अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान? 1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, भूमिगत ‘मिसाइल सिटी’ अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने भूमिगत ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता। 2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। 3. हजारों ड्रोन का बेड़ा ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। 4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- जब तक PM हूं फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा:गाजा से सेना हटाने से भी इनकार, ट्रम्प का प्लान खारिज किया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान? 1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने अंडरग्राउंड ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता। 2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। 3. हजारों ड्रोन का बेड़ा ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। 4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- जब तक PM हूं फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा:गाजा से सेना हटाने से भी इनकार, ट्रम्प का प्लान खारिज किया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को गाजा से सेना हटाने के प्लान को ठुकरा दिया है। साथ ही नेतन्याहू ने ट्रम्प का गाजा प्लान भी खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, गाजा या वेस्ट बैंक में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि इजराइल हमास को दिखावटी तौर पर नहीं, बल्कि वास्तव में खत्म करना चाहता है। नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इजराइल ने अमेरिकी प्रस्ताव मान लिया है। ट्रम्प ने दावा किया था- इजराइल समझौते से खुश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। इसके तहत जैसे-जैसे हमास अपने हथियार छोड़ेगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से हटेगी। ट्रम्प ने नेतन्याहू से वॉशिंगटन में मुलाकात के बाद कहा था कि इजराइल इस समझौते से बहुत खुश है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी माना था कि योजना को लागू करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, कई इजराइली नेताओं ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर ने ट्रम्प के प्लान को बुरा बताते हुए कहा था कि अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया, तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा। इसके बाद नेतन्याहू ने रविवार को पहली बार खुले तौर पर योजना को नामंजूर किया है। उनके कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इजराइल ने ट्रम्प प्रशासन को अपनी चिंताओं के बारे में बता दिया है। नेतन्याहू बोले- अमेरिका से बातचीत जारी नेतन्याहू ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से कुछ इजराइल को मंजूर हैं और कुछ नहीं। ट्रम्प का बोर्ड ऑफ पीस युद्ध के बाद गाजा के लिए अपनी योजना आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हमास इस प्लान को मान चुका है, लेकिन इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि आतंकी संगठन इस प्रक्रिया का इस्तेमाल इजराइल की दोबारा सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कर रहा है। नेतन्याहू ने कहा कि हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, वह हमला कर सकता है, लेकिन उसे पता है कि ऐसा करने पर हम उसे कितना ताकतवर जवाब देंगे। हम इजराइल की सुरक्षा के लिए जरूरी काम कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हम अपने सबसे अच्छे दोस्तों के सामने भी अपनी बात पर कायम रहना जानते हैं। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा था। इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने का भी काम करेगा। बोर्ड ऑफ पीस चार्टर के मुताबिक, जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। गाजा में अब तक 75 हजार मौतें
रात की नौकरी और दिनभर की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन शब्बीर मिठाईवाला ने कई साल तक इसी चुनौतीपूर्ण जिंदगी को अपनी मेहनत का हिस्सा बनाया। UAE में बचपन बिताने के बाद पढ़ाई के लिए मुंबई आए शब्बीर के सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के लिए उन्होंने नौकरी करने का फैसला किया। एक कॉल सेंटर से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगे चलकर उनके करियर और जिंदगी की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। दिन में कॉलेज, पढ़ाई और रात की शिफ्ट के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की।
उस दौर में उनकी कमाई भले ही आज की तुलना में छोटी थी, लेकिन अनुभव और संघर्ष ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। कई साल बाद जब परिस्थितियों ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया, तब मुंबई में सीखी मेहनत और आत्मनिर्भरता उनके काम आई। उनकी कहानी अब संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल बन गई है।
