कार का माइलेज हो रहा है कम? मारुति, हुंडई, टाटा और Kia समेत हर पेट्रोल कार के लिए जानिए ईंधन बचाने के सबसे आसान तरीके

भारत में कार खरीदते समय लोग सबसे पहले उसके माइलेज पर ध्यान देते हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब अच्छी माइलेज पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गई है। वहीं, देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बढ़ने के बाद भी ईंधन की बचत को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। हालांकि, कार कंपनियों का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन किसी भी कार का वास्तविक माइलेज काफी हद तक आपकी ड्राइविंग की आदत, गाड़ी की देखभाल और सड़क की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

चाहे आपके पास मारुति सुजुकी स्विफ्ट, हुंडई क्रेटा, टाटा नेक्सन, महिंद्रा XUV 3XO या किआ सेल्टोस जैसी कोई भी कार हो, कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप हर लीटर ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं और अपनी ईंधन लागत को कम कर सकते हैं।

क्या E20 पेट्रोल से कार का माइलेज कम हो जाता है?

E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में एनर्जी कम होती है। यही वजह है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कार का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। 4 जुलाई को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि E20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू, E10 पेट्रोल के मुकाबले करीब 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। इसी कारण माइलेज में भी लगभग इतनी ही कमी देखने को मिल सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कार सामान्य तौर पर 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उसका माइलेज करीब 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर तक कम हो सकता है।

कार का माइलेज कैसे बढ़ाएं?

चाहे आपकी कार E10 पेट्रोल पर चलती हो या E20 पेट्रोल पर, अच्छी माइलेज पाने का सबसे आसान तरीका है संतुलित और आराम से ड्राइविंग करना। तेज रफ्तार में अचानक एक्सीलेटर दबाने, बार-बार तेज ब्रेक लगाने और इंजन को बेवजह ज्यादा आरपीएम (स्पीड) पर चलाने से बचें। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। शहर के ट्रैफिक में गाड़ी चलाते समय धीरे-धीरे एक्सीलेटर दबाएं। इससे इंजन पर कम दबाव पड़ता है और ईंधन की बचत होती है। वहीं, हाईवे पर जहां संभव हो, एक समान गति बनाए रखकर गाड़ी चलाने से भी बेहतर माइलेज मिल सकता है।

क्या टायर का प्रेशर माइलेज पर असर डालता है?

टायर में सही हवा होना कार की माइलेज के लिए बहुत जरूरी है। अगर टायर में हवा कम होगी, तो सड़क पर उसका रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाएगा। ऐसे में इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी और ईंधन की खपत भी बढ़ जाएगी। इसलिए कार मालिकों को कम से कम हर 15 दिन में एक बार टायर का प्रेशर जरूर जांचना चाहिए। हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए तय प्रेशर के अनुसार ही टायर में हवा भरवाएं। इससे न सिर्फ माइलेज बेहतर होगी, बल्कि टायर की उम्र भी बढ़ेगी।

क्या समय पर सर्विस न कराने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

अगर कार की सर्विस समय पर नहीं कराई जाती, तो उसका सीधा असर माइलेज पर पड़ सकता है। एयर फिल्टर गंदा या जाम होने, स्पार्क प्लग घिस जाने और इंजन ऑयल पुराना होने से इंजन पहले जितनी क्षमता से काम नहीं कर पाता। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाती है। इसलिए कार की नियमित सर्विस कराना बहुत जरूरी है। समय पर सर्विस होने से इंजन बेहतर तरीके से काम करता है, ईंधन की बचत होती है और कार की परफॉर्मेंस भी अच्छी बनी रहती है। हर कार के साथ मिलने वाली ओनर मैनुअल में सर्विस का पूरा शेड्यूल दिया होता है। उसी के अनुसार समय-समय पर सर्विस कराते रहें। यह न सिर्फ कार को बेहतर स्थिति में रखता है, बल्कि कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करने में भी मदद करता है।

