New Tractor: महिंद्रा ने भारत में लॉन्च किया नया ट्रैक्टर, इस साल अभी 7 और नए लॉन्च की तैयारी

भारत के टॉप ट्रैक्टर ब्रांड में से एक महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने घरेलू कृषि बाजार में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने सोमवार को अपने बहुउद्देशीय ट्रैक्टर YuvoTech+ 585 DI V1 को देशव्यापी स्तर पर लॉन्च करने की घोषणा की है। इसी के साथ महिंद्रा ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भारतीय किसानों के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश करते हुए 7 नए ट्रैक्टर और 12 नए फीचर्स लॉन्च करने का भी एलान किया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के इस बड़े प्लान में महिंद्रा की न्यू ट्रैक्टर रेंज और स्वराज प्रोटेक के नए प्रोडक्ट्स भी शामिल होंगे जो खेती-किसानी को अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे।

सफल टेस्टिंग के बाद पूरे भारत में मिला बाजार, मिलेगी 6 साल की वारंटी

महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने इस दमदार ट्रैक्टर को चुनिंदा बाजारों में मिली बड़ी सफलता और बेहतरीन प्रतिक्रिया के बाद अब पूरे देश में उतारने का फैसला किया है। महिंद्रा ट्रैक्टर्स के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) हर्ष राय ने लॉन्चिंग के मौके पर कहा कि चुनिंदा बाजारों में सफल शुरुआत के बाद अब हम YuvoTech+ 585 DI V1 को पूरे भारत में लॉन्च कर रहे हैं। हमारे तेजी से बढ़ते हुए YuvoTech प्लेटफॉर्म पर निर्मित यह ट्रैक्टर उन्नत तकनीक, दमदार प्रदर्शन और व्यावहारिक फीचर्स का एक बेहतरीन संयोजन है।

किसानों के भरोसे को दोगुना करने के लिए कंपनी ने इस नए ट्रैक्टर के साथ 6 साल की इंडस्ट्री-लीडिंग वारंटी देने की घोषणा की है। यह ट्रैक्टर देश भर में महिंद्रा के सभी डीलरशिप पर बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।

जून में महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री में 12.38% का शानदार उछाल

यह मेगा लॉन्चिंग ऐसे समय में हुई है जब भारतीय ट्रैक्टर सेगमेंट की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। हाल ही में जून महीने के आए बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और कृषि बाजारों में ट्रैक्टरों की मांग काफी तेज है। जून महीने में महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर (YoY) 12.38% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कंपनी ने कुल 58177 यूनिट ट्रैक्टर बेचे। इसी सेगमेंट की दूसरी बड़ी कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री सालाना आधार पर 19.78% बढ़कर 13172 यूनिट तक पहुंच गई।

El Nino की चिंता के बीच सरकारी नीतियां बनेंगी किसानों का ढाल

खेती-किसानी के लिए मौसम और अल नीनो (El Nino) की स्थिति हमेशा एक बड़ी चिंता रहती है। इस पर बात करते हुए महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के प्रेसिडेंट वीजय नाकरा ने बीते दिन कहा था कि हालांकि, अभी El Nino के असर का पूरा आकलन करना जल्दबाजी होगा लेकिन सरकार की मजबूत नीतियां जैसे लगातार खाद सब्सिडी और स्थानीय स्तर पर दी जा रही सहायता किसानों के जोखिम को कम करने में काफी मदद कर सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि सरकार के इन सकारात्मक कदमों से खरीफ सीजन पर पड़ने वाले किसी भी विपरीत असर को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र की ग्रोथ और ट्रैक्टरों की मांग बाजार में बनी रहेगी।

Govt Cooperative Insurance Company: देश में जल्द लॉन्च होगी सरकारी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, जानिए किसे होगा फायदा

Cooperative Life Insurance Company Explainer: देश के करोड़ों आम लोगों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ा एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार जल्द ही सहकारी क्षेत्र में एक नई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी शुरू करने जा रही है।

इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य देश के सुदूर इलाकों, छोटे शहरों और गांवों तक किफायती जीवन बीमा की पहुंच को बढ़ाना है। आइए आपको बताते हैं कि सरकार की इस नई पहल कैसे काम करेगी और इससे सीधे आपको या आम पॉलिसीधारकों को क्या-क्या फायदे होने वाले हैं।

सहकारी जीवन बीमा कंपनी क्या है और इसकी घोषणा क्यों हुई?

