तीसरा वनडे: प्रसिद्ध कृष्णा की घातक गेंदबाजी से अफगान सिर्फ 218 रन पर ढेर

अफगानिस्तान ने भारत को वनडे सीरीज के तीसरे मैच में जीत के लिए सिर्फ 219 रन का टारगेट दिया है। इस मैच में दाएं हाथ के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने 5 विकेट अपने नाम किए। भारत का मकसद एमए चिदंबरम स्टेडियम में जारी इस मुकाबले को जीतकर वनडे सीरीज में 3-0 से ‘क्लीन स्वीप’ करना होगा। 

चेन्नई में टॉस जीतकर बल्लेबाजी के लिए उतरी अफगान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। यह टीम 36 के स्कोर तक अपने चार विकेट खो चुकी थी। यहां से हशमतुल्लाह शाहिदी ने अजमतुल्लाह ओमरजाई के साथ पांचवें विकेट के लिए 114 गेंदों में 105 रन जोड़े।

अजमतुल्लाह ओमरजाई 56 गेंदों में 2 छक्कों और 5 चौकों के साथ 50 रन बनाकर आउट हुए। अपनी 36वीं वनडे पारी में ओमरजाई ने छक्कों का अर्धशतक भी पूरा कर लिया। शाहिदी ने मोहम्मद नबी के साथ छठे विकेट के लिए 53 गेंदो में 57 रन की साझेदारी की।

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नबी ने 23 गेंदों में 1 छक्के और 1 चौके के साथ 21 रन का योगदान टीम के खाते में दिया। अफगान टीम को 198 के स्कोर पर छठा झटका लगा, जिसके बाद विकेटों का पतझड़ लग गया और टीम 44.2 ओवरों में महज 218 रन पर सिमट गई।

भारत की तरफ से प्रसिद्ध कृष्णा ने 8.2 ओवरों में 23 रन देकर सर्वाधिक 5 विकेट हासिल किए, जबकि गुरनूर बरार, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे ने 1-1 विकेट अपने नाम किया।

शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम यशस्वी जयसवाल, रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, गुरनूर बरार, प्रसिद्ध कृष्णा और प्रिंस यादव के साथ इस मैच में उतरी है।

वहीं, अफगान टीम रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), इब्राहिम जादरान, रहमत शाह, हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), दरवेश रसूली, मोहम्मद नबी, अजमतुल्लाह उमरजई, राशिद खान, एएम गजनफर, जिया उर रहमान शरीफी और फरीद अहमद मलिक के साथ यह मैच खेल रही है।

एकमात्र टेस्ट मैच को पारी और 300 रन के विशाल अंतर से जीतने के बाद भारत ने वनडे सीरीज के शुरुआती दोनों मैच अपने नाम करते हुए सीरीज पर कब्जा कर लिया है। अफगान टीम इस मुकाबले में सम्मान की लड़ाई लड़ रही है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने जारी की पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी है। इस किस्त के तहत देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 18,880 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी गई। 

23वीं किस्त जारी होने के साथ ही पीएम किसान योजना के तहत किसानों को वितरित की गई कुल राशि 4.28 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गई है। यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी डीबीटी योजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी आय को मजबूत बनाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रही है तथा तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में हर चार महीने के अंतराल पर सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

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23वीं किस्त जारी होने के बाद लाभार्थी किसान अपनी भुगतान स्थिति पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जांच सकते हैं। इसके लिए किसानों को पोर्टल पर उपलब्ध ‘नौ योर स्टेटस’ विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके अलावा किसान अपने बैंक खाते या पासबुक की एंट्री देखकर भी यह सत्यापित कर सकते हैं कि उनके खाते में 2,000 रुपए की राशि जमा हुई है या नहीं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के लिए कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की भी घोषणा की। इन परियोजनाओं में रेलवे, सड़क, मत्स्य पालन, पशुपालन और कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने एक नए रेलवे मंडल, रेलवे अस्पताल, हावड़ा और राधामोहनपुर को जोड़ने वाले पुल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-III) के तहत ग्रामीण सड़कों, फ्रेजरगंज में फिशिंग हार्बर और बीरभूम में आधुनिक मछली बाजार जैसी परियोजनाओं की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई नई योजनाओं की भी शुरुआत की, जिनमें डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य कृषि में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और किसानों की उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करना है।

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लापतागंज में लापता मानसून!

बारिश

जून आधा बीत गया है लेकिन मानसून लापता है। बावजूद इसके सोशल मीडिया बता दे रहा है कि सावन आया! निश्चित ही भीषण गर्मी के बीच अचानक तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश हुई। पर वह एक के बाद एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभों की बारिश है, जबकि मानसून आंध्र प्रदेश के आसपास अटका हुआ है। और पूरी संभावना है कि जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर का चौमासा (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन) गर्मी, उमस से ऐसा रूलाने वाला होगा कि हर कोई भारत में जलवायु की बरबादी में वैसे ही रोएगा जैसे प्रदूषण से सर्दियों में दिल्ली अधमरी होती है।

यों अधमरी, बरबादी जैसे शब्द बहुत भारी है लेकिन यदि कोई अमेरिकी या रेगिस्तानी अरब-अफ्रीकी देशों के लोग भी भारत की गर्मी-उमस, प्रदूषित सर्दियों में आकर घूमने के हिमाकत करें तो वह अधमरी दशा से सांस लेते हुए होंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री जून में  ही दिल्ली आए थे। उन्होने कहा वे खुद  बहुत गर्मी वाले मायामी से है लेकिन दिल्ली की तीखी गर्मी तो असहनीय है। दुनिया के मौसम, जलवायु वैज्ञानिकों की दो टूक भविष्यवाणी है कि जलवायु परिवर्तनों से सर्वाधिक दक्षिण एसिया प्रभावित होगा। सोचें,  बावजूद इस सबके हालिया खबर है कि अडानी धड़ाधड़ कोयले की खदाने ले रहे हैं और मोदीजी के साथ धधकता भारत बना देने की धुन में हैं।

