Gold vs Inflation: 46 साल के आंकड़ों से मिला जवाब, गोल्ड में निवेश महंगाई से लड़ाई में कितना कारगर

Gold vs Inflation: गोल्ड के भाव एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ने लगे हैं। 24 कैरट की शुद्धता वाला 10 ग्राम गोल्ड अब करीब ₹1.64 लाख के भाव पर पहुंच गया है जबकि कुछ ही दिन पहले यह लगभग ₹1.59 लाख में मिल रहा था। हालांकि गोल्ड के भाव में इस तेजी के चलते ही इसमें निवेशकों का रुझान दिखता है बल्कि इसे बड़े पैमाने पर महंगाई की रफ्तार से बचाव के तौर पर देखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना वाकई लॉन्ग टर्म में महंगाई से लड़ाई में अच्छा हथियार साबित हुआ है और अगर हां तो कितना। इसे लेकर फंड्सइंडिया की वेल्थ कंवर्जेशंस अगस्त 2026 रिपोर्ट के डेटा से सामने आया है कि जैसे-जैसे गोल्ड रखने की अवधि यानी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, महंगाई से आगे रहने में इसकी रफ्तार अधिक स्थिर हो जाती है।

Gold vs Inflation: अलग-अलग टाइमफ्रेम में कैसी रही भिड़ंत

फंड्सइंडिया ने साल 1995 और साल 2025 के बीच अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड में सोने से मिलने वाले रिटर्न और महंगाई की तुलना की। इसमें गोल्ड के रिटर्न और महंगाई के बीच सालाना औसत अंतर को मापा गया। इस डेटा के मुताबिक एक साल में दोनों के बीच किसकी रफ्तार अधिक रही, यह इस बात पर काफी निर्भर है कि गोल्ड की खरीदारी कब हुई। औसतन गोल्ड ने एक साल में इनफ्लेशन को करीब 4 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ दिया। हालांकि एक साल में ही खरीदारी के अलग-अलग समय के हिसाब से ही गोल्ड ने इनफ्लेशन को 24 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पछाड़ दिया तो कुछ अवधि में 28 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पिछड़ गई।

अब अगर पांच साल में बात करें तो गोल्ड ने महंगाई की रफ्तार यानी इनफ्लेशन को औसतन सालाना 5 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ा तो 10,15 और 20 साल की अवधि में भी ऐसी ही स्थिति रही। इसका मतलब है कि कम समय में जरूरी नहीं है कि गोल्ड इनफ्लेशन को पछाड़ दे लेकिन लंबे समय में यह अब तक आगे ही साबित हुआ है।

gold vs inflation

हर साल लगातार नहीं बढ़ी गोल्ड की चमक

लॉन्ग टर्म में गोल्ड ने शानदार रिटर्न दिया है और महंगाई को मात दी है लेकिन इसकी चमक लगातार हर साल नहीं बढ़ी है। इसे लेकर फंड्सइंडिया ने 1980 से लेकर अब तक गोल्ड ने कितना रिटर्न दिया, एक और एनालिसिस की। इसमें सामने आया कि इसमें जोरदार तेजी के दौर भी आए हैं तो लॉन्ग टर्म तक सुस्त रिटर्न के दौर भी रहे हैं। रोलिंग-रिटर्न डेटा के मुताबिक अलग-अलग पीरियड में गोल्ड का औसतन सालाना रिटर्न करीब 10% रहा है लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न इस बात पर बहुत निर्भर रहा कि निवेशक ने किस समय सोना खरीदा था। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनफ्लेशन हेज यानी महंगाई के खिलाफ हथियार होने का मतलब ये नहीं है कि जब भी महंगाई बढ़ेगी, सोने की कीमत भी उसी समय बढ़ेगी या सोना हर साल महंगाई से ज्यादा रिटर्न देगा या सोने की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा चार्ज! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोने में 7 सत्रों से जारी तेजी थमी, चांदी ₹6000 फिसली

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते सात सत्रों से सोने में जारी तेजी पर गुरुवार को ब्रेक लग गया। सोने का भाव 2,800 रुपये गिरकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 6000 रुपये की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट आई।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी 6000 रुपये गिरकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन में कमजोरी का असर भारत में इनकी कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.43 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,389.67 डॉलर प्रति औंस था। स्पॉट सिल्वर भी हल्की कमजोरी के साथ 65.03 डॉलर प्रति औंस था।