क्या ज्यादा सामान रखने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

कार में जितना ज्यादा वजन होगा, इंजन को उसे चलाने के लिए उतनी ही ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए अगर आप डिग्गी में बिना जरूरत का भारी सामान रखते हैं, तो इससे ईंधन की खपत बढ़ सकती है और माइलेज कम हो सकती है। इसके अलावा, कार की छत पर लगाए जाने वाले रूफ कैरियर या रूफ बॉक्स भी हवा के प्रवाह में रुकावट पैदा करते हैं। खासकर हाईवे पर इनकी वजह से कार को आगे बढ़ने में ज्यादा ताकत लगती है, जिससे माइलेज पर असर पड़ता है।

क्या गाड़ी खड़ी होने पर इंजन चालू रखना सही है?

आज की पेट्रोल कारें खड़ी रहने पर भी ईंधन खर्च करती हैं। अगर आपको एक मिनट या उससे ज्यादा समय तक कहीं रुकना है, तो जहां संभव हो, इंजन बंद कर देना बेहतर होता है। इससे ईंधन की बचत होती है। आजकल कई नई कारों में ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम दिया जाता है। यह सुविधा ट्रैफिक सिग्नल या लंबे इंतजार के दौरान अपने आप इंजन बंद कर देती है और जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू कर देती है, जिससे ईंधन की बचत होती है।

क्या एसी चलाने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

जी हां, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप कार कैसे चला रहे हैं। अगर आप लंबे समय तक एसी को सबसे कम तापमान पर चलाते हैं, तो इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ईंधन की खपत बढ़ सकती है। बेहतर माइलेज के लिए एसी का तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, रीसर्कुलेशन मोड का इस्तेमाल करने से भी एसी जल्दी ठंडा करता है और ईंधन की बचत में मदद मिलती है।

क्या प्रीमियम पेट्रोल से माइलेज बढ़ जाती है?

हर बार ऐसा नहीं होता। अगर आपकी कार बनाने वाली कंपनी ने खास तौर पर प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी है, तो केवल ज्यादा ऑक्टेन वाला पेट्रोल भरवाने से माइलेज में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता। भारत में बिकने वाली ज्यादातर पेट्रोल कारें सामान्य पेट्रोल पर बेहतर तरीके से चलने के लिए बनाई जाती हैं। जिन कारों में E20 पेट्रोल की अनुमति है, वे भी सामान्य रूप से उसी ईंधन पर अच्छी तरह काम करती हैं। इसलिए बिना जरूरत सिर्फ माइलेज बढ़ाने के लिए प्रीमियम पेट्रोल पर अतिरिक्त खर्च करना जरूरी नहीं है।

सौरव जोशी के E20 फ्यूल वाले वायरल वीडियो के बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने जारी किया बयान, कस्टमर्स को बताईं ये जरूरी बातें

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में, मर्सिडीज-बेंज इंडिया के ऑफिशियल हैंडल ने कहा कि “सभी मर्सिडीज-बेंज पेट्रोल BS VI गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ पूरी तरह से इस्तेमाल के लायक हैं और संबंधित अधिकारियों ने इसे सर्टिफाइड भी किया है।” भारत के पॉपुलर डेली व्लॉगर सौरव जोशी ने हाल ही में YouTube पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी मर्सिडीज-बेंज लग्जरी गाड़ी का माइलेज सिर्फ दो दिनों में 17 से घटकर 5 हो गया।

उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी की एफिशिएंसी सिर्फ 48 घंटों में बहुत ज़्यादा गिर गई है। जोशी ने अपने दर्शकों से कहा, “कल मैंने आपको दिखाया था कि हमारी कार का माइलेज 17 से सीधे 9 पर आ गया था।” उन्होंने आगे कहा, “और क्या आपको पता है कि आज यह कितना हो गया है? आज यह पाच पर पहुंच गया है… इसे देखिए, यह पांच का माइलेज दिखा रहा है।”