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के मौके पर इस बड़ी योजना का ऐलान किया। अभी तक देश के सहकारिता आंदोलन का दायरा मुख्य रूप से डेयरी, चीनी, बीज और खाद जैसे पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित था।

अब सरकार इस पूरे इकोसिस्टम को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने जा रही है। सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल के जरिए इंश्योरेंस बिजनेस में उतरने से देश के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी जीवन बीमा सुरक्षा चक्र के दायरे में लाया जा सकेगा, वह भी बेहद किफायती प्रीमियम पर।

फर्टिलाइजर सेक्टर की दिग्गज सहकारी संस्था ‘इफको’ (IFFCO) पहले से ही एक जापानी पार्टनर के साथ मिलकर जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में काम कर रही है। अब इसी सफलता को दोहराते हुए ‘लाइफ इंश्योरेंस’ के लिए एक पूरी तरह से नई सहकारी कंपनी खड़ी की जाएगी।

किसे और कैसे होगा इसका सीधा फायदा?

भारत में इस समय लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी नेटवर्क है। नई बीमा कंपनी से इन लोगों को निम्नलिखित फायदे मिलेंगे:

कम प्रीमियम पर लाइफ इंश्योरेंस: सहकारी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों को सेवा देना होता है। इसलिए, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले यहां लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम काफी कम होने की उम्मीद है।

गांवों और किसानों को सीधा लाभ: देश के करोड़ों किसान जो प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसाइटीज (PACS) से जुड़े हैं, वे अब सीधे अपने नजदीकी सहकारी केंद्र से ही जीवन बीमा पॉलिसी खरीद और क्लेम कर सकेंगे। उन्हें बड़े शहरों या बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

भरोसा और पारदर्शिता: सरकारी देखरेख और राष्ट्रीय डेटाबेस के जरिए संचालित होने के कारण इस कंपनी में आम लोगों का भरोसा निजी कंपनियों से कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

डिजिटल बदलाव: अब 50,000 ई-पैक से मिलेगी मदद

इस वित्तीय समावेशन को जमीन पर उतारने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे को पूरी तरह डिजिटल बना रही है। इसके तहत देश की 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को अपग्रेड करके e-PACS में बदल दिया गया है।

भविष्य में ये डिजिटल e-PACS केंद्र केवल खाद-बीज देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की तरह काम करेंगे, जहां से ग्रामीण लोग अपनी जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम जमा कर सकेंगे और क्लेम की प्रक्रिया भी पूरी कर सकेंगे।

सहकारी क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य बड़े ऐलान

बीमा कंपनी के अलावा, सरकार ने इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई और बड़ी घोषणाएं की हैं:

  1. भरत टैक्सी: सहकारी क्षेत्र की इस टैक्सी पहल को अगले दो वर्षों में देश के 500 शहरों तक बढ़ाया जाएगा।
  2. त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी: सहकारिता के क्षेत्र में प्रोफेशनल्स और मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आनंद (गुजरात) में ‘Tribhuvan Sahkari University’ की स्थापना की जा रही है।
  3. अनाज भंडारण क्षमता: देश में अनाज की बर्बादी रोकने के लिए 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों को ट्रांसफर किया गया है और 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ है।
  4. सहकार वन प्रोजेक्ट: अमूल और NCCF मिलकर पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार वन’ परियोजनाओं पर काम शुरू कर रहे हैं।

कुल मिलाकर साल 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में यह नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी मील का पत्थर साबित हो सकती है। आम आदमी के लिहाज से देखें तो आने वाले समय में आपको लाइफ इंश्योरेंस के लिए एक नया, सुरक्षित और बेहद सस्ता सरकारी विकल्प मिलने जा रहा है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में किया इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन, बोले- गरीब-अन्नदाता-युवा-नारी का होगा कल्याण