बहरहाल, बात फैल गई। असल मुद्दा 2026 के चौमासे में किसान को दस तरह के संकट झेलने है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन में वह बारिस के लिए तरसेगा। महीनों से वैश्विक जलवायु मॉडल एल नीनो के असर की चेतावनी दे रहे है। कोई आश्चर्य नहीं जो मध्य भारत और उत्तर भारत में सूखी हवाओं ने मानसूनी धाराओं को रोक दिया है। यदि मौसम एजेंसियों के अनुमान सही निकले तो अगस्त और सितंबर में भारी समस्या होगी।

पर सब कुछ जानते हुए भी सरकार और सोशल मीडिया ने किसानों को सावन का अंधा बना रखा है। सब ठीक है, सामान्य है, समय से पहले ही मानसून चल पड़ा आदि-आदि। किसान क्योंकि सोशल मीडिया को देखता, पढ़ता है। तो वह भी जून में सावन की हवा के मुगालते में है। मेरा इस सप्ताह प्रत्यक्ष अनुभव था, जो दिल्ली से अलवर की और जाते देखा कि बाजारे की बुवाई हो रही है! जबकि दिल्ली और एनसीआर में मानसून यों भी 27-29 जून के बीच पहुंचता है। उत्तरी राजस्थान में एक से पांच जुलाई के बीच बारिस होती है। बावजूद इसके पश्चिमी विक्षोभ की बारिस में ही बाजरे की बुवाई!

कुल मिलाकर मुद्दा यह कि जलवायु के हर तरह गडबडा जाने के बावजूद सरकारी स्तर पर कुछ भी जोखिम प्रबंधन नहीं। मतलब एल नीनो यदि मानसून को भटकाएगा तो किसानों को क्या करना चाहिए, ऐसी कोई सलाह नहीं। सावधानी बरतने की नसीहत नहीं। बारिस धोखा दे सकती है सो फला-फला वैकल्पिक फसल योजनाएँ हैं। सूखा-सहिष्णु बीजों की फला व्यवस्था हैं।

डीजल, खाद, बीज भी लापता

मानसून लापता है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाला क्षेत्र नहीं बन रहा है। जो बन रहा है वह इतना मजबूत नहीं है कि मानसून को पुश करक आगे बढ़ा सके। सो, इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून दूसरी बार अटक गया है। पहले केरल के तट पर पहुंचने पहले कई दिन तक अटका रहा और फिर तेजी से आगे बढ़ने के बाद दोबारा अटक गया। 14 जून को सेटेलाइट की तस्वीरों में मानसून के बादल दिख रहे थे लेकिन 15 जून को लापता हो गए। प्री मानसून बारिश कई जगह हुई है लेकिन बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित ज्यादातर पूर्वी राज्यों में मानसून की निर्धारित तिथि निकल गई है और बारिश नहीं हुई। अभी पूरे हफ्ते यही स्थिति रहनी है। 25 जून के म्यांमार की ओर से बंगाल की खाड़ी में एक कमजोर गतिविधि की संभावना है। इससे पहले गुजरात में 79 फीसदी, महाराष्ट्र में 78 फीसदी और झारखंड में 70 फीसदी कम बारिश होने की खबर है। जानकारों का मानना है कि इस साल सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश हो सकती है।

सो, बारिश नहीं है तो पानी नहीं है और खरीफ की खेती के लिए तैयार किसान चिंता में है। बारिश नहीं हुई है तो नदियां और नहरें भी सूखी हैं और पूर्वी भारत भी भूमिगत जल स्तर नीचे जाने के उस संकट से घिरा है, जो अब तक पश्चिम में दिखाई देता था। भूमिगत जल स्तर नीचे चला गया है और बोरिंग या पम्पिंग सेट के जरिए पानी निकालना निरंतर मुश्किल होता जा रहा है। अगर किसान के पास बोरवेल है या पम्पिंग सेट है तो उसे चलाने के लिए बिजली या डीजल की जरुरत है। पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में तो बोरवेल है लेकिन उनके उलट बिहार, झारखंड आदि राज्यों में किसान पम्पिंग सेट का इस्तेमाल किया जाता है और उसके लिए डीजल चाहिए, जो बाजार से

लापता है। सरकार कह नहीं रही है लेकिन ऐसे उपाय कर रही है, जिससे लोगों को डीजल मिलने में मुश्किल हो।

सरकार ने अनिवार्य कर दिया है कि गैलन या कंटेनर में पेट्रोल पंप से डीजल नहीं ले सकते हैं। सवाल है कि क्या किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जाएं और डीजल खरीदें? छोटे किसानों के लिए यह संभव ही नहीं है। इसलिए वे बड़े किसानों या गांव के साहूकारों पर निर्भर हैं और ज्यादा कीमत देकर डीजल खरीद रहे हैं। अगर कोई किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जा रहा है तो वहां से 20 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं मिल रही है। सरकार ने आदेश जारी करके सामान्य पेट्रोल पंप पर दो सौ लीटर से ज्यादा डीजल नहीं देने का नियम बनाया है लेकिन बिहार जैसे राज्यों में आम लोगों के लिए इसे घटा कर 20 लीटर कर दिया गया है। सोचें, कीमत एक सौ रुपए लीटर तक पहुंची है और उपलब्धता कम हो गई है। किसान सारे दिन इस जुगाड़ में घूम रहे हैं कि कैसे डीजल मिले ताकि खेत में पानी पहुंचे और धान के बीज गिराए जाएं या जिनका बिचड़ा तैयार है वे रोपनी कर सकें।

