E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच मारुति की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

E20 Petrol Row: देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच मौजूद चिंताओं और बहस के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक रिलीज के मुताबिक इस उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कंपनी के सर्विस डेटा के आधार पर एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की थी। इन गाड़ियों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं। यानी वे तकनीकी रूप से ई20 सर्टिफाइड नहीं थीं।

भारती ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद फील्ड से ई20 फ्यूल की वजह से इंजन में जंग, सामान्य टूट-फूट या गाड़ी के किसी भी पार्ट/कंपोनेंट की लाइफ खराब होने की एक भी शिकायत या समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया जा चुका है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

माइलेज पर कितना पड़ता है असर? मारुति ने समझाया पूरा गणित

माइलेज में गिरावट के दावों पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने स्पष्ट गणित समझाया। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल की तुलना में ई20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। माइलेज पर इसका असर भी केवल इसी सीमा तक सीमित है। जैसे कि अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो ई20 की वजह से उसका माइलेज केवल 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर ही कम होगा।

इसकी तुलना में टायर का प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, अचानक एक्सीलरेट करना, बार-बार ब्रेक लगाना और गाड़ी का रखरखाव जैसी वजहें माइलेज में इससे कहीं ज्यादा बड़ा अंतर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माइलेज में होने वाले इस मामूली नुकसान की भरपाई बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल से होने वाले बेहद कम प्रदूषण से पूरी हो जाती है।

क्या बाजार में उपलब्ध हैं रेट्रोफिटमेंट किट?

राहुल भारती ने साफ किया कि वाहनों को ई20 कंप्लायंस की तय सीमा से कहीं अधिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बाजार में पुरानी गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाने के लिए कोई भी रेट्रोफिटमेंट किट नहीं बेची जा रही है। इस तरह के समाधान फिलहाल सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के स्तर तक ही सीमित हैं।

टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प ने भी जताई सहमती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़े रेग्युलेटेड क्षेत्रों में से एक है। वाहनों को बाजार में उतारने से पहले और बाद में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

भारत यूएनईसीई (UNECE) का हिस्सा है, इसलिए यहां के टेस्टिंग प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई20 को लागू करने का निर्णय पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षणों के बाद ही लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन विशेष रूप से केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जो भविष्य की नीति की दिशा तय करते हैं।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माताओं में से एक हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी मारुति के दावों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने व्यापक सर्विस डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में किसी भी तरह के नुकसान या खराबी की कोई अधिक घटना सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिक सबूतों और वैश्विक मानकों पर आधारित है ई20 प्रोग्राम

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे वैज्ञानिक सबूतों और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों का पूरा समर्थन प्राप्त है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। वर्तमान में ई20 ईंधन बीआईएस मानक और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानदंडों के पूरी तरह अनुरूप है और देश के सभी रिटेल आउटलेट्स पर समान रूप से उपलब्ध है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीवीएस मोटर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड (सेल्स- नॉर्थ एंड ईस्ट) मनप्रीत सिंह बिंद्रा सहित पूरे पैनल ने ई20 कार्यक्रम पर सामूहिक विश्वास जताया और उपभोक्ताओं के हर सवाल का पारदर्शिता से जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

E20 Petrol: क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से सच में घटती है माइलेज और खराब होता है इंजन? ऑयल इंडस्ट्री के 2 दिग्गज एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

भारत में E20 (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले) पेट्रोल का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम जनता के बीच गाड़ी के माइलेज में गिरावट और इंजन को संभावित नुकसान पहुंचने की बहस भी तेज हो गई है। उपभोक्ताओं की इसी चिंता और भ्रम को दूर करने के लिए ऑयल और एनर्जी इंडस्ट्री के दो दिग्गज एक्सपर्ट्स शनिवार को सामने आए और उन्होंने इस ईंधन से जुड़े तमाम मिथकों की सच्चाई उजागर की। मुंबई में आयोजित एक हाई-लेवल मीडिया ब्रीफिंग के दौरान समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए बीपीसीएल (BPCL) के रिटायर्ड डायरेक्टर (रिफाइनरीज) आर रामचंद्रन और आईजीएल (IGL) के रिटायर्ड चेयरमैन व बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने लैब के पुख्ता डेटा के आधार पर सड़क के व्यक्तिगत अनुभवों से पैदा हुए भ्रम को दूर किया और E20 को भविष्य का ईंधन बताया।

क्या E20 पेट्रोल से सच में 10% घट जाती है माइलेज?