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी भोपाल के सतगढ़ी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिससे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष नाता रहा है। आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर भोपाल को सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और कन्वेंशन सेंटर की बड़ी सौगात मिली है। आज एक नया इतिहास बन रहा है। यह इंडस्ट्रियल पार्क देश के पहले उद्योग मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जाना जाएगा। हम जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण पर विशेष जोर दिया। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र हमारे किसानों के लिए भी समृद्धि का द्वार खोलेंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा। गारमेंट इंडस्ट्री से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। हमारी सरकार खेत से कारखाने और उद्योग को बाजार से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। भोपाल प्राकृतिक सुंदरता और झील-तालाबों की नगरी है, लेकिन अब यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भी राजधानी की पहचान बनेगा। अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

भोपाल औद्योगिक नगरी के रूप में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से प्रदेश के विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक अंचल में देश-दुनिया के निवेशक औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर रहे हैं। कल ही चंबल के शिवपुरी में ढाई हजार करोड़ लागत से रक्षा क्षेत्र की बड़ी औद्योगिक ईकाई का भूमि-पूजन किया है। इससे पूर्व मुरैना को सोलर सेक्टर की बड़ी सौगात दी है। उन्होंने कहा कि रोजगार आधारित उद्योगों के लिए गुना में 2 हजार करोड़ का सीमेंट प्लांट भी बनाया जा रहा है। शिवपुरी में बनने वाली मिसाइलों की क्षमता 1000 किलोमीटर की होगी, जो पाकिस्तान के किसी भी कोने तक पहुंच सकेगी।

 

हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत@2047 के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश भी विकास के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भोपाल में पहली बार जीआईएस जैसे बड़ा आयोजन संपन्न हुआ, जिसे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आशीर्वाद मिला। जीआईएस 2025 में आए 30 लाख करोड़ से अधिक निवेश को देखकर विरोधियों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। इस आयोजन में देश-दुनिया के बड़े उद्योगपति और औद्योगिक घराने शामिल हुए।

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज 30 लाख करोड़ के निवेश में से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। प्रदेश में पहली बार 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर आने का नया कीर्तिमान बना है। किसान कल्याण वर्ष में जनवरी से लेकर अब तक निवेशकों के साथ 86 हजार करोड़ के एमओयू साइन हुए हैं। प्रदेशभर में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में ही 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की बहनों को भी हर महीने सौगात मिल रही है। अब तक मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना में राज्य सरकार 50 हजार करोड़ से अधिक राशि लाड़ली बहनों को दे चुकी है। अब बहनें रोजगार आधारित उद्योगों में काम करेंगी तो उन्हें 5000 रुपए अलग से दिया मिलेगा।

 

सभी के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' की बात कही थी। उनके इस संकल्प को साकार करने के लिए राज्य में अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। समाज के हर वर्ग के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए। प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है कि डंके की चोट पर हर हालत में यूसीसी मध्यप्रदेश में लागू होगा। इसके लिए कमेटी ने सभी धर्म-समुदाय के सुझाव लिए ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो। अब मध्यप्रदेश एक समान कानून लागू करने वाला देश के बड़े राज्यों में शामिल प्रदेश बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन से हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हमारे साथ काम कर रहे हैं। इन देशों से 10 हजार करोड़ का विदेशी निवेश भी मध्यप्रदेश को मिला है।

प्रदेश में छोटे-मझोले उद्योगों की देनदारी खत्म कर दी गई है। बिजली, पानी और सड़क हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से राजाभोज विमानतल की दूरी महज 25 किलोमीटर है। रानी कमलापति स्टेशन भी मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है। भोपाल का वेस्टर्न बायपास भी यहीं से गुजरेगा। उन्होंने कहा कि सतगढ़ी के 25 एकड़ क्षेत्र में 10 हजार क्षमता वाला एक आधुनिक कन्वेंशन सेंटर भी बनेगा। यह प्रदेश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर होगा। मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक विकास और पारदर्शी व्यवस्था के साथ तेजी से आगे बढ़ता जाएगा। सतगढ़ी क्षेत्र औद्योगिक विकास की दिशा में एक मंदिर के समान होगा। सागर ग्रुप के सुधीर अग्रवाल सतगढ़ी में 100 करोड़ का निवेश करेंगे।