किसान का संकट इतने पर समाप्त नहीं हो रहा है। उसकी स्थिति तो मुंशी प्रेमचंद के किसान से भी बदतर दिख रही है। उसे आसमान से बारिश का इंतजार है या पेट्रोल पंप से डीजल मिलने का इंतजार है और साथ ही खाद व बीज की उपलब्धता का भी इंतजार है। सरकार कह रही है कि उसके स्टॉक में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कहा गया है कि दो करोड़ मिट्रिक टन खाद है। लेकिन किसानों को 15 किलो की जगह पांच किलो खाद मिल रही है। बिहार, उत्तर  प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कृषि वाले राज्यों से तस्वीरें आ रही हैं कि किसान खाद और बीज के सेंटर के बाहर रात गुजार रहे हैं ताकि सुबह उनको खाद मिल सके। यूरिया और डीएपी दोनों जरूरी उर्वरक बाजार से लापता हैं। यूरिया की सामान्य कीमत 266 रुपए बोरी और डीएपी की 1,350 रुपए बोरी है। लेकिन यूरिया पांच सौ रुपए और डीएपी दो से ढाई हजार रुपए बोरी के दाम पर बिक रहा है। सरकार कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी दे रही है और स्टॉक नहीं करने की सलाह दे रही है लेकिन संकट यह है कि रेलवे के रैक भी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं ताकि बाजार में आसानी से खाद उपलब्ध हो। सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात किया है लेकिन वह यूरिया भी बाजार में आने से पहले ही लापता हो जा रहा है। इस बार तो कहा जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जंग की वजह से समस्या हुई है लेकिन खेती के समय डीजल, खाद और पानी की समस्या चिरंतन है। किसान को इससे कभी मुक्ति नहीं मिलती है। ऊपर से प्रेमचंद के किसान की तरह आज भी भारत का किसान साहूकारों के ऊंचे ब्याज वाले कर्ज के तले दबा है। उससे भी मुक्ति नहीं मिल रही है।

शहर आबाद नहीं हुए, गांव लापता हो गए

देश में सबसे कम शहरीकरण वाला राज्य हिमाचल प्रदेश है और उसके बाद बिहार का नंबर आता है। इसके बाद असम, ओडिशा आदि राज्य आते हैं। इन राज्यों में शहरीकरण नहीं हुआ है लेकिन गांव लापता हो गए हैं। सवाल है कि कहां चले गए हैं गांव के लोग? वह भी इस समय जब खेती किसानी का समय है? पिछले दिनों एक रील सोशल मीडिया में वायरल हुई, जिसमें पंजाब में धान की रोपनी कर रहे बिहार के किसान अपनी पीड़ा बता रहे थे। वे बिहार के नौजवानों से कह रहे थे कि पंजाब में उनका जीवन कितना मुश्किल है। वे अपील भी कर रहे थे कि अगर पढ़ सकते हो तो पढ़ो और कुछ करो। इस रील में सवाल है कि जवाब है। देश के तमाम पिछड़े इलाकों, जिनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल का नाम खास तौर पर लिया जा सकता है, से गांव उठ कर दिल्ली, पंजाब, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा, बेंगलुरू और हैदराबाद चले गए हैं।

लेकिन ऐसा नहीं है कि गांव लापता हुए हैं और वहां के लोग देश के बड़े शहरों में चले गए हैं। गांवों से निकल कर ज्यादातर लोग अपने आसपास के शहरों मे गए हैं। अच्छे जीवन की तलाश में, बच्चों की अच्छी शिक्षा व बुजुर्गों के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधा की तलाश में, शहर में मिलने वाली सुविधाओं की मृग मरीचिका में लोग गांव से निकल कर शहर में आ गए हैं या शहर के नजदीक आ गए हैं। ‘राग दरबारी’ में पहले ही पन्ने पर श्रीलाल शुक्ल ने लिखा है कि ‘शहर का वह छोर, जहां से देहात का महासागर शुरू होता है’। लेकिन अब शहर की सीमा के बाद देहात का महासागर नहीं दिखता है, बल्कि बेहद बदरंग रूप में शहर ही देहात तक पहुंच गया है या शहर ही देहात बन गया है।

लोग गांवों से निकल कर शहरों की ओर भागे तो शहर का भौगोलिक विस्तार तेजी से हुआ। शहर का विकास नहीं हुआ, सुविधाएं नहीं बढ़ीं सिर्फ भौगोलिक विस्तार हुआ। जैसे दिल्ली में भीड़ बढ़ती गई तो एनसीआर का दायरा बढ़ता गया वैसे ही बिहार के किसी शहर का विस्तार हुआ तो नगर निगम या नगरपालिका की सीमा बढ़ती गई। लोग इस बात से खुश हुए कि उनका गांव, टोला या मोहल्ल नगरपालिका की सीमा में आ गया। लेकिन नगरपालिका ने वैसी सुविधाएं भी विकसित नहीं की, जैसी पंचायत में उनको मिलती थी। राष्ट्रपति रहते एपीजे अब्दुल कलाम ने पुरा (पीयूआरए) यानी प्रोविजन ऑफ अर्बन एमेनिटीज टू रूरल एरियाज का जिक्र किया था, जिसे 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने शुरू किया था। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में शहरी सुविधाएं यानी सीवेज, पीने के पानी, अच्छी सड़क आदि की सुविधा देनी थी। दुर्भाग्य से उसके 23 साल बाद गांव उजाड़ पड़े हैं और शहरों में भी ये सुविधाएं पूरी तरह से नहीं मिल रही हैं।

