12 साल में IIT पास, 24 में PhD और अब AI में करियर, जानिए सत्यम कुमार की कहानी

बिहार के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सत्यम कुमार ने बचपन से ही अपनी पढ़ाई में असाधारण प्रतिभा दिखाई। किताबों के प्रति उनका लगाव और तेज दिमाग उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाता था। जैसे-जैसे उनकी क्षमता सामने आने लगी, परिवार ने भी उनके सपनों को समझा और उन्हें बेहतर तैयारी के लिए कोटा भेजने का फैसला किया। यही वह मोड़ था, जहां से उनकी मेहनत और संघर्ष की असली शुरुआत हुई। कोटा पहुंचकर उन्होंने पढ़ाई को नई दिशा दी और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे। उनकी यही लगन और फोकस आगे चलकर उन्हें बड़ी उपलब्धियों की ओर ले गया और उनकी कहानी आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई।

12 साल में IIT पास कर बनाया रिकॉर्ड

सत्यम ने सिर्फ 12 साल की उम्र में IIT-JEE पास कर सबको चौंका दिया और देश के सबसे कम उम्र के IITian बन गए। इसके बाद उन्होंने फिर से परीक्षा दी और AIR 670 हासिल कर अपनी काबिलियत को और मजबूत किया।

IIT कानपुर में बढ़ा ज्ञान और हुनर

बेहतरीन रैंक के साथ उन्होंने IIT कानपुर में एडमिशन लिया। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे नए और आधुनिक विषयों में रुचि दिखाई।

24 साल की उम्र में हासिल की पीएचडी

पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए सत्यम अमेरिका गए और केवल 24 साल की उम्र में पीएचडी पूरी कर ली। इस दौरान उन्हें Apple में इंटर्नशिप का भी मौका मिला, जहां उन्होंने AI तकनीक पर काम किया।

आज AI की दुनिया में कर रहे काम

फिलहाल सत्यम कुमार अमेरिका की कंपनी Texas Instruments में मशीन लर्निंग रिसर्च इंजीनियर हैं। वह नई AI तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

लोगों के लिए बनी प्रेरणा

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों को बहुत प्रेरित कर रही है। यूजर्स उन्हें मेहनत, लगन और टैलेंट का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

मेहनत से मिली बड़ी सफलता

सत्यम कुमार की यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो साधारण पृष्ठभूमि से भी असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।

Monsoon Tracker: दिल्ली में फिर लेट होगा मानसून, IMD ने बताया कब होगी बारिश की एंट्री

देशभर में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दिल्ली में भी तय समय पर नहीं पहुंच पाएगा। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून की एंट्री अगले हफ्ते होने की संभावना है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून 27 जून के आसपास पहुंच जाता है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हाल ही में 1961 से 2019 के औसत आंकड़ों के आधार पर मानसून के पहुंचने की तारीखों में बदलाव किया है।

मौसम विभाग का कहना है कि भले ही मानसून केरल में समय पर पहुंच जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों तक पहुंचने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है। इसी वजह से दिल्ली समेत कई इलाकों में मानसून की दस्तक देर से होने की संभावना जताई गई है।

अभी कई राज्यों को करना होगा इंतजार

मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून 26 जून तक चंडीगढ़, 27 जून तक दिल्ली, 28 जून तक जम्मू, 1 जुलाई तक जयपुर और 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन इस साल मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के कई हिस्सों में यह अभी भी सामान्य समय से पीछे चल रहा है। शुक्रवार तक मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंची थी। अभी यह उत्तर प्रदेश में नहीं पहुंचा है, जहां किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कमजोर मानसून के कारण जून महीने में देशभर में सामान्य से करीब 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 2 जुलाई तक भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग ने दिया नया अपडेट

आईएमडी के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों में मानसून उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। वहीं 2 जुलाई के बाद इसके धीरे-धीरे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। मानसून में देरी के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी और बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में लू चल रही है। प्रयागराज में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई जगहों पर तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।

दिल्ली में भी दिन और रात दोनों समय गर्मी बनी हुई है। दिन का तापमान 37 से 40 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि, बीच-बीच में चलने वाली तेज हवाओं और हल्की आंधी से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में आसमान में बादल छाए रहेंगे और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

अल नीनो का असर बढ़ा

मौसम वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति बन चुकी है। इसका असर इस साल के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ सकता है। आईएमडी के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से मौसम में बदलाव हो रहा है। अनुमान है कि जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून के दौरान अल नीनो का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। आईएमडी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। ऐसे में कई राज्यों में मानसून कमजोर रहने की आशंका बनी हुई है।

₹250 वाला काम अब सिर्फ ₹13 में… विदेशी बाजारों में अब तहलका मचाएंगे भारतीय आम, पाकिस्तान को लगेगा बड़ा झटका!