जोशी ने इसके लिए लोकल फिलिंग स्टेशनों पर मिलने वाले फ्यूल को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “एथेनॉल की वजह से ही ऐसा हुआ है।” व्लॉगर ने बताया कि पहले पेट्रोल की एक फुल टैंक से गाड़ी लगभग 800 किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब रिफिलिंग के बाद अनुमानित रेंज सिर्फ 480 किलोमीटर ही दिखाती है। उन्होंने कहा कि रेंज में आई इस भारी कमी की वजह से उन्हें जर्मन SUV के पेट्रोल इंजन में संभावित मैकेनिकल खराबी की चिंता हो रही है।

उन्होंने कहा, “पता नहीं यह कार कब खराब हो जाए… आजकल पेट्रोल भरवाने में भी बहुत डर लगता है।” जोशी ने यह भी बताया कि उनके पास G-Wagon (एक और मर्सिडीज SUV) का इलेक्ट्रिक वर्जन है, जिससे उन्हें इथेनॉल से जुड़ी चिंताओं की कोई फिक्र नहीं रहती। जोशी का वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के कुछ ही समय बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने ग्राहकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की। हालांकि इस बयान में जोशी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसमें E20 पेट्रोल को लेकर उनकी चिंताओं का जिक्र किया गया।

जर्मन कार कंपनी ने कहा, “मर्सिडीज़-बेंज के लिए ग्राहकों की सुरक्षा, गाड़ी की भरोसेमंदता और परफॉर्मेंस सबसे जरूरी हैं। मर्सिडीज-बेंज की सभी पेट्रोल BS VI गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से सही हैं और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें इसके लिए सर्टिफाई भी किया है।”

“हम ग्राहकों की किसी भी तकनीकी सवाल में मदद करने के लिए तैयार हैं। मर्सिडीज-बेंज सस्टेनेबल मोबिलिटी (पर्यावरण के अनुकूल परिवहन) के लिए प्रतिबद्ध है।”E20 फ्यूल एक मिला-जुला मोटर फ्यूल है जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। भारत में E20 फ्यूल को बढ़ावा देने का मुद्दा विवादित हो गया है क्योंकि ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि इससे पुरानी गाड़ियों (जो इसके लिए नहीं बनी हैं) के इंजन खराब हो सकते हैं और माइलेज भी कम हो सकता है।

हालांकि, शुक्रवार को सरकार ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल प्रोग्राम का बचाव किया। सरकार ने इंजन खराब होने और माइलेज कम होने की चिंताओं के बीच कहा कि इस स्कीम से चीनी अर्थव्यवस्था को मदद मिली है, किसानों की आय बढ़ी है और 2014-15 से देश के ₹1.90 लाख करोड़ से ज़्यादा विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

फ्रांस की इस ऑटोमोबाइल कंपनी ने पेश की कुत्तों के लिए SUV, फीचर्स देख रह जाएंगे दंग

Peugeot E-5008 Dog Edition: फ्रांस की ऑटोमोबाइल कंपनी Peugeot ने एक ऐसा कॉन्सेप्ट मॉडल पेश किया है, जिसे खास तौर पर कुत्तों के साथ सफर करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। Peugeot E-5008 Dog Edition नाम का यह कॉन्सेप्ट फैमिली SUV का एक नया रूप है, जिसमें पालतू कुत्तों की सुविधा पर खास फोकस किया गया है। यह उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो अपने कुत्तों के साथ अक्सर यात्रा करते हैं और चाहते हैं कि कार का केबिन उनके लिए ज्यादा कंफर्ट हो।

पालतू जानवरों के लिए डिजाइन किया गया

ऑटोमोटिव कंपनी Stellantis ने भी कहा कि इस कॉन्सेप्ट को कुत्ते की नजर से सोचकर डिजाइन किया गया है। इसी वजह से SUV के अंदर कई चीजें खास तौर पर कुत्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। कार के केबिन में ऐसे कलर ऑप्शन का इस्तेमाल किया गया है, जो कुत्तों की देखने की क्षमता से प्रेरित हैं। इसमें शांत नीले रंग के साथ पीले रंग की हल्की झलक दी गई है। इसका मकसद सफर के दौरान कुत्तों के लिए माहौल को ज्यादा आरामदायक और आसान बनाना है, साथ ही मालिकों के लिए इसे साफ-सुथरा और जाना-पहचाना बनाए रखना है।