18-19 घंटे की जिंदगी, पांच साल तक यही रूटीन
कमाई का इस्तेमाल किराए, खाने और पढ़ाई के खर्चों को संभालने में होता था, लेकिन इसके लिए उन्हें बेहद व्यस्त दिनचर्या अपनानी पड़ती थी। सुबह 11 बजे तक कॉलेज, दोपहर से शाम तक CA की कोचिंग और रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नौकरी। यानी कई बार दिन का करीब 18-19 घंटे हिस्सा पढ़ाई और काम में गुजरता था। शब्बीर के मुताबिक, करीब पांच साल तक उन्होंने इसी तरह काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शुरुआत से कुछ खड़ा करने का आत्मविश्वास दिया।
पिता की आंख की रोशनी गई, तो बदल गई जिंदगी की दिशा
CA की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके पिता की एक आंख की रोशनी चली गई है। उनके पिता 1984 से दुबई में पिक्चर-फ्रेम का कारोबार चला रहे थे, लेकिन 2013 में जब शब्बीर UAE लौटे, तब परिवार का बिजनेस गंभीर आर्थिक संकट में था। कारोबार में कैश-फ्लो की समस्या थी और करीब 10 लाख दिरहम का कर्ज जमा हो चुका था। दूसरी ओर, परिवार को शब्बीर के छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना था।
CA का सपना छोड़ा, परिवार का कारोबार चुना
शब्बीर के सामने बड़ा सवाल था जिस CA करियर के लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की, उसे आगे बढ़ाएं या परिवार के मुश्किल दौर में कारोबार संभालें? उन्होंने CA करियर छोड़कर परिवार के बिजनेस में लौटने का फैसला किया। मुंबई के वर्षों के संघर्ष ने उन्हें दोबारा शून्य से शुरुआत करने का हौसला दिया था। दुबई लौटने के बाद उन्होंने एक बार फिर करीब 19-20 घंटे काम करने वाली दिनचर्या अपना ली।
पिक्चर फ्रेम से आर्किटेक्चरल ग्लास तक बदला कारोबार
शब्बीर सिर्फ पुराने बिजनेस को बचाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कारोबार के लिए नया रास्ता तलाशना शुरू किया। पारंपरिक रूप से परिवार का काम पिक्चर फ्रेम बनाने पर केंद्रित था, लेकिन उन्होंने इसे एक नए बाजार की ओर ले जाने का फैसला किया। 2017 में उन्होंने Glass R Us Industries की शुरुआत की, जिसके जरिए कंपनी ने आर्किटेक्चरल ग्लास सॉल्यूशंस की दिशा में कदम बढ़ाया। कारोबार अब रेजिडेंशियल, कमर्शियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए ग्लास सॉल्यूशंस देने की ओर बढ़ गया।
करीब 7 साल लगे कर्ज से बाहर निकलने में
कारोबार को नई दिशा देने के बावजूद आर्थिक मुश्किलें तुरंत खत्म नहीं हुईं। शब्बीर के मुताबिक, परिवार को करीब छह से सात साल का समय लगा पूरा कर्ज चुकाने में। कर्ज खत्म होने के बाद उनका फोकस सिर्फ कारोबार चलाने पर नहीं रहा। उन्होंने इसे आगे बढ़ाने और एक लग्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया।
खुद की सैलरी भी रखी सीमित
करीब 10 लाख दिरहम के कर्ज का अनुभव शब्बीर की वित्तीय सोच पर भी गहरा असर डाल गया। अब वह कर्ज लेने और खर्च करने को लेकर काफी सावधानी बरतते हैं। उनके मुताबिक, कंपनी से वह हर महीने करीब 40,000 दिरहम यानी लगभग ₹10 लाख लेते हैं, जबकि वह इससे ज्यादा रकम भी निकाल सकते हैं। लेकिन वह अपने व्यक्तिगत खर्च और जरूरतों का हिसाब लगाकर सैलरी की सीमा तय करते हैं और बाकी पैसा कारोबार में वापस लगाते हैं।
अब लक्ष्य है इंटरनेशनल मार्केट और रोजाना $1 मिलियन
शब्बीर की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ पारिवारिक कारोबार को सफल बनाने तक सीमित नहीं है। वह अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य सुनकर शायद कई लोग चौंक जाएं। शब्बीर का कहना है कि वह भविष्य में हर दिन 1 मिलियन डॉलर कमाने का लक्ष्य रखते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक बड़ी रकम का सपना नहीं, बल्कि सोच को बड़े स्तर पर ले जाने का लक्ष्य है। मुंबई की रात की शिफ्ट से शुरू हुई उनकी कहानी अब दुबई से ग्लोबल बिजनेस बनाने की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुकी है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।
मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया
Android vs Apple’s iOS
जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।
Facebook vs Yahoo
मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।
Google vs Yahoo
गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।
Netflix vs Blockbuster
ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने ‘मेल के जरिए डीवीडी’ सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।
Nintendo vs Atari
मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।
LPG Cylinder Price Today: रविवार यानी 9 अगस्त 2026 को देशभर में LPG गैस सिलेंडर के दाम को लेकर लोगों की नजरें बनी हुई हैं। महीने की शुरुआत में तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की थी। जबकि आम परिवारों के लिए इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया। यानी रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले घरेलू ग्राहकों को इस महीने फिलहाल पुराने रेट पर ही सिलेंडर मिल रहा है।
घरेलू LPG सिलेंडर का आज क्या रेट है?