Mango Export: कुछ दिनों पहले ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने जिसमें अमेरिका के बाजारों में भारतीय आमों के लिए खूब डिमांड का जिक्र था। हालांकि, भारत में ₹50-₹100 किलो मिलने वाले आम US में करीब ₹1900 के चार पीस बिक रहे थे। इतने मंहगे प्राइस को लेकर खूब बहस हो रही थी। इन्हीं सब के बीच भारतीय आम के शौकीनों के साथ-साथ विदेशी बाजारों के लिए भी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत से विदेशों में आम भेजने का खर्च, जो अब तक ₹250 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता था, वह अब घटकर महज ₹13 से ₹20 प्रति किलोग्राम रह गया है।

भारत ने समुद्र के रास्ते सिंगापुर को आमों की एक बड़ी खेप सफलतापूर्वक भेजकर लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी बदलाव से न सिर्फ भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा, बल्कि विदेशी बाजारों में पाकिस्तान और अन्य देशों के आमों के मुकाबले भारतीय आम बेहद प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।

अब तक क्यों महंगा था आम का एक्सपोर्ट?

अब तक भारत से प्रीमियम क्वालिटी के आमों जैसे- हापुस, दशहरी, लंगड़ा, चौंसा का निर्यात मुख्य रूप से हवाई जहाज के जरिए होता था। हवाई सफर के कारण केवल ट्रांसपोर्टेशन की लागत ही ₹150 से ₹250 प्रति किलोग्राम तक आ जाती थी। इसके चलते विदेशों में भारतीय आम काफी महंगे बिकते थे और आम निवेशक या निर्यातक ज्यादा मात्रा में ट्रेडिंग नहीं कर पाते थे।

लेकिन, समुद्र के रास्ते किए गए इस सफल ट्रायल ने गेम ही बदल दिया है। अब यह खर्च सीधे ₹13 से ₹20 प्रति किलो पर सिमट गया है, जो कि पहले के मुकाबले लगभग 90% से भी ज्यादा सस्ता है।

कैसे मुमकिन हुआ यह कारनामा?

समुद्र के रास्ते आम भेजने में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कई दिनों के सफर में आम सड़ या गल न जाएं। इस चुनौती को पार करने के लिए लखनऊ स्थित ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर ने ‘एपीडा’ (APEDA) के साथ मिलकर एक खास वैज्ञानिक ‘सी-शिपमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार किया।

इस स्पेशल प्रयोग के तहत आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आमों को एक खास रीफर कंटेनर (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर) में रखकर समुद्र के रास्ते सिंगापुर भेजा गया। वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों का इस्तेमाल किया:

FUSICONT बायो-कंट्रोल तकनीक: वैज्ञानिकों ने बागों में फल लगने से लेकर कटाई तक अपनी खास तकनीक से निगरानी की ताकि आम पूरी तरह से केमिकल और पेस्टिसाइड रेजिड्यू-फ्री रहें।

हॉट वाटर और CISH-Met Wash ट्रीटमेंट: कटाई के बाद आमों को CISH द्वारा विकसित खास वॉश तकनीक और हॉट वाटर ट्रीटमेंट से गुजारा गया। इससे आमों की ‘शेल्फ लाइफ’ यानी खराब न होने की अवधि बढ़ गई और उनमें कोई बीमारी नहीं लगी।

30 दिनों तक नहीं खराब होंगे आम: इस तकनीक की मदद से समुद्र के ठंडे तापमान में भी आमों की लाइफ को 30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। सिंगापुर पहुंचने में इस कंसाइनमेंट को 16 दिन लगे और जब वहां कंटेनर खुला, तो आम बिल्कुल ताजा और बेहतरीन कंडीशन में मिले।

क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह सफलता?

