Assam Budget Polygamy Proposals: असम में बहुविवाह करने वालों पर हिमंत सरकार का नया कठोर एक्शन प्लान हुआ रिवील

Assam Budget Polygamy Proposals: असम सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में बड़ा प्रस्ताव रखा। इसके तहत, जो पुरुष एक से ज्यादा शादी (बहुविवाह) करेंगे, उन्हें राज्य सरकार की किसी भी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, अगर कोई सरकारी कर्मचारी बहुविवाह का दोषी पाया जाता है, तो उसे नौकरी से भी निकाला जा सकता है।

बता दें कि अपना पहला बजट पेश करते हुए, राज्य के वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का फायदा सिर्फ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचना चाहिए, बल्कि इनसे समाज में “समावेशिता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों” को भी बढ़ावा मिलना चाहिए।

बरुआ ने कहा, “महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए, एक से ज्यादा शादियां करने वाला कोई भी पुरुष सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना का फायदा उठाने के योग्य नहीं होगा।”

बजट में ‘असम सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1964’ में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके तहत, अगर कोई सरकारी कर्मचारी एक से ज्यादा शादियां (बहुविवाह) करते हुए पाया जाता है, तो उसे कानून के अनुसार नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है।

बरुआ ने कहा, “ईमानदारी और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने के लिए, मेरा प्रस्ताव है कि किसी भी आपराधिक कानून के तहत दोषी ठहराया गया व्यक्ति सरकार की अधिसूचित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के योग्य नहीं होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमित बजट उपलब्ध नहीं था, इसलिए सरकार अगस्त से कल्याणकारी योजनाओं को फिर से शुरू करेगी।

अलग-अलग वर्गों के लिए शुरू की गई नई कल्याणकारी योजनाएं

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अलग-अलग वर्गों के लोगों के लिए कई नई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लिए सरकार 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट अलग-अलग मदों में आवंटित करने का प्रस्ताव रखती है।

उन्होंने बताया कि सभी लाभार्थी आधारित योजनाओं को डिजिटल सिस्टम के जरिए लागू किया जाएगा। इसके लिए DIDS (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर DBT स्कीम्स) का इस्तेमाल होगा, जिसमें आधार आधारित पहचान (Aadhaar Authentication) भी शामिल होगी।

वित्त मंत्री ने 2,85,084 करोड़ रुपये का बजट पेश किया

बरुआ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2,85,084 करोड़ रुपये का बजट पेश किया और छोटे चाय उत्पादकों के लिए टैक्स छूट की सीमा को चार गुना बढ़ाने और पाइप्ड नेचुरल गैस पर VAT को लगभग 10% कम करने का प्रस्ताव रखा।

इसके अलावा, उन्होंने पिछले पांच वर्षों में शुरू की गई सभी प्रमुख योजनाओं को जारी रखने की भी घोषणा की, साथ ही बजट घाटे को घटाकर 419 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा।

राज्य का बजट पेश करने के बाद, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए, बहुविवाह करने वाला कोई भी पुरुष किसी भी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने का पात्र नहीं होगा। किसी भी आपराधिक कानून के तहत अपराध का दोषी ठहराया गया कोई भी व्यक्ति अधिसूचित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने का पात्र नहीं होगा।”

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15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने वाली सहारनपुर की हर्षिता ने बना दी 7000 करोड़ रुपये की कंपनी

यूपी के सहारनपुर जैसे शहरों में आम तौर पर परिवार अपने बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। इसके लिए पूरे परिवार का फोकस बच्चे की पढ़ाई पर होता है। ऐसे में अगर कोई 15 साल की लड़की स्कूल छोड़ने का प्लान बना ले तो परिवार पर क्या बीतेगी? हम बात कर रहे हैं हर्षिता अरोड़ा की। स्कूल छोड़ने के उसके फैसले ने न सिर्फ परिवार बल्कि टीचर्स को भी हैरान कर दिया था।

16 साल की उम्र में क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकिंग ऐप बनाया

हर्षिता की दिलचस्पी कोडिंग में इस कदर बढ़ गई थी कि वह इसके सिवाय दूसरा कुछ करने के बारे में सोच ही नहीं सकती थी। 16 साल की उम्र में उसने क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकिंग ऐप बनाया। एपल जैसी कंपनी को यह ऐप बहुत पसंद आया। जल्द एक कंपनी ने इसे खरीद लिया। फिर यह अमेरिका और कनाडा में यह दूसरा सबसे लोकप्रिय फाइनेंस ऐप बन गया।