वाहन चालकों की ओर से अक्सर यह शिकायत आती है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी की माइलेज में 10 फीसदी तक की गिरावट आ रही है। इस पर बात करते हुए आर रामचंद्रन ने साफ किया कि व्यापक इंस्टीट्यूशनल टेस्टिंग से पता चलता है कि माइलेज पर इसका सिर्फ मामूली असर पड़ता है। रामचंद्रन ने समझाया कि कुछ इससे अलग मामले भी हो सकते हैं, जिन्हें अलग तरीके से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने इशारा किया कि वाहनों का पुराना होना, सामान्य टूट-फूट या अग्रेसिवी सिटी ड्राइविंग जैसी स्थिति भी कम माइलेज के पीछे की असल वजह हो सकती है।

इस मुद्दे पर राज कुमार दुबे ने एक बेहद दिलचस्प बात जोड़ी। उन्होंने कहा कि वाहन चालक पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से बिना जाने ही E20 जैसा ब्लेंडेड ईंधन खरीद रहे हैं। दुबे ने कहा कि अचानक अगर आप यह सवाल उठाते हैं कि माइलेज नाटकीय रूप से कम हो रहा है तो इन बातों का कोई तार्किक आधार नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे किसी व्यक्तिगत राय के बजाय टेस्टिंग एजेंसियों के दावों पर भरोसा करें।

क्या 2023 से पहले की गाड़ियों के इंजन हो जाएंगे खराब?

साल 2023 से पहले बनी देश की लाखों पुरानी गाड़ियों में सीधे तौर पर E20 ईंधन के इस्तेमाल की फैक्ट्री कंप्लायंस नहीं है। ऐसे में मैकेनिकल नुकसान के डर पर एक्सपर्ट्स ने स्थिति स्पष्ट की। राज कुमार दुबे ने बताया कि एक्सेलरेटेड टेस्टिंग से यह सामने आया है कि पुराने इंजनों के लिए दीर्घकालिक तौर पर सिर्फ मामूली बदलावों की ही जरूरत होगी। दुबे ने कहा कि बहुत पुराने वाहनों में रबर के पार्ट्स पर कुछ असर पड़ सकता है। सामान्य तौर पर मान लीजिए कि आप 10 साल में रबर पार्ट्स बदलना चाहते हैं तो इस ईंधन के साथ आपको रबर पार्ट्स को शायद आठ साल में बदलने पर विचार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय अभियान के लिए यह बहुत ही छोटी कीमत है।

इसके साथ ही आर रामचंद्रन ने बीमा से जुड़ी उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि ऐसी गाड़ियों का इंश्योरेंस अमान्य हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्ट अधिसूचनाएं इसकी पुष्टि करती हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसियां पूरी तरह से वैध रहती हैं।

पर्यावरण को नुकसान और पानी की बर्बादी का सच

कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि एक लीटर एथेनॉल ईंधन के उत्पादन में 10000 लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। इन पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दोनों दिग्गजों ने सिरे से खारिज कर दिया। रामचंद्रन ने कहा कि कृषि उत्पादन में होने वाली पानी की खपत का बोझ एथेनॉल पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अधिकांश नए जमाने की डिस्टिलरीज 100% वाटर रीसाइक्लिंग और जीरो-इफ्लुएंट डिस्चार्ज के सिद्धांत पर काम कर रही हैं।