गांव के लोग जिन चीजों की तलाश में शहर आए थे वो उनको मिली नहीं और वे गांव से उजड़ गए। शहरों में अच्छी शिक्षा के नाम पर कचरा ज्ञान फैलाने वाले निजी स्कूल और कोचिंग हैं। सरकारी स्कूलों की हालत बदतर है। सरकारी अस्पताल दिन ब दिन खराब हुए हैं तो निजी अस्पताल इतने महंगे हैं कि लोग उसे अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। नौकरी और रोजगार की संभावना नगण्य है। लेकिन अब वापस गांव लौटना शर्म की बात मानी जाएगी। इसलिए संघर्ष कर रहे हैं। उधर गांवों में छोटी जोत वाले किसान भी खेत मजदूरों की तलाश में भटक रहे हैं। उनके घर के नौजवान भी अच्छे जीवन की उम्मीद लिए गांव से निकल गए हैं। वे भी कहीं किसी शहर या महानगर में भटक रहे हैं। थोड़े समय पहले तक गांवों में जहां चौपाल पर, मंदिर या मस्जिदों के चबूतरे पर या पेड़ की छांव में लोग बैठे दिखते थे वहां अब सन्नाटा है। सड़क पर कुछ महिलाएं तो दिखती हैं लेकिन कामकाजी उम्र के लोग लापता हैं।

Monsoon Update: 23 जून तक इन राज्यों में आगे बढ़ सकता है मानसून, IMD ने दिया बिग अपडेट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दोपहर एक अहम प्रेस रिलीज जारी की है। इसमें मानसून की ताजा स्थिति, भीषण गर्मी की चेतावनी और अगले एक हफ्ते के मौसम का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं पूरे देश का मौसम हाल।

अभी कहां है मानसून?

इस वक्त दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (Northern Limit of Monsoon) हरनई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फुलबनी, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर से होते हुए 28.3°N/83°E तक पहुंची हुई है।

आगे कब और कहां पहुंचेगा?

मौसम विभाग के मुताबिक 23 जून 2026 के आसपास मानसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। जिन राज्यों में मानसून जल्द दस्तक दे सकता है, वो हैं —

  • महाराष्ट्र के कुछ और हिस्से
  • तेलंगाना के कुछ और इलाके
  • ओडिशा के नए भाग
  • झारखंड और बिहार के कुछ क्षेत्र
  • छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से

यानी उत्तर और मध्य भारत के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।

बीते 24 घंटों में देशभर में कैसा रहा मौसम?

भारी से बहुत भारी बारिश

कल सुबह 8:30 बजे से आज सुबह 8:30 बजे तक देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई-

  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के चंपासारी में 21 Cm अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई- यह देशभर में सबसे ज्यादा रही।
  • गुजरात के गोधरा (पंचमहल) में 14cm बारिश
  • गंगीय पश्चिम बंगाल के लाभपुर में 10cm
  • पश्चिमी राजस्थान के श्री विजयनगर में 9cm
  • तमिलनाडु के कलासापक्कम (तिरुवन्नामलाई) में 9cm
  • बिहार के ठाकुरगंज (किशनगंज) में 7cm
  • सौराष्ट्र के बोटाड में 7cm
  • केरल के कोन्नी (पत्तनमतिट्टा) में 7cm
  • तेलंगाना के मिर्यालगुडा (नलगोंडा) में 7cm

आंधी-तूफान और तेज हवाएं

कई राज्यों में तेज हवाओं ने भी कहर बरपाया-

  • तमिलनाडु के कोविलपट्टी में 76 km/h, ISRO में 63 और विरुधुनगर में 56 km/h
  • ओडिशा के कालीमेला में 63 km/h
  • हिमाचल प्रदेश के हाथीबरकला में 57 km/h
  • पश्चिम मध्यप्रदेश के आगर में 57 km/h
  • गंगीय पश्चिम बंगाल के अलीपुर में 52 km/h
  • झारखंड के दुमका में 52 km/h
  • मराठवाड़ा के सगरोली (नांदेड़) में 54 km/h
  • मध्य महाराष्ट्र के खुतबाव दौंड (पुणे) में 52 km/h
  • छत्तीसगढ़ के रायपुर में 48 km/h, बिलासपुर में 46 km/h

ओलावृष्टि

जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में ओले भी गिरे।

तापमान- गर्मी का हाल

कल का अधिकतम तापमान (18 जून 2026)

देश के कई राज्यों में पारा 40°C से 43°C के बीच रहा —

  • तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मराठवाड़ा, विदर्भ, बिहार, तेलंगाना- सभी जगह 40-43°C
  • सबसे गर्म शहर रहा उत्तर प्रदेश का बांदा, जहां तापमान 43.2°C दर्ज किया गया

न्यूनतम तापमान (आज, 19 जून 2026)

रात का तापमान भी कई राज्यों में सामान्य से ऊपर रहा-

पूर्वी मध्यप्रदेश, मराठवाड़ा, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना— सामान्य से 3-5°C ज्यादा

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कोंकण-गोवा, विदर्भ, गुजरात, केरल, तमिलनाडु— सामान्य से 1.5-3°C ऊपर

हीटवेव की चेतावनी- इन राज्यों में रहें सावधान

मानसून के आने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अभी भी लू का खतरा बना हुआ है-

राज्य/क्षेत्र हीटवेव की संभावना कब तक-

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 जून तक
  • बिहार 22 में जून तक
  • तेलंगाना 21 में जून तक
  • विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा में 20 जून तक
  • मराठवाड़ा में 19 जून (आज)

इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 19-21 जून के दौरान गर्म और उमस भरे मौसम की संभावना है।

अगले 7 दिन — राज्यवार मौसम का पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत

  • जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 19-22 जून तक व्यापक बारिश; साथ में बिजली, आंधी और ओले भी
  • हिमाचल प्रदेश: 20-21 जून को अच्छी बारिश
  • उत्तराखंड: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश
  • राजस्थान: 19-20 जून को धूलभरी आंधी (dust storm); 19-20 जून को 60-80 km/h की रफ्तार से तेज thundersquall की चेतावनी
  • हरियाणा-दिल्ली-पंजाब: 19-22 जून के बीच बिजली और तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश

मध्य भारत

मध्यप्रदेश और विदर्भ: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश; 19-20 जून को thundersquall (50-70 km/h) की चेतावनी

छत्तीसगढ़: 22-23 जून को बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश

पूर्वी भारत

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश; 21 जून तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश

गंगीय पश्चिम बंगाल: 19-25 जून व्यापक बारिश

ओडिशा: 19-20 जून व्यापक बारिश; उसके बाद छिटपुट

बिहार और झारखंड: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश; 19-20 जून को thundersquall

पूर्वोत्तर भारत

असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश; असम-मेघालय में 19-23 जून तक अत्यधिक भारी बारिश की संभावना

पश्चिम भारत

कोंकण और गोवा: 22-25 जून से व्यापक बारिश शुरू होगी

गुजरात और मध्य महाराष्ट्र: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश

सौराष्ट्र-कच्छ: 19-21 जून छिटपुट बारिश

दक्षिण भारत

केरल: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश जारी रहेगी; 19-23 जून तक भारी बारिश

तटीय कर्नाटक: 21-25 जून से व्यापक बारिश

तमिलनाडु: छिटपुट बारिश और 19 जून को thundersquall की चेतावनी

तेलंगाना: छिटपुट बारिश; 20-25 जून के बीच बिजली और तेज हवाएं

दिल्ली-NCR का विस्तृत पूर्वानुमान

आज का मौसम (19 जून)

दिल्ली में दोपहर तक आंशिक बादल छाए रहेंगे, शाम को मौसम बिगड़ सकता है। 40-50 km/h की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो 60 km/h तक पहुंच सकती हैं। हल्की बारिश, बिजली और धूलभरी आंधी की संभावना है। अधिकतम तापमान 38-40°C के बीच रहेगा।

कल (20 जून) :आंशिक बादल, दोपहर-शाम को हल्की बारिश और 40-60 km/h हवाएं। तापमान 37-39°C।

21 जून: इसी तरह का मौसम — हल्की बारिश, बिजली, तेज हवाएं। तापमान 37-39°C।

22 जून: बादल छाए रहेंगे, बारिश की संभावना कम। तापमान गिरकर 36-38°C पर आ सकता है।

दिल्लीवालों के लिए सलाह: शाम को घर से निकलते वक्त छाता और पानी की बोतल साथ रखें। तेज हवाओं में गाड़ी चलाते वक्त सतर्क रहें।

मछुआरों के लिए चेतावनी

IMD ने 19 जून से 24 जून तक निम्न समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सख्त हिदायत दी है —

बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, उत्तर और मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तरी अंडमान सागर

अरब सागर: सोमालिया तट के पास दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य अरब सागर; ओमान तट के पास उत्तर-पश्चिम अरब सागर

आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां

लू (हीटवेव) से बचाव

  • दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें
  • खूब पानी पिएं- प्यास न लगे तब भी
  • ORS, नींबू पानी, छाछ, लस्सी पिएं
  • बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का खास ख्याल रखें

आंधी-तूफान में सुरक्षा

  • घर के अंदर रहें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें
  • पेड़ के नीचे कभी न खड़े हों
  • बिजली के उपकरण अनप्लग करें
  • पानी के स्रोतों (नदी, तालाब) के पास न जाएं
  • बिजली चमकने पर कंक्रीट की दीवारों से दूर रहें

भारी बारिश में सावधानी

  • जलभराव वाली सड़कों पर गाड़ी न चलाएं
  • निचले इलाकों में रहने वाले सतर्क रहें
  • लैंडस्लाइड संभावित पहाड़ी इलाकों में यात्रा से बचें

किसानों के लिए सलाह

  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड: ओलों से फसल बचाने के लिए हेल नेट लगाएं, पके फलों की तुरंत तुड़ाई करें
  • असम, अरुणाचल: धान की नर्सरी में जल निकासी की व्यवस्था करें
  • केरल: केला, नारियल, काली मिर्च के बागानों में पानी निकालें; केले के पौधों को सहारा दें
  • बिहार, UP, महाराष्ट्र, तेलंगाना: लू के दौरान सब्जियों और बागों में हल्की सिंचाई करें, मल्चिंग करें
  • सभी किसान: कटी फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित जगह रखें; आंधी से पहले फसल को बांध लें

पशुपालकों के लिए सलाह

  • भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
  • चारा-दाना सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें
  • गर्मी में पशुओं को ठंडा और साफ पानी दें
  • मुर्गीपालन शेड की छत पर घास डालें ताकि गर्मी कम हो
  • मछली तालाबों में पानी निकासी का प्रबंध करें

IMD Heavy Rain Alert: बिहार समेत इन 13 राज्यों में प्रचंड बारिश का अलर्ट, राजस्थान से दिल्ली-NCR तक आंधी-तूफान, 25 जून तक ऐसा रहेगा मौसम

 

Monsoon Update: 23 जून तक इन राज्यों में आगे बढ़ सकता है मानसून, IMD ने दिया बिग अपडेट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दोपहर एक अहम प्रेस रिलीज जारी की है। इसमें मानसून की ताजा स्थिति, भीषण गर्मी की चेतावनी और अगले एक हफ्ते के मौसम का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं पूरे देश का मौसम हाल।

अभी कहां है मानसून?

इस वक्त दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (Northern Limit of Monsoon) हरनई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फुलबनी, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर से होते हुए 28.3°N/83°E तक पहुंची हुई है।

आगे कब और कहां पहुंचेगा?