पीएम मोदी से 2020 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला

सरकार ने 2020 में हर्षिता की उपलब्धियों का सम्मान किया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया। उसी साल उसने अमेरिका जाने के लिए O-1 वीजा के लिए अप्लाई किया। यह वीजा उन लोगों को इश्यू होता है, जिन्होंने अपने फील्ड में असाधारण टैलेंट का प्रदर्शन किया होता है। एक साल पहले हर्षिता ने विगनान वेलिवेला और तुषार मिश्रा के साथ मिलकर AtoB नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर उनके स्टार्टअप को पहचान मिली।

कोविड ने पूरे प्लान पर फेर दिया था पानी

इस स्टार्टअप को Y Combinator के समर 2020 बैच में जगह मिल गई थी। लेकिन, कोविड की महामारी आने के बाद पूरे प्लान पर पानी फिर गया। लेकिन, हर्षिता और उसकी टीम के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने ट्रक ड्राइवर्स से उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत शुरू की। उनके पेमेंट्स के बारे में पूछा। फिर अमेरिकी ट्रक इंडस्ट्री के लिए फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर फोकस किया।

कंपनी की वैल्यू करीब 7600 करोड़ रुपये पहुंची

उन्होंने नए सिरे से AtoB को बनाया। फिर ट्रक इंडस्ट्री के लिए एक मॉडर्न टूल पेश किया। आज अमेरिका में 30,000 से ज्यादा ट्रक एटूबी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी की वैल्यू करीब 80 करोड़ डॉलर पहुंच गई है। यह 7,600 करोड़ रुपये के बराबर है। हर्षिता के टैलेंट को देख 2026 में Y Combinator ने उन्हें प्रमोट कर जनरल पार्टनर बना दिया। आज वह दुनिया के कुछ सबसे टैलेंटेड लोगों के साथ काम कर रही हैं।

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आज दूसरे स्टार्टअप की मदद कर रहीं हर्षिता

हर्षिता ने यह साबित किया है कि टैलेंट के बल पर कोई व्यक्ति छोटे शहर में होने के बावजूद अपने सपने को पंख दे सकता है। आज वह वाय कंबिनेटर ने यह तय करती हैं कि किस स्टार्टअप को कितनी वित्तीय मदद दी जा सकती है। आज वह सफलता के बड़े मुकाम पर हैं, जबकि उनकी उम्र के लोग अपना करियर शुरू करने की कोशिशों में लगे हैं।

DDA Dwarka Commercial Hub Plan: दिल्ली का अगला ‘गुड़गांव’ बनेगा द्वारका! डीडीए बनाएगा मेगा इकोनॉमिक हब, जानिए क्या है पूरा प्लान

DDA Dwarka Plan: दिल्ली का द्वारका उप-शहर आने वाले समय में राजधानी का सबसे बड़ा बिजनेस और कमर्शियल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका को एक प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए उद्योग जगत के टॉप रिप्रेजेंटेटिव के साथ एक इंटरैक्टिव बैठक की अध्यक्षता की है। इस बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ किया कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए शहरी पुनर्विकास, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और योजना सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने द्वारका में एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और लेबर सेंट्रिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की वकालत की है। ऐसा सिस्टम जो लोकल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके।

एयरपोर्ट से नजदीकी और बेहतरीन कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

एलजी ने कहा रि एशिया की सबसे बड़ी प्लांड सब सिटी में से एक होने की वजह से द्वारका इन्वेस्टमेंट के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के लिए सही स्थिति में है। इसकी कनेक्टिविटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से काफी आसान है। यहां मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। एलजी ने स्पष्ट किया कि द्वारका पूरी तरह विकसित हो चुकी है। इस लिहाज से ये कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी जैसे अलग अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रदूषण मुक्त उद्योगों और रोजगार पर रहेगा मुख्य फोकस

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेष रूप से जोर दिया कि द्वारका का औद्योगिक विकास पूरी तरह से स्वच्छ, टिकाऊ और गैर-प्रदूषणकारी होना चाहिए। यहां ऐसे उद्योगों से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी जो उप-शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता करते हों।

एफएआर (FAR) मानदंडों की होगी समीक्षा, सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक में रीयल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ-साथ डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने हिस्सा लिया। उपराज्यपाल ने उद्योग जगत के रचनात्मक सुझावों की सराहना की और कहा कि उभरती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सहित योजना और विकास मानदंडों की समीक्षा और उन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने द्वारका और दिल्ली में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाएं, एक सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म और सिंप्लिफाई अप्रूवल्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज, आईटी, आईटीईएस और जीसीसी को प्रोत्साहित करने के साथ यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे प्रमुख कन्वेंशन और एग्जीबिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

