CM योगी का तंज, सपा अध्यक्ष भी भगवा पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं

Chief Minister Yogi Adityanath News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा रहा है। अयोध्या से सरयू का जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम जाने वाले कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाती है, जबकि पहले कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी। आज श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर लगता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने, जय श्रीराम बोलने वालों पर कार्रवाई कराने, परशुरामपुर दंगे और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बस्ती के हर्रैया व कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 504 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 77 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र/ स्वीकृतिपत्र और सहायता सामग्री का वितरित किया।

सपा के जिला अध्यक्ष का सीएम योगी ने सुनाया किस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने और अवैध कब्जों पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और विकास में लगाया जा रहा है। उस समय वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीबों, दलितों और वंचितों की जमीनों पर कब्जे किए जाते थे और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के शासन में यह आम बात थी। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब समाजवादी पार्टी के एक जिला अध्यक्ष स्वयं उनके पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर कब्जा हटवाया और उनकी जमीन बचाई। उस समय सपा सरकार को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता था, आम जनता नहीं।

सपा के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, जबकि आज शिलान्यास और लोकार्पण की परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं। उन्होंने हर्रैया में बन रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक आधुनिक शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। प्रत्येक विद्यालय पर 27 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक भवन, फर्नीचर और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

समाजवादी पार्टी के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया था। किसानों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं, गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था और बिजली व्यवस्था इतनी खराब थी कि बस्ती में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बिजली संकट से जूझ रही थी जबकि सैफई में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

राम मंदिर को लेकर विपक्ष कहता था कि खून की नदियां बहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने हर प्रमुख धर्मस्थल को विवादित बनाने का प्रयास किया और अयोध्या में भी लगातार विवाद खड़ा करने की राजनीति की। एक समय ऐसा था जब अयोध्या में कोई जय श्रीराम का उद्घोष कर देता था तो उसके खिलाफ लाठी और गोली चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कहते थे कि यदि मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। लेकिन हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा और आज पूरा देश देख रहा है कि राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ, प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई और कहीं कोई अशांति नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को कोई नहीं रोक पाया और यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था, विश्वास और संकल्प की जीत है।

सीएम ने दुर्योधन के शासन से की सपा सरकार की तुलना  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में यह कहावत प्रचलित हो गई थी, देख सपाई, बिटिया घबराई। उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। जब सरकार ही बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो उसकी तुलना दुर्योधन के शासन से ही की जा सकती है। पहले बस्ती सहित प्रदेश में दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी जैसे पर्वों पर दंगे होते थे। परशुरामपुर दंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों की बस्तियां जला दी गईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय वे गोरखपुर से आकर पीड़ितों के बीच उनका दर्द बांटने आए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और सभी त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। अब अपराधी कानून से डरते हैं।

करीब 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया

सीएम योगी ने कहा कि मखौड़ा धाम वही पावन भूमि है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। मखौड़ा धाम, बाबा भदेश्वरनाथ धाम, तपसी धाम तथा महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मस्थली इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। जनता जब अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है। मखौड़ा धाम, भदेश्वरनाथ धाम और तपसी धाम का तेजी से विकास कराया जा रहा है। कर्ण मंदिर विवाद का समाधान होने के बाद वहां भी सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होता है और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ अयोध्या रिंग रोड के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकारें 84 कोसी, 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा तक रोकती थीं, जबकि भाजपा सरकार धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए तीर्थ स्थलों का विकास कर रही है। प्रदेश में लगभग 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा चुका है और सरकार बदलने के साथ परिणाम भी बदल गए हैं। भाजपा सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है।

 

विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित बस्ती का निर्माण किया जा रहा है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मखौड़ा धाम और भदेश्वरनाथ धाम सहित अनेक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर्रैया और बस्ती में पिछले नौ वर्षों में जितना विकास हुआ, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक अजय सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक दूध राम, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, दयाराम चौधरी, रवि सोनकर आदि मौजूद रहे।

PM Kisan Samman Nidhi की 24वीं किस्त कब आएगी खाते में, पूरा करें यह काम नहीं तो अटक जाएगा आपका पैसा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के तहत केंद्र सरकार हर वर्ष 6000 रुपए प्रति किसान को मदद करती है। इस योजना की अभी तक 23 किस्त जारी हो चुकी हैं। हालांकि पिछले महीने जारी हुई पीएम किसान की 23वीं किस्त के पैसे कुछ किसानों के बैंक अकाउंट में नहीं पहुंचे हैं। अगर आप भी किसान हैं तो आप यह गलती नहीं करें। आपकी जरा सी गलती की वजह से उनकी किस्त अटक जाती है। पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी जरूरी कर दी गई है। अगर किसानों की ई-केवाईसी पूरी नहीं है, तो उनकी किस्त अटक सकती है।

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कब आएगी 24वीं किस्त

पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त पिछले महीने जून मे जारी हुई है। ऐसे में अब अगली किस्त चार महीने बाद सितंबर-अक्टूबर में जारी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस किस्त को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

 

क्या है किस्त रुकने का कारण 

किस्त रुकने की सबसे कारणों में ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी न होना, बैंक खाते की जानकारी में गलती, आधार से जुड़ी जानकारी में अंतर या भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा न होना शामिल है। 23वीं किस्त की तरह आपकी 24वीं किस्त न अटके, तो सबसे पहले आपको अपनी गलती सुधारनी होगी। इसके लिए आपको पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां पर आपको ऊपर दिए गए सभी कारणों को चेक करना होगा। अगर कोई भी जानकारी गलत दिखाई दे रही है तो आपको उसे जल्द सुधारना पड़ेगा।