मौसम विभाग के मुताबिक 23 जून 2026 के आसपास मानसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। जिन राज्यों में मानसून जल्द दस्तक दे सकता है, वो हैं —

  • महाराष्ट्र के कुछ और हिस्से
  • तेलंगाना के कुछ और इलाके
  • ओडिशा के नए भाग
  • झारखंड और बिहार के कुछ क्षेत्र
  • छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से

यानी उत्तर और मध्य भारत के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।

बीते 24 घंटों में देशभर में कैसा रहा मौसम?

भारी से बहुत भारी बारिश

कल सुबह 8:30 बजे से आज सुबह 8:30 बजे तक देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई-

  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के चंपासारी में 21 Cm अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई- यह देशभर में सबसे ज्यादा रही।
  • गुजरात के गोधरा (पंचमहल) में 14cm बारिश
  • गंगीय पश्चिम बंगाल के लाभपुर में 10cm
  • पश्चिमी राजस्थान के श्री विजयनगर में 9cm
  • तमिलनाडु के कलासापक्कम (तिरुवन्नामलाई) में 9cm
  • बिहार के ठाकुरगंज (किशनगंज) में 7cm
  • सौराष्ट्र के बोटाड में 7cm
  • केरल के कोन्नी (पत्तनमतिट्टा) में 7cm
  • तेलंगाना के मिर्यालगुडा (नलगोंडा) में 7cm

आंधी-तूफान और तेज हवाएं

कई राज्यों में तेज हवाओं ने भी कहर बरपाया-

  • तमिलनाडु के कोविलपट्टी में 76 km/h, ISRO में 63 और विरुधुनगर में 56 km/h
  • ओडिशा के कालीमेला में 63 km/h
  • हिमाचल प्रदेश के हाथीबरकला में 57 km/h
  • पश्चिम मध्यप्रदेश के आगर में 57 km/h
  • गंगीय पश्चिम बंगाल के अलीपुर में 52 km/h
  • झारखंड के दुमका में 52 km/h
  • मराठवाड़ा के सगरोली (नांदेड़) में 54 km/h
  • मध्य महाराष्ट्र के खुतबाव दौंड (पुणे) में 52 km/h
  • छत्तीसगढ़ के रायपुर में 48 km/h, बिलासपुर में 46 km/h

ओलावृष्टि

जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में ओले भी गिरे।

तापमान- गर्मी का हाल

कल का अधिकतम तापमान (18 जून 2026)

देश के कई राज्यों में पारा 40°C से 43°C के बीच रहा —

  • तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मराठवाड़ा, विदर्भ, बिहार, तेलंगाना- सभी जगह 40-43°C
  • सबसे गर्म शहर रहा उत्तर प्रदेश का बांदा, जहां तापमान 43.2°C दर्ज किया गया

न्यूनतम तापमान (आज, 19 जून 2026)

रात का तापमान भी कई राज्यों में सामान्य से ऊपर रहा-

पूर्वी मध्यप्रदेश, मराठवाड़ा, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना— सामान्य से 3-5°C ज्यादा

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कोंकण-गोवा, विदर्भ, गुजरात, केरल, तमिलनाडु— सामान्य से 1.5-3°C ऊपर

हीटवेव की चेतावनी- इन राज्यों में रहें सावधान

मानसून के आने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अभी भी लू का खतरा बना हुआ है-

राज्य/क्षेत्र हीटवेव की संभावना कब तक-

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 जून तक
  • बिहार 22 में जून तक
  • तेलंगाना 21 में जून तक
  • विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा में 20 जून तक
  • मराठवाड़ा में 19 जून (आज)

इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 19-21 जून के दौरान गर्म और उमस भरे मौसम की संभावना है।

अगले 7 दिन — राज्यवार मौसम का पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत

  • जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 19-22 जून तक व्यापक बारिश; साथ में बिजली, आंधी और ओले भी
  • हिमाचल प्रदेश: 20-21 जून को अच्छी बारिश
  • उत्तराखंड: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश
  • राजस्थान: 19-20 जून को धूलभरी आंधी (dust storm); 19-20 जून को 60-80 km/h की रफ्तार से तेज thundersquall की चेतावनी
  • हरियाणा-दिल्ली-पंजाब: 19-22 जून के बीच बिजली और तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश

मध्य भारत

मध्यप्रदेश और विदर्भ: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश; 19-20 जून को thundersquall (50-70 km/h) की चेतावनी

छत्तीसगढ़: 22-23 जून को बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश

पूर्वी भारत

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश; 21 जून तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश

गंगीय पश्चिम बंगाल: 19-25 जून व्यापक बारिश

ओडिशा: 19-20 जून व्यापक बारिश; उसके बाद छिटपुट

बिहार और झारखंड: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश; 19-20 जून को thundersquall

पूर्वोत्तर भारत

असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश; असम-मेघालय में 19-23 जून तक अत्यधिक भारी बारिश की संभावना

पश्चिम भारत

कोंकण और गोवा: 22-25 जून से व्यापक बारिश शुरू होगी

गुजरात और मध्य महाराष्ट्र: पूरे हफ्ते छिटपुट बारिश

सौराष्ट्र-कच्छ: 19-21 जून छिटपुट बारिश

दक्षिण भारत

केरल: पूरे हफ्ते व्यापक बारिश जारी रहेगी; 19-23 जून तक भारी बारिश

तटीय कर्नाटक: 21-25 जून से व्यापक बारिश

तमिलनाडु: छिटपुट बारिश और 19 जून को thundersquall की चेतावनी

तेलंगाना: छिटपुट बारिश; 20-25 जून के बीच बिजली और तेज हवाएं

दिल्ली-NCR का विस्तृत पूर्वानुमान

आज का मौसम (19 जून)