इसके अलावा, गाड़ी के अंदर आरामदायक सफर के लिए मुलायम और नॉन-स्लिप मटीरियल का भी इस्तेमाल किया गया है। यह सुनने में भले ही छोटी बात लगे, लेकिन उन पालतू जानवरों के लिए यह बहुत जरूरी है जो गाड़ी चलते समय अक्सर इधर-उधर घूमते रहते हैं। इससे उन्हें बेहतर पकड़ और आराम मिलता है।

पालतू जानवरों के लिए कई काम के फीचर्स

इस कॉन्सेप्ट में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कुत्तों के साथ सफर को ज्यादा आरामदायक बनाते हैं। इसमें सबसे खास मॉड्यूलर मैट्रेस है। इसे पीछे की सीटों पर या बूट (कार्गो एरिया) में लगाया जा सकता है। ताकि सीटों को गंदगी और कुत्तों के बालों से बचाया जा सके। वहीं, सफर खत्म होने के बाद यही मैट्रेस कुत्ते के बिस्तर (डॉग बेड) में भी बदल जाता है।

इसके अलावा, उन कुत्तों के लिए विंडो हेडरेस्ट भी दिया गया है, जो बाहर देखते हुए सिर टिकाकर आराम करना पसंद करते हैं। यह एक मुलायम पीले रंग का कुशन है, जिसे खिड़की के शीशे पर लग जाता है और सफर के दौरान पालतू जानवर को ज्यादा आराम देता है।

इस कॉन्सेप्ट में और भी चीजें शामिल हैं, जैसे कि इंटीग्रेटेड बाउल, बैग, कनेक्टेड हार्नेस और यहां तक कि कुत्ते का खिलौना भी। इसमें  (Vehicle-to-Load) V2L-पावर्ड पेट ड्रायर भी शामिल है, जिसे इस्तेमाल के बाद लोड फ्लोर के नीचे रखा जा सकता है, जिससे पता चलता है कि इस कार की डिजाइन पर कितनी बारीकी से काम किया गया है।

कुत्ते का ध्यान रखने वाली कार

Peugeot E-5008 Dog Edition में एक नेविगेशन फीचर भी है, जो पार्क या टहलने की जगहों के पास चार्जिंग स्टेशन का सुझाव देता है। इसमें ‘डॉग रिट्रीवर’ नाम का एक और फंक्शन है, जो खोए हुए कुत्ते को वापस बुलाने के लिए आवाज निकाल सकता है, उसके लौटने पर उसे पहचान सकता है और उसे कार में वापस आने में मदद कर सकता है।

इसमें ‘डॉग गार्डियन मोड’ भी है, जो छोटी-मोटी रुकावटों के दौरान कार के अंदर का तापमान आरामदायक बनाए रखता है और साथ ही दूर से ही कार पर नजर रखने की सुविधा भी देता है।

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E20 Petrol: एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल क‍ितना सही? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द‍िया जवाब, बताई सच्‍चाई

देशभर में 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लागू करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार की इस योजना को लेकर उठ रहे हर सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी इंजन खराब होने और लोगों के विरोध जैसी बातें सही नहीं हैं। एक खास बातचीत में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार का ग्रीन फ्यूल अभियान पर्यावरण को बेहतर बनाने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने खास तौर पर पुरानी गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली चिंताओं को भी खारिज किया। मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल सर्विस सेक्टर के उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से बड़े पैमाने पर वाहनों में मैकेनिकल खराबी हो रही है।