E20 Petrol: एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल क‍ितना सही? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द‍िया जवाब, बताई सच्‍चाई

देशभर में 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लागू करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार की इस योजना को लेकर उठ रहे हर सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी इंजन खराब होने और लोगों के विरोध जैसी बातें सही नहीं हैं। एक खास बातचीत में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार का ग्रीन फ्यूल अभियान पर्यावरण को बेहतर बनाने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने खास तौर पर पुरानी गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली चिंताओं को भी खारिज किया। मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल सर्विस सेक्टर के उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से बड़े पैमाने पर वाहनों में मैकेनिकल खराबी हो रही है।

E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मारुति सुजुकी ने अब तक करीब 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की है, लेकिन E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वाहन बनाने वाली कंपनियों और मैकेनिकों, दोनों को ही कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं मिली है। मंत्री ने यह भी बताया कि शुरुआत में वारंटी और बीमा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की अफवाहें फैली थीं, जिससे वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब ये सभी समस्याएं दूर कर ली गई हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पहले कुछ बीमा कंपनियों के बारे में कहा जा रहा था कि वे E20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान का दावा स्वीकार नहीं करेंगी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वाहन मालिकों को वारंटी और बीमा से जुड़ी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

सरकार का दावा: E20 पेट्रोल से इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर

सरकार का कहना है कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) कम होती है। लेकिन सरकार का मानना है कि केवल माइलेज देखकर इस ईंधन का आकलन करना सही नहीं है।

  • बेहतर पिकअप: इथेनॉल की वजह से गाड़ी का पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर होता है। साथ ही इंजन का रिस्पॉन्स भी तेज मिलता है।
  • इंजन की बेहतर सुरक्षा: E20 पेट्रोल का ऑक्टेन स्तर ज्यादा होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग (असामान्य आवाज) की संभावना कम होती है और इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
  • लंबे समय तक सुरक्षित: सरकार का कहना है कि कई परीक्षणों में यह पाया गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन के अंदरूनी हिस्सों को लंबे समय में कोई नुकसान नहीं होता।

‘E20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर कदम…’,

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल का आकलन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी नई तकनीक को उसके सभी फायदे और लंबे समय के असर को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिला पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि नई तकनीक का उद्देश्य हमेशा ऐसी व्यवस्था अपनाना होता है, जो पहले से ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल इसी बदलाव का हिस्सा है और इसका मकसद देश को स्वच्छ ईंधन अपनाने के साथ-साथ भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाना है।

E85 पेट्रोल लाने की तैयारी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही E85 ईंधन लाने की तैयारी कर रही है। इस ईंधन में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होगा। इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) में ही किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना से देश की अर्थव्यवस्था और किसानों, दोनों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार, अगर यह योजना नहीं होती तो भारत को ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ता और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज के मुकाबले अधिक होतीं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण से विदेशों से कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। इससे देश को वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का कम असर झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से विदेशों में तेल खरीदने पर होने वाला खर्च घटता है और इसका लाभ देश के किसानों और कृषि क्षेत्र तक पहुंचता है। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिल रही है।

EV और बायोफ्यूल दोनों को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E25 पेट्रोल को लेकर लोगों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल E25 केवल परीक्षण (ट्रायल) के चरण में है और इसे अभी आम लोगों के लिए लागू नहीं किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में ईंधन से जुड़ा कोई भी बदलाव जल्दबाजी में नहीं करेगी। सभी फैसले वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से ही लागू किए जाएंगे। हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ बायोफ्यूल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी बराबर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य स्वच्छ और हरित परिवहन का है, इसलिए बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

जिन्हें कब्रस्तान प्यारा, वे ही कर रहे राम मंदिर का विरोध : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath targeted Samajwadi Party and Congress

– मुख्यमंत्री योगी ने बांदा व बबेरू विधानसभा क्षेत्र के लिए 710 करोड़ से अधिक की 229 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

– मुख्यमंत्री योगी की जनता से अपील- नकारात्मक व विकास विरोधी सोच वालों को खारिज कीजिए

– मुख्यमंत्री योगी ने 9 साल पहले के बुंदेलखंड की दुर्दशा और अब आए परिवर्तन का भी किया जिक्र 

– योगी ने कहा- बांदा के विधायक विकास में रुचि लेते हैं और बबेरू वाले गरीबों को प्रताड़ित करने में

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को फिर निशाने पर रखते हुए इन सरकारों के कार्यों का अंतर बताया। इशारों-इशारों में उन्होंने कहा कि कुछ लोग विरासत को अपमानित करते हैं। उन्होंने हिंदू परंपरा व सनातन को कोसना जीवन का ध्येय बनाया है। वे वैभवशाली व विकसित भारत नहीं देखना चाहते। हमारी सरकार जो पैसा मंदिरों के विकास व धामों के सुंदरीकरण के लिए देती है, समाजवादी पार्टी के समय यही पैसा कब्रस्तान की बाउंड्रीवाल के लिए जाता था। उन्हें कब्रस्तान प्यारा है, इसलिए वे राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, मां विंध्यवासिनी धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य धाम के विकास का विरोध करते हैं। सपा व कांग्रेस वाले भाजपा के प्रतिनिधियों द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्यों को पचा नहीं पाते।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि जिनकी सोच नकारात्मक व विकास विरोधी है, उन्हें खारिज कीजिए। मुख्यमंत्री योगी ने गुरुवार को बांदा व बबेरू विधानसभा क्षेत्र के लिए 710 करोड़ से अधिक की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण व शिलान्यास की गईं कई योजनाओं को गिनाकर इसका श्रेय जनता व जनप्रतिनिधियों को दिया।