देश को मिल रहा है भारी आर्थिक फायदा

एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस नीति से देश को बहुत बड़ा व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। सरकार को इससे 1.8 लाख करोड़ रुपये से 1,9 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है। राज कुमार दुबे ने ध्यान दिलाया कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अगर E20 पेट्रोल अस्तित्व में न होता और इस 20 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्से को भी हमें विदेशों से आयात करना पड़ता तो इस देश में पेट्रोल की कीमत क्या होती? आज पेट्रोल के दाम 5 से 7 रुपये प्रति लीटर और ज्यादा बढ़ गए होते। उन्होंने ये भी कहा कि देश की पूंजी को घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर बनाए रखने से सीधा फायदा हमारे स्थानीय गन्ना किसानों को मिल रहा है और वे समृद्ध हो रहे हैं।

Top 10 Selling Cars in June: टॉप 10 कारों में Tata दबदबा, Punch और Nexon SUV लिस्ट में सबसे ऊपर, Maruti के 6 मॉडल भी शामिल

Top 10 Selling Cars in June:  जून,2026 में भारत के कार मार्केट में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाली कंपनी रही। इस दौरान कंपनी की Punch SUV और Nexon SUV ने देश की टॉप 10 बिकने वाली कारों की सूची में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं, इस मजबूत प्रदर्शन के साथ कंपनी की घरेलू बिक्री में साल-दर-साल (y-o-y) 69% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसके अलावा, Maruti Suzuki ने भी मार्केट में पकड़ बनाए रखते हुए लिस्ट में 6 मॉडल शामिल किए। जबकि Hyundai Motor India की Creta SUV प्रोडक्शन में कुछ समय की रुकावट के कारण लिस्ट से बाहर हो गई।

बता दें कि Tata Motors ने जून में घरेलू पैसेंजर व्हीकल (PV) की 63,083 यूनिट्स (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स या EVs सहित) बेचीं, जो पिछले साल इसी महीने में 37,237 यूनिट्स थीं। कंपनी ने कहा कि Punch और Tiago के नए वर्जन्स को ‘बहुत जबरदस्त’ रिस्पॉन्स मिला है और सभी तरह के पावरट्रेन में बुकिंग तेजी से बढ़ी है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री इस महीने रिकॉर्ड 14,800 यूनिट्स तक पहुंच गई।

पहले Punch SUV की बात करें तो, यह जून में भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली पैसेंजर व्हीकल बनी, जिसकी 21,006 यूनिट्स की बिक्री हुई। दूसरे नंबर पर Nexon रही, जिसकी 18,335 यूनिट्स बिकीं। तीसरे स्थान पर Maruti Suzuki की Dzire रही, जिसने 17,899 यूनिट्स की बिक्री के साथ देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान का दर्जा बनाए रखा।

चौथे स्थान पर 16,952 यूनिट्स के साथ ‘Wagon R’ हैचबैक रही, जबकि ‘Ertiga’ MPV ने 16,111 यूनिट्स बेचकर टॉप पांच में जगह बनाई। Maruti Suzuki की ‘Swift’ हैचबैक 15,215 यूनिट्स के साथ छठे स्थान पर रही, और उसके बाद Mahindra ‘Scorpio’ SUV 14,097 यूनिट्स के साथ सातवें स्थान पर रही।

Maruti Suzuki की ‘Fronx’ SUV 13,135 यूनिट्स की बिक्री के साथ 8वें स्थान पर रही, जो ‘Baleno’ हैचबैक (12,488 यूनिट्स) से आगे रही। इसके अलावा, Hyundai की ‘Venue’ SUV 10,776 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप 10 की लिस्ट में शामिल रही।

हालांकि टाटा मोटर्स ने टॉप 2 स्थान हासिल किए, लेकिन मारुति सुजुकी इस रैंकिंग में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनी रही, जिसके 6 मॉडल-Dzire, WagonR, Ertiga, Swift, Fronx और Baleno-टॉप 10 में शामिल रहे। इन मॉडल्स की कुल बिक्री 91,780 यूनिट रही, जो जून में टॉप 10 कारों की कुल बिक्री का 57% से ज्यादा है। इससे हैचबैक, सेडान, MPV और SUV सेगमेंट में कंपनी की मजबूत मौजूदगी का पता चलता है।

बता दें कि यह परफॉर्मेंस तब देखने को मिली जब जून में मारुति सुजुकी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में एक हफ्ते के लिए मेंटेनेंस के कारण काम बंद रखा था, जिस दौरान कोई गाड़ी नहीं बनी थी।