TOD पॉलिसी और 5-स्टार होटल

निवेश और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य के निवेश के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। हाल ही में उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तह टीओडी समिति पात्र परियोजनाओं के लिए सिंगल-पॉइंट और समयबद्ध मंजूरी की सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने आश्वासन दिया कि द्वारका और दिल्ली में निवेश के लिए बड़ा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार चल रहा है।

इसके तहत एक नई औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है और विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रियाओं को इंटिग्रेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन सचिव ने बताया कि दिल्ली की इवनिंग इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यटन को आकर्षित करने के लिए अर्बन डेस्टिनेशन डेवलप किए जा रहे हैं। आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने कहा कि दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइव-स्टार होटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विचार किया जा रहा है।

विकसित दिल्ली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उपराज्यपाल ने अंत में दोहराया कि प्रशासन एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह केंद्रित है। यह पहल सतत विकास को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी और दिल्ली के विकसित दिल्ली बनने के सफर को और मजबूत करेगी।

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Delhi Power Cut 11 July: शनिवार को दिल्ली के इन इलाकों में रहेगा पावर कट, जानें समय और प्रभावित इलाके

Delhi Power Cut: शनिवार, 11 जुलाई को देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी। यह कटौती किसी खराबी के वजह से नहीं, बल्कि जरूरी मेंटेनेंस और सिस्टम अपग्रेड के काम के कारण की जा रही है। दरअसल, BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और रखरखाव से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं, जिसके चलते अलग-अलग इलाकों में पावर कट की समस्या रहेगी। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे उसी हिसाब से अपने दिन की योजना बनाएं और बिजली कटौती से पहले जरूरी इंतजाम कर लें।

निर्धारित बिजली कटौती इस प्रकार है:

पालम डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12: 30 बजे तक ब्लॉक-P राज नगर एक्सटेंशन और सेक्टर-8, द्वारका में बिजली आपूर्ति प्रभावित रह सकती है।

नजफगढ़ डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 13: 00 बजे तक कंगनहेड़ी गांव में बिजली कटौती रहेगी।

छतरपुर डिवीजन:  सुबह 11:00 बजे से दोपहर 13: 00 बजे तक राजपुर खुर्द एक्सटेंशन छतरपुर में पावर कट की समस्या रह सकती है।

टैगोर गार्डन: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 14:07 बजे तक ब्लॉक S, ख्याला विष्णु गार्डन में बिजली सप्लाई बंद रहे सकती है।

खानपुर डिवीजन: दोपहर 14:00 बजे से 15:30 बजे तक पॉकेट C, दुग्गल कॉलोनी, खानपुर और जे जे कॉलोनी दुग्गल कॉलोनी, खानपुर में बिजली बाधित रहेगी।

खानपुर डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 तक ब्लॉक C, विश्वकर्मा कॉलोनी, पुलपेह्लादपुर और खानपुर गांव में बिजली कटौरी रह सकती है।

मोहन गार्डन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 13:00 बजे तक ब्लॉक C, सेवक पार्क, द्वारका में पावर कट रह सकता है।

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Market Outlook : बाजार में लगातार दूसरे दिन दिखी तेजी, जानिए 13 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 10 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त दिखाने वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल,HDFC लाइफ,अदाणी एंटरप्राइजेज,SBI लाइफ इंश्योरेंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरने वाले शेयरों में डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,एटरनल,भारती एयरटेल,नेस्ले और सिप्ला शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस काफी हद तक पॉजिटिव रहा और सभी बड़े इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। रियल्टी शेयरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 3.5 प्रतिशत की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 3 प्रतिशत की तेजी आई। जून तिमाही के नतीजों के बाद TCS में बढ़त की वजह से निफ्टी IT इंडेक्स में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

अन्य सेक्टरों में,निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.5 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 1.4 प्रतिशत ऊपर चढ़े। जबकि ऑयल एंड गैस,प्राइवेट बैंक,एनर्जी,इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत के बीच बढ़त हुई। ऑटो इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.59 प्रतिशत और 1.41 प्रतिशत की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि थोड़े समय के करेक्शन के बाद,मार्केट में जबरदस्त रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। बैंकों के पॉजिटिव बिजनेस अपडेट,IT सेक्टर के उम्मीद के मुताबिक गाइडेंस और AI से जुड़े मौकों के साथ-साथ ग्लोबल खर्च में बढ़त की उम्मीद ने पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन की अच्छी शुरुआत के लिए माहौल तैयार कर रहे है। उम्मीद से बेहतर Q1 नतीजों का सिलसिला अर्निंग में बढ़ोतरी को लेकर बनी चिंताओं को कम करने में मदद करेगा। इससे मौजूदा तेजी को और सपोर्ट मिल सकता है।

ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में नरमी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में रिकवरी ने भारत के प्रति सेंटीमेंट को और बेहतर बनाया है,जिससे FII निवेश में रिकवरी को सपोर्ट मिला है। अहम बात यह है कि FOMC मीटिंग के सख़्त रुख का ग्लोबल मार्केट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है,क्योंकि हालिया डेटा से पता चलता है कि महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है। साथ ही,US, EU और चीन से आ रहे सुस्त आर्थिक आंकड़ो से संकेत मिल रहा है कि सेंट्रल बैंक आगे चलकर कम सख्त रुख अपना सकते हैं।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिख। कारोबार के अंत में यह 1.02% की बढ़त के साथ 24,207 पर बंद हुआ। इंडेक्स ने स्मॉल अपर विक (wick) वाली एक स्मॉल बॉडी बुलिश कैंडल बनाई,जो इंट्राडे में अनिश्चितता को दिखाती है। इसने सफलतापूर्वक अपना 100-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है और बुधवार को आई 516 अंको की भारी गिरावट का एक बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया है। RSI थोड़ा ऊपर गया है,जो धीरे-धीरे बुलिश मोमेंटम के बढ़ने का संकेत है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24400 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह शॉर्ट टर्म में 24550 और उसके बाद 24700 तक बढ़ सकता है। दूसरी ओर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24050-24000 के जोन में है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में पहली तिमाही के नतीजों की अहम भूमिका होगी। अच्छी अर्निंग, घरेलू निवेशकों की तरफ से हो रहा मजबूत निवेश और अच्छे मॉनसून से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि,मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ी बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला और पहले हाफ में एक रेंज में ट्रेड किया। फिर दूसरे हाफ की शुरुआत में ब्रेकआउट दिया और ऊपर बंद हुआ। आखिर में इंडेक्स 1.39% की बढ़त के साथ 58,046 पर बंद हुआ।

बैंक निफ्टी ने सफलतापूर्वक अपना 20-दिन का EMA वापस हासिल कर लिया है,जबकि RSI 60 के लेवल के करीब पहुंच रहा है। इससे पता चलता है कि इस हफ्ते की शुरुआत में दिखे सेलिंग प्रेशर को झेलने के बाद बुल्स ने फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है। इसके अलावा,ADX इंडिकेटर पर DI+ ने DI− को पार कर लिया है,जो बुलिश ट्रेंड को और मजबूत करता है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 58500-58600 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी का पुलबैक 59000 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 59500 तक जा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57600-57500 के जोन में है।

 

 

Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

 

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Navi Mumbai रियल एस्टेट हॉटस्पॉट 2026: क्यों मुंबई को छोड़ नवी मुंबई में घर खरीद रहे हैं लोग? जानिए बड़े कारण

Navi Mumbai Real Estate Hotspot: मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी मुंबई के एक सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में प्लान की गई नवी मुंबई अब इससे कहीं आगे निकल चुकी है। नाइट फ्रैंक इंडिया की गुरुवार को जारी छमाही रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक नवी मुंबई अब तेजी से मुंबई के तीसरे सबसे बड़े ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में बदल रही है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी नाइट फ्रैंक इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, नवी मुंबई में घरों की बढ़ती कीमतों और मांग ने ग्रेटर मुंबई को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। सबसे खास बात यह है कि अब नवी मुंबई में यह बूम सिर्फ कम कीमतों की वजह से नहीं है। बल्कि इसके पीछे कई दूसरी बड़ी वजहें भी हैं। आइए जानते हैं कि क्यों घर खरीदार मुंबई को छोड़ नवी मुंबई का रुख कर रहे हैं। वहां के रियल एस्टेट मार्केट के लेटेस्ट आंकड़े क्या कहते हैं।

पनवेल और खारघर में सबसे तेज उछाल: क्या हैं प्रॉपर्टी रेट्स?