 

रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है पार्क-मध्य प्रदेश में औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग (IPIP) तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME) के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आज का भूमिपूजन केवल एक औद्योगिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि भोपाल और मध्यप्रदेश के औद्योगिक भविष्य की नई आधारशिला रखने का अवसर है। सतगढ़ी स्थित यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। पार्क का स्थान रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग से लगभग 1.4 किमी की दूरी पर स्थित है तथा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रमुख शहरी क्षेत्रों से उत्कृष्ट संपर्क रखता है। इससे भोपाल पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई अर्थव्यवस्था के उद्योगों का भी केंद्र बनेगा।

ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा मानसून का रौद्र रूप! इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

ISRO Satellite Images: देश के कई हिस्सों में अभी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस साल मनसून के देरी से आने की वजह से लोगों को गर्मी से अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। वहीं भीषण गर्मी से परेशान और फसलों के लिए बारिश की राह देख रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अपने सबसे मजबूत दौर में है। नई तस्वीरों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर घने बादलों का बड़ा क्षेत्र दिखाई दे रहा है। इन बादलों की वजह से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई जगह तेज बारिश हो रही है।

सामने आई ISRO की ये तस्वीरें 

इसरो के INSAT-3DR उपग्रह से मिली तस्वीरों के अनुसार, बादलों का एक बड़ा समूह पूर्वी-मध्य अरब सागर से लेकर कोंकण तट तक फैला हुआ है। वहीं, दूसरा बड़ा बादल तंत्र उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है, जिसका असर पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी देखा जा रहा है। सैटेलाइट की थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीरों में दोनों बादल तंत्रों के ऊपरी हिस्से चमकीले सफेद दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि इन इलाकों में तेज़ बादल बनने की प्रक्रिया चल रही है और गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। कई जगह बहुत ज़्यादा बारिश होने की भी संभावना है।

मौसम विभाग ने दी ये जानकारी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इस दौरान महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। भारत के पश्चिमी हिस्से में अरब सागर के ऊपर बना मौसम तंत्र कोंकण तट के पास और अधिक मजबूत हो गया है। समुद्र का गर्म पानी और मानसून की तेज़ हवाएं इसे लगातार ताकत दे रही हैं। पिछले कुछ दिनों से तटीय इलाकों में कई जगह लगातार तेज बारिश हो रही है। इससे निचले क्षेत्रों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है। कई सड़कों पर जलभराव होने और बारिश के कारण कम दिखाई देने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्वी भारत में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और ऊपरी स्तर की हवाओं के कारण बादल तेजी से ऊपर उठ रहे हैं और बड़े तूफानी बादलों का रूप ले रहे हैं। इसी वजह से पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में लगातार भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। कई जगह तेज़ बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।

शुरुआत में मानसून की रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब इसके फिर से सक्रिय होने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई है। हालांकि, लगातार हो रही तेज़ बारिश के कारण शहरों में जलभराव, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और लोगों के आने-जाने में दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश और तेज़ हो सकती है। ऐसे में जिन इलाकों में बाढ़ या भूस्खलन का खतरा है, वहां रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

Stock in Focus: ₹236 करोड़ का ऑर्डर और मिला, अब 6 जुलाई को फोकस में शेयर

Oswal Pumps Share Price: ओसवाल पंप्स को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) से ₹235.92 करोड़ का ऑर्डर और मिला है। कंपनी को यह ऑर्डर पीएम कुसुम बी स्कीम (PM Kusum B Scheme) के तहत मिला है। कंपनी ने इसकी जानकारी शनिवार 4 जुलाई को एक्सचेंज फाइलिंग में दी। अब इसका असर कंपनी के शेयरों पर सोमवार 6 जुलाई को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 3 जुलाई को बीएसई पर यह 2.01% की गिरावट के साथ ₹409.70% के भाव पर बंद हुआ था।

कैसा ऑर्डर मिला है Oswal Pumps को?

एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि उसे पूरे महाराष्ट्र में 10,000 ऑफ-ग्रिड DC सोलर फोटोवोल्टिक वॉटर पंपिंग सिस्टम (SPWPS) के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर करीब ₹235.92 करोड़ का है जिसमें जीएसटी भी शामिल गै। इस पर कंपनी को 60 दिनों के भीतर काम पूरा करना है।

इस प्रोजेक्ट में कंपनी महाराष्ट्र में चुने गए किसानों की जगहों पर पीएम कुसुम बी स्कीम की “मागेल त्याला सौर कृषि पंप” योजना के तहत 3 HP, 5 HP और 7.5 HP के सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम लगाएगी। कंपनी को 5 साल तक इनके वारंटी, रिपेयर और मेंटेनेंस सर्विसेज और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम का भी काम संभालना है। कंपनी के चेयरमैन और एमडी विवेक गुप्ता ने 10 हजार सोलर पंप्स के अतिरिक्त ऑर्डर्स मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह राज्य सरकार के साथ कंपनी की मजबूत और लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को दिखाता है जो राज्य के सोलर सिंचाई मिशन को आगे बढ़ा रही है

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

ओसवाल पंप्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है और कम ही समय में आधे से अधिक पूंजी घटा दी। पिछले सााल बीएसई पर 21 अगस्त 2025 को यह ₹889.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 7 ही महीने में यह 68.18% फिसलकर 16 मार्च 2026 को ₹283.05 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर पर शेयर संभले और अब तक 30.91% रिकवर हो चुके हैं लेकिन एक साल के हाई से अब भी यह 53.94% नीचे है।

Laser Power & Infra IPO के साइज में कटौती, अब ₹742 करोड़ के इश्यू को लेकर ये है पूरा प्लान

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

E20 Petrol: क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से सच में घटती है माइलेज और खराब होता है इंजन? ऑयल इंडस्ट्री के 2 दिग्गज एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

भारत में E20 (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले) पेट्रोल का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम जनता के बीच गाड़ी के माइलेज में गिरावट और इंजन को संभावित नुकसान पहुंचने की बहस भी तेज हो गई है। उपभोक्ताओं की इसी चिंता और भ्रम को दूर करने के लिए ऑयल और एनर्जी इंडस्ट्री के दो दिग्गज एक्सपर्ट्स शनिवार को सामने आए और उन्होंने इस ईंधन से जुड़े तमाम मिथकों की सच्चाई उजागर की। मुंबई में आयोजित एक हाई-लेवल मीडिया ब्रीफिंग के दौरान समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए बीपीसीएल (BPCL) के रिटायर्ड डायरेक्टर (रिफाइनरीज) आर रामचंद्रन और आईजीएल (IGL) के रिटायर्ड चेयरमैन व बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने लैब के पुख्ता डेटा के आधार पर सड़क के व्यक्तिगत अनुभवों से पैदा हुए भ्रम को दूर किया और E20 को भविष्य का ईंधन बताया।

क्या E20 पेट्रोल से सच में 10% घट जाती है माइलेज?

वाहन चालकों की ओर से अक्सर यह शिकायत आती है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी की माइलेज में 10 फीसदी तक की गिरावट आ रही है। इस पर बात करते हुए आर रामचंद्रन ने साफ किया कि व्यापक इंस्टीट्यूशनल टेस्टिंग से पता चलता है कि माइलेज पर इसका सिर्फ मामूली असर पड़ता है। रामचंद्रन ने समझाया कि कुछ इससे अलग मामले भी हो सकते हैं, जिन्हें अलग तरीके से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने इशारा किया कि वाहनों का पुराना होना, सामान्य टूट-फूट या अग्रेसिवी सिटी ड्राइविंग जैसी स्थिति भी कम माइलेज के पीछे की असल वजह हो सकती है।

