शाता है।

बेंचमार्क के मुकाबले कैसा रहा प्रदर्शन?

पिछले 22 सालों में इस फंड ने देश के प्रमुख इंडेक्स को कड़ी टक्कर दी है:

  • Tata Value Fund (लम्प-सम): 17.44% CAGR
  • Nifty 500 TRI: 15.50% CAGR
  • Nifty 50 TRI: 14.74% CAGR

फंड साइज और कहां हो रहा है आपका पैसा निवेश?

31 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, टाटा वैल्यू फंड कुल ₹8345.8 करोड़ के एसेट्स (AUM) का प्रबंधन कर रहा है और इसके पोर्टफोलियो में 44 स्टॉक्स शामिल हैं। फंड का झुकाव बड़े शेयरों यानी Large-Caps की तरफ ज्यादा है:

  • लार्ज-कैप: 62% एलोकेशन
  • मिड-कैप: 26% एलोकेशन
  • स्मॉल-कैप: 10% एलोकेशन

फंड इस समय बेंचमार्क के मुकाबले फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑयल एंड गैस, पावर और FMCG सेक्टर पर ज्यादा भरोसा जता रहा है। इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों में भी हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है।

पोर्टफोलियो में नए शेयरों की एंट्री और किसकी हुई छुट्टी?

मार्च से मई 2026 के बीच फंड मैनेजर ने अपने पोर्टफोलियो में कई बड़े बदलाव किए हैं:

इन शेयरों की हुई एंट्री: प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स, एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, अडाणी पावर, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स।

इन शेयरों से बनाया फासला: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, विप्रो और एसीसी।

फंड मैनेजर: इस फंड की कमान सोनम उदासी के हाथों में है, जो अप्रैल 2016 से लगातार इस स्कीम को मैनेज कर रहे हैं।

शॉर्ट-टर्म पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर

लंबी अवधि के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, हालिया मार्केट वोलेटिलिटी के कारण इसका शॉर्ट-टर्म रिटर्न मिला-जुला रहा है। 31 मई 2026 को समाप्त हुए एक साल की अवधि में इस स्कीम ने 0.05% का मामूली निगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी-500 TRI ने 0.28% का रिटर्न दिया है।

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फंड हाउस का मानना है कि मौजूदा बाजार उन कंपनियों को पसंद कर रहा है जहां अर्निंग विजिबिलिटी साफ है। ऐसे में पोर्टफोलियो का फोकस ‘क्वालिटी और कंसिस्टेंट कंपाउंडिंग’ पर है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं और इसमें कोई गारंटीड रिटर्न नहीं मिलता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ali Fazal: जब अली फजल को फिल्ममेकर्स ने ‘मिर्जापुर’ न करने की दी थी सलाह, एक्टर बोले- मैं भी बहुत डरा हुआ था

Ali Fazal: सीरीज़ को फ़िल्म में बदलने के बारे में बात करते हुए अली ने PTI से कहा, “भारत में यह पहली बार हो रहा है कि किसी शो को फ़िल्म में बदला जा रहा है। यह एक नेशनल लेवल का एक्सपेरिमेंट है जो हम कर रहे हैं। कहानी और किरदार सभी अच्छे हैं। हम हर (प्रमोशनल) चीज़ शेयर करने के लिए उत्साहित हैं।”

अली ने यह भी बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला कि ‘फुकरे’ के डायरेक्टर मृगदीप सिंह लांबा ने ही ‘मिर्ज़ापुर’ के मेकर्स को उनका नाम सुझाया था। एक्टर ने याद किया कि उस समय वह इंडस्ट्री में अपनी जगह बना रहे थे और उन्हें इस प्रोजेक्ट से दूर रहने की सलाह दी गई थी।

उन्होंने कहा, “उस समय मैं डरा हुआ था। मुझे नहीं पता था कि इसका फ़ॉर्मेट क्या होगा। यह पहली बार था जब (भारत में) शुरुआती कुछ शो बन रहे थे। फ़िल्ममेकर्स मुझसे पूछ रहे थे कि मैं क्या कर रहा हूं। वे कहते थे, ‘फिल्में करो’। मैंने OTT और शो के बदलते दौर को देखा। मुझे लगा कि एक क्रांति आने वाली है। पुनीत कृष्णा ने जिस तरह से स्क्रिप्ट लिखी थी और मिर्ज़ापुर की जो दुनिया उन्होंने बनाई थी, वह वाकई तारीफ़ के काबिल थी।”