बीते सात सत्रों मे सोने में आई थी ₹12400 की तेजी

इससे पहले सोना बीते 7 सत्रों से लगातार चढ़ रहा था। इससे इसकी कीमतें 4400 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई थी। दिल्ली में भी बीते सात सत्रों में सोना 12,400 रुपये चढ़ा था। चांदी में भी इस दौरान अच्छी तेजी आई थी। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। देश और विदेश में मुनाफावसूली का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका में 12 अगस्त को इनफ्लेशन के डेटा आए, जो उम्मीद के मुताबिक रहे। इससे फेडरल रिजर्व के सितंबर की पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। हालांकि, क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर हैं। ब्रेंट क्रूड अब भी करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर है।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के संकेत नहीं 

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे क्रूड की कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स का आवागमन नाममात्र का हो रहा है। अगर क्रूड लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। फिर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ जाएगी। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतों को लगे पंख, सिर्फ 7 सत्र में ₹12400 चढ़ा गोल्ड

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी के लिए 12 अगस्त यानी बुधवार खास रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों में पंख लग गए। खास बात यह रही कि सोने में लगातार 7वें दिन तेजी जारी रही। सोने का भाव 2,600 रुपये चढ़कर 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

सिर्फ 7 सत्रों में सोने में 12400 रुपये की तेजी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा सोने में अच्छी खरीदारी भी दिखी। बीते सात सत्रों में सोने का भाव करीब 8.4 फीसदी यानी 12,400 रुपये चढ़ा है। चांदी में भी आज 4000 रुपये का उछाल दिखा। इससे भाव 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

क्रूड ऑयल में तेजी के बावजूद बुलियन में उछाल 

लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले निवेशकों की दिलचस्पी सोने में बढ़ी है। सोने को निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है। उधर, पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है। क्रूड का भाव हाई लेवल पर बना हुआ है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी से बुलियन को सपोर्ट

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। डॉलर में भी स्थिरता है। इससे बुलियन की कीमतों को सपोर्ट मिला है। बाजार की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। आज देर रात डेटा आएंगे। इधर, भारत में रिटेल इनफ्लेशन में लगातार चौथे हफ्ते इजाफा हुआ है।

इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन डेटा पर 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में जबर्दस्त तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.19 फीसदी चढ़कर 4,422.14 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 2.19 फीसदी के उछाल के साथ 66.12 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का भाव अब भी 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेज गिरावट के बाद सोने और चांदी में अच्छी रिकवरी जारी है। इस साल जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बुलियन में तेज गिरावट आई थी।

Gold Price Today: दो दिनो में ₹10100 चढ़ा सोना, चांदी भी महंगी, चेक करें 10 शहरों में 24 से 18 कैरट के लेटेस्ट भाव

Gold Rate Today in India: कच्चे तेल में उछाल के बावजूद मजबूत डिमांड के चलते सोने-चांदी की चमक आज बढ़ी है। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹1860 और 22 कैरट वाला ₹1710 सस्ता हुआ है तो 9 अगस्त की एक दिन की स्थिरता से पहले लगातार चार दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹8350 और 22 कैरट वाला ₹7650 महंगा हुआ था। 10 अगस्त को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹380 और 22 कैरट वाला ₹350 सस्ता हुआ था। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 महंगा हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक बढ़ी है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन यह महंगी हुई है और इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹10100 ऊपर चढ़ी है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
मुंबई₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
कोलकाता₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
चेन्नई₹1,54,380₹1,41,510₹1,19,310
बेंगलुरू₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
हैदराबाद₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
लखनऊ₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
पटना₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430
जयपुर₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
अहमदाबाद₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430

तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन चढ़ी चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव बढ़े है। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,100 महंगी हुई है। आज दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 चढ़कर ₹2,55,100 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,60,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के ईबीजी कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने-चांदी की चमक बढ़ सकती है। प्रमण का मानना है कि 10 ग्राम सोना ₹1.57 और 1 किलो चांदी ₹2.80 लाख का हो सकता है। लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इस कारण सोने की चमक बढ़ रही है तो चांदी में भी इनवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड स्ट्रॉन्ग है। अमेरिका में इनफ्लेशन के आंकड़े 12 अगस्त को आएंगे।