E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मारुति सुजुकी ने अब तक करीब 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की है, लेकिन E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वाहन बनाने वाली कंपनियों और मैकेनिकों, दोनों को ही कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं मिली है। मंत्री ने यह भी बताया कि शुरुआत में वारंटी और बीमा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की अफवाहें फैली थीं, जिससे वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब ये सभी समस्याएं दूर कर ली गई हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पहले कुछ बीमा कंपनियों के बारे में कहा जा रहा था कि वे E20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान का दावा स्वीकार नहीं करेंगी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वाहन मालिकों को वारंटी और बीमा से जुड़ी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

सरकार का दावा: E20 पेट्रोल से इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर

सरकार का कहना है कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) कम होती है। लेकिन सरकार का मानना है कि केवल माइलेज देखकर इस ईंधन का आकलन करना सही नहीं है।

  • बेहतर पिकअप: इथेनॉल की वजह से गाड़ी का पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर होता है। साथ ही इंजन का रिस्पॉन्स भी तेज मिलता है।
  • इंजन की बेहतर सुरक्षा: E20 पेट्रोल का ऑक्टेन स्तर ज्यादा होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग (असामान्य आवाज) की संभावना कम होती है और इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
  • लंबे समय तक सुरक्षित: सरकार का कहना है कि कई परीक्षणों में यह पाया गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन के अंदरूनी हिस्सों को लंबे समय में कोई नुकसान नहीं होता।

‘E20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर कदम…’,

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल का आकलन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी नई तकनीक को उसके सभी फायदे और लंबे समय के असर को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिला पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि नई तकनीक का उद्देश्य हमेशा ऐसी व्यवस्था अपनाना होता है, जो पहले से ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल इसी बदलाव का हिस्सा है और इसका मकसद देश को स्वच्छ ईंधन अपनाने के साथ-साथ भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाना है।

E85 पेट्रोल लाने की तैयारी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही E85 ईंधन लाने की तैयारी कर रही है। इस ईंधन में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होगा। इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) में ही किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना से देश की अर्थव्यवस्था और किसानों, दोनों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार, अगर यह योजना नहीं होती तो भारत को ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ता और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज के मुकाबले अधिक होतीं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण से विदेशों से कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। इससे देश को वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का कम असर झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से विदेशों में तेल खरीदने पर होने वाला खर्च घटता है और इसका लाभ देश के किसानों और कृषि क्षेत्र तक पहुंचता है। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिल रही है।

EV और बायोफ्यूल दोनों को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E25 पेट्रोल को लेकर लोगों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल E25 केवल परीक्षण (ट्रायल) के चरण में है और इसे अभी आम लोगों के लिए लागू नहीं किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में ईंधन से जुड़ा कोई भी बदलाव जल्दबाजी में नहीं करेगी। सभी फैसले वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से ही लागू किए जाएंगे। हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ बायोफ्यूल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी बराबर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य स्वच्छ और हरित परिवहन का है, इसलिए बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

कम इनकम में कार खरीदना अब हुआ और आसान, सैलरी बेस पर ऐसे करें सही बजट प्लान!

घर के बाद कार खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल डिसिजन होता है। सही कार चुनते समय सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि आपकी सालाना इनकम, मासिक खर्च, बचत और फ्यूचर की फाइनेंशियल प्लान का भी ध्यान रखना चाहिए। आमतौर पर ऐसी कार चुनना बेहतर माना जाता है, जिसकी ऑन-रोड कीमत आपकी सालाना टेक-होम इनकम के आसपास हो, ताकि ईएमआई और बाकी खर्च आसानी से संभाले जा सकें। आइए जानते हैं कि 2026 में आपकी सैलरी के हिसाब से कौन-सी कार खरीदना सबसे सही ऑप्शन हो सकता है:

सालाना आय: ₹10 लाख से ज़्यादा

10 अक्टूबर से बुक कर पाएंगे टाटा टियागो ईवी, जनवरी 2023 से मिलेगी डिलेवरी - carandbike