रैंकिंग में Hyundai Creta का नाम नहीं

जून की रैंकिंग में एक खास नाम जो गायब था, वह है Hyundai Creta; यह कार देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में हमेशा शामिल रही है। इसके रैंकिंग में शामिल न होने के पिछे एक सप्लायर प्लांट में आग लगने की वजह रही है, जिससे प्रोडक्शन में कुछ समय के लिए रुकावट आई और होलसेल बिक्री पर असर पड़ा। इसी कारण यह SUV टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गई।

एक और खास नाम जो लिस्ट में नहीं था, वह है Maruti Suzuki Brezza SUV। इस महीने के आखिर में इसके अपडेटेड वर्जन के लॉन्च से पहले इसकी सप्लाई पर असर पड़ा था।

जून की रैंकिंग से भारतीय खरीदारों के बीच SUV की लगातार लोकप्रियता का भी पता चला। टॉप 10 में पांच SUV – पंच, नेक्सॉन, स्कॉर्पियो, फ्रॉन्क्स और वेन्यू – शामिल थीं। वहीं, डिजायर ने SUV के ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और भारत की सबसे ज़्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून की रैंकिंग से यह भी साफ हुआ कि भारतीय बाजार में SUV की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। टॉप 10 में कुल 5 SUV-Punch, Nexon, Scorpio, Fronx और Venue-शामिल रहीं। वहीं Dzire ने SUV ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 10 कारें

रैंककार मॉडलबिक्री (यूनिट्स)
1टाटा पंच21,006
2टाटा नेक्सॉन18,335
3मारुति सुजुकी डिजायर17,899
4मारुति सुजुकी वैगनआर16,952
5मारुति सुजुकी अर्टिगा16,111
6मारुति सुजुकी स्विफ्ट15,215
7महिंद्रा स्कॉर्पियो14,097
8मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स13,135
9मारुति सुजुकी बलेनो12,488
10हुंडई वेन्यू10,776

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पेट्रोल में एथेनॉल के बाद अब डीजल में Isobutanol ब्लेंडिंग ट्रायल शुरू, सामने आई ये जानकारी

पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद अब सरकार डीजल को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत अब बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना बना रही है, ताकि विदेशों से तेल आयात पर देश की निर्भरता कम हो सके।

अब डीजल से Isobutanol Fuel बनाने जा रही सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाने पर काम किया जा रहा है, जिसे डीजल के साथ मिलाकर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आइसोब्यूटेनॉल भविष्य में डीजल का अच्छा विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। यह कदम देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और प्रदूषण कम करने वाले स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार कर रही तैयारी 

नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल से दो जनरेटर सफलतापूर्वक चलाकर देखे हैं। इससे यह साबित हुआ है कि ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं, जो पूरी तरह इन ईंधनों पर काम करें। आइसोब्यूटेनॉल को नई पीढ़ी का बेहतर बायोफ्यूल माना जा रहा है। इसमें सामान्य बायोफ्यूल की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है, यह इंजन के साथ बेहतर तरीके से काम करता है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। अधिकारियों का कहना है कि इसके इस्तेमाल से भारत का कच्चे तेल का आयात और घटेगा, साथ ही देश में बनने वाले बायोफ्यूल की मांग भी बढ़ेगी।

 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार के E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन किया था। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों को भी खारिज किया था।

मंत्रालय ने साफ कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल से पानी की भारी कमी नहीं होती, न ही इससे वाहनों के इंजन खराब होते हैं। साथ ही, इससे गाड़ी की वारंटी या बीमा भी प्रभावित नहीं होता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात भी सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना वैज्ञानिक शोध, सुरक्षा मानकों और दुनिया के कई देशों के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पहले, दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया था। सरकार का कहना है कि इस योजना से देश ने 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है, वहीं किसानों की आय बढ़ाने में भी इस योजना ने अहम भूमिका निभाई है।