भारतीय घरों में दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी ज्यादा सोना! 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दो महीने की ऊंचाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी 2000 रुपये उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 11 अगस्त को तेजी दिखी। सोने की कीमतें चढ़कर दो महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई। चांदी में भी 2000 रुपये का उछाल आया। सोने में आज लगातार छठे सत्र तेजी जारी रही। आज सोने का भाव 1,200 रुपये चढ़कर 1,57,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

सोने में स्ट्रॉन्ग डिमांड

ऑल इंडिया सर्राफ एसोसिएशन के मुताबिक, 10 अगस्त को सोना 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। खास बात यह है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की कीमतें चढ़ रही है। ट्रेडर्स का कहना है कि सोने में डिमांड स्ट्रॉन्ग है। इसका असर कीमतों पर दिखा है।

6 सत्र में 6.65 फीसदी तेजी

आज से पहले 12 जून को सोने का भाव इस लेवल पर था। तब यह 1,56,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। पिछले छह कारोबारी सत्रों में सोना करीब 6.65 फीसदी यानी 9,800 रुपये चढ़ा है। इससे सोने के निवेशकों को राहत मिली है। गोल्ड ईटीएफ के निवेशक भी इससे खुश हैं।

चांदी में भी उछाल 

11 अगस्त को चांदी में भी अच्छी तेजी दिखी। इसका भाव 2000 रुपये के उछाल के साथ 2,42,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे चांदी भी दो महीने से ज्यादा समय की ऊंचाई पर पहुंच गई है। इससे पहले चांदी का भाव इस लेवल पर 30 अप्रैल को था।

इनफ्लेशन डेटा पर नजरें 

लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस वजह से सोने में लगातार छठे दिन तेजी दिखी। चांदी में भी इनवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड स्ट्रॉन्ग है। चांदी इस मामले में सोने से अलग है, क्योंकि इसका इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है।

विदेश में सोने में तेजी

ग्लोबल मार्केट्स में स्पॉट गोल्ड 0.38 फीसदी चढ़कर 4,373.43 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में गिरावट थी। यह करीब 1.3 फीसदी की कमजोरी के साथ 64.90 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बावजूद बुलियन में अच्छी डिमांड दिख रही है।

कल आएंगे इनफ्लेशन के डेटा

इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। 12 अगस्त को ये डेटा आएंगे। इससे पता चलेगा कि अमेरिका में महंगाई का ट्रेंड कैसा है। अगर महंगाई में ज्यादा उछाल आता है तो फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर असर पड़ सकता है। 12 अगस्त को भारत में भी इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं।

FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

IRFC Shares: ₹200 के ऊपर थी तगड़ी डिमांड, अब ₹100 के नीचे नहीं मिल रहे खरीदार! आखिर क्या है चक्कर

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोना लगातार चौथे दिन चढ़ा, विदेश में चांदी में जोरदार तेजी

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 अगस्त को लगातार चौथे दिन सोने में तेजी आई। यह 200 रुपये चढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विदेशी बाजार में सोने में तेजी का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। हालांकि चांदी में स्थिरता रही। एमसीएक्स में शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में अच्छी तेजी दिखी।

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में स्थिरता

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम रही। लेमन मार्केट डेस्ट के हेड (रिसर्च) गौरव गर्ग ने कहा कि जनवरी के बाद यह सोने में सबसे ज्यादा तेजी वाला हफ्ता है। सोने में तेजी की कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर में नरमी है और इनफ्लेशन में होने वाली वृद्धि उम्मीद से कम रह सकती है।

विदेश में चांदी में 4 फीसदी का उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 2 फीसदी तेजी दिखी। इससे इसका भाव 4,325.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर में 4 फीसदी की तेजी दिखी। जिससे इसका भाव 64.17 डॉलर प्रति औंस हो गया। सोने और चांदी की कीमतों में क्रूड ऑयल में नरमी का भी हाथ है।

अमेरिका में बेरोजगारी दर में कमी 

अमेरिका में जॉब के डेटा आ गए हैं। अमेरिका में जुलाई में नौकरियों में कमी आई, जबकि बेरोजगारी दर थोड़ी कम हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका में नौकरियों के मौके बनने की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। बेरोजगारी दर घटकर 4.1 फीसदी पर आ गई। यह बीते पांच सालों में सबसे कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि जॉब की तलाश करने वाले अमेरिकी लोगों की संख्या घटी है। इससे यह माना जा रहा है कि आगे अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख नरम रह सकता है।