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में नवी मुंबई के पनवेल इलाके में घरों की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक साल के दौरान नवी मुंबई में प्रॉपर्टी की औसत दरों में 9 प्रतिशत का उछाल आया है। पनवेल के साथ ही पड़ोसी इलाके खारघर में भी इसी टाइम पीरियड के दौरान कीमतें 6 फीसदी बढ़ी हैं।

क्यों बढ़ रहा है क्रेज? कनेक्टिविटी ने बदला गेम

नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि नवी मुंबई का विकास अब सिर्फ सस्ते घरों की वजह से नहीं हो रहा बल्कि बेहतर होती कनेक्टिविटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसकी मुख्य वजहें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जो इस इलाके कीकनेक्टिविटी की तस्वीर बदल रहे हैं। इन्हें यहां नीचे देखा जा सकता है:-

मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL/अटल सेतु): इस लिंक ने दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई की दूरी को काफी कम कर दिया है। इससे अब यहां की ड्राइव महज 30 मिनट की रह गई है।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट: आने वाला इस नए एयरपोर्ट के चलते इस पूरे क्षेत्र की वैल्यू बढ़ गई है।

अपकमिंग मेट्रो कॉरिडोर: आगामी मेट्रो लाइन्स से इंटरनल और एक्सटर्नल कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो रही है।

विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर और पनवेल-कर्जत रेलवे दोहरीकरण परियोजना ने भी इस पूरे क्षेत्र के प्रति घर खरीदारों और निवेशकों के आकर्षण को काफी बढ़ा दिया है।

नए लॉन्चेस में नंबर-1 बना नवी मुंबई, ग्रेटर मुंबई पिछड़ा

साल 2026 के पहले छह महीनों के आंकड़ों को देखें तो रियल एस्टेट मार्केट का केंद्र अब बदल चुका है। नए घरों को लॉन्च करने के मामले में नवी मुंबई सबसे आगे निकल गया है। नए लॉन्चेस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत के साथ नवी मुंबई की रही। वसई और विरार जैसे बाहरी पश्चिमी उपनगर 19 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रहे। कल्याण, डोंबिवली, भिवंडी और कर्जत जैसे बाहरी मध्य उपनगरों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत रही। ग्रेटर मुंबई के पश्चिमी उपनगर नए लॉन्चेस के मामले में पिछड़ गए और इनकी हिस्सेदारी सिर्फ 17 प्रतिशत रही।

मार्केट में बिक्री का पैटर्न भी इसी तरह का रहा। इसमें बाहरी मध्य उपनगरों ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की। यह दर्शाता है कि उन बाजारों में मांग लगातार बनी हुई है जहां आवास तुलनात्मक रूप से किफायती हैं।

पिछले 10 सालों में ऐसे बदला नवी मुंबई का दबदबा

पिछले एक दशक (2014 से 2026) के दौरान एमएमआर क्षेत्र के भीतर नवी मुंबई का महत्व लगातार बढ़ा है। साल 2014 में कुल आवासीय लॉन्चेस में नवी मुंबई की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी। ये 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई है। इसी पीरियड में नवी मुंबई की सेल्स हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

रिपोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि हाल के वर्षों में नवी मुंबई में आवासीय बिक्री की रफ्तार नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च होने की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। यह संकेत देता है कि बाजार में नई सप्लाई आने की तुलना में यहां घरों की मांग बहुत तेजी से मजबूत हो रही है।

ऑफिस लीजिंग में 33% का उछाल

आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद 2026 की पहली छमाही में रियल एस्टेट मार्केट स्थिर और मजबूत बना रहा है। डेवलपर्स ने साल के पहले छह महीनों में 49161 घर लॉन्च किए। ये पिछले साल की समान अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में बिक्री मामूली रूप से 1 प्रतिशत बढ़कर 47355 यूनिट रही। मार्केट में अनसोल्ड इन्वेंट्री में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है और अब यह घटकर 1.57 लाख घरों पर आ गई है।

कमर्शियल प्रॉपर्टी सेगमेंट के लिए भी साल की शुरुआत बेहद शानदार रही है। 2026 की पहली छमाही में ऑफिस लीजिंग सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 7.3 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान जेपी मॉर्गन का रहा। इसने पवई में 2.2 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है।

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नाइट फ्रैंक इंडिया को उम्मीद है कि एंड-यूजर डिमांड, यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नई सप्लाई की स्थिर पाइपलाइन के दम पर रेजिडेंशियल मार्केट आगे भी मजबूत बना रहेगा। आने वाले समय में पुराने और जर्जर घरों को रिन्यू करने और बाजार में फ्रेश इन्वेंट्री जोड़ने के लिए रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में बड़े डेवलपर्स की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।