इस मुद्दे पर राज कुमार दुबे ने एक बेहद दिलचस्प बात जोड़ी। उन्होंने कहा कि वाहन चालक पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से बिना जाने ही E20 जैसा ब्लेंडेड ईंधन खरीद रहे हैं। दुबे ने कहा कि अचानक अगर आप यह सवाल उठाते हैं कि माइलेज नाटकीय रूप से कम हो रहा है तो इन बातों का कोई तार्किक आधार नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे किसी व्यक्तिगत राय के बजाय टेस्टिंग एजेंसियों के दावों पर भरोसा करें।

क्या 2023 से पहले की गाड़ियों के इंजन हो जाएंगे खराब?

साल 2023 से पहले बनी देश की लाखों पुरानी गाड़ियों में सीधे तौर पर E20 ईंधन के इस्तेमाल की फैक्ट्री कंप्लायंस नहीं है। ऐसे में मैकेनिकल नुकसान के डर पर एक्सपर्ट्स ने स्थिति स्पष्ट की। राज कुमार दुबे ने बताया कि एक्सेलरेटेड टेस्टिंग से यह सामने आया है कि पुराने इंजनों के लिए दीर्घकालिक तौर पर सिर्फ मामूली बदलावों की ही जरूरत होगी। दुबे ने कहा कि बहुत पुराने वाहनों में रबर के पार्ट्स पर कुछ असर पड़ सकता है। सामान्य तौर पर मान लीजिए कि आप 10 साल में रबर पार्ट्स बदलना चाहते हैं तो इस ईंधन के साथ आपको रबर पार्ट्स को शायद आठ साल में बदलने पर विचार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय अभियान के लिए यह बहुत ही छोटी कीमत है।

इसके साथ ही आर रामचंद्रन ने बीमा से जुड़ी उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि ऐसी गाड़ियों का इंश्योरेंस अमान्य हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्ट अधिसूचनाएं इसकी पुष्टि करती हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसियां पूरी तरह से वैध रहती हैं।

पर्यावरण को नुकसान और पानी की बर्बादी का सच

कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि एक लीटर एथेनॉल ईंधन के उत्पादन में 10000 लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। इन पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दोनों दिग्गजों ने सिरे से खारिज कर दिया। रामचंद्रन ने कहा कि कृषि उत्पादन में होने वाली पानी की खपत का बोझ एथेनॉल पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अधिकांश नए जमाने की डिस्टिलरीज 100% वाटर रीसाइक्लिंग और जीरो-इफ्लुएंट डिस्चार्ज के सिद्धांत पर काम कर रही हैं।

देश को मिल रहा है भारी आर्थिक फायदा

एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस नीति से देश को बहुत बड़ा व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। सरकार को इससे 1.8 लाख करोड़ रुपये से 1,9 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है। राज कुमार दुबे ने ध्यान दिलाया कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अगर E20 पेट्रोल अस्तित्व में न होता और इस 20 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्से को भी हमें विदेशों से आयात करना पड़ता तो इस देश में पेट्रोल की कीमत क्या होती? आज पेट्रोल के दाम 5 से 7 रुपये प्रति लीटर और ज्यादा बढ़ गए होते। उन्होंने ये भी कहा कि देश की पूंजी को घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर बनाए रखने से सीधा फायदा हमारे स्थानीय गन्ना किसानों को मिल रहा है और वे समृद्ध हो रहे हैं।

दावा- ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले PM मोदी को धमकी:मेलबर्न में होने वाले प्रोग्राम की फेसबुक पोस्ट में कमेंट कर धमकाया, 9 जुलाई को है प्रोग्राम