14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में जून में हुई बढ़ोतरी के बाद अगस्त में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी नई दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर ₹942 पर ही मिल रहा है। इसमें कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।
दूसरी तरफ हाल ही में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत घटकर ₹2,738 हो गई थी। देश के दूसरे शहरों में LPG की कीमतें स्थानीय टैक्स, लागत और संबंधित तेल कंपनी के लागू रेट के कारण अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी दूसरे शहर के लिए स्थानीय ताजा रेट देखना जरूरी है।
प्रमुख महानगरों में घरेलू LPG के रेट इस प्रकार हैं:-
नई दिल्ली: ₹942
मुंबई: ₹941.50
कोलकाता: ₹967.50
चेन्नई: ₹958.50
(ये 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर के प्रमुख शहरों में लागू रेट हैं।)
कमर्शियल LPG सिलेंडर ने दी बड़ी राहत
जहां घरेलू LPG के दाम स्थिर हैं। वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में अगस्त की शुरुआत में बड़ी कटौती की गई। 1 अगस्त 2026 से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में कई शहरों में ₹200 से ज्यादा तक की कमी हुई। यह कटौती होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और दूसरे व्यावसायिक ग्राहकों के लिए राहत लेकर आई है।
प्रमुख शहरों में 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर के रेट:-
नई दिल्ली: करीब ₹2,730-₹2,738
मुंबई: ₹2,885.50
कोलकाता: करीब ₹3,072
चेन्नई: करीब ₹3,100
(नोट- शहर और तेल कंपनी के हिसाब से कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है।)
आखिर घरेलू गैस के दाम क्यों नहीं घटे?
इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि कमर्शियल सिलेंडर सस्ता हुआ। लेकिन घरेलू LPG की कीमत में राहत क्यों नहीं मिली। घरेलू LPG की कीमतों में आखिरी बड़ी बढ़ोतरी जून में हुई थी, जब दिल्ली में 14.2 किलो के सिलेंडर पर ₹29 बढ़ाए गए थे। इसके बाद अगस्त में घरेलू दरों को स्थिर रखा गया है। LPG की कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल और गैस की कीमतों, आयात लागत तथा घरेलू कीमतों जैसे कई कारणों से प्रभावित होता है।
आगे बढ़ सकता है रसोई गैस का खर्च?
LPG ग्राहकों के लिए आने वाले दिनों में एक और खबर महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार देश की रणनीतिक ईंधन भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए LPG और प्राकृतिक गैस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के अनुसार, प्रस्तावित LPG लेवी ₹1.29 प्रति किलो हो सकती है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी के स्तर पर नहीं है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई नई बढ़ोतरी लागू नहीं हुई है। लेकिन आगे सरकार के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।
आज का सीधा हिसाब
14.2 किलो घरेलू LPG: दिल्ली ₹942, मुंबई ₹941.50, कोलकाता ₹967.50, चेन्नई ₹958.50।
19 किलो कमर्शियल LPG: अगस्त में बड़ी कटौती के बाद दिल्ली में करीब ₹2,738 और मुंबई में ₹2,885.50 के आसपास।
इसलिए अगर आप घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने वाले हैं, तो आज के लिए दिल्ली में ₹942 ही मौजूदा घरेलू LPG रेट है। वहीं, होटल-रेस्टोरेंट और दूसरे व्यावसायिक ग्राहकों को 19 किलो वाले सिलेंडर में अगस्त की कटौती का फायदा मिल रहा है।
12 महीने में घरेलू LPG कितनी महंगी हुई?