एक ही 40°C, फिर भी अलग एहसास! जानिए भारत, दुबई और फ्रांस में गर्मी का फर्क

भारत, दुबई और फ्रांस में अगर टेम्परेचर 40 डिग्री सेल्सियस हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि तीनों जगह गर्मी एक जैसी महसूस होगी। मौसम, नमी, हवा की रफ्तार, धूप की तीव्रता और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से गर्मी का अहसास बदल जाता है। यही कारण है कि एक ही टेम्परेचर अलग-अलग देशों में अलग एक्सपीरियंस देता है। आइए जानते हैं कि 40°C पर कहां कितनी तपिश महसूस होती है और इसके पीछे कौन-से फैक्टर जिम्मेदार हैं:

1. एक जैसा टेम्परेचर, लेकिन महसूस अलग

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भारत, दुबई और फ्रांस में अगर टेम्परेचर 40°C हो, तब भी तीनों जगह गर्मी एक जैसी महसूस नहीं होती। इसकी वजह यह है कि हर देश का मौसम, वातावरण, नमी, हवा और रहने का तरीका अलग होता है। इसलिए शरीर को गर्मी का अहसास भी अलग-अलग होता है।

2. फ्रांस में गर्मी का असर 

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गर्मियों में फ्रांस में दिन 15 से 17 घंटे तक लंबे होते हैं, जिससे धूप ज्यादा देर तक रहती है। सड़कें, इमारतें और फुटपाथ पूरे दिन गर्मी सोख लेते हैं और रात में भी गर्म रहते हैं। कई बार हवा कम चलने से गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और मौसम ज्यादा तपता हुआ महसूस होता है।

3. घरों का डिजाइन भी बड़ी वजह है

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फ्रांस के ज्यादातर पुराने घर ठंड से बचाने के लिए बनाए गए हैं। उनकी दीवारें मोटी और खिड़कियां छोटी होती हैं, जिससे घर के अंदर की गर्मी आसानी से बाहर नहीं निकलती। इसके अलावा कई जगहों पर पहले से एसी और सीलिंग फैन आम नहीं थे, इसलिए हीटवेव के दौरान लोगों को ज्यादा परेशानी होती है।

4. दुबई का रेगिस्तानी इलाका

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दुबई रेगिस्तानी इलाका है, इसलिए वहां धूप बहुत तेज होती है और गर्म हवाएं चलती हैं। हालांकि, लगभग सभी इमारतों, मॉल, बस स्टॉप, मेट्रो और कारों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा होती है। इसी वजह से बाहर गर्मी ज्यादा होने के बावजूद लोगों को अंदर राहत मिलती है।

5. भारत में लोग गर्मी के आदी हैं

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भारत में हर साल कई राज्यों में टेम्परेचर 40°C या उससे ऊपर पहुंच जाता है। लंबे समय से ऐसी गर्मी झेलने के कारण लोग और उनका शरीर इस मौसम के काफी हद तक आदी हो जाते हैं। यहां के कई घर भी ऐसे बनाए जाते हैं जिनमें ऊंची छत, बरामदा और क्रॉस वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं होती हैं, जो गर्मी कम करने में मदद करती हैं।

6. गर्मी का एहसास बदलता है

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सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि हवा में नमी, हवा की रफ्तार, धूप की तीव्रता, इमारतों का डिजाइन और आसपास का वातावरण भी तय करते हैं कि 40°C कितना गर्म महसूस होगा। यही वजह है कि एक ही टेम्परेचर अलग-अलग जगहों पर अलग एक्सपीरियंस देता है।

7. तीनों देशों में अंतर

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फ्रांस में लंबे समय तक धूप, गर्म इमारतें और सीमित कूलिंग व्यवस्था हीटवेव को ज्यादा कठिन बना सकती है। दुबई में तेज गर्मी के बावजूद मॉडर्न एसी इंफ्रास्ट्रक्चर राहत देता है। वहीं भारत में लोग गर्म मौसम के ज्यादा आदी हैं, लेकिन 40°C से ऊपर की गर्मी में भी पर्याप्त पानी पीना और धूप से बचाव करना जरूरी रहता है।

हर देश में 40°C का टेम्परेचर एक जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसका असर वहां के मौसम, नमी, हवा, धूप और इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुसार अलग होता है। इसलिए केवल टेम्परेचर देखकर गर्मी का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

ऐसे मौसम में सबसे जरूरी है कि पर्याप्त पानी पिएं, तेज धूप से बचें और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाएं। चाहे भारत हो, दुबई या फ्रांस, हीटवेव के दौरान सावधानी और सही तैयारी ही सेफ रहने का सबसे अच्छा तरीका है।

Defence Stock: 40% तक क्रैश हो सकता है ये डिफेंस स्टॉक, कोटक ने दी तुरंत बेचने की सलाह