 

कभी डकैतों व माफिया का था आतंक, आज प्रगति देखकर होती है प्रसन्नता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड की दुर्दशा के दौर को भी बयां किया। बताया कि मुख्यमंत्री

 बनने के बाद प्रधानमंत्री जी ने मुझसे कहा था कि पहला दौरा बुंदेलखंड का हो और वहां के लिए कुछ किया जाए। नौ- साढ़े 9 साल पहले जब आया तो देखा कि पिछड़ापन यहां का पर्याय था। पलायन और प्यास बुंदेलखंड की पहचान बन गई थी। खनन, लैंड, सैंड, वन, भूमाफिया व डकैतों का ऐसा आतंक था, जिससे किसान भी खेत में जाने से डरता था।

पाठा का यह क्षेत्र डकैतों के लिए फिरौती व वसूली का माध्यम बन गया था। कनेक्टिविटी, सिंचाई, पेयजल, सुरक्षा, रोजगार नहीं था। थाने में एफआईआर तक नहीं होती थी। बुंदेलखंड अस्तित्व के लिए जूझ रहा था परंतु अब बुंदेलखंड की प्रगति को देखकर अंतःकरण से प्रसन्नता होती है। हर किसी को 9 वर्ष पहले और आज के बांदा में परिवर्तन दिखेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि विकास व विरासत के संरक्षण के लिए शासन के संज्ञान में जो भी प्रोजेक्ट आएगा, उसे लागू कर बुंदेलखंड को धरती का स्वर्ग बनाएंगे। 

 

भाजपा सरकार ने हर वर्ग के सपनों को किया साकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने जब देश की बागडोर संभाली तो आशा की किरण जगी। 2017 में यूपी में डबल इंजन सरकार बनने के बाद यहां भी कनेक्टिविटी, पेयजल, हर खेत को पानी और बांदा के युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिल रहा है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने सभी के सपनों को साकार किया है। 

Chief Minister Yogi Adityanath targeted Samajwadi Party and Congress

वर्ष 2017 के पहले जिसे रखवाली की जिम्मेदारी मिली, वही प्रदेश को लूटते थे 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जनता ने श्रीप्रकाश द्विवेदी, रामकेश निषाद व ओममणि वर्मा जैसे अच्छे जनप्रतिनिधियों को जिताया है तो यहां विकास की परियोजनाएं आ रही हैं। बुंदेलखंड भी डकैत, माफिया, कर्फ्यू, उपद्रव व दंगामुक्त हो गया। अब यहां महारानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, कृषि विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, कनेक्टिविटी की बेहतरीन सुविधा मिल रही है।

उन्होंने सचेत किया कि यदि भूमाफिया व डकैत चुनाव जीतेगा तो व्यापारी का अपहरण करेगा, गरीबों को उजाड़ेगा और नौजवानों-गरीबों की योजनाओं पर डकैती डालेगा। वर्ष 2017 के पहले उप्र में यही होता था। जिसे प्रदेश की रखवाली की जिम्मेदारी सौंपी, वही प्रदेश को लूटते थे। गरीबों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलती थीं। आवास की सुविधा उन्हें ही मिलती थी, जो समाजवादी पार्टी के थे परंतु अब ‘सबका साथ-सबका विकास’ की भावना के साथ हर वर्ग को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 

 

सरकार को उपद्रव पसंद नहीं, माने तो ठीक वरना यमराज के घर का रास्ता खोल दिया जाएगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार तुष्टिकरण की नीति पर नहीं चलती। सरकार को उपद्रव, कर्फ्यू, गुंडागर्दी पसंद नहीं है। सरकार बेटी-व्यापारी की सुरक्षा पर सेंध लगाने वालों को चेतावनी देती है और न मानने वालों के लिए यमराज के घर जाने का रास्ता भी खोल देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार आने पर भी यहां कुछ प्रतिमाओं का अनावरण किया था। आज भी अवंती बाई लोधी की दिव्य-भव्य प्रतिमा का अनावरण किया है। 

 

वीरों-वीरांगनाओं को सम्मान देता है बांदा

मुख्यमंत्री ने बांदा की सड़कों व चौराहों में आए बदलाव का भी जिक्र किया। कहा कि शहर के लोग जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर व्यवस्थित सिटी का मॉडल बना सकते हैं। बांदा वीरों-वीरांगनाओं को सम्मान दे रहा है। यहां महापुरुषों के नाम पर पार्क बन रहे हैं। कालिंजर का अजेय दुर्ग विजय पथ पर बढ़ने की प्रेरणा देता है। वहां विराजमान नीलकंठ महादेव का आशीर्वाद हर किसी को मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार है तो भारत की विरासत को संरक्षित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आज सुबह चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम चित्रकूट व बुंदेलखंड की स्मृतियों में हैं। 

 