नए और बड़े बाजारों पर कब्जा: अब तक भारतीय आम सिर्फ कुछ प्रीमियम विदेशी स्टोर्स तक ही सीमित थे। लेकिन अब लागत कम होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स सिंगापुर, मलेशिया, हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में अपनी धाक जमा सकते हैं, जहां आम का आयात करीब $4-5 मिलियन का है। इसके अलावा, भारत संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े मार्केट को भी टारगेट कर सकता है, जिसका बाजार $20-25 मिलियन का है।

किसानों की बढ़ेगी आमदनी: लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इतनी बड़ी कटौती का सीधा फायदा आम उत्पादक किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिलेगा। वे अब बिना किसी नुकसान के डर के भारी मात्रा में आम विदेशों में मुनाफे के साथ बेच सकेंगे।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

UP Weather Alert: प्रयागराज-कानपुर समेत कई जिलों में 70kmph स्पीड तक आंधी की चेतावनी, कुछ घंटों में इन 41 जिलों में बिगड़ेगा मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ आंचलिक केंद्र ने उत्तर प्रदेश के लिए ताजा जिला स्तरीय नाउकास्ट अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के कुल 41 जिलों में अगले कुछ घंटों के दौरान आंधी, बिजली और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। कुछ जिलों में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।

मौसम विभाग ने दो श्रेणियों में चेतावनी जारी की है। सबसे गंभीर स्थिति प्रयागराज, हमीरपुर, जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव और औरैया में रहने वाली है। इन जिलों में मध्यम तीव्रता के गरज-चमक वाले तूफान, बिजली गिरने और 40-60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। यहां हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।

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वहीं दूसरी श्रेणी में 34 जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है। इनमें सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, प्रतापगढ़, चित्रकूट, महोबा, बांदा, कौशांबी, रायबरेली, कानपुर नगर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, बुलंदशहर, संभल समेत कई जिले शामिल हैं। इन इलाकों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं, बिजली चमकने और हल्की बारिश की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और निचले स्तर पर सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। पूर्वी और मध्य यूपी में नमी बढ़ने लगी है, जिससे गरज-चमक वाली गतिविधियां तेज हुई हैं।

लोगों के लिए सलाह

  • खराब मौसम के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें
  • बिजली चमकने के समय सुरक्षित भवनों के भीतर रहें
  • वाहन चलाते समय तेज हवा और कम विजिबिलिटी से सावधानी बरतें
  • किसानों को फसल कटाई और खुले में रखी उपज को सुरक्षित करने की सलाह दी गई है।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

देश में इस समय भले ही लोग मानसून का इंतजार कर रहे हो पर झमाझम बारिश के पहले आम का सीजन अपने चरम पर पहुंच गया है। मार्केट में अलग-अलग वैरायटी और अलग-अलग नाम के आम देखने को मिल रहे हैं। वहीं बाजर में मिल रहे इन आमों में तोतापरी आम अपनी अलग ही जगह बना कर रखी हुई है। आम के सीजन में इस आम की भी अच्छी खासी डिमांड देखने को मिलती है।

इस आम की मिठास हर किसी को पसंद आती है, लेकिन इन्हीं आमों को उगाने वाले किसान आज भारी संकट से जूझ रहे हैं। तमिलनाडु के मदुरै जिले में तोतापरी आम की फसल का ऐसा हाल है कि किसानों को सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है।

सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा आम

तमिलनाडु के मदुरै जिले के मेलूर तालुक में एक हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में आम की खेती होती है। यहां उगने वाले ‘किली मूकु’ (तोतापरी) आम की सप्लाई देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी की जाती है। लेकिन इस साल किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि उन्हें आम के सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं, जबकि यही आम खुदरा बाजार में 40 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है।

कीमत में भारी अंतर से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि उन्हें फल तोड़ने और मजदूरों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। इसी वजह से कई किसानों ने आम की तुड़ाई नहीं कराने का फैसला किया है और फल पेड़ों पर ही छोड़ दिए हैं, जहां वे धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं।

क्यों खास हैं तोतापरी आम

तोतापरी आम का जो आकार होता है, वह तोते की चोंच की तरह होता है। इसके साथ ही इस आम का लाल कलर होता है। इसलिए इस आम का नाम तोता परी आम रखा गया है। इसका स्वाद थोड़ा खट्टा मीठा होता है। इसके साथ ही यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश इन क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है। इस आम का साइज बहुत बड़ा होता है।

Monsoon & El Nino Impact: El Nino पर IMD ने जारी किया बिग अपडेट, क्या कमजोर पड़ेगा मानसून या जुलाई में तेज होगी बारिश?