अगर पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है। सितंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच घरेलू LPG की कीमत में कुल ₹89 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानी भले ही अभी घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर है। लेकिन एक साल की अवधि में ग्राहकों पर LPG का खर्च बढ़ा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू LPG की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मार्च 2026 में ₹60 की रही।
कमर्शियल LPG में भी 12 महीने में बदलाव
कमर्शियल LPG की बात करें तो पिछले 12 महीनों में इसकी कीमत में कुल मिलाकर ₹1 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में कमर्शियल LPG की सबसे बड़ी बढ़ोतरी ₹993 रही थी। इसके बाद अगस्त 2026 में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई और कमर्शियल सिलेंडर ₹192 तक सस्ता हुआ।
क्यों शहरों में अलग-अलग होते हैं दाम?
तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) हर महीने की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर सऊदी सीपी (Saudi Contract Price) और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमतों के आधार पर एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। स्थानीय राज्य स्तरीय करों (VAT) और परिवहन लागत की वजह से हर राज्य और शहर में अंतिम खुदरा मूल्य में अंतर देखा जाता है।
ये भी पढ़ें- पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये के बीच हुआ ‘मुस्लिम NATO’ डील, तो जेडी वेंस ने लगाया PM मोदी को फोन, क्या हुई बात?
Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।
ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।
आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव
ये रहे 09 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।
मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।
कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।
चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।
गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।
नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।
बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।
भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।
चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।
हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।
जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।
लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।
पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।
तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।
पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?
मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।
किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?
- कच्चे तेल की कीमतें:
पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।
- डॉलर के मुकाबले रुपया:
भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।
- सरकारी टैक्स और शुल्क:
केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।
- रिफाइनिंग की लागत:
कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।
- मांग और आपूर्ति का संतुलन:
बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।
कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?
अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:
Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।
BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।
HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।
Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।
गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव
WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।
भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना
इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।
Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे
WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।
फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड
डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।
NEET UG Counselling 2026: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 के लिए पंजीकरण रीसेट का विकल्प एक्टिवेट कर दिया है। यह सुविधा उन उम्मीदवारों की मदद के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने पंजीकरण प्रक्रिया पूरा करते समय गलती से गलत जानकारी डाल दी हो या गलत ऑप्शन चुन लिए हों।
आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, योग्य उम्मीदवार अनलॉक/री-सेट रजिस्ट्रेशन विकल्प का इस्तेमाल करके अपनी पंजीकरण डिटेल्स ठीक कर सकते हैं। यह सुधार विंडो 12 अगस्त, 2026 को सुबह 11 बजे तक उपलब्ध रहेगी। कैंडिडेट्स को यह भी सलाह दी गई है कि वे काउंसलिंग से जुड़ी ताजा घोषणा और अपडेट के लिए नियमित एमसीसी वेबसाइट देखते रहें।
नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1: जरूरी तारीखें
रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट: 5 अगस्त से 12 अगस्त, 2026 (दोपहर 03:00 बजे तक)
पेमेंट की सुविधा बंद होने की तारीख: 12 अगस्त, 2026 (शाम 06:00 बजे)
चॉइस फिलिंग: 6 अगस्त से 13 अगस्त, 2026 (सुबह 11:00 बजे तक)
चॉइस लॉकिंग: 11 अगस्त (शाम 4:00 बजे) से 13 अगस्त (सुबह 11:00 बजे)
सीट अलॉटमेंट प्रोसेसिंग: 13 अगस्त से 16 अगस्त, 2026
राउंड 1 रिजल्ट: 17 अगस्त, 2026
रिपोर्टिंग/जॉइनिंग: 18 अगस्त से 22 अगस्त, 2026
इंस्टीट्यूट द्वारा जॉइन किए गए कैंडिडेट का वेरिफिकेशन: 23 अगस्त, 2026
रजिस्ट्रेशन रीसेट सुविधा का इस्तेमाल कौन कर सकता है?