2018 में अपनी शुरुआत के बाद से, ‘मिर्ज़ापुर’ ने भारत की सबसे सफल वेब सीरीज़ में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश में क्राइम और राजनीतिक सत्ता की पृष्ठभूमि पर बनी इस सीरीज़ के दो सफल सीज़न आए, जिन्हें दर्शकों और क्रिटिक्स, दोनों से ही खूब तारीफ़ मिली।

अली के अलावा, इस सीरीज़ में पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुगल, विजय वर्मा, ईशा तलवार, हर्षिता गौर और श्रिया पिलगांवकर जैसे कई कलाकार शामिल थे। ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ में अली एक बार फिर गुड्डू पंडित का किरदार निभा रहे हैं, जो पहले बॉडीबिल्डर था और बाद में गैंगस्टर बन गया। कहा जा रहा है कि यह फ़िल्म पहले सीज़न के एक अनकहे पहलू को दिखाएगी और साथ ही कई अहम किरदारों को भी वापस लाएगी। इस हफ़्ते की शुरुआत में जारी किए गए इसके ऑफ़िशियल टीज़र से पता चलता है कि यह कहानी अब और भी बड़े सिनेमैटिक स्केल पर आगे बढ़ेगी।

दिव्येंदु और पंकज त्रिपाठी, फ़ैन्स के पसंदीदा मुन्ना त्रिपाठी और कालीन भैया के रोल में वापसी करने के लिए तैयार हैं। कास्ट में एक नया नाम जितेंद्र कुमार का है, जो बबलू पंडित का रोल निभाएंगे; यह रोल पहले सीज़न में विक्रांत मैसी ने निभाया था। रवि किशन भी एक अहम रोल में कास्ट में शामिल हुए हैं। यह फ़िल्म 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

El Nino Impact: मानसून की एंट्री पर बड़ा अपडेट! बारिश तो होगी पर अल नीनो की इस चाल ने उड़ाई सबकी नींद

El Nino Updates: देश में मानसून की चाल को लेकर एक तरफ जहां राहत भरी खबर आई है, वहीं दूसरी तरफ अल नीनो (El Nino) के असर ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रहा है। लेकिन अल नीनो के कारण सामान्य से कम मानसूनी गतिविधियों ने देश के कई हिस्सों में जल भंडारण के स्तर को प्रभावित किया है।

बंगाल की खाड़ी में बनेगा नया सिस्टम, मानसून पकड़ेगा रफ्तार

हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट में स्काईमेट के हवाले से बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर मानसूनी सिस्टम विकसित होने की संभावना है। यह नया सिस्टम मानसून को फिर से पुनर्जीवित करने में मदद कर सकता है। इसकी मदद से मानसूनी बारिश मध्य और उत्तरी भारत के आंतरिक हिस्सों तक पहुंचेगी।

एक संक्षिप्त ठहराव के बाद मानसून की गतिविधियां फिर से गति पकड़ने की उम्मीद है। IMD का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

अल नीनो की चाल ने बढ़ाई चिंता, खाली हो रहे जलाशय

बारिश के इस सकारात्मक रुख के बीच अल नीनो की स्थिति को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। सामान्य से कम मानसूनी गतिविधियों के चलते देश के कई हिस्सों में जलाशयों का वाटर लेवल काफी प्रभावित हुआ है। 25 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर घटकर 26.37% पर आ गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 36.02% था। हालांकि, यह मौजूदा स्तर सामान्य भंडारण स्तर (24.95%) से थोड़ा अधिक है।

महाराष्ट्र में 28 जून तक जलाशयों का जलस्तर गिरकर 23.38% रह गया है, जो पिछले साल इसी तारीख को 43.75% था। मुंबई के जलाशयों में पानी का स्तर 7.08% दर्ज किया गया है, जो पिछले साल इसी तारीख के 5.35% के मुकाबले थोड़ा बेहतर है।

दिल्ली-यूपी और पंजाब समेत उत्तर भारत में भारी बारिश का अनुमान

आईएमडी के मुताबिक, उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में अगले एक या दो दिनों के दौरान छिटपुट बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से 3 जुलाई के बीच काफी व्यापक से लेकर देशव्यापी बारिश होने का अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत के हिस्सों और महाराष्ट्र के कोंकण व गोवा क्षेत्र में 4 जुलाई तक व्यापक से बेहद व्यापक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

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