दिल्ली में दोपहर तक आंशिक बादल छाए रहेंगे, शाम को मौसम बिगड़ सकता है। 40-50 km/h की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो 60 km/h तक पहुंच सकती हैं। हल्की बारिश, बिजली और धूलभरी आंधी की संभावना है। अधिकतम तापमान 38-40°C के बीच रहेगा।

कल (20 जून) :आंशिक बादल, दोपहर-शाम को हल्की बारिश और 40-60 km/h हवाएं। तापमान 37-39°C।

21 जून: इसी तरह का मौसम — हल्की बारिश, बिजली, तेज हवाएं। तापमान 37-39°C।

22 जून: बादल छाए रहेंगे, बारिश की संभावना कम। तापमान गिरकर 36-38°C पर आ सकता है।

दिल्लीवालों के लिए सलाह: शाम को घर से निकलते वक्त छाता और पानी की बोतल साथ रखें। तेज हवाओं में गाड़ी चलाते वक्त सतर्क रहें।

मछुआरों के लिए चेतावनी

IMD ने 19 जून से 24 जून तक निम्न समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सख्त हिदायत दी है —

बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, उत्तर और मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तरी अंडमान सागर

अरब सागर: सोमालिया तट के पास दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य अरब सागर; ओमान तट के पास उत्तर-पश्चिम अरब सागर

आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां

लू (हीटवेव) से बचाव

  • दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें
  • खूब पानी पिएं- प्यास न लगे तब भी
  • ORS, नींबू पानी, छाछ, लस्सी पिएं
  • बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का खास ख्याल रखें

आंधी-तूफान में सुरक्षा

  • घर के अंदर रहें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें
  • पेड़ के नीचे कभी न खड़े हों
  • बिजली के उपकरण अनप्लग करें
  • पानी के स्रोतों (नदी, तालाब) के पास न जाएं
  • बिजली चमकने पर कंक्रीट की दीवारों से दूर रहें

भारी बारिश में सावधानी

  • जलभराव वाली सड़कों पर गाड़ी न चलाएं
  • निचले इलाकों में रहने वाले सतर्क रहें
  • लैंडस्लाइड संभावित पहाड़ी इलाकों में यात्रा से बचें

किसानों के लिए सलाह

  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड: ओलों से फसल बचाने के लिए हेल नेट लगाएं, पके फलों की तुरंत तुड़ाई करें
  • असम, अरुणाचल: धान की नर्सरी में जल निकासी की व्यवस्था करें
  • केरल: केला, नारियल, काली मिर्च के बागानों में पानी निकालें; केले के पौधों को सहारा दें
  • बिहार, UP, महाराष्ट्र, तेलंगाना: लू के दौरान सब्जियों और बागों में हल्की सिंचाई करें, मल्चिंग करें
  • सभी किसान: कटी फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित जगह रखें; आंधी से पहले फसल को बांध लें

पशुपालकों के लिए सलाह

  • भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
  • चारा-दाना सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें
  • गर्मी में पशुओं को ठंडा और साफ पानी दें
  • मुर्गीपालन शेड की छत पर घास डालें ताकि गर्मी कम हो
  • मछली तालाबों में पानी निकासी का प्रबंध करें

IMD Heavy Rain Alert: बिहार समेत इन 13 राज्यों में प्रचंड बारिश का अलर्ट, राजस्थान से दिल्ली-NCR तक आंधी-तूफान, 25 जून तक ऐसा रहेगा मौसम

 

आकाश अंबानी ने रखा Jio का AI रोडमैप : कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा एआई

Akash Ambani outlines Jio's AI roadmap

– जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू औरजियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं 

– भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा जियो, 22 भारतीय भाषाओं में सेवाओं की तैयारी

– रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है

जियो (Jio) की अगली बड़ी छलांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि भारत को बाहर बने एआई (AI) का केवल उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।

 

मुकेश अंबानी ने कहा कि इसी सोच के साथ रिलायंस इंटेलिजेंस (Reliance Intelligence) को कंपनी के नए ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंटेलिजेंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्यमों और सरकारों के लिए बड़े पैमाने पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और सेवाओं का लाभकारी बिजनेस तैयार करना है।

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जियो के चेयरमैन आकाश एम. अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस की सेवाओं और एआई उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता 2026 के अंत तक शुरू करने की योजना है। पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक एच100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है।

 

आकाश अंबानी ने कहा, “दुनिया के एआई प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में बनते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। इसके विपरीत, जियो भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा है। भारत का एआई भारतीय भाषा में बोलेगा। भारत के दिलों को जोड़ेगा। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलेगा।”

 

रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है। इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों तक एआई की उपयोगिता पहुंचाना है।

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जियो अपने नेटवर्क में भी एआई को सीधे जोड़ रहा है। कंपनी जियो कॉल एजेंट पर काम कर रही है। इसके जरिए हर जियो कॉल में, ग्राहक की अनुमति से, एआई एजेंट जुड़ सकेगा। यह कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसका सार बना सकेगा और जरूरत पड़ने पर खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, टेबल रिजर्व करने या मीटिंग तय करने जैसे काम भी कर सकेगा।

 

आकाश अंबानी ने जियो की पांचवीं प्रतिबद्धता को भारत की तकनीक को दुनिया तक ले जाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 5जी, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एआई सेवाओं के लिए जियो में बनाया गया अपना डीप-टेक स्टैक अब चुनिंदा देशों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार है।

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रिलायंस ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारियों का भी उल्लेख किया। कंपनी का कहना है कि इन साझेदारियों के जरिए वैश्विक तकनीक को भारतीय क्रियान्वयन, भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और भारत-प्रथम गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाएगा।