- रजिस्ट्रेशन रीसेट ऑप्शन उन कैंडिडेट्स के लिए है जिन्होंने:
- रजिस्टर करते समय गलत जानकारी दी हो।
- रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान गलत ऑप्शन चुने हों।
- राउंड 1 की डेडलाइन से पहले अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल्स ठीक करनी हों।
एमसीसी ने सभी उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी है कि वे आगे के किसी भी नोटिफिकेशन, बदले हुए शेड्यूल या काउंसलिंग से जुड़ी घोषणाओं के लिए रेगुलर ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहें। जिन कैंडिडेट्स को अपने राउंड 1 रजिस्ट्रेशन में सुधार चाहिए, उन्हें 12 अगस्त, 2026 को सुबह 11 बजे से पहले रीसेट सुविधा का इस्तेमाल करना चाहिए।
Silver Price Today: अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में चांदी की कीमतों के लगातार ऊपर-नीचे होने से भारत पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। दरअसल, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सुबह तक चांदी का वायदा भाव 0.15% बढ़कर यानी 338 रुपये तेजी के साथ 2,31,804 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,31,466 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी 63.80 डॉलर प्रति औंस हो गई।
बुलियन्स के अनुसार, चांदी की कीमत 2,32,620 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक, चांदी 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है। उधर दिल्ली के सर्राफा बाजार की बात करें, तो यहां पर चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) है। चूंकि शनिवार और रविवार को बाजार बंद है, इसलिए दोनों दिन यही भाव मान्य रहेगा।
अब अगर आप ऐसे में सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको अपने शहर के ताजा भाव जानने होंगे:
भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव (10 ग्राम, 100 ग्राम, प्रति किलो)
| शहर | 10 ग्राम चांदी | 100 ग्राम चांदी | 1 किलो चांदी |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| मुंबई | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| कोलकाता | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| चेन्नई | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| पटना | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| लखनऊ | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| मेरठ | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| अयोध्या | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| कानपुर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| गाजियाबाद | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| नोएडा | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| गुरुग्राम | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| चंडीगढ़ | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| जयपुर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| लुधियाना | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| गुवाहाटी | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| इंदौर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| अहमदाबाद | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| वडोदरा | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| सूरत | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| पुणे | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| नागपुर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| नासिक | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| बैंगलोर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| भुवनेश्वर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| रायपुर | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
| हैदराबाद | ₹2,400 | ₹24,000 | ₹2,40,000 |
पिछले दिन कैसा रहा चांदी का भाव?
कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते विदेशी बाजारों में चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार बढ़त के बाद चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर स्थिर रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत 4 फीसदी से ज्यादा उछलकर 64.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
पिछले दिन क्या रहा चांदी का वायदा भाव
वैश्विक बाजारों में मजबूत रुख के बीच घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी की कीमतों में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबारियों की ओर से नए सौदे बढ़ाए जाने से चांदी वायदा 2.43 फीसदी उछल गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 5,496 रुपये बढ़कर 2,31,332 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 2.43 फीसदी की बढ़त है।
इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत मजबूत रही। न्यूयॉर्क में चांदी 3.44 फीसदी की तेजी के साथ 61.66 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
बाजार एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में चांदी की मजबूत मांग और तेजी के संकेतों को देखते हुए कारोबारियों ने नए सौदों की खरीदारी बढ़ाई, जिससे वायदा कीमतों को सपोर्ट मिला।
यह भी पढ़ें: Gold Price Today: सोने में तेजी बरकरार, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ा भाव; वैश्विक कीमत में इस हफ्ते 7% से ज्यादा उछाल