Defence Stock: डिफेंस और इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी Solar Industries India के शेयर गुरुवार को शुरुआती बढ़त के बाद 3% ज्यादा गिरकर बंद हुए। कारोबार के दौरान यह दिन के हाई लेवल से 6% तक टूट गया था। इसकी वजह Kotak Institutional Equities की नई रिपोर्ट रही। ब्रोकरेज ने पहली बार कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Sell’ रेटिंग दी है।

Kotak ने शेयर के लिए 10,300 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। यह गुरुवार के बंद भाव के मुकाबले करीब 40.8% की संभावित गिरावट दिखाता है।

कंपनी की खूबियां भी गिनाईं

Kotak ने माना कि Solar Industries देश की सबसे बड़ी निजी इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी है। साथ ही यह देश की सबसे तेजी से बढ़ती डिफेंस कंपनियों में भी शामिल है।

कंपनी सिर्फ विस्फोटक ही नहीं बनाती। इसके पोर्टफोलियो में इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव, हाई-एनर्जी मैटेरियल, पिनाका रॉकेट सिस्टम, लोइटरिंग म्यूनिशन और गोला-बारूद जैसे कई डिफेंस प्रोडक्ट भी शामिल हैं।

ग्रोथ को लेकर क्या है अनुमान?

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच कंपनी का PAT (टैक्स के बाद मुनाफा) सालाना औसतन 28% (CAGR) की दर से बढ़ सकता है।

इसके पीछे कई वजहें हैं। डिफेंस कारोबार में करीब 35% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है। वहीं, 10 देशों में फैले अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 26% CAGR की उम्मीद है। इसके अलावा बिजनेस मिक्स बेहतर होने से कंपनी के मार्जिन में भी सुधार हो सकता है।

फिर ‘Sell’ रेटिंग क्यों दी?

इतनी मजबूत ग्रोथ का अनुमान होने के बावजूद Kotak ने शेयर खरीदने की सलाह नहीं दी। उनसे इसका कारण भी बताया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की मौजूदा कीमत में भविष्य की ग्रोथ पहले ही शामिल हो चुकी है। अभी Solar Industries का शेयर वित्त वर्ष 2028 के अनुमानित मुनाफे के करीब 55 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ऐसे में मौजूदा स्तर पर निवेशकों को जोखिम के मुकाबले आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना कम दिखती है।

कौन-कौन से जोखिम हैं?

Kotak ने कंपनी के सामने कुछ अहम चुनौतियों का भी जिक्र किया है। माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की मांग में उतार-चढ़ाव का असर कारोबार पर पड़ सकता है। सरकारी डिफेंस ऑर्डर एक साथ और अनियमित तरीके से मिलते हैं, इसलिए कमाई में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है।

इसके अलावा एक्सप्लोसिव कारोबार से जुड़े नियामकीय नियम, MALE UAV और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी नई डिफेंस टेक्नोलॉजी में विस्तार से जुड़े जोखिम भी मौजूद हैं।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि कंपनी के करीब 35% रेवेन्यू विदेशी बाजारों से आते हैं। वहीं, डिफेंस ऑर्डर बुक का भी बड़ा हिस्सा निर्यात पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है।

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों का हाल

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयर गुरुवार को 3.26% की गिरावट के साथ 17,385 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में इसने 31.79% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल के दौरान इसने 980% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.57 लाख करोड़ रुपये है।

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TCS Hiring: टीसीएस ने 9279 नई हायरिंग की, कर्मचारियों की संख्या 5.93 लाख के पार

TCS Hiring: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अप्रैल-जून तिमाही में 9,279 कर्मचारियों की शुद्ध भर्ती की है। इसके साथ ही 30 जून 2026 तक कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 5,93,798 हो गई।

यह पिछले एक साल से ज्यादा समय में TCS की सबसे बड़ी तिमाही भर्ती है। इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी ने 2,356 कर्मचारियों की नेट हायरिंग की थी।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब पिछले वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने वर्कफोर्स ऑप्टिमाइजेशन के तहत कर्मचारियों की संख्या में कटौती की थी। अब ताजा आंकड़े बताते हैं कि कंपनी फिर से भर्ती बढ़ा रही है।

कारोबार सुस्त, फिर भी भर्ती जारी

डॉलर के लिहाज से कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ लगभग स्थिर रही। इसके बावजूद TCS ने टैलेंट में निवेश जारी रखा। जून तिमाही के अंत तक कंपनी के पास 9.5 अरब डॉलर का ऑर्डर बुक (TCV) था। वहीं, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर रेवेन्यू में 0.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