सपा व कांग्रेस ने डकैत दिए, हमने ब्रह्मोस दिया, जिसे देख बाप-बाप चिल्लाता है पाकिस्तान

मुख्यमंत्री योगी ने फिर तंज कसा कि सपा व कांग्रेस ने डकैत दिए, नौकरी की बजाय नौजवानों को तमंचे दिए, जबकि हमारी सरकार ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे दिया और डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग कॉरिडोर का हब बनाया। यूपी में बनी ब्रह्मोस मिसाइल को जब भारत दागता है तो पाकिस्तान भी बाप-बाप करते हुए चिल्लाता है। भारत के जवानों के इस शौर्य, पराक्रम का केंद्र बिंदु बुंदेलखंड बन रहा है। 

 

बांदा के विधायक विकास करते हैं, बबेरू के विधायक को रुचि कहीं और 

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि समर्पित और जनता-जनार्दन को योजनाओं से जोड़ने वाला होना चाहिए। बांदा के विधायक रुचि लेते हैं तो यहां विकास है, लेकिन बबेरू के सपा विधायक को विकास में रुचि नहीं है। उनके लिए विकास गरीबों की जमीन पर कब्जा, गरीबों को प्रताड़ित करना ही है। ऐसी उद्दंडता व गरीबों के हकों पर पड़ने वाली डकैती को रोकना पड़ेगा। कांग्रेस व सपा के समय में अवंती बाई लोधी, महाराणा प्रताप की मूर्ति, तीर्थों का पुनरुद्धार, मंदिरों का सुंदरीकरण, कनेक्टिविटी के बेहतरीन कार्य नहीं हो पाए, क्योंकि उनकी रुचि नहीं थी। 

 

सपा के माफियाओं से खाली कराई गई 64 हजार एकड़ भूमि 

उन्होंने कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने दो बातें कही थीं कि अवैध स्लाटर हाउस बंद होंगे और गरीबों-व्यापारियों की जमीन पर कब्जा करने वाले माफिया 24 घंटे में खाली कर दें, अन्यथा हमें खाली कराना आता है। सपा से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े माफियाओं से 64 हजार एकड़ लैंड जमीन खाली कराई गई जिसमें अब निवेश हो रहा है और इससे नौजवानों को नौकरी मिल रही है। बुंदेलखंड के नौजवान को अब घर में ही कार्य मिलता है। मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरी व रोजगार से जुड़े युवाओं की संख्या का भी जिक्र किया। 

 

कीमती पत्थरों में हो रही ‘शजर’ की गिनती 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जनपद के यूनिक प्रॉडक्ट को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने बांदा के शजर पत्थर के सजावट की भी तारीफ की, कहा कि यहां के ‘शजर’ की गिनती कीमती पत्थरों में हो रही है। अब बड़ी-बड़ी कंपनियां भी नग की जगह शजर पत्थर को मंगा रहीं हैं। यह पीएम मोदी के विजन-ओडीओपी के कारण हो पाया है। एमएसएमई को सम्मान, सुरक्षा का वातावरण बना तो प्रदेश में निवेश भी आया। 

 

अब देश-दुनिया के लोग नौकरी मांगने आएंगे बुंदेलखंड 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जनपद में एक्सप्रेसवे पर इंडस्ट्रियल कलस्टर के निर्माण को बढ़ा रहे हैं। बीडा के रूप में बुंदेलखंड को यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर देने जा रहे हैं। पहले शासकीय उपेक्षा के कारण बुंदेलखंड के लोग पलायन करते थे, लेकिन हमारा संकल्प है कि अब देश-दुनिया के नौजवान यहां नौकरी मांगने आएंगे। 

 

इस अवसर पर उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद,  लोकनिर्माण विभाग के राज्यमंत्री कुंवर ब्रजेश सिंह, विधायक प्रकाश द्विवेदी, ओममणि वर्मा, विधान परिषद सदस्य डॉ. बाबूलाल तिवारी, जितेंद्र सिंह सेंगर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मालती गुप्ता ‘बासू’, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू, जिलाध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत आदि मौजूद रहे।

बकरी कान हिलाए तो समझो बारिश आए! हमारे किसान इन 5 पशुओं, पक्षियों, कीटों को देख बता देते थे कब और कितनी होगी बरसात

सालों से, भारतीय किसानों ने आसमान को समझने के अपने तरीके विकसित किए थे। ये कोई बिखरी हुई लोक-मान्यताएं या अलग-थलग परंपराएं नहीं थीं। कई इलाकों में, समुदाय बहुत ध्यान से देखे-परखे गए तरीकों को अपनाते थे। ये तरीके पीढ़ियों तक बेहतर बनाए गए, ग्रंथों में दर्ज किए गए और बहुत ही एकरूपता के साथ आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाए गए।

खबरों के अनुसार, भारत में बारिश का अनुमान लगाने के कुछ सबसे पुराने तरीके खगोल विज्ञान से गहराई से जुड़े थे। खगोल विज्ञान और समय की गणना पर सबसे शुरुआती भारतीय ग्रंथों में से एक, ‘वेदांग ज्योतिष’ ने ‘पंचांग’ (हिंदू कैलेंडर) की नींव रखी, जिसका इस्तेमाल आज भी देश के कई हिस्सों में किया जाता है। सूरज, चांद और तारों की चाल पर नजर रखकर, इस तरीके से लोगों को मौसम में बदलाव और बारिश के पैटर्न का अंदाजा लगाने में मदद मिलती थी।