इस बजट में लोग आमतौर पर किफायती और माइलेज-फ्रेंडली हैचबैक या एंट्री SUV चुनते हैं। मारुति सुजुकी स्विफ्ट, हुंडई ग्रैंड i10 Nios और टाटा टियागो जैसे मॉडल भरोसेमंद और लो मेंटेनेंस विकल्प हैं। SUV लुक के लिए रेनॉल्ट काइगर और निसान मैग्नाइट भी अच्छे ऑप्शन हैं, जो स्टाइल और बजट दोनों का बैलेंस रखते हैं।

सालाना आय: ₹10-15 लाख

New Baleno 2022: मारुति सुजुकी ने लॉन्च की नए जमाने की नई बलेनो, पहली बार इस सेगमेंट में मिलेंगे ये फीचर्स, जानें कीमत - maruti suzuki launches new age baleno starting in

इस इनकम में प्रीमियम हैचबैक और कॉम्पैक्ट SUV बेहतर ऑप्शन बनते हैं। मारुति बलेनो और टोयोटा ग्लैंज़ा फीचर्स और माइलेज के लिए पॉपुलर हैं, जबकि हुंडई i20 और टाटा अल्ट्रोज़ स्टाइल और सेफ्टी का अच्छा कॉम्बिनेशन देते हैं। SUV सेगमेंट में हुंडई एक्सटर, टाटा पंच, मारुति फ्रॉन्क्स और टोयोटा टैसर काफी पसंद की जाती हैं।

सालाना आय: ₹15-25 लाख

किआ सोनेट सबकॉम्पैक्ट SUV के लॉन्च की तारीख़ का हुआ खुलासा - carandbike

यह सेगमेंट कॉम्पैक्ट SUV और सेडान का बैलेंस है। मारुति ब्रेज़ा, हुंडई वेन्यू, किआ सोनेट और महिंद्रा XUV 3XO जैसे मॉडल काफी डिमांड में हैं। वहीं होंडा एलिवेट जैसी SUV और फॉक्सवैगन वर्टस या स्कोडा स्लाविया जैसी सेडान भी अच्छे ऑप्शन हैं।

सालाना आय: ₹25-40 लाख

टाटा हैरियर के वेरिएंट लाइनअप में बदलाव - नए ट्रिम्स के बारे में विस्तार से जानकारी

इस इनकम ग्रुप में मिड-साइज SUV सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं। हुंडई क्रेटा और किआ सेल्टोस इस सेगमेंट की टॉप कारें हैं। इसके अलावा टोयोटा हाइब्रिड मॉडल और मारुति ग्रैंड विटारा भी अच्छे ऑप्शन हैं। बड़ी और पावरफुल SUV के लिए महिंद्रा स्कॉर्पियो-N, टाटा हैरियर और MG हेक्टर भी शामिल हैं।

सालाना आय: ₹40-60 लाख

टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस भारत में लॉन्च, कीमत 18.30 लाख रुपये से शुरू | CarDekho.com

यहां लोग प्रीमियम SUV और लग्जरी जैसी सुविधाओं वाली गाड़ियों की तरफ बढ़ते हैं। टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस फैमिली के लिए बेहद भरोसेमंद विकल्प है। महिंद्रा XUV700 फीचर्स के लिए मशहूर है। वहीं जीप कंपास, हुंडई टक्सन और BYD Atto 3 (EV) भी मजबूत ऑप्शन’हैं।

सालाना आय: ₹60 लाख से ₹1 करोड़

GLA 200 1080P, 2K, 4K, 5K HD wallpapers free download | WallpaperFlare

इस लेवल पर लग्जरी ब्रांड्स में एंट्री आसान हो जाती है। BMW X1, Mercedes-Benz GLA और Volvo XC40 जैसी SUV लोकप्रिय हैं। सेडान सेगमेंट में Audi A4, BMW 3 Series और Mercedes C-Class पसंद की जाती हैं। Toyota Fortuner भी प्रीमियम SUV के तौर पर मजबूत ऑप्शन बनी रहती है।