एट्रिशन में मामूली सुधार

आईटी सर्विसेज में पिछले 12 महीनों का एट्रिशन रेट 13.6% रहा, जो पिछली तिमाही के 13.7% से थोड़ा कम है।

तिमाही के दौरान कर्मचारियों ने 1.46 करोड़ लर्निंग आवर्स पूरे किए और 13 लाख नई स्किल्स (Competencies) हासिल कीं। कंपनी ने बताया कि अब 3.12 लाख से ज्यादा कर्मचारी AI और मशीन लर्निंग में बेहतर एफिशिएंसी हासिल कर चुके हैं।

HR प्रमुख ने क्या कहा?

TCS के चीफ HR ऑफिसर सुदीप कुन्नुमल ने कहा कि इस तिमाही में कंपनी ने दुनियाभर के कर्मचारियों के लिए सालाना वेतन वृद्धि लागू की है। साथ ही भारत के नए लेबर कोड के अनुरूप सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर और नई स्किल डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म में लगातार निवेश कर रही है, ताकि कर्मचारी भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहें।

तिमाही नतीजे भी आए

TCS ने पहली तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा। वहीं, 72,275 करोड़ रुपये का रेवेन्यू अनुमान से बेहतर रहा। कंपनी ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

TCS Q1 Results: टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी को ₹13349 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड का ऐलान

दिल्ली में DDA ने TOD प्रोजेक्ट्स के लिए खोला ऑनलाइन सिंगल-विंडो, अब इस 207 Sq Km क्षेत्र में मेट्रो-रैपिड रेल रूट के पास बनेंगे टावर्स और सस्ते घर

Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत जमीन विकसित करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डीडीए ने इसके लिए डेवलपर संस्थाओं को आमंत्रित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में तैयार की गई संशोधित टीओडी नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए डीडीए ने ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) के जरिए आवेदन प्रक्रिया को खोल दिया है। इस नीति के जरिए दिल्ली के एक बड़े हिस्से का कायाकल्प होगा और किफायती आवास के साथ-साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा।

दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा विकसित

DDA के मुताबिक इस नीति के लागू होने से दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर का एक विशाल क्षेत्र विकास के लिए खुल जाएगा। इस दायरे में मिक्स्ड लैंड यूज एरिया, ऑफिस स्पेस, गेस्ट हाउस और स्टूडियो अपार्टमेंट्स जैसे इंफ्रा डेवलप किए जा सकेंगे।

मेट्रो और रैपिड रेल रूट के पास क्या है योजना?

टीओडी नीति के तहत दिल्ली में परिवहन गलियारों के आसपास के क्षेत्रों को योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। मेट्रो कॉरिडोर की बात करें तो मेट्रो लाइनों के दोनों तरफ 500 मीटर का दायरा इसके लिए तय किया गया है। इसी तरह रैपिड रेल स्टेशनों के चारों तरफ 500 मीटर के रेडियस को नियोजित विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इसका उद्देश्य है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से किफायती आवास और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ लोगों के रहने की स्थिति बेहतर होगी बल्कि मेट्रो की राइडरशिप भी बढ़ेगी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अब सिंगल-विंडो क्लीयरेंस

डीडीए ने बताया कि यह नीति ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देती है। इसके तहत परियोजनाओं की मंजूरी के लिए एक बेहद सरल और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था बनाई गई है। जमीन विकसित करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति या डेवलपर इकाई को शुल्क के साथ सिर्फ एक पॉइंट पर मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा। डेवलपर्स को अब दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली फायर सर्विस जैसी अलग अलग एजेंसियों के पास अलग से चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

TOD कमेटी करेगी फैसला

डेवलपर्स को सबसे पहले डीडीए के ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम के माध्यम से आवेदन करना होगा ताकि टीओडी समिति द्वारा टीओडी प्लॉटों को मंजूरी दी जा सके। यह समिति डीडीए के उपाध्यक्ष के तहत काम करती है। टीओडी समिति द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के बिल्डिंग प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए ओबीपीएस के माध्यम से डीडीए के पास जमा करना होगा।

मौजूदा और प्रस्तावित दोनों रूटों पर मिलेगी छूट

डीडीए के बयान के मुताबिक इस नीति में काफी फ्लेक्सिबिलिटी दी गई है। यह नीति अभी चालू मेट्रो कॉरिडोर और रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ भविष्य में प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के आसपास भी टीओडी विकास की अनुमति देती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के साथ-साथ ही इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे का विकास भी साथ के साथ हो सकेगा।

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