यह भी पढ़ें: Titan Q1 Profit: नेट प्रॉफिट 65% बढ़कर 1699 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में 24 फीसदी इजाफा

फेड के इंटरेस्ट नहीं बढ़ाने से सोने को सपोर्ट

अगर फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। मध्यपूर्व में अगर टेंशन कम होता है तो इसका भी गोल्ड की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। हालांकि, अभी अमेरिका और ईरान में सीधी बातचीत की कोई संभावना बनती नहीं दिख रही है।

RBI दिसंबर से इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है, ICICI Bank ने बताई यह वजह

आरबीआई दिसंबर से इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है। यह अनुमान आईसीआईसीआई बैंक ने जताया है। एएनआई ने एक रिपोर्ट के हवाले से यह यह जानकारी दी है। आईसीआईसीआई बैंक का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो आरबीआई दिसंबर में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स के इजाफे के साथ इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला शुरू कर सकता है।

ICICI Bank का कहना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतो में नरमी आती है तो फिर आरबीआई अगले साल अप्रैल में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है। उसने कहा है कि अप्रैल से इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद ज्यादा है। गौरतलब है कि आरबीआई ने 5 अगस्त को लगातार चौथी बार रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।

RBI ने मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान 5 अगस्त को किया। तीन दिन तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया गया। केंद्रीय बैंक ने अपना रुख भी तटस्थ यानी Neutral रखने का ऐलान किया। हालांकि, आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को थोड़ा बढ़ाया और इनफ्लेशन के अनुमान को थोड़ा कम किया।

आरबीआई ने 5 जुलाई को जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया। हालांकि, ICICI Bank का मानना है कि इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ आरबीआई के अनुमान से ज्यादा रह सकती है। प्राइवेट बैंक ने FY27 में जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी और FY28 में 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

मध्यपूर्व में लड़ाई का असर केंद्रीय बैंकों की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ा है। क्रूड ऑयल सहित कई कमोडिटी की सप्लाई में बाधा से उनकी कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ रहा है। भारत में भी रिटेल इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज को पार कर चुका है। अमेरिका में भी महंगाई बढ़ी है। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

RBI MPC Meeting Aug 2026: महंगाई कितना करेगी परेशान! आरबीआई की इस बात से कहीं खुशी-कहीं गम

RBI MPC Meeting Aug 2026: केंद्रीय बैंक आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई की रफ्तार का अनुमान घटा दिया है। इस बार की मौद्रिक नीति में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और अपना न्यूट्रल नजरिया बरकरार रखा है तो साथ ही वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन यानी कि महंगाई बढ़ने की रफ्तार के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। सिर्फ यही नहीं इस तिमाही यानी चालू वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर 2026 के इनफ्लेशन का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया है। बता दें कि आरबीआई गवर्वर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को MPC (मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी) की अहम नीतिगत फैसलों का ऐलान किया है।

इनफ्लेशन को लेकर अब RBI का ये है कैलकुलेशन

आरबीआई की एमपीसी ने वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है तो सितंबर 2026 के अनुमान को 5.1% से कम कर 4.7% किया है। हालांकि तीसरी तिमाही में इनफ्लेशन के अनुमान को 5.9% स्थिर रखा है तो चौथी तिमाही के लिए अनुमान 5.4% से बढ़ाकर 5.5% कर दिया है। इससे पहले पिछली बैठक में आरबीआई ने जून तिमाही के इनफ्लेशन के अनुमान को 4% से बढ़ाकर 4.2% कर दिया था तो सितंबर तिमाही के लिए इसे 4.4% से 5.1%, तीसरी तिमाही के लिए 5.2% से 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 4.7% से 5.4% कर दिया था।

जून महीने की बात करें तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें अधिक रहने और कई कैटेगरी में कीमतों का दबाव बढ़ने की वजह से जून में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई। यह 17 महीनों में पहली बार है जब यह आरबीआई के 4% के मीडियम-टर्म टारगेट से ऊपर गई है।

Repo Rate को लेकर क्या हुआ है फैसला

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने अपने रिव्यू बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी न्यूट्रल पर बनाए रखा है। रेपो रेट को स्थिर रखने का मतलब है कि आम लोगों के लोन की किश्तों में किसी बदलाव के आसार नहीं हैं।

आरबीआई की एमपीसी बैठक से जुड़े अहम अपडेट्स यहां पढ़ें