सालाना आय: ₹1 करोड़+

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यह लेवल पूरी तरह लग्जरी और प्रीमियम कारों का है। Mercedes-Benz E-Class, BMW 5 Series जैसी सेडान और Audi Q5, BMW X3, Mercedes GLC जैसी SUV आमतौर पर पसंद की जाती हैं। वहीं Range Rover और Toyota Vellfire जैसी गाड़ियां प्रीमियम लाइफस्टाइल का एक्सपीरियंस देती हैं।

आज के समय में सभी कार सेगमेंट में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में समझदारी इसी में है कि कार खरीदने का फैसला अपनी सालाना आय को ध्यान में रखकर लिया जाए। हर व्यक्ति की फाइनेंशियल सिचुएशन अलग होती है, लेकिन सैलरी के बेस पर बजट डिसाइड करने से सही ऑप्शन चुनना आसान हो जाता है।

E25 Petrol: सरकार E25 पेट्रोल लॉन्च करने से पहले सतर्क, इंजन और माइलेज पर असर की हो रही जांच

E25 Petrol: E25 पेट्रोल यानी 75% पेट्रोल और 25% एथेनॉल के मिश्रण को लागू करने की दिशा में सरकार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। हालांकि, अंतिम फैसला लेने से पहले सरकार ऑटो कंपनियों, ऑयल कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह ले रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती।

पहले E20 का असर समझना चाहती है सरकार

सरकार फिलहाल यह जांच रही है कि E20 पेट्रोल का गाड़ियों के इंजन, दूसरे पुर्जों और माइलेज पर क्या असर पड़ा है। इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही E25 को मंजूरी देने पर फैसला लिया जाएगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार इस दिशा में ‘सोच-समझकर’ आगे बढ़ना चाहती है। इंडस्ट्री से भी इसी तरह की राय मिली है।

ऑयल कंपनियां तैयार, मंजूरी का इंतजार

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां E25 पेट्रोल की सप्लाई के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुकी हैं। अब उन्हें सिर्फ सरकार की मंजूरी का इंतजार है।

एक सरकारी रिफाइनरी के अधिकारी ने बताया कि मंजूरी मिलते ही E25 की सप्लाई शुरू की जा सकती है। हालांकि, सरकार की अनुमति के बिना इसे बाजार में नहीं उतारा जाएगा।

E20 का लक्ष्य समय से पहले पूरा

भारत ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले हासिल कर लिया है। पहले यह लक्ष्य 2030 तक पूरा होना था।

सरकार ने पहले ही शुरू कर दी तैयारी

सरकार ने E20 से आगे बढ़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। मई में E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए नए भारतीय मानक (Indian Standards) जारी किए गए थे।

इसके बाद जून में सरकार ने इन नए एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल्स पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में छूट भी दे दी। माना जा रहा है कि ये कदम भविष्य में E25 लागू करने की तैयारी का हिस्सा हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक E25 की लॉन्चिंग की कोई तारीख घोषित नहीं की है।

E20 को लेकर क्यों उठे सवाल?

हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हुई है। पिछले हफ्ते एक अदालत की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कथित तौर पर E20 को ‘एक्सपेरिमेंट’ बताया था। उनका कहना था कि इसका पूरा असर अगले एक साल में साफ हो पाएगा।

वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर फैल रही अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि E20 से इंजन खराब होने या कीड़े लगने जैसी बातें वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। लोगों को अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों पर भरोसा करना चाहिए।

E25 के लिए गाड़ियों में बदलाव पड़ सकता है

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि E25 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए ऑटो कंपनियों को इंजन की ट्यूनिंग, फ्यूल सिस्टम और दूसरे पुर्जों में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

Grain Ethanol Manufacturers Association के अध्यक्ष सीके जैन के मुताबिक, E20 पेट्रोल से आमतौर पर 3% से 7% तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि, आधुनिक इंजन बेहतर दहन तकनीक और इंजन मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से इस असर को काफी हद तक कम कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर ज्यादा होता है। इससे ईंधन बेहतर तरीके से जलता है। कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।

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