सदियों बाद, खगोलशास्त्री और विद्वान वराहमिहिर ने इन विचारों को और आगे बढ़ाया। छठी सदी ईस्वी में लिखी अपनी रचना ‘बृहत्संहिता’ में, उन्होंने बारिश, खगोलीय घटनाओं और वायुमंडलीय स्थितियों के बीच संबंधों का वर्णन किया। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, इन अवलोकनों के कुछ हिस्से आधुनिक मौसम विज्ञान की अवधारणाओं से मिलते-जुलते हैं।

कई गांवों में, हिंदू नव वर्ष के दौरान ‘ग्राम जोशी’ या गांव का ज्योतिषी सालाना बारिश और फसल के बारे में भविष्यवाणियां पढ़कर सुनाता था। पीढ़ियों से चली आ रही गणनाओं पर आधारित ये भविष्यवाणियां अक्सर किसानों को आने वाले खेती के मौसम की योजना बनाने में मदद करती थीं।

कई रिपोर्टों के अनुसार, समय के साथ किसानों ने खगोलीय परंपराओं के साथ-साथ मौसम का अनुमान लगाने के स्थानीय तरीके भी विकसित किए। आंध्र प्रदेश की ऐसी ही एक परंपरा थी ‘तट्टा संकेतम’; इसमें अनाज से भरी टोकरी के ऊपर एक गिलास रखा जाता था और एक बच्चा उसे सावधानी से संतुलित करता था। गिलास अंत में जिस दिशा में गिरता था, उसे ग्रहों की स्थिति के साथ जोड़कर देखा जाता था और माना जाता था कि इससे आने वाले मॉनसून के मिजाज का पता चलता है।

पीढ़ियों से, किसान अपने घरों और खेतों के आस-पास होने वाले बदलावों को समझना भी सीख गए थे। बकरियों का बार-बार कान फड़फड़ाना, रात भर उल्लुओं का लगातार बोलना और लाल बालों वाली इल्लियों का तेजी से सुरक्षित जगह की ओर बढ़ना – ये सभी इस बात के संकेत माने जाते थे कि बारिश होने वाली है। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि कई कीड़े इंसानों के महसूस करने से बहुत पहले ही अपने एंटीना से नमी में होने वाले बदलावों का पता लगा सकते हैं। शायद इसीलिए ऐसी बातें अक्सर सही साबित होती थीं।

मधुमक्खियों का जल्दी अपने छत्तों में लौटना और मकड़ियों का तेजी से अपने जाले ठीक करना बदलते मौसम की और चेतावनियां मानी जाती थीं। इसके अलावा, शाम के समय खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, जो ऊपर उठने के बजाय नीचे ही रहता था, उसे हवा में नमी बढ़ने का संकेत माना जाता था।

खबरों के मुताबिक, किसान शायद ही कभी सिर्फ एक संकेत पर निर्भर रहते थे। इसके बजाय, वे बुवाई का फैसला करने से पहले कई संकेतों की जांच-पड़ताल करते थे और खेती से जुड़े फैसलों में वैसी ही सावधानी और अनुशासन बरतते थे, जिसकी अनिश्चितता के कारण जरूरत होती थी।

₹65 की नौकरी से ₹20000 करोड़ की कंपनी तक, गणित में फेल स्टूडेंट ने ऐसे खड़ा किया आइसक्रीस साम्राज्य

RG Chandramogan Success Story: आरजी चंद्रमोगन के पास न तो कॉलेज की डिग्री थी और न ही कोई बड़ी विरासत। लेकिन उनके पास एक चीज थी, कुछ बड़ा करने का जज्बा। 65 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत करने वाले इस शख्स ने बाद में आइसक्रीम बेचनी शुरू की।

उसी कारोबार को आगे बढ़ाकर Hatsun Agro Products जैसी कंपनी खड़ी कर दी। आज यह भारत की सबसे बड़ी निजी डेयरी कंपनियों में शामिल है, जिसकी बाजार में वैल्यू करीब 20,000 करोड़ रुपये है।

एक असफल बिजनेस ने बदली सोच

चंद्रमोगन तमिलनाडु के साधारण परिवार में पैदा हुए। बचपन में देखा कि गांव का सबसे सम्मानित व्यक्ति एक कारोबारी था। तभी से उन्होंने भी बिजनेस करने का सपना देख लिया।

साल 1956 में उनके पिता चेन्नई आ गए और सेंट्रल स्टेशन के पास एक किराना दुकान खोली। लेकिन 1968 तक कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। परिवार को खाली हाथ गांव लौटना पड़ा। यहीं से चंद्रमोगन ने पहली बार समझा कि बिजनेस में सफलता जितनी बड़ी होती है, जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है।

गणित में फेल हुए, कॉलेज छोड़ना पड़ा

पढ़ाई भी उनके लिए आसान नहीं रही। उन्होंने पलायमकोट्टई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन गणित में फेल हो गए। इसके बाद पढ़ाई छूट गई।

बेटे के भविष्य की चिंता में उनके पिता ने विलुप्पुरम के एक लकड़ी गोदाम में उनकी नौकरी लगवा दी। वहां उन्हें सिर्फ 65 रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी। करीब एक साल तक उन्होंने वहां ऑर्डर संभाले, सामान उठाया और मेहनत की। लेकिन उन्हें एहसास हो गया कि पूरी जिंदगी 65 रुपये की नौकरी करके नहीं बिताई जा सकती।