पीएम मोदी को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जान से मारने की धमकी मिली है। ऑस्ट्रेलिया की फेडरल पुलिस मोदी को दी गई धमकी की जांच कर रही है। द ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में दावा किया गया कि धमकी फेसबुक पर “मेलबर्न मीट्स मोदी” कार्यक्रम के प्रचार से जुड़ी एक पोस्ट के नीचे लिखी गई थी। पोस्ट के नीचे अबू मुस्तफा नाम के फेसबुक अकाउंट से लिखा गया, “स्टेडियम की छत कार्यक्रम के दौरान बंद रहनी चाहिए, नहीं तो वह ऑस्ट्रेलिया अपनी मौत के लिए आएगा।” जांच एजेंसियों ने उस पोस्ट से जुड़े आईपी एड्रेस की पहचान कर ली है। मोदी 8 जुलाई से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे। “मेलबर्न मीट्स मोदी” कार्यक्रम 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में होना है। मोदी के इसमें शामिल होने की संभावना है। धमकी सामने आते ही जानकारी ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस को दे दी गई थी। अबतक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई अब तक पुलिस ने धमकी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पुलिस किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में ऑस्ट्रेलिया की फेडरल पुलिस, राज्य पुलिस और विशेष सुरक्षा इकाइयों समेत कई एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इससे पहले भी मोदी को धमकी मिल चुकी
2022: पंजाब में PM मोदी की सुरक्षा में चूक
5 जनवरी 2022 को पंजाब में पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक हुई थी। हुसैनीवाला जाते समय प्यारेआणा ब्रिज (फ्लाईओवर) पर प्रदर्शनकारी किसानों ने रास्ता जाम कर दिया था। इस वजह से पीएम का काफिला लगभग 15-20 मिनट तक फंसा रहा था। इसके बाद पीएम बिना रैली किए बठिंडा एयरपोर्ट वापस लौट गए थे।
2026: पंजाब दौरे से पहले ब्लास्ट की धमकी मिली थी
PM नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से एक दिन पहले 31 जनवरी को जालंधर के 4 स्कूलों में बम ब्लास्ट की धमकी मिली थी। कैंब्रिज स्कूल, केएमवी संस्कृति स्कूल, ब्रिटिश ओलिवा स्कूल और सीजेएस पब्लिक स्कूल को धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। हालांकि जांच के इस दौरान कुछ नहीं मिला था। खबर लगातर अपडेट की जा रही है…

सिर्फ 0.25 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट उगा 5 लाख की कमाई! मुंबई में टाइल्स लगाने का काम छोड़ लक्ष्मण ने खेती को यूं बनाया मुनाफे का सौदा

ओडिशा के बलांगीर जिले में रहने वाले लक्ष्मण डांसना ने यह साबित कर दिया है कि बड़ी कमाई के लिए बड़ी जमीन नहीं, बल्कि सही सोच और मेहनत जरूरी होती है। कभी मुंबई में टाइल लगाने का काम करने वाले लक्ष्मण आज अपने गांव लौटकर खेती से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और इसे एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने सब्जियों की खेती भी की, लेकिन सीमित कमाई के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया।

सही जानकारी, धैर्य और लगातार सीखने की आदत ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनकी यह छोटी सी खेती उन्हें हर साल करीब 7.5 लाख रुपये की स्थिर आय दे रही है, जो कई लोगों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

पहले टाइल वर्कर, फिर बने स्मार्ट किसान

लक्ष्मण पहले मुंबई में टाइल लगाने का काम करते थे। कई साल बाहर काम करने के बाद जब वे अपने गांव लौटे, तो उन्होंने तय किया कि अब परिवार के पास रहकर भी अच्छी कमाई करनी है। यही सोच उन्हें खेती की तरफ ले आई।

सब्जियों से शुरू, फिर आया बड़ा आइडिया

शुरुआत में उन्होंने छोटी जमीन पर सब्जियों की खेती की, लेकिन इससे ज्यादा फायदा नहीं हुआ। ज्यादातर उपज घर में ही इस्तेमाल हो जाती थी, जिससे कमाई सीमित रह गई। इसके बाद उन्होंने कुछ नया करने की ठानी।

ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी किस्मत

एक दिन उन्हें ड्रैगन फ्रूट खेती का वीडियो मिला, जिसने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने तुरंत खेती शुरू नहीं की, बल्कि पहले कई साल तक रिसर्च की, किसानों से मिले और सफल फार्म देखने गए।