भूटान का भारत से E20 पेट्रोल लेने से इनकार:कहा- गाड़ियां खराब होने का खतरा, हमें नॉर्मल पेट्रोल ही दें

भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया ‘द भूटानीज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

E85 vs E20 fuel tested, Lamborghini Temerario driven: Autocar India July 2026

Autocar India July 2026 magazine summary

Our July 2026 issue is a celebration of the internal combustion engine in its finest form. The Lamborghini Temerario and Urus SE headline proceedings, both hybrid-powered but no less outrageous for it. We also drive the new Audi RS5 in Austria, road test all three versions of the Renault Duster, and drive the new Skoda Kodiaq RS. On two wheels, we ride the Hero Xoom 160, Royal Enfield Bullet 650 Twin and Ducati Panigale V2 S, and break down the economics of running an E85 vehicle.

Lamborghini Temerario and Urus SE: Cover Story 

The Temerario and Urus SE represent Lamborghini’s hybrid future in two very extreme forms. Both pack twin-turbo V8s working in concert with electric motors, yet couldn’t be more different in character. We drive both the cars back-to-back to find out whether the Raging Bull still has its horns.

E85 vs E20 Fuel Test: Feature

India now has E85 pumps dispensing fuel that’s about Rs 20 per litre cheaper than E20. We test both blends back-to-back in the Suzuki Gixxer SF 250 FFV to find out how big the efficiency hit is, and whether E85 actually makes financial sense.

New Audi RS5: Drive 

Audi Sport’s first performance PHEV has learnt from the mistakes of its rivals. Retaining the twin-turbo V6 rather than downsizing, adding a 130kW electric motor for 639hp total, and lavishing the chassis with updates, give an Audi something it has rarely had before – an instinct to oversteer. We drive it in Austria.

Tata Tiago Facelift: First Drive 

Tata has given both the Tiago and Tiago EV comprehensive updates for 2026, with sharper styling, modernised cabins and a broader feature list. The updated EV gets faster charging and arrives up to Rs 1.15 lakh more affordable than before. Two familiar favourites, freshened up – but have the updates done enough? 

Huracán Sterrato at Nanoli Speedway: Feature

Maharashtra’s first race resort is rising on the grounds of the Nanoli Stud Farm near Lonavala, and we got a rare opportunity to drive a Lamborghini Huracán Sterrato on the unfinished dirt track before the tarmac arrives. A lap of honour that will only ever happen once.

Skoda Kodiaq RS: First Drive 

The Kodiaq gets the RS treatment for the first time in India, with 265hp, adaptive dampers, progressive steering and 20-inch wheels. It is a practical seven-seater with serious driver appeal, but does the price premium make sense?

Renault Duster: Road Test 

We put all three versions of the new Duster – the 1.3 DCT, 1.3 MT, and 1.0 MT – through our exhaustive real-world performance and efficiency tests. The Duster impressed at its first drive, but how does it hold up when the numbers are in?

A Tale of Two V8s: Feature 

Land Rover offers not one but two very different V8s in the Defender. Jaguar’s supercharged 5.0-litre AJ133 in the standard P425, and BMW’s twin-turbocharged 4.4-litre S68 in the Octa. We examine both to find out how, and why, they co-exist.

Royal Enfield Bullet 650 Twin: First Ride 

The Bullet nameplate has been in continuous production for nearly a century, and the 650 Twin is the largest iteration yet. It shares its 648cc parallel-twin with the Classic 650, but brings its own character to the table. How does it justify its place in the range?

Ducati Panigale V2 S: Ride 

The new Panigale V2 drops from 155hp to 120hp and sheds significant weight in the process. The result is a more accessible, friendlier and arguably more enjoyable track machine than its predecessor. We find out if a more sensible Panigale is still a great Panigale.

Le Mans 2026: Motorsport 

Toyota returned to the top step of the Le Mans podium after three years, defeating BMW and Cadillac in a finish that was among the four closest in the race’s history. We have the full story from the 94th edition of the world’s greatest endurance race.