 

जियो ने जिस तरह डेटा को हर भारतीय के लिए किफायती बनाया था, रिलायंस इंटेलिजेंस अब एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जब एआई सुलभ होगा, तब भारत केवल एआई युग में भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा।

आकाश अंबानी ने रखा Jio का AI रोडमैप : कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा एआई

Akash Ambani outlines Jio's AI roadmap

– जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू औरजियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं 

– भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा जियो, 22 भारतीय भाषाओं में सेवाओं की तैयारी

– रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है

जियो (Jio) की अगली बड़ी छलांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि भारत को बाहर बने एआई (AI) का केवल उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।

 

मुकेश अंबानी ने कहा कि इसी सोच के साथ रिलायंस इंटेलिजेंस (Reliance Intelligence) को कंपनी के नए ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंटेलिजेंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्यमों और सरकारों के लिए बड़े पैमाने पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और सेवाओं का लाभकारी बिजनेस तैयार करना है।

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जियो के चेयरमैन आकाश एम. अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस की सेवाओं और एआई उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता 2026 के अंत तक शुरू करने की योजना है। पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक एच100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है।

 

आकाश अंबानी ने कहा, “दुनिया के एआई प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में बनते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। इसके विपरीत, जियो भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा है। भारत का एआई भारतीय भाषा में बोलेगा। भारत के दिलों को जोड़ेगा। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलेगा।”

 

रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है। इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों तक एआई की उपयोगिता पहुंचाना है।

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जियो अपने नेटवर्क में भी एआई को सीधे जोड़ रहा है। कंपनी जियो कॉल एजेंट पर काम कर रही है। इसके जरिए हर जियो कॉल में, ग्राहक की अनुमति से, एआई एजेंट जुड़ सकेगा। यह कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसका सार बना सकेगा और जरूरत पड़ने पर खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, टेबल रिजर्व करने या मीटिंग तय करने जैसे काम भी कर सकेगा।

 

आकाश अंबानी ने जियो की पांचवीं प्रतिबद्धता को भारत की तकनीक को दुनिया तक ले जाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 5जी, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एआई सेवाओं के लिए जियो में बनाया गया अपना डीप-टेक स्टैक अब चुनिंदा देशों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार है।

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रिलायंस ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारियों का भी उल्लेख किया। कंपनी का कहना है कि इन साझेदारियों के जरिए वैश्विक तकनीक को भारतीय क्रियान्वयन, भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और भारत-प्रथम गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाएगा।

 

जियो ने जिस तरह डेटा को हर भारतीय के लिए किफायती बनाया था, रिलायंस इंटेलिजेंस अब एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जब एआई सुलभ होगा, तब भारत केवल एआई युग में भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा।

Monsoon: इन 5 कारणों से महाराष्ट्र में फंसा मानसून, खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर

Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण महाराष्ट्र में रुके रहने के कारण देश में 4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस दौरान देश में सामान्य 72.2mm बारिश के मुकाबले केवल 42.6mm बारिश हुई है। IMD के क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, मध्य भारत में 67%, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42%, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22%  और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% बारिश की कमी दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया कि “बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की कमी” ही मुख्य वजह है, जिसके कारण पिछले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है।

मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने में देरी के पीछे कुल 5 प्रमुख कारण हैं:

पहला कारण यह है कि वर्तमान मानसून प्रवाह को अरब सागर से मजबूत “सर्ज” यानी तेज और स्थिर हवाओं का सपोर्ट नहीं मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, “आम तौर पर ऐसी तेज हवाएं ही नमी को बढ़ाने और बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे मानसून आगे बढ़ता है।”

दूसरा कारण यह है कि अरब सागर में मानसून से जुड़ी निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। इसके चलते महाराष्ट्र के तटीय और अंदरूनी इलाकों तक नमी (moisture) का प्रवाह कम हो गया है।

तीसरा कारण पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए मुख्य नमी स्रोत माना जाता है। आईएमडी के अनुसार, इस प्रवाह के कमजोर होने से मानसून की गतिविधि भी प्रभावित हुई है।

चौथा कारण यह है कि अभी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमीय सिस्टम नहीं है, जैसे निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area), चक्रवाती परिसंचरण या पश्चिमी तट के साथ सक्रिय ऑफशोर ट्रफ। ये सिस्टम सामान्यतः मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन फिलहाल इनकी कमी है।

आखिरी वजह मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का कमजोर दौर है। यह हवा, बादलों और दबाव का एक चलता-फिरता सिस्टम है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है। जब यह सक्रिय होता है, तो दक्षिण भारत में अधिक बादल बनते हैं, जो मानसून हवाओं के साथ उत्तर की ओर बढ़कर ज्यादा बारिश कराते हैं। लेकिन अभी यह कमजोर स्थिति में है।

IMD के अनुसार, इसी वजह से अगले 4-5 दिनों तक महाराष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में बारिश सीमित और केवल छिटपुट रहने की संभावना है।

अल नीनो से खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तर दिशा में धीमी गति और हाल ही में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में उत्पन्न हुई अल नीनो की स्थिति, जिसके कारण भारत में कम बारिश हुई है, खरीफ फसलों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है, क्योंकि इन फसलों के फलने-फूलने के लिए समय पर बारिश जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिया निर्देश

इसी को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि ऐसे जिलों की पहचान की जाए जहां कम या असमान बारिश की संभावना है। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर फसल-वार आपातकालीन (contingency) योजनाएं तैयार करने को कहा गया है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल खेती और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

चौहान ने निर्देश दिया कि हर जोखिम वाले जिले के लिए एक अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि खरीफ के मौसम में किसानों को कोई परेशानी न हो।

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