छोटी जमीन से लाखों की कमाई

पूरी तैयारी के बाद उन्होंने अपनी छोटी सी जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। मेहनत और सही प्लानिंग का नतीजा यह हुआ कि आज वही जमीन उन्हें हर साल लाखों की स्थिर आय दे रही है।

Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

पेट्रोल में एथेनॉल के बाद अब डीजल में Isobutanol ब्लेंडिंग ट्रायल शुरू, सामने आई ये जानकारी

पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद अब सरकार डीजल को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत अब बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना बना रही है, ताकि विदेशों से तेल आयात पर देश की निर्भरता कम हो सके।

अब डीजल से Isobutanol Fuel बनाने जा रही सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाने पर काम किया जा रहा है, जिसे डीजल के साथ मिलाकर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आइसोब्यूटेनॉल भविष्य में डीजल का अच्छा विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। यह कदम देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और प्रदूषण कम करने वाले स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार कर रही तैयारी 

नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल से दो जनरेटर सफलतापूर्वक चलाकर देखे हैं। इससे यह साबित हुआ है कि ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं, जो पूरी तरह इन ईंधनों पर काम करें। आइसोब्यूटेनॉल को नई पीढ़ी का बेहतर बायोफ्यूल माना जा रहा है। इसमें सामान्य बायोफ्यूल की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है, यह इंजन के साथ बेहतर तरीके से काम करता है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। अधिकारियों का कहना है कि इसके इस्तेमाल से भारत का कच्चे तेल का आयात और घटेगा, साथ ही देश में बनने वाले बायोफ्यूल की मांग भी बढ़ेगी।

 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार के E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन किया था। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों को भी खारिज किया था।

मंत्रालय ने साफ कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल से पानी की भारी कमी नहीं होती, न ही इससे वाहनों के इंजन खराब होते हैं। साथ ही, इससे गाड़ी की वारंटी या बीमा भी प्रभावित नहीं होता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात भी सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना वैज्ञानिक शोध, सुरक्षा मानकों और दुनिया के कई देशों के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पहले, दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया था। सरकार का कहना है कि इस योजना से देश ने 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है, वहीं किसानों की आय बढ़ाने में भी इस योजना ने अहम भूमिका निभाई है।

Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत में खेत में काम कर रहे एक किसान को अचानक कोबरा ने काट लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सांप के काटते ही किसान की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे चक्कर, कमजोरी और शरीर में सुन्नपन महसूस होने लगा। घटना के बाद परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत मदद की कोशिश करने लगे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। सांप के जहर से बचाव को लेकर अक्सर लोग गलत जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं, और यही इस घटना में भी देखने को मिला। डॉक्टरों ने बाद में साफ किया कि ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका होता है, वरना जहर तेजी से शरीर में फैल सकता है।

पत्नी ने टीवी देखकर किया खतरनाक इलाज

घबराई हुई पत्नी ने तुरंत वही किया जो उसने टीवी पर देखा था उसने अपने पति के घाव से जहर चूसने की कोशिश की। उसे लगा कि इससे जान बच जाएगी, लेकिन यही फैसला उसके लिए भी भारी पड़ गया।

दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा

कुछ ही घंटों बाद पत्नी के मुंह, जीभ और चेहरे में सुन्नपन शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे भी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों को कोबरा के जहर से हल्का जहर चढ़ गया था और एंटी-वेनम देकर इलाज किया गया।

ये गलती कभी न करें

डॉक्टरों ने साफ कहा कि सांप के जहर को मुंह से चूसना बेहद खतरनाक है। मुंह की नसों के जरिए जहर सीधे शरीर में पहुंच सकता है। साथ ही घाव को काटना, जलाना या बर्फ लगाना भी नुकसानदायक हो सकता है।

सांप काटने पर क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे समय में तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को कम से कम हिलाएं। सांप का रंग, आकार और निशान याद रखना या फोटो लेना इलाज में मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में मामला

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग इसे “टीवी ड्रामा वाली गलती” बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने पत्नी की चिंता और प्यार की भी तारीफ की है।

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