Autocar India:

Our July 2026 issue is a celebration of the internal combustion engine in its finest form. The Lamborghini Temerario and Urus SE headline proceedings – both hybrid-powered, but no less outrageous for it. We also drive the new Audi RS5 in Austria, road test all three versions of the Renault Duster, and drive the new Skoda Kodiaq RS. On two wheels, we ride the Hero Xoom 160, Royal Enfield Bullet 650 Twin and Ducati Panigale V2 S, and break down the economics of running an E85 vehicle.

Lamborghini Temerario and Urus SE: Cover story 

The Temerario and Urus SE represent Lamborghini’s hybrid future in two very extreme forms. Both pack twin-turbo V8s working in concert with electric motors, yet couldn’t be more different in character. We drive both the cars back-to-back to find out whether the Raging Bull still has its horns. 

E85 vs E20 fuel test: Feature

India now has E85 pumps dispensing fuel that’s about Rs 20 per litre cheaper than E20. We test both blends back-to-back in the Suzuki Gixxer SF 250 FFV to find out how big the efficiency hit is and whether E85 actually makes financial sense.

New Audi RS5: Drive 

Audi Sport’s first performance PHEV has learnt from the mistakes of its rivals. The decision to retain the twin-turbo V6 rather than downsizing, add a 130kW electric motor for 639hp total and lavish the chassis with updates gives Audi something it has rarely had before – an instinct to oversteer. We drive it in Austria.

Tata Tiago Facelift: First Drive 

Tata has given both the Tiago and Tiago EV comprehensive updates for 2026, with sharper styling, modernised cabins and a broader feature list. The updated EV gets faster charging and arrives up to Rs 1.15 lakh more affordable than before. Two familiar favourites, freshened up – but have the updates done enough?  

Huracan Sterrato at Nanoli Speedway: Feature

Maharashtra’s first race resort is rising on the grounds of Nanoli Stud Farm near Lonavala, and we got a rare opportunity to drive a Lamborghini Huracan Sterrato on the unfinished dirt track before the tarmac arrives. A lap of honour that will only ever happen once.

Skoda Kodiaq RS: First Drive 

The Kodiaq gets the RS treatment for the first time in India, with 265hp, adaptive dampers, progressive steering and 20-inch wheels. It is a practical seven-seater with serious driver appeal, but does the price premium make sense? 

Renault Duster: Road Test 

We put all three versions of the new Duster – the 1.3 DCT, 1.3 MT, and 1.0 MT – through our exhaustive real-world performance and efficiency tests. The Duster impressed at its first drive, but how does it hold up when the numbers are in?

A tale of two V8s: Feature 

Land Rover offers not one but two very different V8s in the Defender. Jaguar’s supercharged 5.0-litre AJ133 in the standard P425, and BMW’s twin-turbocharged 4.4-litre S68 in the Octa. We examine both to find out how, and why, they co-exist. 

Royal Enfield Bullet 650 Twin: First ride 

The Bullet nameplate has been in continuous production for nearly a century, and the 650 Twin is the largest iteration yet. It shares its 648cc parallel-twin with the Classic 650, but brings its own character to the table. How does it justify its place in the range?

Ducati Panigale V2 S: Ride 

The new Panigale V2 drops from 155hp to 120hp and sheds significant weight in the process. The result is a more accessible, friendlier and arguably more enjoyable track machine than its predecessor. We find out if a more sensible Panigale is still a great Panigale.

Le Mans 2026: Motorsport 

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E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच अब सरकार ने इसकी ये 3 बड़ी खूबियां बताईं, तीसरी वाली पर ज्यादा जोर

E20 Petrol: सोशल मीडिया पर इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की व्यापक आलोचना के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर बात की। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, मंत्री ने बायोफ्यूल की अधिक मात्रा में ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकार के कदम का बचाव किया। इसके अलावा, उन्होंने मध्य पूर्व संकट के कारण ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर भी बात की।

क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?

इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज कम होने के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गाड़ी मालिकों को माइलेज में थोड़ी कमी दिख सकती है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से गाड़ी की रफ्तार पकड़ने की क्षमता (एक्सेलरेशन) भी बेहतर होती है और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए रेसिंग कारों में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा, कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल से माइलेज कम हो जाएगा। लेकिन यह पहले से साबित है कि एथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी किया जाता है। इससे गाड़ी की एक्सीलरेशन (तेजी पकड़ने की क्षमता) बेहतर होती है और “नॉकिंग” भी कम होती है। हालांकि, उन्होंने माना कि माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन यह बहुत मामूली होती है और कई कारणों पर निर्भर करती है।

इंश्योरेंस क्लेम

E20 पेट्रोल के इस्तेमाल की वजह से इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की अफवाहों पर बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने फिर कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही ऐसी बातों को खारिज कर दिया है। मंत्री ने अपने बयान में कहा, “कोई कहता है, ‘अब आपका इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा’। इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है।”

ज्यादा इथेनॉल-ब्लेंड वाले ईंधन

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह भी कहा, “इलेक्ट्रिक वाहनों और बायोफ्यूल-ब्लेंडेड वाहनों के लिए गुंजाइश है, और अभी हम इथेनॉल ब्लेंडिंग के मामले में 20% के स्तर पर हैं। अगर हम 20% से 25% की ओर बढ़ते हैं, तो ऐसा सभी जरूरी टेस्ट पूरे होने के बाद ही होगा। उन्होंने कहा, हाइब्रिड वाहनों और CNG वाहनों के लिए भी काफी गुंजाइश है।”

बता दें कि सरकार ने पहले 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के लिए BIS स्टैंडर्ड्स की घोषणा की थी और साथ ही इन ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में छूट भी दी थी। हालांकि, बाद में पुरी के मंत्रालय ने साफ किया कि ये कदम पूरी तरह से रेगुलेटरी थे और इनका मतलब यह नहीं था कि ज्यादा इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन तुरंत लॉन्च किए जा रहे हैं।

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Govt clarifies stance on calling E20 programme an ‘experiment’ to Supreme Court

Fuel pump

The Office of the Attorney General for India has issued a clarification stating that media reports published on June 30 claiming the Government described the 20% Ethanol Blended Petrol (E20) programme as an “experiment” before the Supreme Court are incorrect. 

It was previously reported that while hearing Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL)’s appeal against a Karnataka High Court Order, the Attorney General told the court that the E20 programme was, quote unquote, an “experiment” and that its impact would be “clear by next year”. The Karnataka High Court’s order mandates that government-owned oil companies must honour their contractual agreements to purchase specific volumes of ethanol from a dedicated factory, preventing them from unfairly reducing orders. The Supreme Court, however, has put a hold on the order as oil companies argued that it could affect the nationwide E20 rollout policy proposed by the Central government.   

This comes at a time when the rollout of E20 has caused a lot of stir, especially among owners of older vehicles who have been experiencing drops in fuel efficiency. Moreover, it has been a year since the nationwide rollout of E20 blended petrol was implemented.

What did the clarification mention?

According to the statement, reports suggesting that the Attorney General told the Court the E20 programme was “still an ongoing experiment” or that “the impact of the policy would become clearer by next year” are “completely false” and do not reflect the submissions made on behalf of the Union of India. The Attorney General’s Office emphasised that “at no stage was any submission made that the Government’s Ethanol Blended Petrol (EBP) Programme or the E20 blending programme is an ‘experiment’.”

The Attorney General’s Office said that during the hearing, the submissions before the Supreme Court were confined to the litigation surrounding ethanol allocation to Dedicated Ethanol Plants. It informed the Court that similar writ petitions involving identical issues are pending before different High Courts and that Transfer Petitions are being filed to bring the matters before the Supreme Court for a common adjudication.

According to the clarification, the purpose of the proposed transfer is to avoid parallel proceedings and the possibility of conflicting judicial decisions, while enabling an expeditious resolution of the litigation so that ethanol supplies to Oil Marketing Companies for maintaining 20% ethanol blending with petrol under the national Ethanol Blended Petrol Programme are not affected.

The statement further said that, after considering these submissions, the Supreme Court held that the proposed Transfer Petitions should be filed and that status quo should continue with respect to ethanol allocation for the current Ethanol Supply Year 2025-26, insofar as the present matter is concerned.

With inputs from Mukul Yudhveer Singh