पिता ने बेच दी पुश्तैनी जमीन

एक साल बाद चंद्रमोगन चेन्नई लौट आए। इस बार उन्होंने तय कर लिया था कि अब नौकरी नहीं, अपना कारोबार करेंगे।

उनके पिता ने भी बड़ा फैसला लिया। उन्होंने 13,000 रुपये जुटाने के लिए परिवार की पुश्तैनी जमीन बेच दी। यही रकम चंद्रमोगन के पहले बिजनेस की पूंजी बनी।

250 वर्गफुट से शुरू किया कारोबार

साल 1970 में उन्होंने चेन्नई के रायापुरम इलाके में 250 वर्गफुट की छोटी-सी जगह किराए पर ली। एक साधारण आइस बनाने वाली मशीन खरीदी और चार कर्मचारियों के साथ काम शुरू कर दिया। फैक्ट्री में रोज करीब 10,000 आइसक्रीम बन सकती थीं। उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘Arun’ रखा।

शुरुआत में मुनाफा बहुत कम था। कई बार चंद्रमोगन खुद ठेले पर आइसक्रीम बेचने निकल जाते थे। उस समय उनका मकसद सिर्फ कारोबार को जिंदा रखना था।

आइसक्रीम से डेयरी बिजनेस तक

करीब 10 साल तक उन्होंने सिर्फ आइसक्रीम का कारोबार किया। लेकिन इसी दौरान उन्हें एक बड़ी बात समझ आई। उन्होंने देखा कि आइसक्रीम का कारोबार मौसम पर निर्भर है, जबकि दूध हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है। उस समय भारत का डेयरी बाजार काफी बिखरा हुआ था। चंद्रमोगन को इसमें बड़ा मौका नजर आया।

1980 के दशक में उन्होंने दूध प्रोसेसिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे कंपनी ने दूध, दही, घी और मक्खन जैसे उत्पाद भी बेचने शुरू कर दिए। अब Arun सिर्फ आइसक्रीम का नहीं, बल्कि डेयरी उत्पादों का बड़ा ब्रांड बन चुका था।

उन्होंने जल्दबाजी में विस्तार नहीं किया। पहले किसानों का मजबूत नेटवर्क बनाया, सप्लाई चेन तैयार की और रिटेल नेटवर्क खड़ा किया। यही रणनीति आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

आज 20,000 करोड़ की कंपनी

आज Hatsun Agro Products शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। जुलाई 2026 तक इसका मार्केट कैप 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। Forbes के मुताबिक, आरजी चंद्रमोगन की नेटवर्थ करीब 1.6 अरब डॉलर है। उन्हें 2018 में भारतीय डेयरी उद्योग में योगदान के लिए Indian Dairy Association का प्रतिष्ठित Patronage Award भी दिया गया।

चंद्रमोगन की कहानी सिर्फ एक सफल कारोबारी बनने की नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जो गणित में फेल हुआ लेकिन कारोबार के इम्तिहान में अव्वल नंबरों से पास होकर दिखा दिया।

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PRAGATI Scheme: 8 राज्यों के 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी एग्री-बिजनेस की मुफ्त ट्रेनिंग, जानिए क्या है ये प्रगति स्कीम

ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और किसानों को आधुनिक खेती से अवगत कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। सरकार ने प्रगति योजना (PRAGATI Scheme) को लॉन्च किया है। इस स्कीम में देश के आठ राज्यों के करीब 20000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव के स्तर पर ही प्रशिक्षित पेशेवरों का एक नेटवर्क तैयार करना है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को तकनीकी सहायता दी जा सके, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच में सुधार लाया जा सके और किसानों और बाजारों के बीच के संबंध को मजबूत किया जा सके। इस पहल से कृषि क्षेत्र को ज्यादा फायदेमंद और टेक्नोलॉडी ड्रिवेन बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है प्रगति (PRAGATI) स्कीम?

प्रगति योजना को कृषि क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं के बीच स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। इस योजना के तहत युवाओं को काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। प्रशिक्षित प्रतिभागी अपने ही गांवों में कृषि-उद्यमी के रूप में काम करेंगे। ये युवा किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, वित्तीय सहायता और विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे। यह कार्यक्रम किसानों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बीच की दूरी को पाटने के साथ-साथ टिकाऊ और कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।

पहले चरण में 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

प्रगति योजना के पहले चरण में देश के आठ राज्यों के गांवों से करीब 20000 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन आठ राज्यों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। सरकार की योजना आने वाले चरणों में इस कार्यक्रम का विस्तार अन्य राज्यों में भी करने की है। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये कृषि-उद्यमी किसानों के साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देंगे और आवश्यक कृषि संसाधनों तक उनकी पहुंच को आसान बनाएंगे।

गांवों में क्या भूमिका निभाएंगे ये कृषि-उद्यमी?

ट्रेनिंग प्राप्त युवा गांवों में रहकर किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं और सहायता प्रदान करेंगे-

  • मृदा परीक्षण: मिट्टी की जांच करने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायता करना।
  • आधुनिक तकनीक: आधुनिक खेती के तरीकों और तकनीकों के बारे में जानकारी देना।
  • कृषि उपकरण: किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी और उपकरण प्राप्त करने में मदद करना।
  • वित्तीय सहायता: किसानों को बैंकों, क्रेडिट सुविधाओं और वित्तीय सहायता से जोड़ना।
  • बाजार तक पहुंच: कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच का समर्थन करना ताकि फसलों की सही कीमत मिल सके।
  • योजनाओं के प्रति जागरूकता: सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना।

इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को इन सभी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े बल्कि ये सारी सुविधाएं उन्हें उनके अपने गांव के भीतर ही मिल जाएं।

इस स्कीम से किसानों को कैसे होगा फायदा?

सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से जमीनी स्तर पर कृषि सहायता सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी। किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण में सहायता और आधुनिक खेती के तरीकों की सटीक जानकारी मिलेगी। मशीनरी, वित्तीय सहायता और बाजारों तक बेहतर पहुंच होने से खेती की उत्पादन लागत में कमी आएगी। बेहतर तौर-तरीकों से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर दाम सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण भारत में रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

खेती के तरीकों में सुधार करने के साथ-साथ प्रगति योजना को विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। युवाओं को कृषि सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रशिक्षित करके यह कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यह पहल पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय कृषि को अधिक इनोवेटिव, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख बनाने के हिसाब से डिजाइन है।

सरकार का विजन: केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक प्रगति योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने इसे कृषि का कायाकल्प करने के एक बड़े मिशन के रूप में बताया है। कृषि मंत्री के मुताबिक यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेवाओं और मजबूत बाजार संपर्कों का लाभ उठाने में मदद करेगी। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो यह योजना ग्रामीण भारत के हजारों युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर कृषि सहायता प्रणालियों को बेहद मजबूत कर सकती है।

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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ब्रह्मोस डील, सबांग पोर्ट और IIM कैंपस… PM Modi की इंडोनेशिया यात्रा की 20 बड़ी उपलब्धियां ये रहीं

PM Modi Indonesia visit 20 outcomes list: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक साबित हुई है। जकार्ता में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी द्विपक्षीय सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, दवाएं और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

वार्ता के बाद पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि साल 2018 में हमने जो व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनाई थी वह आज एक नई उड़ान भर रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक स्वर्ण अध्याय शुरू हो रहा है।

रक्षा, डिजिटल पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े मील के पत्थर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण और पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस यात्रा के दौरान कई बड़े और रणनीतिक ऐलान किए गए हैं।

सबांग पोर्ट का संयुक्त विकास: दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबांग पोर्ट का संयुक्त रूप से विकास करने पर सहमत हुए हैं। ये स्ट्रेट ऑफ मक्का के ठीक सामने स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से महज 100 मील की दूरी पर है।

UPI और डिजिटल पेमेंट इंटीग्रेशन: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI अब इंडोनेशिया के भुगतान सिस्टम के साथ इंटिग्रेट होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा दोनों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

ब्लू इकोनॉमी और समुद्री व्यापार: दोनों पक्षों ने ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।

वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की, जहां पीएम मोदी ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए टू-स्टेट सॉल्यूशन और दीर्घकालिक शांति का समर्थन किया।

पीएम मोदी की यात्रा के 20 टॉप आउटकम

यहां दोनों देशों के बीच हुए उन 20 महत्वपूर्ण समझौतों और निर्णयों की पूरी सूची दी गई है, जो इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियां बनकर सामने आई हैं:

1- स्टील सप्लाई चेन और मिनरल्स सहयोग

समझौता: स्टील सप्लाई चेन के मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है।

मायने: यह खनिज और खनन क्षेत्र में आपसी निवेश को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग तकनीकों तक पहुंच में सुधार होगा, संयुक्त अध्ययनों व परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन मजबूत होगी।

2- समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार

समझौता: मैरीटाइम सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर MoU और इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट का विस्तार किया गया है।

मायने: इससे दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, सर्च एंड रेस्क्यू और क्षमता निर्माण में तालमेल बढ़ेगा जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलेगा।

3- रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

समझौता: भारत के NFTDC, मिडवेस्ट लिमिटेड और इंडोनेशिया के PT PERMINAS के बीच रेयर अर्थ मैग्नेट्स के विकास को लेकर MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।

मायने: यह कदम रेयर अर्थ्स (दुर्लभ तत्वों) और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाएगा। इससे इस क्षेत्र की वैश्विक सप्लाय चेन में विविधता आएगी और अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी।

4- ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग

समझौता: इंडोनेशियाई सेना को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और इस पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच आधिकारिक सहमति बनी है।

मायने: यह रक्षा समझौता भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

5- एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग

समझौता: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत इंडोनेशिया भारत की अस्त्र मिसाइलों का आयात करेगा।

मायने: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस भारतीय मिसाइल की अचूक सफलता को देखते हुए इंडोनेशियाई सेना ने इसे खरीदने का फैसला लिया है। यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात और मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के संकल्प को गति देगा, जिससे भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

6- स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण के लिए संयुक्त उद्यम

समझौता: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और इंडोनेशिया की पीटी क्रकाटाऊ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक संयुक्त उद्यम का गठन किया गया है।

मायने: यह साझा उत्पादन और आधुनिक तकनीक तक पहुंच को आगे बढ़ाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह ‘विकसित भारत’ के औद्योगिक लक्ष्यों में योगदान देगा।

7- अंतरिक्ष सहयोग समझौते का विस्तार

समझौता: शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष के अन्वेषण और उपयोग में सहयोग पर चल रहे फ्रेमवर्क समझौते का विस्तार किया गया है।

मायने: यह कदम दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझाकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे भारत और इंडोनेशिया की तीन दशक पुरानी अंतरिक्ष साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।