El Nino Impact on Southwest Monsoon 2026: देश में अब आगे बढ़ रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो (El Niño) और आने वाले दो हफ्तों की बारिश को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट जारी किया है। जून के महीने में अब तक देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या जुलाई में मानसून रफ्तार पकड़ेगा या अल नीनो का साया इसे कमजोर कर देगा?

आईएमडी की 25 जून को जारी लेटेस्ट प्रेस रिलीज के मुताबिक देश में मौसम का मिजाज अगले दो हफ्तों में पूरी तरह बदलने वाला है। आइए जानते हैं अल नीनो पर मौसम विभाग का क्या कहना है और जुलाई के पहले हफ्ते में आपके इलाके में कैसी बारिश होगी।

El Nino पर IMD का बड़ा अलर्ट: क्या बढ़ेगा खतरा?

मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं और इसके दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान और अधिक मजबूत होने की आशंका है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम के मॉडल भी संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में अल नीनो की स्थिति और गहरा सकती है।

राहत की बात: हालांकि अल नीनो मजबूत हो रहा है लेकिन हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल इंडियन ओशन डिपोल की स्थिति बनी हुई है, जो पूरे मानसून सीजन में ऐसे ही रहने की उम्मीद है। इसके अलावा मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) फेज-5 में है, जो जुलाई के शुरुआती दिनों में बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों को बढ़ाने में मदद करेगा।

जून में बारिश का क्या रहा हाल?

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून के महीने में मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है। 1 जून से 24 जून 2026 तक पूरे भारत में कुल संचयी बारिश सामान्य से 42% कम दर्ज की गई है। बीते सप्ताह (18-24 जून) के दौरान भी देश भर में सामान्य से 47% कम बारिश हुई।

अगले दो हफ्तों का फोरकास्ट: क्या जुलाई में तेज होगी बारिश?

मौसम विभाग ने 25 जून से 8 जुलाई 2026 तक के लिए दो चरणों में अपना विस्तृत अनुमान जारी किया है।

पहला हफ्ता (25 जून से 01 जुलाई 2026): धीमी शुरुआत, गर्मी से थोड़ी राहत

मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही हैं। अगले कुछ दिनों में इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के बचे हुए हिस्सों और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इस हफ्ते में मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश होगी। बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-28 जून के बीच लू से गंभीर लू की स्थिति रह सकती है। बिहार और झारखंड में भी 25-26 जून को हीटवेव का असर दिखेगा, जिसके बाद तापमान में गिरावट आएगी। ओवरऑल बात करें तो पहले हफ्ते में पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।

दूसरा हफ्ता (02 जुलाई से 08 जुलाई 2026): मानसून पकड़ेगा तूफानी रफ्तार!

जुलाई का पहला हफ्ता बीतते-बीतते देश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा और अल नीनो के प्रभाव को पछाड़ते हुए भारी बारिश लेकर आएगा। इस हफ्ते में मानसून मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के शेष हिस्सों सहित दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बचे हुए भागों में दस्तक दे देगा। कम ऊंचाई वाली सोमाली जेट हवाएं और मजबूत होंगी। इससे अरब सागर से भारी नमी आएगी। इसके प्रभाव से गुजरात के तटीय इलाकों, कोंकण व गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में भी भीषण बारिश जारी रहेगी। आईएमडी के मुताबिक दूसरे हफ्ते (2-8 जुलाई) के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। इस दौरान देश के किसी भी हिस्से में हीटवेव की कोई संभावना नहीं है।

IMD की जरूरी सलाह: किसान और आम जनता रखें ध्यान

शहरी इलाकों के लिए चेतावनी: भारी बारिश के कारण मुंबई, कोंकण और तटीय शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।

किसानों के लिए एग्रो-एडवाइजरी: पूर्वोत्तर राज्यों, असम, केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान की नर्सरी, मक्का और सब्जियों के खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी का पुख्ता इंतजाम करें। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसान गर्मी को देखते हुए फसलों में हल्की सिंचाई करें और नमी बचाने के लिए मल्चिंग का उपयोग करें।

आंधी-तूफान से बचाव: वज्रपात और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के दौरान कंक्रीट की दीवारों का सहारा न लें, पेड़ों के नीचे न छिपें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।

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यूपी में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम: पहचान के लिए आधार अनिवार्य, रिश्तों की पहचान और बाकी चीजों के लिए ये नए 5 Rules जान लें

UP Property Registration New Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। इस नए नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पर दर्ज रिश्तों की डिटेल (जैसे- पिता, पति या अभिभावक का नाम) को अब कानूनी रिश्ते का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जाएगा।

हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसमें राज्य के सभी रजिस्ट्रेशन कार्यालयों और सहायक महानिरीक्षकों को इन नए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

आइए जानते हैं संपत्ति रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं में होने वाली कानूनी दिक्कतों को रोकने के लिए विभाग द्वारा अनिवार्य किए गए इन 5 नए नियमों के बारे में।

प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए अनिवार्य किए गए 5 नए नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए आधिकारिक मूल्यांकन के दौरान इन 5 नियमों का पालन अनिवार्य किया है:-

नियम 1 (पहचान और पते का प्रमाण): आधार कार्ड को विशेष रूप से सिर्फ पहचान और पते के वैध प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

नियम 2 (रिश्तों पर निर्णायक नहीं): आधार कार्ड पर दर्ज परिवार या माता-पिता की डिटेल को किसी भी रिश्ते के निर्णायक या कानूनी रूप से बाध्यकारी सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है।

नियम 3 (पारिवारिक सत्यापन): ऐसे आवेदन, योजनाएं या कानूनी दस्तावेज जिनमें पारिवारिक रिश्ते का अनिवार्य सत्यापन आवश्यक है, वहां अधिकारी सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकते हैं।

नियम 4 (मान्य दस्तावेजों की जांच): रिश्तों के सत्यापन के लिए विभागों को मौजूदा नियमों के तहत मानक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके तहत जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या सक्षम अदालतों/प्राधिकारियों द्वारा जारी संबंध प्रमाणपत्र को ही मान्य माना जाएगा।

नियम 5 (द्वितीयक सूचना): आधार कार्ड पर माता-पिता या पति/पत्नी के नाम के किसी भी उल्लेख को स्थापित कानूनी सबूत के बजाय केवल एक द्वितीयक सूचनात्मक संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्या है आधार कार्ड का मूल उद्देश्य?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्देश भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का मूल और प्राथमिक उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते को स्थापित करना है न कि उसकी वंशावली या वैवाहिक स्थिति को प्रमाणित करना। यही कारण है कि आधार कार्ड पर दर्ज C/o (केयर ऑफ), S/o (पुत्र), D/o (पुत्री), या W/o (पत्नी) जैसे शब्दों के साथ लिखी गई पारिवारिक जानकारी केवल सूचनात्मक प्रकृति की होती है।

दस्तावेजों के मानकों को लेकर देशव्यापी सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार का यह राज्य स्तरीय निर्देश दस्तावेज़ीकरण के मानकों को लेकर देश भर में की जा रही सख्ती का ही एक हिस्सा है। आपको बता दें कि हाल ही में आयोजित ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसी तरह की कानूनी सीमा को रेखांकित किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया था कि एक भारतीय पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता है।

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Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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क्या E20 फ्यूल से इंश्योरेंस पॉलिसी हो जाएगी बेकार? सरकार ने बताया पूरा सच

E20 Fuel: भारत सरकार ने कहा है कि देश का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित, ग्राहकों के लिए फायदेमंद और आर्थिक रूप से लाभकारी बना हुआ है। साथ ही सरकार ने उन चिंताओं को भी खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस पॉलिसी की वैधता पर असर पड़ सकता है।

वहीं, अब इस पर तेल मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है। मंत्रालय ने बताया कि इस मामले को लेकर जिन-जिन लोगों या कंपनियों से बात करनी थी, उनसे बात कर ली गई है और यह साफ हो गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं पड़ता।

मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग दुनिया भर में अपनाई जाने वाली एक मान्य प्रक्रिया है और इसे कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिनमें अमेरिका, ब्राजील और जापान शामिल हैं। इसके अलवा, यह भी बताया कि ब्राजील ने लंबे समय से इथेनॉल की ज्यादा मात्रा मिलाने (ब्लेंडिंग) का तरीका अपनाया है, और वहां E27 पेट्रोल का स्टैंडर्ड ब्लेंड है।

सरकार के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत करने में मदद मिली है। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रोग्राम से इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कृषि उत्पादों (फीडस्टॉक) की लगातार मांग बनी है, जिससे किसानों की आय बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

वहीं सरकार के बयान में आगे कहा गया है, “इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और देश को साफ-सुथरी मोबिलिटी की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाती है।”

सरकार ने कहा कि वह वैज्ञानिक सबूतों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत के आधार पर, इस प्रोग्राम को “सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए” लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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