8- प्रंबानन मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार

समझौता: ऐतिहासिक प्रंबानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भारत की तरफ से सहायता प्रदान की जाएगी।

मायने: विकास भी, विरासत भी के दृष्टिकोण के तहत, यह दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को आगे बढ़ाता है और हेरिटेज कंजर्वेशन में भारत की वैश्विक विशेषज्ञता को प्रदर्शित करता है।

9- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग

समझौता: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह टिकाऊ कृषि, फसलों और कृषि मशीनरी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाएगा, जिससे किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने वाले संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

10- चिकित्सा उत्पाद विनियमन में सहयोग

समझौता: भारत के CDSCO और इंडोनेशिया के BPOM के बीच चिकित्सा उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU हुआ है।

मायने: यह वैश्विक नियामक मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा, जिससे भारतीय चिकित्सा उत्पादों पर भरोसा बढ़ेगा और इंडोनेशियाई बाजार में भारतीय दवाओं व उत्पादों की पहुंच आसान होगी।

11- आपदा प्रबंधन में आपसी सहयोग

समझौता: भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और इंडोनेशिया की नेशनल एजेंसी फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के बीच MoU हुआ है।

मायने: इससे रक्षा एक्सचेंजों, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग में आपसी समन्वय बेहतर होगा। यह समझौता आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, शुरुआती चेतावनी और जोखिम मूल्यांकन के लिए तकनीक-आधारित ऐप्लिकेशंस के उपयोग को बढ़ावा देगा।

12- दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं में साझेदारी

समझौता: दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन हुआ है।

मायने: यह कदम वायरलेस और क्वांटम सिस्टम सहित उन्नत टेलीकॉम तकनीकों तक पहुंच में सुधार करेगा और दोनों देशों के बीच संयुक्त नवाचार और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को भी मजबूती प्रदान करेगा।

13- अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग

समझौता: रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कोऑपरेशन पर दोनों देशों के बीच MoU हुआ है।

मायने: यह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को सक्षम बनाकर भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करेगा, जिससे ‘स्टार्टअप इंडिया मिशन’ सहित दोनों देशों के स्टार्टअप और नवाचार इकोसिस्टम को गति मिलेगी।

14- स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग

समझौता: हेल्थ कार्यबल सहयोग पर कार्यान्वयन व्यवस्था लागू की गई है।

मायने: यह स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए फेलोशिप कार्यक्रमों की सुविधा देगा और योग्य भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों को इंडोनेशिया में काम करने के अवसर व विशिष्ट चिकित्सा क्षेत्रों में व्यावहारिक नैदानिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

15- समुद्री सुरक्षा के लिए इन्फोसेंटर में तैनाती

समझौता: भारत के IFC-IOR में एक इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की तैनाती की जाएगी।

मायने: यह रणनीतिक कदम वास्तविक समय में समुद्री सूचनाओं के साझाकरण को बढ़ाएगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी।

16- इंडोनेशिया को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीजों की आपूर्ति

समझौता: भारत द्वारा इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले ‘DWR 162’ गेहूं के बीजों की आपूर्ति की जाएगी।

मायने: यह कदम इंडोनेशिया और पूरे ग्लोबल साउथ की खाद्य सुरक्षा का मजबूती से समर्थन करता है और कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के व्यापक जुड़ाव को दर्शाता है।

17- टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष

समझौता: ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।

मायने: यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के की हजार देवान्तारा के साझा शैक्षिक दृष्टिकोण का उत्सव मनाता है। रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 की इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले संयुक्त सांस्कृतिक, शैक्षिक और जन-दर-जन संपर्क कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी।

18- इंडोनेशिया में IIM बैंगलोर का नया कैंपस

समझौता: इंडोनेशिया के सिंघासारी SEZ में भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर के एक ब्रांच कैंपस की स्थापना की जाएगी।

मायने: यह वैश्विक स्तर पर भारत की शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है और दुनिया भर में एक ‘नॉलेज हब’ के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।

19- डिजिटल कॉमर्स और पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

समझौता: भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) के बीच सहयोग पर सहमति बनी है।

मायने: यह डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे भारत के ONDC आर्किटेक्चर पर आधारित यह मॉडल आम लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ, कुशल और समावेशी बनाएगा।

20- निर्वाचन आयोगों के बीच ऐतिहासिक समझौता

समझौता: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के सामान्य चुनाव आयोग (KPU) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के चुनाव निकायों के बीच ज्ञान, अनुभवों और सर्वोत्तम चुनावी प्रथाओं को साझा करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे मानव संसाधन विकास और कुशल प्रशासनिक प्रथाओं के लिए तकनीक के उपयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।

इंडोनेशिया में रक्षा, शिक्षा और आर्थिक सहयोग के इन तमाम ऐतिहासिक मील के पत्थरों को स्थापित करने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापार और सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए अपने तीन देशों के इस दौरे के अगले चरणों के तहत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।

शेर के कब्जे में 30 मिनट रहने के बाद भी कैसे जिंदा बच गया, शख्स ने खुद बताया; VIDEO

गुजरात के भावनगर में एक किसान शेर के चंगुल में फंस गया था। शेर ने उसका हाथ अपने जबड़े में दबाए रखा। 30 मिनट तक शेर के चंगुल में फंसे होने के बावजूद वह कैसे जिंदा बच पाया।